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  • मेघालय और ओडिशा की तीन खाद्य कंपनियों पर कार्रवाई, निरीक्षण में स्वच्छता मानकों और खाद्य सुरक्षा नियमों की गंभीर अनदेखी

    मेघालय और ओडिशा की तीन खाद्य कंपनियों पर कार्रवाई, निरीक्षण में स्वच्छता मानकों और खाद्य सुरक्षा नियमों की गंभीर अनदेखी

    नई दिल्ली ।भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तीन खाद्य व्यवसाय संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। नियामक ने मेघालय की ए.बी. एंटरप्राइज तथा ओडिशा की जाइका ऑर्गेनिक्स और नारायणी फूड्स एंड बेवरेजेज के खाद्य कारोबार लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिए हैं।

    नियामक के अनुसार इन कंपनियों के खिलाफ निरीक्षण के दौरान खाद्य सुरक्षा नियमों के गंभीर उल्लंघन सामने आए। इनमें भ्रामक स्वास्थ्य संबंधी दावे, खराब स्वच्छता व्यवस्था, अनुचित भंडारण, कीट नियंत्रण की कमियां और खाद्य सुरक्षा प्रबंधन से जुड़ी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन नहीं करना शामिल है।

    ए.बी. एंटरप्राइज के मामले में उत्पादों के लेबल और प्रचार सामग्री पर स्वास्थ्य लाभ से जुड़े ऐसे दावे पाए गए, जिन्हें खाद्य सुरक्षा एवं मानक विज्ञापन और दावे संबंधी नियमों का उल्लंघन माना गया। जांच में यह भी पाया गया कि कंपनी आवश्यक विनिर्माण स्वीकृति के बिना खाद्य उत्पादों का कारोबार कर रही थी।

    कंपनी को सुधार नोटिस जारी करने के साथ अपना पक्ष रखने के लिए व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर भी दिया गया था। हालांकि, नियामक के मुताबिक कंपनी की ओर से कोई जवाब या स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। इसके बाद खाद्य कारोबार से जुड़ी सभी गतिविधियों को अगले आदेश तक रोकने का निर्देश दिया गया।

    ओडिशा स्थित जाइका ऑर्गेनिक्स के संयंत्र में निरीक्षण के दौरान स्वच्छता और सैनिटेशन से संबंधित कई गंभीर कमियां सामने आईं। खाद्य पदार्थों के निर्माण, पैकेजिंग और भंडारण की परिस्थितियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया।

    निरीक्षण में खराब हाउसकीपिंग, कीट नियंत्रण की समस्याएं, जंग लगे उपकरण, कच्चे माल और तैयार उत्पादों का अनुचित भंडारण तथा उत्पादन प्रक्रिया में आवश्यक नियंत्रण की कमी पाई गई। कुछ उत्पादों और सामग्रियों पर निर्माण तिथि, बैच नंबर और उपयोग की अंतिम तिथि जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां भी अंकित नहीं थीं।

    अनुपालन मूल्यांकन में जाइका ऑर्गेनिक्स को 90 में से केवल 10 अंक मिले। 12 प्रतिशत के इस स्कोर के आधार पर कंपनी को गैर-अनुपालन श्रेणी में रखा गया। नियामक ने कहा कि ऐसी परिस्थितियां खाद्य पदार्थों में भौतिक, रासायनिक और जैविक जोखिम पैदा कर सकती हैं।

    नारायणी फूड्स एंड बेवरेजेज के उत्पादन परिसर में भी स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा प्रबंधन व्यवस्था में गंभीर कमियां पाई गईं। निरीक्षण के दौरान प्रसंस्करण और भंडारण क्षेत्रों में मक्खियां, मकड़ी के जाले, कीटों के प्रवेश के रास्ते और जल स्रोतों के आसपास शैवाल की मौजूदगी दर्ज की गई।

    इसके अलावा जंग लगे उपकरण, खाद्य सामग्री के पास कचरे का जमाव और तैयार उत्पादों के अनुचित भंडारण जैसी कमियां भी सामने आईं। कंपनी के रिकॉर्ड में खाद्य सुरक्षा प्रशिक्षण और नियंत्रण नमूनों से संबंधित आवश्यक दस्तावेजों का भी अभाव पाया गया।

    नारायणी फूड्स एंड बेवरेजेज को अनुपालन मूल्यांकन में 80 में से 20 अंक मिले, यानी कंपनी का स्कोर 25 प्रतिशत रहा। इसे भी गैर-अनुपालन श्रेणी में रखा गया और लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।

    खाद्य नियामक ने स्पष्ट किया कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले खाद्य कारोबारियों के खिलाफ निरीक्षण और नियामकीय कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

  • सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सोनम ने किया आत्मसमर्पण, अब तेज होगी राजा रघुवंशी हत्याकांड की सुनवाई

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सोनम ने किया आत्मसमर्पण, अब तेज होगी राजा रघुवंशी हत्याकांड की सुनवाई


    इंदौर । इंदौर के चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। मामले की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद मेघालय के शिलॉन्ग स्थित अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। कोर्ट में पेशी के बाद उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने 23 जुलाई को उसकी जमानत रद्द करते हुए तीन सप्ताह के भीतर संबंधित अदालत में सरेंडर करने का आदेश दिया था। निर्धारित समय सीमा पूरी होने से पहले ही सोनम ने अदालत पहुंचकर आत्मसमर्पण कर दिया।

    सोनम के सरेंडर के बाद मृतक राजा रघुवंशी के भाई विपिन रघुवंशी ने इसे न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने मेघालय सरकार और जांच एजेंसियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद और मजबूत हुई है।

    इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा था कि हाईकोर्ट और ट्रायल कोर्ट ने केवल तकनीकी आधार पर जमानत देकर गलती की थी। अदालत ने माना कि गिरफ्तारी के दौरान कारणों की जानकारी दिए जाने में यदि कोई सीमित कमी रही भी हो तो केवल उसी आधार पर आरोपी को जमानत देना उचित नहीं माना जा सकता।

    सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि संविधान के अनुच्छेद 22 के तहत गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी के कारण बताना आवश्यक है लेकिन इस मामले में यह नहीं कहा जा सकता कि आरोपी को पूरी तरह से जानकारी नहीं दी गई थी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी के आधार बिल्कुल न बताना और कुछ जानकारियों में तकनीकी कमी होना दोनों अलग-अलग परिस्थितियां हैं। इसलिए केवल प्रक्रिया संबंधी आपत्तियों के आधार पर जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।

    सर्वोच्च अदालत ने यह भी कहा कि सोनम ने मजिस्ट्रेट के समक्ष गिरफ्तारी के कारणों और संबंधित दस्तावेज प्राप्त होने की पुष्टि की थी। यदि जांच प्रक्रिया में किसी प्रकार की कमी भी हो तो कानून जांच एजेंसी को दोबारा कार्रवाई करने का अधिकार देता है। ऐसे में तकनीकी पहलुओं के आधार पर जमानत देना न्यायोचित नहीं माना जा सकता।

    जस्टिस एमएम सुंदरेशन और जस्टिस पीबी वरेले की पीठ ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि मामले की सुनवाई शुरू हो चुकी है और आरोपी की मेरिट के आधार पर जमानत याचिकाएं पहले ही खारिज हो चुकी हैं। इस चरण में आरोपी का जेल से बाहर रहना ट्रायल को प्रभावित कर सकता है। इसी कारण अदालत ने हाईकोर्ट का जमानत आदेश रद्द करते हुए सोनम को तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था।

    सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय पुलिस को यह भी निर्देश दिया है कि राजा रघुवंशी हत्याकांड की सुनवाई छह महीने के भीतर पूरी करने का प्रयास किया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित अवधि में ट्रायल पूरा नहीं होता है तो आरोपी कानून के तहत दोबारा जमानत के लिए आवेदन कर सकती है।

    सोनम के आत्मसमर्पण के साथ अब इस बहुचर्चित हत्याकांड की कानूनी प्रक्रिया एक नए चरण में पहुंच गई है। जांच एजेंसियों और पीड़ित परिवार की नजर अब इस बात पर टिकी है कि अदालत में सुनवाई तय समय सीमा के भीतर पूरी हो और मामले में न्यायिक प्रक्रिया जल्द अपने अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचे।

  • सोनम रघुवंशी को फिर जाना होगा जेल, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- गंभीर आरोपों में जमानत का आधार नहीं बन सकती तकनीकी गलती

    सोनम रघुवंशी को फिर जाना होगा जेल, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- गंभीर आरोपों में जमानत का आधार नहीं बन सकती तकनीकी गलती

    नई दिल्ली । राजा रघुवंशी हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द कर दी है। सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट किया कि हत्या जैसे गंभीर अपराध में केवल गिरफ्तारी मेमो में हुई तकनीकी त्रुटि के आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती। अदालत ने सोनम को तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। इस फैसले के बाद उसे दोबारा न्यायिक हिरासत में जाना होगा।

    सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि गिरफ्तारी के समय आरोपी को यह पूरी जानकारी थी कि उसे किस मामले में हिरासत में लिया जा रहा है। यदि गिरफ्तारी मेमो में किसी धारा का उल्लेख टाइपिंग या मानवीय भूल के कारण गलत हुआ है, तो इसे संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन का आधार मानकर जमानत नहीं दी जा सकती। अदालत ने कहा कि मामले की सुनवाई अभी महत्वपूर्ण चरण में है और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित किए बिना आगे बढ़ना आवश्यक है।

    हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि मुकदमे की सुनवाई असामान्य रूप से लंबी खिंचती है और छह महीने के भीतर पूरी नहीं होती, तो आरोपी को परिस्थितियों के आधार पर दोबारा जमानत के लिए आवेदन करने का अधिकार रहेगा। फिलहाल उपलब्ध तथ्यों और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए जमानत जारी रखना उचित नहीं माना गया।

    यह मामला वर्ष 2025 में सामने आया था, जब इंदौर के कारोबारी राजा रघुवंशी अपनी शादी के कुछ दिनों बाद पत्नी सोनम के साथ मेघालय घूमने गए थे। यात्रा के दौरान राजा अचानक लापता हो गए और बाद में उनका शव गहरी खाई से बरामद हुआ। जांच एजेंसियों ने विस्तृत जांच के बाद सोनम, उसके कथित प्रेमी राज कुशवाहा तथा अन्य आरोपियों के खिलाफ हत्या की साजिश और हत्या का मामला दर्ज किया। इसके बाद सोनम को उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया गया था।

    इससे पहले निचली अदालत ने गिरफ्तारी मेमो में भारतीय न्याय संहिता की गलत धारा दर्ज होने को आधार मानते हुए सोनम को सशर्त जमानत दे दी थी। बाद में उच्च न्यायालय ने भी उस आदेश को बरकरार रखा। राज्य सरकार ने इस फैसले को सर्वोच्च अदालत में चुनौती देते हुए कहा कि आरोपी को गिरफ्तारी के कारणों की पूरी जानकारी थी और रिकॉर्ड में हुई मानवीय त्रुटि को जमानत का आधार नहीं बनाया जा सकता।

    सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से यह भी दलील दी गई कि आरोपी लंबे समय तक फरार रही और उसे पूरे घटनाक्रम की जानकारी थी। अदालत ने इन तर्कों पर सहमति जताते हुए कहा कि मामले के तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए आरोपी को जमानत पर बनाए रखना न्यायहित में नहीं होगा। बचाव पक्ष ने यह दलील दी कि सोनम सभी शर्तों का पालन कर रही है और दोबारा जेल भेजने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया।

    सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों ने समाज में बढ़ते वैवाहिक अपराधों पर भी चिंता व्यक्त की। अदालत ने कहा कि नई पीढ़ी के पास जानकारी के अनेक साधन हैं, लेकिन मानसिक और भावनात्मक चुनौतियों से निपटने की क्षमता कमजोर होती दिखाई दे रही है। न्यायाधीशों ने परिवारों की भूमिका पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि संवाद और भावनात्मक सहयोग की कमी कई बार गंभीर सामाजिक समस्याओं को जन्म देती है। अदालत की इन टिप्पणियों के साथ यह मामला अब दोबारा निचली अदालत में नियमित सुनवाई के लिए आगे बढ़ेगा।

  • सोनम रघुवंशी की जमानत पर बढ़ा इंतजार, मेघालय सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 21 जुलाई को

    सोनम रघुवंशी की जमानत पर बढ़ा इंतजार, मेघालय सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 21 जुलाई को

    इंदौर के चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में एक बार फिर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ने से पहले इंतजार बढ़ गया है। सोनम रघुवंशी को मिली जमानत के खिलाफ मेघालय सरकार द्वारा दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तावित सुनवाई फिलहाल टल गई है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी। इस कारण मामले से जुड़े सभी पक्षों की निगाहें अब अगली निर्धारित तारीख पर टिक गई हैं।

    मेघालय सरकार ने अपनी याचिका में मेघालय हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसके तहत सोनम रघुवंशी को जमानत प्रदान की गई थी। सरकार का पक्ष है कि मामले की गंभीरता और जांच से जुड़े तथ्यों को देखते हुए जमानत आदेश पर पुनर्विचार किया जाना आवश्यक है। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट से जमानत रद्द करने की मांग की गई है।

    सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई पहले भी कई बार सूचीबद्ध हो चुकी है, लेकिन विभिन्न कारणों से अंतिम निर्णय नहीं हो सका। अब सुनवाई आगे बढ़ने के बाद 21 जुलाई की तारीख तय की गई है। इस बीच, हाईकोर्ट द्वारा दी गई जमानत से संबंधित कानूनी स्थिति यथावत बनी हुई है। अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई के बाद ही सामने आएगा।

    राजा रघुवंशी हत्याकांड देशभर में उस समय चर्चा का विषय बना था, जब इंदौर निवासी राजा रघुवंशी की शादी के कुछ समय बाद मेघालय यात्रा के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। बाद में उनका शव बरामद हुआ और जांच एजेंसियों ने इसे सुनियोजित हत्या का मामला बताया। जांच के दौरान पुलिस ने उनकी पत्नी सोनम रघुवंशी सहित कई अन्य लोगों को आरोपी बनाया और विभिन्न आपराधिक धाराओं के तहत मामला दर्ज किया।

    जांच एजेंसियों के अनुसार, मामले में हत्या और आपराधिक साजिश सहित कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जांच पूरी होने के बाद आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र भी प्रस्तुत किया गया। इसी दौरान सोनम रघुवंशी ने जमानत के लिए आवेदन किया था, जिसे मेघालय हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया। इसके बाद राज्य सरकार ने इस आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी।

    मामले में लगातार हो रही न्यायिक कार्यवाही पर पीड़ित परिवार की भी नजर बनी हुई है। परिवार का कहना है कि उन्हें न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा है और वे चाहते हैं कि सभी तथ्यों के आधार पर उचित निर्णय लिया जाए। दूसरी ओर, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई इस मामले की आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

    फिलहाल इस चर्चित मामले में अंतिम निर्णय आना बाकी है। 21 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट मेघालय सरकार की याचिका पर दोनों पक्षों की दलीलें सुन सकता है। इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हाईकोर्ट द्वारा दी गई जमानत बरकरार रहेगी या उस पर कोई नया आदेश जारी किया जाएगा। तब तक मामले की न्यायिक प्रक्रिया पूर्व निर्धारित कानूनी व्यवस्था के अनुसार जारी रहेगी।

  • राजा रघुवंशी हत्याकांड में नया मोड़, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर उठाए सवाल, सोनम की जमानत पर फैसला टला

    राजा रघुवंशी हत्याकांड में नया मोड़, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर उठाए सवाल, सोनम की जमानत पर फैसला टला


    इंदौर । इंदौर के चर्चित राजा रघुवंशी हनीमून मर्डर केस में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान अहम कानूनी सवाल सामने आया। अदालत ने पूछा कि क्या गिरफ्तारी मेमो में हुई केवल टाइपिंग की गलती के आधार पर किसी आरोपी की गिरफ्तारी को अवैध मान लिया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल सोनम रघुवंशी की जमानत पर कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया और मामले पर आगे विचार करने के संकेत दिए।

    जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की अवकाशकालीन पीठ ने कहा कि इस मुद्दे पर अलग-अलग न्यायिक फैसले मौजूद हैं और कानून की स्पष्ट व्याख्या आवश्यक है। अदालत ने संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर इस कानूनी प्रश्न को बड़ी बेंच के पास भी भेजा जा सकता है, ताकि भविष्य के मामलों के लिए स्पष्ट दिशा तय हो सके।

    सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय पुलिस को निर्देश दिया कि गिरफ्तारी के समय आरोपी को दिए गए मूल दस्तावेजों की स्पष्ट और पढ़ने योग्य प्रतियां अदालत में पेश की जाएं। अदालत यह जानना चाहती है कि गिरफ्तारी के समय सोनम रघुवंशी को किन धाराओं और किन आधारों की जानकारी दी गई थी।

    मेघालय सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हाईकोर्ट के फैसले का विरोध करते हुए कहा कि हत्या जैसे गंभीर मामले में केवल गिरफ्तारी मेमो में टाइपिंग की गलती के आधार पर जमानत देना कानून की गलत व्याख्या होगी। उन्होंने दलील दी कि आरोपी को गिरफ्तारी के समय सभी जरूरी जानकारी दी गई थी और गलत धारा का उल्लेख केवल लिपिकीय त्रुटि थी, जिससे पूरी गिरफ्तारी अवैध नहीं हो जाती।

    दूसरी ओर, सोनम रघुवंशी ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने जवाबी हलफनामे में खुद को निर्दोष बताया है। उसने दावा किया कि उसे झूठे मामले में फंसाया गया है और उसने जांच से लेकर न्यायिक प्रक्रिया तक हर स्तर पर पूरा सहयोग किया है।

    इससे पहले मेघालय हाईकोर्ट ने 29 जून को सोनम को जमानत देते हुए कहा था कि गिरफ्तारी मेमो में भारतीय न्याय संहिता की हत्या से संबंधित धारा 103(1) के स्थान पर गलती से धारा 403 दर्ज कर दी गई थी। हाईकोर्ट ने इसे जांच एजेंसी की गंभीर चूक माना और कहा कि आरोपी को गिरफ्तारी के वास्तविक आधार की सही जानकारी नहीं दी गई।

    अब सुप्रीम कोर्ट सबसे पहले यह तय करेगा कि क्या ऐसी लिपिकीय त्रुटि गिरफ्तारी को अवैध बनाने के लिए पर्याप्त आधार हो सकती है। यदि सर्वोच्च अदालत हाईकोर्ट की व्याख्या से सहमत नहीं होती है तो सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द होने की संभावना भी बन सकती है।

    इस बीच हाल ही में राजा रघुवंशी के बड़े भाई विपिन रघुवंशी ने आरोप लगाया था कि सोनम जमानत की शर्तों का उल्लंघन कर नेपाल भाग गई है और मामले की सीबीआई जांच की मांग की थी। हालांकि सोनम ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वह शिलॉन्ग में ही मौजूद है और अदालत तथा जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रही है।

    गौरतलब है कि मई 2025 में इंदौर के कारोबारी राजा रघुवंशी की मेघालय में हनीमून के दौरान हत्या कर दी गई थी। जांच में पुलिस ने आरोप लगाया कि हत्या की साजिश उनकी पत्नी सोनम रघुवंशी और उसके कथित सहयोगियों ने रची थी। यह मामला देशभर में चर्चा का विषय बना था और फिलहाल इसकी सुनवाई विभिन्न अदालतों में जारी है।

  • हनीमून मर्डर केस में नया मोड़, सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द कराने सुप्रीम कोर्ट पहुंची मेघालय पुलिस, शुक्रवार को होगी अहम सुनवाई

    हनीमून मर्डर केस में नया मोड़, सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द कराने सुप्रीम कोर्ट पहुंची मेघालय पुलिस, शुक्रवार को होगी अहम सुनवाई


    नई दिल्ली । चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड एक बार फिर कानूनी बहस के केंद्र में आ गया है। इस मामले में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत के खिलाफ मेघालय पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। पुलिस ने शीर्ष अदालत से निचली अदालत द्वारा दिए गए जमानत आदेश पर रोक लगाने का अनुरोध किया है। पुलिस का कहना है कि आरोपी के फरार होने की आशंका को देखते हुए तत्काल हस्तक्षेप आवश्यक है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करने का निर्देश दिया है।

    यह मामला वर्ष 2025 में सामने आया था, जब इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी अपनी पत्नी सोनम रघुवंशी के साथ विवाह के कुछ दिनों बाद हनीमून मनाने मेघालय पहुंचे थे। यात्रा के दौरान चेरापूंजी क्षेत्र में राजा अचानक लापता हो गए थे। व्यापक तलाश के बाद उनका शव एक गहरी खाई से बरामद हुआ, जिसके बाद मामले ने हत्या का रूप ले लिया और जांच एजेंसियों ने विस्तृत पड़ताल शुरू की।

    जांच के दौरान पुलिस ने सोनम रघुवंशी, उसके कथित प्रेमी राज कुशवाहा तथा अन्य सहयोगियों के खिलाफ हत्या और आपराधिक साजिश से जुड़े आरोप दर्ज किए। जांच में जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने विस्तृत चार्जशीट अदालत में प्रस्तुत की और दावा किया कि वारदात पूर्व नियोजित थी तथा इसे आर्थिक लाभ और निजी कारणों को ध्यान में रखकर अंजाम दिया गया था। बाद में सोनम को उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया गया।

    हालांकि, मामले में एक तकनीकी त्रुटि ने कानूनी प्रक्रिया को नया मोड़ दे दिया। गिरफ्तारी के दौरान तैयार किए गए अरेस्ट मेमो में हत्या से संबंधित लागू धारा के स्थान पर गलत धारा दर्ज कर दी गई। इतना ही नहीं, दस्तावेज में कुछ अन्य तथ्यात्मक त्रुटियां भी सामने आईं। अदालत ने माना कि गिरफ्तारी के समय आरोपी को कानून के अनुरूप सही जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई, जिससे संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ। इसी आधार पर निचली अदालत ने सोनम रघुवंशी को सशर्त जमानत प्रदान कर दी।

    इसके बाद राज्य सरकार ने इस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी, लेकिन वहां भी राहत नहीं मिल सकी। उच्च न्यायालय ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि गिरफ्तारी प्रक्रिया में बरती गई लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि विधिक प्रक्रिया का पालन प्रत्येक आपराधिक मामले में अनिवार्य है और जांच एजेंसियों से अपेक्षित सावधानी बरतना आवश्यक है।

    अब मेघालय पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में कहा है कि गिरफ्तारी मेमो में दर्ज त्रुटियां जानबूझकर नहीं की गई थीं, बल्कि यह प्रशासनिक और टाइपिंग संबंधी चूक का परिणाम थीं। पुलिस का कहना है कि गंभीर अपराध से जुड़े मामले में केवल तकनीकी भूल के आधार पर आरोपी को राहत देना न्यायहित में उचित नहीं माना जा सकता। याचिका में यह भी कहा गया है कि ऐसे मामलों में साक्ष्यों, अपराध की प्रकृति और जांच की गंभीरता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

    सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर अब सभी की निगाहें टिकी हैं। शीर्ष अदालत यह तय करेगी कि जमानत आदेश पर अंतरिम रोक लगाई जाए या नहीं तथा गिरफ्तारी प्रक्रिया में हुई तकनीकी त्रुटियों का इस मामले पर कितना कानूनी प्रभाव पड़ता है। इस निर्णय का असर न केवल राजा रघुवंशी हत्याकांड की आगे की सुनवाई पर पड़ेगा, बल्कि भविष्य में गंभीर आपराधिक मामलों में गिरफ्तारी प्रक्रिया और कानूनी औपचारिकताओं की व्याख्या के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • मेघायल में फिर भड़की हिंसा… पुलिस फायरिंग में दो लोगों की मौत, आर्मी तैनात

    मेघायल में फिर भड़की हिंसा… पुलिस फायरिंग में दो लोगों की मौत, आर्मी तैनात


    शिलॉन्ग।
    पूर्वोत्तर राज्य मेघालय (North Eastern State Meghalaya) के पश्चिम गारो पर्वतीय जिले में मंगलवार तड़के गारो पर्वतीय स्वायत्त जिला परिषद (GHDC) चुनाव नामांकन प्रक्रिया को लेकर जारी विवाद और तनाव के बीच हिंसक भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों द्वारा की गई गोलीबारी में दो लोगों की मौत हो गई। इससे इलाके में और तनाव पसर गया। हालात को देखते हुए न सिर्फ वहां कर्फ्यू लगाया गया है बल्कि सेना को भी तैनात किया गया है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

    जिले के पुलिस अधीक्षक अब्राहम टी. संगमा (Superintendent of Police Abraham T. Sangma) ने बताया कि यह घटना चिबिनांग इलाके में हुई जहां जनजातीय और गैर-जनजातीय समूहों के बीच झड़प हो गई थी। संगमा ने कहा, “मारे गए दोनों व्यक्ति चिविनांग के निवासी थे। GHDC चुनावों को लेकर जनजातीय और गैर-जनजातीय समूहों के बीच झड़प हुई थी और यह गोलीबारी तब हुई जब हम जमा भीड़ को तितर-बितर कर रहे थे।” उन्होंने कहा कि इलाके में स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है। तनाव को और बढ़ने से रोकने के लिए जिला प्रशासन ने मंगलवार को पूरे पश्चिम गारो पर्वतीय जिले में दिन भर के लिए कर्फ्यू लगा दिया है।


    वॉयस कॉल और एसएमएस सेवाएं प्रभावित नहीं

    एसपी ने कहा, “हमने अतिरिक्त सुरक्षा बलों की मांग की है और वे आ रहे हैं।” यह घटना मेघालय सरकार द्वारा जिले में 10 मार्च से 48 घंटे के लिए मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित करने के आदेश के कुछ घंटों बाद हुई है। नामांकन प्रक्रिया के दौरान कानून-व्यवस्था को खतरे में डालने वाली भीड़ जुटाने, हमलों और सोशल मीडिया पर गलत सूचनाओं के प्रसार की खबरों के बाद यह कदम उठाया गया। हालांकि, वॉयस कॉल और एसएमएस सेवाएं प्रभावित नहीं हुई हैं।


    सेना से ‘फ्लैग मार्च’ करने का अनुरोध

    जिले के उपायुक्त विभोर अग्रवाल ने मंगलवार को पूर्वी कमान के 101 एरिया के कमांडिंग ऑफिसर को पत्र लिखकर जिले के मैदानी क्षेत्रों के गांवों में सेना से ‘फ्लैग मार्च’ करने का अनुरोध किया है। उपायुक्त ने पत्र में कहा, “सशस्त्र बलों की उपस्थिति से जनता को आश्वस्त करने, किसी भी अन्य अप्रिय घटना को रोकने और निवासियों के बीच विश्वास बहाल करने में बहुत मदद मिलेगी।” जीएचएडीसी चुनावों के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया 16 मार्च तक जारी रहेगी जिसे देखते हुए नामांकन केंद्रों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है।


    नामांकन के दौरान हमला

    यह अशांति तब शुरू हुई प्रदर्शनकारियों ने 10 अप्रैल को होने वाले जीएचएडीसी चुनावों के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल करने सोमवार को तुरा में उपायुक्त कार्यालय पहुंचे फूलबाड़ी के पूर्व विधायक एस्तामुर मोमिन पर हमला कर दिया था। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि इस चुनाव में गैर-जनजातीय लोग भाग न लें। जीएचएडीसी की कार्यकारी समिति ने 17 फरवरी को एक प्रस्ताव पारित किया था जिसके तहत उम्मीदवारों के लिए नामांकन दाखिल करते समय वैध अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य कर दिया गया था।

  • मध्यप्रदेश के राजा रघुवंशी मर्डर केस में बड़ा अपडेट कोर्ट ने बिल्डिंग मालिक और चौकीदार को किया दोषमुक्त

    मध्यप्रदेश के राजा रघुवंशी मर्डर केस में बड़ा अपडेट कोर्ट ने बिल्डिंग मालिक और चौकीदार को किया दोषमुक्त


    इंदौर /मध्यप्रदेश के इंदौर का राजा रघुवंशी हत्याकांड लंबे समय से सुर्खियों में रहा है। अब इस मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है। इंदौर की कोर्ट ने बिल्डिंग के मालिक लोकेंद्र और चौकीदार बलवीर को दोषमुक्त कर दिया है। दोनों को पहले राजा की हत्या के बाद सबूत मिटाने के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार किया था। लेकिन विस्तृत जांच में उनके और हत्या के बीच कोई सीधा संबंध नहीं पाया गया।

    मामला तब शुरू हुआ जब राजा रघुवंशी और उनकी पत्नी सोनम रघुवंशी शादी के बाद हनीमून के लिए शिलॉन्ग, मेघालय गए थे। वहां राजा की लाश मिली थी। इस हत्याकांड में राजा की पत्नी सोनम ही मास्टरमाइंड निकली। शिलॉन्ग पुलिस ने सोनम के अलावा राज कुशवाह आकाश राजपूत आनंद और विशाल को भी गिरफ्तार किया था।

    सोनम रघुवंशी हत्या के बाद इंदौर आई थी और एक किराए के फ्लैट में रुकी थी। उस फ्लैट की बिल्डिंग का मालिक लोकेंद्र सिंह तोमर था और चौकीदार बलवीर अहिरवार कार्यरत थे। शुरुआती जांच में पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार किया और आरोप लगाया कि उन्होंने हत्या के बाद कुछ सबूत मिटाने की कोशिश की थी।

    लेकिन कोर्ट में पेश की गई दूसरी चार्जशीट और विस्तृत जांच के बाद साफ हुआ कि बिल्डिंग मालिक और चौकीदार का हत्याकांड से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। इस फैसले के बाद दोनों को कोर्ट ने दोषमुक्त कर दिया।राजा रघुवंशी मर्डर केस अब भी सुर्खियों में है क्योंकि इस मामले में प्रमुख आरोपी सोनम रघुवंशी पर केस चल रहा है। इस मामले की जांच और कोर्ट की कार्रवाई पूरे देश की निगाहों में है।

  • मेघालय, मणिपुर और त्रिपुरा के स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्री मोहन यादव की शुभकामनाएं, देश की ताकत बताया पूर्वोत्तर का विकास

    मेघालय, मणिपुर और त्रिपुरा के स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्री मोहन यादव की शुभकामनाएं, देश की ताकत बताया पूर्वोत्तर का विकास


    मध्य प्रदेश। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मेघालय, मणिपुर और त्रिपुरा के स्थापना दिवस के अवसर पर इन राज्यों के नागरिकों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर भारत के ये राज्य न केवल प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध हैं, बल्कि देश की एकता और विविधता का भी सशक्त प्रतीक हैं। उन्होंने कामना की कि आने वाले वर्षों में ये राज्य विकास के नए आयाम स्थापित करें और यहां के नागरिकों के जीवन में सुख, समृद्धि और उल्लास बना रहे।

    मेघालय का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह राज्य भारत का गौरव है। पर्वतमालाओं से घिरा, हरियाली और प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर मेघालय अपनी समृद्ध जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के लिए जाना जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मेघालय की सांस्कृतिक विविधता और पर्यावरण के प्रति जागरूक जीवनशैली देश के अन्य हिस्सों के लिए प्रेरणास्रोत है।मणिपुर को लेकर उन्होंने कहा कि यह राज्य भारत के गहने के रूप में प्रसिद्ध है। मणिपुर की कला, नृत्य और सांस्कृतिक विरासत ने इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि मणिपुर की पहचान उसकी अद्वितीय संस्कृति, खेल प्रतिभा और सामाजिक समरसता से जुड़ी हुई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य शांति, विकास और सांस्कृतिक संरक्षण के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ता रहेगा।

    त्रिपुरा के संदर्भ में डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह राज्य माँ त्रिपुरसुंदरी की कृपा से अभिसिंचित है और अपने नैसर्गिक सौंदर्य के लिए सुविख्यात है। उन्होंने त्रिपुरा की सांस्कृतिक परंपराओं ऐतिहासिक धरोहरों और जनजीवन की सरलता को सराहा। मुख्यमंत्री के अनुसार, त्रिपुरा ने सीमित संसाधनों के बावजूद विकास और सामाजिक संतुलन का उदाहरण प्रस्तुत किया है।मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था का भी उल्लेख किया और कहा कि बाबा महाकाल से यही मंगलकामना है कि प्रकृति की गोद में बसे ये तीनों राज्य निरंतर प्रगति करें। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र और राज्यों के समन्वय से पूर्वोत्तर भारत विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है और आने वाला समय इन राज्यों के लिए और अधिक अवसर लेकर आएगा।

    राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में मुख्यमंत्री के इस संदेश को राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक सम्मान का प्रतीक माना जा रहा है। यह संदेश ऐसे समय में आया है, जब देश के अलग-अलग हिस्सों में क्षेत्रीय पहचान के साथ-साथ राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।स्थापना दिवस के अवसर पर मेघालय, मणिपुर और त्रिपुरा में सांस्कृतिक कार्यक्रमों, सरकारी आयोजनों और जनउत्सव की तैयारियां की गई हैं। इन आयोजनों के माध्यम से राज्यों की विकास यात्रा, सांस्कृतिक धरोहर और भविष्य की योजनाओं को जनता के सामने रखा जा रहा है।

  • राजा रघुवंशी मर्डर केसशिलांग कोर्ट से सोनम रघुवंशी को झटका जमानत याचिका खारिज

    राजा रघुवंशी मर्डर केसशिलांग कोर्ट से सोनम रघुवंशी को झटका जमानत याचिका खारिज


    इंदौर । राजा रघुवंशी हत्याकांड की मास्टरमाइंड पत्नी सोनम रघुवंशी को मेघालय के शिलांग कोर्ट से झटका लगा है। कोर्ट ने सोनम की जमानत याचिका रद्द कर दी। सोनम पर इस साल मई महीने में मेघालय में हनीमून के दौरान अपने पति और राजा रघुवंशी की हत्या कराने का आरोप है। लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार मेघायलय पुलिस द्वारा इस मामले में दायर की गई 700 से ज्यादा पन्नों की चार्जशीट में दावा किया गया है कि राजा की हत्या सोनम और उसके कथित प्रेमी राज सिंह कुशवाहा ने मिलकर प्लान की थी।
    चार्जशीट में भाड़े पर बुलाए गए तीन कथित हत्यारों आकाश सिंह राजपूत विशाल सिंह चौहान और आनंद कुर्मी के नाम भी हैं। इस मामले में एक एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज ने आरोपियों पर हत्या के आरोप भी तय किए हैं। यह अपराध उस वक्त सामने आया था जब मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में 12 मई को शादी करने वाला यह जोड़ा 23 मई को मेघालय में हनीमून के दौरान लापता हो गया था। उन्हें आखिरी बार नोंगियाट में एक होमस्टे से चेक आउट करते हुए देखा गया था।
    कुछ दिनों बाद उनके द्वारा किराए पर ली गई स्कूटी सोहरारिम के पास लावारिस हालत में मिली थी। फिर उनके लापता होने के लगभग 10 दिन बाद 2 जून को राजा का शव पूर्वी खासी हिल्स में वेसावडोंग फॉल्स के पास एक गहरी खाई में मिला था। राजा की पत्नी सोनम जो 8 जून तक लापता थी उत्तर प्रदेश के वाराणसी-गाजीपुर मेन रोड पर एक ढाबे के पास मिली थी। मेघालय पुलिस ने शुक्रवार को बताया कि सोनम को 21 साल के राज कुशवाहा के साथ मिलकर अपने पति की हत्या में मुख्य आरोपियों में से एक माना जा रहा है।0