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  • पेपर लीक पर केंद्र का बड़ा दांव: नंदन नीलेकणि की अगुआई में 6 सदस्यीय हाई-पावर टास्क फोर्स, पूर्व ISRO प्रमुख और पूर्व IB निदेशक भी शामिल

    पेपर लीक पर केंद्र का बड़ा दांव: नंदन नीलेकणि की अगुआई में 6 सदस्यीय हाई-पावर टास्क फोर्स, पूर्व ISRO प्रमुख और पूर्व IB निदेशक भी शामिल


    नई दिल्ली।
    देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर उठे सवालों के बीच केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में छह सदस्यीय हाई-पावर टास्क फोर्स का गठन किया है। इस समिति का उद्देश्य नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) समेत देश की परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत बनाना है।

    समिति में अंतरिक्ष, साइबर सुरक्षा, खुफिया तंत्र, शिक्षा प्रशासन और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों के अनुभवी विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। सरकार का लक्ष्य प्रश्नपत्रों की तैयारी, परिवहन, परीक्षा संचालन और मूल्यांकन प्रक्रिया में सुरक्षा की बहुस्तरीय व्यवस्था विकसित करना है।

    समिति में शामिल प्रमुख सदस्य

    नंदन नीलेकणि (अध्यक्ष)

    आधार परियोजना के प्रमुख वास्तुकार और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणि समिति का नेतृत्व करेंगे। वे डिजिटल ढांचे को अधिक सुरक्षित और आधुनिक बनाने की रणनीति तैयार करेंगे।

    एस. सोमनाथ (पूर्व अध्यक्ष, इसरो)

    चंद्रयान-3 मिशन के नेतृत्व के लिए चर्चित रहे पूर्व इसरो प्रमुख एस. सोमनाथ परीक्षा प्रणाली को वैज्ञानिक और त्रुटिरहित बनाने के लिए तकनीकी सुझाव देंगे। उनका फोकस प्रक्रियाओं को अधिक विश्वसनीय और जोखिम-मुक्त बनाने पर रहेगा।

    तपन डेका (पूर्व निदेशक, इंटेलिजेंस ब्यूरो)

    आंतरिक सुरक्षा और खुफिया मामलों के विशेषज्ञ तपन डेका प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों की निगरानी और संगठित पेपर लीक नेटवर्क की पहचान एवं रोकथाम से जुड़े सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने में योगदान देंगे।

    प्रो. वी. कामाकोटी (निदेशक, IIT मद्रास)

    साइबर सुरक्षा और स्वदेशी प्रोसेसर तकनीक के विशेषज्ञ प्रो. कामाकोटी परीक्षा से जुड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म, सॉफ्टवेयर और डाटा सुरक्षा को मजबूत करने के उपाय सुझाएंगे। साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित सुरक्षा तंत्र विकसित करने पर भी उनका ध्यान रहेगा।

    अनीता करवाल (पूर्व केंद्रीय शिक्षा सचिव)

    पूर्व केंद्रीय शिक्षा सचिव और सीबीएसई की पूर्व अध्यक्ष अनीता करवाल प्रशासनिक सुधार, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए परीक्षा संचालन से जुड़े नियमों और प्रक्रियाओं की समीक्षा करेंगी।

    अमृत लाल मीणा (लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ)

    वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी अमृत लाल मीणा प्रश्नपत्रों की छपाई, सुरक्षित परिवहन और वितरण प्रणाली को आधुनिक तकनीक के माध्यम से अधिक सुरक्षित बनाने की रणनीति तैयार करेंगे। जीपीएस ट्रैकिंग और डिजिटल सुरक्षा उपायों को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया जा सकता है।

    परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार पर फोकस

    सरकार का मानना है कि यह टास्क फोर्स परीक्षा प्रणाली के प्रत्येक चरण की समीक्षा कर सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए ठोस सिफारिशें देगी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर एनटीए और अन्य राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसियों के कामकाज में संरचनात्मक बदलाव किए जाने की संभावना है, ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

  • राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा तकनीकी समिति में मध्यप्रदेश को मिला महत्वपूर्ण प्रतिनिधित्व : ऊर्जा मंत्री तोमर

    राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा तकनीकी समिति में मध्यप्रदेश को मिला महत्वपूर्ण प्रतिनिधित्व : ऊर्जा मंत्री तोमर


    भोपाल । ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि मध्यप्रदेश ने विद्युत क्षेत्र की साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। नेशनल क्रिटिकल इन्फॉर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोटेक्शन सेंटर (एनसीआईआईपीसी) तथा क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (क्यूसीआई) द्वारा विद्युत क्षेत्र की महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना (क्रिटिकल इन्फॉर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर-सीआईआई) के संरक्षण एवं सुरक्षा मूल्यांकन के लिए अनुरूपता मूल्यांकन ढांचा (कॉनफॉर्मिटी असेसमेंट फ्रेमवर्क-सीएएफ) विकसित करने के लिये राष्ट्रीय स्तर की तकनीकी समिति का गठन किया गया है।

    ऊर्जा मंत्री तोमर ने बताया कि मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) के स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर (एसएलडीसी), जबलपुर में पदस्थ अतिरिक्त मुख्य अभियंता एवं मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारी राजेश कुमार गुप्ता को इस प्रतिष्ठित तकनीकी समिति का सदस्य नामित किया गया है। देश के सभी भार प्रेषण केंद्रों तथा राज्य स्तरीय विद्युत संस्थाओं में से चयनित होने वाले वे एकमात्र विशेषज्ञ अधिकारी हैं। उन्होंने कहा कि यह समिति अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ऐसी रूपरेखा तैयार करेगी, जिससे विद्युत क्षेत्र सहित अन्य महत्वपूर्ण अवसंरचनाओं की साइबर सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सके तथा बढ़ते साइबर खतरों एवं चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।

    विद्युत मंत्रालय के दिशा निर्देशों के तहत विकसित हुआ है प्रदेश का एसएलडीसी
    राजेश कुमार गुप्ता वर्तमान में एसएलडीसी, जबलपुर में मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। उनके नेतृत्व में एमपी-एसएलडीसी की साइबर सुरक्षा व्यवस्था को भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप सुदृढ़ एवं प्रभावी रूप से विकसित किया गया है। इसके परिणामस्वरूप एमपी-एसएलडीसी की साइबर सुरक्षा प्रणाली को देश के अग्रणी मॉडलों में स्थान प्राप्त हुआ है, जो महत्वपूर्ण विद्युत अवसंरचना की सुरक्षा के प्रति संगठन की प्रतिबद्धता और तकनीकी उत्कृष्टता का परिचायक है।

    गुप्ता विद्युत मंत्रालय द्वारा गठित उस राष्ट्रीय कार्य समूह के भी सदस्य हैं, जो देश के लोड डिस्पैच केंद्रों के लिए आईटी-ओटी (इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी-ऑपरेशनल टेक्नोलॉजी) अभिसरण आर्किटेक्चर की रूपरेखा तैयार कर रहा है। इस तकनीकी समिति में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आईआईटी मद्रास), रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) तथा अन्य अग्रणी संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हैं।

    ऊर्जा मंत्री ने दी बधाई
    ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने राजेश कुमार गुप्ता को बधाई देते हुए कहा कि इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय समिति में उनका चयन मध्यप्रदेश की तकनीकी दक्षता, साइबर सुरक्षा क्षमता तथा विद्युत क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य संस्कृति की राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि गुप्ता का अनुभव और विशेषज्ञता देश की महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचनाओं की सुरक्षा को और अधिक सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देगी।