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  • 12 क्रेन और 250 से ज्यादा कर्मचारियों-मजदूरों की मदद से उतरेगा रिएक्टर, 308 पहियों वाले ट्रेलर पर लदी है मशीन

    12 क्रेन और 250 से ज्यादा कर्मचारियों-मजदूरों की मदद से उतरेगा रिएक्टर, 308 पहियों वाले ट्रेलर पर लदी है मशीन

    लखीमपुर। बेल्जियम से भारत लाया गया विशालकाय रिएक्टर अब अपने अंतिम पड़ाव लखीमपुर खीरी पहुंच गया है। कुंभी स्थित बलरामपुर चीनी मिल परिसर में इसकी स्थापना की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। 308 पहियों वाले विशाल हाइड्रोलिक ट्रेलर पर लदी इस मशीन को देखने के लिए रास्ते भर लोगों की भीड़ उमड़ रही है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आखिर इतने भारी-भरकम रिएक्टर को ट्रेलर से उतारकर निर्धारित स्थान पर कैसे स्थापित किया जाएगा।

    रिएक्टर को उतारने के लिए चीनी मिल प्रबंधन ने विशेष इंतजाम किए हैं। इसके लिए 12 क्रेनों की मदद ली जाएगी। साथ ही कर्मचारियों और मजदूरों की बड़ी टीम तैनात रहेगी। जिस मशीन को भारत लाने के लिए कई फुट ओवरब्रिज हटाने पड़े और नए रास्ते तैयार करने पड़े, उसे उतारने और स्थापित करने की प्रक्रिया भी बेहद चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है।

    बेल्जियम से आया करीब 110 फुट लंबा और 26 फुट चौड़ा यह रिएक्टर बुधवार सुबह खीरी जिले में पहुंचा। बायोप्लास्टिक प्लांट के लिए महत्वपूर्ण यह मशीन करीब 160 दिनों के सफर और तीन राज्यों के दर्जनों जिलों से गुजरने के बाद अपने गंतव्य तक पहुंची है। इसे ओडिशा के पारादीप बंदरगाह से 15 मई को रवाना किया गया था। वहां से यह ओडिशा, झारखंड और बिहार होते हुए चंदौली के रास्ते उत्तर प्रदेश पहुंचा और फिर विभिन्न जिलों से गुजरकर लखीमपुर खीरी आया।

    12 क्रेन मिलकर उठाएंगी भारी-भरकम रिएक्टर

    रिएक्टर को ट्रेलर से उतारने और निर्धारित स्थान पर स्थापित करने के लिए चीनी मिल प्रबंधन ने विशेष व्यवस्था की है। इस काम में 12 क्रेनें लगाई जाएंगी। इनके संचालन और पूरी प्रक्रिया में 60 कर्मचारियों तथा 150 मजदूरों की मदद ली जाएगी। इसके अलावा करीब 40 मजदूर ट्रेलर के साथ चल रहे हैं। इस तरह उतारने और परिवहन से जुड़ी गतिविधियों में बड़ी संख्या में कर्मचारी-मजदूर जुटे हुए हैं।

    प्रबंधन के मुताबिक, रिएक्टर को उतारने की प्रक्रिया के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं। अनुमान है कि 23 या 24 अक्टूबर को ट्रेलर चीनी मिल परिसर में दाखिल हो जाएगा। इसके बाद मशीन को उतारने और स्थापित करने का काम आगे बढ़ेगा।

    ट्रेलर के पहियों की संख्या को लेकर भी रही चर्चा

    रिएक्टर के परिवहन के दौरान ट्रेलर के पहियों की संख्या को लेकर अलग-अलग सूचनाएं सामने आती रहीं। शुरुआत में 308 पहियों वाले ट्रेलर की चर्चा हुई। बाद में खबरें आईं कि झारखंड तक पहुंचने के दौरान पहियों की संख्या 308 थी, जिसके बाद करीब 50 पहिए कम कर दिए गए। मोड़ पर ट्रेलर को घुमाने में आ रही दिक्कतों के चलते पहियों की संख्या घटाए जाने की बात भी सामने आई, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई।

    इन चर्चाओं के बावजूद विशालकाय ट्रेलर और उस पर लदे रिएक्टर को देखने के लिए लोगों का उत्साह बना रहा। सोशल मीडिया पर भी इसकी तस्वीरें और वीडियो खूब वायरल हुए।

    बुधवार को धौरहरा तहसील के सिसैया चौराहे से जिले में प्रवेश करने के बाद ट्रेलर को राष्ट्रीय राजमार्ग-730ए पर छाउछ में खड़ा किया गया। यहां से इसे गुरुवार सुबह कुंभी चीनी मिल पहुंचाया जाना था।

    ट्रेलर के साथ चल रही है विशेष टीम

    रिएक्टर को सुरक्षित गंतव्य तक पहुंचाने के लिए तीन सहायक ट्रक, तीन एस्कॉर्ट वाहन और करीब 40 कर्मचारियों की टीम साथ चल रही है। रास्ते में बिजली के लटकते तारों को उठाने और पेड़ों की डालियां हटाने के लिए कर्मचारियों को जरूरी उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं।

    सुरक्षित परिवहन सुनिश्चित करने के लिए यातायात पुलिस, सदर कोतवाली पुलिस, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और बिजली विभाग की टीमों ने आपसी समन्वय के साथ काम किया। रिएक्टर के आकार और ट्रेलर की लंबाई-चौड़ाई को देखते हुए रास्ते में कई तरह की व्यवस्थाएं करनी पड़ीं।

    बलरामपुर शुगर यूनिट, कुंभी के महाप्रबंधक डॉ. सुनील कुमार यादव ने बताया कि यह मशीन ‘साइक्लाइजेशन रिएक्टर’ है। इसमें लैक्टिक एसिड से पॉलीलैक्टिक एसिड (पीएलए) तैयार किया जाएगा। पीएलए का इस्तेमाल बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक बनाने में होता है।

    3,080 करोड़ रुपये से बन रहा देश का पहला औद्योगिक बायोप्लास्टिक प्लांट

    लखीमपुर खीरी जिले की कुंभी चीनी मिल में देश का पहला औद्योगिक स्तर का पॉलीलैक्टिक एसिड (पीएलए) यानी बायोप्लास्टिक प्लांट स्थापित करने की दिशा में तेजी से काम चल रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर करीब 3,080 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है।

    इसी परियोजना के लिए बेल्जियम से रिएक्टर मंगाया गया था, जो पहले ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पहुंचा और फिर सड़क मार्ग से लखीमपुर खीरी लाया गया। मिल अधिकारियों के मुताबिक, मशीन के पहुंचने का लंबे समय से इंतजार था। इसके पहुंचने के बाद स्थापना संबंधी काम शुरू किया जाएगा।

    अधिकारियों ने बताया कि रिएक्टर को जल्द स्थापित करने की योजना है और नवंबर में प्लांट चालू करने का लक्ष्य रखा गया है। प्लांट शुरू होने से बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक के उत्पादन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकेगा।

  • ओम बिरला ने विशेषाधिकार समिति के 15 सदस्य किए मनोनीत, रविशंकर प्रसाद होंगे अध्यक्ष

    ओम बिरला ने विशेषाधिकार समिति के 15 सदस्य किए मनोनीत, रविशंकर प्रसाद होंगे अध्यक्ष

    नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संसद की विशेषाधिकार समिति के पुनर्गठन की घोषणा करते हुए मंगलवार को 15 सदस्यों को मनोनीत किया। वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद को समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
    लोकसभा सचिवालय की ओर से जारी बुलेटिन के मुताबिक, समिति में विभिन्न दलों के सांसदों को प्रतिनिधित्व दिया गया है।

    समिति में शामिल सदस्य
    भारतीय जनता पार्टी से:
    बृजमोहन अग्रवाल
    रामवीर सिंह बिधूड़ी
    संगीता कुमारी सिंह देव
    जगदंबिका पाल
    त्रिवेंद्र सिंह रावत
    जगदीश शेट्टर

    कांग्रेस से:
    तारिक अनवर
    मनीष तिवारी
    मणिकम टैगोर

    अन्य दलों से:
    समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव
    द्रमुक (DMK) के टी.आर. बालू
    तृणमूल कांग्रेस के कल्याण बनर्जी
    शिवसेना के श्रीरंग अप्पा बार्ने
    शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के अरविंद सावंत
    क्या है विशेषाधिकार समिति की भूमिका?

    विशेषाधिकार समिति संसद की एक स्थायी समिति होती है, जो सदन या उसके सदस्यों के विशेषाधिकार हनन और अवमानना से जुड़े मामलों की जांच करती है।

    समिति उन मामलों की पड़ताल करती है जिन्हें लोकसभा अध्यक्ष द्वारा संदर्भित किया जाता है।

    जांच के बाद यह समिति अपनी सिफारिशें सदन को सौंपती है।

    संरचना के अनुसार, लोकसभा में अध्यक्ष द्वारा 15 सदस्यों को नामित किया जाता है, जबकि राज्यसभा में सभापति द्वारा 10 सदस्य मनोनीत किए जाते हैं।

    बहुदलीय प्रतिनिधित्व
    आधिकारिक सूचना के अनुसार, समिति में भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना, समाजवादी पार्टी और द्रमुक सहित कई दलों को प्रतिनिधित्व दिया गया है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि विशेषाधिकार से जुड़े मामलों की जांच बहुदलीय सहभागिता के साथ की जाए।

    इस नियुक्ति के साथ ही नई समिति औपचारिक रूप से अपने कार्यों का निर्वहन शुरू करेगी।