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  • CJP प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद जेपी नड्डा की अपील, धरना समाप्त करने का अनुरोध; प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन जारी रखने का किया ऐलान

    CJP प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद जेपी नड्डा की अपील, धरना समाप्त करने का अनुरोध; प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन जारी रखने का किया ऐलान

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर जारी CJP के धरना-प्रदर्शन के बीच सोमवार को सरकार और आंदोलनकारी प्रतिनिधियों के बीच औपचारिक बातचीत का दौर शुरू हुआ। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने CJP के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद कहा कि सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच सकारात्मक माहौल में चर्चा हुई है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से धरना समाप्त कर सामान्य स्थिति बहाल करने में प्रशासन का सहयोग करने की अपील भी की।

    जेपी नड्डा ने बताया कि प्रदर्शनकारियों की ओर से सरकार के साथ बातचीत का प्रस्ताव मिलने के बाद चर्चा शुरू हुई। उनके अनुसार, प्रतिनिधिमंडल के साथ पहले मौखिक स्तर पर विस्तृत बातचीत हुई और बाद में उन्हें एक लिखित ज्ञापन भी सौंपा गया। उन्होंने कहा कि सरकार संवाद के माध्यम से विषय को समझने और समाधान की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास कर रही है। साथ ही उन्होंने सभी प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन समाप्त करने का अनुरोध किया।

    हालांकि, CJP की ओर से इस मुलाकात को लेकर अलग रुख सामने आया। संगठन के प्रतिनिधियों का कहना है कि बैठक में उनकी प्रमुख मांगों पर कोई स्पष्ट या ठोस आश्वासन नहीं दिया गया। प्रतिनिधिमंडल के अनुसार उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे या उन्हें पद से हटाने सहित कई महत्वपूर्ण मांगें सरकार के समक्ष रखीं। उनका कहना है कि संबंधित मुद्दों पर उचित स्तर पर चर्चा का भरोसा जरूर मिला है, लेकिन जब तक ठोस कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।

    प्रदर्शनकारियों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा संबंधी कथित अनियमितताओं को लेकर अपनी चिंताओं का उल्लेख किया गया है। संगठन का कहना है कि वह पिछले कई सप्ताह से इन मुद्दों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहा है। ज्ञापन में विभिन्न मांगों के साथ परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है।

    संगठन ने अपने ज्ञापन में कुछ अन्य मांगें भी सरकार के समक्ष रखी हैं। इनमें आंदोलन से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से संबंधित मुद्दों, केंद्रीय शिक्षा मंत्री के खिलाफ कार्रवाई तथा नीट-2026 पेपर लीक प्रकरण से प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिए जाने जैसी मांगें शामिल हैं। इसके अतिरिक्त प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण आंदोलन के दौरान पुलिस की ओर से बल प्रयोग किया गया, जिसे रोकने की भी मांग की गई है।

    सरकार और आंदोलनकारियों के बीच शुरू हुआ यह संवाद ऐसे समय में हुआ है जब संसद का मानसून सत्र भी चल रहा है और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक बहस तेज है। विपक्ष लगातार इस विषय को संसद में उठा रहा है, जबकि सरकार बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की कोशिश कर रही है। फिलहाल दोनों पक्षों के रुख में अंतर बना हुआ है। सरकार प्रदर्शन समाप्त करने की अपील कर रही है, जबकि आंदोलनकारी अपनी मांगों पर ठोस निर्णय आने तक धरना जारी रखने की बात कह रहे हैं। आने वाले दिनों में आगे की बातचीत और संभावित निर्णय पर सभी की निगाहें बनी रहेंगी।

  • रेलवे में बदलती व्यवस्थाओं के खिलाफ कुलियों का बड़ा अभियान, निजीकरण पर उठे सवाल, संसद में मांगों के समर्थन में पहुंचेगा प्रतिनिधिमंडल

    रेलवे में बदलती व्यवस्थाओं के खिलाफ कुलियों का बड़ा अभियान, निजीकरण पर उठे सवाल, संसद में मांगों के समर्थन में पहुंचेगा प्रतिनिधिमंडल


    नई दिल्ली ।
    रेलवे में निजीकरण और बदलती परिचालन व्यवस्थाओं को लेकर राष्ट्रीय कुली मोर्चा ने अपनी चिंता सार्वजनिक रूप से व्यक्त की है। संगठन ने घोषणा की है कि संसद के आगामी मानसून सत्र के दौरान देशभर के कुली प्रतिनिधियों का एक प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली पहुंचकर केंद्र सरकार और विभिन्न सांसदों से मुलाकात करेगा। इस दौरान संगठन अपनी प्रमुख मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपेगा और कुलियों के रोजगार, सामाजिक सुरक्षा तथा रेलवे व्यवस्था में उनकी भूमिका को लेकर ठोस कदम उठाने की मांग करेगा।

    राष्ट्रीय कुली मोर्चा के अनुसार हाल ही में आयोजित वर्चुअल बैठक में यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया। बैठक में विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और रेलवे स्टेशनों पर बदलती व्यवस्थाओं के कारण कुलियों की आजीविका पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर चिंता व्यक्त की। संगठन का कहना है कि रेलवे परिसरों में सामान ढुलाई से जुड़ी कई सेवाएं अब निजी एजेंसियों और नई व्यवस्थाओं के माध्यम से संचालित की जा रही हैं, जिससे पारंपरिक रूप से कार्यरत अधिकृत कुलियों के सामने रोजगार का संकट उत्पन्न हो रहा है।

    मोर्चा का कहना है कि रेलवे स्टेशनों पर बैटरी कार, ट्रॉली व्यवस्था और डिजिटल प्लेटफॉर्म आधारित सेवाओं के विस्तार से कुलियों के काम के अवसर लगातार प्रभावित हो रहे हैं। संगठन ने मांग की है कि ऐसी सेवाओं के संचालन में कुलियों की सहकारी समितियों को प्राथमिकता दी जाए, ताकि रोजगार के अवसर सुरक्षित रह सकें और पारंपरिक श्रमिकों की आय प्रभावित न हो। उनका तर्क है कि यदि इन व्यवस्थाओं का संचालन कुलियों के माध्यम से किया जाए तो आधुनिक सुविधाओं और रोजगार सुरक्षा के बीच संतुलन बनाया जा सकता है।

    संगठन ने यह भी मांग उठाई है कि रेलवे में कार्यरत अधिकृत कुलियों के लिए स्थायी सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था विकसित की जाए। इसके अंतर्गत आर्थिक सुरक्षा, कल्याणकारी योजनाओं का लाभ और भविष्य की रोजगार संबंधी स्पष्ट नीति तैयार करने की आवश्यकता बताई गई है। प्रतिनिधियों का कहना है कि वर्षों से रेलवे यात्रियों की सेवा करने वाले कुलियों के हितों की रक्षा के लिए दीर्घकालिक नीति बनाई जानी चाहिए।

    बैठक में यह मुद्दा भी उठाया गया कि कुलियों की जीवन परिस्थितियों और सरकारी नीतियों के प्रभाव का अध्ययन करने के लिए पूर्व में कराई गई जांच रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है। संगठन ने मांग की है कि इस रिपोर्ट को संसद के मानसून सत्र के दौरान सदन के पटल पर रखा जाए, ताकि उसके निष्कर्षों के आधार पर आवश्यक नीतिगत निर्णय लिए जा सकें और कुलियों से जुड़े मुद्दों पर पारदर्शी चर्चा हो सके।

    राष्ट्रीय कुली मोर्चा ने अपने एक पदाधिकारी के खिलाफ कथित शिकायत के आधार पर हुई कार्रवाई पर भी आपत्ति जताई है। संगठन का कहना है कि इस विषय को भी रेल मंत्रालय के समक्ष उठाया जाएगा और निष्पक्ष जांच की मांग की जाएगी। मोर्चा का कहना है कि प्रतिनिधिमंडल सरकार के साथ संवाद के माध्यम से सभी मुद्दों का समाधान चाहता है।

    अब सभी की नजर संसद के मानसून सत्र पर रहेगी, जहां कुली प्रतिनिधिमंडल अपनी मांगों को सरकार और जनप्रतिनिधियों के समक्ष विस्तार से रखेगा। दूसरी ओर, इन मांगों पर सरकार की प्रतिक्रिया और संभावित नीतिगत निर्णयों का इंतजार किया जा रहा है।

  • बैतूल में आदिवासी भूमि अधिकारों को लेकर जयस का प्रदर्शन, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

    बैतूल में आदिवासी भूमि अधिकारों को लेकर जयस का प्रदर्शन, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन


    बैतूल । बैतूल जिले में आदिवासी भूमि अधिकारों को लेकर जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन ने जोरदार प्रदर्शन किया। संगठन के कार्यकर्ताओं और आदिवासी समाज के लोगों ने रानी दुर्गावती ऑडिटोरियम में सभा आयोजित की जिसमें संविधान की पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों को प्रभावी रूप से लागू करने की मांग की गई।

    सभा के बाद कार्यकर्ताओं ने रैली निकालकर बैतूल कलेक्ट्रेट का रुख किया। वहां उन्होंने राज्यपाल के नाम ज्ञापन कलेक्टर को सौंपा। ज्ञापन में मुख्य रूप से आदिवासी भूमि संरक्षण जमीन हड़पने के खिलाफ सुरक्षा और स्थानीय समुदायों के अधिकारों की रक्षा को सुनिश्चित करने की मांग की गई।

    कार्यकर्ताओं का कहना था कि पिछले वर्षों में आदिवासी भूमि से जुड़े मुद्दों पर प्रशासनिक कार्रवाई में देरी और कानूनी रूप से सही संरक्षण न होने के कारण कई समुदाय प्रभावित हुए हैं। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत आदिवासी भूमि के संरक्षण और स्थानीय लोगों के अधिकारों को प्राथमिकता दी जाए।

    आदिवासी समाज के लोग और युवा कार्यकर्ता इस प्रदर्शन के माध्यम से यह संदेश देना चाहते हैं कि वे अपने अधिकारों के लिए सतत जागरूक हैं और उनके साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने से पीछे नहीं हटेंगे। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए जिससे प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों तक उनकी मांगों का प्रभावी संदेश पहुंचा।