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  • सिर्फ सिगरेट नहीं ये आदतें भी पुरुषों की फर्टिलिटी पर डालती हैं बुरा असर जानिए लो स्पर्म काउंट के बड़े कारण

    सिर्फ सिगरेट नहीं ये आदतें भी पुरुषों की फर्टिलिटी पर डालती हैं बुरा असर जानिए लो स्पर्म काउंट के बड़े कारण


    नई दिल्ली । आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में पुरुषों की प्रजनन क्षमता से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इनमें लो स्पर्म काउंट यानी वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या कम होना एक गंभीर चुनौती बनकर सामने आया है। अधिकांश लोग मानते हैं कि केवल सिगरेट तंबाकू या शराब का सेवन ही इसका कारण है लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे कई अन्य शारीरिक और जीवनशैली से जुड़े कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं। समय रहते इन कारणों की पहचान और सही उपचार से पिता बनने की संभावना को बेहतर बनाया जा सकता है।

    चिकित्सकीय विशेषज्ञों के अनुसार जब एक मिलीलीटर वीर्य में लगभग डेढ़ करोड़ से कम शुक्राणु पाए जाते हैं तो इसे लो स्पर्म काउंट या ओलिगोस्पर्मिया कहा जाता है। यदि वीर्य में शुक्राणु बिल्कुल नहीं होते तो इसे एजूस्पर्मिया कहा जाता है। ऐसी स्थिति में प्राकृतिक रूप से गर्भधारण की संभावना काफी कम हो जाती है लेकिन आधुनिक चिकित्सा के जरिए कई मामलों में इसका सफल उपचार संभव है।

    लो स्पर्म काउंट का सबसे बड़ा संकेत यह है कि लंबे समय तक नियमित प्रयास के बावजूद गर्भधारण नहीं हो पाता। कई पुरुषों में इसके अलावा कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। हालांकि कुछ मामलों में यौन इच्छा में कमी इरेक्शन की समस्या अंडकोष में दर्द सूजन या गांठ जैसी परेशानियां भी देखने को मिल सकती हैं। ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि धूम्रपान और तंबाकू के अलावा मोटापा लगातार मानसिक तनाव अत्यधिक शराब का सेवन नशीले पदार्थों का उपयोग हार्मोन असंतुलन और अनियमित जीवनशैली भी शुक्राणुओं की संख्या और गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा वैरिकोसील थायरॉयड विकार कुछ संक्रमण और लंबे समय तक कुछ दवाओं का सेवन भी पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर नकारात्मक असर डाल सकता है।

    यदि कोई दंपती बिना गर्भनिरोधक के एक वर्ष तक नियमित संबंध बनाने के बाद भी संतान प्राप्ति में सफल नहीं हो पाता तो पुरुष और महिला दोनों की जांच कराना आवश्यक माना जाता है। जिन पुरुषों को पहले से अंडकोष प्रोस्टेट या यौन स्वास्थ्य से जुड़ी कोई समस्या रही हो उन्हें बिना देरी चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। समय पर जांच से समस्या का कारण पता लगाया जा सकता है और उसके अनुसार इलाज शुरू किया जा सकता है।

    अच्छी बात यह है कि हर लो स्पर्म काउंट का मामला स्थायी बांझपन नहीं होता। संतुलित आहार नियमित व्यायाम पर्याप्त नींद तनाव पर नियंत्रण और स्वस्थ वजन बनाए रखने से शुक्राणुओं की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है। धूम्रपान तंबाकू और शराब से दूरी बनाना भी बेहद जरूरी है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर दवाओं हार्मोन थेरेपी या आधुनिक फर्टिलिटी तकनीकों की मदद से इलाज की सलाह दे सकते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि पुरुषों को अपनी प्रजनन क्षमता को लेकर खुलकर बात करनी चाहिए और किसी भी समस्या को छिपाने के बजाय समय पर जांच करानी चाहिए। सही जीवनशैली नियमित स्वास्थ्य जांच और विशेषज्ञ की सलाह से अधिकांश मामलों में बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। जागरूकता और समय पर उपचार ही स्वस्थ पितृत्व की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम है।

  • कैंसर से पिता को खोने का दर्द आज भी है ताजा, अक्षय कुमार बोले- हर तीसरे पुरुष को है खतरा, टेस्ट कराने में न बरतें लापरवाही

    कैंसर से पिता को खोने का दर्द आज भी है ताजा, अक्षय कुमार बोले- हर तीसरे पुरुष को है खतरा, टेस्ट कराने में न बरतें लापरवाही

    नई दिल्ली : बॉलीवुड के ‘खिलाड़ी’ अक्षय कुमार अपनी फिटनेस और अनुशासन के लिए जाने जाते हैं, लेकिन हाल ही में एक इवेंट के दौरान उनका एक बेहद भावुक और मानवीय पहलू सामने आया। अक्षय कुमार, जो अक्सर अपनी फिल्मों और विज्ञापनों के जरिए समाज को जागरूक करते रहते हैं, इस बार एक ऐसे मुद्दे पर खुलकर बोले जो सीधे तौर पर पुरुषों के स्वास्थ्य से जुड़ा है। इंडिया टुडे के एक विशेष कार्यक्रम में पहुंचे अक्षय ने अपने पिता स्वर्गीय हरि ओम भाटिया को याद करते हुए प्रोस्टेट कैंसर के प्रति लोगों को सचेत किया। उन्होंने बेहद भावुक स्वर में स्वीकार किया कि उनके पिता को खोने की एक बड़ी वजह समय पर सही जानकारी का न होना था।

    अक्षय कुमार ने इस बात पर गहरा दुख व्यक्त किया कि जब उनके पिता 50-55 वर्ष की आयु के थे, तब उन्हें और उनके परिवार को ‘PSA’ यानी प्रोस्टेट-स्पेसिफिक एंटीजन टेस्ट के महत्व के बारे में पता नहीं था। उन्होंने बताया कि उनके पिता उनके लिए पूरी दुनिया थे, लेकिन महज 67 साल की उम्र में वे दुनिया छोड़कर चले गए। अक्षय के अनुसार, अगर उन्हें इस टेस्ट के बारे में पहले से पता होता, तो शायद बीमारी का शुरुआती दौर में ही पता चल जाता और उनके पिता की जान बचाई जा सकती थी। इसी व्यक्तिगत क्षति को साझा करते हुए उन्होंने मंच से सभी पुरुषों और उनके परिवारों से एक खास अनुरोध किया।

    अभिनेता ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि प्रोस्टेट कैंसर आज के समय में बहुत आम हो गया है और हर तीसरे पुरुष को इसका खतरा रहता है। अक्षय ने जोर देकर कहा कि 50 साल की उम्र पार करने के बाद हर पुरुष को साल में कम से कम एक बार नियमित रूप से PSA टेस्ट जरूर कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह टेस्ट न केवल आपकी जान बचा सकता है, बल्कि आपके पूरे परिवार को एक बड़े संकट से भी बचा सकता है। अक्षय का मानना है कि बीमारी का समय पर पता चल जाना ही सबसे बड़ा इलाज है और जागरूकता ही इस जानलेवा बीमारी से लड़ने का एकमात्र प्रभावी तरीका है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, PSA टेस्ट रक्त में प्रोस्टेट-विशिष्ट एंटीजन की मात्रा को मापता है। हालांकि PSA का स्तर बढ़ना हमेशा कैंसर नहीं होता-यह प्रोस्टेट संक्रमण या बढ़े हुए प्रोस्टेट का संकेत भी हो सकता है-लेकिन इसकी जांच से खतरे को समय रहते पहचाना जा सकता है। साल 2000 में अपने पिता को खोने वाले अक्षय कुमार आज भी उस टीस को महसूस करते हैं और यही कारण है कि वे अब स्वास्थ्य के प्रति इस मिशन को आगे बढ़ा रहे हैं। उनके इस संदेश की सोशल मीडिया पर काफी सराहना हो रही है और इसे एक जरूरी हेल्थ अवेयरनेस कदम माना जा रहा है।