Tag: Mental Health Awareness

  • जब डॉक्टर बने संगीतकार और बुजुर्गों ने गुनगुनाए पुराने गीत: भोपाल में अल्जाइमर-डिमेंशिया जागरूकता का खास अंदाज

    जब डॉक्टर बने संगीतकार और बुजुर्गों ने गुनगुनाए पुराने गीत: भोपाल में अल्जाइमर-डिमेंशिया जागरूकता का खास अंदाज


    भोपाल। भोपाल में रविवार को बुजुर्गों के लिए आयोजित एक खास कार्यक्रम ने संगीत और अपनत्व के जरिए जिंदगी को फिर से करीब से महसूस करने का मौका दिया। होशंगाबाद रोड स्थित होटल बैस्टियन में अल्जाइमर और डिमेंशिया से प्रभावित बुजुर्गों के साथ उनके परिवारों और केयरगिवर्स के लिए लव यू जिंदगी कार्यक्रम आयोजित किया गया। अंजलि एन एसोसिएशन ऑफ साइकोलॉजिस्ट और लव यू जिंदगी संस्था की ओर से हुए इस आयोजन का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों के मानसिक स्वास्थ्य स्वस्थ वृद्धावस्था और अल्जाइमर तथा डिमेंशिया को लेकर जागरूकता बढ़ाना रहा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में वरिष्ठ नागरिकों के साथ उनके परिजन केयरगिवर्स और स्वास्थ्यकर्मी शामिल हुए।

    कार्यक्रम में वरिष्ठ नागरिकों के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को लेकर भी चर्चा हुई। मुख्य अतिथि राधारमण इंस्टीट्यूट के संजीव सक्सेना विशिष्ट अतिथि लेफ्टिनेंट वाइस एडमिरल विमल वर्मा और जनरल श्याम सुंदर श्रीवास्तव मौजूद रहे। अतिथियों ने कहा कि उम्र बढ़ने के साथ बुजुर्गों की शारीरिक जरूरतों के साथ उनके मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना जरूरी है। इस अवसर पर राधारमण इंस्टीट्यूट के संस्थापक स्वर्गीय राधारमण सक्सेना के शिक्षा और समाजसेवा के क्षेत्र में योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि भी दी गई।

    कार्यक्रम का सबसे खास आकर्षण चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े डॉक्टरों के म्यूजिकल बैंड Med Beats की प्रस्तुति रही। डॉक्टरों ने बुजुर्गों की पसंद के पुराने और सदाबहार गीतों की धुनें छेड़ीं तो कार्यक्रम का माहौल पूरी तरह बदल गया। परिचित गीतों को सुनकर कई बुजुर्ग अपने पुराने दिनों की यादों में खो गए। कुछ लोगों ने गीतों के साथ गुनगुनाया तो कुछ ने संगीत की धुन पर हल्की शारीरिक गतिविधियां करते हुए खुशी जाहिर की। कई बुजुर्गों के चेहरे पर लंबे समय बाद खुली मुस्कान दिखाई दी।

    आयोजकों के मुताबिक डिमेंशिया और अल्जाइमर से प्रभावित लोगों के लिए परिचित संगीत खास अनुभव दे सकता है। पुराने और पहचाने हुए गीत व्यक्ति को बीते समय की यादों से जोड़ सकते हैं और उनके सामाजिक जुड़ाव को बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। इसी सोच के साथ कार्यक्रम में संगीत को मनोरंजन के साथ भावनात्मक जुड़ाव का माध्यम बनाया गया। आयोजन में सिर्फ बुजुर्गों को ही केंद्र में नहीं रखा गया बल्कि उनकी देखभाल करने वाले परिवारों और केयरगिवर्स को भी विशेष महत्व दिया गया।

    संस्था की संस्थापक डॉ. अंजलि सहाय ने कहा कि वृद्धावस्था में अकेलापन चिंता और स्मृति से जुड़ी समस्याएं बुजुर्गों के लिए चुनौती बन सकती हैं। ऐसे समय में उन्हें सकारात्मक आत्मीय और खुशहाल वातावरण देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अल्जाइमर और डिमेंशिया से प्रभावित व्यक्ति की देखभाल करने वाले परिवार और केयरगिवर्स भी लगातार भावनात्मक दबाव से गुजरते हैं इसलिए उनके लिए भी सहयोग और संवेदनशील माहौल जरूरी है। लव यू जिंदगी कार्यक्रम ने इसी संदेश को संगीत और सामूहिक सहभागिता के जरिए सामने रखा कि बुजुर्गों की जिंदगी में दवाओं और देखभाल के साथ खुशी अपनापन और संवाद भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

  • बहन की शादी से पहले टूटा परिवार: भोपाल में 16 साल के किशोर ने की आत्महत्या

    बहन की शादी से पहले टूटा परिवार: भोपाल में 16 साल के किशोर ने की आत्महत्या


    भोपाल । भोपाल के गोविंदपुरा थाना क्षेत्र के अन्ना नगर, बीएचईएल इलाके में रविवार को एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां 16 वर्षीय किशोर ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस घटना से पूरे इलाके में शोक और स्तब्धता का माहौल है। परिजन इस घटना के बाद गहरे सदमे में हैं।

    मृतक की पहचान करण (16) के रूप में हुई है, जो 9वीं कक्षा तक पढ़ा था और सुबह के समय दूध बांटने वाली गाड़ी पर काम करता था। परिजनों के अनुसार, 18 जून को उसकी बहन की शादी होने वाली थी, जिसकी तैयारियां परिवार में चल रही थीं। लेकिन इस खुशी के माहौल के बीच अचानक आई इस घटना ने पूरे परिवार को तोड़ दिया।

    परिजनों ने बताया कि घटना से कुछ घंटे पहले करण ने अपने पिता और बहन से फोन पर बातचीत की थी। पिता मौहर सिंह के अनुसार, सुबह करण ने फोन कर कहा था—“सॉरी, मैं शादी में शामिल नहीं हो पाऊंगा।” इस बात को उस समय सामान्य बातचीत समझा गया, लेकिन कुछ देर बाद जब दोबारा फोन लगाया गया तो उसने कॉल रिसीव नहीं किया।

    इसके बाद परिवार को छोटे बेटे के माध्यम से घटना की जानकारी मिली। जब परिजन घर पहुंचे तो देखा कि करण कमरे में फंदे से लटका हुआ था। इस दृश्य को देखकर पूरा परिवार टूट गया और घर में चीख-पुकार मच गई।

    सूचना मिलने पर गोविंदपुरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। बाद में पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस ने घटनास्थल की जांच के दौरान किशोर का मोबाइल फोन भी बरामद किया, जो डिस्चार्ज हालत में मिला।

    थाना प्रभारी अवधेश सिंह तौमर ने बताया कि फिलहाल आत्महत्या के कारणों का स्पष्ट खुलासा नहीं हो सका है। पुलिस ने मोबाइल फोन को जब्त कर लिया है और उसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेजने की तैयारी की जा रही है ताकि किसी भी संभावित कारण का पता लगाया जा सके। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की हर एंगल से जांच कर रही है, वहीं परिवार इस असामयिक और दर्दनाक घटना से गहरे सदमे में है।

  • दर्दनाक घटना: सुसाइड से पहले दूल्हा-दुल्हन की तरह सजे युवक-युवती

    दर्दनाक घटना: सुसाइड से पहले दूल्हा-दुल्हन की तरह सजे युवक-युवती


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश के Sagar जिले में एक दर्दनाक और रहस्यमयी मामला सामने आया है, जहां पति-पत्नी ने कथित तौर पर एक साथ अपनी जान दे दी। मृतक राजेंद्र पटेल और उनकी पत्नी काजल पटेल को लेकर जो बातें सामने आई हैं, उन्होंने पूरे इलाके को झकझोर दिया है।

    दूल्हा-दुल्हन की तरह सजे, फिर मौत को गले लगाया
    परिजनों के अनुसार, घटना वाले दिन दोनों ने खुद को दूल्हा-दुल्हन की तरह सजाया था। इसके बाद उन्होंने पॉपकॉर्न और शराब मंगाई और कमरे में विशेष तैयारी की। मोबाइल में “साथ जिएंगे, साथ मरेंगे” जैसी रिंगटोन भी लगाई गई थी, जिसने इस पूरे मामले को और भी रहस्यमयी बना दिया।

     घटना से पहले की सामान्य दिनचर्या
    परिवार के अनुसार, उस दिन सुबह राजेंद्र काम के लिए बाहर गया था और बाद में घर लौटा था। काजल ने ससुर को भोजन भी दिया था। दोपहर में राजेंद्र अपने कमरे में आराम करने गया, लेकिन शाम तक बाहर नहीं आया।  जब परिजन कमरे में पहुंचे तो अंदर का दृश्य देखकर सभी स्तब्ध रह गए।

    मौके से मिले सामान ने बढ़ाया रहस्य
    घटनास्थल से पॉपकॉर्न, शराब की बोतल और नई रस्सी मिलने की बात सामने आई है। परिजनों का कहना है कि ये सामान उसी दिन बाजार से लाया गया होगा। इसी आधार पर मामला और भी रहस्यमयी हो गया है और कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

    परिवार ने जताया शक, जांच की मांग
    परिजनों का कहना है कि काजल का पहले किसी अन्य व्यक्ति से संपर्क था, और इसी वजह से मानसिक तनाव की संभावना जताई जा रही है। हालांकि यह केवल एक शक है और अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है। परिवार का कहना है कि शादी के बाद शुरू में सबकुछ सामान्य था, लेकिन बाद में हालात बदल गए।

    सामान्य जीवन से अचानक खत्म हुआ सफर
    दोनों की शादी करीब ढाई साल पहले हुई थी और परिवार के अनुसार उन्होंने अपनी मर्जी से विवाह किया था। आर्थिक या पारिवारिक परेशानी की बात सामने नहीं आई है।

    यह मामला अब भी कई अनसुलझे सवाल छोड़ गया है आखिर एक सामान्य दिखने वाला दंपती इस तरह का कदम क्यों उठाएगा? पुलिस जांच के बाद ही पूरी सच्चाई सामने आ सकेगी।

  • दिखावे की दुनिया का कड़वा सच: समीरा रेड्डी ने बयां किया बॉलीवुड के शुरुआती दौर का दर्द

    दिखावे की दुनिया का कड़वा सच: समीरा रेड्डी ने बयां किया बॉलीवुड के शुरुआती दौर का दर्द

    नई दिल्ली। मनोरंजन जगत की चमक-धमक अक्सर बाहर से देखने वालों को लुभाती है, लेकिन इस सुनहरे पर्दे के पीछे छिपे मानसिक दबाव और असुरक्षा की भावना का एक गंभीर पक्ष भी है। बॉलीवुड की पूर्व अभिनेत्री समीरा रेड्डी ने हाल ही में अपने शुरुआती करियर के दौरान महसूस किए गए उस असहनीय दबाव पर खुलकर बात की है, जो कलाकारों को समाज और उद्योग के मानदंडों के अनुरूप दिखने के लिए मजबूर करता है।

    उन्होंने साझा किया कि किस तरह करियर के शुरुआती दौर में खुद को सफल और संपन्न दिखाने की होड़ में उन्होंने एक महंगा बैग खरीदा था, जिसकी कीमत उस समय चार लाख रुपये थी। यह उदाहरण केवल एक निजी अनुभव नहीं है, बल्कि उस गहरी असुरक्षा को दर्शाता है जो कलाकारों को अपनी वास्तविक पहचान खोकर केवल एक छवि को बनाए रखने के लिए प्रेरित करती है।

    फिल्म उद्योग में कदम रखते ही कलाकारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती स्वयं को उस सांचे में ढालने की होती है, जिसे दर्शक और बाजार पसंद करते हैं। समीरा के अनुसार, उस समय उन्हें ऐसा महसूस कराया गया था कि यदि उनके पास महंगे ब्रांड और विलासिता की वस्तुएं नहीं होंगी, तो उन्हें उद्योग में गंभीरता से नहीं लिया जाएगा। यह दबाव केवल भौतिक वस्तुओं तक सीमित नहीं था, बल्कि शारीरिक बनावट पर भी लागू होता था।

    खुद को दूसरों से बेहतर या उनके बराबर दिखाने की इस अंधी दौड़ में कलाकार अक्सर वित्तीय और मानसिक रूप से संकट में पड़ जाते हैं। चार लाख रुपये का वह बैग उनके लिए सफलता का प्रतीक नहीं, बल्कि उस डर का परिणाम था कि कहीं वह इस ग्लैमरस दुनिया में पीछे न छूट जाएं। दिखावे की इस संस्कृति ने न केवल उनके आर्थिक फैसलों को प्रभावित किया, बल्कि उनके आत्मविश्वास को भी गहरी चोट पहुंचाई।

    अभिनेत्री ने बताया कि एक समय ऐसा था जब वह अपनी प्राकृतिक सुंदरता को स्वीकार करने के बजाय कृत्रिम मानकों को पूरा करने की कोशिश में लगी रहती थीं। मनोरंजन जगत में यह धारणा बहुत प्रबल है कि आपकी बाहरी चमक ही आपकी सफलता की गारंटी है। इसी धारणा के वशीभूत होकर कलाकार अपनी मेहनत की कमाई उन चीजों पर खर्च कर देते हैं, जिनकी उन्हें वास्तव में आवश्यकता नहीं होती।

    आज के समय में जब सोशल मीडिया का प्रभाव चरम पर है, तब यह समस्या और भी विकराल हो गई है। हालांकि, समीरा रेड्डी ने अब इन सब बेड़ियों को तोड़कर अपनी वास्तविकता को स्वीकार कर लिया है। वह अन्य लोगों को भी यही संदेश दे रही हैं कि दिखावे की दुनिया से बाहर निकलना कितना अनिवार्य है। उन्होंने स्वीकार किया कि उस समय की गई फिजूलखर्ची और खुद पर डाला गया दबाव पूरी तरह व्यर्थ था।

    अब वह अपनी उम्र, त्वचा के दोषों और अपनी सहजता के साथ दुनिया के सामने आती हैं, जो कि असली साहस है। उनकी यह स्वीकारोक्ति उन तमाम लोगों के लिए एक सबक है, जो दूसरों को प्रभावित करने के लिए अपनी क्षमता से बाहर जाकर विलासिता पूर्ण जीवन जीने की कोशिश करते हैं। कलाकारों का जीवन जितना ग्लैमरस दिखता है, उसके पीछे उतनी ही कड़वी सच्चाई और संघर्ष छिपा होता है।