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  • दिमाग को नई दिशा दे सकता है ध्यान! सिर्फ 7 दिन के अभ्यास में दिखे न्यूरोप्लास्टिसिटी के हैरान करने वाले संकेत

    दिमाग को नई दिशा दे सकता है ध्यान! सिर्फ 7 दिन के अभ्यास में दिखे न्यूरोप्लास्टिसिटी के हैरान करने वाले संकेत


    नई दिल्ली। मस्तिष्क को स्वस्थ रखने के लिए लंबे समय से ध्यान और योग को फायदेमंद माना जाता रहा है। आमतौर पर मेडिटेशन को तनाव कम करने और मन को शांत रखने से जोड़कर देखा जाता है लेकिन एक नए वैज्ञानिक अध्ययन ने इसके प्रभाव को लेकर नई संभावनाएं सामने रखी हैं। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं की ओर से किए गए अध्ययन में महज सात दिनों के गहन ध्यान और मन शरीर से जुड़े अभ्यास के बाद प्रतिभागियों के मस्तिष्क और शरीर में कई मापने योग्य बदलाव देखे गए। शोधकर्ताओं को मस्तिष्क की गतिविधियों के साथ रक्त में मौजूद जैविक संकेतकों प्रतिरक्षा प्रणाली मेटाबॉलिज्म और शरीर की प्राकृतिक दर्द नियंत्रण प्रक्रिया में भी बदलाव के संकेत मिले हैं। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि अध्ययन में न्यूरोप्लास्टिसिटी से जुड़े बदलावों के संकेत भी दिखाई दिए।

    न्यूरोप्लास्टिसिटी मस्तिष्क की वह प्राकृतिक क्षमता है जिसके जरिए वह नए अनुभवों और लगातार किए जाने वाले अभ्यास के आधार पर अपनी कार्यप्रणाली और तंत्रिका संबंधों में बदलाव कर सकता है। आसान भाषा में समझें तो मस्तिष्क पूरी तरह स्थिर नहीं होता बल्कि परिस्थितियों और अनुभवों के अनुसार खुद को ढालने की क्षमता रखता है। इसी वजह से वैज्ञानिक ध्यान को केवल मानसिक शांति देने वाली गतिविधि के तौर पर नहीं बल्कि मस्तिष्क और शरीर के बीच होने वाली जटिल जैविक प्रक्रिया के रूप में भी समझने की कोशिश कर रहे हैं।

    इस अध्ययन में 20 स्वस्थ वयस्कों को शामिल किया गया था। सभी प्रतिभागियों ने सात दिनों के एक आवासीय कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्हें रोजाना ध्यान से संबंधित प्रशिक्षण दिया गया और कुल करीब 33 घंटे का निर्देशित ध्यान कराया गया। कार्यक्रम शुरू होने से पहले और समाप्त होने के बाद प्रतिभागियों के मस्तिष्क की एफएमआरआई जांच की गई। इसके साथ ही उनके रक्त के नमूने लेकर शरीर में होने वाली विभिन्न जैविक प्रक्रियाओं का भी विश्लेषण किया गया।

    शोधकर्ताओं के मुताबिक सात दिन के कार्यक्रम के बाद मस्तिष्क के उन हिस्सों की गतिविधि में कमी देखी गई जो लगातार चलने वाले आंतरिक विचारों और मानसिक बातचीत से जुड़े होते हैं। विशेषज्ञों ने इसे मस्तिष्क की कार्यप्रणाली में संभावित बेहतर दक्षता से जोड़कर देखा है। इसके अलावा रक्त में मौजूद कुछ जैविक संकेतकों प्रतिरक्षा गतिविधि और मेटाबॉलिज्म से जुड़े बदलावों का भी अध्ययन किया गया। इससे यह संकेत मिलता है कि ध्यान का असर केवल व्यक्ति के मानसिक अनुभव तक सीमित नहीं हो सकता बल्कि शरीर की कई प्रक्रियाओं से भी इसका संबंध हो सकता है।

    हालांकि इस अध्ययन के नतीजे उत्साह बढ़ाने वाले हैं लेकिन इन्हें अंतिम निष्कर्ष मानना जल्दबाजी होगी। अध्ययन में केवल 20 स्वस्थ वयस्क शामिल थे और इसकी अवधि भी सिर्फ सात दिन रही। इसलिए यह जानने के लिए बड़े स्तर पर और लंबे समय तक शोध की जरूरत होगी कि ध्यान से होने वाले ये बदलाव कितने स्थायी हैं और अलग अलग उम्र तथा स्वास्थ्य स्थितियों वाले लोगों पर इनका असर कितना अलग हो सकता है।

    फिलहाल यह अध्ययन इस दिशा में महत्वपूर्ण संकेत जरूर देता है कि नियमित और गहन ध्यान मस्तिष्क की कार्यप्रणाली के साथ शरीर की दूसरी जैविक प्रक्रियाओं को भी प्रभावित कर सकता है। यानी ध्यान को सिर्फ तनाव कम करने का माध्यम मानने के बजाय मस्तिष्क और शरीर के समग्र स्वास्थ्य से जुड़ी जीवनशैली की आदत के रूप में भी देखा जा सकता है।

  • रात की अधूरी नींद दिनभर बिगाड़ सकती है दिमाग की चाल, बढ़ सकता है तनाव और कई बीमारियों का खतरा

    रात की अधूरी नींद दिनभर बिगाड़ सकती है दिमाग की चाल, बढ़ सकता है तनाव और कई बीमारियों का खतरा


    नई दिल्ली । नींद हमारे शरीर और दिमाग को आराम देने के साथ अगले दिन बेहतर तरीके से काम करने के लिए तैयार करती है। यही वजह है कि पर्याप्त नींद को स्वस्थ जीवनशैली का बेहद जरूरी हिस्सा माना जाता है। अगर रात की नींद बार-बार अधूरी रह रही है तो इसका असर सिर्फ सुबह की थकान या दिनभर की सुस्ती तक सीमित नहीं रहता बल्कि धीरे-धीरे व्यक्ति के व्यवहार याददाश्त एकाग्रता और मानसिक स्वास्थ्य पर भी दिखाई देने लगता है। गुस्सा जल्दी आना छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन महसूस होना किसी काम पर ध्यान केंद्रित न कर पाना और जरूरी बातें भूल जाना कई बार नींद पूरी न होने से भी जुड़ा हो सकता है।

    एक रात नींद कम होने पर अगले दिन थकान सिरदर्द सुस्ती और काम करने में परेशानी महसूस होना सामान्य हो सकता है। कभी-कभार ऐसा होने पर आमतौर पर ज्यादा चिंता की जरूरत नहीं होती लेकिन जब नींद की कमी लगातार बनी रहती है तो इसका असर रोजमर्रा की कार्यक्षमता पर पड़ सकता है। व्यक्ति को छोटे-छोटे फैसले लेने में भी परेशानी हो सकती है और पढ़ाई या काम के दौरान ध्यान भटकने की समस्या बढ़ सकती है। लंबे समय तक पर्याप्त नींद न मिलने की स्थिति में शरीर और दिमाग दोनों पर दबाव बढ़ता है।

    नींद की कमी का सीधा असर व्यवहार पर भी दिखाई दे सकता है। पर्याप्त आराम न मिलने पर व्यक्ति सामान्य परिस्थितियों में भी ज्यादा चिड़चिड़ा हो सकता है और छोटी बातों पर गुस्सा आने लगता है। भावनाओं को नियंत्रित करना भी मुश्किल महसूस हो सकता है। यही समस्या अगर लंबे समय तक जारी रहे तो तनाव और बेचैनी बढ़ सकती है। नींद और मानसिक स्वास्थ्य का संबंध काफी गहरा माना जाता है और लगातार नींद की समस्या रहने पर चिंता तथा अवसाद जैसी मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का जोखिम भी बढ़ सकता है।

    याददाश्त और एकाग्रता पर भी नींद की कमी का असर पड़ता है। रात में शरीर और दिमाग को पर्याप्त आराम नहीं मिलने पर अगले दिन किसी काम पर ध्यान लगाने में परेशानी हो सकती है। चीजें याद रखने में दिक्कत हो सकती है और काम या पढ़ाई का प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है। बच्चों और किशोरों के लिए पर्याप्त नींद विशेष रूप से जरूरी है क्योंकि नींद उनकी सीखने की क्षमता ध्यान याददाश्त और व्यवहार से जुड़ी होती है। इसलिए बच्चों में लगातार नींद की परेशानी को केवल आदत मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

    कम नींद का असर केवल मानसिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। लंबे समय तक पर्याप्त नींद न लेने को वजन बढ़ने मधुमेह और हृदय स्वास्थ्य से जुड़े जोखिमों से भी जोड़ा जाता है। कुछ लोगों को रात में सोने में परेशानी होती है जबकि कुछ लोग पर्याप्त समय बिस्तर पर रहने के बाद भी सुबह तरोताजा महसूस नहीं करते। कुछ नींद संबंधी विकारों में रात के समय सांस लेने में रुकावट या सांस के अनियमित होने जैसी समस्या भी हो सकती है। ऐसे मामलों में व्यक्ति को पर्याप्त समय सोने के बावजूद अच्छी गुणवत्ता वाली नींद नहीं मिल पाती।

    कुछ संकेत ऐसे हैं जिन्हें गंभीरता से लेना जरूरी है। अगर गाड़ी चलाते समय बार-बार झपकी आने लगे टीवी देखते या किताब पढ़ते समय थोड़ी देर में ही नींद आने लगे दिन के समय बहुत ज्यादा नींद महसूस हो काम या पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो जाए या चीजें याद रखने में पहले से ज्यादा परेशानी होने लगे तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसी तरह छोटी-छोटी बातों पर भावनात्मक प्रतिक्रिया बढ़ना और काम करने की क्षमता में कमी आना भी लगातार खराब नींद के संकेत हो सकते हैं।

    इसलिए नींद को केवल आराम का समय समझने के बजाय स्वास्थ्य की बुनियादी जरूरत मानना जरूरी है। अगर रात में लगातार सोने में परेशानी हो रही है या पर्याप्त समय सोने के बाद भी दिनभर अत्यधिक नींद और थकान बनी रहती है तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। समय रहते नींद से जुड़ी समस्या के कारणों की पहचान करने और जरूरी सुधार करने से रोजमर्रा की कार्यक्षमता मानसिक संतुलन और समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

  • पत्नी दो महीने से मायके में थी, मानसिक तनाव में युवक ने दी जान; आखिरी कॉल से खुली घटना की परत

    पत्नी दो महीने से मायके में थी, मानसिक तनाव में युवक ने दी जान; आखिरी कॉल से खुली घटना की परत


    मध्य प्रदेश। इंदौर के बाणगंगा थाना क्षेत्र में रविवार को एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। 39 वर्षीय युवक ने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। आत्महत्या से पहले उसने अपने एक दोस्त को फोन कर कहा कि परिवार से कह देना कि अब मैं नहीं रहा। इसके कुछ ही देर बाद उसने यह कदम उठा लिया। सूचना मिलने पर परिजन मौके पर पहुंचे और उसे अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

    पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान साईं सुमन नगर निवासी विशाल चौहान के रूप में हुई है। वह एक निजी कंपनी में कार्यरत था। रविवार को अवकाश होने के कारण वह घर पर ही मौजूद था। घटना के समय परिवार के अन्य सदस्य घर से बाहर थे।

    मृतक के चचेरे भाई अनिल ने बताया कि उन्हें विशाल के दोस्त का फोन आया था, लेकिन बाइक चलाने के कारण वह कॉल नहीं उठा सके। कुछ देर बाद जब उन्होंने वापस फोन किया तो दोस्त ने बताया कि विशाल ने आखिरी बार फोन कर कहा था कि वह अब इस दुनिया में नहीं रहेगा और परिवार को इसकी जानकारी दे देना। यह सुनते ही अनिल ने विशाल के भाई से संपर्क किया, लेकिन वह भी घर पर मौजूद नहीं था। बाद में मां को सूचना दी गई। जब परिवार के लोग घर पहुंचे तो विशाल कमरे में फंदे से लटका मिला।

    परिजन उसे तुरंत पास के निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजकर जांच शुरू कर दी है।

    परिजनों के मुताबिक विशाल अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ अलग रहता था। उसकी पत्नी पिछले करीब दो महीने से एरोड्रम क्षेत्र स्थित अपने मायके में रह रही थी। परिवार का कहना है कि पत्नी के वापस नहीं आने से वह मानसिक तनाव में था। हालांकि, पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है, इसलिए आत्महत्या के वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है।

    पुलिस का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। परिजनों और परिचितों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    यदि आप या आपका कोई परिचित मानसिक तनाव या आत्महत्या जैसे विचारों से जूझ रहा है, तो किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करें या तुरंत स्थानीय मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ अथवा हेल्पलाइन से संपर्क करें। समय पर मदद मिलना बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है।

  • 'बिग बॉस' ने बदल दी जुबैर खान की जिंदगी, डिप्रेशन और आत्महत्या के विचारों का किया खुलासा

    'बिग बॉस' ने बदल दी जुबैर खान की जिंदगी, डिप्रेशन और आत्महत्या के विचारों का किया खुलासा


    नई दिल्ली । रियलिटी शो ‘बिग बॉस 11’ के पूर्व प्रतियोगी जुबैर खान ने एक बार फिर शो के बाद अपनी जिंदगी में आए कठिन दौर को लेकर खुलकर बात की है। उन्होंने दावा किया कि शो में हुई घटनाओं और उसके बाद पैदा हुए विवादों का उनकी मानसिक, सामाजिक और पेशेवर जिंदगी पर गहरा असर पड़ा।

    साल 2017 में प्रसारित हुए ‘बिग बॉस 11’ में जुबैर खान ने बतौर कंटेस्टेंट हिस्सा लिया था। शो के दौरान उन्होंने खुद को अंडरवर्ल्ड से जुड़े परिवार का सदस्य बताया था, जिसके बाद वह सुर्खियों में आ गए। बाद में साथी प्रतियोगी अर्शी खान के साथ उनकी तीखी बहस और अभद्र भाषा के इस्तेमाल को लेकर विवाद हुआ।

    वीकेंड का वार एपिसोड में शो के होस्ट सलमान खान ने जुबैर खान की कड़ी आलोचना की थी। इसके बाद जुबैर की तबीयत बिगड़ गई और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल भी भेजा गया। बाद में कम वोट मिलने के कारण वह शो से बाहर हो गए।

    शो से बाहर आने के बाद जुबैर ने सलमान खान के खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई थी। उनका आरोप था कि शो में हुई घटनाओं के कारण उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचा और उन्हें काम मिलना बंद हो गया।

    हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में जुबैर खान ने कहा कि शो के बाद वह लंबे समय तक डिप्रेशन से जूझते रहे। उनके अनुसार, निजी जीवन भी प्रभावित हुआ और पारिवारिक रिश्तों में दूरियां आ गईं। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस दौर में उन्हें कई बार आत्महत्या के विचार आए और मानसिक तनाव से उबरने के लिए उन्हें दवाइयों का सहारा लेना पड़ा।

    जुबैर ने कहा कि एक टीवी एपिसोड के आधार पर लोगों ने उनके बारे में धारणा बना ली, जिससे उनकी सामाजिक और पेशेवर छवि को भारी नुकसान पहुंचा। उनका कहना है कि उन्होंने इस पूरे विवाद में बहुत कुछ खोया, लेकिन हासिल कुछ नहीं हुआ।

    हालांकि, यह जुबैर खान के व्यक्तिगत दावे हैं। इन दावों पर संबंधित पक्षों की ओर से अलग-अलग समय पर अपनी प्रतिक्रियाएं भी सामने आती रही हैं। यदि किसी व्यक्ति को डिप्रेशन, आत्महत्या के विचार या गंभीर मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा हो, तो उसे तुरंत किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ, विश्वसनीय परिजन या स्थानीय हेल्पलाइन से सहायता लेनी चाहिए।

  • व्हाइट हाउस के बाहर फायरिंग से दहशत: 21 वर्षीय नासीर बेस्ट ढेर, खुद को ‘जीसस क्राइस्ट’ बताने का दावा

    व्हाइट हाउस के बाहर फायरिंग से दहशत: 21 वर्षीय नासीर बेस्ट ढेर, खुद को ‘जीसस क्राइस्ट’ बताने का दावा

    नई दिल्ली। अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में स्थित व्हाइट हाउस के बाहर शनिवार शाम उस समय दहशत फैल गई जब एक युवक ने सुरक्षा चेकपॉइंट के पास अचानक फायरिंग शुरू कर दी। अमेरिकी सीक्रेट सर्विस ने तुरंत जवाबी कार्रवाई करते हुए हमलावर को मार गिराया। इस घटना में एक राहगीर भी घायल हुआ है, जबकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सुरक्षित रहे।

    सीक्रेट सर्विस के अनुसार, यह घटना 17वीं स्ट्रीट और पेंसिल्वेनिया एवेन्यू के पास हुई, जहां 21 वर्षीय नासीर बेस्ट नामक युवक ने अपने बैग से हथियार निकालकर गोलीबारी शुरू कर दी। सुरक्षा बलों ने तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन उसने फायरिंग जारी रखी, जिसके बाद उसे जवाबी कार्रवाई में गोली लगी और अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई।

    अधिकारियों ने बताया कि घटना के दौरान कोई भी सुरक्षा एजेंट घायल नहीं हुआ। हालांकि, एक राहगीर को गोली लगी है, जिसकी स्थिति को लेकर अभी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। मामले की जांच जारी है और अतिरिक्त विवरण जुटाए जा रहे हैं।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, मारा गया युवक मैरीलैंड का रहने वाला था और उसका नाम नासीर बेस्ट था। वह पहले भी सुरक्षा एजेंसियों की नजर में था और कई बार व्हाइट हाउस के आसपास संदिग्ध गतिविधियों में शामिल पाया गया था। कोर्ट रिकॉर्ड्स के मुताबिक, उसे पहले भी हिरासत में लिया गया था जब उसने वाहनों की एंट्री में बाधा डाली थी और प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश किया था।

    जानकारी के अनुसार, 26 जून 2025 को उसे व्हाइट हाउस के पास ट्रैफिक में बाधा डालने के आरोप में पकड़ा गया था, जबकि 10 जुलाई को वह चेतावनी के बावजूद प्रतिबंधित इलाके में घुस गया था। पूछताछ के दौरान उसने खुद को “जीसस क्राइस्ट” बताया और कथित तौर पर गिरफ्तारी की इच्छा जताई थी।

    सीक्रेट सर्विस का कहना है कि वह व्यक्ति मानसिक रूप से अस्थिर प्रतीत हो रहा था और लंबे समय से व्हाइट हाउस के आसपास संदिग्ध गतिविधियों में शामिल था। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां यह जांच कर रही हैं कि वह हथियार लेकर इतने संवेदनशील क्षेत्र तक कैसे पहुंचा।

    इस घटना ने व्हाइट हाउस की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं, हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रपति की सुरक्षा में कोई चूक नहीं हुई और स्थिति को तुरंत नियंत्रित कर लिया गया।

  • हैरान करने वाली लत: डियोड्रेंट खाने की आदत ने न्यूयॉर्क की 19 साल की लड़की को बनाया चर्चा का विषय

    हैरान करने वाली लत: डियोड्रेंट खाने की आदत ने न्यूयॉर्क की 19 साल की लड़की को बनाया चर्चा का विषय

    नई दिल्ली(New Delhi)।
    न्यूयॉर्क से सामने आई एक हैरान कर देने वाली घटना में 19 वर्षीय लड़की निकोल की अजीब आदत ने डॉक्टरों से लेकर सोशल मीडिया यूजर्स तक को चौंका दिया है। निकोल ने खुलासा किया है कि उसे खाने-पीने की चीजों से ज्यादा डियोड्रेंट खाने की लत लग चुकी है और वह महीने में कई डिब्बे खत्म कर देती है।

    सुबह से रात तक डियोड्रेंट की तलब
    टीएलसी के शो “My Strange Addiction” में निकोल ने बताया कि यह आदत उसे बचपन से ही है। लगभग 4 साल की उम्र में उसने पहली बार डियोड्रेंट को चखना शुरू किया था, जो धीरे-धीरे एक गंभीर लत में बदल गई।

    निकोल के मुताबिक, दिन की शुरुआत हो या तनाव का समय उसे बार-बार डियोड्रेंट खाने की इच्छा होती थी। वह स्टिक डियोड्रेंट को खोलकर उसमें से हिस्सा निकालकर खा लेती थी। अलग-अलग ब्रांड का “स्वाद” भी उसे अलग लगता था, जिनमें कुछ उसे ज्यादा पसंद थे।

    स्प्रे डियोड्रेंट भी बना हिस्सा
    समय के साथ उसकी लत सिर्फ स्टिक तक सीमित नहीं रही, बल्कि वह डियोड्रेंट स्प्रे तक इस्तेमाल करने लगी। निकोल ने बताया कि स्प्रे का स्वाद उसे तुरंत महसूस होता था, इसलिए वह इसे भी पसंद करने लगी।

    हालांकि, इस आदत का असर उसके शरीर पर साफ दिखने लगा—पेट दर्द, मुंह सूखना और कमजोरी जैसी समस्याएं उसे परेशान करने लगीं।

    डॉक्टरों की चेतावनी: गंभीर खतरा
    चिकित्सकों के अनुसार डियोड्रेंट में कई तरह के रसायन (chemicals) होते हैं, जो शरीर में जाने पर गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। डॉक्टरों ने इसे बेहद खतरनाक बताते हुए तुरंत रोकने की सलाह दी।

    निकोल ने यह भी बताया कि उसने इसे छोड़ने की कोशिश की, लेकिन कुछ ही दिनों में उसे बेचैनी, सिरदर्द और घबराहट होने लगी।

    क्या है यह बीमारी?
    विशेषज्ञों के मुताबिक यह स्थिति Pica Disorder कहलाती है, जिसमें व्यक्ति ऐसी चीजें खाने लगता है जो खाने योग्य नहीं होतीं जैसे मिट्टी, कागज, साबुन या केमिकल युक्त वस्तुएं। यह समस्या मानसिक तनाव, चिंता या पोषण की कमी से भी जुड़ी हो सकती है।

    सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय
    निकोल की यह कहानी सामने आने के बाद लोग हैरान हैं। कुछ लोग इसे अजीब आदत बता रहे हैं, तो कई इसे गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्या मान रहे हैं। यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि कैसे सामान्य दिखने वाली आदतें धीरे-धीरे खतरनाक लत में बदल सकती हैं।

  • स्ट्रेस और बेचैनी से पाना है छुटकारा? भ्रामरी प्राणायाम है आसान और असरदार उपाय

    स्ट्रेस और बेचैनी से पाना है छुटकारा? भ्रामरी प्राणायाम है आसान और असरदार उपाय

    नई दिल्ली आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव, चिंता और मानसिक थकान आम समस्या बन चुकी है। काम का दबाव, लगातार स्क्रीन टाइम और बदलती लाइफस्टाइल के कारण लोग अक्सर बेचैनी और दिमागी अशांति महसूस करते हैं। ऐसे में Ministry of AYUSH ने एक आसान और असरदार उपाय सुझाया है भ्रामरी प्राणायाम

    मंत्रालय के अनुसार, यह प्राणायाम मन को शांत करने और मानसिक संतुलन बनाए रखने में बेहद कारगर है। खासकर जब मन में बहुत ज्यादा विचार चल रहे हों या बेचैनी महसूस हो रही हो, तब भ्रामरी प्राणायाम तुरंत राहत देने में मदद करता है।

    International Day of Yoga से पहले भी मंत्रालय लोगों को इस प्राणायाम के फायदे बता रहा है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसे अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकें।

    योग विशेषज्ञों के मुताबिक, भ्रामरी प्राणायाम एक विशेष श्वास तकनीक है, जिसमें सांस छोड़ते समय भौंरे की तरह “हम्म्म” की ध्वनि निकाली जाती है। इस ध्वनि से मस्तिष्क में हल्का कंपन होता है, जो तनावग्रस्त नसों को शांत करता है। इससे न केवल स्ट्रेस कम होता है, बल्कि गुस्सा, चिंता और नींद से जुड़ी समस्याओं में भी राहत मिलती है।

    इस प्राणायाम का नियमित अभ्यास मानसिक एकाग्रता बढ़ाने और भावनात्मक संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। जो लोग अक्सर चिंता या ओवरथिंकिंग का शिकार रहते हैं, उनके लिए यह एक सरल और प्राकृतिक उपाय है।

    भ्रामरी प्राणायाम करने का तरीका भी बेहद आसान है। सबसे पहले किसी शांत जगह पर आराम से सीधे बैठ जाएं और आंखें बंद कर लें। अब अपने अंगूठों से दोनों कानों को हल्के से बंद करें। इसके बाद गहरी सांस लें और धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए “हम्म” की आवाज निकालें। कोशिश करें कि यह ध्वनि लंबी और स्थिर हो। इस प्रक्रिया को 5 से 10 बार दोहराएं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि रोजाना सुबह या शाम के समय इसका अभ्यास करने से मन की अशांति धीरे-धीरे कम होने लगती है। साथ ही, इससे ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है और नींद की गुणवत्ता भी बेहतर होती है।

     कहना है कि यह प्राणायाम पूरी तरह सुरक्षित है और इसे घर पर बिना किसी उपकरण के आसानी से किया जा सकता है। जो लोग लगातार मानसिक थकान या तनाव से जूझ रहे हैं, उनके लिए यह एक प्रभावी और प्राकृतिक समाधान है।

    कुल मिलाकर, भ्रामरी प्राणायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करके आप मानसिक शांति और बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में एक बड़ा कदम उठा सकते हैं।


  • बिना मेहनत घटता वजन बन सकता है जानलेवा इन लक्षणों को तुरंत पहचानें

    बिना मेहनत घटता वजन बन सकता है जानलेवा इन लक्षणों को तुरंत पहचानें


    नई दिल्ली । आज के समय में जहां लोग वजन कम करने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं वहीं अगर बिना किसी डाइटिंग या एक्सरसाइज के वजन तेजी से घटने लगे तो यह चिंता का विषय बन जाता है। मेडिकल भाषा में इसे बिना किसी कारण वज़न कम होना कहा जाता है और इसे कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार यदि 6 से 12 महीनों के भीतर शरीर का 5 प्रतिशत या उससे अधिक वजन बिना किसी कारण के कम हो जाए तो यह किसी गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकता है।

    हमारा शरीर मेटाबॉलिज्म और हार्मोनल संतुलन के आधार पर काम करता है। जब शरीर के अंदर कोई गड़बड़ी होती है तो वह ऊर्जा के लिए फैट और मांसपेशियों को तेजी से जलाने लगता है जिससे वजन अचानक कम होने लगता है। इसके पीछे कई गंभीर कारण हो सकते हैं जिन्हें समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है।

    सबसे आम कारणों में से एक है हाइपरथायरायडिज्म। इस स्थिति में थायराइड ग्रंथि जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनाने लगती है जिससे मेटाबॉलिज्म बहुत तेज हो जाता है। व्यक्ति सामान्य से ज्यादा खाना खाने के बावजूद तेजी से दुबला होने लगता है। इसके साथ घबराहट, पसीना आना और दिल की धड़कन तेज होना जैसे लक्षण भी दिखाई देते हैं।

    इसी तरह टाइप 2 मधुमेह भी अचानक वजन घटने का कारण बन सकती है। जब शरीर में इंसुलिन ठीक से काम नहीं करता तो कोशिकाएं ग्लूकोज को ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल नहीं कर पातीं। ऐसे में शरीर फैट और मांसपेशियों को तोड़कर ऊर्जा बनाता है जिससे वजन तेजी से कम होने लगता है। बार बार पेशाब आना और ज्यादा प्यास लगना इसके सामान्य संकेत हैं।

    कई मामलों में यह समस्या कैंसर का शुरुआती संकेत भी हो सकती है। कैंसर कोशिकाएं शरीर की ऊर्जा को तेजी से खर्च करती हैं और शरीर को कमजोर बना देती हैं। भूख कम होना, लगातार थकान और बिना वजह वजन गिरना इसके प्रमुख लक्षण हो सकते हैं।

    मानसिक स्वास्थ्य भी इसमें बड़ी भूमिका निभाता है।अवसाद या अत्यधिक तनाव की स्थिति में व्यक्ति की भूख प्रभावित हो जाती है। शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं जिससे या तो व्यक्ति खाना छोड़ देता है या शरीर पोषक तत्वों को सही तरीके से अवशोषित नहीं कर पाता और वजन गिरने लगता है।

    इसके अलावा शराब, सिगरेट या नशीले पदार्थों की आदत भी शरीर को अंदर से कमजोर कर देती है। इससे इम्यून सिस्टम प्रभावित होता है और शरीर बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है जिसके कारण वजन तेजी से घट सकता है।

    अचानक वजन कम होना कभी भी सामान्य बात नहीं होती बल्कि यह शरीर का एक चेतावनी संकेत है। यदि आप भी बिना कारण वजन घटने की समस्या से जूझ रहे हैं तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर जांच जैसे ब्लड टेस्ट, थायराइड प्रोफाइल और अन्य जरूरी स्क्रीनिंग करवाना बेहद आवश्यक है। सही समय पर पहचान और इलाज ही आपको बड़ी और गंभीर बीमारियों से बचा सकता है।

  • युवाओं पर कोरियन कल्चर का रंग, ग्लास स्किन से के-पॉप तक बढ़ा क्रेज

    युवाओं पर कोरियन कल्चर का रंग, ग्लास स्किन से के-पॉप तक बढ़ा क्रेज


    नई दिल्ली । देशभर में कोरियन कल्चर का प्रभाव तेजी से बढ़ता जा रहा है। संगीत, खान-पान, फैशन और जीवनशैली में कोरिया के नए ट्रेंड युवाओं में खासे लोकप्रिय हो गए हैं। राजधानी और बड़े शहरों में युवाओं की पसंद में के-पॉप म्यूजिक, ग्लास स्किन मेकअप, स्टाइलिश पहनावे और कोरियन फूड का क्रेज नजर आ रहा है।

    डिजिटल दुनिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की वजह से युवा पीढ़ी कोरियन कल्चर के करीब आ रही है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर के-पॉप वीडियो, कोरियन वेब सीरीज, ब्यूटी और फैशन टिप्स को बहुत देखा और अपनाया जा रहा है। इस प्रवृत्ति ने न केवल मेकअप और कपड़ों पर असर डाला है, बल्कि खाने-पीने की आदतों और लाइफस्टाइल में भी बदलाव लाए हैं।

    हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस ट्रेंड का असर कुछ मामलों में नकारात्मक भी हो सकता है। हाल ही में गाजियाबाद में तीन बहनों द्वारा आत्महत्या की दुखद घटना ने सवाल उठाए कि कोरियन कल्चर की लगातार आदत और डिजिटल दुनिया के दबाव का युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ रहा है। यह घटना यह संकेत देती है कि डिजिटल और ग्लोबल ट्रेंड्स के साथ संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

    फैशन और मेकअप के क्षेत्र में खासकर ग्लास स्किन और के-पॉप स्टार्स की स्टाइलिंग का क्रेज सबसे अधिक देखा जा रहा है। युवा अपनी पहचान और स्टाइल को कोरियन ट्रेंड्स के साथ जोड़ रहे हैं। खान-पान में भी कोरियन फूड जैसे किमची, त्तोकबॉकी और कोरियन स्नैक्स की मांग बढ़ रही है। शहरों में कोरियन रेस्टोरेंट्स और कैफे इस ट्रेंड का फायदा उठा रहे हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि कोरियन कल्चर की लोकप्रियता तकनीक, ग्लोबल कनेक्टिविटी और डिजिटल कंटेंट की वजह से बढ़ी है। हालांकि, यह जरूरी है कि युवा अपने स्थानीय और पारंपरिक मूल्यों के साथ इस ट्रेंड का संतुलित अनुभव करें।

    देश के अलग-अलग हिस्सों में कोरियन कल्चर की लोकप्रियता यह दर्शाती है कि ग्लोबल कल्चर और डिजिटल दुनिया युवा पीढ़ी के जीवन पर तेजी से असर डाल रही है। यह प्रवृत्ति फैशन, म्यूजिक और फूड तक ही सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं की सोच और सामाजिक व्यवहार में भी असर डाल रही है।

  • मनोरंजन जगत में 'ब्रेक' का दौर: जब सितारों ने सफलता के शोर से ज्यादा सुकून को चुना

    मनोरंजन जगत में 'ब्रेक' का दौर: जब सितारों ने सफलता के शोर से ज्यादा सुकून को चुना


    नई दिल्ली । बॉलीवुड और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में इन दिनों एक अजीब सा लेकिन दिलचस्प पैटर्न देखने को मिल रहा है। जहां पहले कलाकार साल में पांच-पांच फिल्में करके स्क्रीन पर छाए रहने की होड़ में रहते थे वहीं अब पंकज त्रिपाठी विक्रांत मैसी और जाकिर खान जैसे मंझे हुए कलाकार अचानक ‘ब्रेक’ की घोषणा कर रहे हैं। आखिर ऐसा क्या हुआ कि सफलता के शिखर पर बैठे ये सितारे खुद ही लाइमलाइट से दूर जा रहे हैं? इसका जवाब केवल काम की कमी नहीं बल्कि एक सोची-समझी रणनीति और निजी सुकून की तलाश है।

    इस ट्रेंड की नींव अनजाने में ही सही लेकिन शाहरुख खान ने रखी थी। ‘जीरो’ की असफलता के बाद किंग खान ने चार साल का लंबा वनवास काटा। उस वक्त कयास लगाए जा रहे थे कि उनका दौर खत्म हो गया लेकिन 2023 में ‘पठान’ और ‘जवान’ के साथ उन्होंने जो वापसी की उसने पूरी इंडस्ट्री की सोच बदल दी। एक्टर्स को समझ आ गया कि स्क्रीन से गायब रहने का मतलब स्टारडम का खत्म होना नहीं बल्कि वापसी की भूख जगाना है।

    दूसरी ओर पंकज त्रिपाठी और आर. माधवन जैसे कलाकारों के लिए ब्रेक का अर्थ ‘क्रिएटिव रिफ्रेशमेंट’ है। माधवन ने खुद स्वीकार किया कि जब रोल एक जैसे होने लगें तो रिसर्च और खुद पर काम करना जरूरी हो जाता है। वहीं पंकज त्रिपाठी का साफ कहना है कि वे केवल ईएमआई (EMI) भरने के लिए मशीन की तरह काम नहीं करना चाहते। वे अपनी ऊर्जा केवल उन्हीं किरदारों में लगाना चाहते हैं जो दर्शकों और उनके भीतर के कलाकार को संतुष्ट कर सकें। अब कलाकार ‘क्वांटिटी’ से ज्यादा ‘क्वालिटी’ को अहमियत दे रहे हैं।

    कोरोना काल के बाद दर्शकों का मिजाज भी बदला है। अब फिल्में स्टार पावर से नहीं बल्कि ठोस कहानी से चलती हैं। अक्षय कुमार और आमिर खान जैसे बड़े सितारों की फिल्मों का फ्लॉप होना इस बात का सबूत है कि दर्शक अब कुछ नया चाहते हैं। यही वजह है कि विक्रांत मैसी और जाकिर खान जैसे कलाकार मेंटल हेल्थ और फैमिली टाइम को प्राथमिकता दे रहे हैं। विक्रांत अपनी व्यक्तिगत और पेशेवर जिंदगी में संतुलन चाहते हैं तो जाकिर खान ने अपनी शारीरिक और मानसिक सेहत के लिए 2030 तक का लंबा ब्रेक लेकर सबको चौंका दिया है।

    अंत में आर्थिक सुरक्षा भी एक बड़ा कारण है। आज के दौर में एक्टर्स केवल एक्टिंग पर निर्भर नहीं हैं। सुनील शेट्टी के स्टार्टअप्स और प्रीति जिंटा की आईपीएल टीम जैसे उदाहरण बताते हैं कि कलाकार अब बिजनेस माइंडेड हो चुके हैं। उनके पास आय के कई स्रोत हैं जो उन्हें यह लग्जरी देते हैं कि वे काम का चुनाव अपनी शर्तों पर करें न कि मजबूरी में। कुल मिलाकर यह ‘ब्रेक’ इंडस्ट्री के एक मैच्योर परिपक्व दौर की शुरुआत है जहां कलाकार खुद को एक प्रोडक्ट नहीं बल्कि एक इंसान के तौर पर देख रहे हैं।