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  • 970 किलो मेफेड्रोन केस में बड़ा अपडेट, वीरेंद्र बसोया दुबई से भारत लाया गया; अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क की जांच तेज

    970 किलो मेफेड्रोन केस में बड़ा अपडेट, वीरेंद्र बसोया दुबई से भारत लाया गया; अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क की जांच तेज


    नई दिल्ली ।
    ड्रग्स तस्करी से जुड़े एक बड़े मामले में भारतीय जांच एजेंसियों को अहम सफलता मिली है। 970 किलो मेफेड्रोन की बरामदगी से जुड़े मामले में वांछित आरोपी वीरेंद्र सिंह बसोया को दुबई से भारत लाया गया है। उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी था और भारत सरकार की पहल के बाद संयुक्त अरब अमीरात से उसे डिपोर्ट करने की प्रक्रिया पूरी की गई।

    वीरेंद्र बसोया पर पुणे से जुड़े एक बड़े कथित ड्रग्स नेटवर्क में शामिल होने का आरोप है। जांच में सामने आए मामले की अनुमानित कीमत करीब 6,000 करोड़ रुपये बताई गई है। आरोप है कि इस नेटवर्क के जरिए बड़ी मात्रा में मेफेड्रोन की खेप तैयार कर उसे विदेश भेजने की योजना बनाई गई थी।

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बसोया की भारत वापसी को लेकर जानकारी साझा करते हुए कहा कि विदेशों में छिपे ड्रग्स तस्करों के खिलाफ कार्रवाई जारी है। उन्होंने नशीले पदार्थों के नेटवर्क को खत्म करने की दिशा में एजेंसियों की कार्रवाई और सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति पर जोर दिया।

    मामले की जांच के दौरान 21 फरवरी 2024 को दिल्ली में कार्रवाई की गई थी। इस कार्रवाई में दिवेश चरंजीत भूतानी और संदीपकुमार राजपाल बैसोया को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई थी। उनके कब्जे से करीब 970 किलो मेफेड्रोन बरामद होने का दावा किया गया था।

    जांच में आरोप लगाया गया कि गिरफ्तार किए गए आरोपी कथित तौर पर वीरेंद्र सिंह बसोया के निर्देश पर काम कर रहे थे। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया और कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तथा विदेश में मौजूद संदिग्धों की भूमिका की पड़ताल शुरू हुई।

    जांच एजेंसियों के अनुसार मेफेड्रोन की खेप को विदेश भेजने के लिए लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का इस्तेमाल किए जाने की योजना थी। इस सिलसिले में डेल्टा लॉजिस्टिक्स से जुड़े कुछ लोगों पर भी कार्रवाई की गई। संदीप हनुमानसिंह यादव और देवेंद्र रामफुल यादव को मामले में गिरफ्तार किए जाने की जानकारी है।

    मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ वीरेंद्र बसोया के बेटे ऋषभ का नाम भी सामने आया। उसके खिलाफ भी रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए जाने की जानकारी है। वह फिलहाल विदेश में बताया जा रहा है। जांच एजेंसियां अब कथित ड्रग्स नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और इसकी अंतरराष्ट्रीय कड़ियों की जानकारी जुटाने में लगी हैं।

    वीरेंद्र बसोया की भारत वापसी को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वह लंबे समय से देश से बाहर था और उसके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तलाश की प्रक्रिया चल रही थी। उसके भारत आने के बाद जांच एजेंसियों को मामले की कथित साजिश, नेटवर्क के संचालन और विदेशों तक नशीले पदार्थ पहुंचाने की योजना से जुड़े कई सवालों के जवाब हासिल करने का अवसर मिल सकता है।

    जांच एजेंसियां अब बसोया से मामले में उसकी कथित भूमिका और अन्य आरोपियों से संबंधों को लेकर पूछताछ कर सकती हैं। साथ ही बरामद मेफेड्रोन की खेप, उसके स्रोत, तैयार करने की प्रक्रिया और कथित अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े पहलुओं की भी जांच आगे बढ़ सकती है।

    हालांकि, जांच में लगाए गए आरोपों को अदालत में अंतिम रूप से साबित किया जाना बाकी है। किसी भी आरोपी की कानूनी जिम्मेदारी का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगा। फिलहाल बसोया की भारत वापसी के बाद इस मामले में जांच और कानूनी कार्रवाई के अगले चरण पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

  • रतलाम में एमडी ड्रग फैक्ट्री का भंडाफोड़: आधी रात पुलिस का छापा. लाखों की ड्रग्स और हथियार जब्त. 10 से ज्यादा आरोपी गिरफ्तार

    रतलाम में एमडी ड्रग फैक्ट्री का भंडाफोड़: आधी रात पुलिस का छापा. लाखों की ड्रग्स और हथियार जब्त. 10 से ज्यादा आरोपी गिरफ्तार


    रतलाम । मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में पुलिस ने नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल की है। जिले के कालूखेड़ा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम चिकलाना में संचालित एक गुप्त एमडी ड्रग मेफेड्रोन फैक्ट्री का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। यह कार्रवाई आधी रात को की गई. जिसमें भारी मात्रा में तैयार ड्रग्स. कच्चा माल. मशीनरी और अवैध हथियार बरामद किए गए हैं। इस मामले में पुलिस ने 10 से अधिक आरोपियों को हिरासत में लिया है।जानकारी के अनुसार. कालूखेड़ा थाना पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि ग्राम चिकलाना में एक मकान के भीतर अवैध रूप से एमडी ड्रग बनाने का काम चल रहा है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए जावरा और कालूखेड़ा थाने की संयुक्त पुलिस टीम का गठन किया गया। पूरी योजना के साथ पुलिस बल ने रात के समय मकान पर छापा मारा। जब पुलिस टीम अंदर पहुंची तो वहां ड्रग बनाने की पूरी फैक्ट्री सक्रिय हालत में मिली।

    मकान के भीतर बड़ी मात्रा में केमिकल. ड्रग तैयार करने की मशीनें. उपकरण और तैयार एमडी ड्रग्स रखी हुई थीं। पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में एमडी ड्रग्स जब्त की हैं. जिनकी अनुमानित बाजार कीमत लाखों से लेकर करोड़ों रुपये तक बताई जा रही है। इसके अलावा छापेमारी के दौरान कुछ अवैध हथियार भी बरामद किए गए हैं. जिससे इस नेटवर्क की गंभीरता और आपराधिक पृष्ठभूमि का अंदाजा लगाया जा रहा है।प्रारंभिक जांच में पुलिस ने मौके से करीब 10 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है। सभी आरोपियों को पूछताछ के लिए थाने लाया गया है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यह ड्रग फैक्ट्री कब से संचालित हो रही थी. इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं और इसका नेटवर्क किन-किन जिलों या राज्यों तक फैला हुआ है।

    पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यह फैक्ट्री सिर्फ स्थानीय स्तर पर ही नहीं. बल्कि अन्य जिलों में भी एमडी ड्रग की सप्लाई करने वाले बड़े नेटवर्क से जुड़ी हो सकती है। इस कार्रवाई को नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। एसपी रतलाम और संबंधित थाना प्रभारी ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि मामले में NDPS एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया गया है।
    फिलहाल पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर यह जानने की कोशिश कर रही है कि ड्रग बनाने का कच्चा माल कहां से आता था. तैयार ड्रग्स की सप्लाई किन-किन जगहों पर की जाती थी और इस पूरे नेटवर्क के पीछे कौन बड़े सरगना हैं। पुलिस का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।रतलाम पुलिस की इस कार्रवाई से नशे के अवैध कारोबार में लिप्त लोगों में हड़कंप मच गया है और इसे ड्रग माफिया के खिलाफ एक बड़ी चोट के रूप में देखा जा रहा है।

  • पौधों की नर्सरी में बन रहा था नशे का कारोबार: नारकोटिक्स विभाग ने मारा छापा, 10 करोड़ की MD ड्रग्स बरामद

    पौधों की नर्सरी में बन रहा था नशे का कारोबार: नारकोटिक्स विभाग ने मारा छापा, 10 करोड़ की MD ड्रग्स बरामद


    इंदौर । मध्य प्रदेश में नशे के कारोबार पर नकेल कसने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है, लेकिन अपराधी इसके बावजूद लगातार नए तरीके अपना रहे हैं। शनिवार को आगर मालवा में नारकोटिक्स विभाग ने एक बड़ी सफलता प्राप्त की, जब उन्होंने नर्सरी की आड़ में चल रहे नशे के नेटवर्क का भंडाफोड़ किया। इस छापे में 10 करोड़ रुपए से अधिक कीमत की मेफेड्रोन ड्रग्स बरामद की गई।यह कार्रवाई उज्जैन नारकोटिक्स टीम को मिली सूचना पर आधारित थी, जिसमें बताया गया था कि आगर मालवा के आमला क्षेत्र स्थित ‘तीर्थ’ हर्बल फार्म हाउस में नर्सरी के नाम पर नशे का कारोबार चल रहा है। टीम को यह भी जानकारी मिली थी कि वहां पर ड्रग्स की बड़ी खेप आने वाली थी, जिसके बाद टीम ने तड़के चार बजे फार्म हाउस पर छापा मारा।

    नारकोटिक्स विभाग की टीम ने फार्म हाउस में जब जांच की, तो वहां कुछ असामान्य गतिविधियाँ पाई गईं। टीम को वहां नर्सरी के बीच एक पूरी लैब मिली, जहां मेफेड्रोन और अन्य नशीली दवाओं का निर्माण हो रहा था। इस लैब को तुरंत ध्वस्त कर दिया गया और वहां काम कर रहे कुछ संदिग्ध व्यक्तियों को गिरफ्तार कर लिया गया।छापे के दौरान टीम ने कुल 31 किलो 250 ग्राम मेफेड्रोन ड्रग्स बरामद की। इसके अलावा, 600 किलो विभिन्न प्रकार के केमिकल्स, जैसे MDC, MMA, ट्राई थेला माईन, सोडियम कार्बोनेट और लैब की अन्य सामग्री भी बरामद की गई। इस सबका बाजार मूल्य लगभग 10 करोड़ रुपए बताया जा रहा है। विभाग का मानना है कि अगर ये ड्रग्स बाजार में पहुंच जाते, तो इसकी कीमत कहीं अधिक हो सकती थी।

    नारकोटिक्स विभाग के अधीक्षक वी एस कुमार ने बताया कि यह कार्रवाई नशे के कारोबार को रोकने के लिए एक बड़ी सफलता है और इससे जुड़े अपराधियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। विभाग अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और उनके तारों को खंगालने में जुटा है। नशे के कारोबार में इस्तेमाल होने वाली इस तरह की साजिशें न केवल समाज के लिए खतरनाक हैं, बल्कि इससे युवा पीढ़ी का भविष्य भी दांव पर लगता है। हालांकि, इस कार्रवाई ने नशे के खिलाफ चल रहे अभियानों को एक नई दिशा दी है, और उम्मीद जताई जा रही है कि इससे नशे के व्यापारियों में खलबली मच सकती है।