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  • .ऑटो सेक्टर में कारोबार का नया दौर, बैटरी से चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तक कंपनियों में बढ़ा निवेश

    .ऑटो सेक्टर में कारोबार का नया दौर, बैटरी से चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तक कंपनियों में बढ़ा निवेश


    नई दिल्ली। भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर में 2026 की तीसरी तिमाही के दौरान निवेश गतिविधियों में उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई। इस अवधि में कुल 1.7 अरब डॉलर के 33 सौदे हुए जबकि पिछली तिमाही में 71.7 करोड़ डॉलर के 20 सौदे दर्ज किए गए थे। बुधवार को जारी ग्रांट थॉर्नटन भारत की रिपोर्ट के मुताबिक पिछली तिमाही की तुलना में सौदों की संख्या में 65 प्रतिशत और कुल मूल्य में 131 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इस तेजी के पीछे विलय एवं अधिग्रहण यानी एमएंडए निजी इक्विटी निवेश वेंचर कैपिटल और सार्वजनिक बाजार से दोबारा पूंजी जुटाने की गतिविधियों में बढ़ोतरी प्रमुख वजह रही। रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि भारत का ऑटोमोबाइल उद्योग अब पारंपरिक वाहन निर्माण से आगे बढ़कर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और नई तकनीक पर आधारित कारोबार की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है।

    इलेक्ट्रिक वाहनों और नई तकनीक पर निवेशकों की नजर

    तीसरी तिमाही में इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ता रुझान निवेश का प्रमुख विषय बना रहा। निवेशकों ने इलेक्ट्रिक वाहन निर्माताओं के साथ बैटरी तकनीक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर मोबिलिटी प्लेटफॉर्म और ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी से जुड़ी कंपनियों में पूंजी लगाई। रिपोर्ट के अनुसार निवेशक ऐसी कंपनियों को प्राथमिकता दे रहे हैं जिनका कारोबार बड़े स्तर पर विस्तार कर सकता है और जिनके पास दूसरों से अलग तकनीक या मजबूत कारोबारी मॉडल है। भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती संभावनाओं और परिवहन व्यवस्था में हो रहे बदलावों ने इन क्षेत्रों को निवेश के लिहाज से महत्वपूर्ण बना दिया है। अब निवेश केवल कार और दोपहिया वाहन बनाने वाली कंपनियों तक सीमित नहीं है बल्कि उन व्यवसायों पर भी ध्यान दिया जा रहा है जो इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के पूरे ढांचे को मजबूत करते हैं।

    एमएंडए और निजी निवेश के तहत 808 मिलियन डॉलर के सौदे

    रिपोर्ट के मुताबिक तीसरी तिमाही में विलय एवं अधिग्रहण तथा निजी इक्विटी और वेंचर कैपिटल गतिविधियों के तहत कुल 808 मिलियन डॉलर के 28 सौदे हुए। वहीं केवल एमएंडए गतिविधियों के अंतर्गत 389 मिलियन डॉलर के 12 सौदे दर्ज किए गए। पिछली तिमाही में एमएंडए के तहत 138 मिलियन डॉलर के पांच सौदे हुए थे। इससे पता चलता है कि कंपनियां अपनी तकनीकी क्षमता बढ़ाने और कारोबार का विस्तार करने के लिए अधिग्रहण तथा रणनीतिक साझेदारी जैसे विकल्पों पर जोर दे रही हैं। निवेशकों का रुझान उन कारोबारों की ओर है जो भविष्य में इलेक्ट्रिक वाहनों और आधुनिक परिवहन व्यवस्था की जरूरतों को पूरा कर सकें।

    घरेलू सौदों की रही बड़ी हिस्सेदारी

    तीसरी तिमाही में घरेलू सौदे निवेश गतिविधियों के प्रमुख चालक बने रहे। कुल सौदों की संख्या में इनकी हिस्सेदारी 75 प्रतिशत रही जबकि कुल सौदा मूल्य में घरेलू सौदों का योगदान 87 प्रतिशत दर्ज किया गया। रणनीतिक निवेश मुख्य रूप से इलेक्ट्रिक वाहन निर्माताओं मोबिलिटी प्लेटफॉर्म ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी कंपनियों और ऑटो कंपोनेंट बनाने वाली कंपनियों में केंद्रित रहा। यह रुझान बताता है कि कंपनियां नई क्षमताएं हासिल करने और मोबिलिटी इकोसिस्टम में अपनी स्थिति मजबूत करने पर ध्यान दे रही हैं।

    ऑटो सेक्टर में निवेश के नए चक्र के संकेत

    ग्रांट थॉर्नटन भारत में ऑटोमोटिव एवं ईवी इंडस्ट्री के लीडर और पार्टनर साकेत मेहरा के अनुसार ऑटोमोबाइल सेक्टर निवेश के एक नए चक्र में प्रवेश कर रहा है। यह बदलाव मोबिलिटी क्षेत्र में हो रहे व्यापक परिवर्तन से प्रेरित है। अब पूंजी वाहन निर्माताओं के अलावा बैटरी तकनीक चार्जिंग नेटवर्क ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी और मोबिलिटी प्लेटफॉर्म जैसे क्षेत्रों में भी पहुंच रही है। निवेशक ऐसी कंपनियों को समर्थन देना चाहते हैं जो भारत में परिवहन के भविष्य के लिए जरूरी तकनीक और बुनियादी ढांचा विकसित कर रही हैं। तीसरी तिमाही के आंकड़े दर्शाते हैं कि निवेशक फंडिंग के मामले में चुनिंदा कंपनियों पर ध्यान केंद्रित करने के बावजूद भारत के मोबिलिटी और इलेक्ट्रिफिकेशन क्षेत्र की दीर्घकालिक संभावनाओं को लेकर भरोसा बनाए हुए हैं।

  • अडानी ग्रुप की अंबुजा सीमेंट ने जेपी सीमेंट के लिए ₹580 करोड़ की बोली लगाई, लेकिन डील क्यों फंसी?

    अडानी ग्रुप की अंबुजा सीमेंट ने जेपी सीमेंट के लिए ₹580 करोड़ की बोली लगाई, लेकिन डील क्यों फंसी?




    नई दिल्ली । अडानी ग्रुप की कंपनी अंबुजा सीमेंट ने दिवालिया जेपी सीमेंट कॉर्पोरेशन के लिए 580 करोड़ रुपये की बोली लगाई है। इस प्रक्रिया में दूसरी बोली लगाने वाली माई होम ग्रुप ने 300 करोड़ रुपये का ऑफर देकर खुद को बाहर कर लिया है।

    क्रेडिटर्स के अनुसार कंपनी का लिक्विडेशन वैल्यू 880 करोड़ रुपये तय किया गया है, जबकि अंबुजा सीमेंट का मौजूदा ऑफर इससे काफी कम है। इसी कारण लेनदार अब अडानी ग्रुप से अधिक राशि की मांग को लेकर बातचीत कर रहे हैं।

    डील अटकने की वजह
    रिपोर्ट के मुताबिक सबसे बड़ी बाधा लिक्विडेशन वैल्यू और बोली के बीच का अंतर है। लिक्विडेशन वैल्यू 880 करोड़ रुपये है, जबकि अंबुजा का ऑफर 580 करोड़ रुपये है—यानी लगभग 300 करोड़ रुपये कम।

    लिक्विडेशन वैल्यू वह राशि होती है, जो कंपनी की संपत्तियों को अलग-अलग बेचने पर मिल सकती है। आम तौर पर इससे कम बोली मिलने पर लेनदार टुकड़ों में बिक्री को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन इस मामले में वे अभी भी अडानी ग्रुप से बेहतर ऑफर की उम्मीद कर रहे हैं।

    जेपी सीमेंट पर कर्ज
    आधिकारिक जानकारी के अनुसार जेपी सीमेंट पर कुल कर्ज 3,361 करोड़ रुपये है। इसमें 2,892 करोड़ रुपये सुरक्षित लेनदारों का और 469 करोड़ रुपये असुरक्षित लेनदारों का कर्ज शामिल है। कंपनी को जुलाई 2024 में दिवालिया घोषित किया गया था और यह मामला स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की याचिका पर शुरू हुआ था।

    पहले भी कम ऑफर खारिज
    पिछले वर्ष नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी (NARCL) ने 227 करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिया था, जिसे क्रेडिटर्स ने बेहद कम बताते हुए अस्वीकार कर दिया था।

    जेपी सीमेंट की संपत्तियां
    जेपी सीमेंट के पास सालाना 5 मिलियन टन उत्पादन क्षमता है। इसके अलावा कंपनी के पास दो कैप्टिव पावर प्लांट हैं आंध्र प्रदेश में 35 मेगावाट का चालू प्लांट और 25 मेगावाट का निर्माणाधीन प्लांट। कर्नाटक के शाहाबाद में 1.2 मिलियन टन क्षमता का सीमेंट प्लांट फिलहाल बंद है, साथ ही 60 मेगावाट का पावर प्लांट भी मौजूद है।

    अडानी ग्रुप का पिछला रिकॉर्ड
    हाल ही में NCLT ने अडानी ग्रुप की 14,535 करोड़ रुपये की समाधान योजना को जेपी एसोसिएट्स के लिए मंजूरी दी थी। उस प्रक्रिया में NARCL के पास 85% वोटिंग शेयर होने के बावजूद उसने अडानी के पक्ष में मतदान किया था, जबकि वेदांता ने उससे 3,400 करोड़ रुपये अधिक का प्रस्ताव दिया था।
    अब निगाहें इस बात पर हैं कि अंबुजा सीमेंट अपना ऑफर बढ़ाती है या नहीं। यदि बोली लिक्विडेशन वैल्यू के करीब नहीं पहुंचती, तो कंपनी को अलग-अलग हिस्सों में बेचने की संभावना बन सकती है। फिलहाल लेन-देन और बातचीत जारी है।