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  • वजन घटाने से लेकर दिल को मजबूत बनाने तक, ओट्स बना रहा हेल्दी लाइफस्टाइल का सबसे भरोसेमंद सुपरफूड

    वजन घटाने से लेकर दिल को मजबूत बनाने तक, ओट्स बना रहा हेल्दी लाइफस्टाइल का सबसे भरोसेमंद सुपरफूड


    नई दिल्ली । आधुनिक जीवनशैली में स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती जागरूकता के बीच लोग ऐसे खाद्य पदार्थों की तलाश कर रहे हैं जो पौष्टिक होने के साथ-साथ आसानी से तैयार भी हो जाएं। इसी कारण ओट्स आज हेल्दी ब्रेकफास्ट की सूची में सबसे लोकप्रिय विकल्पों में शामिल हो चुका है। पोषण विशेषज्ञ भी इसे संतुलित आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं। फाइबर, प्रोटीन, विटामिन और खनिज तत्वों से भरपूर ओट्स शरीर को कई प्रकार के स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार ओट्स का नियमित सेवन वजन नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसमें मौजूद घुलनशील फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराता है, जिससे बार-बार भूख लगने की समस्या कम होती है। यही कारण है कि वजन घटाने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए इसे आदर्श खाद्य पदार्थ माना जाता है। ओवरईटिंग की आदत पर नियंत्रण रखने में भी ओट्स मददगार साबित हो सकता है।

    दिल की सेहत के लिए भी ओट्स को बेहद लाभकारी माना जाता है। इसमें पाया जाने वाला बीटा-ग्लूकन नामक विशेष फाइबर शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करने में सहायता करता है। नियमित रूप से ओट्स का सेवन करने से हृदय संबंधी जोखिम कम हो सकते हैं और रक्त वाहिकाओं की कार्यक्षमता बेहतर बनी रह सकती है। इसी वजह से इसे हार्ट-फ्रेंडली फूड की श्रेणी में रखा जाता है।

    पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाए रखने में भी ओट्स की महत्वपूर्ण भूमिका है। पर्याप्त मात्रा में फाइबर होने के कारण यह आंतों की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाता है। इससे भोजन का पाचन सुचारु रूप से होता है और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत मिल सकती है। स्वस्थ पाचन तंत्र शरीर की समग्र कार्यक्षमता को भी सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है।

    ओट्स को ऊर्जा का अच्छा स्रोत भी माना जाता है। इसमें मौजूद जटिल कार्बोहाइड्रेट धीरे-धीरे पचते हैं, जिससे शरीर को लंबे समय तक लगातार ऊर्जा मिलती रहती है। सुबह के नाश्ते में ओट्स शामिल करने से दिनभर सक्रियता बनी रह सकती है और थकान अपेक्षाकृत कम महसूस होती है। यही वजह है कि खिलाड़ी और फिटनेस के प्रति जागरूक लोग इसे अपनी डाइट का हिस्सा बनाते हैं।

    ब्लड शुगर नियंत्रण के लिहाज से भी ओट्स उपयोगी माना जाता है। इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स अपेक्षाकृत कम होता है, जिससे रक्त में शर्करा का स्तर अचानक नहीं बढ़ता। यही कारण है कि मधुमेह से पीड़ित लोगों के लिए भी इसे संतुलित मात्रा में लाभकारी विकल्प माना जाता है। हालांकि किसी भी विशेष स्वास्थ्य स्थिति में चिकित्सकीय सलाह आवश्यक होती है।

    त्वचा की सेहत के लिए भी ओट्स फायदे पहुंचा सकता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और सूजनरोधी गुण त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं। नियमित सेवन से त्वचा की प्राकृतिक चमक बनाए रखने में सहायता मिल सकती है और ड्रायनेस या हल्की जलन जैसी समस्याओं में भी राहत मिल सकती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि संतुलित आहार और सक्रिय जीवनशैली के साथ ओट्स का नियमित सेवन समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में योगदान दे सकता है। हालांकि किसी एक खाद्य पदार्थ को चमत्कारी समाधान मानने के बजाय संतुलित और विविध आहार को प्राथमिकता देना हमेशा बेहतर विकल्प माना जाता है।

  • बेली फैट कम करने के लिए कौन ज्यादा असरदार? जीरा पानी और मेथी पानी को लेकर एक्सपर्ट ने दूर किया बड़ा कन्फ्यूजन

    बेली फैट कम करने के लिए कौन ज्यादा असरदार? जीरा पानी और मेथी पानी को लेकर एक्सपर्ट ने दूर किया बड़ा कन्फ्यूजन

    नई दिल्ली। आजकल वजन कम करने के लिए लोग केवल जिम और डाइटिंग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि घरेलू उपायों और डिटॉक्स ड्रिंक्स की लोकप्रियता भी तेजी से बढ़ी है। खासकर सुबह खाली पेट पी जाने वाली कुछ पारंपरिक ड्रिंक्स लोगों के बीच काफी चर्चा में रहती हैं। इनमें जीरा पानी और मेथी पानी का नाम सबसे ऊपर आता है। सोशल मीडिया और हेल्थ ट्रेंड्स के दौर में इन दोनों ड्रिंक्स को लेकर कई दावे किए जाते हैं कि ये तेजी से वजन कम करने, पेट की चर्बी घटाने और शरीर को डिटॉक्स करने में मदद कर सकती हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इन दोनों को लेकर लोगों के बीच कई गलतफहमियां भी मौजूद हैं।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार जीरा पानी और मेथी पानी दोनों के अपने-अपने फायदे हैं, लेकिन दोनों का काम करने का तरीका अलग है। इसलिए यह कहना कि इनमें से कोई एक सभी लोगों के लिए सबसे बेहतर है, पूरी तरह सही नहीं माना जा सकता। व्यक्ति की शारीरिक स्थिति, खानपान, पाचन क्षमता और लाइफस्टाइल के आधार पर इनके प्रभाव अलग-अलग हो सकते हैं।

    जीरा पानी को लंबे समय से पाचन सुधारने वाले घरेलू उपाय के रूप में देखा जाता रहा है। माना जाता है कि यह पेट से जुड़ी समस्याओं जैसे गैस, ब्लोटिंग और अपच में राहत पहुंचाने में मदद कर सकता है। जब पाचन बेहतर होता है तो शरीर भोजन को सही तरीके से प्रोसेस कर पाता है, जिससे वजन नियंत्रित रखने में अप्रत्यक्ष सहायता मिल सकती है। इसके अलावा शरीर में जमा अतिरिक्त पानी और भारीपन की समस्या कम होने से हल्कापन महसूस हो सकता है।

    दूसरी तरफ मेथी पानी का प्रभाव भूख नियंत्रण से जोड़कर देखा जाता है। इसमें मौजूद फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस करा सकता है, जिससे बार-बार खाने की इच्छा कम हो सकती है। जिन लोगों को अनावश्यक स्नैकिंग या ओवरईटिंग की आदत होती है, उनके लिए यह उपयोगी साबित हो सकता है। इसके अलावा ब्लड शुगर संतुलन में मदद मिलने से भी अचानक लगने वाली भूख कम हो सकती है।

    हालांकि विशेषज्ञ साफ कहते हैं कि इन ड्रिंक्स को वजन घटाने का जादुई उपाय मानना सही नहीं होगा। केवल जीरा या मेथी पानी पीने से तेजी से फैट लॉस होने की उम्मीद करना वास्तविकता से दूर हो सकता है। वजन घटाने के लिए संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, नियमित शारीरिक गतिविधि, पानी का सही सेवन और तनाव नियंत्रण जैसे कई कारक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि इन ड्रिंक्स का सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। अधिक सेवन करने पर कुछ लोगों को पेट संबंधी दिक्कतें या अन्य परेशानियां हो सकती हैं। खासकर गर्भवती महिलाओं, मधुमेह की दवा लेने वालों और किसी पुरानी बीमारी से जूझ रहे लोगों को ऐसे घरेलू उपाय अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए। स्वस्थ जीवनशैली की जगह कोई एक ड्रिंक नहीं ले सकती, बल्कि यह केवल अच्छी आदतों को सपोर्ट करने का काम करती है।

  • वजन घटाने का आसान तरीका, इन 6 फ्लेवर वाली ग्रीन टी से मिलेगा डबल फायदा..

    वजन घटाने का आसान तरीका, इन 6 फ्लेवर वाली ग्रीन टी से मिलेगा डबल फायदा..

    नई दिल्ली:   वजन कम करने के लिए लोग अक्सर डाइटिंग, जिम और तरह-तरह के हेल्दी ड्रिंक्स का सहारा लेते हैं, लेकिन इनमें सबसे आसान और असरदार विकल्पों में से एक ग्रीन टी है। यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को तेज करने में मदद करती है और फैट बर्निंग प्रक्रिया को सपोर्ट करती है। हालांकि, रोज एक ही तरह की ग्रीन टी पीना कई लोगों के लिए बोरिंग हो जाता है, जिसके कारण वे इसे छोड़ देते हैं। ऐसे में ग्रीन टी को अलग-अलग फ्लेवर के साथ पीना एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है, जिससे स्वाद भी बदलता है और सेहत को अतिरिक्त फायदे भी मिलते हैं।

    लेमन ग्रीन टी एक लोकप्रिय विकल्प है जिसमें ग्रीन टी के साथ नींबू का रस मिलाया जाता है। इसमें मौजूद विटामिन सी शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करता है और मेटाबॉलिज्म को और अधिक सक्रिय बनाता है। यह ड्रिंक शरीर से टॉक्सिन्स निकालने में मदद करने के साथ-साथ ताजगी भी प्रदान करती है, जिससे दिनभर एनर्जी बनी रहती है।

    हनी ग्रीन टी उन लोगों के लिए बेहतरीन विकल्प है जिन्हें ग्रीन टी का कड़वा स्वाद पसंद नहीं आता। इसमें थोड़ा सा शहद मिलाने से इसका स्वाद संतुलित हो जाता है और यह अधिक स्वादिष्ट बन जाती है। शहद में मौजूद प्राकृतिक गुण शरीर की इम्युनिटी को मजबूत करने में मदद करते हैं और यह गले को भी आराम पहुंचाती है।

    दालचीनी ग्रीन टी भी वजन घटाने के लिए काफी प्रभावी मानी जाती है। इसमें दालचीनी मिलाने से ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में मदद मिलती है और यह फैट बर्निंग प्रक्रिया को तेज करती है। इसका नियमित सेवन शरीर के मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है।

    पुदीना ग्रीन टी शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ पाचन तंत्र को भी सुधारती है। यह खासकर गर्मियों में बहुत फायदेमंद मानी जाती है और पेट की समस्याओं को कम करने में मदद करती है।

    अदरक ग्रीन टी वजन घटाने के लिए एक शक्तिशाली विकल्प है। अदरक में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर की सूजन को कम करने में मदद करते हैं और पाचन को बेहतर बनाते हैं, जिससे फैट तेजी से बर्न होता है।

    सेब और दालचीनी वाली ग्रीन टी भी एक स्वादिष्ट और हेल्दी विकल्प है। इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व शरीर को एनर्जी देने के साथ-साथ फैट मेटाबॉलिज्म को भी तेज करते हैं।

    इन अलग-अलग फ्लेवर वाली ग्रीन टी को अपनी डेली रूटीन में शामिल करके न सिर्फ वजन घटाने की प्रक्रिया को आसान बनाया जा सकता है, बल्कि इसे स्वादिष्ट और दिलचस्प भी बनाया जा सकता है।

  • सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीने की आदत: सिर्फ 15 दिन में दिखेंगे शरीर में ये 5 बड़े बदलाव

    सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीने की आदत: सिर्फ 15 दिन में दिखेंगे शरीर में ये 5 बड़े बदलाव


    नई दिल्ली । आज की तेज रफ्तार जिंदगी और अनियमित खानपान के चलते कब्ज एसिडिटी और बढ़ता वजन जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। ऐसे में लोग अक्सर महंगी दवाइयों और सप्लीमेंट्स का सहारा लेते हैं जबकि एक बेहद आसान और प्रभावी उपाय हमारी दिनचर्या में ही छिपा है सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीना। आयुर्वेद और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह छोटी-सी आदत शरीर को भीतर से साफ करने और कई समस्याओं को दूर करने में बेहद कारगर साबित होती है।

    सुबह उठते ही एक गिलास गुनगुना पानी पीने से शरीर में मेटाबॉलिज्म सक्रिय हो जाता है। जब आप गुनगुना पानी पीते हैं तो शरीर का तापमान थोड़ा बढ़ता है जिससे थर्मोजेनेसिस की प्रक्रिया शुरू होती है। इसका सीधा असर कैलोरी बर्निंग पर पड़ता है और वजन कम करने में मदद मिलती है। नियमित रूप से 15 दिनों तक यह आदत अपनाने पर पेट की अतिरिक्त चर्बी में कमी महसूस होने लगती है और शरीर हल्का लगने लगता है।

    गुनगुना पानी शरीर को डिटॉक्स करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। रातभर शरीर में जमा हुए विषैले तत्व सुबह पानी के माध्यम से बाहर निकलते हैं। यह प्रक्रिया किडनी और पसीने के जरिए शरीर की गहराई से सफाई करती है। परिणामस्वरूप व्यक्ति दिनभर तरोताजा और ऊर्जावान महसूस करता है।

    यदि आप लंबे समय से कब्ज या पाचन संबंधी समस्याओं से परेशान हैं तो गुनगुना पानी आपके लिए एक सरल और प्रभावी उपाय हो सकता है। यह आंतों की गति को सुचारू बनाता है और मल त्याग को आसान करता है। नियमित सेवन से गैस एसिडिटी और पेट फूलने जैसी समस्याओं में भी राहत मिलती है। करीब दो हफ्तों में पाचन तंत्र बेहतर तरीके से काम करने लगता है।

    इस आदत का असर सिर्फ शरीर के अंदर ही नहीं बल्कि बाहरी रूप पर भी दिखाई देता है। जब शरीर अंदर से साफ होता है तो त्वचा पर प्राकृतिक निखार आता है। गुनगुना पानी ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है जिससे त्वचा की कोशिकाओं को पर्याप्त पोषण मिलता है। इससे मुंहासे कम होते हैं और चेहरे पर एक अलग ही चमक नजर आती है।

    इसके अलावा गुनगुना पानी बालों की सेहत के लिए भी लाभकारी माना जाता है। यह बालों की जड़ों को पोषण देकर उन्हें मजबूत और चमकदार बनाता है। वहीं जो लोग सुबह उठते ही साइनस या बंद नाक की समस्या से परेशान रहते हैं उनके लिए यह आदत राहत देने वाली हो सकती है। गुनगुना पानी म्यूकस को पतला कर देता है जिससे सांस लेना आसान हो जाता है।

    कुल मिलाकर सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीना एक सरल लेकिन बेहद प्रभावी आदत है जो शरीर को स्वस्थ ऊर्जावान और संतुलित बनाए रखने में मदद करती है। यदि इसे नियमित रूप से अपनाया जाए तो केवल 15 दिनों में इसके सकारात्मक परिणाम स्पष्ट रूप से महसूस किए जा सकते हैं।

  • दही: ब्लड प्रेशर कम करने और इम्यूनिटी बढ़ाने वाला सुपरफूड, जानें 12 हेल्थ बेनिफिट्स और सावधानियां

    दही: ब्लड प्रेशर कम करने और इम्यूनिटी बढ़ाने वाला सुपरफूड, जानें 12 हेल्थ बेनिफिट्स और सावधानियां


    नई दिल्ली । दही सेहत का खजाना है। इसमें प्रोटीन गुड फैट शुगर और प्रोबायोटिक्स की भरपूर मात्रा होती है जो न सिर्फ स्वादिष्ट है बल्कि गट हेल्थ इम्यूनिटी और मेटाबॉलिज्म को भी रीसेट करता है। इतना ही नहीं यह ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में भी मददगार है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित स्टडी बताती है कि नियमित दही खाने से हाई ब्लड प्रेशर का रिस्क 16–20% तक कम हो सकता है। हफ्ते में पांच या उससे अधिक बार संतुलित डाइट के साथ दही खाने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है।

    डॉ. संचयन रॉय सीनियर कंसल्टेंट इंटरनल मेडिसिन अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल दिल्ली के अनुसार दही में मौजूद जिंक सेलेनियम और विटामिन D संक्रमण पैदा करने वाले वायरस और बैक्टीरिया के खिलाफ सुरक्षा कवच का काम करते हैं। इससे इम्यूनिटी मजबूत होती है और शरीर में इंफ्लेमेशन कम होता है। नियमित सेवन से सर्दी-जुकाम से लेकर गंभीर बीमारियों का रिस्क घटता है।

    हार्ट हेल्थ के लिए भी दही बेहद फायदेमंद है। इसमें पोटेशियम और मैग्नीशियम मौजूद हैं जो शरीर से एक्स्ट्रा सोडियम को बाहर निकालकर ब्लड प्रेशर को संतुलित रखते हैं। प्रोबायोटिक्स बैड कोलेस्ट्रॉल LDLको कम करने और इंफ्लेमेशन घटाने में मदद करते हैं। इन गुणों के कारण दही हार्ट डिजीज का रिस्क कम कर सकता है।

    ब्लड प्रेशर कंट्रोल में दही कैसे मदद करता है? इसमें मौजूद बायोएक्टिव पेप्टाइड्स ब्लड प्रेशर बढ़ाने वाले एंजाइम्स की एक्टिविटी को कम करते हैं और ब्लड वेसल्स को रिलैक्स करते हैं। इससे ब्लड फ्लो बेहतर होता है और दबाव संतुलित रहता है। विशेष रूप से मिड एज महिलाओं और अधिक BMI वाले लोगों के लिए दही ज्यादा फायदेमंद साबित होता है।

    दही के नियमित सेवन से पाचन तंत्र भी मजबूत होता है। प्रोबायोटिक्स गट माइक्रोबायोम का संतुलन बनाए रखते हैं बैड बैक्टीरिया को बढ़ने से रोकते हैं और IBS कब्ज या ब्लोटिंग जैसी समस्याओं में राहत देते हैं। स्वस्थ गट माइक्रोबायोम मूड और ब्रेन फंक्शनिंग को भी प्रभावित करता है।

    दही खाने का सही समय दोपहर का माना जाता है क्योंकि इस समय पाचन क्षमता सबसे मजबूत होती है। खाली पेट दही खाने से पेट में एसिड बढ़ सकता है इसलिए इसे हमेशा मेन कोर्स के साथ साइड डिश के रूप में लें। मीठा या फ्लेवर्ड दही एक्स्ट्रा शुगर और प्रिजर्वेटिव्स के कारण नुकसानदेह हो सकता है।

    साथ ही दही स्किन और बालों के लिए भी लाभकारी है। इसमें मौजूद लैक्टिक एसिड और प्रोटीन स्किन की रंगत सुधारते हैं मॉइश्चर बनाए रखते हैं और बालों की जड़ें मजबूत करते हैं।हालांकि कुछ लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए। आर्थराइटिस अस्थमा किडनी डिजीज लैक्टोज इनटॉलेरेंस या गंभीर एसिडिटी वाले लोगों को दही सेवन डॉक्टर की सलाह पर ही करना चाहिए।

    दही खाने से ब्लड प्रेशर कम होता है इम्यूनिटी मजबूत होती है और यह शरीर को कई तरह की लाइफस्टाइल डिजीज से बचाने में मदद करता है। इसे अपनी डाइट में शामिल करना एक छोटी लेकिन असरदार हेल्थ हैबिट है।

  • सर्दियों में शरीर का सुरक्षा कवच है ब्राउन फैट मोटापा बढ़ाने नहींकैलोरी जलाने में करता है मदद

    सर्दियों में शरीर का सुरक्षा कवच है ब्राउन फैट मोटापा बढ़ाने नहींकैलोरी जलाने में करता है मदद


    नई दिल्ली । आमतौर पर फैट या वसा शब्द सुनते ही हमारे मन में मोटापे और बीमारियों का ख्याल आता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके शरीर में एक ऐसा गुड फैट भी है जो आपको मोटा करने के बजाय पतला रखने और बीमारियों से बचाने में मदद करता है मेडिकल साइंस की भाषा में इसे ब्राउन फैट कहा जाता है। विशेषज्ञों के अनुसारसर्दियों के मौसम में यह शरीर के लिए किसी सुरक्षा कवच से कम नहीं है।

    व्हाइट फैट बनाम ब्राउन फैट क्या है अंतर

    हमारे शरीर में मुख्य रूप से दो प्रकार के फैट पाए जाते हैं। पहला व्हाइट फैटजिसका काम शरीर में अतिरिक्त ऊर्जा को जमा करना है। जब हम जरूरत से ज्यादा कैलोरी लेते हैंतो वह व्हाइट फैट के रूप में जमा होकर मोटापे का कारण बनती है इसके विपरीतब्राउन फैट एक सक्रिय ऊतक है। इसमें प्रचुर मात्रा में माइटोकॉन्ड्रिया होते हैंजो इसे गहरा रंग देते हैं। ब्राउन फैट का मुख्य कार्य कैलोरी को स्टोर करना नहींबल्कि उसे जलाकर शरीर के लिए ऊष्मा पैदा करना है। जब शरीर को ठंड लगती हैतो यही ब्राउन फैट बर्न होकर हमें भीतर से गर्माहट देता है।

    सेहत के लिए क्यों है यह जरूरी

    ब्राउन फैट केवल शरीर को गर्म ही नहीं रखताबल्कि इसके कई स्वास्थ्य लाभ भी हैं मेटाबॉलिज्म में सुधार यह शरीर की चयापचय दर को बढ़ाता हैजिससे वजन नियंत्रित रहता है। ब्लड शुगर पर नियंत्रण ब्राउन फैट इंसुलिन सेंसिटिविटी को सुधारता है जिससे टाइप-2 डायबिटीज का खतरा कम होता है। तेजी से कैलोरी बर्न रिसर्च के अनुसारसक्रिय ब्राउन फैट सामान्य फैट की तुलना में कई गुना तेजी से कैलोरी जला सकता है। हृदय स्वास्थ्य यह खून से ट्राइग्लिसराइड्स और खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में भी सहायक हो सकता है।

    ब्राउन फैट की कमी के संकेत

    यदि किसी व्यक्ति के शरीर में ब्राउन फैट की कमी है और व्हाइट फैट की अधिकता हैतो उसे कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे लोगों को ठंड अधिक लगती हैवे जल्दी थक जाते हैं और उनका वजन तेजी से बढ़ने लगता है। मेटाबॉलिज्म धीमा होने के कारण उन्हें सुस्ती और इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

    कैसे करें इसे एक्टिवेट

    ब्राउन फैट किसी भोजन के जरिए सीधे शरीर में नहीं डाला जा सकताबल्कि इसे जीवनशैली के माध्यम से सक्रिय करना पड़ता हैठंड का संपर्क हल्की ठंड में रहने या ठंडे पानी से स्नान करने से शरीर का ब्राउन फैट सक्रिय हो जाता है। नियमित व्यायाम वर्कआउट करने से शरीर में इरिसिन नामक हार्मोन निकलता हैजो व्हाइट फैट को ब्राउन फैट में बदलने में मदद करता है।  संतुलित आहार पोषण युक्त भोजन और सही मात्रा में कैलोरी का सेवन इसे स्वस्थ बनाए रखता है। ब्राउन फैट हमारे शरीर की वह आंतरिक भट्टी है जो न केवल हमें कड़ाके की ठंड से बचाती हैबल्कि आधुनिक जीवनशैली की बीमारियों जैसे मोटापा और डायबिटीज से लड़ने में भी सक्षम है। फिट रहने के लिए जरूरी है कि हम अपनी जीवनशैली में सुधार कर इस गुड फैट को एक्टिव रखें।