Tag: Metals

  • शेयर बाजार में फिर बढ़ा दबाव, सेंसेक्स 429 अंक गिरा; मेटल और रियल्टी शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी दिखी

    शेयर बाजार में फिर बढ़ा दबाव, सेंसेक्स 429 अंक गिरा; मेटल और रियल्टी शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी दिखी

    नई दिल्ली:  भारतीय शेयर बाजार बुधवार के कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 429.11 अंक यानी 0.59 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 72,638.70 पर रहा। वहीं निफ्टी 173.05 अंक यानी 0.76 प्रतिशत गिरकर 22,603.05 पर बंद हुआ। बाजार में सबसे ज्यादा दबाव मेटल और रियल्टी शेयरों में देखने को मिला।

    सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो निफ्टी मेटल 2.33 प्रतिशत और निफ्टी रियल्टी 1.77 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। इसके अलावा निफ्टी ऑटो में 1.58 प्रतिशत, निफ्टी कमोडिटीज में 1.43 प्रतिशत, निफ्टी इंडिया डिफेंस में 1.41 प्रतिशत, निफ्टी आईटी में 1.34 प्रतिशत और निफ्टी पीएसई में 1.22 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई। इन क्षेत्रों में बिकवाली ने बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बढ़ाया।

    बुधवार को कुछ सेक्टरों ने बाजार की व्यापक कमजोरी के बीच बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी पीएसयू बैंक 1 प्रतिशत की तेजी के साथ बंद हुआ। निफ्टी मीडिया में 0.69 प्रतिशत और निफ्टी प्राइवेट बैंक में 0.08 प्रतिशत की बढ़त रही। इस तरह बैंकिंग क्षेत्र के कुछ हिस्सों में मजबूती दिखाई दी, जबकि ज्यादातर प्रमुख सेक्टर लाल निशान में रहे।

    मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में कारोबार एक जैसा नहीं रहा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 378.60 अंक यानी 0.63 प्रतिशत गिरकर 59,382.60 पर बंद हुआ। इसके विपरीत निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 58.25 अंक यानी 0.30 प्रतिशत की बढ़त के साथ 19,506.95 पर बंद हुआ। इससे बाजार के अलग-अलग हिस्सों में निवेशकों की गतिविधि में अंतर देखने को मिला।

    सेंसेक्स में शामिल शेयरों में कोटक महिंद्रा बैंक, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक और बजाज फाइनेंस बढ़त के साथ बंद हुए। दूसरी ओर टाइटन, बीईएल, एशियन पेंट्स, इन्फोसिस, एलएंडटी, टाटा स्टील, एमएंडएम, एचसीएल टेक, पावर ग्रिड, एनटीपीसी, इंडिगो, एचयूएल, सन फार्मा, मारुति सुजुकी, अल्ट्राटेक सीमेंट और टेक महिंद्रा में गिरावट रही।

    बाजार में गिरावट को लेकर जानकारों ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से उम्मीद के मुताबिक ब्याज दर बढ़ाए जाने के बाद घरेलू बाजार ने मौद्रिक नीति के रुख में बदलाव पर तेजी से प्रतिक्रिया दी। नीति रुख के न्यूट्रल से कैलिब्रेटेड टाइटनिंग की ओर जाने को ब्याज दर चक्र में बदलाव के संकेत के तौर पर देखा गया, जिसका असर निवेशकों की धारणा पर पड़ा।

    इसके अलावा अमेरिकी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की बैठक से पहले अमेरिकी यील्ड में बढ़ोतरी और डॉलर की मजबूती के बीच रुपया भी दबाव में रहा। विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार निकासी ने भी घरेलू बाजार पर दबाव बढ़ाया। इन वैश्विक और घरेलू कारकों के बीच बुधवार को शेयर बाजार में बिकवाली का रुख हावी रहा।

    ऊंची ब्याज दरों के माहौल में बैंकिंग शेयरों को मार्जिन से संभावित लाभ की उम्मीद का फायदा मिला और इस क्षेत्र के कुछ शेयरों ने बाजार की कमजोरी के विपरीत प्रदर्शन किया। हालांकि, बाजार के अधिकांश हिस्सों में बिकवाली का दबाव बना रहा और इसके चलते सेंसेक्स तथा निफ्टी दोनों गिरावट के साथ बंद हुए।

  • शेयर बाजार में लौटी तेजी, सेंसेक्स 299 अंक चढ़ा और निफ्टी 0.50 प्रतिशत बढ़कर बंद हुआ

    शेयर बाजार में लौटी तेजी, सेंसेक्स 299 अंक चढ़ा और निफ्टी 0.50 प्रतिशत बढ़कर बंद हुआ


    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार ने पिछले कारोबारी सत्र की गिरावट से उबरते हुए बुधवार को बढ़त के साथ कारोबार समाप्त किया। वैश्विक स्तर पर अमेरिकी-ईरान वार्ता की उम्मीदों के बीच कच्चे तेल की कीमतों के करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास स्थिर रहने से बाजार धारणा को कुछ सहारा मिला। इसके साथ ही घरेलू आर्थिक गतिविधियों में मजबूती के संकेतों ने भी निवेशकों के रुख को सकारात्मक बनाए रखा।

    कारोबार के अंत में सेंसेक्स 299.17 अंक यानी 0.40 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,828.25 के स्तर पर बंद हुआ। इसी तरह निफ्टी50 में 117.80 अंक यानी 0.50 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह 23,446.80 के स्तर पर पहुंच गया। इस तरह दोनों प्रमुख सूचकांकों ने पिछले सत्र की कमजोरी के बाद अच्छी वापसी की।

    व्यापक बाजार में भी खरीदारी का माहौल देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.70 प्रतिशत की बढ़त रही, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 0.89 प्रतिशत चढ़कर बंद हुआ। इससे संकेत मिला कि तेजी का असर केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों की सक्रियता बनी रही।

    सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो निफ्टी मेटल इंडेक्स 2.4 प्रतिशत की तेजी के साथ सबसे मजबूत प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों में रहा। इसके अलावा एफएमसीजी, पीएसयू बैंक, रियल्टी और सीमेंट से जुड़े शेयरों में भी एक प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई। बैंकिंग और मेटल शेयरों में खरीदारी ने बाजार को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई।

    दूसरी ओर, आईटी और मीडिया क्षेत्र दबाव में रहे। निफ्टी आईटी इंडेक्स में 0.87 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी मीडिया 0.50 प्रतिशत कमजोर होकर बंद हुआ। आईटी शेयरों में सुस्ती के कारण बाजार की कुल बढ़त ऊपरी स्तरों पर कुछ सीमित रही।

    निफ्टी50 के प्रमुख तेजी वाले शेयरों में बजाज फाइनेंस, हिंडाल्को, टाटा स्टील, अपोलो हॉस्पिटल्स और जेएसडब्ल्यू स्टील शामिल रहे। इनके अलावा ग्रासिम, नेस्ले इंडिया, आईटीसी, एलएंडटी, पावर ग्रिड और अदाणी पोर्ट्स में भी खरीदारी देखने को मिली। वहीं एचसीएल टेक, टाइटन, इंफोसिस, कोल इंडिया, टीसीएस, विप्रो, एनटीपीसी, बीईएल और ट्रेंट जैसे शेयरों में कमजोरी रही।

    बाजार की चाल पर नजर डालें तो कारोबारी सत्र के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों का असर बना रहा। मजबूत अमेरिकी डॉलर के बीच भारतीय रुपये पर भी दबाव देखने को मिला। हालांकि, सितंबर के फ्लैश पीएमआई के उम्मीद से बेहतर आंकड़ों ने घरेलू आर्थिक गतिविधियों को लेकर सकारात्मक संकेत दिए।

    महंगाई का दबाव बढ़े बिना आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार मजबूत रहने की उम्मीद ने निवेशकों के भरोसे को सहारा दिया। व्यापक बाजार में खरीदारी और एशियाई बाजारों की मजबूती के बीच घरेलू शेयरों में भी सकारात्मक रुख बना रहा। हालांकि, आईटी क्षेत्र की कमजोरी के कारण प्रमुख सूचकांकों की बढ़त दिन के ऊपरी स्तरों तक पूरी तरह कायम नहीं रह सकी।

  • चार सत्रों की गिरावट के बाद शेयर बाजार में लौटी तेजी, सेंसेक्स 362 अंक चढ़कर 76,500 के पार बंद

    चार सत्रों की गिरावट के बाद शेयर बाजार में लौटी तेजी, सेंसेक्स 362 अंक चढ़कर 76,500 के पार बंद

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार ने लगातार चार कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद शुक्रवार को राहत की सांस ली और बढ़त के साथ कारोबार समाप्त किया। घरेलू बाजार में मेटल और कमोडिटी शेयरों में खरीदारी का असर प्रमुख सूचकांकों पर दिखाई दिया। हालांकि ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली और मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण बाजार की तेजी सीमित रही।

    कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 362.57 अंक यानी 0.48 प्रतिशत की मजबूती के साथ 76,515.43 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 24.25 अंक यानी 0.10 प्रतिशत की बढ़त दर्ज करते हुए 23,897.70 पर पहुंच गया। लगातार गिरावट के बाद प्रमुख सूचकांकों में आई यह तेजी निवेशकों के लिए कुछ राहत लेकर आई।

    शुक्रवार के कारोबार में मेटल और कमोडिटी क्षेत्र बाजार की तेजी के प्रमुख आधार रहे। निफ्टी मेटल इंडेक्स में 1.07 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई और यह दिन के प्रमुख प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों में रहा। निफ्टी कमोडिटीज में भी 0.55 प्रतिशत की मजबूती देखने को मिली।

    इसके अलावा निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में 0.49 प्रतिशत और निफ्टी इंडिया डिफेंस में 0.39 प्रतिशत की बढ़त रही। निफ्टी मीडिया 0.30 प्रतिशत, निफ्टी प्राइवेट बैंक 0.28 प्रतिशत और निफ्टी ऑयल एंड गैस 0.21 प्रतिशत मजबूत होकर बंद हुए। निफ्टी पीएसई में भी मामूली 0.04 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।

    दूसरी ओर कई प्रमुख सेक्टरों में दबाव बना रहा। निफ्टी रियल्टी में 0.90 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि निफ्टी हेल्थकेयर 0.87 प्रतिशत और निफ्टी फार्मा 0.68 प्रतिशत कमजोर रहे। निफ्टी आईटी में 0.47 प्रतिशत, निफ्टी ऑटो में 0.45 प्रतिशत और निफ्टी पीएसयू बैंक में 0.44 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स भी 0.43 प्रतिशत नीचे रहा।

    व्यापक बाजार में कारोबार मिश्रित रहा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 156.15 अंक यानी 0.25 प्रतिशत की गिरावट के साथ 63,079.05 पर बंद हुआ। इसके विपरीत निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 44.70 अंक यानी 0.22 प्रतिशत की बढ़त के साथ 20,095.45 पर पहुंच गया। इससे संकेत मिला कि छोटे शेयरों में चुनिंदा खरीदारी बनी रही, जबकि मिडकैप शेयरों में दबाव देखने को मिला।

    बाजार के जानकारों के मुताबिक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की आशंका कम होने से भारतीय बाजार को समर्थन मिला। ब्याज दरों के रुख को लेकर बदलती उम्मीदों का असर वैश्विक बाजारों और निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता पर भी पड़ रहा है।

    हालांकि बाजार में तेजी पूरी तरह मजबूत नहीं रही। ऊंचे स्तरों पर निवेशकों की मुनाफावसूली ने बढ़त को सीमित किया। इसके साथ ही मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव भी निवेशकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। ऐसे माहौल में विदेशी बाजारों के संकेतों और वैश्विक आर्थिक आंकड़ों पर घरेलू निवेशकों की नजर बनी हुई है।

    अमेरिका से आने वाले रोजगार संबंधी आंकड़े भी बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। इसके बाद अगले सप्ताह जारी होने वाले अमेरिकी खुदरा महंगाई के आंकड़ों पर निवेशकों की विशेष नजर रहेगी। महंगाई के आंकड़े अमेरिकी केंद्रीय बैंक की आगामी ब्याज दर नीति को लेकर बाजार की उम्मीदों को प्रभावित कर सकते हैं।

    जानकारों का मानना है कि अगस्त में कोर महंगाई में मामूली नरमी की उम्मीद फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में आगे बढ़ोतरी की संभावना को कमजोर कर सकती है। इससे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में स्थिरता आने और वैश्विक शेयर बाजारों पर दबाव कम होने की संभावना बन सकती है। ऐसे में आने वाले कारोबारी सत्रों में वैश्विक आर्थिक आंकड़ों और भू-राजनीतिक घटनाक्रम के साथ घरेलू निवेश धारणा बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।

  • शुरुआती तेजी के बाद सपाट बंद हुआ भारतीय शेयर बाजार, सेंसेक्स 3 अंक चढ़ा और निफ्टी 24,252 पर पहुंचा

    शुरुआती तेजी के बाद सपाट बंद हुआ भारतीय शेयर बाजार, सेंसेक्स 3 अंक चढ़ा और निफ्टी 24,252 पर पहुंचा


    नई दिल्ली । 
    भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को शुरुआती तेजी के बाद कारोबार सीमित दायरे में रहा और दोनों प्रमुख सूचकांक मामूली बढ़त के साथ बंद हुए। दिनभर उतार चढ़ाव के बीच सेंसेक्स 3 अंक की मामूली तेजी के साथ 77,540.83 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 20.15 अंक यानी 0.08 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,252.00 पर पहुंच गया।

    बाजार को सबसे ज्यादा समर्थन मेटल और बैंकिंग शेयरों में हुई खरीदारी से मिला। निफ्टी मेटल इंडेक्स 0.86 प्रतिशत की बढ़त के साथ दिन का सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला प्रमुख सेक्टर रहा। इसके अलावा निफ्टी बैंक और निफ्टी पीएसई दोनों में 0.46 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। निफ्टी रियल्टी भी 0.40 प्रतिशत चढ़ा।

    वित्तीय सेवाओं और बुनियादी ढांचे से जुड़े शेयरों में भी खरीदारी दिखाई दी। निफ्टी फाइनेंशियल सर्विस इंडेक्स 0.22 प्रतिशत और निफ्टी इंफ्रा 0.15 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए। डिफेंस से जुड़े शेयरों में भी मजबूती रही और निफ्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स 0.32 प्रतिशत ऊपर रहा।

    दूसरी ओर कुछ प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली का दबाव रहा। निफ्टी एफएमसीजी 0.74 प्रतिशत, ऑटो 0.60 प्रतिशत, आईटी 0.46 प्रतिशत, कंजप्शन 0.40 प्रतिशत और हेल्थकेयर 0.25 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। इससे बाजार की कुल तेजी सीमित रही और प्रमुख सूचकांक लगभग सपाट स्तर पर टिके रहे।

    व्यापक बाजार में निवेशकों की दिलचस्पी अपेक्षाकृत मजबूत रही। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 64.20 अंक यानी 0.10 प्रतिशत की बढ़त के साथ 63,735.75 पर बंद हुआ। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 136.30 अंक यानी 0.69 प्रतिशत की तेजी रही और यह 19,977.75 के स्तर पर पहुंच गया। इससे संकेत मिला कि बड़े शेयरों के मुकाबले मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में खरीदारी का रुझान अधिक रहा।

    सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में पावर ग्रिड, बीईएल, कोटक महिंद्रा बैंक, एनटीपीसी, बजाज फिनसर्व, एशियन पेंट्स, आईसीआईसीआई बैंक, एलएंडटी, टाइटन, टीसीएस, अदाणी पोर्ट्स, भारती एयरटेल और एचडीएफसी बैंक बढ़त के साथ बंद हुए। वहीं ट्रेंट, मारुति सुजुकी, इंडिगो, एचसीएल टेक, हिंदुस्तान यूनिलीवर, इंफोसिस, एमएंडएम, टेक महिंद्रा, आईटीसी, अल्ट्राटेक सीमेंट, टाटा स्टील, एक्सिस बैंक और बजाज फाइनेंस पर दबाव रहा।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक बॉन्ड यील्ड का ऊंचा स्तर निवेशकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। कच्चे तेल की कीमतों और महंगाई को लेकर बनी आशंकाएं भी बाजार की धारणा को प्रभावित कर रही हैं। घरेलू स्तर पर महंगाई के जोखिम, सीमित लिक्विडिटी और रिजर्व बैंक के रुख से जुड़े संकेतों के कारण भारत की 10 वर्षीय बॉन्ड यील्ड दो महीने के उच्चतम स्तर तक पहुंच गई है।

    इसके बावजूद घरेलू अर्थव्यवस्था से जुड़े कुछ संकेत बाजार के लिए सकारात्मक रहे। हालिया सर्विस पीएमआई आंकड़ों से घरेलू गतिविधियों में मजबूती के संकेत मिले हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया गिरावट के बाद वित्तीय क्षेत्र की बड़ी कंपनियों के मूल्यांकन आकर्षक नजर आ रहे हैं। मजबूत क्रेडिट ग्रोथ के कारण इन शेयरों में वैल्यू खरीदारी देखने को मिली। साथ ही मेटल की स्थिर कीमतों ने कमोडिटी आधारित शेयरों को भी समर्थन दिया।

    कुल मिलाकर शुक्रवार का कारोबारी सत्र निवेशकों के लिए मिश्रित रहा। बैंकिंग और मेटल शेयरों की मजबूती ने बाजार को संभाले रखा, जबकि कुछ प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली के कारण सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी तेजी नहीं आ सकी।

  • कॉरपोरेट आय सीजन में निफ्टी मुनाफा 18 प्रतिशत बढ़ा, मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों ने भी अनुमान से बेहतर प्रदर्शन किया

    कॉरपोरेट आय सीजन में निफ्टी मुनाफा 18 प्रतिशत बढ़ा, मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों ने भी अनुमान से बेहतर प्रदर्शन किया

    नई दिल्ली । वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारतीय कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन ने बाजार अनुमानों को पीछे छोड़ दिया है। तिमाही आय सीजन के दौरान 19 सेक्टर्स का प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर रहा। वित्तीय सेवाएं, मेटल्स, ऑयल एंड गैस, ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी और टेलीकॉम जैसे क्षेत्रों ने कॉरपोरेट आय में मजबूती बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, पहली तिमाही का आय सीजन कुल मिलाकर मजबूत रहा। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को अलग रखने पर कंपनियों की बिक्री, ईबीआईटीडीए और टैक्स के बाद मुनाफे में सालाना आधार पर क्रमशः 18 प्रतिशत, 15 प्रतिशत और 22 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इन तीनों क्षेत्रों में अनुमान क्रमशः 15 प्रतिशत, 10 प्रतिशत और 15 प्रतिशत की वृद्धि का था।

    इस प्रदर्शन में वित्तीय सेवाओं यानी बीएफएसआई क्षेत्र का योगदान महत्वपूर्ण रहा। मेटल्स और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को छोड़कर ऑयल एंड गैस क्षेत्र ने भी आय वृद्धि को मजबूती दी। टेक्नोलॉजी और टेलीकॉम कंपनियों के प्रदर्शन ने भी कुल कॉरपोरेट आय के आंकड़ों को बेहतर बनाने में योगदान किया।

    ऑटोमोबाइल, केमिकल्स, टेक्सटाइल्स और रियल एस्टेट जैसे सेक्टरों में भी अपेक्षाकृत मजबूत प्रदर्शन देखने को मिला। इन क्षेत्रों के बेहतर नतीजों से संकेत मिलता है कि कंपनियों के कारोबार पर घरेलू मांग, परिचालन क्षमता और क्षेत्रवार परिस्थितियों का सकारात्मक असर पड़ा।

    हालांकि, सभी सेक्टरों का प्रदर्शन समान नहीं रहा। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर खासा दबाव डाला। इन कंपनियों ने पिछले वर्ष की समान अवधि में 162 अरब रुपये का मुनाफा दर्ज किया था, जबकि इस बार करीब 181 अरब रुपये का नुकसान सामने आया। इससे कुल कॉरपोरेट आय के प्रदर्शन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा।

    सीमेंट और इंटरग्लोब एविएशन का प्रदर्शन भी कुल आय के आंकड़ों पर दबाव डालने वाले कारकों में शामिल रहा। इसके बावजूद अन्य प्रमुख क्षेत्रों की मजबूती ने समग्र नतीजों को उम्मीद से बेहतर बनाए रखने में मदद की।

    निफ्टी कंपनियों के स्तर पर भी पहली तिमाही के आंकड़े महत्वपूर्ण रहे। निफ्टी का टैक्स के बाद मुनाफा सालाना आधार पर 18 प्रतिशत बढ़ा। यह पिछले 10 तिमाहियों में सबसे तेज वृद्धि रही। खास बात यह रही कि यह प्रदर्शन 10 प्रतिशत की अनुमानित वृद्धि से काफी अधिक रहा।

    बाजार पूंजीकरण के अलग-अलग वर्गों में भी कंपनियों की आय वृद्धि अनुमानों से बेहतर रही। लार्जकैप कंपनियों की आय में सालाना आधार पर 21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि अनुमान 14 प्रतिशत की वृद्धि का था। इससे बड़ी कंपनियों के मजबूत वित्तीय प्रदर्शन का संकेत मिलता है।

    मिडकैप कंपनियों ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। उनकी आय में 23 प्रतिशत की सालाना वृद्धि हुई, जो पिछले 11 तिमाहियों का उच्चतम स्तर बताया गया है। वहीं स्मॉलकैप कंपनियों की आय में 31 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई, जबकि अनुमान 22 प्रतिशत का था।

    पहली तिमाही के ये आंकड़े भारतीय कॉरपोरेट क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत देते हैं। खासकर वित्तीय सेवाओं, मेटल्स और कुछ अन्य प्रमुख क्षेत्रों में बेहतर आय वृद्धि ने बाजार के अनुमान को पीछे छोड़ा है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों और कुछ कमजोर सेक्टरों से जुड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। आने वाली तिमाहियों में कंपनियों की आय पर लागत, मांग और वैश्विक परिस्थितियों का असर महत्वपूर्ण रहेगा।वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में 19 सेक्टर्स ने अनुमान से बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि फाइनेंशियल और मेटल्स प्रमुख बढ़त वाले क्षेत्र रहे।

    Keywords:
    Financials, Metals, Nifty, Earnings, BFSI,

    नई दिल्ली ।

    वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारतीय कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन ने बाजार अनुमानों को पीछे छोड़ दिया है। तिमाही आय सीजन के दौरान 19 सेक्टर्स का प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर रहा। वित्तीय सेवाएं, मेटल्स, ऑयल एंड गैस, ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी और टेलीकॉम जैसे क्षेत्रों ने कॉरपोरेट आय में मजबूती बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, पहली तिमाही का आय सीजन कुल मिलाकर मजबूत रहा। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को अलग रखने पर कंपनियों की बिक्री, ईबीआईटीडीए और टैक्स के बाद मुनाफे में सालाना आधार पर क्रमशः 18 प्रतिशत, 15 प्रतिशत और 22 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इन तीनों क्षेत्रों में अनुमान क्रमशः 15 प्रतिशत, 10 प्रतिशत और 15 प्रतिशत की वृद्धि का था।

    इस प्रदर्शन में वित्तीय सेवाओं यानी बीएफएसआई क्षेत्र का योगदान महत्वपूर्ण रहा। मेटल्स और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को छोड़कर ऑयल एंड गैस क्षेत्र ने भी आय वृद्धि को मजबूती दी। टेक्नोलॉजी और टेलीकॉम कंपनियों के प्रदर्शन ने भी कुल कॉरपोरेट आय के आंकड़ों को बेहतर बनाने में योगदान किया।

    ऑटोमोबाइल, केमिकल्स, टेक्सटाइल्स और रियल एस्टेट जैसे सेक्टरों में भी अपेक्षाकृत मजबूत प्रदर्शन देखने को मिला। इन क्षेत्रों के बेहतर नतीजों से संकेत मिलता है कि कंपनियों के कारोबार पर घरेलू मांग, परिचालन क्षमता और क्षेत्रवार परिस्थितियों का सकारात्मक असर पड़ा।

    हालांकि, सभी सेक्टरों का प्रदर्शन समान नहीं रहा। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर खासा दबाव डाला। इन कंपनियों ने पिछले वर्ष की समान अवधि में 162 अरब रुपये का मुनाफा दर्ज किया था, जबकि इस बार करीब 181 अरब रुपये का नुकसान सामने आया। इससे कुल कॉरपोरेट आय के प्रदर्शन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा।

    सीमेंट और इंटरग्लोब एविएशन का प्रदर्शन भी कुल आय के आंकड़ों पर दबाव डालने वाले कारकों में शामिल रहा। इसके बावजूद अन्य प्रमुख क्षेत्रों की मजबूती ने समग्र नतीजों को उम्मीद से बेहतर बनाए रखने में मदद की।

    निफ्टी कंपनियों के स्तर पर भी पहली तिमाही के आंकड़े महत्वपूर्ण रहे। निफ्टी का टैक्स के बाद मुनाफा सालाना आधार पर 18 प्रतिशत बढ़ा। यह पिछले 10 तिमाहियों में सबसे तेज वृद्धि रही। खास बात यह रही कि यह प्रदर्शन 10 प्रतिशत की अनुमानित वृद्धि से काफी अधिक रहा।

    बाजार पूंजीकरण के अलग-अलग वर्गों में भी कंपनियों की आय वृद्धि अनुमानों से बेहतर रही। लार्जकैप कंपनियों की आय में सालाना आधार पर 21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि अनुमान 14 प्रतिशत की वृद्धि का था। इससे बड़ी कंपनियों के मजबूत वित्तीय प्रदर्शन का संकेत मिलता है।

    मिडकैप कंपनियों ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। उनकी आय में 23 प्रतिशत की सालाना वृद्धि हुई, जो पिछले 11 तिमाहियों का उच्चतम स्तर बताया गया है। वहीं स्मॉलकैप कंपनियों की आय में 31 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई, जबकि अनुमान 22 प्रतिशत का था।

    पहली तिमाही के ये आंकड़े भारतीय कॉरपोरेट क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत देते हैं। खासकर वित्तीय सेवाओं, मेटल्स और कुछ अन्य प्रमुख क्षेत्रों में बेहतर आय वृद्धि ने बाजार के अनुमान को पीछे छोड़ा है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों और कुछ कमजोर सेक्टरों से जुड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। आने वाली तिमाहियों में कंपनियों की आय पर लागत, मांग और वैश्विक परिस्थितियों का असर महत्वपूर्ण रहेगा।

  • भारतीय कंपनियों के पहली तिमाही नतीजे उम्मीद से बेहतर, बैंकिंग और मेटल सेक्टर की मजबूत बढ़त से बढ़ा कॉरपोरेट मुनाफा

    भारतीय कंपनियों के पहली तिमाही नतीजे उम्मीद से बेहतर, बैंकिंग और मेटल सेक्टर की मजबूत बढ़त से बढ़ा कॉरपोरेट मुनाफा


    नई दिल्ली ।
    वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारतीय कॉरपोरेट क्षेत्र का प्रदर्शन बाजार की अपेक्षाओं से बेहतर रहा है। अप्रैल से जून 2026 की अवधि के दौरान बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाएं, धातु, सूचना प्रौद्योगिकी और ऑटोमोबाइल क्षेत्रों की मजबूत वृद्धि ने कंपनियों के समग्र मुनाफे को मजबूती दी। हालांकि तेल विपणन कंपनियों को ऊंची कच्चे तेल की कीमतों के कारण दबाव का सामना करना पड़ा, लेकिन अन्य प्रमुख क्षेत्रों के अच्छे प्रदर्शन से कुल आय पर इसका प्रभाव काफी हद तक संतुलित हो गया।

    तिमाही नतीजों के विश्लेषण से पता चलता है कि यदि तेल विपणन कंपनियों को अलग कर दिया जाए तो भारतीय कंपनियों की आय में सालाना आधार पर करीब 17 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह संकेत देता है कि वैश्विक ऊर्जा कीमतों के दबाव के बावजूद अधिकांश कंपनियों की वित्तीय स्थिति मजबूत बनी हुई है और परिचालन स्तर पर बेहतर प्रदर्शन देखने को मिला है।

    प्रमुख क्षेत्रों में सबसे प्रभावशाली प्रदर्शन बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाओं का रहा, जहां आय में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। धातु क्षेत्र ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए करीब 53 प्रतिशत की बढ़ोतरी हासिल की। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में 11 प्रतिशत और ऑटोमोबाइल क्षेत्र में लगभग 7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जिससे समग्र कॉरपोरेट आय को मजबूती मिली।

    अब तक अपने तिमाही परिणाम घोषित करने वाली निफ्टी की कई प्रमुख कंपनियों ने भी बाजार की उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन किया है। औसतन कंपनियों के मुनाफे में लगभग 11 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि विश्लेषकों का अनुमान इससे काफी कम था। बड़ी संख्या में कंपनियां अपने अनुमानित लाभ से बेहतर नतीजे देने में सफल रहीं, जबकि अपेक्षाकृत कम कंपनियों के परिणाम अनुमान से कमजोर रहे।

    हालांकि सभी क्षेत्रों की स्थिति समान नहीं रही। तेल विपणन कंपनियों के अलावा सीमेंट, विमानन और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रों पर लागत और मांग से जुड़ी चुनौतियों का असर देखने को मिला। विशेष रूप से कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने तेल विपणन कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बनाया, जिससे इन क्षेत्रों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा।

    बाजार पूंजीकरण के आधार पर देखें तो बड़ी कंपनियों ने स्थिर प्रदर्शन करते हुए अपनी आय में वृद्धि दर्ज की। दूसरी ओर मिड-कैप कंपनियों के समग्र आंकड़ों में गिरावट दिखाई दी, जिसका प्रमुख कारण तेल विपणन कंपनियों का कमजोर प्रदर्शन रहा। हालांकि इन कंपनियों को अलग करने पर मिड-कैप श्रेणी की अधिकांश कंपनियों में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जिससे स्पष्ट होता है कि व्यापक स्तर पर कारोबार की स्थिति सकारात्मक बनी हुई है।

    स्मॉल-कैप कंपनियों ने इस तिमाही में सबसे मजबूत प्रदर्शन किया। इन कंपनियों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जिसमें वित्तीय क्षेत्र की मजबूती और अनुकूल तुलनात्मक आधार का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इससे यह संकेत मिलता है कि छोटे और मध्यम आकार के कारोबारों में भी कारोबारी गतिविधियां बेहतर हो रही हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि पहली तिमाही के मजबूत नतीजों से निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है। हालांकि आने वाले महीनों में वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और पूंजी बाजार में बढ़ती गतिविधियां निवेशकों की रणनीति को प्रभावित कर सकती हैं। इसके बावजूद मौजूदा तिमाही के परिणाम भारतीय अर्थव्यवस्था और कॉरपोरेट क्षेत्र की मजबूती का सकारात्मक संकेत माने जा रहे हैं।

  • टाटा स्टील समेत चुनिंदा शेयरों पर विशेषज्ञों की नजर, निवेशकों को खरीद स्तर और लक्ष्य पर मिली अहम सलाह

    टाटा स्टील समेत चुनिंदा शेयरों पर विशेषज्ञों की नजर, निवेशकों को खरीद स्तर और लक्ष्य पर मिली अहम सलाह

    नई दिल्ली । पहली तिमाही के कारोबारी माहौल और बदलते वैश्विक संकेतों के बीच शेयर बाजार में निवेशकों की नजर प्रमुख कंपनियों के प्रदर्शन और भविष्य की संभावनाओं पर बनी हुई है। इसी क्रम में बाजार विशेषज्ञों ने कई चर्चित शेयरों पर अपनी रणनीति साझा की है। उनके अनुसार, मेटल, बैंकिंग, ज्वेलरी और उपभोक्ता क्षेत्र के कुछ शेयर आने वाले समय में निवेशकों के लिए अवसर प्रदान कर सकते हैं, हालांकि निवेश से पहले जोखिम प्रबंधन और उचित स्तरों का ध्यान रखना आवश्यक होगा।

    विशेषज्ञों के अनुसार मेटल सेक्टर फिलहाल सकारात्मक संकेत दे रहा है। वैश्विक बाजार में धातुओं की कीमतों में सुधार और मांग में संभावित मजबूती का लाभ भारतीय कंपनियों को मिल सकता है। इसी वजह से टाटा स्टील को इस समय प्रमुख पसंद के रूप में देखा जा रहा है। उनका मानना है कि लगभग 183 रुपये के आसपास यह शेयर निवेश के लिए उपयुक्त स्तर पर माना जा सकता है। यदि किसी कारणवश इसमें और गिरावट आती है तथा यह 170 से 172 रुपये के दायरे में पहुंचता है, तो इसे चरणबद्ध तरीके से पोर्टफोलियो में जोड़ने का अवसर माना जा सकता है।

    विश्लेषकों का कहना है कि अल्पावधि में टाटा स्टील के लिए 215 से 220 रुपये का लक्ष्य संभावित माना जा रहा है। वहीं, यदि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं और मेटल सेक्टर में मजबूती जारी रहती है, तो दीर्घावधि में यह शेयर 270 रुपये तक पहुंचने की क्षमता रख सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि शेयर 170 रुपये के नीचे साप्ताहिक आधार पर बंद होता है, तो निवेशकों को अपनी रणनीति की समीक्षा करनी चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर जोखिम सीमित करने के लिए स्टॉप लॉस का पालन करना चाहिए।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेश केवल संभावित रिटर्न को देखकर नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि जोखिम और पूंजी संरक्षण को भी समान महत्व देना चाहिए। किसी भी शेयर में एकमुश्त निवेश करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से निवेश करना अधिक संतुलित रणनीति मानी जाती है। इससे बाजार में उतार-चढ़ाव का प्रभाव अपेक्षाकृत कम हो सकता है और औसत खरीद मूल्य भी बेहतर बन सकता है।

    विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि पहली तिमाही के वित्तीय नतीजे आने के साथ विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग प्रदर्शन देखने को मिल सकता है। ऐसे में निवेशकों को केवल शेयर की कीमत पर नहीं बल्कि कंपनी की आय, लाभप्रदता, कर्ज की स्थिति, भविष्य की विकास योजनाओं और उद्योग की संभावनाओं का भी मूल्यांकन करना चाहिए। मजबूत बुनियादी स्थिति वाली कंपनियां लंबी अवधि में बेहतर प्रदर्शन करने की संभावना रखती हैं।

    बाजार में फिलहाल वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, कमोडिटी कीमतों, ब्याज दरों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों का भी असर दिखाई दे रहा है। ऐसे माहौल में निवेशकों को भावनात्मक निर्णय लेने से बचना चाहिए और दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत कंपनियों में अनुशासित निवेश और तय जोखिम सीमा के साथ बनाई गई रणनीति ही अस्थिर बाजार में बेहतर परिणाम देने की संभावना रखती है। उन्होंने सलाह दी कि किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय लक्ष्यों और जोखिम क्षमता का आकलन अवश्य करें तथा आवश्यकता होने पर वित्तीय सलाहकार की राय भी लें।

  • दिनभर उतार-चढ़ाव के बाद फिसला शेयर बाजार, प्रमुख सूचकांक कमजोरी के साथ बंद, कई दिग्गज शेयर टूटे

    दिनभर उतार-चढ़ाव के बाद फिसला शेयर बाजार, प्रमुख सूचकांक कमजोरी के साथ बंद, कई दिग्गज शेयर टूटे

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार को उतार-चढ़ाव भरे कारोबारी सत्र के बाद कमजोरी के साथ कारोबार समाप्त किया। शुरुआती घंटों में सकारात्मक रुख के बावजूद दिन चढ़ने के साथ बिकवाली का दबाव बढ़ता गया, जिसके चलते प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। बाजार पर सबसे अधिक दबाव मेटल और आईटी सेक्टर के शेयरों से आया, जबकि कुछ रक्षात्मक क्षेत्रों में खरीदारी का रुझान देखने को मिला।

    कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 116.67 अंकों की गिरावट के साथ 74,243.34 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 49.85 अंक फिसलकर 23,366.70 पर आ गया। बाजार की शुरुआत हालांकि उत्साहजनक रही थी और दोनों प्रमुख सूचकांकों ने बढ़त के साथ कारोबार शुरू किया था, लेकिन बाद में निवेशकों की मुनाफावसूली और चुनिंदा सेक्टरों में बिकवाली ने बाजार की दिशा बदल दी।

    दिनभर के कारोबार में मेटल और आईटी कंपनियों के शेयर सबसे ज्यादा दबाव में रहे। वैश्विक संकेतों और सेक्टर आधारित बिकवाली के कारण इन क्षेत्रों में निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। निफ्टी मेटल और निफ्टी आईटी सूचकांकों में उल्लेखनीय कमजोरी दर्ज की गई। इसके अलावा कमोडिटी, ऑयल एंड गैस, सार्वजनिक उपक्रमों और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े शेयरों में भी दबाव बना रहा।

    इसके विपरीत कुछ सेक्टरों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही। मीडिया, रियल्टी, हेल्थकेयर, पीएसयू बैंक, फार्मा, प्राइवेट बैंक, एफएमसीजी और ऑटो शेयरों में मजबूती देखने को मिली। इन क्षेत्रों में खरीदारी ने बाजार को अधिक गिरावट से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। निवेशकों का रुझान इस बात का संकेत देता है कि वे फिलहाल अपेक्षाकृत सुरक्षित और स्थिर प्रदर्शन वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

    सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में एचयूएल, एक्सिस बैंक, अदाणी पोर्ट्स, बजाज फाइनेंस, एशियन पेंट्स, आईसीआईसीआई बैंक, टाइटन, सन फार्मा, एलएंडटी और आईटीसी जैसे शेयरों ने मजबूती दिखाई। दूसरी ओर ट्रेंट, टीसीएस, टाटा स्टील, एनटीपीसी, एचसीएल टेक, भारती एयरटेल, एचडीएफसी बैंक और अल्ट्राटेक सीमेंट जैसे शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जिससे बाजार पर दबाव बना रहा।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल निवेशक किसी मजबूत दिशा का इंतजार कर रहे हैं। तकनीकी विश्लेषण के अनुसार निफ्टी के लिए 23,200 के आसपास महत्वपूर्ण समर्थन क्षेत्र मौजूद है। यदि यह स्तर टूटता है तो बाजार में और कमजोरी देखने को मिल सकती है। वहीं ऊपर की ओर 23,550 का स्तर महत्वपूर्ण बाधा माना जा रहा है। इस स्तर को पार करने पर बाजार में नई तेजी की संभावना बन सकती है।

    विश्लेषकों के अनुसार घरेलू और वैश्विक आर्थिक संकेतकों, ब्याज दरों से जुड़े निर्णयों तथा विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर बाजार की आगे की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी। फिलहाल बाजार में सतर्कता का माहौल बना हुआ है और निवेशक हर नए आर्थिक संकेत पर करीबी नजर रखे हुए हैं।

    शुक्रवार का कारोबार यह संकेत देता है कि निवेशकों का विश्वास पूरी तरह कमजोर नहीं हुआ है, लेकिन वे जोखिम लेने से पहले स्पष्ट संकेतों का इंतजार कर रहे हैं। आने वाले कारोबारी सत्रों में प्रमुख समर्थन और प्रतिरोध स्तरों पर बाजार की चाल निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहने वाली है।