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  • मेथड एक्टिंग के चक्कर में नाना पाटेकर ने जड़ा था जोरदार तमाचा, सह-कलाकार मधु ने भी तुरंत सेट पर ही सिखाया सबक, आधा दिन पहले खत्म हुई थी शूटिंग

    मेथड एक्टिंग के चक्कर में नाना पाटेकर ने जड़ा था जोरदार तमाचा, सह-कलाकार मधु ने भी तुरंत सेट पर ही सिखाया सबक, आधा दिन पहले खत्म हुई थी शूटिंग

    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा जगत में कलाकारों के आपसी तालमेल और अभिनय के तौर-तरीकों को लेकर अक्सर कई तरह के किस्से सामने आते रहते हैं। ऐसा ही एक बेहद हैरान करने वाला खुलासा अपने जमाने की मशहूर अभिनेत्री मधु ने किया है। उन्होंने नब्बे के दशक की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘यशवंत’ की शूटिंग के दौरान का एक ऐसा वाकया साझा किया है, जिसने पूरी फिल्म इंडस्ट्री का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। मधु के अनुसार, एक बेहद संवेदनशील दृश्य की शूटिंग के दौरान उनके और दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के बीच सेट पर ही थप्पड़बाजी की नौबत आ गई थी।

    यह घटना फिल्म के सबसे महत्वपूर्ण दृश्य की शूटिंग के दौरान घटी थी, जिसके लिए निर्देशक अनिल मात्तू ने पूरा एक दिन निर्धारित किया था। मधु ने एक साक्षात्कार में बताया कि वह एक ऐसी अभिनेत्री रही हैं जो ‘स्विच ऑन और स्विच ऑफ’ पद्धति पर काम करती हैं, यानी कैमरे के सामने आते ही किरदार में आना और कट बोलते ही बाहर निकल जाना। इस सीन में उन्हें रोना था और इसके लिए वह आंखों में ग्लिसरीन का इस्तेमाल करना चाहती थीं, लेकिन उनके सह-कलाकार नाना पाटेकर इसके पूरी तरह खिलाफ थे। नाना पाटेकर फिल्म जगत में अपनी सजीव और ‘मेथड एक्टिंग’ के लिए जाने जाते हैं और वह चाहते थे कि दृश्य पूरी तरह वास्तविक लगे।

    अभिनेत्री के मुताबिक, कई बार रिहर्सल करने के बावजूद जब वह स्वाभाविक रूप से रोने में असमर्थ रहीं, तो नाना पाटेकर ने अचानक उन्हें बेहद जोरदार थप्पड़ जड़ दिया। बिना किसी पूर्व सूचना या तैयारी के अचानक पड़े इस तमाचे से मधु अवाक रह गईं और दर्द तथा गुस्से के कारण उनकी आंखों से सचमुच आंसू निकल आए। नाना पाटेकर के इस अप्रत्याशित व्यवहार ने मधु को इतना क्रोधित कर दिया कि उन्होंने बिना सोचे-समझे तुरंत पलटवार किया और सेट पर मौजूद पूरी टीम के सामने नाना पाटेकर को भी एक करारा थप्पड़ रसीद कर दिया।

    इस अप्रत्याशित घटनाक्रम के बाद सेट पर कुछ समय के लिए सन्नाटा पसर गया था, लेकिन इसके कारण दृश्य में जो वास्तविक भावनाएं और गुस्सा उभरकर आया, उसने पूरे शॉट को एक ही टेक में जीवंत कर दिया। स्वाभाविक और वास्तविक प्रतिक्रिया होने के कारण निर्देशक को वह शॉट बेहद पसंद आया। नतीजा यह हुआ कि जिस महत्वपूर्ण दृश्य की शूटिंग के लिए पूरा दिन तय किया गया था, वह महज आधे दिन में ही पूरी तरह से संपन्न हो गया। इस शॉट के पूरा होते ही नाना पाटेकर ने भी स्थिति को संभालते हुए पैकअप की घोषणा कर दी।

    बरसों पुराने इस वाकये को याद करते हुए मधु ने स्पष्ट किया कि इस तीखी नोकझोंक के बावजूद नाना पाटेकर का इरादा कभी भी उनके साथ दुर्व्यवहार करने का नहीं था। वह केवल पर्दे पर अभिनय के स्तर को उत्कृष्ट बनाना चाहते थे। जब भी वह सेट पर ग्लिसरीन का उपयोग करती थीं या अपने किरदार से भटकती थीं, तो नाना पाटेकर थोड़े असहज और नाखुश दिखाई देते थे। मधु ने माना कि नाना पाटेकर चाहते थे कि सह-कलाकार केवल अभिनय न करें, बल्कि उस किरदार को पूरी शिद्दत से जिएं, और यही वजह थी कि उस दिन उन्होंने अनजाने में मधु को भी एक ‘मेथड एक्टर’ बना दिया था।

    बॉलीवुड में नाना पाटेकर के कड़क मिजाज और काम के प्रति उनके सख्त रवैये को लेकर पहले भी कई किस्से सामने आते रहे हैं। इससे पहले दिग्गज फिल्ममेकर सई परांजपे ने भी फिल्म ‘दिशा’ की शूटिंग के दौरान चप्पल के एक सीन को लेकर नाना पाटेकर के साथ हुई अपनी तीखी बहस का जिक्र किया था। बहरहाल, मधु द्वारा साझा किया गया यह संस्मरण यह दिखाता है कि सिनेमा के पर्दे पर दिखने वाले बेहतरीन दृश्यों के पीछे कलाकारों को कभी-कभी किस तरह की शारीरिक और मानसिक परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है।

  • पद्मिनी एकादशी आज….. तीन साल में एक बार आता है ये व्रत… जानें इसके नियम एवं विधि

    पद्मिनी एकादशी आज….. तीन साल में एक बार आता है ये व्रत… जानें इसके नियम एवं विधि


    नई दिल्ली।
    पद्मिनी एकादशी (Padmini Ekadashi 2026)/ कमला एकादशी (Kamala Ekadashi) का व्रत अधिक मास में किया जाता है। पुरुषोत्तम मास (Purushottam month) में एकादशी तिथि होने के कारण पद्मिनी एकादशी का व्रत तीन साल में एक बार ही आता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से भगवान विष्णु (Lord Vishnu) की अधिक कृपा प्राप्त होती है। इस व्रत की महिमा का वर्णन पद्म पुराण में भी किया गया है।

    मान्यता है कि श्रद्धा भाव से जो कोई भी इस व्रत को करेगा उसे जन्म जन्म के पापों से मुक्ति मिल जाती है। साथ ही वह व्यक्ति अक्षय पुण्य प्राप्त करता है। इस व्रत को करने वालों को विशेष नियमों का पालन करना चाहिए। साथ ही इस दिन दान पुण्य करने से व्यक्ति की सारी इच्छाएं पूरी होती हैं। आइए जानते हैं पद्मिनी एकादशी पर किन किन चीजों का दान करना चाहिए साथ ही जानें व्रत का नियम।


    पद्मिनी एकादशी व्रत के नियम

    पद्म पुराण में बताया गया है कि इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए। साथ ही हाथ में थोड़ा जल लेकर व्रत का संकल्प लें। इस दिन विशेष रुप से पीले रंग के वस्त्र धारण करें। एकादशी के दिन अन्न का त्याग करना चाहिए। इस दिन सात्विक भोजन ही करना शुभ फलदायी माना गया है। एकादशी के व्रत में नमक नहीं खाना चाहिए। पद्मिनी एकादशी का व्रत करने से चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। साथ ही इस दिन बाल आदि कटवाना नहीं चाहिए।

    पद्म पुराण में बताया गया है कि पद्मिनी एकादशी के दिन जो व्यक्ति घर पर भगवान विष्णु के मंत्रों का जप करता है उसे एक गुना फल मिलता है। वहीं, नदी के तट पर जप करने से दो गुना, गोशाला में जाकर जप करने से सहस्त्र गुना, अग्निहोत्र गृहं में जप करने से एक हजार गुना, भगवान शिव के मंदिर में जप करने और तुलसी के पास जप करने से लाख गुना फल मिलता है।


    पद्मिनी एकादशी पर क्या दान करें

    पद्मिनी एकादशी के दिन अन्न और फल का दान करना बहुत ही पुण्य फलदायी माना गया है। इस दिन अन्न और फल का दान करना चाहिए। पुरुषोत्तम मास के दौरान अधिक गर्मी के चलते जल से भरा घड़ा, मौसमी फल जैसे आम, खरबूजा, तरबूज और बाकी फलों का दान करना चाहिए। अधिक मास के दौरान गुड़ और तिल का दान करना भी सर्वोत्तम माना गया है। इस दिन जरुरतमंद लोगों को चप्पल, वस्त्र और छाता आदि चीजों का दान करना चाहिए। ऐसा करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का आशीर्वाद बना रहता है।

    पुरुषोत्तम मास की यह पद्मिनी एकादशी तीन साल में एक बार आती है इसलिए इस दिन दान के अलावा मंदिरों में दीप दान भी करना चाहिए। मंदिर में घी के कम से कम पांच दीपक जरुर जलाने चाहिए।