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  • Venezuela: भूकंप में मृतकों की संख्या 2200 के पार, अब भी रेस्क्यू जारी, मेक्सिको से आई मशहूर बचाव टीम

    Venezuela: भूकंप में मृतकों की संख्या 2200 के पार, अब भी रेस्क्यू जारी, मेक्सिको से आई मशहूर बचाव टीम


    मेक्सिको सिटी।
    वेनेजुएला (Venezuela) में आए विनाशकारी भूकंप (Earthquakes) ने भारी तबाही मचाई है। इस आपदा में मृतकों की संख्या 2,200 के पार पहुंच गई है, जबकि 11,000 से ज्यादा लोग घायल हैं। इस मुश्किल घड़ी में मेक्सिको (Mexico) की मशहूर बचाव टीम ‘टोपोस’ (Topos Azteca) मदद के लिए वेनेजुएला पहुंच रही है। यह टीम मलबे में दबे लोगों को निकालने में माहिर मानी जाती है।


    तबाही का मंजर और बढ़ती चुनौतियां

    भूकंप के करीब एक हफ्ते बाद भी वेनेजुएला में हालात बेहद खराब हैं। सबसे ज्यादा असर ला गुआरा राज्य में हुआ है, जहां कई बहुमंजिला इमारतें और घर जमींदोज हो गए हैं। अंतरराष्ट्रीय बचाव टीमें दिन-रात मलबे में दबे लोगों की तलाश कर रही हैं। हालांकि, समय बीतने के साथ अब जीवित बचे लोगों के मिलने की उम्मीद कम होती जा रही है। मेक्सिको से रवाना हुए 39 वर्षीय स्वयंसेवक जर्मन बेलो अपने साथ बचाव उपकरणों के अलावा बड़ी संख्या में ‘बॉडी बैग’ भी ले जा रहे हैं, ताकि मृतकों के शवों को सम्मान के साथ निकाला जा सके।


    कौन हैं ये ‘टोपोस’ और कैसे करते हैं काम?

    ‘टोपोस’ मेक्सिको का एक नागरिक बचाव संगठन है। इसकी शुरुआत 1985 में मेक्सिको सिटी में आए भीषण भूकंप के बाद हुई थी। स्पेनिश भाषा में ‘टोपोस’ का मतलब ‘छछूंदर’ (Moles) होता है। इस टीम को यह नाम इसलिए मिला क्योंकि इसके सदस्य मलबे के बीच बनी बेहद संकरी जगहों और छेदों में रेंगकर घुस जाते हैं। ये लोग थर्मल कैमरे और संवेदनशील माइक्रोफोन जैसे आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं ताकि मलबे के नीचे दबी हल्की सी आहट या शरीर की गर्मी को पहचाना जा सके।


    खामोशी का संकेत और बचाव का तरीका

    बचाव कार्य के दौरान यह टीम एक खास तकनीक अपनाती है। जब कोई बचावकर्मी हवा में मुट्ठी बंद करके हाथ उठाता है, तो इसका मतलब होता है ‘बिल्कुल खामोश हो जाएं’। यह संकेत मिलते ही वहां मौजूद अन्य लोग चुप हो जाते हैं। इस सन्नाटे में बचावकर्मी मलबे के नीचे कान लगाकर सुनते हैं कि कहीं से कोई आवाज या खटखटाहट तो नहीं आ रही। इसके बाद फावड़े और हथौड़ों की मदद से धीरे-धीरे मलबा हटाया जाता है ताकि मलबे के और ज्यादा गिरने का खतरा न रहे।


    उम्मीद की एक आखिरी किरण

    मेक्सिको सिटी के एयरपोर्ट पर एक भावुक पल देखने को मिला। जब वेनेजुएला के एक इंजीनियर डिएगो बेजरानो को पता चला कि जर्मन बेलो और उनकी टीम उनके देश जा रही है, तो वह रो पड़े। डिएगो का परिवार अभी भी वेनेजुएला की राजधानी कराकस में है। बेलो ने उन्हें गले लगाकर तसल्ली दी। बेलो पेशे से एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हैं और अपनी छोटी सी वर्कशॉप चलाते हैं, लेकिन आपदा के समय वह सब छोड़कर लोगों की जान बचाने निकल पड़ते हैं। उनका कहना है कि किसी दुखी इंसान को उम्मीद देना ही उनका सबसे बड़ा इनाम है।

  • फीफा विश्व कप से बाहर होते ही इक्वाडोर में बड़ा फैसला, मेक्सिको से हार के बाद हेड कोच सेबेस्टियन बेकासे ने दिया इस्तीफा

    फीफा विश्व कप से बाहर होते ही इक्वाडोर में बड़ा फैसला, मेक्सिको से हार के बाद हेड कोच सेबेस्टियन बेकासे ने दिया इस्तीफा

    नई दिल्ली । फीफा विश्व कप 2026 में मेक्सिको के हाथों राउंड ऑफ 32 में मिली हार के बाद इक्वाडोर फुटबॉल टीम में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। टीम के मुख्य कोच सेबेस्टियन बेकासे ने अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। उन्होंने कहा कि विश्व कप में तय लक्ष्य हासिल नहीं हो सके, इसलिए पद छोड़ना उचित निर्णय है। उनके अनुसार विश्व कप अभियान की समाप्ति के साथ ही उनका अनुबंध भी समाप्त होना था और इसी कारण उन्होंने अपने कार्यकाल का समापन करने का फैसला लिया।

    मेक्सिको के खिलाफ खेले गए नॉकआउट मुकाबले में इक्वाडोर को 2-0 से हार का सामना करना पड़ा। इस हार के साथ टीम का विश्व कप अभियान समाप्त हो गया। मैच के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में बेकासे ने कहा कि वह इक्वाडोर फुटबॉल महासंघ और उसके नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त करते हैं, जिन्होंने उन्हें स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर दिया। उन्होंने खिलाड़ियों, सहयोगी स्टाफ और पूरे देश का धन्यवाद करते हुए कहा कि यह उनके लिए यादगार अनुभव रहा और टीम के साथ बिताया गया समय हमेशा विशेष रहेगा।

    कोच ने स्वीकार किया कि नॉकआउट मुकाबले में मेक्सिको ने हर विभाग में बेहतर प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि उनकी टीम अपने स्वाभाविक खेल का स्तर नहीं दिखा सकी और प्रतिद्वंद्वी जीत का हकदार था। उनके अनुसार विश्व कप जैसे बड़े मंच पर छोटी-छोटी गलतियां भी भारी पड़ती हैं और इस मुकाबले में टीम अपेक्षित प्रदर्शन करने में सफल नहीं रही।

    सेबेस्टियन बेकासे ने अगस्त 2024 में इक्वाडोर की जिम्मेदारी संभाली थी। उस समय टीम दक्षिण अमेरिकी क्वालीफाइंग अभियान में कठिन दौर से गुजर रही थी। उनके नेतृत्व में इक्वाडोर ने शानदार वापसी करते हुए क्वालीफाइंग तालिका में अर्जेंटीना के बाद दूसरा स्थान हासिल किया। टीम ने पूरे अभियान में मजबूत रक्षात्मक प्रदर्शन किया और 18 क्वालीफाइंग मुकाबलों में केवल पांच गोल खाए। इस दौरान उसने कोलंबिया, उरुग्वे और ब्राजील जैसी मजबूत टीमों से बेहतर प्रदर्शन कर अपनी क्षमता का परिचय दिया।

    बेकासे के कार्यकाल का रिकॉर्ड भी संतुलित और प्रभावशाली रहा। उनके नेतृत्व में इक्वाडोर ने 24 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में नौ जीत दर्ज की, 12 मैच ड्रॉ रहे और केवल तीन मुकाबलों में हार मिली। विश्व कप से पहले टीम लगातार 19 मैचों तक अपराजित रही थी, जिससे उससे बेहतर प्रदर्शन की उम्मीदें काफी बढ़ गई थीं।

    विश्व कप अभियान की शुरुआत हालांकि उम्मीद के अनुरूप नहीं रही। शुरुआती मुकाबले में आइवरी कोस्ट से हार और कुराकाओ के खिलाफ ड्रॉ के बाद टीम की आलोचना हुई। इसके बावजूद इक्वाडोर ने अंतिम ग्रुप मैच में जर्मनी को 2-1 से हराकर शानदार वापसी की और सर्वश्रेष्ठ तीसरे स्थान वाली टीमों में शामिल होकर राउंड ऑफ 32 में जगह बनाई। टीम की इस उपलब्धि पर इक्वाडोर सरकार ने राष्ट्रीय अवकाश की घोषणा भी की थी।

    हालांकि नॉकआउट चरण में मेक्सिको के खिलाफ हार के साथ अभियान समाप्त हो गया और इसके तुरंत बाद मुख्य कोच ने पद छोड़ने का फैसला लिया। अब इक्वाडोर फुटबॉल महासंघ के सामने नए मुख्य कोच की नियुक्ति और आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए टीम की नई रणनीति तैयार करने की चुनौती होगी।

  • फीफा वर्ल्ड कप 2026: साउथ कोरिया को हराकर नॉकआउट में पहुंचा मेक्सिको, इतिहास रचने वाली पहली टीम बनी

    फीफा वर्ल्ड कप 2026: साउथ कोरिया को हराकर नॉकआउट में पहुंचा मेक्सिको, इतिहास रचने वाली पहली टीम बनी


    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 में मेक्सिको का शानदार अभियान जारी है। मेजबान टीम ने ग्रुप ए के अहम मुकाबले में साउथ कोरिया को 1-0 से हराकर न केवल महत्वपूर्ण जीत दर्ज की, बल्कि टूर्नामेंट के नॉकआउट चरण में पहुंचने वाली पहली टीम बनने का गौरव भी हासिल कर लिया। ग्वाडलाहारा के एक्रोन स्टेडियम में खेले गए इस रोमांचक मुकाबले में मेक्सिको ने संतुलित खेल का प्रदर्शन करते हुए तीन महत्वपूर्ण अंक अपने नाम किए।

    मैच की शुरुआत से ही मेक्सिको ने गेंद पर बेहतर नियंत्रण बनाए रखा और आक्रामक अंदाज में खेल दिखाया। हालांकि, साउथ कोरिया ने भी जवाबी हमलों के जरिए मुकाबले को चुनौतीपूर्ण बनाए रखा। पहले हाफ में दोनों टीमों ने कई अवसर बनाए, लेकिन मजबूत रक्षापंक्ति और गोलकीपिंग के कारण कोई भी टीम गोल करने में सफल नहीं हो सकी। पहले 45 मिनट तक दोनों पक्षों के बीच कड़ा संघर्ष देखने को मिला।

    दूसरे हाफ की शुरुआत मेक्सिको के लिए बेहद शानदार रही। 50वें मिनट में मिडफील्डर लुईस रोमो ने मैच का एकमात्र और निर्णायक गोल दागकर अपनी टीम को बढ़त दिलाई। गुटिएरेज द्वारा दिए गए सटीक थ्रू बॉल का शानदार फायदा उठाते हुए रोमो ने गेंद को सीधे गोलपोस्ट में पहुंचा दिया। इस गोल के बाद स्टेडियम में मौजूद हजारों मेक्सिकन समर्थक खुशी से झूम उठे।

    गोल खाने के बाद साउथ कोरिया ने बराबरी हासिल करने के लिए लगातार आक्रमण किए। मैच के अंतिम चरण में कोरियाई खिलाड़ियों ने कई खतरनाक मौके बनाए, लेकिन मेक्सिको की रक्षापंक्ति और गोलकीपर रेंगल दीवार बनकर खड़े रहे। खासकर अंतिम मिनटों में रेंगल ने लगातार दो शानदार बचाव कर साउथ कोरिया की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। उनके बेहतरीन प्रदर्शन ने मेक्सिको की जीत सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाई।

    इस जीत के साथ मेक्सिको ने ग्रुप ए में शीर्ष स्थान भी मजबूत कर लिया है। टीम ने लगातार दो मुकाबले जीतने के साथ-साथ अब तक एक भी गोल नहीं खाया है। यह उपलब्धि मेक्सिको के लिए ऐतिहासिक मानी जा रही है। वह अपनी मेजबानी में खेले जा रहे विश्व कप में शुरुआती दो मैच बिना कोई गोल खाए जीतने वाली दुनिया की दूसरी टीम बन गई है।

    इससे पहले यह रिकॉर्ड 1998 विश्व कप में मेजबान फ्रांस ने बनाया था, जब उसने अपने पहले दो मुकाबले बिना कोई गोल खाए जीते थे। अब मेक्सिको की नजर ग्रुप चरण के अंतिम मुकाबले में भी जीत हासिल कर खिताब की दावेदारी और मजबूत करने पर होगी।

    फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना है कि मेक्सिको का मौजूदा प्रदर्शन उसे इस विश्व कप के मजबूत दावेदारों में शामिल कर रहा है। टीम की संतुलित आक्रमण और मजबूत रक्षा पंक्ति उसे अन्य टीमों के मुकाबले अलग पहचान दिला रही है।

  • फीफा वर्ल्ड कप 2026 में मेक्सिको की शानदार शुरुआत, साउथ अफ्रीका को 2-0 से रौंदा

    फीफा वर्ल्ड कप 2026 में मेक्सिको की शानदार शुरुआत, साउथ अफ्रीका को 2-0 से रौंदा


    नई दिल्ली। फीफा वर्ल्ड कप 2026 की शुरुआत मेक्सिको के लिए बेहद यादगार रही। घरेलू सरजमीं पर खेले गए टूर्नामेंट के उद्घाटन मुकाबले में मेक्सिको ने शानदार प्रदर्शन करते हुए साउथ अफ्रीका को 2-0 से शिकस्त दी। एज्टेका स्टेडियम में हजारों दर्शकों की मौजूदगी में मेक्सिकन टीम ने शुरुआत से ही मुकाबले पर अपना दबदबा कायम रखा और पूरे मैच में विपक्षी टीम को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया।

    मुकाबले की शुरुआत से ही मेक्सिको ने आक्रामक खेल का प्रदर्शन किया। गेंद पर नियंत्रण रखने के साथ-साथ टीम ने लगातार साउथ अफ्रीका के डिफेंस पर दबाव बनाया। इसी दबाव का परिणाम पहले हाफ में देखने को मिला, जब जूलियन क्विनोनेस ने शानदार गोल कर अपनी टीम को बढ़त दिलाई। यह फीफा वर्ल्ड कप 2026 का पहला गोल भी था, जिससे क्विनोनेस ने इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया। उनके गोल के साथ ही स्टेडियम में मौजूद प्रशंसकों के बीच जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।

    क्विनोनेस पूरे मुकाबले में बेहतरीन फॉर्म में नजर आए। उनकी गति, मूवमेंट और आक्रामकता ने साउथ अफ्रीका के रक्षापंक्ति को लगातार परेशान किया। पहले हाफ में उनके पास एक और गोल करने का अवसर भी आया, लेकिन साउथ अफ्रीकी डिफेंडरों ने किसी तरह खतरे को टाल दिया। पहले 45 मिनट के खेल के बाद मेक्सिको 1-0 की बढ़त के साथ हाफ टाइम तक पहुंचा।

    दूसरे हाफ की शुरुआत साउथ अफ्रीका के लिए निराशाजनक रही। मेक्सिको के ब्रायन गुटिरेज को गोल की ओर बढ़ने से रोकने के प्रयास में याया सिथोल ने फाउल किया, जिसके बाद रेफरी ने उन्हें सीधे रेड कार्ड दिखा दिया। इस फैसले के बाद साउथ अफ्रीका को शेष मुकाबला 10 खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ा।

    संख्या बल में बढ़त मिलने के बाद मेक्सिको ने अपना हमला और तेज कर दिया। इसका फायदा टीम को जल्द ही मिला जब अनुभवी स्ट्राइकर राउल जिमेनेज ने शानदार फिनिश के साथ गेंद को जाल में पहुंचाकर स्कोर 2-0 कर दिया। जिमेनेज के इस गोल ने मेक्सिको की जीत लगभग सुनिश्चित कर दी और घरेलू दर्शकों का उत्साह चरम पर पहुंच गया।

    साउथ अफ्रीका की परेशानियां यहीं समाप्त नहीं हुईं। टीम के खिलाड़ी थेम्बा जवाने को हिंसक व्यवहार के कारण रेड कार्ड दिखाया गया, जिसके बाद टीम केवल नौ खिलाड़ियों के साथ मैदान पर रह गई। दो खिलाड़ियों की कमी के कारण साउथ अफ्रीका के लिए मुकाबले में वापसी करना लगभग असंभव हो गया।

    हालांकि मैच के अंतिम चरण में मेक्सिको को भी एक झटका लगा, जब डिफेंडर सीजर मोंटेस को लापरवाह चुनौती के लिए रेड कार्ड दिखाया गया। इसके बावजूद मैच के परिणाम पर कोई असर नहीं पड़ा और मेक्सिको ने 2-0 की प्रभावशाली जीत के साथ टूर्नामेंट में अपने अभियान का शानदार आगाज किया। जूलियन क्विनोनेस और राउल जिमेनेज इस जीत के सबसे बड़े नायक साबित हुए, जिनके दमदार प्रदर्शन ने मेक्सिको को शुरुआती बढ़त दिलाने के साथ जीत की राह भी आसान बनाई।

  • FIFA वर्ल्ड कप 2026 का धमाकेदार आगाज: मेजबान मेक्सिको ने दक्षिण अफ्रीका को 2-0 से हराया

    FIFA वर्ल्ड कप 2026 का धमाकेदार आगाज: मेजबान मेक्सिको ने दक्षिण अफ्रीका को 2-0 से हराया


    नई दिल्ली। फीफा वर्ल्ड कप 2026 का आगाज मेजबान मेक्सिको के लिए किसी सपने से कम नहीं रहा। दुनिया के सबसे बड़े फुटबॉल टूर्नामेंट के उद्घाटन मुकाबले में मेक्सिको ने दक्षिण अफ्रीका को 2-0 से हराकर अपने अभियान की विजयी शुरुआत की। ऐतिहासिक एजटेका स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले को देखने के लिए 80 हजार से अधिक दर्शक मौजूद रहे, जिन्होंने अपनी टीम का पूरे जोश के साथ समर्थन किया।

    मैच की शुरुआत से ही मेक्सिको ने आक्रामक तेवर अपनाए और दक्षिण अफ्रीका की टीम पर लगातार दबाव बनाए रखा। घरेलू दर्शकों के उत्साह से भरी मेक्सिकन टीम ने नौवें मिनट में ही बढ़त हासिल कर ली। सऊदी प्रो लीग में शानदार प्रदर्शन करने वाले जूलियन क्विनोनेस ने मौके का पूरा फायदा उठाते हुए गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचाया और मेक्सिको को 1-0 की बढ़त दिला दी। इस गोल के बाद स्टेडियम तालियों और नारों से गूंज उठा।

    पहले हाफ में दक्षिण अफ्रीका ने वापसी की कोशिश जरूर की, लेकिन मेक्सिको की मजबूत रक्षापंक्ति और मिडफील्ड ने उसके सभी प्रयासों को नाकाम कर दिया। मेक्सिको लगातार आक्रमण करता रहा और दूसरे हाफ में भी उसने अपना दबदबा कायम रखा।

    मैच के 66वें मिनट में अनुभवी स्ट्राइकर राउल जिमेनेज ने शानदार हेडर के जरिए दूसरा गोल दागकर मेक्सिको की बढ़त दोगुनी कर दी। यह उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का 46वां गोल था। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने मेक्सिको के महान स्ट्राइकर जारेड बॉर्गेटी की बराबरी कर ली। अब वह देश के सर्वकालिक शीर्ष गोलस्कोरर जेवियर “चिचारिटो” हर्नांडेज़ से केवल छह गोल पीछे हैं।

    इस मुकाबले में कोलंबिया में जन्मे 29 वर्षीय जूलियन क्विनोनेस भी आकर्षण का केंद्र रहे। मेक्सिको की राष्ट्रीय टीम के लिए यह उनका पहला विश्व कप मुकाबला था और उन्होंने अपने डेब्यू को गोल के साथ यादगार बना दिया। क्विनोनेस उन छह खिलाड़ियों में शामिल रहे जिन्होंने इस मैच के जरिए विश्व कप मंच पर पहला कदम रखा।

    मैच के दौरान अनुशासनहीनता के भी कई दृश्य देखने को मिले। दक्षिण अफ्रीका के स्पेफेलो सिथोल और थेम्बा ज्वाने को रेड कार्ड दिखाया गया, जिसके कारण टीम को मैच के अंतिम चरण में केवल नौ खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ा। वहीं इंजरी टाइम में मेक्सिको के डिफेंडर सीजर मोंटेस को भी रेड कार्ड मिला। इसके बावजूद दक्षिण अफ्रीका मेक्सिको की बढ़त को कम नहीं कर सकी और मुकाबला 2-0 से हार गई।

    यह जीत मेक्सिको के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2022 के कतर विश्व कप में टीम ग्रुप चरण से आगे नहीं बढ़ पाई थी। ऐसे में घरेलू मैदान पर विश्व कप अभियान की जीत से शुरुआत टीम के आत्मविश्वास को नई मजबूती देगी।

    गौरतलब है कि फीफा वर्ल्ड कप 2026 कई मायनों में ऐतिहासिक है। पहली बार टूर्नामेंट में 48 टीमें हिस्सा ले रही हैं। इसके अलावा मेक्सिको, कनाडा और अमेरिका संयुक्त रूप से इस विश्व कप की मेजबानी कर रहे हैं। फुटबॉल प्रेमियों के लिए यह विश्व कप अब तक का सबसे बड़ा और भव्य आयोजन माना जा रहा है।

    मेक्सिको की जीत ने टूर्नामेंट को रोमांचक शुरुआत दी है और अब दुनिया भर के फुटबॉल प्रशंसकों की नजरें आगामी मुकाबलों पर टिकी हुई हैं।

  • US: मैक्सिको के बड़े नेताओं-अधिकारियों पर ड्रग तस्करी के आरोप, गवर्नर समेत 10 पर केस दर्ज

    US: मैक्सिको के बड़े नेताओं-अधिकारियों पर ड्रग तस्करी के आरोप, गवर्नर समेत 10 पर केस दर्ज


    न्यूयॉर्क ।
    अमेरिका (America) में मैक्सिको (Mexico) के कई बड़े नेताओं और अधिकारियों पर ड्रग तस्करी (Drug smuggling) के गंभीर आरोप लगे हैं। न्यूयॉर्क की एक अदालत में दाखिल आरोपपत्र में इन अधिकारियों पर अमेरिका में भारी मात्रा में नशीले पदार्थ भेजने और हथियारों से जुड़े अपराधों में शामिल होने का आरोप लगाया गया है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, मैक्सिको के सीनालोआ राज्य (Sinaloa State.) के गवर्नर रुबेन रोचा मोया (Governor Ruben Rocha Moya) और नौ अन्य मौजूदा व पूर्व सरकारी अधिकारी इस मामले में आरोपी बनाए गए हैं। इन सभी पर ड्रग तस्करी और हथियारों से जुड़े अपराधों का केस दर्ज किया गया है। हालांकि अभी तक इनमें से किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

    ड्रग कार्टेल से गहरे संबंध का आरोप
    आरोपपत्र में कहा गया है कि ये अधिकारी कुख्यात सिनालोआ कार्टेल के साथ मिलकर काम कर रहे थे। यह कार्टेल लंबे समय से अमेरिका में फेंटेनिल, हेरोइन, कोकीन और मेथामफेटामाइन जैसी खतरनाक ड्रग्स की तस्करी करता रहा है। बताया गया है कि कुछ आरोपी इस कार्टेल की हिंसक गतिविधियों में भी शामिल रहे हैं।

    ‘एल चापो’ के बेटों से जुड़ा नेटवर्क
    जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी उस गुट से जुड़े थे, जिसे कुख्यात ड्रग माफिया जोकिन ‘एल चापो’ गुजमैन के बेटे चलाते हैं। ‘एल चापो’ पहले ही अमेरिका की जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा है।

    अमेरिका का बड़ा बयान
    अमेरिका के अटॉर्नी जे क्लेटन ने सीनालोआ कार्टेल को ‘बेहद खतरनाक आपराधिक संगठन’ बताया। उन्होंने कहा कि यह कार्टेल दशकों से अमेरिका में ड्रग्स फैलाता रहा है और भ्रष्ट नेताओं व अधिकारियों की मदद के बिना यह संभव नहीं होता। इस मामले में जिन लोगों पर आरोप लगे हैं, उनमें से कुछ मैक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम की पार्टी ‘मोरेना’ से जुड़े बताए जा रहे हैं। हालांकि अन्य कई आरोपी किसी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं हैं।

    मैक्सिको की सरकार ने आरोपों को नकारा
    मैक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम ने इन आरोपों को लेकर कहा कि उनकी सरकार को अभी तक कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका में किसी मैक्सिकन नागरिक के खिलाफ जांच होती है, तो उसके सबूत मैक्सिको की अटॉर्नी जनरल ऑफिस के साथ साझा किए जाने चाहिए।

    भ्रष्टाचार के खिलाफ अमेरिका की कार्रवाई
    इस मामले से पहले अमेरिका के मैक्सिको में राजदूत रॉन जॉनसन ने संकेत दिया था कि अमेरिका मैक्सिको के उन अधिकारियों के खिलाफ अभियान चलाएगा, जिनके संबंध संगठित अपराध से हैं।

  • अमेरिका भारत पर फिर से टैरिफ लगाने की तैयारी में, 16 ट्रेडिंग पार्टनर्स की सेक्शन 301 जांच शुरू

    अमेरिका भारत पर फिर से टैरिफ लगाने की तैयारी में, 16 ट्रेडिंग पार्टनर्स की सेक्शन 301 जांच शुरू


    नई दिल्ली। अमेरिकी ट्रम्प प्रशासन ने भारत और चीन सहित 16 प्रमुख ट्रेडिंग पार्टनर्स के खिलाफ नई जांच शुरू कर दी है। यह कार्रवाई ‘सेक्शन 301’ के तहत की जा रही है, जो अमेरिकी ट्रेड एक्ट ऑफ 1974 का हिस्सा है और अमेरिका को उन देशों पर एकतरफा टैरिफ या प्रतिबंध लगाने की शक्ति देती है, जो अमेरिकी कंपनियों और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को नुकसान पहुंचा रहे हों।

    इस कदम के पीछे पिछली घटनाओं का संदर्भ है। फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा लगाए गए ग्लोबल टैरिफ को अवैध करार दिया था। इसके बाद ट्रम्प प्रशासन ने 150 दिनों के लिए 10% का अस्थायी टैरिफ लागू किया। अब नई जांच के माध्यम से प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि टैरिफ का दबाव जारी रहे और ट्रेडिंग पार्टनर्स को बातचीत की मेज पर लाया जा सके।

    यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर ने बताया कि यह जांच भारत, चीन, यूरोपीय संघ (EU), जापान, दक्षिण कोरिया, मैक्सिको, वियतनाम, ताइवान, थाईलैंड, मलेशिया, कंबोडिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, स्विट्जरलैंड और नॉर्वे पर केंद्रित है। अगर जांच में इन देशों की नीतियां अनुचित व्यापार व्यवहार के तहत पाई गईं, तो उन पर भारी टैरिफ लगाया जा सकता है।

    जांच का मुख्य फोकस उन देशों पर है, जो जरूरत से अधिक उत्पादन कर अमेरिकी बाजार में सस्ते दाम पर माल बेचते हैं, जिससे अमेरिकी कंपनियों को नुकसान होता है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी देश में जूतों की फैक्ट्री सालाना 100 जूते बना सकती है, लेकिन घरेलू मांग केवल 20 जूते की है, तो शेष 80 जूते सस्ते दाम पर अमेरिका में भेज दिए जाते हैं। अमेरिका इसे मार्केट डंपिंग और अनुचित व्यापार व्यवहार मानता है।

    भारत के लिए यह चिंता का विषय है। 2024 में भारत का अमेरिका के साथ गुड्स ट्रेड सरप्लस 58,216 मिलियन डॉलर था, जो 2025 में घटकर 45,801 मिलियन डॉलर रह गया। इस कमी के बावजूद भारत इस जांच की सूची में शामिल है। यदि भारत की नीतियां ‘अनुचित’ पाई गईं, तो भारतीय सामानों पर भारी टैरिफ या प्रतिबंध लग सकते हैं।

    इसके अलावा, अमेरिका फोर्स्ड लेबर पर भी अलग जांच कर रहा है। इसका उद्देश्य है बंधुआ मजदूरी से बने सामानों के आयात पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाना। पहले ही उइगर फोर्स्ड लेबर प्रोटेक्शन एक्ट के तहत चीन के शिनजियांग क्षेत्र से आने वाले सोलर पैनल और अन्य सामानों पर कार्रवाई की जा चुकी है। अब यह कार्रवाई अन्य देशों पर भी लागू हो सकती है।

    जांच की टाइमलाइन भी निर्धारित कर दी गई है। 15 अप्रैल तक आम जनता और कंपनियों से सुझाव मांगे गए हैं, इसके बाद 5 मई के आसपास सार्वजनिक सुनवाई होगी। लक्ष्य है कि जुलाई में अस्थायी टैरिफ खत्म होने से पहले नए टैरिफ प्रस्ताव और जांच के नतीजे तैयार हो जाएं।

    जेमिसन ग्रीर ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति ट्रम्प टैरिफ लगाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग और रोजगार को बचाना है। साथ ही ट्रेडिंग पार्टनर्स को चेतावनी दी गई है कि वे मौजूदा व्यापार समझौतों का पालन करें, अन्यथा भारी टैक्स या प्रतिबंध झेलना पड़ेगा।

    विशेषज्ञों का कहना है कि इस जांच का असर टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग गुड्स और कृषि उत्पादों की कीमतों पर पड़ेगा। व्यवसायियों, निर्यातकों और आयातकों को अमेरिकी पॉलिसी पर लगातार नजर रखनी होगी, क्योंकि जुलाई के बाद अमेरिकी बाजार में कीमतों और टैरिफ में बड़े बदलाव संभव हैं।

    यह कदम व्यापार के वैश्विक परिदृश्य में भारत और अन्य देशों के लिए महत्वपूर्ण चेतावनी है। यदि व्यापारिक नीतियों में सुधार नहीं हुआ, तो अमेरिकी टैरिफ की मार व्यापार घाटे और निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति पर गहरा असर डाल सकती है।