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  • पीएम स्वनिधि योजना की बड़ी उपलब्धि, 55 लाख से अधिक लाभार्थी डिजिटल सिस्टम से जुड़े, 9 लाख करोड़ के लेनदेन दर्ज

    पीएम स्वनिधि योजना की बड़ी उपलब्धि, 55 लाख से अधिक लाभार्थी डिजिटल सिस्टम से जुड़े, 9 लाख करोड़ के लेनदेन दर्ज

    नई दिल्ली । देश में असंगठित क्षेत्र के आर्थिक सशक्तिकरण और शहरी गरीब तबके के लिए चलाई जा रही पीएम स्वनिधि योजना लगातार महत्वपूर्ण उपलब्धियां दर्ज कर रही है। इस योजना के तहत अब तक 55 लाख से अधिक लाभार्थियों को डिजिटल भुगतान प्रणाली से जोड़ा जा चुका है, जिससे रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के कारोबार में पारदर्शिता और स्थिरता बढ़ी है। योजना के तहत किए गए प्रयासों का व्यापक असर यह रहा है कि लाभार्थियों द्वारा अब तक 841 करोड़ से अधिक डिजिटल लेनदेन किए गए हैं, जिनका कुल मूल्य लगभग 8.96 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

    इस योजना की शुरुआत वर्ष 2020 में की गई थी, जिसका उद्देश्य छोटे और असंगठित व्यापारियों को बिना गारंटी के कार्यशील पूंजी ऋण उपलब्ध कराना था। समय के साथ यह योजना केवल ऋण सुविधा तक सीमित नहीं रही, बल्कि डिजिटल समावेशन और वित्तीय साक्षरता का एक मजबूत माध्यम बन गई है। इसके तहत लाभार्थियों को तीन चरणों में ऋण उपलब्ध कराया जाता है, जिससे वे धीरे-धीरे अपने व्यवसाय को विस्तार दे सकें। योजना की खास बात यह है कि इसमें सरकारी गारंटी के साथ ऋण उपलब्ध कराया जाता है, जिससे बैंकों और लाभार्थियों दोनों का जोखिम कम होता है।

    आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस योजना के लगभग 95 प्रतिशत लाभार्थी पहली बार औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जुड़े हैं, जो देश में वित्तीय समावेशन की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इसके साथ ही लाभार्थियों की औसत आय में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार देखा गया है। कई लाभार्थियों ने बेहतर आवास, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा तक अपनी पहुंच को भी मजबूत किया है।

    डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए इस योजना में कैशबैक प्रोत्साहन जैसी सुविधाएं भी शामिल की गई हैं, जिसके तहत लाभार्थियों को डिजिटल लेनदेन पर वित्तीय लाभ दिया जाता है। इससे छोटे व्यापारी भी डिजिटल ट्रांजैक्शन अपनाने के लिए प्रेरित हुए हैं और देश में डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। लगभग 46 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएं हैं, जो इस योजना की सामाजिक समावेशिता को दर्शाता है, जबकि बड़ी संख्या में लाभार्थी वंचित और कमजोर वर्गों से आते हैं।

    सरकार ने इस योजना की उपलब्धियों को देखते हुए इसके विस्तार की घोषणा की है, जिसके तहत इसे अब मार्च 2030 तक जारी रखा जाएगा। इससे अधिक से अधिक स्ट्रीट वेंडर्स को योजना का लाभ मिल सकेगा और उन्हें आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी। साथ ही, यूपीआई आधारित क्रेडिट कार्ड सुविधा भी योजना के अगले चरण में शामिल की गई है, जिससे छोटे व्यापारियों को अतिरिक्त वित्तीय सहायता मिल सकेगी।

    कुल मिलाकर पीएम स्वनिधि योजना देश में सूक्ष्म ऋण प्रणाली और डिजिटल भुगतान के विस्तार में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यह न केवल आर्थिक मजबूती का माध्यम बन रही है, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ने में भी प्रभावी साबित हो रही है।

  • प्रधानमंत्री मुद्रा योजना ने युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में किया महत्वपूर्ण योगदान।

    प्रधानमंत्री मुद्रा योजना ने युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में किया महत्वपूर्ण योगदान।


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के 11 साल पूरे होने के अवसर पर इस योजना को देश की युवा और नारी शक्ति के लिए क्रांतिकारी बताया है। 8 अप्रैल 2015 को शुरू हुई इस योजना का उद्देश्य देश के बेरोजगार युवाओं और महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मुद्रा योजना ने न केवल नए उद्यमियों को सशक्त किया है, बल्कि स्थानीय रोजगार सृजन और आर्थिक समावेशन में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

    प्रधानमंत्री ने बताया कि मुद्रा योजना की सफलता का रहस्य इसकी सुलभता और वित्तीय समावेशन में निहित है। बिना गिरवी के ऋण उपलब्ध कराकर इसने अनौपचारिक ऋण पर निर्भरता कम की है और जमीनी स्तर पर ऋण अनुशासन को मजबूत किया है। योजना के माध्यम से पहली बार उद्यमिता की ओर बढ़ने वाले लोग, विशेषकर महिलाएं और वंचित समुदाय, अब अपने छोटे व्यवसाय शुरू कर रहे हैं। इससे सूक्ष्म व्यवसायों का विकास हुआ है और धीरे-धीरे ये अनौपचारिक उद्यम भारत की औपचारिक आर्थिक संरचना का हिस्सा बन रहे हैं।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि मुद्रा योजना ने युवा शक्ति और नारी शक्ति पर सकारात्मक प्रभाव डाला है। यह योजना अवसर सुलभ करने, नई पहलों को प्रोत्साहित करने और हर सपने को साकार करने के लिए समर्थन देने वाली आर्थिक सोच की मिसाल है। बीते 11 वर्षों में इस योजना ने करोड़ों युवाओं को उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ाया है और देश में रोजगार सृजन की दिशा बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    मुद्रा योजना के अंतर्गत अब तक कुल 52.37 करोड़ खाते खोले गए हैं और लगभग 33.65 लाख करोड़ रुपये का बिना गारंटी का लोन प्रदान किया गया है। लाभार्थियों में करीब 70 प्रतिशत महिलाएं हैं, जबकि कुल लाभार्थियों में 50 प्रतिशत एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के लोग शामिल हैं। यह आंकड़े इस योजना की व्यापक पहुंच और समाज के हर वर्ग में आर्थिक सशक्तिकरण की सफलता को दर्शाते हैं।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मुद्रा योजना ने बेरोजगार युवाओं को जॉब सीकर्स की भूमिका से जॉब क्रिएटर्स की दिशा में आगे बढ़ाया है। छोटे ऋण और स्थानीय विचारों के जरिए युवा उद्यमियों ने अपने व्यवसाय शुरू किए हैं और आर्थिक परिवर्तन की नींव मजबूत की है। इससे छोटे उद्यमों का विकास हुआ है, स्थानीय रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं और देश की अर्थव्यवस्था की जमीनी संरचना मजबूत हुई है।

    मुद्रा योजना ने महिलाओं और वंचित वर्गों को आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है। इससे न केवल आर्थिक रूप से उनका सशक्तिकरण हुआ है, बल्कि समाज में उनके महत्व और नेतृत्व की भावना भी बढ़ी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि योजना ने चुपचाप भारत की अर्थव्यवस्था की नींव को नया आकार दिया है और स्थानीय स्तर पर उद्यमिता को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाई है।