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  • माइक्रोवेव में इन बर्तनों का इस्तेमाल पड़ सकता है भारी, खाना गर्म करने से पहले जरूर जान लें ये जरूरी बातें

    माइक्रोवेव में इन बर्तनों का इस्तेमाल पड़ सकता है भारी, खाना गर्म करने से पहले जरूर जान लें ये जरूरी बातें

    नई दिल्ली: आज के समय में कई घरों में खाना गर्म करने और पकाने के लिए माइक्रोवेव का इस्तेमाल किया जाता है। सुविधा और समय की बचत के कारण इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है, लेकिन माइक्रोवेव में खाना गर्म करते समय बर्तन का सही चुनाव करना बेहद जरूरी है। कई लोग जल्दबाजी में किसी भी बर्तन में खाना रखकर उसे माइक्रोवेव में चला देते हैं। गलत बर्तनों का इस्तेमाल परेशानी का कारण बन सकता है और कुछ मामलों में आग लगने या अन्य हादसों का जोखिम भी रहता है। इसलिए यह जानना जरूरी है कि माइक्रोवेव में किन बर्तनों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

    सामान्य प्लास्टिक के डिब्बे और पॉलीथिन को माइक्रोवेव में इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। तेज गर्मी के संपर्क में आने पर प्लास्टिक पिघल सकता है और उसमें मौजूद कुछ रसायन भोजन में मिल सकते हैं। खासतौर पर ऐसे प्लास्टिक कंटेनर, जो माइक्रोवेव इस्तेमाल के लिए बनाए नहीं गए हैं, उनमें खाना गर्म करना उचित नहीं माना जाता। इसलिए प्लास्टिक के किसी भी डिब्बे को माइक्रोवेव में रखने से पहले यह जरूर जांच लें कि वह माइक्रोवेव के लिए सुरक्षित है या नहीं।

    स्टील, तांबा, एल्युमिनियम फॉयल और अन्य धातु के बर्तनों का इस्तेमाल भी माइक्रोवेव में सावधानी के बिना नहीं करना चाहिए। धातु माइक्रोवेव की तरंगों को प्रतिबिंबित कर सकती है, जिससे चिंगारी निकलने का खतरा पैदा हो सकता है। इससे माइक्रोवेव के अंदर आग लगने या उसके सर्किट को नुकसान पहुंचने की स्थिति बन सकती है। इसलिए माइक्रोवेव में धातु से बनी चीजें रखने से पहले उसके इस्तेमाल से जुड़ी स्पष्ट जानकारी जरूर देखनी चाहिए।

    कांच और मिट्टी के बर्तनों को लेकर भी सावधानी जरूरी है। हर तरह का कांच माइक्रोवेव के लिए सुरक्षित नहीं होता। सामान्य कांच तेज गर्मी के कारण चटक सकता है, इसलिए माइक्रोवेव सेफ चिह्न वाले बोरोसिलिकेट कांच के बर्तनों का ही इस्तेमाल करना बेहतर है। इसी तरह बिना पॉलिश वाले पारंपरिक मिट्टी के बर्तनों को भी माइक्रोवेव में रखने से बचना चाहिए, क्योंकि वे नमी सोख सकते हैं और गर्म होने पर टूटने का खतरा रहता है।

    माइक्रोवेव के लिए सही बर्तन पहचानने का आसान तरीका यह है कि इस्तेमाल से पहले उसके तल पर बने माइक्रोवेव सेफ निशान या सिंबल को जरूर देखें। कांच, सिरेमिक और BPA-फ्री ग्रेड-5 प्लास्टिक को माइक्रोवेव के लिए सही माना जाता है, लेकिन इनके मामले में भी उत्पाद पर दिए गए निर्देशों को देखना जरूरी है। सही बर्तन का इस्तेमाल न केवल माइक्रोवेव को सुरक्षित रखने में मदद करता है, बल्कि खाना गर्म करते समय होने वाली संभावित परेशानी और हादसों के जोखिम को भी कम कर सकता है।

  • काले प्लास्टिक के डिब्बों में रखा खाना कितना सुरक्षित? जानिए क्‍या कहते हैं एक्सपर्ट

    काले प्लास्टिक के डिब्बों में रखा खाना कितना सुरक्षित? जानिए क्‍या कहते हैं एक्सपर्ट


    नई दिल्ली। बीते 25 मार्च 2026 को राज्यसभा में जनहित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के दौरान भारतीय जनता पार्टी के सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने ढाबों, होटलों और अन्य जगहों पर इस्तेमाल होने वाले काले प्लास्टिक कंटेनरों को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ये सामान्य प्लास्टिक नहीं होते, बल्कि इन्हें इलेक्ट्रॉनिक कचरे और अन्य बचे हुए प्लास्टिक से बनाया जाता है। उनका कहना था कि ऐसे डिब्बों में गर्म खाना रखने से माइक्रोप्लास्टिक कण भोजन में मिल सकते हैं। आइए जानते हैं इस पर विशेषज्ञों की राय।

    कैसे तैयार होता है यह प्लास्टिक

    रिपोर्ट्स के अनुसार, काले प्लास्टिक को बनाने में अक्सर ई-वेस्ट और इंडस्ट्रियल प्लास्टिक का इस्तेमाल किया जाता है। इसे आग से सुरक्षित बनाने के लिए डेकाबीडीई जैसे फ्लेम रिटार्डेंट केमिकल मिलाए जाते हैं। समस्या यह है कि ये केमिकल पूरी तरह प्लास्टिक में स्थिर नहीं रहते और गर्म होने पर खाने में घुल सकते हैं, खासकर जब भोजन गरम या तैलीय हो। इसके अलावा, इसमें BPA और फ्थेलेट्स जैसे रसायन भी पाए जाते हैं, जिन्हें हार्मोन प्रभावित करने वाले तत्व माना जाता है। बार-बार इस्तेमाल या गर्म करने पर ये रसायन शरीर में जमा हो सकते हैं और लंबे समय में नुकसान पहुंचा सकते हैं।

    क्या कहते हैं विशेषज्ञ

    2024 में हुई एक स्टडी में 200 से अधिक ब्लैक प्लास्टिक प्रोडक्ट्स का परीक्षण किया गया, जिसमें करीब 85 प्रतिशत में टॉक्सिक फ्लेम रिटार्डेंट पाए गए। एक रिपोर्ट के मुताबिक डॉक्‍टरों का कहना है कि लंबे समय तक इन रसायनों के संपर्क में रहने से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। वहीं BPA और फ्थेलेट्स हार्मोनल असंतुलन के साथ-साथ दिल की बीमारी, डायबिटीज और प्रजनन संबंधी समस्याओं का भी जोखिम है। इसके अलावा ब्लैक प्लास्टिक से निकलने वाले माइक्रोप्लास्टिक शरीर में पहुंचकर टॉक्सिक लोड बढ़ा सकते हैं, जिससे भविष्य में कई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।

    किन लोगों को अधिक खतरा

    विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से बीमार लोगों पर इसका प्रभाव ज्यादा गंभीर हो सकता है। हालांकि अभी तक इसका कैंसर से सीधा संबंध पूरी तरह साबित नहीं हुआ है, लेकिन इसके केमिकल्स को देखते हुए सावधानी बरतना जरूरी है। एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि काले प्लास्टिक की जगह कांच, स्टील या लकड़ी के बर्तनों का इस्तेमाल करें। खासतौर पर गर्म भोजन रखने के लिए प्लास्टिक से बचना सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है।