Tag: Mid-Day Meal

  • सरकारी स्कूल में नहीं मिला एक भी छात्र, मिड-डे मील भी बंद; निरीक्षण में लापरवाही पर शिक्षकों को फटकार

    सरकारी स्कूल में नहीं मिला एक भी छात्र, मिड-डे मील भी बंद; निरीक्षण में लापरवाही पर शिक्षकों को फटकार


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले में सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। कलेक्टर अर्पित वर्मा के निर्देश पर बैराड़ तहसीलदार द्रगपाल सिंह बैश ने मंगलवार को पोहरी विकासखंड के सड़ और ककरई गांव के शासकीय विद्यालयों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सड़ प्राथमिक विद्यालय की स्थिति बेहद चिंताजनक मिली। यहां रिकॉर्ड में 33 छात्र दर्ज थे, लेकिन स्कूल में एक भी छात्र उपस्थित नहीं मिला। इतना ही नहीं, विद्यार्थियों के लिए बनने वाला मध्यान्ह भोजन भी तैयार नहीं किया गया था।

    निरीक्षण के समय विद्यालय में केवल एक शिक्षक मौजूद थे। छात्रों की शून्य उपस्थिति और मिड-डे मील जैसी महत्वपूर्ण योजना के क्रियान्वयन में लापरवाही देखकर तहसीलदार ने नाराजगी जताई। उन्होंने संबंधित शिक्षक को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी प्रयास किए जाएं और विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था में तत्काल सुधार किया जाए।

    दरअसल, जिला कलेक्टर अर्पित वर्मा ने हाल ही में सभी एसडीएम और तहसीलदारों को ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकानों का औचक निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। इसी अभियान के तहत मंगलवार सुबह करीब 11 बजे तहसीलदार द्रगपाल सिंह बैश ने सड़ और ककरई गांव के स्कूलों का निरीक्षण किया। निरीक्षण का उद्देश्य शिक्षा और पोषण योजनाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन करना था।

    सड़ प्राथमिक विद्यालय में मिली अव्यवस्थाओं के बाद तहसीलदार ककरई गांव पहुंचे, जहां प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय एक ही भवन में संचालित हो रहे हैं। यहां चार शिक्षक उपस्थित मिले, लेकिन छात्रों की संख्या अपेक्षा से काफी कम थी। कम उपस्थिति को लेकर तहसीलदार ने शिक्षकों से जवाब-तलब किया और बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए घर-घर संपर्क अभियान चलाने तथा अभिभावकों को जागरूक करने के निर्देश दिए।

    तहसीलदार ने शिक्षकों से कहा कि सरकारी योजनाओं का उद्देश्य केवल रिकॉर्ड पूरा करना नहीं, बल्कि बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और पोषण पहुंचाना है। यदि विद्यालयों में छात्र ही नहीं आएंगे तो शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि निरीक्षण का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा और लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में लगातार सामने आ रही कम उपस्थिति और मिड-डे मील जैसी योजनाओं के सही क्रियान्वयन को लेकर प्रशासन अब सख्त नजर आ रहा है। जिला प्रशासन का मानना है कि नियमित निरीक्षण से न केवल व्यवस्था में सुधार होगा, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यार्थियों की उपस्थिति में भी सकारात्मक बदलाव आएगा।

  • एमपी में मिड डे मील योजना पर घोटाले की आशंका 74 हजार रसोइयों के रिकॉर्ड जांच के दायरे में

    एमपी में मिड डे मील योजना पर घोटाले की आशंका 74 हजार रसोइयों के रिकॉर्ड जांच के दायरे में


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में स्कूली बच्चों को मिलने वाले मिड डे मील की व्यवस्था एक बड़े सवालों के घेरे में आ गई है। प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के तहत रसोइयों और सहायकों के मानदेय भुगतान में गंभीर अनियमितताओं की आशंका सामने आने के बाद राज्य सरकार ने व्यापक जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। शुरुआती समीक्षा में पता चला है कि हजारों मामलों में रसोइयों के नाम और पते तो सही दर्ज हैं लेकिन उनके बैंक खातों की जगह किसी दूसरे व्यक्ति के खाते में मानदेय भेजा जा रहा है। इस खुलासे ने करोड़ों रुपये के संभावित फर्जीवाड़े की आशंका को जन्म दे दिया है।

    प्रदेशभर में संचालित इस योजना के तहत हर महीने लगभग 20 करोड़ रुपये रसोइयों और सहायकों के मानदेय के रूप में वितरित किए जाते हैं। योजना के पोर्टल की समीक्षा के दौरान 74 हजार से अधिक रसोइयों और सहायकों के पंजीयन तथा भुगतान संबंधी रिकॉर्ड में गंभीर विसंगतियां सामने आईं। इसके बाद सरकार ने सभी जिलों के कलेक्टरों और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को तत्काल जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

    सरकार ने सभी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को 20 जुलाई 2026 तक रसोइयों और सहायकों का अनिवार्य सत्यापन पूरा करने के निर्देश दिए हैं। इस प्रक्रिया के तहत प्रत्येक कर्मचारी का ई केवाईसी समग्र आईडी और बैंक खाते का मिलान किया जाएगा। सत्यापन पूरा होने के बाद ही संबंधित जानकारी पोर्टल पर अपडेट होगी और उसके बाद ही मानदेय का भुगतान किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे फर्जी खातों में जाने वाले भुगतान पर पूरी तरह रोक लगाई जा सकेगी।

    जांच प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए विकासखंड स्तर पर ब्लॉक रिसोर्स कोऑर्डिनेटर को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है। वे सभी रिकॉर्ड का भौतिक सत्यापन करेंगे और यदि किसी भी स्तर पर डुप्लीकेट या फर्जी पंजीयन मिलता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। पूरी प्रक्रिया की लगातार मॉनिटरिंग और समीक्षा भी की जाएगी ताकि भविष्य में इस तरह की गड़बड़ियां दोबारा सामने न आएं।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि किसी स्कूल में निर्धारित संख्या से अधिक रसोइयों का पंजीयन पाया जाता है तो अतिरिक्त कर्मचारियों के मानदेय का भुगतान शासन नहीं करेगा। ऐसी स्थिति में पूरी जिम्मेदारी संबंधित क्रियान्वयन एजेंसी की होगी। इससे अनावश्यक और फर्जी भुगतान पर रोक लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

    अस्थायी एवं आउटसोर्स कर्मचारी संघ के प्रांताध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने इस मामले को गंभीर प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए कहा कि पिछले करीब 20 वर्षों से यह योजना संचालित हो रही है लेकिन आज तक सरकार के पास रसोइयों और सहायकों का पूरी तरह प्रमाणित और अद्यतन रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होना चिंता का विषय है। उनके अनुसार यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि संभावित भ्रष्टाचार की ओर भी इशारा करता है जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

    पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार ने प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के पोर्टल को एजुकेशन पोर्टल 3.0 से भी जोड़ दिया है। अब सभी प्रधानाध्यापक केवल आधिकारिक लॉगिन आईडी और पासवर्ड के माध्यम से ही पोर्टल का उपयोग कर सकेंगे। इसी तरह ब्लॉक रिसोर्स कोऑर्डिनेटर के लिए भी अधिकृत लॉगिन अनिवार्य कर दिया गया है ताकि किसी भी प्रकार की अनधिकृत एंट्री या बदलाव की संभावना समाप्त हो सके।

    सरकार का मानना है कि सत्यापन अभियान पूरा होने के बाद योजना का पूरा भुगतान तंत्र अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनेगा। यदि जांच में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा साबित होता है तो संबंधित दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जा सकती है। इस अभियान के नतीजों पर अब पूरे प्रदेश की नजर बनी हुई है।

  • बिहार में मिड-डे मील खाने से 60 से ज्यादा बच्चे बीमार, स्कूल में मची अफरा-तफरी

    बिहार में मिड-डे मील खाने से 60 से ज्यादा बच्चे बीमार, स्कूल में मची अफरा-तफरी



    नालंदा । Bihar के नालंदा जिले में मिड-डे मील खाने के बाद 60 से ज्यादा स्कूली बच्चों की तबीयत बिगड़ने से हड़कंप मच गया। यह मामला नगरनौसा प्रखंड के मध्य विद्यालय कैला का है, जहां बुधवार को बच्चों को दोपहर के भोजन में चावल और छोले परोसे गए थे। खाना खाने के कुछ ही देर बाद बच्चों को तेज पेट दर्द, उल्टी, दस्त और चक्कर आने लगे। कई बच्चे स्कूल परिसर में ही बेहोश होकर गिर पड़े, जिससे स्कूल में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

    स्थिति गंभीर होते ही स्कूल प्रशासन ने आनन-फानन में सभी बच्चों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नगरनौसा और चंडी रेफरल अस्पताल पहुंचाया। एक छात्रा की हालत ज्यादा खराब होने पर उसे बिहारशरीफ सदर अस्पताल रेफर किया गया। घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में अभिभावक अस्पताल पहुंच गए। बच्चों की हालत देखकर कई परिजन रोते-बिलखते नजर आए।

    बीमार बच्चों में अमृता कुमारी, अंकुश कुमार, अनुराधा कुमारी, तमन्ना, निशु, मुस्कान, कृति, ऋषि, आरती, सिमरन, खुशी, आदित्य, प्रियांशु, प्रिय, दीपक, प्रीति, डॉली, सौरभ और किरण समेत कई छात्र-छात्राएं शामिल हैं।

    छात्राओं ने आरोप लगाया कि मिड-डे मील में परोसी गई सब्जी में दवा जैसी संदिग्ध गोली दिखाई दी थी। बच्चों का कहना है कि रोज की तरह इस बार भोजन परोसने से पहले शिक्षकों ने टेस्टिंग भी नहीं की थी। हालांकि, बच्चों की हालत बिगड़ने के बाद एक शिक्षक अमरेश ने खुद खाना चखकर जांच करने की कोशिश की, लेकिन कुछ देर बाद उनकी भी तबीयत बिगड़ गई और उन्हें भी अस्पताल ले जाना पड़ा।

    घटना के बाद मिड-डे मील सप्लाई करने वाली संस्था Ekta Foundation पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों और अभिभावकों ने संस्था पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि बच्चों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया गया है।

    स्कूल की प्रधानाध्यापिका रजनी कुमारी ने बताया कि भोजन शुरू होने के कुछ मिनट बाद ही बच्चों की तबीयत खराब होने लगी थी। हालात बिगड़ते देख तुरंत स्वास्थ्य विभाग और अधिकारियों को सूचना दी गई।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी आनंद विजय ने जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।