Tag: Middle East Crisis Impact

  • मध्य पूर्व संकट के बीच LG एनर्जी सॉल्यूशन को पहली तिमाही में 207.8 बिलियन वॉन का घाटा!

    मध्य पूर्व संकट के बीच LG एनर्जी सॉल्यूशन को पहली तिमाही में 207.8 बिलियन वॉन का घाटा!


    नई दिल्ली।दक्षिण कोरिया की बैटरी निर्माता कंपनी LG एनर्जी सॉल्यूशन लिमिटेड ने मंगलवार को बताया कि जनवरी-मार्च 2026 की तिमाही में उसे 207.8 बिलियन वॉन (लगभग 138.2 मिलियन डॉलर) का ऑपरेटिंग घाटा हुआ। यह घाटा पिछले साल की इसी तिमाही में हुए 374.7 बिलियन वॉन के मुनाफे के विपरीत है।

    कंपनी की बिक्री 2.5 प्रतिशत गिरकर 6.55 ट्रिलियन वॉन रह गई। वित्तीय विशेषज्ञों का अनुमान है कि अमेरिका-ईरान युद्ध और मध्य पूर्व संकट के कारण बढ़ी उत्पादन लागत इस घाटे का प्रमुख कारण रही। इसके अलावा उत्तरी अमेरिका में एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (ESS) बैटरी उत्पादन में शुरुआती निवेश का असर भी पड़ा।

    कंपनी ने बताया कि अमेरिकी इन्फ्लेशन रिडक्शन एक्ट के तहत उसे 189.8 बिलियन वॉन का टैक्स क्रेडिट मिला है। यदि यह क्रेडिट न होता, तो वास्तविक ऑपरेटिंग घाटा 397.5 बिलियन वॉन तक पहुँच जाता।

    एलजी ग्रुप के चेयरमैन कू क्वांग-मो ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंडस्ट्री में बढ़ती ऊर्जा मांग को देखते हुए पावर इंफ्रास्ट्रक्चर बिजनेस को मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने अमेरिका के मैसाचुसेट्स स्थित LG एनर्जी सॉल्यूशन वर्टेक का दौरा भी किया, क्योंकि कंपनी उत्तरी अमेरिका के ESS मार्केट में अपनी मौजूदगी बढ़ाना चाहती है।

  • मध्य पूर्व में तनाव का असर: केंद्र ने SEZ यूनिट्स के लिए दरों में कटौती की घोषणा

    मध्य पूर्व में तनाव का असर: केंद्र ने SEZ यूनिट्स के लिए दरों में कटौती की घोषणा


    नई दिल्ली। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने बुधवार को विशेष आर्थिक क्षेत्रों (एसईजेड) में काम कर रही पात्र इकाइयों के लिए घरेलू टैरिफ क्षेत्र (डीटीए) में निर्मित वस्तुओं पर रियायती सीमा शुल्क दरों की घोषणा की। यह कदम केंद्रीय बजट 2026-27 में की गई घोषणा के तहत उठाया गया है, ताकि वैश्विक व्यापार में जारी व्यवधानों के कारण एसईजेड इकाइयों के सामने आ रही चुनौतियों को कम किया जा सके।

    राहत योजना की अवधि और कानूनी आधार
    सीबीआईसी ने इस राहत को सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 की धारा 25 के तहत जारी अधिसूचना 11/2026-सीमा शुल्क (31 मार्च 2026) के माध्यम से लागू किया है। यह योजना 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 तक प्रभावी रहेगी। इसके तहत पात्र एसईजेड इकाइयों को घरेलू टैरिफ क्षेत्र में कार्यरत इकाइयों के समान अवसर सुनिश्चित करते हुए रियायती दरों पर बिक्री की अनुमति दी जाएगी।

    सीमा शुल्क दरों में कटौती का विवरण
    राहत योजना के अंतर्गत विभिन्न सीमा शुल्क दरों को घटाया गया है:

    वर्तमान में 30%-40% सीमा शुल्क वाले माल पर अब 20% शुल्क लागू होगा।
    20%-30% सीमा शुल्क वाले माल की दर घटाकर 15% कर दी गई है।
    20% सीमा शुल्क वाले माल पर अब 12.5% शुल्क लगेगा।
    12.5%-15% सीमा शुल्क वाले माल पर 10% शुल्क लागू होगा।
    10% सीमा शुल्क को घटाकर 9%, और 7.5% को घटाकर 6.5% किया गया।

    शर्तें और मूल्यवर्धन आवश्यकता
    इस योजना का लाभ लेने वाली एसईजेड इकाइयों को सुनिश्चित करना होगा कि उनके निर्मित माल में इनपुट की तुलना में कम से कम 20% मूल्यवर्धन हो। इसके साथ ही, डीटीए में रियायती दरों पर की गई बिक्री पिछले तीन वित्तीय वर्षों में किसी भी वर्ष के उच्चतम वार्षिक एफओबी निर्यात मूल्य के 30% से अधिक नहीं होगी।

    राहत यो जना का क्रियान्वयन
    इस राहत योजना को केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड की स्वचालित प्रणाली के माध्यम से लागू किया जाएगा। डीटीए क्लीयरेंस के लिए एंट्री बिलों का मूल्यांकन फेसलेस असेसमेंट सिस्टम के तहत किया जाएगा, जिससे प्रक्रिया तेज और पारदर्शी होगी।

    मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक व्यापार व्यवधानों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने एसईजेड इकाइयों को राहत देने के लिए सीमा शुल्क दरों में कटौती की है। यह कदम देश में विनिर्माण इकाइयों के लिए व्यापार को बढ़ावा देने और निर्यात पर जोर बनाए रखने का स्पष्ट संकेत है।

  • मध्य पूर्व तनाव का असर: अमेरिका और UAE में पेट्रोल-डीजल के दाम 72% तक बढ़े

    मध्य पूर्व तनाव का असर: अमेरिका और UAE में पेट्रोल-डीजल के दाम 72% तक बढ़े


    नई दिल्ली मध्य पूर्व में बढ़ते राजनीतिक तनाव का असर पूरी दुनिया में महसूस किया जा रहा है। इस संघर्ष ने खासतौर पर तेल बाजार को हिला दिया है, जिससे अमेरिका और खाड़ी देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 30 से 72 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है।

    अमेरिका में गैसोलीन और डीजल महंगे

    अमेरिका में गैसोलीन (पेट्रोल) की कीमतें 4 डॉलर प्रति गैलन (लगभग 380 रुपए) के पार चली गई हैं। यह बीते तीन वर्षों में पहला मौका है जब अमेरिकी उपभोक्ताओं को इतने महंगे दाम चुकाने पड़ रहे हैं। अमेरिकी मीडिया के अनुसार, देश में औसत गैसोलीन की कीमत 4.018 डॉलर प्रति गैलन हो गई है।

    डीजल की कीमतों में भी तेजी देखी गई है। डीजल अब 5 डॉलर प्रति गैलन (करीब 475 रुपए) के पार बिक रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान पर संभावित हमलों और मध्य पूर्व में तनाव के कारण गैसोलीन और डीजल की कीमतों में क्रमशः 30 और 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है।

    खाड़ी देश यूएई में रिकार्ड बढ़ोतरी

    यूएई की फ्यूल प्राइस कमेटी ने 1 अप्रैल से लागू होने वाली नई कीमतों का ऐलान किया है। नए दामों के अनुसार:

    सुपर 98 पेट्रोल की कीमत 30% बढ़कर 3.39 दिरहम प्रति लीटर (लगभग 87 रुपए) हो गई है, जो पहले 2.59 दिरहम थी।
    स्पेशल 95 पेट्रोल का दाम 32% बढ़कर 3.28 दिरहम प्रति लीटर (लगभग 84 रुपए) हो गया है, जो पहले 2.48 दिरहम था।
    डीजल की कीमत में सबसे बड़ी बढ़ोतरी हुई, जो 72% बढ़कर 4.69 दिरहम प्रति लीटर (करीब 120 रुपए) पहुंच गई है, जबकि पहले यह 2.72 दिरहम थी।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यूएई में डीजल की यह सबसे तेज और रिकॉर्ड बढ़ोतरी है, जो घरेलू और वाणिज्यिक वाहनों के लिए महंगी होगी।

    कच्चे तेल की कीमत में उछाल

    मध्य पूर्व में तनाव और अमेरिका-इजरायल-ईरान संघर्ष के चलते कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) की कीमत में जबरदस्त तेजी देखी गई है। पिछले एक महीने में ब्रेंट क्रूड के दाम 48 प्रतिशत बढ़कर 107.28 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गए हैं। इस उछाल का सीधा असर ग्लोबल फ्यूल प्राइस पर पड़ रहा है, जिससे उपभोक्ताओं की जेब पर दबाव बढ़ा है।

    वैश्विक तेल बाजार पर प्रभाव

    विश्लेषकों का कहना है कि इस बढ़ोतरी का असर केवल अमेरिका और यूएई तक सीमित नहीं है। यूरोप, एशिया और भारत सहित कई देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। उभरते देशों में तेल आयातक देशों के लिए यह स्थिति चिंता का कारण बन सकती है।

  • पश्चिम एशिया संकट का असर: महंगाई से धीमी ग्रोथ तक, IMF की चेतावनी

    पश्चिम एशिया संकट का असर: महंगाई से धीमी ग्रोथ तक, IMF की चेतावनी


    नई दिल्ली वैश्विक अर्थव्यवस्था एक बार फिर अनिश्चितता के दौर में प्रवेश कर चुकी है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने चेतावनी दी है कि अमेरिका-इज़रायल और ईरान के बीच जारी तनाव और युद्ध का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। संस्था के अनुसार, इस संकट का सीधा असर महंगाई में बढ़ोतरी और आर्थिक विकास की रफ्तार में गिरावट के रूप में देखने को मिलेगा।

    ऊर्जा संकट से बढ़ेगा दबाव, आयातक देशों पर सबसे ज्यादा असर
    आईएमएफ के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। दुनिया के करीब 25-30 प्रतिशत तेल और 20 प्रतिशत एलएनजी की सप्लाई होर्मुज जलडमरूमध्य से होती है। ऐसे में यदि यहां किसी तरह की बाधा आती है, तो इसका सीधा असर एशिया और यूरोप के उन देशों पर पड़ेगा, जो ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं।

    गरीब और विकासशील देशों पर दोहरी मार
    रिपोर्ट में कहा गया है कि अफ्रीका और एशिया के कई गरीब देश पहले ही आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे हैं। अब बढ़ती ऊर्जा कीमतों और सप्लाई में कमी के कारण उनकी स्थिति और खराब हो सकती है। इन देशों को महंगे दाम पर भी पर्याप्त ईंधन नहीं मिल पा रहा, जिससे आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।

    खाद्य और उर्वरक संकट गहराने का खतरा
    आईएमएफ ने आगाह किया है कि यह संकट केवल ऊर्जा तक सीमित नहीं रहेगा। खाद्य और उर्वरकों की कीमतों में बढ़ोतरी से भी वैश्विक स्तर पर दबाव बढ़ेगा। खासकर गरीब देशों में खाद्य संकट गहरा सकता है और उन्हें बाहरी सहायता की जरूरत पड़ सकती है।

    लंबा चला युद्ध तो बढ़ेगा संकट का दायरा
    संस्था का मानना है कि अगर यह संघर्ष अल्पकालिक रहा, तो तेल-गैस की कीमतों में अचानक उछाल देखने को मिलेगा। लेकिन यदि यह लंबे समय तक चला, तो ऊर्जा की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहेंगी, जिससे आयात करने वाले देशों की आर्थिक स्थिति और कमजोर होगी।

    उद्योग और आम उपभोक्ता दोनों प्रभावित
    एशिया के बड़े मैन्युफैक्चरिंग देशों में ईंधन और बिजली की लागत बढ़ने से उत्पादन महंगा हो रहा है। इसका असर सीधे उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है। साथ ही कई देशों में भुगतान संतुलन पर दबाव बढ़ने से उनकी मुद्रा भी कमजोर हो रही है।

    यूरोप में दोहराया जा सकता है गैस संकट जैसा हाल
    आईएमएफ ने चेतावनी दी है कि यूरोप में 2021-22 जैसा गैस संकट फिर से पैदा हो सकता है। इटली और यूनाइटेड किंगडम जैसे देश ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं, जबकि फ्रांस और स्पेन अपनी परमाणु और नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के कारण अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में रह सकते हैं।

    सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स पर भी असर
    इस संघर्ष के चलते वैश्विक सप्लाई चेन भी प्रभावित हो रही है। जहाजों के रूट बदलने से ट्रांसपोर्ट और बीमा लागत बढ़ गई है, जिससे सामान की डिलीवरी में देरी हो रही है। साथ ही, खाड़ी क्षेत्र से मिलने वाले हीलियम और अन्य जरूरी संसाधनों की सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है।

    वित्तीय बाजारों में बढ़ी अस्थिरता
    इस भू-राजनीतिक तनाव का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों पर भी दिख रहा है। शेयर बाजारों में गिरावट, बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है। हालांकि, यह गिरावट अभी पिछले बड़े संकटों जितनी गंभीर नहीं है, लेकिन इससे वित्तीय स्थितियां सख्त हो गई हैं।

    आईएमएफ की सलाह: सतर्क रहें और सही नीतियां अपनाएं
    आईएमएफ ने देशों को सलाह दी है कि वे इस स्थिति से निपटने के लिए संतुलित और प्रभावी नीतियां अपनाएं। खासतौर पर कम संसाधनों वाले देशों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। आईएमएफ की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा कि “अनिश्चितता भरे इस दौर में अधिक देशों को समर्थन की जरूरत है और हम उनके साथ खड़े हैं।”

  • एसीबी का बड़ा फैसला, क्षेत्रीय तनाव के चलते टली अफगानिस्तान-श्रीलंका सीरीज

    एसीबी का बड़ा फैसला, क्षेत्रीय तनाव के चलते टली अफगानिस्तान-श्रीलंका सीरीज


    नई दिल्ली। मध्य-पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट पर भी पड़ने लगा है। Afghanistan Cricket Board (एसीबी) ने बुधवार को घोषणा की कि Afghanistan national cricket team और Sri Lanka national cricket team के बीच होने वाली द्विपक्षीय सीरीज फिलहाल स्थगित कर दी गई है। यह सीरीज 13 मार्च से संयुक्त अरब अमीरात में शुरू होने वाली थी, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में उड़ानों पर लगी रोक और अन्य लॉजिस्टिक समस्याओं के कारण इसे टालने का फैसला लिया गया। बोर्ड के अनुसार अब इस सीरीज के 2026 के अंत में आयोजित होने की संभावना है।

    यूएई में होना था मुकाबला
    यह सीरीज अफगानिस्तान के लिए खास होने वाली थी, क्योंकि वह पहली बार श्रीलंका की मेजबानी करने जा रहा था। मैचों का आयोजन Sharjah Cricket Stadium और Dubai International Cricket Stadium में किया जाना था। कार्यक्रम के अनुसार 13, 15 और 17 मार्च को शारजाह में तीन टी20 मैच खेले जाने थे, जबकि 20, 22 और 25 मार्च को दुबई में तीन वनडे मुकाबले निर्धारित थे। दोनों टीमों के बीच होने वाली इस सीरीज को लेकर क्रिकेट प्रशंसकों में काफी उत्साह था।

    तैयारियां पूरी, लेकिन हालात बने बाधा
    एसीबी ने अपने बयान में बताया कि इस सीरीज की तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई थीं। आयोजन के लिए Emirates Cricket Board से मंजूरी भी मिल चुकी थी और दोनों मैदानों पर मैचों के आयोजन की व्यवस्था कर ली गई थी। हालांकि मार्च की शुरुआत में अचानक क्षेत्रीय हालात बिगड़ने से यात्रा और आयोजन से जुड़ी कई चुनौतियां सामने आ गईं। इन परिस्थितियों में टीमों के आवागमन, सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई।

    लगातार बैठकों के बाद लिया गया फैसला
    स्थिति को देखते हुए अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने विभिन्न संबंधित संस्थाओं के साथ कई दौर की बातचीत की। बोर्ड ने Emirates Cricket Board, Sharjah Cricket Stadium और Dubai International Cricket Stadium के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें कर हालात का आकलन किया। 4 मार्च को हुई एक संयुक्त बैठक में तय किया गया कि स्थिति पर नजर रखी जाए और 6 मार्च तक हालात की समीक्षा की जाए। इसके बाद 7 मार्च को हुई अगली बैठक में अंतिम निर्णय लेने से पहले 9 मार्च तक इंतजार करने की सलाह दी गई।

    श्रीलंका बोर्ड की सहमति से लिया गया निर्णय
    अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी लगातार Sri Lanka Cricket को दी जाती रही। अंततः दोनों बोर्डों के बीच सहमति बनने के बाद सीरीज को स्थगित करने का फैसला लिया गया। बोर्ड के अनुसार खिलाड़ियों की सुरक्षा और यात्रा से जुड़ी अनिश्चितताओं को देखते हुए यह कदम उठाना जरूरी था।

    नई तारीखों की जल्द होगी घोषणा
    एसीबी ने कहा है कि सीरीज को रद्द नहीं किया गया है, बल्कि इसे आगे के लिए टाल दिया गया है। बोर्ड जल्द ही नई तारीखों की घोषणा करेगा ताकि दोनों टीमों के बीच यह सीरीज आयोजित की जा सके। अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने यह भी दोहराया कि वह श्रीलंका क्रिकेट के साथ अपने मजबूत क्रिकेट संबंधों को आगे भी बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

    प्रशंसकों को करना होगा इंतजार
    इस फैसले के बाद क्रिकेट प्रशंसकों को अफगानिस्तान और श्रीलंका के बीच इस बहुप्रतीक्षित सीरीज के लिए थोड़ा और इंतजार करना पड़ेगा। हालांकि बोर्ड का कहना है कि जैसे ही परिस्थितियां सामान्य होंगी, दोनों टीमों के बीच यह मुकाबला आयोजित किया जाएगा, जिससे प्रशंसकों को रोमांचक क्रिकेट देखने का मौका मिल सके।

  • जियोपॉलिटिकल संकट का असर! गोल्ड बना निवेशकों की पहली पसंद, पांच दिन से जारी तेजी

    जियोपॉलिटिकल संकट का असर! गोल्ड बना निवेशकों की पहली पसंद, पांच दिन से जारी तेजी


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और ऊर्जा कीमतों में उछाल के बीच सोना एक बार फिर निवेशकों का पसंदीदा सुरक्षित ठिकाना बन गया है। वैश्विक बाजारों में मंगलवार को सोने की कीमतों में लगातार पांचवें सत्र में तेजी दर्ज की गई। भू-राजनीतिक अनिश्चितता और महंगाई की आशंकाओं ने कीमती धातुओं में जोरदार खरीदारी को बढ़ावा दिया है।

    एमसीएक्स पर रिकॉर्ड उछाल
    भारत के Multi Commodity Exchange of India (एमसीएक्स) पर अप्रैल डिलीवरी वाला सोना सोमवार को 2.53 प्रतिशत चढ़कर 1,66,199 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं मई डिलीवरी वाली चांदी 0.90 प्रतिशत गिरकर 2,80,090 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई।

    होली के कारण मंगलवार को पहले सत्र में एमसीएक्स पर कारोबार बंद रहा और शाम 5 बजे से ट्रेडिंग दोबारा शुरू होनी है।

    वैश्विक बाजारों में भी तेजी
    अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 0.8 प्रतिशत बढ़कर 5,360 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स में करीब 1 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। स्पॉट सिल्वर लगभग 1.9 प्रतिशत उछलकर 91.11 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया।

    हालांकि डॉलर इंडेक्स 0.19 प्रतिशत बढ़कर 98.57 पर पहुंच गया, जिससे डॉलर आधारित सोना विदेशी खरीदारों के लिए महंगा हो गया और तेजी की रफ्तार पर कुछ हद तक अंकुश लगा।

    तनाव की आग में घी का काम कर रहा तेल
    अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा है कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जरूरत पड़ने तक जारी रहेगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेहरान ने सऊदी अरब में तेल और गैस ढांचे को निशाना बनाया है और रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों को नुकसान पहुंचाने की चेतावनी दी है।

    इसके जवाब में इजरायल ने ईरान के कमांड केंद्रों पर ‘हमलों की नई लहर’ शुरू करने की घोषणा की। इस बढ़ते टकराव से ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने की आशंका गहरा गई है।

    अमेरिकी कच्चा तेल वायदा 1.4 प्रतिशत बढ़कर 72.23 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि ब्रेंट क्रूड 1.87 प्रतिशत की तेजी के साथ 79.2 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। तेल की बढ़ती कीमतें महंगाई की चिंताओं को और हवा दे रही हैं, जिससे सोने की मांग मजबूत हो रही है।

    फेड की नीति पर नजर
    निवेशक अब अमेरिका के विनिर्माण और गैर-विनिर्माण पीएमआई, एडीपी नॉन-फार्म रोजगार आंकड़े और बेरोजगारी दर जैसे संकेतकों पर नजर टिकाए हुए हैं। इन आंकड़ों से Federal Reserve की आगे की मौद्रिक नीति का संकेत मिल सकता है।

    यदि महंगाई दबाव बना रहता है और ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। हालांकि अनिश्चितता के माहौल में निवेशक फिलहाल सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर झुकाव दिखा रहे हैं।

    2026 में 25% चढ़ चुका है सोना
    साल 2026 में अब तक सोने की कीमतों में करीब 25 प्रतिशत की तेजी आ चुकी है। पिछले वर्ष भी सोना लगभग 64 प्रतिशत चढ़ा था। इस तेजी के पीछे केंद्रीय बैंकों की मजबूत खरीदारी, एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) में बढ़ता निवेश और फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता को लेकर चिंताएं प्रमुख कारण रही हैं।

    विश्लेषकों का मानना है कि जब तक मध्य पूर्व में हालात सामान्य नहीं होते और ऊर्जा बाजार स्थिर नहीं होता, तब तक सोने में मजबूती बनी रह सकती है। हालांकि मजबूत डॉलर और ऊंची ब्याज दरें इसकी रफ्तार को सीमित कर सकती हैं।