Tag: Middle East tension oil

  • मिडिल ईस्ट तनाव से तेल बाजार में भूचाल, ब्रेंट क्रूड 60% से ज्यादा उछला

    मिडिल ईस्ट तनाव से तेल बाजार में भूचाल, ब्रेंट क्रूड 60% से ज्यादा उछला


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक तेल बाजार में तीव्र हलचल पैदा कर दी है। ईरान से संबद्ध युद्ध जैसे हालातों के बाद अंतरराष्ट्रीय पैनल ब्रेंट क्रूड के द्वीप में 60 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। करीब 70 डॉलर प्रति डॉलर का कारोबार ब्रेंट अब 112 डॉलर प्रति डॉलर के करीब पहुंच गया है। वहीं, भारत के मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में कच्चे तेल के लिए 3 फीसदी से ज्यादा उछाल 9,310 रुपये प्रति शेयर तक पहुंच गया। पिछले एक महीने में ही जिले में 56 प्रतिशत की तेजी ने बाजार की चमक को साफ तौर पर शामिल कर दिया है। अमेरिका का वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट भी करीब 98.75 डॉलर प्रति शेयर पर पहुंच गया, जिसमें कोडो सत्र में 2 फीसदी से ज्यादा की तेजी देखी गई।

    होर्मुज पर खतरा, अल्ट्रासाउंड बाधित होने का डर

    पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण दुनिया का सबसे अहम तेल मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य पर खतरा मंडरा रहा है। इस समुद्री मार्ग से वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा शामिल है, लेकिन स्थिर बंदरगाहों में यहां से बाधा उत्पन्न हो रही है। कई तेल उत्पादक संयंत्रों में उत्पादन की नौबत आ गई है, जिससे बाजार में ऑक्सफोर्ड को लेकर चिंता बढ़ गई है। रिपोर्ट के अनुसार, इस मार्ग से तेल की आपूर्ति सामान्य स्तर के केवल 5 प्रतिशत तक सीमित रह सकती है और स्थिति सामान्य होने में कम से कम एक महीने का समय लग सकता है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार दबाव बना हुआ है।

    अमेरिका-ईरान माजी से बड़ी चिंता

    यह संकट और गंभीर बना हुआ है अमेरिका और ईरान के बीच भारी संकट। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य में 48 घंटे के भीतर पूरी तरह से चेतावनी दी थी। उन्होंने साफ कहा कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो ईरान के पावर प्लांट्स को बंद कर दिया जाएगा। दूसरी ओर, ईरान ने भी पलटवार करते हुए खाड़ी देशों के ऊर्जा पर्यावरण पर हमले को खतरनाक बना दिया है। हालाँकि ईरान का दावा है कि होर्मुज़ पूरी तरह से बंद नहीं है और साथियों की छुट्टी जारी है, लेकिन सुरक्षा के दावे से सख्त कदम उठाए गए हैं, जिससे स्थिति बेहद खराब हो गई है।

    आगे और बढ़ोतरी संभावित है, उत्पादन में भारी गिरावट का अनुमान है

    वैश्विक वित्तीय संस्था गोल्डमैन सैक्स ने भी इस संकट को देखते हुए अपने अनुमान में बदलाव किया है। संस्था ने 2026 के लिए ब्रेंट क्रूड का औसत अनुमान 77 डॉलर से 85 डॉलर प्रति आँकड़ा कर दिया है, जबकि मार्च-अप्रैल के दौरान लगभग 110 डॉलर प्रति आँकड़े के आसपास रहने की संभावना है। रिपोर्ट के अनुसार, मध्य पूर्व में कच्चे तेल के उत्पादन में नुकसान 1.1 करोड़ कोटा प्रति दिन से लेकर 1.7 करोड़ कोटा प्रति दिन तक पहुंच सकता है। हालाँकि, एक राहत की बात यह है कि अमेरिका और यूरोप में अभी भी कच्चे तेल का भंडार है, जिससे संकेत मिलता है कि संघर्ष पहले ही शुरू हो चुका है, जो कि विश्वव्यापी राक्षस माँग से अधिक है।

  • मिडिल ईस्ट तनाव में नरमी के संकेत, कच्चे तेल की कीमतों में 6% की बड़ी गिरावट

    मिडिल ईस्ट तनाव में नरमी के संकेत, कच्चे तेल की कीमतों में 6% की बड़ी गिरावट


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में Iran के साथ तनाव कम होने की उम्मीद के बीच मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली। बाजार में अचानक आई इस नरमी के कारण कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गया।

    अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क Brent Crude फ्यूचर्स की कीमत 6.51 डॉलर यानी लगभग 6.6 प्रतिशत गिरकर 92.45 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। वहीं अमेरिकी मानक West Texas Intermediate (WTI) कच्चे तेल की कीमत 6.12 डॉलर या 6.5 प्रतिशत गिरकर 88.65 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई।

    ट्रंप के बयान के बाद बाजार में आई नरमी
    तेल की कीमतों में यह गिरावट मुख्य रूप से अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump के उस बयान के बाद आई, जिसमें उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी अभियान “बहुत जल्द” समाप्त हो सकता है।

    ट्रंप ने कहा कि इस अभियान की सफलता का मतलब यह होगा कि तेहरान के पास ऐसे हथियार विकसित करने की क्षमता नहीं रहेगी जो अमेरिका, Israel या उसके सहयोगी देशों के लिए खतरा बन सकें। उनके इस बयान से वैश्विक बाजारों को संकेत मिला कि क्षेत्र में तनाव कम हो सकता है, जिससे तेल आपूर्ति बाधित होने का जोखिम घट सकता है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दी चेतावनी
    ट्रंप ने ईरान को Strait of Hormuz के जरिए वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को बाधित करने की किसी भी कोशिश के खिलाफ चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि यह जलडमरूमध्य सुरक्षित रहेगा क्योंकि वहां अमेरिकी नौसेना के कई जहाज तैनात हैं।

    होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। दुनिया के बड़े तेल उत्पादक देशों से निर्यात होने वाला कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी तरह का खतरा वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बड़ी चिंता बन सकता है।

    इजरायल के साथ संयुक्त अभियान का असर
    इस महीने की शुरुआत में अमेरिका ने Iran की सैन्य और परमाणु क्षमताओं को कमजोर करने के उद्देश्य से Israel के साथ संयुक्त सैन्य अभियान चलाया था। इस अभियान के तहत ईरान के कई ठिकानों पर हमले किए गए थे। इन घटनाओं के चलते वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई थी और तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला था। हालांकि अब तनाव कम होने की उम्मीद से बाजार में राहत का माहौल बना है।

    सोमवार को कई साल के उच्च स्तर पर पहुंचा था तेल
    गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले यानी सोमवार को तेल की कीमतें कई वर्षों के उच्च स्तर पर पहुंच गई थीं। उस समय Brent Crude की कीमत 119.50 डॉलर प्रति बैरल और West Texas Intermediate की कीमत 119.48 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, जो 2022 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर था। इसके बाद मंगलवार को बाजार में मुनाफावसूली और भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीद से कीमतों में तेज गिरावट आ गई।

    भारत में महंगाई पर असर सीमित रहने की उम्मीद
    इस बीच भारत की वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने सोमवार को संसद में कहा कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में हालिया वृद्धि का भारत की मुद्रास्फीति दर पर फिलहाल बड़ा असर नहीं पड़ेगा।

    उन्होंने बताया कि देश में महंगाई दर अभी “निम्नतम सीमा” के करीब बनी हुई है। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में 28 फरवरी 2026 को भू-राजनीतिक तनाव शुरू होने से पहले तक भारत द्वारा आयात किए जाने वाले कच्चे तेल की कीमतें लगभग एक साल से लगातार गिर रही थीं।