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  • ईरान और सऊदी टकराव से बढ़ेगा परमाणु युद्ध का खतरा! पाकिस्तान की हो सकती है एंट्री

    ईरान और सऊदी टकराव से बढ़ेगा परमाणु युद्ध का खतरा! पाकिस्तान की हो सकती है एंट्री


    रियाद। मिडिल ईस्ट में ईरान-इजरायल-अमेरिका संघर्ष अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां एक हमला पूरे क्षेत्र को ज्वालामुखी की तरह हिला सकता है। ईरान ने सऊदी अरब, कतर और UAE के प्रमुख तेल-गैस ठिकानों को खाली करने की चेतावनी दी है। इससे स्पष्ट है कि यह केवल मिसाइल और ड्रोन हमलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आगे का चेन रिएक्शन पूरे क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है।

    ईरान का खतरनाक कदम

    इजरायल ने हाल ही में ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला किया था। इसके जवाब में ईरान ने कतर के गैस फील्ड को निशाना बनाया। UAE की एक गैस फील्ड को मलबा गिरने के कारण खाली करना पड़ा। सऊदी अरब ने भी मिसाइल और ड्रोन हमलों को रोकने का दावा किया है। इस जंग का सबसे बड़ा डर अब केवल हमला नहीं, बल्कि इसके बाद होने वाले प्रभाव और देशों की संभावित भागीदारी को लेकर है।

    सऊदी-पाकिस्तान रक्षा समझौता और न्यूक्लियर छतरी

    सऊदी और पाकिस्तान के बीच साल 2022 में द्विपक्षीय रक्षा समझौता हुआ था। मिडिल ईस्ट आई की रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी विश्लेषक सलमान अल-अंसारी का कहना है कि अगर सऊदी पूरी ताकत के साथ जंग में उतरता है, तो पाकिस्तान को अपने द्विपक्षीय समझौते के तहत मदद करनी होगी। इसमें सैन्य सहायता के साथ ‘न्यूक्लियर छतरी’ यानी परमाणु सुरक्षा का भी जिक्र किया गया है। इसे NATO के आर्टिकल-5 से जोड़कर देखा जा रहा है, यानी सऊदी पर हमला पाकिस्तान को भी सक्रिय करने का दबाव पैदा कर सकता है।

    ईरान की प्रतिक्रिया और पाकिस्तान की दुविधा

    हाल के हफ्तों में सऊदी अरब ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना किया है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि उसकी जमीन का इस्तेमाल सऊदी या उसके सहयोगियों के खिलाफ नहीं किया जाएगा। पाकिस्तान इस समय सऊदी का करीबी सहयोगी है, लेकिन खाड़ी देशों से उसकी तेल और गैस पर निर्भरता भी काफी अधिक है। साथ ही, पाकिस्तान ईरान के साथ पाइपलाइन प्रोजेक्ट में भी शामिल है, जो अमेरिका के दबाव के कारण पूरी नहीं हो पाई।

    हाल ही में पाकिस्तान का ‘द कराची’ जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकला, जिसे ईरान के साथ समझौते के तहत माना जा रहा है। अगर सऊदी अरब सीधे जंग में उतरता है, तो पाकिस्तान के जहाजों और संसाधनों पर हमले का जोखिम बढ़ सकता है। वहीं पाकिस्तान अफगानिस्तान में भी फंसा हुआ है, जिससे उसकी भूमिका और जटिल बन रही है।

    संभावित वैश्विक खतरा

    विश्लेषकों का कहना है कि अगर सऊदी अरब सीधे इस संघर्ष में शामिल होता है और पाकिस्तान भी इसमें एंट्री करता है, तो यह संघर्ष केवल मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा। क्षेत्रीय टकराव बड़े पैमाने पर फैल सकता है और इससे वर्ल्ड वार 3 जैसी वैश्विक स्थिति बनने की आशंका भी जताई जा रही है।

  • मिडिल ईस्ट युद्ध में दो भारतीयों की मौत, एक अब भी लापता; विदेश मंत्रालय ने दी पहली आधिकारिक जानकारी

    मिडिल ईस्ट युद्ध में दो भारतीयों की मौत, एक अब भी लापता; विदेश मंत्रालय ने दी पहली आधिकारिक जानकारी

    नई दिल्ली/वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत के दो नागरिकों की मौत हो गई है, जबकि एक भारतीय अब भी लापता बताया जा रहा है। इस बारे में पहली बार आधिकारिक जानकारी देते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs (India) के प्रवक्ता रंधीर जैसवाल (Randhir Jaiswal) ने बुधवार को पुष्टि की कि क्षेत्र में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

    उन्होंने बताया कि खाड़ी क्षेत्र में बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी रहते हैं और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने क
    े लिए सरकार लगातार निगरानी कर रही है।

    जहाजों पर हमले के दौरान हुई घटना

    विदेश मंत्रालय के अनुसार, मृतक भारतीय उन व्यापारिक जहाजों पर सवार थे जिन पर संघर्ष प्रभावित समुद्री क्षेत्र में हमला हुआ था। इस दौरान कुछ अन्य भारतीय नागरिक घायल भी हुए हैं।

    मंत्रालय के मुताबिक एक भारतीय नागरिक Israel में घायल हुआ है, जबकि Dubai में भी एक भारतीय के घायल होने की सूचना मिली है। फिलहाल दो भारतीयों की मौत की पुष्टि हुई है और एक व्यक्ति अभी भी लापता है।

    भारतीय दूतावास लगातार संपर्क में

    प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने कहा कि विदेश मंत्रालय प्रभावित परिवारों के संपर्क में है और क्षेत्र में मौजूद भारतीय दूतावास व वाणिज्य दूतावास भारतीय समुदाय को हर संभव सहायता प्रदान कर रहे हैं।

    स्थिति को देखते हुए नई दिल्ली में 24 घंटे काम करने वाला एक विशेष नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किया गया है, जो आपातकालीन कॉल और ईमेल प्राप्त कर संबंधित देशों में भारतीय मिशनों के साथ समन्वय कर रहा है।

    पीएम मोदी और विदेश मंत्री स्थिति पर नजर रखे हुए

    विदेश मंत्रालय के अनुसार Narendra Modi पश्चिम एशिया के हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और United Arab Emirates, Qatar, Saudi Arabia, Oman, Bahrain, Jordan, Kuwait और Israel के नेताओं के संपर्क में हैं।

    वहीं विदेश मंत्री Subrahmanyam Jaishankar भी Iran समेत कई देशों के अपने समकक्षों से लगातार बातचीत कर रहे हैं।

    युद्ध से बढ़ा क्षेत्रीय तनाव

    गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी और इजरायली ठिकानों को निशाना बनाया।

    इस संघर्ष के कारण समुद्री मार्गों में बाधा आई है और वैश्विक ऊर्जा बाजार के साथ अंतरराष्ट्रीय आर्थिक स्थिरता पर भी असर पड़ रहा है।

  • ईरान में खामेनेई की मौत के बाद सड़कों पर हजारों लोग: दो साल की बच्ची के जनाजे में जुटा शोक

    ईरान में खामेनेई की मौत के बाद सड़कों पर हजारों लोग: दो साल की बच्ची के जनाजे में जुटा शोक



    नई दिल्ली। अमेरिका और इजराइल के साथ ईरान में जारी संघर्ष आज 11वें दिन प्रवेश कर गया है। जंग के पहले ही दिन ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मृत्यु की खबर ने पूरी दुनिया को हिला दिया।

    ईरान में खामेनेई के निधन की खबर मिलते ही महिलाओं और पुरुषों सहित हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। लोग हाथों में खामेनेई की तस्वीरें और मोमबत्तियां लिए हुए थे और उनके प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान लोगों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि खामेनेई का आदर्श हमेशा जीवित रहेगा।

    दो साल की बच्ची के जनाजे में भारी शोक
    ईरान में शोक की भावना इतनी गहरी थी कि दो साल की बच्ची के जनाजे में भी हजारों लोग शामिल हुए। लोगों की भीड़ ने सड़कें भर दीं और सोशल मीडिया पर इस दौरान की PHOTOS और VIDEOS वायरल हो रही हैं।

    मिडिल ईस्ट और पड़ोसी देशों पर युद्ध का असर
    बीते 10 दिनों में इस संघर्ष ने मिडिल ईस्ट और आसपास के 10 से अधिक देशों के लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित की है।

    कुछ क्षेत्रों में बमबारी और सैन्य कार्रवाई का डर

    कई शहरों में विरोध प्रदर्शन और भारी भीड़

    नागरिकों में भय और असुरक्षा का माहौल

    विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध के लगातार बढ़ते प्रभाव के कारण क्षेत्रीय स्थिरता खतरे में है और आर्थिक संकट और आपूर्ति बाधित हो रही है।

    ईरान में शोक और अंतरराष्ट्रीय चिंता
    खामेनेई के समर्थन में प्रदर्शनकारी लोगों ने कहा कि उनका नेतृत्व ईरान और मुस्लिम समुदाय के लिए मार्गदर्शक था।अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देशों ने संघर्ष को रोकने और कूटनीतिक समाधान खोजने की अपील की है।ईरान में जारी प्रदर्शन और शोक के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जो विश्व समुदाय की चिंता बढ़ा रहे हैं।

  • मिडिल ईस्ट जंग तेज: ईरान की चेतावनी‘एक लीटर तेल भी नहीं जाने देंगे’, होर्मुज स्ट्रेट पर नई शर्त

    मिडिल ईस्ट जंग तेज: ईरान की चेतावनी‘एक लीटर तेल भी नहीं जाने देंगे’, होर्मुज स्ट्रेट पर नई शर्त




    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष का आज 11वां दिन है और इसी बीच ईरान ने दुनिया के लिए एक बड़ी चेतावनी जारी की है। ईरान की ताकतवर सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा है कि अगर हमले जारी रहे तो वह एक लीटर तेल भी बाहर नहीं जाने देगा। ईरान ने दुनिया के सबसे अहम समुद्री तेल मार्ग होर्मुज स्ट्रेट को लेकर नई शर्त भी रख दी है। ईरानी सेना का कहना है कि कुछ देशों के जहाजों को ही इस रास्ते से गुजरने दिया जाएगा और इसके लिए उन देशों को पहले अपने यहां से अमेरिका और इजराइल के राजदूतों को निकालना होगा।

    तो पूरी दुनिया में तेल संकट पैदा हो सकता है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान इस रास्ते से गुजरने वाले तेल टैंकरों और व्यापारिक जहाजों से सुरक्षा शुल्क यानी सिक्योरिटी टैक्स वसूलने की योजना भी बना रहा है, खासकर उन देशों के जहाजों से जो अमेरिका के सहयोगी माने जाते हैं।

    इसी बीच युद्ध का असर क्षेत्र के दूसरे देशों पर भी दिखने लगा है। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी UNHCR के अनुसार 2 मार्च से अब तक 80 हजार से ज्यादा सीरियाई नागरिक लेबनान से सीमा पार कर अपने देश वापस लौट चुके हैं। एजेंसी की प्रवक्ता सेलिन श्मिट ने बताया कि इजराइली हमलों के डर से कई परिवार जल्दबाजी में लेबनान छोड़कर लौटे हैं। अधिकांश लोग बिना सामान लिए ही निकल गए और फिलहाल अपने रिश्तेदारों के घरों में रह रहे हैं। अभी तक इन लोगों ने आपातकालीन आश्रय की कोई आधिकारिक मांग दर्ज नहीं कराई है।

    युद्ध के बीच ईरान ने साफ कर दिया है कि वह फिलहाल युद्धविराम नहीं चाहता। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरान पर हमला करने वालों को ऐसा जवाब दिया जाएगा कि वे दोबारा ऐसा करने की हिम्मत न करें। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को नहीं लगता कि अमेरिका और इजराइल से बातचीत करके यह युद्ध खत्म होगा। उनके मुताबिक ईरान उस स्थिति को खत्म करना चाहता है जिसमें पहले युद्ध होता है, फिर बातचीत और युद्धविराम होता है और कुछ समय बाद फिर से लड़ाई शुरू हो जाती है।

    दूसरी तरफ इराक ने भी इस संघर्ष से दूरी बनाने की कोशिश की है। इराक के प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी ने अमेरिका से साफ कहा है कि इराक की जमीन या उसके हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल पड़ोसी देशों पर हमले के लिए नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने यह बात अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर बातचीत के दौरान कही। इराक का कहना है कि वह इस युद्ध में शामिल नहीं होना चाहता और अपने क्षेत्र को किसी भी सैन्य टकराव से दूर रखना चाहता है।

    युद्ध के कारण एशिया के कई देशों में भी चिंता बढ़ गई है। पाकिस्तान के बाद अब थाईलैंड ने ईंधन बचाने के लिए सरकारी कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम करने का आदेश दिया है। थाई सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के विदेश यात्रा पर भी रोक लगा दी है और ऊर्जा बचत के लिए अलग-अलग उपाय लागू किए हैं। पाकिस्तान में भी सरकार ने खर्च कम करने के लिए सरकारी दफ्तरों को हफ्ते में चार दिन खोलने और आधे कर्मचारियों को घर से काम करने का फैसला किया है। वहीं वियतनाम ने लोगों से ईंधन बचाने की अपील की है और बांग्लादेश ने ऊर्जा संकट को देखते हुए विश्वविद्यालय बंद कर दिए हैं तथा छुट्टियों की अवधि बढ़ा दी है।

    इस संघर्ष का पर्यावरण पर भी असर दिखने लगा है। पाकिस्तान के मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि ईरान में हुए हवाई हमलों के बाद वहां से उठने वाला धुआं और प्रदूषण पाकिस्तान के पश्चिमी इलाकों तक पहुंच सकता है, जिससे हवा की गुणवत्ता खराब हो सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान के तेल भंडारण ठिकानों पर हमलों के बाद कई शहरों के ऊपर घना काला धुआं छाया हुआ है और वहां सांस लेना मुश्किल हो गया है।

    दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी सऊदी अरामको ने भी इस स्थिति को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। कंपनी के सीईओ अमीन नासिर के अनुसार अगर युद्ध जारी रहता है और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है तो वैश्विक तेल बाजार में बड़ा संकट पैदा हो सकता है। उन्होंने कहा कि इससे केवल ऊर्जा क्षेत्र ही नहीं बल्कि शिपिंग, बीमा, हवाई यात्रा, खेती और ऑटोमोबाइल जैसे कई उद्योगों पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा दुनिया में तेल का भंडार पहले ही पिछले पांच वर्षों के सबसे निचले स्तर के आसपास है, इसलिए सप्लाई में किसी भी बड़ी रुकावट से स्थिति और गंभीर हो सकती है।

    इसी बीच तुर्किये ने भी अपनी सुरक्षा बढ़ा दी है और देश के दक्षिण-पूर्वी इलाके में अमेरिकी पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम तैनात किया गया है। तुर्किये का कहना है कि हाल की घटनाओं को देखते हुए उसकी सीमाओं और हवाई क्षेत्र की सुरक्षा मजबूत की जा रही है।

    उधर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि अमेरिकी नौसेना अब तक ईरान के 46 युद्धपोतों को डुबो चुकी है। उनके इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कहा कि युद्ध कब खत्म होगा यह ईरान तय करेगा और अगर हमले जारी रहे तो क्षेत्र से एक लीटर तेल भी बाहर नहीं जाने दिया जाएगा।

    युद्ध का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ने लगा है। मिस्र ने घरेलू ईंधन की कीमतों में करीब 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी कर दी है। सरकार का कहना है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध के कारण तेल सप्लाई और समुद्री परिवहन मार्ग प्रभावित हो रहे हैं, जिसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है।

    कुल मिलाकर मिडिल ईस्ट में जारी यह संघर्ष अब केवल क्षेत्रीय युद्ध नहीं रह गया है। तेल सप्लाई, शरणार्थी संकट, पर्यावरण और वैश्विक अर्थव्यवस्था—इन सभी पर इसका असर साफ दिखाई देने लगा है और अगर हालात जल्द नहीं संभले तो दुनिया को एक बड़े ऊर्जा और आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है।