Tag: MiddleEastConflict

  • ईरान का बड़ा बयान: हमला हुआ तो बढ़ेगा परमाणु कार्यक्रम, 90% तक यूरेनियम संवर्धन की दी चेतावनी

    ईरान का बड़ा बयान: हमला हुआ तो बढ़ेगा परमाणु कार्यक्रम, 90% तक यूरेनियम संवर्धन की दी चेतावनी



    नई दिल्ली। ईरान ने साफ संकेत दिए हैं कि अगर अमेरिका या इजरायल उसकी जमीन पर दोबारा सैन्य कार्रवाई करते हैं तो वह अपने परमाणु कार्यक्रम को और तेज कर सकता है, जिसमें यूरेनियम संवर्धन को 90 प्रतिशत शुद्धता तक बढ़ाने का विकल्प शामिल है। इसे परमाणु हथियार-स्तर के बेहद करीब माना जाता है।

    यह बयान ईरान की संसद से जुड़े एक प्रवक्ता इब्राहिम रेजाई की ओर से सामने आया है, जिन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि किसी भी नए हमले की स्थिति में देश के पास अपने परमाणु विकल्पों को और मजबूत करने के अलावा अन्य रास्ते भी होंगे और इस पर संसद में चर्चा की जाएगी।

    यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब पश्चिम एशिया में पहले से ही तनाव बना हुआ है और अमेरिका व इजरायल की संभावित कार्रवाई को लेकर अटकलें तेज हैं। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे परमाणु अप्रसार समझौते के संदर्भ में गंभीर संकेत माना जा रहा है।

  • ईरान-यूएई तनाव पर बड़ा खुलासा: रिफाइनरी हमले में गुप्त भूमिका के दावे से मिडिल ईस्ट में हलचल

    ईरान-यूएई तनाव पर बड़ा खुलासा: रिफाइनरी हमले में गुप्त भूमिका के दावे से मिडिल ईस्ट में हलचल




    नई दिल्ली। मिडिल-ईस्ट में ईरान और क्षेत्रीय देशों के बीच तनाव लंबे समय से जारी है, लेकिन हाल ही में कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के बाद यूएई (संयुक्त अरब अमीरात) को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि अप्रैल की शुरुआत में ईरान के लावान द्वीप स्थित एक तेल रिफाइनरी पर हमला हुआ था, जिसमें कुछ सूत्रों ने यूएई की संभावित भूमिका की बात कही है।

    रिपोर्ट के अनुसार यह हमला उस समय हुआ जब क्षेत्र में ईरान और उसके विरोधी देशों के बीच सैन्य तनाव चरम पर था। हालांकि यह भी ध्यान देने योग्य है कि इस पूरे मामले में किसी भी देश ने आधिकारिक रूप से सीधे तौर पर हमले की जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की है।

    यूएई की तरफ से पहले दिए गए बयानों में कहा गया है कि उसे अपनी सुरक्षा और जवाबी कार्रवाई का अधिकार है, खासकर तब जब क्षेत्रीय सुरक्षा खतरे में हो। वहीं ईरान ने इस पूरे घटनाक्रम के दौरान कई बार यूएई और अन्य खाड़ी देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमलों के आरोप लगाए हैं, जिनसे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ा है।

    अमेरिका की भूमिका को लेकर भी रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि उसने खाड़ी देशों की सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए कुछ सैन्य कार्रवाइयों पर सख्त रुख नहीं अपनाया, हालांकि इस पर भी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह पूरा क्षेत्र पहले से ही ऊर्जा सुरक्षा और होर्मुज स्ट्रेट जैसे रणनीतिक मार्गों को लेकर संवेदनशील स्थिति में है, जहां किसी भी छोटे सैन्य टकराव का वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर बड़ा असर पड़ सकता है।

    कुल मिलाकर, यूएई की कथित भूमिका को लेकर जो रिपोर्ट सामने आई है, वह अभी तक पूरी तरह पुष्टि नहीं हुई है और यह मामला फिलहाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच और राजनीतिक चर्चाओं के घेरे में है।

    मिडिल-ईस्ट में ईरान और क्षेत्रीय देशों के बीच तनाव लंबे समय से जारी है, लेकिन हाल ही में कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के बाद यूएई (संयुक्त अरब अमीरात) को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि अप्रैल की शुरुआत में ईरान के लावान द्वीप स्थित एक तेल रिफाइनरी पर हमला हुआ था, जिसमें कुछ सूत्रों ने यूएई की संभावित भूमिका की बात कही है।

    रिपोर्ट के अनुसार यह हमला उस समय हुआ जब क्षेत्र में ईरान और उसके विरोधी देशों के बीच सैन्य तनाव चरम पर था। हालांकि यह भी ध्यान देने योग्य है कि इस पूरे मामले में किसी भी देश ने आधिकारिक रूप से सीधे तौर पर हमले की जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की है।

    यूएई की तरफ से पहले दिए गए बयानों में कहा गया है कि उसे अपनी सुरक्षा और जवाबी कार्रवाई का अधिकार है, खासकर तब जब क्षेत्रीय सुरक्षा खतरे में हो। वहीं ईरान ने इस पूरे घटनाक्रम के दौरान कई बार यूएई और अन्य खाड़ी देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमलों के आरोप लगाए हैं, जिनसे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ा है।

    अमेरिका की भूमिका को लेकर भी रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि उसने खाड़ी देशों की सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए कुछ सैन्य कार्रवाइयों पर सख्त रुख नहीं अपनाया, हालांकि इस पर भी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह पूरा क्षेत्र पहले से ही ऊर्जा सुरक्षा और होर्मुज स्ट्रेट जैसे रणनीतिक मार्गों को लेकर संवेदनशील स्थिति में है, जहां किसी भी छोटे सैन्य टकराव का वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर बड़ा असर पड़ सकता है।

    कुल मिलाकर, यूएई की कथित भूमिका को लेकर जो रिपोर्ट सामने आई है, वह अभी तक पूरी तरह पुष्टि नहीं हुई है और यह मामला फिलहाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच और राजनीतिक चर्चाओं के घेरे में है।

  • जी7 ने ईरान के हमलों की कड़ी निंदा की, कहा ये वैश्विक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा

    जी7 ने ईरान के हमलों की कड़ी निंदा की, कहा ये वैश्विक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा


    वॉशिंगटन । जी7 देशों ने ईरान द्वारा पश्चिम एशिया में किए जा रहे हमलों की कड़ी निंदा की है और कहा है कि इन हरकतों से न केवल प्रभावित देशों बल्कि वैश्विक सुरक्षा को भी गंभीर खतरा पैदा हो रहा है। समूह ने साथ ही प्रभावित देशों के प्रति अपना समर्थन भी जाहिर किया।

    जी7 देशों के विदेश मंत्रियों ने यूरोपीय संघ के हाई रिप्रेजेंटेटिव के साथ संयुक्त बयान में कहा कि वे ईरान और उसके प्रॉक्सी के हमलों के खिलाफ अपने साझेदारों का समर्थन करते हैं। बयान में उल्लेख किया गया कि बहरीन कुवैत ओमान कतर सऊदी अरब संयुक्त अरब अमीरात जॉर्डन और इराक में आम नागरिकों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर किए गए हमलों की निंदा करते हैं जिसमें ऊर्जा सुविधाएं भी शामिल हैं।

    समूह ने चेतावनी दी कि ईरानी गतिविधियां क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं। उन्होंने तेहरान से अपील की कि अपनी सैन्य गतिविधियों को तुरंत रोकें। जी7 ने खासकर होर्मुज स्ट्रेट और उससे जुड़े महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में सुरक्षा सुनिश्चित करने की अहमियत पर जोर दिया।

    बयान में कहा गया कि वैश्विक सप्लाई चेन और ऊर्जा मार्केट की स्थिरता बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है। जी7 ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के सदस्यों द्वारा 11 मार्च को किए गए स्टॉक रिलीज फैसले का हवाला देते हुए ग्लोबल ऊर्जा सप्लाई की सुरक्षा के लिए कदम उठाने की प्रतिबद्धता जताई।

    इसके अलावा समूह ने दोहराया कि ईरान को कभी भी न्यूक्लियर हथियार हासिल नहीं करने चाहिए। उन्होंने ईरान से बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम रोकने अस्थिर गतिविधियों को खत्म करने और अपने ही नागरिकों के खिलाफ हिंसा बंद करने की अपील की।

    जी7 ने प्रभावित देशों के हमलों से खुद की रक्षा करने के अधिकार का समर्थन करते हुए कहा कि ये देश अपने नागरिकों और संप्रभुता की रक्षा करने के लिए उचित कदम उठा सकते हैं। समूह ने इराक में ईरान और उसकी मिलिशिया द्वारा डिप्लोमैटिक सुविधाओं और ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों की भी निंदा की खासकर अमेरिका और काउंटर आईएसआईएस कोएलिशन फोर्स के खिलाफ। बयान में निष्कर्ष निकाला गया कि जी7 क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक सुरक्षा बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी और आवश्यक क़दम उठाने के लिए तैयार हैं।