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  • जिबूती के पास प्रवासियों की नाव पलटी, 139 की मौत; 15 बच्चों ने भी गंवाई जान, 84 से अधिक लापता

    जिबूती के पास प्रवासियों की नाव पलटी, 139 की मौत; 15 बच्चों ने भी गंवाई जान, 84 से अधिक लापता

    नई दिल्ली। अफ्रीका से यमन की ओर जा रहे प्रवासियों के लिए समुद्री सफर जानलेवा साबित हुआ। जिबूती के पास प्रवासियों से भरी एक नाव पलटने से कम से कम 139 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में 15 बच्चे भी शामिल हैं, जबकि 84 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। यह दर्दनाक हादसा गुरुवार और शुक्रवार की मध्यरात्रि के बीच हुआ। अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (आईओएम) ने रविवार को इसकी जानकारी दी। हादसे के बाद स्थानीय अधिकारियों ने लापता लोगों की तलाश के लिए बड़े पैमाने पर खोज और बचाव अभियान शुरू किया है।

    80 से अधिक लोग बचाए गए

    आईओएम के अनुसार, हादसे के बाद बरामद किए गए शवों में 52 पुरुष, 42 महिलाएं और 15 बच्चे शामिल हैं। दुर्घटना में 80 से अधिक लोग जीवित बचने में सफल रहे। ये सभी इथियोपियाई नागरिक बताए गए हैं।

    संगठन की टीमें स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर जीवित बचे लोगों को आपातकालीन सहायता और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करा रही हैं। इसके साथ ही मृतकों के सम्मानजनक अंतिम संस्कार की व्यवस्था भी की जा रही है। लापता लोगों की तलाश जारी है, हालांकि समुद्र में खराब परिस्थितियों के कारण बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

    यमन से लौटाए जाने के बाद फिर समुद्र में उतरे प्रवासी

    जिबूती में आईओएम के मिशन प्रमुख एलेक्जेंड्रे कॉयसाक ने हादसे पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि यह जान-माल का बेहद भयावह और विनाशकारी नुकसान है। उनकी संवेदनाएं उन लोगों और परिवारों के साथ हैं, जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया है या जिनके परिजनों के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं मिल पाई है।

    कॉयसाक के मुताबिक, नाव में सवार करीब 150 लोगों को पहले यमन से वापस भेज दिया गया था। इसके बावजूद उन्होंने दोबारा समुद्र पार करने की कोशिश की। इसी दौरान यह भीषण दुर्घटना हो गई।

    यमन जाने वाले समुद्री मार्ग पर बढ़ रहा खतरा

    आईओएम के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में यमन जाने वाले समुद्री मार्ग पर 900 से अधिक प्रवासियों की मौत हो गई या वे लापता हो गए। इस दौरान इस रास्ते से यात्रा करने की कोशिश करने वाले लोगों की संख्या में 18 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

    मार्च 2026 में भी एक जहाज डूबने की घटना सामने आई थी, जिसमें नौ लोगों की मौत हो गई थी और 45 लोग लापता हो गए थे। लगातार हो रहे हादसे इस समुद्री मार्ग पर प्रवासियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर रहे हैं।

    बेहतर भविष्य की तलाश में जोखिम उठा रहे लोग

    आईओएम के प्रवक्ता केनेडी ओमोंडी ओकोथ ने बताया कि इस समुद्री मार्ग से यात्रा करने वाले अधिकांश लोग इथियोपिया या सोमालिया से आते हैं। इनमें से कई प्रवासी जिबूती में फंस जाते हैं और बेहतर भविष्य की उम्मीद में जोखिम भरी समुद्री यात्रा करने का प्रयास करते हैं।

    संगठन ने दानदाताओं और सहयोगी संस्थाओं से जिबूती में खोज एवं बचाव अभियानों और अन्य जीवनरक्षक कार्यों के लिए अतिरिक्त सहायता उपलब्ध कराने की अपील की है। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं बताती हैं कि सुरक्षित रास्तों के अभाव में प्रवासियों को अपनी जान जोखिम में डालकर समुद्र पार करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

  • मैं तुम्हें लात मारूंगा, UP और बिहार के लोगों को राज ठाकरे की चेतावनी; और क्या कहा

    मैं तुम्हें लात मारूंगा, UP और बिहार के लोगों को राज ठाकरे की चेतावनी; और क्या कहा

    महाराष्ट्र। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश और बिहार के अप्रवासियों को लेकर विवादित बयान दिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर महाराष्ट्र में रह रहे अन्य राज्यों के लोग स्थानीय भाषा हिंदी का सम्मान नहीं करेंगे, तो उन्हें ‘लात मारकर’ बाहर किया जाएगा। इस बयान के साथ ही राज ठाकरे ने भाषा संरक्षण और स्थानीय अधिकारों पर अपनी सख्त नीति को स्पष्ट किया। रविवार को उन्होंने अपने चचेरे भाई और शिवसेना के वरिष्ठ नेता उद्धव ठाकरे के साथ मिलकर मुंबई में एक रैली में हिस्सा लिया। ध्यान रहे कि बृह्नमुंबई महानगरपालिका चुनाव 15 जनवरी को होने जा रहे हैं, ऐसे में यह बयान चुनावी माहौल को और गर्मा सकता है।

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे ने अपने बयान को और तीखा करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश और बिहार से आने वाले लोगों को यह समझना चाहिए कि हिंदी उनकी मातृभाषा नहीं है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “मुझे किसी भाषा से नफरत नहीं है, लेकिन अगर हिंदी को जबरन थोपा गया, तो मैं आपको लात मारकर बाहर कर दूंगा।”

    राज ठाकरे ने यह भी आरोप लगाया कि बाहर से आने वाले लोग हर दिशा से महाराष्ट्र में प्रवेश कर रहे हैं और यहां के स्थानीय लोगों का हक छीन रहे हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर महाराष्ट्र की जमीन और भाषा दोनों हाथ से निकल गईं, तो यहां के मूल निवासियों का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब राज्य में राजनीतिक माहौल पहले से ही गर्म है और भाषा व पहचान का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है।

    राज ठाकरे ने अपने संबोधन में भावनात्मक और सख्त लहजे में कहा कि यह चुनाव मराठी मानुष के लिए आखिरी मौका है। उन्होंने चेतावनी दी, “अगर आज भी मौका चूक गए, तो फिर खत्म हो जाओगे। मराठी और महाराष्ट्र के अस्तित्व के लिए अब एकजुट होने का समय है।” उन्होंने कहा कि मुंबई यूं ही नहीं मिली, इसके पीछे कई लोगों की कुर्बानियां हैं, और अगर आज चुप रहे तो आने वाली पीढ़ियों को क्या जवाब देंगे।

    इसके साथ ही राज ठाकरे ने पार्टी कार्यकर्ताओं को सख्त निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि सुबह 6 बजे से तैनात बीएलए पूरी तरह तैयार, अलर्ट और चौकस रहें, किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर कोई व्यक्ति दोबारा वोट डालने की कोशिश करता है, तो उसे तुरंत बाहर कर दिया जाए। यह बयान चुनावी माहौल में और अधिक तीखापन ले आया है और महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल बढ़ा रहा है।
    राज ठाकरे ने रैली में तीखे और भावनात्मक अंदाज़ में कहा कि यह चुनाव मराठी मानुष के अस्तित्व की लड़ाई है। उन्होंने चेतावनी भरे शब्दों में कहा, “अगर अब भी मौका हाथ से निकल गया, तो फिर सब खत्म हो जाएगा। मराठी और महाराष्ट्र को बचाने के लिए आज एकजुट होना ही होगा।” उन्होंने याद दिलाया कि मुंबई किसी एक की नहीं, बल्कि बलिदानों से बनी है, और अगर आज आवाज़ नहीं उठाई गई तो आने वाली पीढ़ियों को जवाब देना मुश्किल हो जाएगा।

    इसके साथ ही राज ठाकरे ने पार्टी कार्यकर्ताओं को सख्त संदेश देते हुए कहा कि सुबह 6 बजे से तैनात बीएलए पूरी मुस्तैदी से ड्यूटी पर रहें, पूरी तरह अलर्ट और चौकस रहें, किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने दो टूक कहा कि अगर कोई व्यक्ति दोबारा वोट डालने की कोशिश करता है, तो उसे तुरंत बाहर किया जाए। राज ठाकरे के इस बयान ने चुनावी माहौल को और गरमा दिया है और महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है