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  • ईरान पर ट्रंप का बदला रुख! सैन्य कार्रवाई से पीछे हटे अमेरिका, अब आर्थिक दबाव की रणनीति

    ईरान पर ट्रंप का बदला रुख! सैन्य कार्रवाई से पीछे हटे अमेरिका, अब आर्थिक दबाव की रणनीति


    वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ किसी नए बड़े सैन्य अभियान की संभावना से फिलहाल दूरी बनाने के संकेत दिए हैं। अमेरिका अब तेहरान पर सैन्य कार्रवाई के बजाय आर्थिक और कूटनीतिक दबाव बढ़ाने की रणनीति पर आगे बढ़ता दिख रहा है। रविवार को ‘एक्सियोस’ को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने ईरान को लेकर अपेक्षाकृत संयमित रुख अपनाया।

    ट्रंप ने किसी नई सैन्य कार्रवाई की चेतावनी देने के बजाय कहा कि उनका प्रशासन फिलहाल कम आक्रामक रुख अपना रहा है। उन्होंने ईरान की खराब होती अर्थव्यवस्था और वहां बढ़ती महंगाई पर नजर रखने की बात कही।

    ट्रंप बोले- ईरान से आंशिक बातचीत जारी
    ट्रंप ने कहा कि ईरान में भारी महंगाई है और उसके पास पर्याप्त धन नहीं है। ऐसे में अमेरिका फिलहाल स्थिति को शांत रखते हुए तेहरान के साथ आंशिक बातचीत कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि ईरान की आर्थिक हालत बेहद खराब है और उसके पास अपने सैनिकों को वेतन देने तक के लिए पर्याप्त पैसा नहीं है। ट्रंप के मुताबिक, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी ने भी ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाया है।

    खाड़ी देशों ने सैन्य कार्रवाई से बचने की दी सलाह
    अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उनके खाड़ी सहयोगियों ने उन्हें बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू करने के बजाय आर्थिक और कूटनीतिक दबाव बनाए रखने की सलाह दी थी। इसके अलावा अमेरिका में कच्चे तेल की कीमत करीब 75 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है। इससे वाशिंगटन को तत्काल सैन्य कार्रवाई किए बिना ईरान पर दबाव बनाए रखने का अवसर मिल रहा है। ट्रंप ने पूरे घटनाक्रम की तुलना शतरंज के खेल से की और कहा कि मामला अंततः सुलझ ही जाता है।

    होर्मुज समझौते पर नई शर्तों से अटका मामला
    इस बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को लेकर अमेरिका, ईरान और ओमान के बीच प्रस्तावित समझौते पर भी पेच फंस गया है। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख मोहम्मद बागेर जोलकद्र ने शनिवार को मांग रखी कि अमेरिका युद्ध को पूरी तरह समाप्त करे, नौसैनिक नाकेबंदी हटाए और अपनी सेना वापस बुलाए।

    उन्होंने प्रतिबंध हटाने, फ्रीज की गई संपत्तियां बहाल करने और युद्ध क्षतिपूर्ति देने की भी मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने ईरान के क्षेत्रीय सहयोगियों के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई रोकने और अमेरिकी धमकियों तथा ईरान के कथित अपमान को बंद करने की मांग रखी। वहीं, अमेरिका ने होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर ईरान की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों को खारिज किया है। इसमें वाणिज्यिक जहाजों से टोल वसूलने की किसी भी कोशिश का विरोध शामिल है।

    होर्मुज जलमार्ग खोलना बन सकता है ट्रंप की प्राथमिकता
    ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की रिपोर्ट के अनुसार, अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही पूरी तरह बहाल कर देता है, तो ट्रंप नया परमाणु समझौता किए बिना भी पीछे हटने के लिए तैयार हो सकते हैं। ऐसा हुआ तो यह अमेरिकी रणनीति में बड़ा बदलाव होगा। परमाणु मुद्दा पिछले कई महीनों से वाशिंगटन की प्रमुख मांगों में शामिल रहा है, लेकिन ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत लगातार मुश्किल बनी हुई है।

    ट्रंप का मानना है कि ईरान के परमाणु ठिकानों के नष्ट होने के बाद उसके लिए परमाणु क्षमताओं को दोबारा खड़ा करना बेहद कठिन होगा। अमेरिका का यह भी मानना है कि उसकी खुफिया एजेंसियां ईरान की किसी गुप्त परमाणु गतिविधि का पता लगाने में सक्षम होंगी।

    ईरान के यूरेनियम भंडार पर ट्रंप ने चिंता को किया खारिज
    राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के जमीन के नीचे मौजूद यूरेनियम भंडार को लेकर उठ रही चिंताओं को भी कमतर बताया। जुलाई में नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (NATO) के शिखर सम्मेलन के दौरान उन्होंने कहा था कि परमाणु सामग्री जमीन के बहुत नीचे है और दूसरे देशों के लिए उसे हासिल करना संभव नहीं होगा। ऐसे में मौजूदा हालात में ट्रंप प्रशासन व्यापक परमाणु समझौते की तुलना में होर्मुज जलमार्ग को दोबारा खोलने और ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखने को प्राथमिकता दे सकता है।

  • ट्रंप ने ईरान को लेकर दिया सकारात्मक संकेत, लेकिन समझौता नहीं हुआ तो सैन्य कार्रवाई की भी दी चेतावनी

    ट्रंप ने ईरान को लेकर दिया सकारात्मक संकेत, लेकिन समझौता नहीं हुआ तो सैन्य कार्रवाई की भी दी चेतावनी


    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी कूटनीतिक बातचीत को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं, लेकिन साथ ही साफ किया है कि यदि कोई समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई का रास्ता अपना सकता है। ट्रंप के इस बयान के बीच पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है।

    पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच “बेहद दोस्ताना बातचीत” चल रही है और उन्हें समझौते की उम्मीद है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि बातचीत सफल नहीं हुई तो अमेरिका फिर वही कदम उठाएगा, जो कुछ दिन पहले सैन्य मोर्चे पर उठा रहा था।

    चुनावी रैली में दिखाया सख्त रुख

    मिशिगन में आयोजित एक चुनावी रैली के दौरान ट्रंप ने ईरान के प्रति और कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि ईरान को “रिश्वत देकर नहीं, बल्कि हराकर” ही रोका जा सकता है। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी कार्रवाई से ईरान की नौसेना, वायुसेना, सैन्य नेतृत्व, एयर डिफेंस सिस्टम और ड्रोन-मिसाइल निर्माण क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है।

    उन्होंने यह भी कहा कि अगर अमेरिका ने सख्त रुख नहीं अपनाया होता तो ईरान बातचीत की मेज पर नहीं आता। ट्रंप ने अमेरिकी नौसेना की सराहना करते हुए दावा किया कि ईरान की समुद्री गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण बनाया गया है।

    क्षेत्रीय तनाव फिर बढ़ा

    ट्रंप के बयान ऐसे समय आए हैं जब सऊदी अरब, जॉर्डन और इराक ने ड्रोन हमलों की घटनाओं की जानकारी दी है। इन घटनाओं ने क्षेत्र में तनाव कम होने की उम्मीदों को झटका दिया है। हालांकि अमेरिका ने हाल ही में करीब दो सप्ताह से जारी ईरान के खिलाफ हवाई अभियान को फिलहाल रोक दिया था।

    क्यों रोका गया हवाई अभियान?

    अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, सैन्य कमांडरों ने राष्ट्रपति को बताया था कि लगातार हवाई हमलों के बाद संभावित सैन्य लक्ष्य सीमित रह गए हैं। साथ ही हमलों में इस्तेमाल होने वाले हथियारों और गोला-बारूद के भंडार को लेकर भी चिंता जताई गई थी। हालांकि ट्रंप ने हथियारों की कमी की बात को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिकी सेना तेजी से अपने भंडार को फिर से मजबूत कर रही है और आधुनिक हथियार प्रणालियों पर काम जारी है।

    ईरान ने बातचीत की मांग से किया इनकार

    ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि मध्यस्थों के जरिए दोनों देशों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान जारी है, लेकिन तेहरान ने अमेरिका से बातचीत की कोई औपचारिक पहल नहीं की है। उन्होंने ऐसी खबरों को निराधार बताया। हालांकि ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यदि घोषित युद्धविराम प्रभावी रहता है तो ईरान भी अपने हमले रोक सकता है।

    सऊदी और हूती फिर आमने-सामने

    सऊदी अरब ने दावा किया कि उसने तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने वाले कई ड्रोन हमलों को विफल कर दिया। रियाद ने इन हमलों के लिए इराक में सक्रिय ईरान समर्थित समूहों को जिम्मेदार ठहराया। वहीं यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन पर हमले की जिम्मेदारी लेते हुए इसे सऊदी सैन्य गतिविधियों का जवाब बताया।

    होर्मुज जलडमरूमध्य बना केंद्र

    इस बीच ईरान ने अमेरिका पर अपने समुद्री क्षेत्र में जहाजों और तेल टैंकरों को डराने-धमकाने का आरोप लगाया है। तेहरान ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर उसका नियंत्रण बरकरार है और यह वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, बिना अनुमति गुजरने की कोशिश करने वाले छह जहाजों को सोमवार को वापस लौटा दिया गया।

  • ईरान को ट्रंप-वेंस की कड़ी चेतावनी: डील नहीं तो सैन्य कार्रवाई, परमाणु हथियारों पर बढ़ा तनाव

    ईरान को ट्रंप-वेंस की कड़ी चेतावनी: डील नहीं तो सैन्य कार्रवाई, परमाणु हथियारों पर बढ़ा तनाव



    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान परमाणु समझौते पर सहमत नहीं होता है तो सैन्य कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

    वॉशिंगटन में मीडिया से बातचीत करते हुए जेडी वेंस ने कहा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम न सिर्फ पश्चिम एशिया बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। उनके अनुसार, अगर ईरान परमाणु हथियार विकसित करता है तो इससे वैश्विक स्तर पर हथियारों की नई होड़ शुरू हो सकती है।

    वेंस ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के सामने एक सरल प्रस्ताव रखा है, जिसमें या तो बातचीत के जरिए समझौता किया जाए या फिर तनाव बढ़ने की स्थिति में परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान किसी भी हाल में परमाणु हथियार हासिल नहीं कर सकता।

    उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ईरान के साथ सद्भावना के आधार पर बातचीत करना चाहता है और बातचीत के जरिए समाधान की उम्मीद अभी भी बनी हुई है। वेंस के मुताबिक, कुछ संकेत ऐसे मिले हैं जिससे लगता है कि ईरान समझौते की दिशा में आगे बढ़ सकता है, लेकिन अंतिम स्थिति तभी साफ होगी जब किसी समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर होंगे।

    जेडी वेंस ने ईरान की आंतरिक राजनीतिक स्थिति को जटिल बताते हुए कहा कि वहां कई शक्तिशाली गुट सक्रिय हैं, जिससे यह समझना मुश्किल हो जाता है कि वास्तव में ईरान की नीति क्या है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका ईरान के यूरेनियम भंडार को रूस भेजने जैसी किसी रिपोर्ट की पुष्टि नहीं करता।

    इस बीच पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी बयान दिया है कि अमेरिका का लक्ष्य इस संघर्ष को जल्द खत्म करना है और ईरान को किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि समाधान की दिशा में प्रयास तेज किए जा रहे हैं।

    गौरतलब है कि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच लंबे समय से तनाव की स्थिति बनी हुई है। हाल के वर्षों में कई बार सैन्य टकराव और हमलों की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, हालांकि कुछ समय के लिए सीजफायर की स्थिति बनी थी। इसके बावजूद स्थायी समझौता अभी तक नहीं हो सका है और हालात फिर से तनावपूर्ण बने हुए हैं।

  • क्यूबा के राष्ट्रपति की दो टूक…. बोले- US ने सैन्य कार्रवाई की तो उनका देश जवाब देने को तैयार….

    क्यूबा के राष्ट्रपति की दो टूक…. बोले- US ने सैन्य कार्रवाई की तो उनका देश जवाब देने को तैयार….


    हवाना।
    क्यूबा के राष्ट्रपति मिगेल डियाज-कैनेल (Cuban President Miguel Diaz-Canel) ने गुरुवार को कहा कि क्यूबा (Cuba) नहीं चाहता कि अमेरिका (America) उस पर सैन्य कार्रवाई करे। उन्होंने कहा, अगर ऐसा होता है तो उनका देश लड़ने के लिए तैयार है। डियाज-कैनेल ने यह बात एक रैली में कही, जिसमें सैकड़ों लोग शामिल हुए थे। यह रैली क्यूबा की क्रांति के 65 साल पूरे होने पर आयोजित की गई थी, जब क्यूबा ने खुद को समाजवादी देश घोषित किया था।

    डियाज-कैनेल ने कहा, यह बेहद चुनौतीपूर्ण समय है और हमें एक बार फिर गंभीर खतरों का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा, जैसे 16 अप्रैल 1961 को थे। इन खतरों में (संभावित) सैन्य हमला भी शामिल है। हम यह नहीं चाहते, लेकिन इससे बचने के लिए तैयारी करना हमारा कर्तव्य है और अगर यह टालना संभव न हो, तो हमें इसे हराना होगा।


    अमेरिकी राष्ट्रपति ने क्या चेतावनी दी?

    उन्होंने यह बात ऐसे समय में कही, जब दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है। अमेरिका की ऊर्जा नाकेबंदी के कारण क्यूबा का संकट और गहरा गया है। इस हफ्ते की शुरुआत में ट्रंप ने कहा था कि ईरान के साथ जंग खत्म होने के बाद उनका प्रशासन क्यूबा पर फोकस कर सकता है। उन्होंने कहा, हम इसे खत्म करने के बाद क्यूबा की ओर भी जा सकते हैं। उन्होंने क्यूबा को ‘विफल देश’ बताया और कहा कि यह लंबे समय से खराब तरीके से चलाया जा रहा है।

    जनवरी के शुरुआत में ट्रंप ने पहले भी क्यूबा में दखल की धमकी दी थी, जब अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला पर हमला किया और वहां से आने वाले तेल की आपूर्ति रोक दी। कुछ हफ्तों बाद ट्रंप ने उन देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी, जो क्यूबा को तेल बेचते हैं या उपलब्ध कराते हैं। ट्रंप और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के माता-पिता 1950 के दशक में क्रांति से पहले क्यूबा से प्रवास कर गए थे। दोनों ने क्यूबा की सरकार को अक्षम और दमनकारी बताया है।

    डियाज-कैनेल ने उन पर आरोप लगाया कि वे एक ऐसा ‘कहानी’ बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसका कोई आधार नहीं है। उन्होंने कहा, क्यूबा असफल देश नहीं है। क्यूबा एक घिरा हुआ देश है। क्यूबा एक ऐसा देश है, जो कई तरह के हमलों का सामना कर रहा है। इनमें आर्थिक युद्ध, कड़ी नाकेबंदी और ऊर्जा नाकेबंदी शामिल हैं।

    उन्होंने कहा, क्यूबा एक ऐसा देश है जिसे धमकाया जाता रहा है, लेकिन वह झुकता नहीं है। हर चीज के बावजूद समाजवाद की वजह से क्यूबा एक ऐसा देश है, जो संघर्ष करता है, आगे बढ़ता है और याद रखिए, यह देश जीतकर रहेगा।

    क्यूबा और अमेरिका दोनों ने माना है कि तनाव कम करने के लिए बातचीत चल रही है। लेकिन इसके बारे में कोई जानकारी साझा नहीं की गई है। क्यूबा के राष्ट्रपति ने क्रांति से मिली उपलब्धियों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि देश की समाजवादी व्यवस्था के कारण निशुल्क शिक्षा मिली है, जिससे हजारों पेशेवर तैयार हुए। लेकिन अब संकट के कारण उनमें से कई लोगों को देश छोड़ना पड़ा है।

  • पाकिस्तान ने फिर अफगानिस्तान में घुसकर की सैन्य कार्रवाई, 7 आतंकी ठिकानों पर दागी मिसाइल

    पाकिस्तान ने फिर अफगानिस्तान में घुसकर की सैन्य कार्रवाई, 7 आतंकी ठिकानों पर दागी मिसाइल


    इस्लामाबाद/काबुल।
    पाकिस्तान (Pakistan) ने एक बार फिर अफगानिस्तान (Afghanistan.) के भीतर घुसकर सैन्य कार्रवाई (Military Action) की है. एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर कहा कि सीमा पार सात आतंकी कैंप और ठिकानों को निशाना बनाया गया।

    इस्लामाबाद का कहना है कि ये ठिकाने प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी TTP और इस्लामिक स्टेट-खोरासान (ISKP) से जुड़े लोगों के थे. पाकिस्तान सरकार TTP को ‘फितना अल खवारिज’ कहती है. बयान में कहा गया कि हाल के आत्मघाती हमलों, जिनमें इस्लामाबाद की इमाम बारगाह, बाजौर और बन्नू में धमाके शामिल हैं, के बाद यह जवाबी कार्रवाई की गई. रमजान के महीने में हुए ताजा हमले को भी इसका कारण बताया गया. पाकिस्तान ने दावा किया है कि उसके पास पक्के सबूत हैं कि ये हमले अफगानिस्तान में बैठे नेतृत्व और संचालकों के इशारे पर कराए गए. बयान में कहा गया कि जिम्मेदारी भी अफगानिस्तान में मौजूद टीटीपी और ISKP ने ली थी. पाकिस्तान का कहना है कि यह कार्रवाई खुफिया जानकारी के आधार पर चुने हुए ठिकानों पर की गई. इस हमले पर तालिबान ने कहा है कि अब वह सही समय पर जवाब देगा।

    बलूच एक्टिविस्ट मीर यार बलोच ने इस हमले की कड़ी आलोचना की है. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि पाकिस्तान की कायर सेना ने एक बार फिर अफगानिस्तान की हवाई सीमा का उल्लंघन किया और पक्तिका प्रांत के बरमल जिले में ड्रोन और हवाई हमले किए. उनके मुताबिक इन हमलों में एक धार्मिक मदरसे को निशाना बनाया गया, जहां मौजूद कुरान की प्रतियां भी नष्ट हो गईं. मीर यार बलोच ने इसे ‘दमनकारी सैन्य कार्रवाई’ करार दिया और कहा कि इस तरह की कार्रवाई क्षेत्र में अस्थिरता और नफरत को और बढ़ाएगी. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने रमजान से पहले कार्रवाई की धमकी दी थी।


    तालिबान के प्रवक्ता ने क्या कहा?

    अफगान तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने पाकिस्तान पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि बीती रात पाकिस्तानी सेना ने अफगान क्षेत्र में घुसकर नंगरहार और पक्तिका प्रांतों में बमबारी की. उन्होंने दावा किया कि इन हमलों में महिलाएं और बच्चे भी मारे गए और कई लोग घायल हुए हैं. मुजाहिद ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान अपनी सुरक्षा नाकामियों को छिपाने के लिए अफगान जमीन को निशाना बना रहा है और ऐसे कदम क्षेत्र में हालात और बिगाड़ेंगे।


    एयर स्ट्राइक से पहले दहला पाकिस्तान

    इस हमले से पहले खैबर पख्तूनख्वा के बन्नू जिले में एक आत्मघाती हमला हुआ था. पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग ISPR के अनुसार, एक खुफिया अभियान के दौरान सेना के काफिले को निशाना बनाया गया. हमले में एक लेफ्टिनेंट कर्नल और एक सिपाही की मौत हो गई. सेना ने कहा कि पांच आतंकियों को मार गिराया गया, लेकिन एक विस्फोटक वाहन सेना की गाड़ी से टकरा गया, जिससे भारी नुकसान हुआ. इससे पहले 16 फरवरी को बाजौर में भी एक बड़ा आत्मघाती हमला हुआ था. उसमें 11 पाकिस्तानी सैनिकों की मौत हुई थी. एक बच्ची की भी जान गई थी और कई लोग घायल हुए थे. पाकिस्तान ने कहा कि हमलावर अफगान तालिबान की विशेष इकाई से जुड़ा था और टीटीपी ने हमले की जिम्मेदारी ली थी।


    पाकिस्तान का क्या है आरोप?

    पाकिस्तान ने आरोप लगाया है कि अफगान तालिबान सरकार अपनी जमीन से टीटीपी को काम करने से रोकने में नाकाम रही है. बयान में कहा गया कि कई बार चेतावनी देने के बावजूद ठोस कदम नहीं उठाए गए. पाकिस्तान ने दोहा समझौते का हवाला देते हुए कहा कि अफगान अंतरिम सरकार को अपनी जमीन किसी दूसरे देश के खिलाफ इस्तेमाल नहीं होने देना चाहिए।


    पहले भी किया है हमला

    यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान ने सीमा पार हमला किया हो. पिछले साल भी अफगानिस्तान के खोस्त, कुनार और पक्तिका प्रांतों में हवाई हमलों की खबर आई थी. उस समय काबुल ने पाकिस्तान पर बमबारी का आरोप लगाया था, हालांकि इस्लामाबाद ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की थी. दोनों देशों के रिश्ते 2021 में अफगान तालिबान के सत्ता में आने के बाद से लगातार बिगड़ते रहे हैं. सीमा पर झड़पें आम हो चुकी हैं।