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  • सैनिकों की कमी के बीच यूक्रेन का टेक्नोलॉजी दांव, ड्रोन-रोबोट से रूस को दे रहा करारा जवाब

    सैनिकों की कमी के बीच यूक्रेन का टेक्नोलॉजी दांव, ड्रोन-रोबोट से रूस को दे रहा करारा जवाब


    नई दिल्ली। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध अब केवल सैनिकों और हथियारों की लड़ाई नहीं रह गया है बल्कि यह तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की ताकत का भी बड़ा प्रदर्शन बन चुका है। युद्ध के चौथे वर्ष में प्रवेश कर चुके इस संघर्ष में यूक्रेन ने सैनिकों की कमी से निपटने के लिए ऐसा कदम उठाया है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अब युद्ध के मैदान में बड़ी संख्या में रोबोट और ड्रोन तैनात किए जा रहे हैं जो दुश्मन के लिए ‘साइलेंट डेथ’ साबित हो रहे हैं।

    जब रूस ने वर्ष 2022 में यूक्रेन पर हमला किया था तब दुनिया को उम्मीद थी कि यह युद्ध जल्द समाप्त हो जाएगा। लेकिन यूक्रेन के मजबूत प्रतिरोध ने हालात बदल दिए। लगातार जारी संघर्ष के कारण यूक्रेन के सामने प्रशिक्षित सैनिकों की कमी की चुनौती खड़ी हो गई। ऐसे समय में देश ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया और युद्ध की रणनीति को पूरी तरह बदल दिया। अब हथियारों और विस्फोटकों से लैस ड्रोन तथा रोबोट रूसी ठिकानों पर सटीक हमले कर रहे हैं।

    रिपोर्टों के अनुसार इन अत्याधुनिक मशीनों को हजारों किलोमीटर दूर सुरक्षित स्थानों से संचालित किया जा रहा है। पहले दुश्मन की गतिविधियों और ठिकानों की पहचान की जाती है और फिर बेहद सटीक तरीके से हमले को अंजाम दिया जाता है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने दावा किया है कि केवल इस वर्ष जनवरी महीने में ही 22 हजार से अधिक ड्रोन और रोबोट युद्ध अभियानों में शामिल किए गए। उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में यूक्रेनी बलों ने बिना किसी सैनिक को सीधे युद्धक्षेत्र में भेजे केवल रोबोट और ड्रोन की मदद से रूसी पोजीशन पर कब्जा कर लिया।

    इन मशीनों की भूमिका केवल हमलों तक सीमित नहीं है। युद्धक्षेत्र में हथियार पहुंचाने से लेकर भोजन और पानी की आपूर्ति तक कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां अब रोबोट निभा रहे हैं। घायल सैनिकों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और जोखिम वाले इलाकों में बचाव कार्य करने में भी इनका इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। इससे सैनिकों की जान बचाने में मदद मिल रही है और युद्ध संचालन अधिक प्रभावी बन रहा है।

    यूक्रेन ने कुछ रोबोटिक सिस्टम को हैवी मशीनगनों से लैस किया है। ये कई दिनों तक छिपे रहकर निगरानी कर सकते हैं और अवसर मिलते ही हमला बोल सकते हैं। इस तकनीकी अभियान में युवा प्रोग्रामर और इंजीनियर भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। वे संचार व्यवस्था नेविगेशन सॉफ्टवेयर और काउंटर जैमिंग तकनीक को लगातार बेहतर बना रहे हैं ताकि रूसी इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली का मुकाबला किया जा सके।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यूक्रेन ने समय रहते ड्रोन और रोबोट तकनीक में निवेश कर बड़ा रणनीतिक लाभ हासिल किया है। एक अनुमान के अनुसार केवल 164 रोबोटों ने ऐसे परिणाम दिए हैं जिनके लिए सामान्य परिस्थितियों में हजारों सैनिकों की आवश्यकता पड़ती। युद्ध के अनुभवी सैनिक भी मानते हैं कि यदि संघर्ष की शुरुआत में यह तकनीक उपलब्ध होती तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती थीं। यूक्रेन का यह मॉडल आने वाले समय में दुनिया भर के युद्धों की दिशा और स्वरूप बदल सकता है जहां मशीनें मोर्चे पर होंगी और मानव जीवन का जोखिम कम होगा।

  • युद्ध का नया चेहरा: यूक्रेन के रोबोटों के सामने रूसी सैनिकों ने डाले हथियार, जेलेंस्की का बड़ा दावा

    युद्ध का नया चेहरा: यूक्रेन के रोबोटों के सामने रूसी सैनिकों ने डाले हथियार, जेलेंस्की का बड़ा दावा

    कीव। रूस-यूक्रेन युद्ध अब ऐसे दौर में पहुंच चुका है, जहां विज्ञान-कथा जैसी बातें हकीकत बनती नजर आ रही हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने बताया कि उनकी सेना के ग्राउंड रोबोटिक सिस्टम और ड्रोन ने मिलकर एक रूसी सैन्य ठिकाने पर कब्जा कर लिया।

    रोबोटों के आगे झुके दुश्मन सैनिक
    सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस पूरे ऑपरेशन में यूक्रेन का कोई भी सैनिक सीधे तौर पर शामिल नहीं था। दुश्मन सैनिकों को रोबोटिक सिस्टम्स के सामने आत्मसमर्पण करना पड़ा। माना जा रहा है कि दुनिया के किसी भी युद्ध में इस तरह की यह पहली घटना है। हालांकि ऑपरेशन की लोकेशन का खुलासा नहीं किया गया है।

    भविष्य की जंग का संकेत
    अगर जेलेंस्की का दावा सही साबित होता है, तो यह युद्ध के बदलते स्वरूप का बड़ा उदाहरण बन सकता है। उनके सलाहकार अलेक्जेंडर कामिशिन के अनुसार आने वाले समय में अनमैन्ड ग्राउंड व्हीकल युद्ध की रणनीति को पूरी तरह बदल सकते हैं। फिलहाल यूक्रेन अपनी करीब 30 प्रतिशत पैदल सेना को रोबोट से बदलने की क्षमता रखता है।

    बिना सैनिक नुकसान के ऑपरेशन सफल
    राष्ट्रपति जेलेंस्की ने एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि यह पूरा मिशन पूरी तरह मानव रहित प्लेटफॉर्म के जरिए अंजाम दिया गया। इस दौरान किसी भी यूक्रेनी सैनिक की जान जोखिम में नहीं पड़ी और बिना किसी नुकसान के दुश्मन के ठिकाने पर कब्जा कर लिया गया।

    हजारों मिशन पूरे कर चुके रोबोट
    जेलेंस्की के मुताबिक यूक्रेन के रेटेल टर्मिट, अर्दल और जमी जैसे रोबोटिक सिस्टम्स ने पिछले तीन महीनों में 22,000 से अधिक मिशनों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। उन्होंने बताया कि जहां पहले सैनिकों को खतरनाक इलाकों में भेजा जाता था, अब वहां रोबोट तैनात किए जा रहे हैं, जिससे हजारों सैनिकों की जान बचाई जा रही है।