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  • अमृतसर के संवेदनशील सैन्य इलाकों को लेकर खुफिया अलर्ट, पाकिस्तानी नेटवर्क की गतिविधियों पर एजेंसियों की पैनी नजर

    अमृतसर के संवेदनशील सैन्य इलाकों को लेकर खुफिया अलर्ट, पाकिस्तानी नेटवर्क की गतिविधियों पर एजेंसियों की पैनी नजर

    नई दिल्ली ।पंजाब में संभावित आतंकी साजिश को लेकर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। खुफिया इनपुट में आशंका जताई गई है कि पाकिस्तान से जुड़े कुछ ऑपरेटिव्स राज्य में सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की कोशिश कर सकते हैं। इनपुट के सामने आने के बाद संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

    बताया जा रहा है कि अमृतसर जिले में सैन्य ठिकानों से जुड़े दो स्थानों की कथित तौर पर रेकी की गई है। खुफिया जानकारी में इन ऑपरेटिव्स की पहचान राणा भाई और मलिक के नाम से किए जाने की बात सामने आई है। जिन स्थानों का उल्लेख किया गया है, उनमें खासा छावनी और उसके आसपास का बूढ़ा ठेह इलाका शामिल है।

    खासा छावनी का नाम सामने आने से सुरक्षा एजेंसियों की चिंता और बढ़ गई है। कुछ समय पहले छावनी की बाहरी दीवार के पास विस्फोट की घटना हुई थी। उस घटना में बड़ा नुकसान नहीं हुआ था, लेकिन अब नए खुफिया इनपुट के बाद पुराने घटनाक्रम की भी नए सिरे से समीक्षा किए जाने की संभावना है।

    हालांकि, मौजूदा खुफिया इनपुट और पहले हुए विस्फोट के बीच किसी सीधी कड़ी की पुष्टि अभी नहीं हुई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि दोनों घटनाओं का कोई आपसी संबंध है या नहीं। सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों के सामने फिलहाल प्राथमिकता संभावित खतरे का आकलन करने और संवेदनशील प्रतिष्ठानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की है।

    इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान में सक्रिय बताए जा रहे गैंगस्टर शहजाद भट्टी का नेटवर्क भी जांच के दायरे में है। भारतीय एजेंसियां पहले से उसके कथित नेटवर्क से जुड़े मामलों की जांच कर रही हैं। आरोप है कि इस नेटवर्क का इस्तेमाल भारत में हिंसक गतिविधियों और युवाओं की भर्ती के लिए किया जा रहा था।

    शहजाद भट्टी से जुड़े नेटवर्क के खिलाफ अलग-अलग मामलों में कार्रवाई भी की गई है। जांच में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी से कथित संपर्क और सीमा पार से संचालित गतिविधियों की जानकारी सामने आने का दावा किया गया है। ऐसे मामलों में सुरक्षा एजेंसियां आतंकी नेटवर्क, हथियारों की तस्करी और स्थानीय संपर्कों के बीच संभावित संबंधों की पड़ताल करती हैं।

    पंजाब में अवैध हथियारों की तस्करी से जुड़े नेटवर्क पर भी कार्रवाई जारी है। हाल में पुलिस ने दो संदिग्धों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से अत्याधुनिक पिस्तौल, मैगजीन और कारतूस बरामद किए जाने की जानकारी दी थी। प्रारंभिक जांच में उनके विदेशी संपर्कों और सीमा क्षेत्र के जरिए हथियारों की खेप हासिल करने की आशंका जताई गई।

    जांच में ड्रोन के जरिए सीमा पार से हथियार पहुंचाने की आशंका भी सामने आई है। इससे पंजाब में सीमा से जुड़े क्षेत्रों की सुरक्षा चुनौती और गंभीर हो जाती है। एजेंसियां अब हथियारों की आपूर्ति, विदेशी संचालकों और स्थानीय नेटवर्क के बीच संभावित संपर्कों की जानकारी जुटा रही हैं।

    पंजाब पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सैन्य प्रतिष्ठानों के अलावा सीमावर्ती और संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाई जा रही है। हालांकि, सामने आए इनपुट को लेकर अंतिम स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे को रोकने के लिए सतर्कता के साथ आगे बढ़ रही हैं।

  • बलूचिस्तान में सेना के सामने चुनौती बरकरार, लगातार हमलों और स्थानीय असंतोष से पाकिस्तान की बढ़ी चिंता

    बलूचिस्तान में सेना के सामने चुनौती बरकरार, लगातार हमलों और स्थानीय असंतोष से पाकिस्तान की बढ़ी चिंता

    नई दिल्ली । पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में सुरक्षा स्थिति लगातार चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। हाल के महीनों में सुरक्षा बलों पर हुए कई हमलों और उसके बाद शुरू किए गए सैन्य अभियानों के बावजूद क्षेत्र में स्थिरता पूरी तरह बहाल नहीं हो सकी है। बलूचिस्तान लंबे समय से पाकिस्तान के लिए सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल रहा है, जहां अलगाववादी गतिविधियां, सुरक्षा अभियान और स्थानीय असंतोष लगातार चर्चा का विषय बने हुए हैं।

    रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों ने हाल में कई बड़े अभियान चलाए हैं। इनमें जुलाई के दौरान सुरक्षा बलों पर हुए हमलों के बाद शुरू किए गए अभियान भी शामिल हैं। पाकिस्तान की सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने क्षेत्र में अपनी मौजूदगी और कार्रवाई बढ़ाई है, लेकिन इसके बावजूद समय-समय पर हिंसक घटनाएं सामने आती रही हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियां अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं।

    बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है और प्राकृतिक गैस, खनिज तथा अन्य प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध माना जाता है। इसके बावजूद यह क्षेत्र लंबे समय से विकास, रोजगार, बुनियादी सुविधाओं और संसाधनों के वितरण जैसे मुद्दों को लेकर विवादों का केंद्र रहा है। कई स्थानीय समूहों का आरोप है कि उन्हें संसाधनों का पर्याप्त लाभ नहीं मिल रहा, जबकि पाकिस्तान सरकार का कहना है कि वह विकास परियोजनाओं और सुरक्षा व्यवस्था के माध्यम से क्षेत्र में स्थिरता लाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

    विश्लेषकों का मानना है कि केवल सैन्य कार्रवाई से इस समस्या का स्थायी समाधान निकालना आसान नहीं होगा। उनका कहना है कि सुरक्षा उपायों के साथ-साथ राजनीतिक संवाद, आर्थिक विकास और स्थानीय लोगों का विश्वास जीतने के प्रयास भी आवश्यक हैं। यदि स्थानीय स्तर पर असंतोष बना रहता है तो सुरक्षा एजेंसियों के लिए खुफिया जानकारी जुटाना और हिंसक घटनाओं को रोकना अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

    बलूचिस्तान का सामरिक महत्व भी काफी अधिक है। ग्वादर बंदरगाह पाकिस्तान की प्रमुख रणनीतिक परियोजनाओं में शामिल है और इसे क्षेत्रीय व्यापार तथा समुद्री गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके अलावा यहां पाकिस्तान की सेना, नौसेना, वायुसेना, कोस्ट गार्ड और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों की व्यापक तैनाती है। इसके बावजूद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर समय-समय पर चुनौतियां सामने आती रही हैं।

    पाकिस्तान की पश्चिमी सीमाओं पर भी सुरक्षा स्थिति जटिल बनी हुई है। अफगानिस्तान सीमा पर तनाव, विभिन्न क्षेत्रों में सुरक्षा संबंधी घटनाएं और बलूचिस्तान में जारी अभियान सुरक्षा एजेंसियों के सामने एक साथ कई चुनौतियां खड़ी कर रहे हैं। इन परिस्थितियों में पाकिस्तान की सुरक्षा नीति और सैन्य रणनीति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बलूचिस्तान में दीर्घकालिक शांति के लिए केवल सुरक्षा अभियानों पर निर्भर रहने के बजाय राजनीतिक भागीदारी, सामाजिक विकास, रोजगार सृजन और स्थानीय समुदायों के साथ संवाद को भी समान महत्व देना होगा। आने वाले समय में क्षेत्र की स्थिति काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि सुरक्षा उपायों के साथ विकास और विश्वास बहाली के प्रयास कितने प्रभावी साबित होते हैं।

  • अमेरिकी सैनिक से विवाह करने वाली भारतीय महिला द्वारा सैन्य सुविधाओं का खुलासा किए जाने के बाद इंटरनेट पर छिड़ी भारतीय एवं अमेरिकी रक्षा व्यवस्था की बहस

    अमेरिकी सैनिक से विवाह करने वाली भारतीय महिला द्वारा सैन्य सुविधाओं का खुलासा किए जाने के बाद इंटरनेट पर छिड़ी भारतीय एवं अमेरिकी रक्षा व्यवस्था की बहस

    नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर सशस्त्र बलों के जवानों और उनके परिवारों को मिलने वाली सरकारी सुविधाओं तथा कल्याणकारी योजनाओं को लेकर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर एक नई और व्यापक बहस छिड़ गई है। हाल ही में एक भारतीय मूल की महिला और उनके अमेरिकी सैन्यकर्मी पति द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए विवरणों के बाद यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा के केंद्र में आ गया है। इस विवरण में अमेरिकी सशस्त्र बलों से जुड़े कर्मियों को मिलने वाले विभिन्न दीर्घकालिक और तात्कालिक लाभों का उल्लेख किया गया है, जिसके बाद इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के बीच विभिन्न देशों की रक्षा कल्याण नीतियों और उनकी प्रभावशीलता को लेकर तुलनात्मक समीक्षाएं शुरू हो गई हैं।

    सशस्त्र बलों के कल्याणकारी ढांचे के तहत मिलने वाले मुख्य लाभों में शिक्षा, चिकित्सा और आवास संबंधी नीतियां सर्वोपरि होती हैं। साझा किए गए विवरणों में दावा किया गया है कि अमेरिकी सैन्य व्यवस्था के अंतर्गत कर्मियों को जीवनभर के लिए मुफ्त शिक्षा सहायता, उच्च शिक्षा के दौरान मासिक भत्ता तथा ‘डिपार्टमेंट ऑफ वेटरन्स अफेयर्स’ के माध्यम से संपूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जाती हैं। इसके अतिरिक्त, गृह निर्माण या खरीद प्रक्रिया के दौरान अत्यधिक न्यूनतम प्रशासनिक शुल्क पर आवास आवंटन की प्रक्रिया को भी मुख्य लाभ के रूप में रेखांकित किया गया है। इन जानकारियों के सार्वजनिक होते ही दुनिया भर के सैन्य परिवारों और आम नागरिकों ने अपने-अपने देशों के सैन्य सेवा नियमों से इसकी तुलना करना शुरू कर दिया है।

    भारतीय परिप्रेक्ष्य में इस बहस ने एक नया मोड़ ले लिया है, जहां अनेक पूर्व सैनिकों, उनके आश्रितों और रक्षा विशेषज्ञों ने भारतीय सशस्त्र बलों की कल्याणकारी नीतियों को भी उतना ही सुदृढ़ और व्यापक बताया है। चर्चा के दौरान यह तथ्य प्रमुखता से उभरा कि भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना में कार्यरत तथा सेवानिवृत्त कर्मियों को भी अत्यंत सुव्यवस्थित स्वास्थ्य योजनाएं, रियायती दरों पर राशन, सैन्य छावनियों में आवास सुविधाएं और विशिष्ट शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश जैसी सुविधाएं दी जाती हैं। भारतीय रक्षा कल्याण तंत्र के तहत पूर्व सैनिकों के लिए विशेष स्वास्थ्य योजना जैसी व्यवस्थाएं मौजूद हैं, जो देश भर में विस्तृत अस्पतालों के नेटवर्क के माध्यम से मुफ्त चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करती हैं।

    आवास और पारिश्रमिक के अतिरिक्त, विदेशी रक्षा कर्मियों के परिवारों को मिलने वाली आव्रजन संबंधी सुलभता भी इस वैश्विक चर्चा का एक महत्वपूर्ण बिंदु बन गई है। सैन्य सेवा में कार्यरत कर्मियों के विदेशी जीवनसाथियों के लिए वीजा और स्थायी निवास संबंधी प्रशासनिक प्रक्रियाओं में प्राथमिकता दिए जाने के मामलों को लेकर भी विशेषज्ञ अपनी राय रख रहे हैं। विभिन्न विश्लेषकों का मानना है कि रणनीतिक और सुरक्षा कारणों से सैन्य कर्मियों के परिवारों को प्रशासनिक स्तर पर शीघ्रता से नागरिक सुविधाएं प्रदान करना कई देशों की आधिकारिक नीति का हिस्सा होता है।

    इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल आम नागरिकों के बीच रक्षा बलों के प्रति आकर्षण और जागरूकता को बढ़ाया है, बल्कि इस बात पर भी ध्यान केंद्रित किया है कि आधुनिक युग में रक्षा बल केवल एक पेशा नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा की एक व्यापक गारंटी प्रदान करते हैं। सोशल मीडिया पर जारी यह बहस अब केवल सुविधाओं के आंकड़ों तक सीमित न रहकर इस बात का विश्लेषण बन चुकी है कि विभिन्न विकसित और विकासशील देश अपने सैनिकों के जीवन स्तर को सुरक्षित करने के लिए किस प्रकार की नीतियां अपनाते हैं।

  • पंजाब में हाई अलर्ट…. ऑपरेशन सिंदूर की सालगिरह से पहले सैन्य ठिकानों पर ब्लास्ट के बाद बढ़ाई सुरक्षा

    पंजाब में हाई अलर्ट…. ऑपरेशन सिंदूर की सालगिरह से पहले सैन्य ठिकानों पर ब्लास्ट के बाद बढ़ाई सुरक्षा


    नई दिल्ली।
    ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) की सालगिरह से ठीक पहले पंजाब (Punjab) में दो सैन्य ठिकानों के बाहर हुए धमाकों के बाद पंजाब (Punjab) में हाई अलर्ट (High alert) जारी किया गया है। पूरे पंजाब में सुरक्षा बढ़ा दी गई है, आर्मी बेस, पैरामिलिट्री कैंप और दूसरे जरूरी आधारभूत संरचना के आसपास पेट्रोलिंग बढ़ा दी गई है और चेकपॉइंट बनाए गए हैं। बॉर्डर पर भी बीएसएफ ने चौकसी बढ़ा दी है। मंगलवार शाम को जालंधर के बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) के पंजाब फ्रंटियर हेडक्वार्टर के पास और इसी रात अमृतसर में आर्मी के खासा कैंप के पास धमाके हुए थे। अब एनआईए, पंजाब पुलिस और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के साथ मिलकर यह पता लगा रही है कि क्या धमाके के तार आपस में जुड़े हुए थे?

    धमाकों के समय ने जांच में एक और पहलू जोड़ दिया है और वह है ऑपरेशन सिंदूर की सालगिरह। हालांकि, अधिकारियों ने कोई सीधा कनेक्शन नहीं निकाला है, लेकिन उन्होंने कहा कि इस इत्तेफाक को बड़े सुरक्षा मूल्यांकन में शामिल किया जा रहा है क्योंकि बॉर्डर स्टेट पंजाब पहले भी कई आतंकी हमले झेल चुका है। ऑपरेशन सिंदूर में भी पाकिस्तान ने पंजाब के सरहदी जिलों पठानकोट, अमृतसर, फिरोजपुर, जालंधर के आदमपुर एयरबेस को निशाना बनाने की कोशिश की थी, जिसे भारतीय सुरक्षा बलों ने नाकाम कर दिया था।


    सेना ने बोर्डर से सटे इलाकों में सर्च ऑपरेशन चलाया

    खुफिया एजेंसियों से इनपुट मिलने के बाद पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, तरनतारन, फिरोजपुर और फाजिल्का में सतर्कता बढ़ाई गई है। फिरोजपुर कैंट रेलवे स्टेशन और विभिन्न बॉर्डर चौकियों पर पुलिस नाके लगाकर तलाशी अभियान तेज किया गया है। सुरक्षा के लिहाज से अति संवेदनशील एवं सीमावर्ती जिला पठानकोट में पुलिस ने सुरक्षा प्रबंध कड़े कर दिए हैं। पठानकोट के साथ लगते जम्मू-कश्मीर व हिमाचल के इंटर स्टेट नाकों पर पुलिस ने सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए फोर्स बढ़ा दी है। पठानकोट की बड़ी सीमा पाकिस्तान के साथ सटी है।

    बुधवार को पठानकोट पुलिस और सेना की ओर से भारत-पाक सीमा से सटे इलाकों में सर्च ऑपरेशन चलाया गया। जम्मू और हिमाचल प्रदेश को जोड़ने वाले सभी एंट्री पॉइंट्स पर पुलिस की पैनी नजर है। हर आने-जाने वाले वाहन की बारीकी से तलाशी ली जा रही है। संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है और बिना पहचान पत्र के किसी को भी सीमा पार करने की अनुमति नहीं दी जा रही है। एसएसपी पठानकोट दलजिंदर सिंह ढिल्लो के दिशा निर्देशों के अनुसार पूरे जिले में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। कल रात से ही पठानकोट के साथ लगते जम्मू व हिमाचल से आने वाली हर गाड़ी को चेक किया जा रहा है।


    चंडीगढ़ में पंजाब पुलिस के मुख्यालय पर हाई सिक्योरिटी

    पंजाब में दोहरे ब्लास्ट के बाद राजधानी चंडीगढ़ में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। सेक्टर-9 स्थित पंजाब पुलिस मुख्यालय के मुख्य गेट के बाहर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और आने-जाने वाले हर व्यक्ति की सख्ती से जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक सुरक्षा व्यवस्था में तत्काल बदलाव एहतियात के तौर पर किया गया है, क्योंकि यह इलाका पहले से ही संवेदनशील श्रेणी में आता है।

    मुख्यालय के पास ही चंडीगढ़ पुलिस का दफ्तर और पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ प्रशासक गुलाब चंद कटारिया का कार्यालय होने की वजह से सुरक्षा एजेंसियां कोई जोखिम नहीं लेना चाहतीं। पंजाब पुलिस मुख्यालय के मुख्य गेट के पीछे लोहे के बड़े बड़े गेट लगाए गए हैं ताकि बाहर से कोई विस्फोटक परिसर में न फैंका जा सके।


    आईएसआई, खालिस्तानी और गैंगस्टरों के गठजोड़ से बढ़ी चिंताएं

    पंजाब में एक बार फिर सुरक्षा हालात को लेकर गंभीर चिंता सामने आ रही है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई, खालिस्तानी आतंकी नेटवर्क और गैंगस्टर-आतंकी गठजोड़ के सक्रिय होने के संकेत मिल रहे हैं। हाल के घटनाक्रम और सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई से साफ है कि राज्य को अस्थिर करने की कोशिशें सुनियोजित तरीके से की जा रही हैं। अंतरराष्ट्रीय सीमा से ड्रोन के जरिए हथियारों और विस्फोटकों की तस्करी बड़ी चुनौती बन चुकी है।

    अमृतसर और फिरोजपुर सेक्टर में कई बार पाकिस्तान से ड्रोन के माध्यम से हथियार गिराए जाने के मामले सामने आए हैं। जांच में पता चला है कि इन गतिविधियों के पीछे पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स और विदेशों में सक्रिय खालिस्तानी आतंकी शामिल हैं। इनमें रंजीत नीटा और लखबीर लंडा जैसे नाम प्रमुख हैं। हालांकि पंजाब पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों की सतर्कता से कई साजिशें नाकाम हुई हैं। इसके बावजूद सीमा पार से मिल रहे समर्थन और स्थानीय नेटवर्क के कारण चुनौती बनी हुई है।

  • अपनी सेना में सबसे ज्यादा खर्च करने वाले देशों में भारत दुनिया में 5वें स्थान पर….

    अपनी सेना में सबसे ज्यादा खर्च करने वाले देशों में भारत दुनिया में 5वें स्थान पर….


    नई दिल्ली।
    साल 2025 में दुनिया भर में अपनी सेनाओं पर सबसे ज्यादा खर्च करने वाले देशों (Countries Spend Most Military) की सूची में भारत (India) पांचवें स्थान पर रहा है। भारत से आगे केवल चार देश हैं। वहीं पाकिस्तान (Pakistan) इस मामले में भारत के आसपास भी नहीं ठहरता है। पिछले साल दुनिया भर में हुए कुल सैन्य खर्च में भारत की हिस्सेदारी 3.2% रही है। आइए इस खबर को विस्तार से समझते हैं।


    भारत का रक्षा खर्च और ‘ऑपरेशन सिंदूर’

    स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिपरी) द्वारा सोमवार को जारी की गई एक नई रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका (USA), चीन, रूस और जर्मनी इस लिस्ट में सबसे आगे यानी टॉप 4 देश हैं। इसके बाद भारत नंबर 5 पर है। 2025 में भारत का सैन्य खर्च 92.1 अरब डॉलर रहा, जो कि पिछले वर्ष की तुलना में 8.9% अधिक है।

    बढ़ोतरी का कारण: इस वृद्धि का एक बड़ा कारण पिछले साल पाकिस्तान के खिलाफ चलाया गया ‘ऑपरेशन सिंदूर’ था। इस सैन्य अभियान के दौरान सेना को युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार रखने हेतु सशस्त्र बलों ने आपातकालीन आधार पर हथियारों और साजो-सामान की कई महत्वपूर्ण खरीदारियां कीं।


    पड़ोसी देशों (चीन और पाकिस्तान) की क्या स्थिति है?

    सिपरी के आंकड़े बताते हैं कि भारत के पड़ोसियों ने भी अपनी सेना पर खर्च बढ़ाया है।

    चीन: दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा सैन्य खर्च करने वाला देश चीन है। उसने अपने रक्षा बजट में 7.4% की वृद्धि की है, जिससे उसका कुल खर्च 336 अरब डॉलर हो गया है।

    पाकिस्तान: आर्थिक चुनौतियों के बावजूद पाकिस्तान के सैन्य खर्च में 11% की वृद्धि देखी गई है। 11.9 अरब डॉलर के खर्च के साथ पाकिस्तान इस सूची के 40 देशों में 31वें स्थान पर है।


    वैश्विक परिदृश्य: दुनिया भर में रक्षा खर्च रिकॉर्ड स्तर पर

    शीर्ष तीन देश: अमेरिका, चीन और रूस मिलकर वैश्विक सैन्य खर्च का 51% हिस्सा कवर करते हैं। इन तीनों देशों ने कुल मिलाकर 1,480 अरब डॉलर खर्च किए। साल 2025 में पूरी दुनिया का सैन्य खर्च बढ़कर 2,887 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।


    यूरोप में भारी वृद्धि

    वैश्विक स्तर पर खर्च बढ़ने का सबसे बड़ा कारण यूरोप रहा, जहां सैन्य खर्च में 14% की वृद्धि (कुल 864 अरब डॉलर) हुई। रूस-यूक्रेन युद्ध के चौथे साल में प्रवेश करने और यूरोपीय नाटो देशों द्वारा खुद को फिर से हथियारों से लैस करने की कोशिशों के कारण शीत युद्ध के बाद से मध्य और पश्चिमी यूरोप में यह सबसे तेज वार्षिक वृद्धि है।


    हथियारों के आयात में भारत अभी भी आगे

    मार्च में प्रकाशित सिपरी की एक अन्य रिपोर्ट “ट्रेंड्स इन इंटरनेशनल आर्म्स ट्रांसफर्स” के अनुसार- 2016-20 और 2021-25 की अवधि के बीच भारत के हथियारों के आयात में 4% की गिरावट आई है। गिरावट के बावजूद, भारत अभी भी सैन्य हार्डवेयर का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा आयातक (Importer) बना हुआ है, जिसकी वैश्विक हथियारों के आयात में 8.2% हिस्सेदारी है। इसका मुख्य कारण चीन और पाकिस्तान के साथ सीमा पर चल रहा तनाव है।


    रूस पर निर्भरता कम कर रहा है भारत

    पिछले एक दशक में भारत ने अपने हथियारों की खरीद नीति में बड़ा बदलाव किया है। भारत अब रूस के बजाय पश्चिमी देशों (खासकर फ्रांस, इजरायल और अमेरिका) की ओर रुख कर रहा है। 2011-15 के दौरान भारत के कुल हथियार आयात में रूस की हिस्सेदारी 70% थी, जो 2016-20 में घटकर 51% और 2021-25 में 40% रह गई है। इसके बावजूद, वर्तमान में भारत को सैन्य हार्डवेयर की आपूर्ति करने वाले शीर्ष तीन देश रूस, फ्रांस और इजरायल ही हैं।


    भविष्य की तैयारियां: रक्षा बजट 2026-27

    ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पृष्ठभूमि और मौजूदा चुनौतियों को देखते हुए, भारत सरकार ने 1 फरवरी को पेश किए गए 2026-27 के केंद्रीय बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए भारी-भरकम राशि आवंटित की है: रक्षा बजट में 15% से अधिक की बढ़ोतरी की गई है।

    इस महत्वपूर्ण क्षेत्र के लिए कुल 7.85 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
    इसमें से ₹2.19 लाख करोड़ का ‘पूंजीगत परिव्यय’ रखा गया है। इस फंड का इस्तेमाल सीधे तौर पर सशस्त्र बलों की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए किया जाएगा, जिसमें नए लड़ाकू विमान, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, हेलीकॉप्टर, युद्धपोत, पनडुब्बियां, आर्टिलरी गन, स्मार्ट हथियार, मिसाइलें, रॉकेट और कई तरह के मानव रहित (ड्रोन) सिस्टम खरीदना शामिल है।

  • गणतंत्र दिवस परेड की शुरुआत स्वदेशी तोपों की सलामी के साथ

    गणतंत्र दिवस परेड की शुरुआत स्वदेशी तोपों की सलामी के साथ

    नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस समारोह में इस वर्ष स्वदेशी रक्षा उपकरणों की बेहतरीन झलक देखने को मिली। गणतंत्र दिवस परेड की शुरुआत भी स्वदेशी तोपों की सलामी के साथ हुई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कर्तव्य पथ से गणतंत्र दिवस समारोह का नेतृत्व किया।

    इस दौरान यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहीं। कर्तव्य पथ पर राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 वर्ष, भारत की अभूतपूर्व प्रगति, मजबूत सैन्य शक्ति, व समृद्ध सांस्कृतिक विविधता देखने को मिली।

    कार्यक्रम की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के दौरे से हुई। यहां उन्होंने माल्यार्पण करके अपने प्राण न्योछावर करने वाले राष्ट्र नायकों को श्रद्धांजलि दी। वहीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष के साथ ‘पारंपरिक बग्गी’ में कर्तव्य पथ पर आईं। उनके साथ राष्ट्रपति के अंगरक्षक थे जो भारतीय सेना की सबसे वरिष्ठ रेजिमेंट है। परंपरा के अनुसार कर्तव्य पथ पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। इसके बाद 105 एमएम लाइट फील्ड गन से 21 तोपों की सलामी दी गई। यह देश में बना तोपखाना हथियार सिस्टम है।

    वहीं पहले 21 तोपों की सलामी के लिए ब्रिटिश काल की 25 पाउंडर तोपों का इस्तेमाल किया जाता था। हालांकि अब बीते कुछ समय से 172 फील्ड रेजिमेंट की 1721 सेरेमोनियल बैटरी 21 तोपों की सलामी दे रही है। दरअसल गणतंत्र दिवस समारोह में राष्ट्रीय ध्वज को 21 तोपों की सलामी देना एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक परंपरा है। इस परंपरा के तहत गणतंत्र दिवस पर 21 तोपों की सलामी के लिए 105 मिमी लाइट फील्ड गन का उपयोग किया गया। गौरतलब है कि यह भारत में ही बनी एक पूर्णत स्वदेशी तोप प्रणाली है। यह प्रणाली आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भारत की रक्षा निर्माण क्षमता को प्रदर्शित करती है।

    रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक 105 मिमी लाइट फील्ड गन के प्रयोग से न केवल पुरानी परंपरा को आधुनिक स्वरूप मिला है, बल्कि स्वदेशी रक्षा प्रणालियों के सशक्त होने का संदेश गया है। यह स्वदेशी रक्षा प्रणालियों पर भारतीय सेना के बढ़ते विश्वास का भी प्रतीक है। राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस के अवसर पर दिया जाने वाला 21 तोपों का सलामी समारोह भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा राष्ट्रीय ध्वज को प्रदान किया जाने वाला सर्वोच्च सैन्य सम्मान है। यह सलामी कर्तव्य पथ के लॉन से दी जाती है।

    भारतीय सेना द्वारा संचालित इस समारोह का प्रत्येक क्षण अत्यंत अनुशासन, सटीकता और गरिमा का प्रतीक होता है। गणतंत्र दिवस के अवसर पर यह सलामी कर्तव्य पथ के लॉन से दी गई। 21 तोपों की यह सलामी भारत की सैन्य परंपराओं की निरंतरता को दर्शाती है। इसके साथ ही यह आधुनिक, सक्षम और आत्मनिर्भर भारतीय सेना की सशक्त छवि को भी राष्ट्र और विश्व के समक्ष प्रस्तुत करती है। इसके उपरांत ‘विविधता में एकता’ थीम पर 100 सांस्कृतिक कलाकार परेड की शुरुआत करते हुए कर्तव्य पथ पर अग्रसर हुए। यह म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स का शानदार प्रदर्शन रहा।

    इस दृश्य ने देश की एकता और समृद्ध सांस्कृतिक विविधता को दर्शाया। वहीं 129 हेलीकॉप्टर यूनिट के चार एमआई-17 हेलीकॉप्टर ध्वज फॉर्मेशन में फूलों की पंखुड़ियों की बारिश करते हुए कर्तव्य पथ पर आगे बढ़े। राष्ट्रीय ध्वज को लेकर, हेलीकॉप्टरों के इस फॉर्मेशन का नेतृत्व ग्रुप कैप्टन आलोक अहलावत ने किया। इसके बाद राष्ट्रपति के सलामी लेने के साथ परेड शुरू हुई।

    दिल्ली क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग परेड कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल भवनीश कुमार ने परेड की कमान संभाली। वह दूसरी पीढ़ी के अधिकारी हैं। मुख्यालय दिल्ली क्षेत्र के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल नवराज ढिल्लों परेड के सेकंड-इन-कमांड थे। वह तीसरी पीढ़ी के सेना अधिकारी हैं। इसके बाद सर्वोच्च वीरता पुरस्कारों के गर्वित विजेता आए। इनमें परमवीर चक्र विजेता – सूबेदार मेजर (मानद कैप्टन) योगेंद्र सिंह यादव (रिटायर्ड) और सूबेदार मेजर संजय कुमार – और अशोक चक्र विजेता – मेजर जनरल सीए पिथावालिया (रिटायर्ड) और कर्नल डी श्रीराम कुमार शामिल थे।

  • कांग्रेसी पूर्व मुख्यमंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर पर विवादित बयान दिया कहा 'पहले दिन हम बुरी तरह हार गए थे'

    कांग्रेसी पूर्व मुख्यमंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर पर विवादित बयान दिया कहा 'पहले दिन हम बुरी तरह हार गए थे'


    नई दिल्ली । कांग्रेसी नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने ऑपरेशन सिंदूर पर एक विवादित बयान दिया है जिसके बाद राजनीति में हलचल मच गई है। चव्हाण का कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर के पहले दिन भारतीय वायु सेना ने अपनी पूरी ताकत का इस्तेमाल नहीं किया क्योंकि उस दिन भारतीय विमानों के पाकिस्तान द्वारा मार गिराए जाने की संभावना बहुत अधिक थी।

    पृथ्वीराज चव्हाण ने एक इंटरव्यू में कहा ऑपरेशन सिंदूर के पहले दिन अगर ग्वालियर बठिंडा या सिरसा से कोई विमान उड़ान भरता तो उसे पाकिस्तान द्वारा बहुत आसानी से मार गिराया जा सकता था। यही कारण था कि एयर फोर्स को पूरी तरह से ग्राउंडेड रखा गया था। चव्हाण ने आगे कहा कि पहले दिन हम बुरी तरह हार गए थे लेकिन ऑपरेशन के अगले चरणों में स्थिति में सुधार हुआ और भारतीय सेना ने अपनी ताकत दिखाई।

    यह बयान ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायु सेना के एक्शन को लेकर उठाए गए सवालों का जवाब देने के प्रयास के रूप में देखा जा सकता है। ऑपरेशन सिंदूर जो कि 1999 में कारगिल युद्ध के बाद भारतीय सेना द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ किया गया था एक बड़ा सैन्य अभियान था जिसमें भारतीय वायु सेना और सेना ने एकजुट होकर पाकिस्तान की अग्रिम चौकियों को निशाना बनाया था। चव्हाण के बयान के बाद विपक्षी दलों और रक्षा विशेषज्ञों ने उनकी टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

    चव्हाण का यह बयान एक ऐसे समय में आया है जब भारतीय वायु सेना और सेना के संचालन पर लगातार चर्चा हो रही है। कुछ रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान भारतीय सेना और वायु सेना की कार्यप्रणाली को गलत तरीके से प्रस्तुत कर सकते हैं। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि चव्हाण ने अपनी बात तथ्यों पर आधारित रखते हुए रखी है और ऑपरेशन सिंदूर के पहले दिन भारतीय विमानों की सुरक्षा को लेकर पर्याप्त उपाय किए गए थे।

    इससे पहले भारतीय वायु सेना और सेना के कई अधिकारियों ने भी माना था कि ऑपरेशन सिंदूर के पहले दिन कुछ फैसले धीमे थे क्योंकि पाकिस्तान द्वारा भारतीय विमानों को निशाना बनाने का खतरा बहुत ज्यादा था। हालांकि बाद में स्थिति में सुधार हुआ और भारतीय सेना ने दुश्मन के ठिकानों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया।

    चव्हाण के बयान ने यह भी सवाल खड़ा किया है कि क्या भारतीय वायु सेना के लिए ऐसे ऑपरेशनों में निर्णय लेने की प्रक्रिया में कोई कमजोरी रही थी। कुछ रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के बयानों से भारतीय सेना की रणनीतिक क्षमता पर सवाल उठते हैं जो एक संवेदनशील मामला हो सकता है।

    यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव हमेशा बना रहता है और ऐसे बयान से दोनों देशों के सैन्य इतिहास और रणनीति पर चर्चा और विवाद दोनों का सामना करना पड़ सकता है। चव्हाण के बयान को लेकर भारतीय रक्षा मंत्रालय और वायु सेना से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन इस बयान ने राजनीतिक और रक्षा हलकों में हंगामा मचा दिया है। ऑपरेशन सिंदूर के बारे में चव्हाण का यह बयान भारतीय राजनीति में एक नई बहस का कारण बन सकता है और अब यह देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया देता है।