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  • ग्वादर में सैन्य ठिकानों पर हमले का BLF का दावा, पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने तीन हमलावरों को मारने की बात कही

    ग्वादर में सैन्य ठिकानों पर हमले का BLF का दावा, पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने तीन हमलावरों को मारने की बात कही


    बलूचिस्तान।
    पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF) ने ग्वादर में सैन्य ठिकानों और पुलिस स्टेशन पर हमले करने का दावा किया है। संगठन के मुताबिक, ऑपरेशन अलमास के तहत फ्रंटियर वर्क्स ऑर्गनाइजेशन (FWO) के कैंप और माजानी पुलिस स्टेशन को निशाना बनाया गया। सैन्य काफिले पर हमले का दावा भी किया गया है। वहीं, पाकिस्तानी सुरक्षा सूत्रों ने हमले की कोशिश नाकाम करने और तीन हमलावरों को मार गिराने की जानकारी दी है। दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

    FWO कैंप पर कब्जे और झंडा फहराने का दावा

    BLF के प्रवक्ता मेजर ग्वाहराम बलोच ने गुरुवार को जारी बयान में ऑपरेशन की जानकारी दी। उनके अनुसार, अभियान में संगठन की विशेष सद्दो ऑपरेशनल बटालियन और अन्य इकाइयां शामिल थीं। BLF का दावा है कि ऑपरेशन की शुरुआत ग्वादर जीरो पॉइंट स्थित फ्रंटियर वर्क्स ऑर्गनाइजेशन के कैंप पर हमले से हुई।

    संगठन ने दावा किया कि उसके लड़ाकों ने सैन्य परिसर पर नियंत्रण हासिल कर वहां अपना झंडा फहराया। BLF के मुताबिक, इस दौरान पाकिस्तान की मिलिट्री इंटेलिजेंस के एक कैप्टन और स्पेशल सर्विसेज ग्रुप (SSG) के कई कर्मियों की मौत हुई। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। FWO पाकिस्तानी सेना से जुड़ा सैन्य इंजीनियरिंग संगठन है। यह सड़क निर्माण और बुनियादी ढांचे से जुड़ी प्रमुख परियोजनाओं में काम करता है।

    माजानी पुलिस स्टेशन और सैन्य काफिले को निशाना बनाने का दावा

    BLF ने माजानी पुलिस स्टेशन पर कब्जा करने और वहां से सरकारी हथियार व उपकरण जब्त करने का दावा भी किया है। संगठन के अनुसार, इस झड़प में एक पुलिस अधिकारी की मौत हुई।

    इसके अलावा, BLF ने ग्वादर जिले के गाबद इलाके में सैन्य काफिले पर हमले की जिम्मेदारी ली है। संगठन का दावा है कि हमले में एक सैन्य वाहन नष्ट हुआ और कई सुरक्षाकर्मी मारे गए या घायल हुए। BLF ने गाबद क्रॉस स्थित पुलिस चौकी पर नियंत्रण हासिल करने का दावा भी किया है।

    पाकिस्तानी सुरक्षा सूत्रों का अलग दावा

    पाकिस्तानी मीडिया संस्थानों जियो न्यूज और डॉन से जुड़ी रिपोर्टों में सुरक्षा सूत्रों के हवाले से अलग जानकारी सामने आई है। पाकिस्तानी पक्ष के अनुसार, सुरक्षा बलों ने एक निर्माण कंपनी के खाली कैंप पर हमले की कोशिश नाकाम कर दी। इस कार्रवाई में तीन हमलावरों के मारे जाने की बात कही गई है। कुछ अन्य संदिग्धों को घेरने की जानकारी भी सामने आई।

    हालांकि, घटनास्थल पर हुई कार्रवाई, हताहतों की संख्या और सैन्य ठिकानों पर नियंत्रण को लेकर दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

    चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के लिए अहम है ग्वादर

    ग्वादर पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिमी तट पर स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर है। यह चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) का प्रमुख हिस्सा है। इस परियोजना के तहत चीन और पाकिस्तान के बीच व्यापार, परिवहन और बुनियादी ढांचे के विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है।

    ऐसे में ग्वादर में सैन्य ठिकानों और सुरक्षा प्रतिष्ठानों पर हमलों के दावे पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था और क्षेत्र में चल रही रणनीतिक परियोजनाओं को लेकर चिंता बढ़ा सकते हैं।

    बलूचिस्तान में लंबे समय से जारी है विद्रोह

    बलूचिस्तान में लंबे समय से अलगाववादी विद्रोह चल रहा है। सशस्त्र संगठन पाकिस्तान सरकार पर क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों के दोहन और स्थानीय आबादी के अधिकारों की अनदेखी करने का आरोप लगाते रहे हैं। वहीं, पाकिस्तान सरकार इन संगठनों को आतंकवादी मानती है और उनके खिलाफ सुरक्षा अभियान चलाती है।

    ग्वादर में हालिया घटनाक्रम को लेकर BLF और पाकिस्तानी सुरक्षा सूत्रों के दावे अलग-अलग हैं। ऐसे में हमले की वास्तविक स्थिति, नुकसान और सैन्य ठिकानों पर नियंत्रण को लेकर आधिकारिक तथा स्वतंत्र पुष्टि का इंतजार है।

  • ईरान पर परमाणु हथियार इस्तेमाल नहीं करेंगे ट्रंप, जमीनी सेना भेजने से भी किया इनकार, हमलों के लिए नए विकल्पों पर विचार

    ईरान पर परमाणु हथियार इस्तेमाल नहीं करेंगे ट्रंप, जमीनी सेना भेजने से भी किया इनकार, हमलों के लिए नए विकल्पों पर विचार


    नई दिल्ली ।अमेरिका और ईरान के बीच मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं करेगा। इसके साथ ही उन्होंने ईरान की जमीन पर अमेरिकी सैनिकों को तैनात करने की संभावना से भी इनकार किया है। हालांकि, ईरान के ऊर्जा ढांचे और परमाणु ठिकानों को निशाना बनाने के लिए अमेरिकी सैन्य स्तर पर नए विकल्पों पर विचार किए जाने की जानकारी सामने आई है।

    ट्रंप ने एक साक्षात्कार के दौरान परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से जुड़े सवाल पर कहा कि उन्हें इसकी जरूरत नहीं है और वह ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं करेंगे। उनसे यह भी पूछा गया कि क्या अमेरिका ईरान की जमीन पर अपने सैनिक भेजने पर विचार कर रहा है। इस पर उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा होता नहीं दिख रहा। उनके इस बयान से फिलहाल परमाणु हथियारों के इस्तेमाल और जमीनी सैनिकों की तैनाती को लेकर अमेरिकी प्रशासन की घोषित स्थिति सामने आई है।

    ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर पारंपरिक हथियारों के इस्तेमाल पर भी चर्चा हो रही है। सामने आई जानकारी के मुताबिक, अमेरिकी सैन्य योजना से जुड़े अधिकारियों ने बताया है कि ट्रंप ने ईरान पर नए हमलों के विकल्प तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इन विकल्पों में ईरान के ऊर्जा ढांचे और परमाणु ठिकानों को निशाना बनाने की योजनाएं शामिल हैं। इनमें अमेरिका के शक्तिशाली गैर-परमाणु बम एमओएबी का इस्तेमाल भी एक संभावित विकल्प बताया गया है।

    एमओएबी को आम तौर पर ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ कहा जाता है। यह एक शक्तिशाली पारंपरिक बम है, परमाणु हथियार नहीं। ट्रंप ने भी बातचीत के दौरान इसी अंतर को स्पष्ट किया। परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से इनकार करने के बावजूद, ईरान के खिलाफ पारंपरिक हथियारों से संभावित हमलों के विकल्पों पर विचार किए जाने की जानकारी सामने आई है।

    ईरान के पिकैक्स माउंटेन क्षेत्र में स्थित ठिकाने को निशाना बनाने का विचार भी चर्चा में है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देना चाहता। उन्होंने दावा किया कि पहले किए गए अमेरिकी हमलों में ईरान के परमाणु ठिकानों को नुकसान पहुंचा है। उनके अनुसार, ईरान की कुछ परमाणु सुविधाएं पहाड़ों के नीचे स्थित हैं। इसी संदर्भ में पिकैक्स माउंटेन पर हमले की संभावना पर विचार किए जाने की बात कही गई है।

    हालांकि, उपलब्ध जानकारी से यह स्पष्ट नहीं है कि इन संभावित सैन्य विकल्पों में से किसी को अंतिम मंजूरी दी गई है या नहीं। फिलहाल नए हमलों की योजनाएं तैयार करने और विभिन्न विकल्पों पर विचार किए जाने की बात सामने आई है। इसलिए संभावित कार्रवाई और वास्तविक रूप से किए गए हमलों के बीच अंतर करना महत्वपूर्ण है।

    ट्रंप ने बातचीत के दौरान अमेरिका, रूस और चीन के परमाणु हथियार भंडार का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका के पास दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु हथियार भंडार है, जबकि रूस दूसरे और चीन तीसरे स्थान पर है। उन्होंने यह भी कहा कि चीन अगले पांच वर्षों में अमेरिका के करीब पहुंच सकता है। यह उनका आकलन है, न कि भविष्य की स्थिति का स्वतंत्र रूप से प्रमाणित निष्कर्ष।

    अमेरिकी राष्ट्रपति के मुताबिक, अमेरिका रूस और चीन के साथ परमाणु हथियारों में कमी लाने को लेकर बातचीत कर रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इन चर्चाओं के जरिए परमाणु हथियारों को समाप्त करने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं। इस तरह ट्रंप के बयान में एक ओर ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों और जमीनी सैनिकों के इस्तेमाल से इनकार किया गया है, वहीं दूसरी ओर संभावित पारंपरिक सैन्य कार्रवाई और वैश्विक परमाणु हथियारों में कमी को लेकर बातचीत का उल्लेख भी किया गया है।

  • एशियाई खेलों में सैन्य खिलाड़ियों ने रचा नया रिकॉर्ड, 27 पदक जीतकर किया सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन, राजनाथ सिंह ने बढ़ाया खिलाड़ियों का हौसला

    एशियाई खेलों में सैन्य खिलाड़ियों ने रचा नया रिकॉर्ड, 27 पदक जीतकर किया सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन, राजनाथ सिंह ने बढ़ाया खिलाड़ियों का हौसला


    नई दिल्ली । रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एशियाई खेल 2026 में भारतीय सशस्त्र बलों के खिलाड़ियों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए इसे अब तक की सर्वश्रेष्ठ उपलब्धि बताया है। भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के खिलाड़ियों ने प्रतियोगिता में छह स्वर्ण, 11 रजत और 10 कांस्य पदक सहित कुल 27 पदक अपने नाम किए। सैन्य सेवाओं के खिलाड़ियों का एशियाई खेलों में यह अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। सीमित संख्या में प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के बावजूद खिलाड़ियों ने अनुशासन, मेहनत और सामूहिक प्रयास के दम पर यह उपलब्धि हासिल की।

    सोमवार को राजनाथ सिंह ने एशियाई खेलों में हिस्सा लेने वाले सैन्य खिलाड़ियों के दल से मुलाकात की और उन्हें शानदार प्रदर्शन के लिए बधाई दी। उन्होंने बताया कि इन खेलों में भारत ने कुल 85 पदक जीते, जिनमें सैन्य खिलाड़ियों का योगदान महत्वपूर्ण रहा। भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के कुल 92 खिलाड़ियों ने प्रतियोगिताओं में भाग लिया था। इनमें से खिलाड़ियों ने विभिन्न स्पर्धाओं में पदक जीतकर देश और सशस्त्र बलों का गौरव बढ़ाया।

    रक्षा मंत्री ने कहा कि खिलाड़ियों की उपलब्धि पर उन्हें गर्व है। उन्होंने इस प्रदर्शन को भारतीय सशस्त्र बलों की खेल परंपरा, अनुशासन और मजबूत तैयारी का प्रमाण बताया। उन्होंने पदक जीतने वाले खिलाड़ियों के साथ उन प्रतिभागियों का भी उत्साह बढ़ाया, जो प्रतियोगिता में पदक हासिल नहीं कर सके। उनके मुताबिक, खेलों में भाग लेना, पूरी मेहनत से मुकाबला करना और अनुभव प्राप्त करना भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने खिलाड़ियों से कहा कि पदक नहीं जीत पाना हार का प्रतीक नहीं है। वास्तविक हार तब होती है, जब कोई प्रयास करना छोड़ देता है। खिलाड़ियों ने पूरी कोशिश की और देश का नाम रोशन किया।

    राजनाथ सिंह ने खिलाड़ियों को अपनी उपलब्धियों पर गर्व करने और भविष्य की प्रतियोगिताओं के लिए इसी समर्पण के साथ तैयारी जारी रखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि खेलों में सफलता हासिल करने के लिए निरंतर प्रयास, आत्मविश्वास और कठिन परिस्थितियों में डटे रहने की क्षमता जरूरी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन के लिए खिलाड़ियों को अपनी तैयारियों में निरंतर सुधार करना चाहिए और उपलब्ध अवसरों का पूरा लाभ उठाना चाहिए।

    रक्षा मंत्री ने मिशन ओलंपिक विंग की भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान करने, उन्हें आगे बढ़ाने, वैज्ञानिक तरीके से प्रशिक्षण देने और उच्च स्तरीय खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने में इस विंग का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बेहतर परिणाम हासिल करने के लिए खिलाड़ियों को समय पर अवसर, व्यवस्थित प्रशिक्षण और आवश्यक सहयोग मिलना चाहिए। मिशन ओलंपिक विंग सैन्य सेवाओं के खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने में अहम भूमिका निभा रहा है।

    राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों में शारीरिक क्षमता के साथ अनुशासन, धैर्य और नेतृत्व जैसे गुणों को भी महत्व दिया जाता है। कठिन परिस्थितियों में लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखना सैन्य खिलाड़ियों की विशेषता है। ये गुण खेल के मैदान में भी उनके काम आते हैं। सामूहिक प्रयास, दबाव में बेहतर प्रदर्शन और अनुशासित तैयारी उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने में मदद करते हैं।

    उन्होंने कहा कि अब खिलाड़ियों और खेल प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों को आगामी चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। विशेष रूप से लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 और उसके बाद के ओलंपिक चक्र के लिए तैयारियां अभी से मजबूत करने की जरूरत है। प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की समय पर पहचान, बेहतर प्रशिक्षण और आवश्यक सुविधाओं के जरिए उनके प्रदर्शन को अगले स्तर तक पहुंचाना महत्वपूर्ण होगा। एशियाई खेलों में मिली सफलता को आगे बढ़ाते हुए सैन्य खिलाड़ियों को आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करना लक्ष्य होना चाहिए, ताकि वे भविष्य में देश के लिए और अधिक पदक जीत सकें।

  • ईरान की सैन्य सप्लाई चेन पर अमेरिका का शिकंजा, हॉन्ग-कॉन्ग और पाकिस्तान से जुड़े 10 लोगों-संस्थाओं पर प्रतिबंध

    ईरान की सैन्य सप्लाई चेन पर अमेरिका का शिकंजा, हॉन्ग-कॉन्ग और पाकिस्तान से जुड़े 10 लोगों-संस्थाओं पर प्रतिबंध


    वॉशिंगटन।
    अमेरिका ने ईरान की सैन्य सप्लाई चेन पर कार्रवाई करते हुए ईरान, हॉन्ग-कॉन्ग और पाकिस्तान से जुड़े 10 लोगों और संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाया है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने मंगलवार को यह कदम उठाया। इन लोगों और कंपनियों पर ईरान के रक्षा मंत्रालय के लिए हथियार और उनके कलपुर्जे जुटाने तथा सैन्य खरीद में आर्थिक मदद पहुंचाने का आरोप लगाया गया है।

    यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब ट्रंप प्रशासन ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ा रहा है। वहीं, दोनों देशों के बीच संभावित कूटनीतिक बातचीत को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

    ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ के तहत कार्रवाई

    अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के अनुसार, यह कार्रवाई प्रशासन के ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ अभियान का हिस्सा है। इसका उद्देश्य ईरानी सरकार तक पहुंचने वाली महत्वपूर्ण वित्तीय मदद को रोकना है।

    ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि उनका विभाग ईरानी शासन को किसी भी तरह का समर्थन बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि ईरान की मदद करने वाले लोगों और संस्थाओं की पहचान कर उन्हें अलग-थलग करने की कार्रवाई जारी रहेगी।

    हथियारों और कलपुर्जों की खरीद में मदद का आरोप

    अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, प्रतिबंधों की जद में आए 10 लोग और संस्थाएं ईरान, हॉन्ग-कॉन्ग और पाकिस्तान में मौजूद हैं। इन पर ईरान के रक्षा मंत्रालय के लिए हथियार तथा हथियारों के हिस्से जुटाने में मदद करने का आरोप है।

    अमेरिका का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य ईरान की रक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ाना और उसकी हथियार निर्माण क्षमता को दोबारा मजबूत करने की कोशिशों को रोकना है। नए प्रतिबंधों के जरिए उन लोगों और कंपनियों की लागत बढ़ाने का प्रयास किया गया है, जिन्होंने ईरान की सैन्य खरीद में मदद की।

    2024 में भी हुई थी कार्रवाई

    ईरान की सैन्य क्षमता से जुड़ी संस्थाओं के खिलाफ अमेरिका पहले भी कार्रवाई कर चुका है। वर्ष 2024 में बाइडेन प्रशासन ने ईरान के रक्षा मंत्रालय और सशस्त्र बलों के लिए मिसाइल और ड्रोन बनाने तथा उनके प्रसार में मदद करने वाली संस्थाओं को प्रतिबंधों के दायरे में लिया था।

    रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा रियाल

    अमेरिका की ताजा वित्तीय कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब मंगलवार को ईरान की मुद्रा रियाल रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई। तेहरान में कारोबारियों ने एक अमेरिकी डॉलर के बदले 25 लाख से अधिक रियाल में कारोबार किया। युद्ध शुरू होने के बाद से रियाल लगातार कमजोर हुआ है। इससे पहले दो सितंबर को यह 22 लाख रियाल प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंचा था।

    पहले से प्रतिबंधों के दबाव में ईरानी अर्थव्यवस्था

    ईरानी अर्थव्यवस्था पहले से ही अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के दबाव में है। इस साल अमेरिका की ओर से ईरानी तेल पर नौसैनिक नाकाबंदी और युद्ध शुरू होने के बाद लगाए गए नए प्रतिबंधों ने आर्थिक स्थिति पर दबाव और बढ़ा दिया है। ताजा अमेरिकी कार्रवाई ईरान की सैन्य आपूर्ति और उससे जुड़े वित्तीय नेटवर्क पर दबाव बढ़ाने के प्रयास के तौर पर सामने आई है।

  • BRICS सम्मेलन के बीच अमेरिका का चीन पर गंभीर आरोप, जॉर्डन में सैन्य अड्डे पर हमले से सैटेलाइट तस्वीरों का जोड़ा संबंध

    BRICS सम्मेलन के बीच अमेरिका का चीन पर गंभीर आरोप, जॉर्डन में सैन्य अड्डे पर हमले से सैटेलाइट तस्वीरों का जोड़ा संबंध

    नई दिल्ली ।अमेरिका और चीन के बीच तनाव के बीच जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हुए मिसाइल हमले को लेकर एक नया आरोप सामने आया है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ईरान को चीन से जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे की हाई-क्वालिटी सैटेलाइट तस्वीरें मिली थीं। अधिकारियों के अनुसार, इन तस्वीरों से ईरान को सैन्य अड्डे और वहां मौजूद अमेरिकी सैनिकों की स्थिति को समझने में मदद मिल सकती थी।

    अमेरिकी अधिकारियों ने जॉर्डन में मौजूद मुवफ्फक सलती एयर बेस पर हुए हमले और चीन से मिली तस्वीरों के बीच संबंध होने की बात कही है। उनके अनुसार, ईरान ने इस सैन्य अड्डे की साफ और विस्तृत सैटेलाइट तस्वीरें हासिल की थीं। माना जा रहा है कि ऐसी तस्वीरों से बेस की स्थिति और वहां की गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटाना आसान हो सकता था।

    यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाकर किए गए हमले में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई थी, जबकि चार अन्य सैनिक घायल हुए थे। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, सैनिकों के रहने वाली जगह पर ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया गया था। हमले के समय कई अमेरिकी सैनिक सो रहे थे।

    यह हमला 24 घंटे के भीतर सैन्य अड्डे पर हुए तीन मिसाइल हमलों में से एक था। अप्रैल में हुए सीजफायर के बाद यह पहली ऐसी घटना थी, जिसमें अमेरिकी सैनिकों की जान गई। इसी वजह से हमले से जुड़ी जानकारी के स्रोत और उससे संबंधित संभावित सहायता को लेकर अमेरिकी स्तर पर जांच और सवालों का सिलसिला जारी है।

    हालांकि, अमेरिका ने यह दावा नहीं किया है कि चीन की सरकार ने सीधे तौर पर ईरान को अमेरिकी सैनिकों पर हमला करने में मदद की थी। अमेरिकी अधिकारियों ने चीन के सामने सैटेलाइट तस्वीरों से संबंधित सवाल उठाए थे। इसके जवाब में चीन ने इन आरोपों को खारिज कर दिया।

    चीन ने अमेरिका से अपने आरोपों के समर्थन में सबूत भी मांगे हैं। अमेरिका की ओर से अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि चीन की कौन-सी कंपनी या संस्था ने कथित तौर पर ये सैटेलाइट तस्वीरें ईरान को उपलब्ध कराई थीं। इसलिए तस्वीरों की आपूर्ति से जुड़े संस्थानों की पहचान को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

    अमेरिका इससे पहले भी ईरान को सैटेलाइट तस्वीरें उपलब्ध कराने के आरोप में चीन की तीन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई कर चुका है। ऐसे में जॉर्डन के सैन्य अड्डे से जुड़ा नया आरोप दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव के बीच सामने आया है।

    पूरे मामले में मुख्य सवाल यह है कि जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे की उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें ईरान तक किस माध्यम से पहुंचीं और उनका इस्तेमाल किस तरह किया गया। अमेरिकी अधिकारियों ने तस्वीरों और हमले के बीच संबंध की संभावना जताई है, जबकि चीन ने सीधे तौर पर लगाए गए आरोपों से इनकार किया है।

    जॉर्डन में हुए हमले में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत और चार सैनिकों के घायल होने के बाद यह मामला अमेरिका के लिए सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बन गया है। वहीं, चीन पर लगे आरोपों से अमेरिका और चीन के बीच तनाव बढ़ने की स्थिति भी बनी हुई है।

  • आसिम मुनीर को मिली तीनों सेनाओं की कमान, नए कानून से पाकिस्तान में सेना प्रमुख की ताकत और सैन्य ढांचे में बड़ा बदलाव

    आसिम मुनीर को मिली तीनों सेनाओं की कमान, नए कानून से पाकिस्तान में सेना प्रमुख की ताकत और सैन्य ढांचे में बड़ा बदलाव

    नई दिल्ली । पाकिस्तान की संसद ने देश के इतिहास में पहली बार एक ही सैन्य अधिकारी को सेना, नौसेना और वायुसेना तीनों की कमान सौंपी है। इससे उन्हें अभूतपूर्व कानूनी ताकत मिली है। अगस्त के अंत में नेशनल असेंबली ने डिफेंस फोर्सेस ऑफ पाकिस्तान एक्ट, 2026 पारित कर चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेस (सीडीएफ) का नया पद बनाया। नए कानून के तहत फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को देश का पहला सीडीएफ नियुक्त किया गया। वह अपने मौजूदा सेना प्रमुख के पद के साथ नई जिम्मेदारी को भी संभालेंगे।

    1976 के बाद पाकिस्तानी सैन्य कमान में सबसे बड़ा बदलाव

    सीडीएफ के पद के साथ मुनीर पाकिस्तान में और ताकतवर बनकर उभरे हैं। 1976 के बाद से यह पाकिस्तानी सैन्य कमान में सबसे बड़ा ढांचागत बदलाव माना जा रहा है। इससे पहले 1976 में ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी का पद बनाया गया था, लेकिन उसके पास नौसेना या वायुसेना को संचालित करने की कोई औपचारिक कानूनी ताकत नहीं थी। पुराने पद का काम सिर्फ तीनों सेनाओं के बीच तालमेल बिठाना था और उसका नौसेना या वायुसेना पर कोई अधिकार नहीं था। इसके उलट सीडीएफ के पास तीनों सेनाओं पर कानूनी ऑपरेशनल कमांड है। यह सीधे सरकार को रिपोर्ट करेगा और इसके पास ऐसे फैसले लागू करने की शक्ति है जो पुराने पद के पास कभी नहीं थी।

    परमाणु कमान पर सिर्फ सेना के पास

    नए नियमों के अनुसार, परमाणु बलों की कमान का पद अब कानूनी रूप से केवल सेना के पास होगा। विश्लेषक मजीद निजामी का कहना है कि इस बदलाव से नौसेना और वायुसेना के लिए वह भूमिका औपचारिक रूप से खत्म हो गई है।

    संशोधन पर तीखी बहस

    इस संशोधन पर पाकिस्तान के अंदर तीखी बहस छिड़ गई है। समर्थकों का तर्क है कि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा और युद्धक तैयारियों में मजबूती आएगी। रावलपिंडी के सेवानिवृत्त जनरल नईम खालिद लोधी और सुप्रीम कोर्ट के वकील हाफिज अहसान अहमद खोखर जैसे समर्थकों का मानना है कि यह ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसी पश्चिमी प्रणालियों की तर्ज पर प्रधानमंत्री से लेकर जमीनी इकाइयों तक बेहतर समन्वय, साइबर-ड्रोन अभियानों में तेजी और संकट के समय त्वरित निर्णय लेने के लिए एक वैध कदम है। वहीं आलोचकों की चिंता है कि यह कदम देश के संविधान और नागरिक नियंत्रण के संतुलन को कमजोर करेगा तथा सेना के प्रभाव को और अधिक स्थायी बनाता है। अब्दुल मोइज जाफेरी और कर्नल इनाम रहीम जैसे आलोचकों का तर्क है कि इससे एक सेवा प्रमुख दूसरे के अधीन हो गया है और सीडीएफ को अब कैबिनेट की मंजूरी के बिना केवल एक पत्र के जरिये अधिकारियों को बर्खास्त करने की शक्ति मिल गई है।

  • अमृतसर के संवेदनशील सैन्य इलाकों को लेकर खुफिया अलर्ट, पाकिस्तानी नेटवर्क की गतिविधियों पर एजेंसियों की पैनी नजर

    अमृतसर के संवेदनशील सैन्य इलाकों को लेकर खुफिया अलर्ट, पाकिस्तानी नेटवर्क की गतिविधियों पर एजेंसियों की पैनी नजर

    नई दिल्ली ।पंजाब में संभावित आतंकी साजिश को लेकर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। खुफिया इनपुट में आशंका जताई गई है कि पाकिस्तान से जुड़े कुछ ऑपरेटिव्स राज्य में सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की कोशिश कर सकते हैं। इनपुट के सामने आने के बाद संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

    बताया जा रहा है कि अमृतसर जिले में सैन्य ठिकानों से जुड़े दो स्थानों की कथित तौर पर रेकी की गई है। खुफिया जानकारी में इन ऑपरेटिव्स की पहचान राणा भाई और मलिक के नाम से किए जाने की बात सामने आई है। जिन स्थानों का उल्लेख किया गया है, उनमें खासा छावनी और उसके आसपास का बूढ़ा ठेह इलाका शामिल है।

    खासा छावनी का नाम सामने आने से सुरक्षा एजेंसियों की चिंता और बढ़ गई है। कुछ समय पहले छावनी की बाहरी दीवार के पास विस्फोट की घटना हुई थी। उस घटना में बड़ा नुकसान नहीं हुआ था, लेकिन अब नए खुफिया इनपुट के बाद पुराने घटनाक्रम की भी नए सिरे से समीक्षा किए जाने की संभावना है।

    हालांकि, मौजूदा खुफिया इनपुट और पहले हुए विस्फोट के बीच किसी सीधी कड़ी की पुष्टि अभी नहीं हुई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि दोनों घटनाओं का कोई आपसी संबंध है या नहीं। सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों के सामने फिलहाल प्राथमिकता संभावित खतरे का आकलन करने और संवेदनशील प्रतिष्ठानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की है।

    इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान में सक्रिय बताए जा रहे गैंगस्टर शहजाद भट्टी का नेटवर्क भी जांच के दायरे में है। भारतीय एजेंसियां पहले से उसके कथित नेटवर्क से जुड़े मामलों की जांच कर रही हैं। आरोप है कि इस नेटवर्क का इस्तेमाल भारत में हिंसक गतिविधियों और युवाओं की भर्ती के लिए किया जा रहा था।

    शहजाद भट्टी से जुड़े नेटवर्क के खिलाफ अलग-अलग मामलों में कार्रवाई भी की गई है। जांच में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी से कथित संपर्क और सीमा पार से संचालित गतिविधियों की जानकारी सामने आने का दावा किया गया है। ऐसे मामलों में सुरक्षा एजेंसियां आतंकी नेटवर्क, हथियारों की तस्करी और स्थानीय संपर्कों के बीच संभावित संबंधों की पड़ताल करती हैं।

    पंजाब में अवैध हथियारों की तस्करी से जुड़े नेटवर्क पर भी कार्रवाई जारी है। हाल में पुलिस ने दो संदिग्धों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से अत्याधुनिक पिस्तौल, मैगजीन और कारतूस बरामद किए जाने की जानकारी दी थी। प्रारंभिक जांच में उनके विदेशी संपर्कों और सीमा क्षेत्र के जरिए हथियारों की खेप हासिल करने की आशंका जताई गई।

    जांच में ड्रोन के जरिए सीमा पार से हथियार पहुंचाने की आशंका भी सामने आई है। इससे पंजाब में सीमा से जुड़े क्षेत्रों की सुरक्षा चुनौती और गंभीर हो जाती है। एजेंसियां अब हथियारों की आपूर्ति, विदेशी संचालकों और स्थानीय नेटवर्क के बीच संभावित संपर्कों की जानकारी जुटा रही हैं।

    पंजाब पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सैन्य प्रतिष्ठानों के अलावा सीमावर्ती और संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाई जा रही है। हालांकि, सामने आए इनपुट को लेकर अंतिम स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे को रोकने के लिए सतर्कता के साथ आगे बढ़ रही हैं।

  • बलूचिस्तान में सेना के सामने चुनौती बरकरार, लगातार हमलों और स्थानीय असंतोष से पाकिस्तान की बढ़ी चिंता

    बलूचिस्तान में सेना के सामने चुनौती बरकरार, लगातार हमलों और स्थानीय असंतोष से पाकिस्तान की बढ़ी चिंता

    नई दिल्ली । पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में सुरक्षा स्थिति लगातार चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। हाल के महीनों में सुरक्षा बलों पर हुए कई हमलों और उसके बाद शुरू किए गए सैन्य अभियानों के बावजूद क्षेत्र में स्थिरता पूरी तरह बहाल नहीं हो सकी है। बलूचिस्तान लंबे समय से पाकिस्तान के लिए सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल रहा है, जहां अलगाववादी गतिविधियां, सुरक्षा अभियान और स्थानीय असंतोष लगातार चर्चा का विषय बने हुए हैं।

    रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों ने हाल में कई बड़े अभियान चलाए हैं। इनमें जुलाई के दौरान सुरक्षा बलों पर हुए हमलों के बाद शुरू किए गए अभियान भी शामिल हैं। पाकिस्तान की सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने क्षेत्र में अपनी मौजूदगी और कार्रवाई बढ़ाई है, लेकिन इसके बावजूद समय-समय पर हिंसक घटनाएं सामने आती रही हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियां अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं।

    बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है और प्राकृतिक गैस, खनिज तथा अन्य प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध माना जाता है। इसके बावजूद यह क्षेत्र लंबे समय से विकास, रोजगार, बुनियादी सुविधाओं और संसाधनों के वितरण जैसे मुद्दों को लेकर विवादों का केंद्र रहा है। कई स्थानीय समूहों का आरोप है कि उन्हें संसाधनों का पर्याप्त लाभ नहीं मिल रहा, जबकि पाकिस्तान सरकार का कहना है कि वह विकास परियोजनाओं और सुरक्षा व्यवस्था के माध्यम से क्षेत्र में स्थिरता लाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

    विश्लेषकों का मानना है कि केवल सैन्य कार्रवाई से इस समस्या का स्थायी समाधान निकालना आसान नहीं होगा। उनका कहना है कि सुरक्षा उपायों के साथ-साथ राजनीतिक संवाद, आर्थिक विकास और स्थानीय लोगों का विश्वास जीतने के प्रयास भी आवश्यक हैं। यदि स्थानीय स्तर पर असंतोष बना रहता है तो सुरक्षा एजेंसियों के लिए खुफिया जानकारी जुटाना और हिंसक घटनाओं को रोकना अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

    बलूचिस्तान का सामरिक महत्व भी काफी अधिक है। ग्वादर बंदरगाह पाकिस्तान की प्रमुख रणनीतिक परियोजनाओं में शामिल है और इसे क्षेत्रीय व्यापार तथा समुद्री गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके अलावा यहां पाकिस्तान की सेना, नौसेना, वायुसेना, कोस्ट गार्ड और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों की व्यापक तैनाती है। इसके बावजूद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर समय-समय पर चुनौतियां सामने आती रही हैं।

    पाकिस्तान की पश्चिमी सीमाओं पर भी सुरक्षा स्थिति जटिल बनी हुई है। अफगानिस्तान सीमा पर तनाव, विभिन्न क्षेत्रों में सुरक्षा संबंधी घटनाएं और बलूचिस्तान में जारी अभियान सुरक्षा एजेंसियों के सामने एक साथ कई चुनौतियां खड़ी कर रहे हैं। इन परिस्थितियों में पाकिस्तान की सुरक्षा नीति और सैन्य रणनीति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बलूचिस्तान में दीर्घकालिक शांति के लिए केवल सुरक्षा अभियानों पर निर्भर रहने के बजाय राजनीतिक भागीदारी, सामाजिक विकास, रोजगार सृजन और स्थानीय समुदायों के साथ संवाद को भी समान महत्व देना होगा। आने वाले समय में क्षेत्र की स्थिति काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि सुरक्षा उपायों के साथ विकास और विश्वास बहाली के प्रयास कितने प्रभावी साबित होते हैं।

  • अमेरिकी सैनिक से विवाह करने वाली भारतीय महिला द्वारा सैन्य सुविधाओं का खुलासा किए जाने के बाद इंटरनेट पर छिड़ी भारतीय एवं अमेरिकी रक्षा व्यवस्था की बहस

    अमेरिकी सैनिक से विवाह करने वाली भारतीय महिला द्वारा सैन्य सुविधाओं का खुलासा किए जाने के बाद इंटरनेट पर छिड़ी भारतीय एवं अमेरिकी रक्षा व्यवस्था की बहस

    नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर सशस्त्र बलों के जवानों और उनके परिवारों को मिलने वाली सरकारी सुविधाओं तथा कल्याणकारी योजनाओं को लेकर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर एक नई और व्यापक बहस छिड़ गई है। हाल ही में एक भारतीय मूल की महिला और उनके अमेरिकी सैन्यकर्मी पति द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए विवरणों के बाद यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा के केंद्र में आ गया है। इस विवरण में अमेरिकी सशस्त्र बलों से जुड़े कर्मियों को मिलने वाले विभिन्न दीर्घकालिक और तात्कालिक लाभों का उल्लेख किया गया है, जिसके बाद इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के बीच विभिन्न देशों की रक्षा कल्याण नीतियों और उनकी प्रभावशीलता को लेकर तुलनात्मक समीक्षाएं शुरू हो गई हैं।

    सशस्त्र बलों के कल्याणकारी ढांचे के तहत मिलने वाले मुख्य लाभों में शिक्षा, चिकित्सा और आवास संबंधी नीतियां सर्वोपरि होती हैं। साझा किए गए विवरणों में दावा किया गया है कि अमेरिकी सैन्य व्यवस्था के अंतर्गत कर्मियों को जीवनभर के लिए मुफ्त शिक्षा सहायता, उच्च शिक्षा के दौरान मासिक भत्ता तथा ‘डिपार्टमेंट ऑफ वेटरन्स अफेयर्स’ के माध्यम से संपूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जाती हैं। इसके अतिरिक्त, गृह निर्माण या खरीद प्रक्रिया के दौरान अत्यधिक न्यूनतम प्रशासनिक शुल्क पर आवास आवंटन की प्रक्रिया को भी मुख्य लाभ के रूप में रेखांकित किया गया है। इन जानकारियों के सार्वजनिक होते ही दुनिया भर के सैन्य परिवारों और आम नागरिकों ने अपने-अपने देशों के सैन्य सेवा नियमों से इसकी तुलना करना शुरू कर दिया है।

    भारतीय परिप्रेक्ष्य में इस बहस ने एक नया मोड़ ले लिया है, जहां अनेक पूर्व सैनिकों, उनके आश्रितों और रक्षा विशेषज्ञों ने भारतीय सशस्त्र बलों की कल्याणकारी नीतियों को भी उतना ही सुदृढ़ और व्यापक बताया है। चर्चा के दौरान यह तथ्य प्रमुखता से उभरा कि भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना में कार्यरत तथा सेवानिवृत्त कर्मियों को भी अत्यंत सुव्यवस्थित स्वास्थ्य योजनाएं, रियायती दरों पर राशन, सैन्य छावनियों में आवास सुविधाएं और विशिष्ट शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश जैसी सुविधाएं दी जाती हैं। भारतीय रक्षा कल्याण तंत्र के तहत पूर्व सैनिकों के लिए विशेष स्वास्थ्य योजना जैसी व्यवस्थाएं मौजूद हैं, जो देश भर में विस्तृत अस्पतालों के नेटवर्क के माध्यम से मुफ्त चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करती हैं।

    आवास और पारिश्रमिक के अतिरिक्त, विदेशी रक्षा कर्मियों के परिवारों को मिलने वाली आव्रजन संबंधी सुलभता भी इस वैश्विक चर्चा का एक महत्वपूर्ण बिंदु बन गई है। सैन्य सेवा में कार्यरत कर्मियों के विदेशी जीवनसाथियों के लिए वीजा और स्थायी निवास संबंधी प्रशासनिक प्रक्रियाओं में प्राथमिकता दिए जाने के मामलों को लेकर भी विशेषज्ञ अपनी राय रख रहे हैं। विभिन्न विश्लेषकों का मानना है कि रणनीतिक और सुरक्षा कारणों से सैन्य कर्मियों के परिवारों को प्रशासनिक स्तर पर शीघ्रता से नागरिक सुविधाएं प्रदान करना कई देशों की आधिकारिक नीति का हिस्सा होता है।

    इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल आम नागरिकों के बीच रक्षा बलों के प्रति आकर्षण और जागरूकता को बढ़ाया है, बल्कि इस बात पर भी ध्यान केंद्रित किया है कि आधुनिक युग में रक्षा बल केवल एक पेशा नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा की एक व्यापक गारंटी प्रदान करते हैं। सोशल मीडिया पर जारी यह बहस अब केवल सुविधाओं के आंकड़ों तक सीमित न रहकर इस बात का विश्लेषण बन चुकी है कि विभिन्न विकसित और विकासशील देश अपने सैनिकों के जीवन स्तर को सुरक्षित करने के लिए किस प्रकार की नीतियां अपनाते हैं।

  • पंजाब में हाई अलर्ट…. ऑपरेशन सिंदूर की सालगिरह से पहले सैन्य ठिकानों पर ब्लास्ट के बाद बढ़ाई सुरक्षा

    पंजाब में हाई अलर्ट…. ऑपरेशन सिंदूर की सालगिरह से पहले सैन्य ठिकानों पर ब्लास्ट के बाद बढ़ाई सुरक्षा


    नई दिल्ली।
    ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) की सालगिरह से ठीक पहले पंजाब (Punjab) में दो सैन्य ठिकानों के बाहर हुए धमाकों के बाद पंजाब (Punjab) में हाई अलर्ट (High alert) जारी किया गया है। पूरे पंजाब में सुरक्षा बढ़ा दी गई है, आर्मी बेस, पैरामिलिट्री कैंप और दूसरे जरूरी आधारभूत संरचना के आसपास पेट्रोलिंग बढ़ा दी गई है और चेकपॉइंट बनाए गए हैं। बॉर्डर पर भी बीएसएफ ने चौकसी बढ़ा दी है। मंगलवार शाम को जालंधर के बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) के पंजाब फ्रंटियर हेडक्वार्टर के पास और इसी रात अमृतसर में आर्मी के खासा कैंप के पास धमाके हुए थे। अब एनआईए, पंजाब पुलिस और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के साथ मिलकर यह पता लगा रही है कि क्या धमाके के तार आपस में जुड़े हुए थे?

    धमाकों के समय ने जांच में एक और पहलू जोड़ दिया है और वह है ऑपरेशन सिंदूर की सालगिरह। हालांकि, अधिकारियों ने कोई सीधा कनेक्शन नहीं निकाला है, लेकिन उन्होंने कहा कि इस इत्तेफाक को बड़े सुरक्षा मूल्यांकन में शामिल किया जा रहा है क्योंकि बॉर्डर स्टेट पंजाब पहले भी कई आतंकी हमले झेल चुका है। ऑपरेशन सिंदूर में भी पाकिस्तान ने पंजाब के सरहदी जिलों पठानकोट, अमृतसर, फिरोजपुर, जालंधर के आदमपुर एयरबेस को निशाना बनाने की कोशिश की थी, जिसे भारतीय सुरक्षा बलों ने नाकाम कर दिया था।


    सेना ने बोर्डर से सटे इलाकों में सर्च ऑपरेशन चलाया

    खुफिया एजेंसियों से इनपुट मिलने के बाद पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, तरनतारन, फिरोजपुर और फाजिल्का में सतर्कता बढ़ाई गई है। फिरोजपुर कैंट रेलवे स्टेशन और विभिन्न बॉर्डर चौकियों पर पुलिस नाके लगाकर तलाशी अभियान तेज किया गया है। सुरक्षा के लिहाज से अति संवेदनशील एवं सीमावर्ती जिला पठानकोट में पुलिस ने सुरक्षा प्रबंध कड़े कर दिए हैं। पठानकोट के साथ लगते जम्मू-कश्मीर व हिमाचल के इंटर स्टेट नाकों पर पुलिस ने सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए फोर्स बढ़ा दी है। पठानकोट की बड़ी सीमा पाकिस्तान के साथ सटी है।

    बुधवार को पठानकोट पुलिस और सेना की ओर से भारत-पाक सीमा से सटे इलाकों में सर्च ऑपरेशन चलाया गया। जम्मू और हिमाचल प्रदेश को जोड़ने वाले सभी एंट्री पॉइंट्स पर पुलिस की पैनी नजर है। हर आने-जाने वाले वाहन की बारीकी से तलाशी ली जा रही है। संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है और बिना पहचान पत्र के किसी को भी सीमा पार करने की अनुमति नहीं दी जा रही है। एसएसपी पठानकोट दलजिंदर सिंह ढिल्लो के दिशा निर्देशों के अनुसार पूरे जिले में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। कल रात से ही पठानकोट के साथ लगते जम्मू व हिमाचल से आने वाली हर गाड़ी को चेक किया जा रहा है।


    चंडीगढ़ में पंजाब पुलिस के मुख्यालय पर हाई सिक्योरिटी

    पंजाब में दोहरे ब्लास्ट के बाद राजधानी चंडीगढ़ में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। सेक्टर-9 स्थित पंजाब पुलिस मुख्यालय के मुख्य गेट के बाहर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और आने-जाने वाले हर व्यक्ति की सख्ती से जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक सुरक्षा व्यवस्था में तत्काल बदलाव एहतियात के तौर पर किया गया है, क्योंकि यह इलाका पहले से ही संवेदनशील श्रेणी में आता है।

    मुख्यालय के पास ही चंडीगढ़ पुलिस का दफ्तर और पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ प्रशासक गुलाब चंद कटारिया का कार्यालय होने की वजह से सुरक्षा एजेंसियां कोई जोखिम नहीं लेना चाहतीं। पंजाब पुलिस मुख्यालय के मुख्य गेट के पीछे लोहे के बड़े बड़े गेट लगाए गए हैं ताकि बाहर से कोई विस्फोटक परिसर में न फैंका जा सके।


    आईएसआई, खालिस्तानी और गैंगस्टरों के गठजोड़ से बढ़ी चिंताएं

    पंजाब में एक बार फिर सुरक्षा हालात को लेकर गंभीर चिंता सामने आ रही है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई, खालिस्तानी आतंकी नेटवर्क और गैंगस्टर-आतंकी गठजोड़ के सक्रिय होने के संकेत मिल रहे हैं। हाल के घटनाक्रम और सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई से साफ है कि राज्य को अस्थिर करने की कोशिशें सुनियोजित तरीके से की जा रही हैं। अंतरराष्ट्रीय सीमा से ड्रोन के जरिए हथियारों और विस्फोटकों की तस्करी बड़ी चुनौती बन चुकी है।

    अमृतसर और फिरोजपुर सेक्टर में कई बार पाकिस्तान से ड्रोन के माध्यम से हथियार गिराए जाने के मामले सामने आए हैं। जांच में पता चला है कि इन गतिविधियों के पीछे पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स और विदेशों में सक्रिय खालिस्तानी आतंकी शामिल हैं। इनमें रंजीत नीटा और लखबीर लंडा जैसे नाम प्रमुख हैं। हालांकि पंजाब पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों की सतर्कता से कई साजिशें नाकाम हुई हैं। इसके बावजूद सीमा पार से मिल रहे समर्थन और स्थानीय नेटवर्क के कारण चुनौती बनी हुई है।