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  • MP: बैतूल जिले के भीमपुर में दूध और केला के सेवन के बाद अचानक बीमार पड़े 32 बच्चे

    MP: बैतूल जिले के भीमपुर में दूध और केला के सेवन के बाद अचानक बीमार पड़े 32 बच्चे


    बैतूल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के बैतूल जिले (Betul district) में दूध और केला (Milk and Banana) का सेवन करने के बाद 32 बच्चों की तबीयत खराब (32 Children ill) हो गई है. बच्चों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है. परिजनों का कहना है कि उनके बच्चों को परिवार एजुकेशन सोसायटी की कुटीर संस्था से मिला दूध, केले, बरबटी के बीज दिया गया था।

    मामला बैतूल के भीमपुर क्षेत्र का है जहां एक साथ 32 बच्चों की तबीयत बिगड़ने से हड़कंप मच गया. दूध और केले का सेवन करने के बाद बच्चों को अचानक उल्टियां होने लगीं, जिसके बाद सभी को आनन-फानन में अस्पताल पहुंचाया गया।

    भीमपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत चिखली के ग्राम भाडरी का है. यहां परिवार एजुकेशन सोसायटी की कुटीर संस्था से मिला दूध, केले,.बरबटी के बीज दिया गया था. इनके सेवन के बाद 32 बच्चों की तबीयत बिगड़ने की जानकारी सामने आई है. घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया।

    SDM और CMHO सहित सीनियर अधिकारी भीमपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे और बच्चों के उपचार की जानकारी ली. राहत की खबर यह है कि फिलहाल सभी बच्चों की हालत स्थिर बताई जा रही है. बैतूल सीएमएचओ संजीव शर्मा का कहना है कि परिवार एजुकेशन सोसायटी की कुटीर संस्था से मिला दूध, केले, बरबटी के बीज दिए गए थे। इसके सेवन के बाद बच्चों को उल्टियां होने लगीं, उन्हें भी को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भर्ती कराया गया है. फिलहाल सभी की स्थिति स्थिर है और दूध का सैंपल ले लिया गया है।

    अपने बच्चे को लेकर अस्पताल पहुंचे सुमरत कास्दे का कहना है कि उसका बच्चा कुटीर गया था, जहां उसे दूध और केला दिया गया था. इसके बाद स्कूल गया, वहां उसने कुछ नहीं खाया और स्कूल से पता चला कि बच्चों को उल्टियां हो रही हैं तो उन्हें अस्पताल लेकर आए।

  • आगर-मालवा में दूध के दाम बढ़ाने की मांग पर अनिश्चितकालीन हड़ताल, विक्रेताओं ने सड़क पर बहाया कई लीटर दूध

    आगर-मालवा में दूध के दाम बढ़ाने की मांग पर अनिश्चितकालीन हड़ताल, विक्रेताओं ने सड़क पर बहाया कई लीटर दूध

    मध्य प्रदेश: के आगर-मालवा जिले के सुसनेर में दूध के दाम बढ़ाने की मांग को लेकर दूध विक्रेताओं ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। हड़ताल के कारण क्षेत्र में दूध की सप्लाई प्रभावित होने लगी है और कई डेयरियां बंद बताई जा रही हैं। दूध विक्रेता मौजूदा कीमतों को लेकर असंतोष जताते हुए भाव बढ़ाने की मांग पर अड़े हुए हैं।

    दूध विक्रेताओं की मुख्य मांग दूध का भाव बढ़ाकर 100 रुपये प्रति लीटर करने की है। इसके साथ ही फैट का दाम 12 रुपये करने की मांग भी रखी गई है। विक्रेताओं का कहना है कि मौजूदा कीमतों पर दूध का कारोबार करना उनके लिए मुश्किल हो रहा है। दूध उत्पादन और उसे बाजार तक पहुंचाने से जुड़ी लागत बढ़ने का हवाला देते हुए वे कीमतों में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं।

    हड़ताल के बीच सुसनेर में विरोध-प्रदर्शन भी देखने को मिला। ग्रामीण क्षेत्रों से दूध लेकर सुसनेर की ओर आ रहे पिकअप वाहनों को रोककर प्रदर्शनकारियों ने दूध सड़क पर बहा दिया। विरोध के दौरान सड़क पर काफी मात्रा में दूध फैल गया। इस घटना के वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें वाहनों को रोककर दूध सड़क पर बहाते हुए लोग दिखाई दे रहे हैं।

    विरोध के दौरान दूध विक्रेताओं और दूध लेकर आने वाले वाहनों को रोकने की बात सामने आई है। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में दूध सड़क पर बहाकर विरोध दर्ज कराया। हालांकि, इस दौरान किसी अप्रिय घटना की जानकारी सामने नहीं आई है।

    सुसनेर में एक होटल से पैकेट और अन्य दूध भी प्रदर्शनकारियों द्वारा सड़क पर बहाए जाने का दावा किया गया है। इस घटना से जुड़े वीडियो भी सामने आए हैं। दूध की बर्बादी के जरिए प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर नाराजगी जताई।

    दूध विक्रेताओं का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण सुसनेर क्षेत्र के अलावा आगर-मालवा के ग्रामीण इलाकों में भी दूध की सप्लाई प्रभावित होने लगी है। कई डेयरियों के बंद रहने से स्थानीय स्तर पर दूध की उपलब्धता पर असर पड़ रहा है।

    विक्रेताओं की मांग में दो प्रमुख बिंदु शामिल हैं। पहला, दूध का भाव 100 रुपये प्रति लीटर किया जाए और दूसरा, फैट का दाम बढ़ाकर 12 रुपये किया जाए। उनका कहना है कि वर्तमान कीमतों पर दूध का कारोबार चलाना मुश्किल हो रहा है और बढ़ती लागत के कारण उन्हें आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है।

    फिलहाल हड़ताल को समाप्त करने को लेकर कोई समाधान सामने नहीं आया है। दूध विक्रेताओं ने अपनी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही है। ऐसे में हड़ताल कितने समय तक चलती है और प्रशासन तथा संबंधित पक्षों के स्तर पर इस मुद्दे को लेकर क्या बातचीत होती है, यह आगे महत्वपूर्ण रहेगा।

    यदि हड़ताल लंबी चलती है, तो सुसनेर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में दूध की सप्लाई और उपलब्धता पर इसका प्रभाव बढ़ सकता है। फिलहाल दूध विक्रेता 100 रुपये प्रति लीटर कीमत और 12 रुपये फैट के दाम की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं।

  • दूध खरीदने से पहले ऐसे पहचानें संभावित मिलावट, बुलबुले और झाग देखकर शुरुआती जांच करने का तरीका जानिए

    दूध खरीदने से पहले ऐसे पहचानें संभावित मिलावट, बुलबुले और झाग देखकर शुरुआती जांच करने का तरीका जानिए

    नई दिल्ली । दूध भारतीय खानपान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक बड़ी संख्या में लोग रोजाना दूध या उससे बने उत्पादों का सेवन करते हैं। दूध को कैल्शियम और प्रोटीन जैसे पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत माना जाता है, लेकिन बाजार में मिलावट की चिंता के कारण इसकी गुणवत्ता को लेकर सावधानी बरतना भी जरूरी है। पानी के अलावा कुछ मामलों में दूध में डिटर्जेंट जैसे पदार्थ मिलाए जाने की आशंका भी सामने आती रही है।

    दूध में मिलावट होने पर उसकी बनावट, स्वाद और झाग बनने के तरीके में अंतर दिखाई दे सकता है। हालांकि केवल देखने या स्वाद से किसी दूध को मिलावटी घोषित करना सही नहीं है। इसी वजह से खाद्य सुरक्षा से जुड़ी संस्था ने दूध में डिटर्जेंट की संभावित मौजूदगी का शुरुआती संकेत पाने के लिए एक आसान घरेलू तरीका बताया है। इस जांच के लिए किसी महंगे उपकरण की आवश्यकता नहीं होती।

    घरेलू स्तर पर जांच करने के लिए सबसे पहले एक साफ छोटे गिलास में करीब 5 से 10 मिलीलीटर दूध लें। इसके बाद गिलास में मौजूद दूध को अच्छी तरह और तेजी से हिलाएं। कुछ देर तक दूध को हिलाने के बाद उसके ऊपर बनने वाले झाग और बुलबुलों को ध्यान से देखें। इस प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि झाग कितनी मात्रा में बन रहा है और कितनी देर तक बना रहता है।

    यदि दूध को हिलाने के बाद थोड़े बुलबुले बनते हैं और वे जल्दी खत्म हो जाते हैं तो इसे सामान्य स्थिति का संकेत माना जा सकता है। दूसरी ओर, यदि दूध को हिलाने पर काफी मात्रा में झाग बनता है और वह लंबे समय तक बना रहता है तो डिटर्जेंट या किसी अन्य सर्फैक्टेंट की मौजूदगी की आशंका हो सकती है। ऐसे पदार्थ दूध में झाग को ज्यादा स्थिर बना सकते हैं।

    इसका कारण दूध और डिटर्जेंट के रासायनिक गुणों में अंतर है। सामान्य दूध को हिलाने पर हवा के छोटे बुलबुले बन सकते हैं, लेकिन वे अपेक्षाकृत जल्दी टूट जाते हैं। डिटर्जेंट में मौजूद सर्फैक्टेंट सतही तनाव को कम कर सकते हैं। इसके कारण बुलबुलों के आसपास एक स्थिर परत बन सकती है और झाग अपेक्षाकृत अधिक समय तक दिखाई दे सकता है।

    फिर भी इस घरेलू तरीके को अंतिम या प्रमाणित मिलावट जांच नहीं माना जाना चाहिए। दूध को हिलाने पर झाग बनने की मात्रा कई अन्य परिस्थितियों से भी प्रभावित हो सकती है। इसलिए यदि इस परीक्षण के बाद दूध की गुणवत्ता को लेकर संदेह बना रहता है तो उसे प्रयोगशाला जांच के लिए भेजना अधिक भरोसेमंद तरीका है। घरेलू परीक्षण को केवल शुरुआती संकेत के रूप में देखना चाहिए।

    दूध खरीदते समय भी कुछ सावधानियां बरतकर मिलावट या खराब गुणवत्ता वाले उत्पाद से बचने की कोशिश की जा सकती है। पैकेट वाला दूध खरीदते समय पैकिंग की सील, लेबल, निर्माण और उपयोग की तारीख तथा अन्य जरूरी जानकारी जरूर देखें। पैकेट फटा हुआ हो, सील से छेड़छाड़ दिखाई दे या पैकिंग असामान्य लगे तो उसे खरीदने से बचना बेहतर है।

    दूध को खरीदने के बाद निर्धारित तापमान पर रखना भी जरूरी है। पैकेट पर दिए गए भंडारण संबंधी निर्देशों का पालन करें और उपयोग से पहले उसकी स्थिति जांच लें। भरोसेमंद विक्रेता या निर्धारित मानकों का पालन करने वाले उत्पाद को प्राथमिकता देना भी सुरक्षित विकल्प हो सकता है। दूध की शुद्धता को लेकर गंभीर संदेह होने पर घरेलू जांच पर निर्भर रहने के बजाय प्रमाणित खाद्य जांच सुविधा से परीक्षण कराना सबसे उचित तरीका है।

  • एक गिलास दूध से घर पर बनाएं हलवाई जैसी मिल्क रोल बर्फी, सावन व्रत के लिए रहेगी बेहतरीन मिठाई

    एक गिलास दूध से घर पर बनाएं हलवाई जैसी मिल्क रोल बर्फी, सावन व्रत के लिए रहेगी बेहतरीन मिठाई

    नई दिल्ली । सावन का महीना आते ही घरों में व्रत और पूजा के लिए विशेष व्यंजनों की तैयारी शुरू हो जाती है। ऐसे समय में यदि कम सामग्री और कम समय में स्वादिष्ट मिठाई तैयार करनी हो, तो मिल्क रोल बर्फी एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है। इस मिठाई की खास बात यह है कि इसे केवल एक गिलास दूध और कुछ सामान्य रसोई सामग्री से आसानी से बनाया जा सकता है। इसका स्वाद हलवाई की मिठाइयों जैसा होता है और इसे पहले से बनाकर कई दिनों तक सुरक्षित भी रखा जा सकता है।

    मिल्क रोल बर्फी बनाने के लिए सबसे पहले एक भारी तले की कड़ाही में एक गिलास फुल क्रीम दूध डालकर धीमी आंच पर गर्म करें। इसमें दो छोटे चम्मच देसी घी मिलाएं और दूध को लगातार चलाते हुए पकाएं। जब दूध में हल्का उबाल आने लगे, तब इसमें स्वादानुसार चीनी डालें और मिश्रण को अच्छी तरह घुलने दें। लगातार चलाते रहने से दूध तले में नहीं लगेगा और स्वाद भी बेहतर रहेगा।

    इसके बाद मिश्रण में आधा छोटा चम्मच इलायची पाउडर मिलाएं, जिससे बर्फी में खुशबू और स्वाद दोनों बढ़ जाएंगे। यदि चाहें तो इसमें केसर या गुलाब जल की कुछ बूंदें भी मिला सकते हैं। अब दूध को तब तक पकाएं जब तक वह थोड़ा गाढ़ा न हो जाए। इसके बाद इसमें लगभग डेढ़ सौ ग्राम नारियल का बुरादा डालकर अच्छी तरह मिलाएं। मिश्रण को लगातार चलाते हुए तब तक पकाएं, जब तक वह कड़ाही छोड़ने न लगे और आटे जैसी लोई का रूप न ले ले।

    यदि मिल्क रोल को हल्का पिस्ता फ्लेवर देना चाहते हैं, तो इसमें थोड़ा पिस्ता एसेंस, पिसा हुआ पिस्ता या एक-दो बूंद प्राकृतिक फूड कलर मिला सकते हैं। हालांकि यह पूरी तरह वैकल्पिक है और इसके बिना भी मिठाई का स्वाद शानदार रहता है। मिश्रण तैयार होने के बाद गैस बंद कर दें और इसे कुछ मिनट ठंडा होने दें।

    अब एक साफ बटर पेपर, प्लास्टिक शीट या घी लगी ट्रे तैयार करें। मिश्रण को उस पर फैलाकर बेलनाकार रोल का आकार दें या चाहें तो ट्रे में जमाकर पारंपरिक बर्फी की तरह सेट करें। ऊपर से कटे हुए बादाम, पिस्ता या अन्य सूखे मेवे हल्के हाथ से दबाकर लगा दें। इसके बाद इसे लगभग आधे घंटे के लिए फ्रिज में रख दें ताकि मिठाई अच्छी तरह जम जाए।

    जब रोल पूरी तरह सेट हो जाए तो इसे मनचाहे आकार में काट लें। तैयार मिल्क रोल बर्फी का स्वाद बेहद मुलायम, हल्का और समृद्ध होता है। यह बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आती है और व्रत, पूजा, त्योहार या मेहमानों के स्वागत के लिए भी उपयुक्त रहती है। यदि इसे एयरटाइट डिब्बे में रखकर फ्रिज में रखा जाए, तो यह लगभग एक सप्ताह तक ताजा बनी रह सकती है। इसलिए सावन के सोमवार, पूजा-पाठ या अन्य धार्मिक अवसरों के लिए इसे पहले से तैयार करके आसानी से उपयोग किया जा सकता है।