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  • आंग सान सू ची को जेल से हाउस अरेस्ट में शिफ्ट, सजा में कटौती से म्यांमार में नई हलचल

    आंग सान सू ची को जेल से हाउस अरेस्ट में शिफ्ट, सजा में कटौती से म्यांमार में नई हलचल


    नई दिल्ली। म्यांमार की सैन्य सरकार ने गुरुवार को घोषणा की कि आंग सान सू ची अब अपनी शेष सजा जेल की बजाय निर्धारित आवास पर पूरी करेंगी। यह फैसला राष्ट्रपति Min Aung Hlaing द्वारा घोषित आम माफी कार्यक्रम के तहत लिया गया है।

    राज्य मीडिया द्वारा जारी की गई एक तस्वीर में सू ची लकड़ी की बेंच पर बैठी नजर आ रही हैं। यह कई वर्षों बाद उनकी पहली सार्वजनिक तस्वीर मानी जा रही है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है।

    सू ची को 2022 में विभिन्न मामलों में कुल 33 साल की सजा सुनाई गई थी। हालिया राहत के बाद उनकी सजा घटकर लगभग 18 साल रह गई है, जिसमें अभी 13 साल से अधिक की सजा शेष बताई जा रही है।

    आम माफी और कैदियों की रिहाई:
    यह फैसला बौद्ध धार्मिक पर्व के अवसर पर घोषित आम माफी का हिस्सा है। इस दौरान 1519 कैदियों को रिहा किया गया और कई अन्य की सजा में कटौती की गई है। सरकार का कहना है कि यह कदम सामाजिक स्थिरता और सामंजस्य को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है।

    अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
    संयुक्त राष्ट्र ने इस कदम का स्वागत करते हुए इसे राजनीतिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की दिशा में सकारात्मक संकेत बताया है। हालांकि, सू ची की कानूनी टीम का कहना है कि उन्हें इस फैसले की आधिकारिक जानकारी अभी तक नहीं मिली है, जिससे स्थिति को लेकर अस्पष्टता बनी हुई है।
    2021 में सैन्य तख्तापलट के बाद सू ची को गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद म्यांमार में राजनीतिक अस्थिरता और हिंसा का दौर शुरू हो गया। तब से देश में हजारों लोगों की मौत और व्यापक विरोध प्रदर्शन दर्ज किए गए हैं।
    सू ची की सजा में कटौती और हाउस अरेस्ट में शिफ्ट को म्यांमार की राजनीति में नरमी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन देश की स्थिति अभी भी पूरी तरह स्थिर नहीं मानी जा रही है।

  • म्यांमार में नया सत्ता समीकरण: सेना प्रमुख मिन आंग ह्लाइंग बने राष्ट्रपति, सैन्य पकड़ और मजबूत

    म्यांमार में नया सत्ता समीकरण: सेना प्रमुख मिन आंग ह्लाइंग बने राष्ट्रपति, सैन्य पकड़ और मजबूत

    म्यांमार। म्यांमार की राजनीति में बड़ा बदलाव सामने आया है, जहां सेना के शीर्ष नेता Min Aung Hlaing ने राष्ट्रपति पद संभाल लिया है। संसद में हुए मतदान में उन्हें 584 में से 429 वोट मिले, जिससे उनकी सत्ता पर पकड़ अब औपचारिक रूप से और मजबूत हो गई है।

    यह घटनाक्रम 2021 में हुए सैन्य तख्तापलट के पांच साल बाद सामने आया है, जब मिन आंग ह्लाइंग ने निर्वाचित सरकार को हटाकर सत्ता अपने हाथ में ले ली थी। उस दौरान Aung San Suu Kyi की सरकार को बर्खास्त कर उन्हें नजरबंद कर दिया गया था, जिसके बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन और सशस्त्र संघर्ष शुरू हो गया।

    हालिया चुनावों में सेना समर्थित यूनियन सॉलिडेरिटी एंड डेवलपमेंट पार्टी ने 80 प्रतिशत से अधिक सीटों पर जीत दर्ज की। इसके अलावा, संसद की लगभग एक-चौथाई सीटों पर सेना के सदस्य बिना चुनाव के ही काबिज हैं, जिससे सैन्य प्रभाव और अधिक स्पष्ट हो जाता है।

    विश्लेषकों के अनुसार, मिन आंग ह्लाइंग का राष्ट्रपति बनना एक रणनीतिक कदम है। इसका उद्देश्य सैन्य शासन को नागरिक सरकार के रूप में प्रस्तुत कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैधता हासिल करना और सत्ता पर पकड़ बनाए रखना है।

    संविधान के प्रावधानों के चलते उन्होंने पहले ही सेना प्रमुख का पद छोड़ दिया था। इस पद की जिम्मेदारी उनके करीबी सहयोगी और पूर्व खुफिया प्रमुख को सौंप दी गई है, जिन्हें सेना में उनका विश्वस्त माना जाता है।

    म्यांमार में जारी राजनीतिक अस्थिरता और संघर्ष के बीच यह बदलाव देश के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिस पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी नजरें टिकी हुई हैं।