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  • 31 खदानों का 16 करोड़ का ठेका, बीच में रेत माफिया सक्रिय होने के आरोप

    31 खदानों का 16 करोड़ का ठेका, बीच में रेत माफिया सक्रिय होने के आरोप


    जबलपुर। जबलपुर जिले में पिछले सात महीनों से रेत खदानों की नीलामी नहीं होने का खामियाजा सरकार और आम जनता दोनों को भुगतना पड़ रहा है। नवंबर 2025 से जिले की वैध रेत खदानें बंद पड़ी हैं, जिसके चलते सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। दूसरी ओर इस स्थिति का सबसे अधिक फायदा अवैध खनन माफियाओं को मिल रहा है, जिन्होंने नर्मदा समेत अन्य नदियों में रेत उत्खनन का समानांतर कारोबार खड़ा कर लिया है।

    जिले में नर्मदा, हिरण और गौर नदी क्षेत्र में करीब 42 रेत खदानें स्थित हैं, जिनमें से 31 खदानों को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की स्वीकृति प्राप्त है। राज्य सरकार ने इन खदानों के लिए लगभग पांच लाख घनमीटर रेत उत्खनन का टेंडर जारी किया था। इसके बदले करीब 16.5 करोड़ रुपये की लीज राशि निर्धारित की गई थी, लेकिन ऊंची प्रीमियम दर और अधिक उत्खनन लक्ष्य के कारण किसी भी ठेकेदार ने रुचि नहीं दिखाई। लगातार तीन बार टेंडर प्रक्रिया दोहराने के बावजूद खदानों का आवंटन नहीं हो सका।

    खनिज कारोबार से जुड़े जानकारों का कहना है कि वर्तमान बाजार परिस्थितियों में इतनी बड़ी राशि और निर्धारित शर्तों के साथ खदानों का संचालन आर्थिक रूप से लाभकारी नहीं है। यही कारण है कि ठेकेदारों ने दूरी बनाए रखी। अब खनिज विभाग नई रणनीति पर काम कर रहा है। विभाग खदानों की संख्या, उत्खनन की मात्रा और प्रीमियम दरों में कमी कर टेंडर को व्यावहारिक बनाने की तैयारी कर रहा है। जानकारी के अनुसार पांच लाख घनमीटर की सीमा घटाकर करीब साढ़े तीन लाख घनमीटर करने पर विचार किया जा रहा है।

    उधर वैध खदानों के बंद होने से अवैध खनन का नेटवर्क लगातार मजबूत हुआ है। रात के अंधेरे में पोकलेन, जेसीबी और हाईवा जैसे भारी वाहनों की मदद से नर्मदा और उसकी सहायक नदियों से बड़े पैमाने पर रेत निकाली जा रही है। कई स्थानों पर नदी की धाराओं को प्रभावित कर अस्थायी रास्ते और पुल तक बनाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि रातभर ट्रैक्टर और हाईवा के जरिए अवैध परिवहन खुलेआम चलता है, लेकिन प्रभावी रोक नहीं लग पा रही।

    इसका असर रेत बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। वैध आपूर्ति ठप होने से रेत की उपलब्धता कम हो गई है और कीमतों में भारी उछाल आया है। वर्तमान में जबलपुर में एक हाईवा रेत 28 से 30 हजार रुपये तक बिक रही है, जबकि पड़ोसी कटनी जिले में इसकी कीमत 50 हजार रुपये प्रति हाईवा तक पहुंच गई है। बढ़ती कीमतों का असर निर्माण कार्यों और रियल एस्टेट गतिविधियों पर भी पड़ रहा है।

    हालांकि प्रशासन अब सक्रिय नजर आ रहा है। जिला खनिज विभाग, पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमें बेलखाड़ू, बरगी, सिहोरा और चरगवां क्षेत्रों में लगातार कार्रवाई कर रही हैं। अवैध रूप से भंडारित रेत को जब्त कर नष्ट किया जा रहा है। वहीं भोपाल स्थित खनिज मुख्यालय ने भी जबलपुर की खदानों से संबंधित दस्तावेजों की समीक्षा शुरू कर दी है। इसके बावजूद सवाल यही है कि जब तक वैध खदानों का संचालन शुरू नहीं होगा, तब तक अवैध खनन पर पूरी तरह लगाम लगाना बड़ी चुनौती बना रहेगा।

  • टीकमगढ़ में रेत खनन पर शिकंजा, कार्रवाई के दौरान पोकलेन मशीन जब्त, आरोपी फरार

    टीकमगढ़ में रेत खनन पर शिकंजा, कार्रवाई के दौरान पोकलेन मशीन जब्त, आरोपी फरार


    नई दिल्ली। टीकमगढ़ के लिधौरा थाना क्षेत्र में अवैध रेत खनन पर राजस्व विभाग ने कार्रवाई करते हुए पोकलेन मशीन जब्त की। टीम के पहुंचते ही खनन माफिया फरार हो गए, जबकि प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।

    टीकमगढ़ जिले में अवैध रेत खनन के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। लिधौरा थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत उपरारा में ग्रामीणों की शिकायत पर राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची। शिकायत में बताया गया था कि रात के अंधेरे में नदी से अवैध रूप से रेत का उत्खनन किया जा रहा है। सूचना मिलते ही तहसीलदार निशांत चौरसिया के नेतृत्व में टीम और पुलिस मौके पर पहुंची।

    कार्रवाई के दौरान माफिया फरार, मशीन जब्त
    जैसे ही प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची, अवैध खनन में लगे लोग मौके से भाग निकले। हालांकि मौके से एक पोकलेन मशीन को जब्त कर लिया गया। इसके साथ ही नदी किनारे बड़ी मात्रा में रेत के ढेर भी पाए गए, जिन्हें प्रशासन ने कब्जे में ले लिया। इस कार्रवाई से इलाके में हड़कंप मच गया और खनन माफिया के नेटवर्क पर सवाल उठने लगे हैं।

    अवैध खनन पर सख्ती के निर्देश
    जिले में रेत खनन का ठेका एक निजी कंपनी को दिए जाने के बावजूद अवैध गतिविधियों की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। आरोप है कि कुछ स्थानीय लोग और जनप्रतिनिधि स्वीकृत खदानों के बजाय बिना अनुमति वाली नदियों और नालों से रेत का अवैध उत्खनन कर रहे हैं। कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि केवल अधिकृत खदानों से ही खनन की अनुमति है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की इस कार्रवाई को अवैध खनन पर बड़ी सख्ती के रूप में देखा जा रहा है।