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  • भोपाल का हड़कंप: पूर्व रेलकर्मी राजेश तिवारी का हिडन कैमरा वीडियो वायरल, मंत्री विश्वास सारंग और RSS पर लगाए गंभीर आरोप

    भोपाल का हड़कंप: पूर्व रेलकर्मी राजेश तिवारी का हिडन कैमरा वीडियो वायरल, मंत्री विश्वास सारंग और RSS पर लगाए गंभीर आरोप


    भोपाल। भोपाल के निशातपुरा थाना क्षेत्र में गिरफ्तार बर्खास्त रेलकर्मी राजेश तिवारी का मामला अब नया मोड़ ले चुका है। गिरफ्तारी के बाद सामने आए हिडन कैमरा वीडियो में राजेश कथित तौर पर कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग के खिलाफ बोलते नजर आ रहे हैं। वीडियो में वह यह कहता दिख रहा है कि किसी भी धरना-प्रदर्शन में असलम का नाम न आए, बल्कि मामला सीधे सारंग की तरफ डायवर्ट किया जाए। इसके अलावा वह बताता है कि अगर मंत्री पद से हटाया गया तो उसका नाम बदल देना। जब उससे पूछा गया कि क्या मंत्री से व्यक्तिगत दुश्मनी है, तो उसने जवाब दिया, “नहीं, पूरे RSS की है। वीडियो में यह भी दावा किया गया कि मंत्री पद से हटाने की तैयारी है और विस्तार के दौरान बदलाव होंगे।

    पुलिस ने राजेश का मोबाइल फोरेंसिक जांच के लिए जब्त कर लिया है। जांच का नया एंगल अब वायरल वीडियो और मोबाइल डेटा की पुष्टि पर केंद्रित है, यह पता लगाने के लिए कि वीडियो कब रिकॉर्ड हुआ, किसने रिकॉर्ड किया और क्या इसे एडिट किया गया।

    राजेश तिवारी पहले ही ब्लैकमेलिंग के आरोप में गिरफ्तार है। उसके पास से एमडी ड्रग और अवैध हथियार भी जब्त किए गए हैं। इसके अलावा उसके खिलाफ रेप और हत्या के प्रयास के मामले भी दर्ज हैं। 27 फरवरी को निशातपुरा पुलिस ने उसे 3 लाख रुपए की गैरकानूनी मांग के आरोप में पकड़ा था।

    राजनीतिक और साइबर जांच दोनों ही एंगल से यह मामला अब अहम बन गया है। वायरल हिडन कैमरा वीडियो और फोरेंसिक जांच की रिपोर्ट भविष्य में इसकी गुत्थी सुलझाने में निर्णायक साबित हो सकती है।

  • Maharashtra Politics Alert: BMC चुनाव से पहले माणिकराव कोकाटे के इस्तीफे को लेकर सियासी उठापटक

    Maharashtra Politics Alert: BMC चुनाव से पहले माणिकराव कोकाटे के इस्तीफे को लेकर सियासी उठापटक


    मुंबई/महाराष्ट्र की राजनीति में BMC चुनाव से पहले सियासी तूफान उठ खड़ा हुआ है। खेल मंत्री माणिकराव कोकाटे को सदनिका घोटाला मामले में नासिक जिला न्यायालय द्वारा दो साल की सजा सुनाए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। अदालत ने 16 नवंबर को सजा को बरकरार रखा था। इसके बाद पुलिस ने कोकाटे की गिरफ्तारी की प्रक्रिया शुरू कर दी है और किसी भी समय उनके खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी होने की संभावना बनी हुई है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर वारंट जारी हुआ, तो पार्टी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। ऐसे में एनसीपी प्रमुख अजित पवार को यह निर्णय लेना होगा कि कोकाटे इस्तीफा दें या हाई कोर्ट की रोक तक अपने मंत्री पद को बरकरार रखें। इस राजनीतिक पेंच ने सत्तारूढ़ दल और पार्टी नेतृत्व दोनों के लिए रणनीति बदलने की चुनौती खड़ी कर दी है।

    अजित पवार और देवेंद्र फडणवीस की अहम बैठक
    हालिया राजनीतिक चर्चाओं के बीच अजित पवार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से ‘वर्षा’ निवास पर मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार, बैठक में माणिकराव कोकाटे के इस्तीफे और विभाग के आवंटन पर विस्तृत चर्चा हुई। फडणवीस ने साफ कहा कि कोकाटे के इस्तीफे का निर्णय पार्टी नेतृत्व और अजित पवार पर निर्भर करेगा। बैठक में विभाग आवंटन पर भी बात हुई। फडणवीस ने अजित पवार से राय मांगी कि किसे विभाग सौंपा जाए। इससे पहले इसी तरह के हालात में धनंजय मुंडे को इस्तीफा देना पड़ा था।राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि कोकाटे के इस्तीफे से एनसीपी की अंदरूनी राजनीति प्रभावित हो सकती है और आगामी BMC चुनाव में इसका असर भी देखने को मिल सकता है।

    हाई कोर्ट की रोक और मंत्री पद की स्थिति
    माणिकराव कोकाटे का मंत्री पद केवल हाई कोर्ट की रोक पर सुरक्षित रह सकता है। अगर कोर्ट रोक नहीं लगाती है, तो उनके इस्तीफे की संभावना लगभग तय मानी जा रही है। विभाग आवंटन के मामले में पार्टी नेतृत्व को नई रणनीति तैयार करनी होगी। विश्लेषकों का मानना है कि BMC चुनाव से पहले यह मामला पार्टी और सरकार दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। अदालत का फैसला और अजित पवार के अगले कदम पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी को इसी समय रणनीति बदलकर चुनावी समीकरणों को मजबूत करना होगा।

    मंत्रिपद और BMC चुनाव रणनीति पर असर
    कुल मिलाकर, माणिकराव कोकाटे के इस्तीफे और विभाग आवंटन के फैसले से महाराष्ट्र में सियासी उठापटक बढ़ सकती है। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़ी नई रणनीतियों और संभावित बदलावों पर चर्चाएं तेज हो सकती हैं।BMC चुनाव के नजदीक आने के कारण यह मामला सिर्फ एनसीपी के आंतरिक समीकरण तक सीमित नहीं रहेगा। इसके प्रभाव से सरकार की सियासी छवि, गठबंधन की स्थिति और चुनावी रणनीति भी प्रभावित हो सकती है। इसलिए पार्टी के नेताओं और सियासी विश्लेषकों की निगाहें लगातार इस मामले पर बनी हुई हैं।