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  • मध्य प्रदेश स्थापना दिवस पर किस जिले में पहुंचेंगे कौन मंत्री, शासन ने जारी की सूची….

    मध्य प्रदेश स्थापना दिवस पर किस जिले में पहुंचेंगे कौन मंत्री, शासन ने जारी की सूची….

    मध्य प्रदेश: के स्थापना दिवस के अवसर पर 1 नवंबर 2026 को प्रदेशभर में जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए राज्य शासन ने मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों के जिलों का निर्धारण कर दिया है। जारी व्यवस्था के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगे, जबकि विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को ग्वालियर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके साथ ही प्रदेश के अन्य मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों को भी अलग-अलग जिलों में आयोजित कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए नामांकित किया गया है।

    राज्य शासन की ओर से जारी नामांकन के तहत उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा जबलपुर में स्थापना दिवस कार्यक्रम में शामिल होंगे। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला रीवा में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेंगे। वहीं हेमंत खंडेलवाल को बैतूल में कार्यक्रम की जिम्मेदारी दी गई है। इन नामांकनों के माध्यम से जिला स्तर पर होने वाले समारोहों में प्रदेश सरकार का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाएगा।

    मंत्री कुमार विजय शाह खंडवा में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगे, जबकि कैलाश विजयवर्गीय इंदौर में स्थापना दिवस समारोह में भाग लेंगे। प्रहलाद सिंह पटेल को नरसिंहपुर और तुलसीराम सिलावट को देवास में होने वाले कार्यक्रम के लिए नामांकित किया गया है। इस तरह प्रमुख जिलों में कार्यक्रमों के लिए अलग-अलग जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति तय की गई है।

    मध्य प्रदेश का स्थापना दिवस हर वर्ष 1 नवंबर को मनाया जाता है। इसी दिन वर्ष 1956 में राज्य का गठन हुआ था। स्थापना दिवस के मौके पर प्रदेश के सभी जिलों में स्थानीय स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन आयोजनों के जरिए राज्य के गठन, विकास यात्रा और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े पहलुओं को सामने रखा जाता है।

    इस वर्ष भी जिला स्तरीय आयोजनों में मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी के लिए शासन ने पहले से जिम्मेदारियां निर्धारित की हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की भोपाल में उपस्थिति के साथ राजधानी में मुख्य आयोजन होगा, जबकि अन्य जिलों में नामांकित प्रतिनिधि कार्यक्रमों में शामिल होंगे। इससे विभिन्न जिलों में आयोजित समारोहों में शासन की ओर से प्रतिनिधित्व रहेगा।

    जारी जानकारी में कुछ प्रमुख जिलों के लिए नामांकन का उल्लेख किया गया है। हालांकि उपलब्ध विवरण में सभी जिलों और मंत्रियों की पूरी सूची शामिल नहीं है। इसलिए शेष जिलों में किस मंत्री को भेजा गया है, इसकी जानकारी इस सूची से स्पष्ट नहीं होती। फिलहाल भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, बैतूल, खंडवा, इंदौर, नरसिंहपुर और देवास के लिए नामांकित प्रतिनिधियों के नाम सामने आए हैं।

    स्थापना दिवस कार्यक्रमों को लेकर जिला स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। एक नवंबर को होने वाले समारोहों में संबंधित जिलों के नामांकित मंत्री और जनप्रतिनिधि भाग लेंगे। शासन के इस निर्णय के बाद अब इन जिलों में कार्यक्रमों के दौरान संबंधित प्रतिनिधियों की मौजूदगी रहेगी।
  • जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला कैबिनेट का विस्तार, चार नए मंत्री शामिल, सतीश शर्मा की मंत्रिमंडल से छुट्टी

    जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला कैबिनेट का विस्तार, चार नए मंत्री शामिल, सतीश शर्मा की मंत्रिमंडल से छुट्टी

    नई दिल्ली ।जम्मू-कश्मीर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार ने मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को मंत्रिमंडल का विस्तार किया। श्रीनगर स्थित लोक भवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में चार नए मंत्रियों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली। इनमें नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्लाह, शमीमा फिरदौस और अल्ताफ अहमद कल्लू शामिल हैं। इस फेरबदल में सतीश शर्मा को मंत्रिमंडल से बाहर कर दिया गया है।

    मंत्रिमंडल विस्तार के बाद मुख्यमंत्री समेत मंत्रिपरिषद में सदस्यों की संख्या नौ हो गई है। जम्मू-कश्मीर की 90 सदस्यीय विधानसभा के आधार पर मंत्रिमंडल में अधिकतम नौ सदस्य हो सकते हैं। इस तरह उमर अब्दुल्ला सरकार ने मंत्रिपरिषद की निर्धारित संख्या पूरी कर ली है। अब नए मंत्रियों को विभागों की जिम्मेदारी सौंपे जाने और मौजूदा विभागों में बदलाव को लेकर नजर रहेगी।

    इस विस्तार में राजनीतिक अनुभव, महिला प्रतिनिधित्व और विभिन्न क्षेत्रों को मंत्रिमंडल में जगह देने पर जोर दिखाई देता है। अली मोहम्मद सागर और मीर सैफुल्लाह पहले भी मंत्री के रूप में काम कर चुके हैं, जबकि शमीमा फिरदौस और अल्ताफ अहमद कल्लू को पहली बार मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। शमीमा फिरदौस के शामिल होने से सरकार में महिला प्रतिनिधित्व भी बढ़ेगा।

    अली मोहम्मद सागर नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं। वह श्रीनगर जिले की खानयार विधानसभा सीट से सात बार विधायक चुने जा चुके हैं। पार्टी संगठन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है और वह महासचिव की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। इससे पहले वह उमर अब्दुल्ला सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री के रूप में काम कर चुके हैं। उनके अनुभव को देखते हुए उन्हें फिर से मंत्रिमंडल में जगह दी गई है।

    मीर सैफुल्लाह उत्तरी कश्मीर के अनुभवी नेताओं में शामिल हैं। वह चार बार विधायक चुने गए हैं। उनके पिछले तीन कार्यकाल कुपवाड़ा विधानसभा क्षेत्र से जुड़े रहे, जबकि 2024 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने त्रेहगाम सीट से जीत हासिल की। पेशे से वकील रहे सैफुल्लाह पहले भी मंत्री पद संभाल चुके हैं। उनके मंत्रिमंडल में लौटने से उत्तरी कश्मीर का प्रतिनिधित्व सरकार में मजबूत होगा।

    शमीमा फिरदौस नेशनल कॉन्फ्रेंस की प्रमुख महिला नेताओं में शामिल हैं। वह श्रीनगर की हब्बाकदल विधानसभा सीट से तीन बार विधायक चुनी गई हैं। पहली बार मंत्री बनने के साथ ही वह सकीना इट्टू के बाद मंत्रिमंडल में दूसरी महिला मंत्री होंगी। उनके शामिल होने से सरकार में महिला नेतृत्व की भागीदारी बढ़ेगी।

    अल्ताफ अहमद कल्लू, जिन्हें अल्ताफ कल्लू के नाम से भी जाना जाता है, दक्षिण कश्मीर के पहलगाम विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। वह दूसरी बार विधायक बने हैं और विधान परिषद के सदस्य के रूप में भी काम कर चुके हैं। विधानसभा और विधान परिषद का अनुभव रखने वाले कल्लू को पहली बार मंत्रिमंडल में जिम्मेदारी मिली है।

    इस बीच, कांग्रेस ने जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल होने तक सरकार में शामिल नहीं होने का अपना रुख बरकरार रखा है। ऐसे में मंत्रिमंडल विस्तार नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व वाली सरकार के भीतर ही हुआ है। अब विभागों के बंटवारे से यह स्पष्ट होगा कि नए मंत्रियों को कौन-कौन सी जिम्मेदारियां सौंपी जाती हैं और मौजूदा मंत्रियों के विभागों में कितना बदलाव होता है।

  • ट्रंप के वैश्विक युद्धों को रुकवाने के दावों की उनके ही मंत्री ने निकाली हवा…. भारत-पाक का भी किया जिक्र

    ट्रंप के वैश्विक युद्धों को रुकवाने के दावों की उनके ही मंत्री ने निकाली हवा…. भारत-पाक का भी किया जिक्र


    वाशिंगटन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) द्वारा रोज वैश्विक युद्धों को रुकवाने के दावों की हवा उनके मंत्री ने ही निकाल दी है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो (American External Affairs Minister Marco Rubio) ने हाल ही में एक ऐसा बयान दिया है जिसकी खूब चर्चा हो रही है। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के उच्च स्तरीय सत्र के दौरान रुबियो ने उसी वैश्विक व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं, जिसे अमेरिका ने बनाया है और वर्षों से भारत जैसे देश बदलाव की मांग करते आए हैं। रुबियो ने मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए इसे पूरी तरह निष्प्रभावी तक बता दिया। इस दौरान उन्होंने भारत और पाकिस्तान का जिक्र भी किया।

    रुबियो ने अपने संबोधन में कहा कि संयुक्त राष्ट्र जैसी वैश्विक संस्थाएं अपने मूल उद्देश्य से भटक चुकी हैं और भारत-पाकिस्तान जैसे तनावों को सुलझाने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही हैं। रुबियो ने कहा कि वैश्विक निकाय उन मामलों में उलझ गए हैं जो उनके अधिकार क्षेत्र में आते ही नहीं हैं। उन्होंने कहा, “अंतरराष्ट्रीय प्रणाली इसलिए नाकाम हो रही है क्योंकि यह अपने इरादे से आगे बढ़ चुकी है। यह दुनिया के किसी भी बड़े संघर्ष को सुलझाने में असमर्थ है।” उन्होंने दावा किया कि संयुक्त राष्ट्र में एकत्र हुए कई वैश्विक नेताओं के बीच भी इस बात पर सहमति है कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय प्रणाली प्रभावी ढंग से काम नहीं कर रही है।


    भारत-पाकिस्तान का जिक्र

    रुबियो ने आगे कहा कि अगर सही मायने में काम करने वाली एक वैश्विक व्यवस्था मौजूद होती, तो वह अलग अलग देशों के बीच बढ़ते तनाव को समय रहते टाला जा सकता था। उन्होंने कहा, “बहुत अच्छा होता अगर हमारे पास एक बेहतर करने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रणाली होती जो थाईलैंड और कंबोडिया के बीच हुए युद्ध या भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष से निपट सकती… लेकिन अभी हमारे पास ऐसा कोई सिस्टम नहीं है जो इसका समाधान कर सके।”

    हालांकि रुबियो ने अपनी बातों पर तुरंत सफाई भी दी। उन्होंने कहा कि वे अंतरराष्ट्रीय प्रणाली पर हमला नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन बातों के जरिए वे इसे अपने शुरुआती लक्ष्यों और सही भूमिका में वापस लाने की कोशिश कर रहे हैं।


    ट्रंप के दावों की सच्चाई

    अब रुबियो के इस बयान के बाद ट्रंप के दावों की सच्चाई एक बार फिर सामने आई है। बता दें कि बीते साल मई में भारत और पाकिस्तान के बीच बनी जंग जैसी स्थिति के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीजफायर करवाने का दावा किया था। उन्होंने कई बार अपने दावे को दोहराया। हालांकि भारत ने बार बार स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान के गिड़गिड़ाने के बाद दोनों देशों के बीच DGMO स्तर पर हुई वार्ता के बाद ही सीजफायर पर सहमति बनी थी।

  • मंत्रियों की प्रस्तुतियों से तय होगी आगे की प्राथमिकताएं, विकसित भारत 2047 पर रहेगा फोकस

    मंत्रियों की प्रस्तुतियों से तय होगी आगे की प्राथमिकताएं, विकसित भारत 2047 पर रहेगा फोकस


    नई दिल्ली ।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट मंत्रियों का दो दिवसीय चिंतन शिविर 23 और 24 सितंबर को आयोजित हो रहा है। इस उच्चस्तरीय बैठक का मुख्य विषय विकसित भारत 2047 है। इसमें सरकार के अब तक के कामकाज की समीक्षा के साथ आगे की योजनाओं, सुधारों और प्राथमिकताओं पर विचार किया जा रहा है।

    चिंतन शिविर के पहले दिन कैबिनेट मंत्रियों की ओर से अपने-अपने मंत्रालयों के कामकाज से संबंधित प्रस्तुतियां रखी जा रही हैं। इन प्रस्तुतियों में अब तक किए गए कार्यों, प्रमुख योजनाओं की स्थिति, उपलब्धियों और आगे की कार्ययोजना से जुड़े विषय शामिल हैं।

    दूसरे दिन मंत्रियों और मंत्रालयों के कामकाज की समीक्षा की जाएगी। मूल जानकारी के अनुसार, इस समीक्षा के बाद मंत्रियों के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जाना है। हालांकि, कैबिनेट में फेरबदल को लेकर अंतिम निर्णय के संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।

    इस बार का चिंतन शिविर कैबिनेट मंत्रियों पर केंद्रित है। इससे पहले राज्य मंत्रियों और स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्रियों के साथ अलग-अलग स्तर पर समीक्षा बैठकें हो चुकी हैं। इसके बाद कैबिनेट मंत्रियों के लिए अलग से दो दिवसीय मंथन रखा गया है।

    बैठक में युवाओं से जुड़े मुद्दों को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। खासतौर पर जेन जी के साथ बेहतर तालमेल, उनके प्रमुख मुद्दों और सरकार की योजनाओं के साथ उनके जुड़ाव को लेकर मंत्रियों से जानकारी मांगी जा रही है।

    मंत्रियों को अपने-अपने क्षेत्रों में युवाओं की प्राथमिकताओं को समझने और उनके साथ संवाद के लिए किए गए प्रयासों के बारे में भी प्रस्तुति देनी है। रोजगार से जुड़े विषयों पर युवाओं की सोच, उनकी संतुष्टि और असंतुष्टि को समझने के लिए किए गए प्रयास भी चर्चा का हिस्सा हैं।

    महिला आरक्षण से संबंधित संविधान के 131वें संशोधन विधेयक को लेकर भी मंथन किया जाना है। दिए गए विवरण के अनुसार, अप्रैल में यह विधेयक पारित नहीं हो पाया था। अब इसे आगे बढ़ाने के तरीकों और इससे जुड़े सुझावों पर मंत्रियों के विचार लिए जाने हैं।

    विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी यूजीसी से जुड़े मुद्दे को भी प्रस्तुतियों में शामिल किया गया है। इस विषय को लेकर जेन जी की सोच, संबंधित क्षेत्र में इसके प्रभाव और आगे की कार्ययोजना पर मंत्रियों से जानकारी रखने को कहा गया है।

    चिंतन शिविर का व्यापक उद्देश्य सरकार के कामकाज का जायजा लेने के साथ अगले चरण के लिए सुधारों और प्राथमिकताओं की पहचान करना है। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के अनुरूप विभिन्न मंत्रालयों के काम को आगे बढ़ाने और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी चर्चा हो रही है।

    सरकार की यह समीक्षा प्रक्रिया केवल वर्तमान बैठक तक सीमित नहीं है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, विकसित भारत 2047 से जुड़ी चर्चाओं और प्रस्तुतियों का क्रम पहले से जारी है। आने वाले समय में भी इस विषय पर आगे के मंथन के दौर आयोजित किए जाने की योजना है।

    वर्ष 2021 में भी केंद्रीय मंत्रिपरिषद के साथ पांच चिंतन शिविर आयोजित किए गए थे। पहला शिविर 14 सितंबर को हुआ था, जबकि अंतिम बैठक नवंबर में हुई थी। प्रत्येक सत्र करीब पांच घंटे चला था। इनमें मंत्रियों के कामकाज, कार्यकुशलता, समय और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल, योजनाओं की निगरानी और शासन सुधार जैसे विषयों पर चर्चा हुई थी।

    नवंबर 2021 में 77 मंत्रियों को आठ समूहों में बांटकर अलग-अलग प्रशासनिक विषयों पर काम आगे बढ़ाने की कवायद भी की गई थी। वर्तमान चिंतन शिविर में भी सरकार के मौजूदा कामकाज की समीक्षा के साथ भविष्य की योजनाओं और सुधारों की दिशा तय करने पर जोर है।

  • केन्द्रीय मंत्रियों को दिल्ली में रहने का आदेश…. अगले हफ्ते PM मोदी करेंगे दो दिनी चिंतन बैठक

    केन्द्रीय मंत्रियों को दिल्ली में रहने का आदेश…. अगले हफ्ते PM मोदी करेंगे दो दिनी चिंतन बैठक


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) अगले हफ्ते केंद्रीय मंत्रियों (Union Ministers) के साथ दो दिवसीय ‘चिंतन बैठक’ करेंगे। 23 और 24 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाली इस बैठक में सरकार के कामकाज, नीतियों और सुधारों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर मंथन होगा। सूत्रों के मुताबिक, सभी केंद्रीय कैबिनेट मंत्रियों को अगले हफ्ते दिल्ली में मौजूद रहने को कहा गया है। बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री शामिल होंगे या नहीं, इसे लेकर अभी स्थिति साफ नहीं है।


    सुधारों पर मंत्रियों की होगी प्रेजेंटेशन

    बैठक में कुछ मंत्री अपने-अपने मंत्रालयों में किए गए काम और अलग-अलग क्षेत्रों में सुधारों को लेकर उठाए गए कदमों पर प्रेजेंटेशन दे सकते हैं। इस दौरान यह चर्चा भी हो सकती है कि सरकारी नीतियों को ज्यादा असरदार कैसे बनाया जाए और उनका फायदा आम लोगों तक तेजी से कैसे पहुंचाया जाए। प्रधानमंत्री मोदी पहले भी मंत्रियों से कह चुके हैं कि लोगों की समस्याओं का समाधान करना और उनका जीवन आसान बनाना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।


    योजनाओं की प्रगति से लेकर सरकारी सेवाओं तक पर नजर

    ‘चिंतन बैठक’ में केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं की प्रगति और उनके जमीन पर क्रियान्वयन की भी समीक्षा हो सकती है। चर्चा इस बात पर होगी कि योजनाओं का लाभ लोगों तक किस तरह और बेहतर तरीके से पहुंचाया जाए। इसके अलावा सरकारी सेवाओं को ज्यादा प्रभावी बनाने और अलग-अलग मंत्रालयों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने के तरीकों पर भी मंथन होने की संभावना है।


    आगे की रणनीति और सरकार के रोडमैप पर भी फोकस

    दो दिन चलने वाली इस बैठक में समय प्रबंधन, मंत्रालयों के बीच समन्वय और नीतियां बनाने की प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने जैसे मुद्दे भी उठ सकते हैं। अब तक किए गए काम की समीक्षा के साथ आगे की प्राथमिकताओं और सरकार के अगले रोडमैप पर भी चर्चा होने की संभावना है। माना जा रहा है कि बैठक का बड़ा फोकस शासन व्यवस्था को और प्रभावी बनाने, सुधारों को गति देने और सरकारी योजनाओं का लाभ आम लोगों तक बेहतर तरीके से पहुंचाने पर रहेगा।


    पिछले हफ्ते राज्य मंत्रियों के साथ हुई थी लंबी बैठक

    बता दें कि पीएम मोदी ने अपनी सरकार के राज्य मंत्रियों के साथ भी लंबी बैठक की थी। इस दौरान मंत्रालयों के कामकाज और अब तक की प्रगति की समीक्षा की गई थी। इससे पहले हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में भी अलग-अलग मंत्रालयों की उपलब्धियों पर चर्चा हुई थी। काम की रफ्तार, फाइलों के निपटारे और अदालतों में लंबित सरकारी मामलों जैसे मुद्दों को ध्यान में रखते हुए मंत्रालयों की रैंकिंग भी की गई थी। यह ‘चिंतन बैठक’ ऐसे वक्त हो रही है, जब मोदी मंत्रिपरिषद में फेरबदल की अटकलें तेज हैं। इसके अलावा मोदी सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयकों को पारित कराने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने के विकल्प पर भी विचार कर रही है।

  • कैबिनेट मंत्रियों का सोशल मीडिया रिपोर्ट कार्ड जारी, डिजिटल एंगेजमेंट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बने नंबर-1

    कैबिनेट मंत्रियों का सोशल मीडिया रिपोर्ट कार्ड जारी, डिजिटल एंगेजमेंट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बने नंबर-1

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने देश के युवाओं और नई पीढ़ी के साथ अपना संपर्क तथा संचार मजबूत करने के लिए डिजिटल माध्यमों पर जोर देना तेज कर दिया है। इसी रणनीति के तहत केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में सभी मंत्रियों का सोशल मीडिया परफॉर्मेंस रिपोर्ट कार्ड प्रस्तुत किया गया। लगभग साढ़े तीन महीने के कामकाज और डिजिटल गतिविधियों के आधार पर तैयार की गई इस रैंकिंग सूची में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले स्थान पर रहे हैं।

    मंत्रियों का यह विशेष रिपोर्ट कार्ड 1 मई से 15 अगस्त 2026 तक की अवधि के दौरान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर किए गए कार्यों के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें मुख्य रूप से इंस्टाग्राम, एक्स, लिंक्डइन और फेसबुक जैसी प्रमुख नेटवर्किंग साइट्स पर मंत्रियों की सक्रियता का गहन विश्लेषण किया गया। रैंकिंग तय करने के लिए दैनिक पोस्ट की संख्या, यूजर्स एंगेजमेंट, लाइक्स और फॉलोअर्स में बढ़ोतरी जैसे महत्वपूर्ण मानकों को आधार बनाया गया।

    रिपोर्ट में केवल सत्ता पक्ष के मंत्रियों का ही नहीं, बल्कि देश के प्रमुख राजनीतिक चेहरों का भी तुलनात्मक अध्ययन किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, नितिन गडकरी और कंगना रनौत जैसे नेताओं ने उच्च रैंकिंग हासिल की। वहीं विपक्षी नेताओं में राहुल गांधी, असदुद्दीन ओवैसी और अरविंद केजरीवाल भी शीर्ष डिजिटल प्रभाव वाले नेताओं में शामिल रहे।

    हाल के समय में राजधानी दिल्ली में हुए छात्र आंदोलनों के बाद सरकार ने अपनी डिजिटल संचार नीति में व्यापक बदलाव किया है। अब पारंपरिक और औपचारिक राजनीतिक बयानों के स्थान पर लघु रील्स, अनौपचारिक संवाद और क्रिएटर फॉर्मेट वाले वीडियो कंटेंट पर अधिक ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य युवाओं की पसंद के अनुसार सरल और प्रभावकारी भाषा में अपनी बात पहुंचाना है।

    इसी कड़ी में विभिन्न मंत्रालयों को नए और लोकप्रिय डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अपनी उपस्थिति बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। डिजिटल आउटरीच कार्यक्रम के तहत विदेश मंत्रालय ने भी हाल ही में स्नैपचैट जैसे प्लेटफॉर्म पर अपना आधिकारिक अकाउंट शुरू किया है। इसके अलावा कैबिनेट में यह निर्णय भी लिया गया है कि केंद्रीय मंत्री सीधे संवाद के लिए देश भर के विभिन्न विश्वविद्यालयों का दौरा करेंगे और शिक्षा एवं परीक्षा प्रणाली पर छात्रों से चर्चा करेंगे।

    मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों के विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों में मंत्रियों के इस प्रत्यक्ष और डिजिटल संवाद कार्यक्रम को लागू करने की योजना है। प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस नई रणनीति से सरकार और युवा वर्ग के बीच सीधे संवाद का एक पारदर्शी माध्यम स्थापित होगा, जिससे सरकारी योजनाओं और नीतियों की जानकारी युवाओं तक तेजी से पहुंचेगी।

  • एमपी में यूसीसी पर कैबिनेट की मुहर के बाद विधानसभा में आएगा विधेयक, मंत्रियों के सामने होगा प्रेजेंटेशन

    एमपी में यूसीसी पर कैबिनेट की मुहर के बाद विधानसभा में आएगा विधेयक, मंत्रियों के सामने होगा प्रेजेंटेशन


    भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक को मानसून सत्र में विधानसभा में पेश करने की तैयारी में है। इससे पहले 19 जुलाई को भोपाल के निकट स्थित जगदीशपुर में आयोजित होने वाली कैबिनेट बैठक में विधेयक के प्रमुख प्रावधानों का प्रस्तुतीकरण किया जाएगा, ताकि सभी मंत्री इसके विभिन्न पहलुओं से पूरी तरह अवगत हो सकें।

    सरकार का उद्देश्य है कि विधानसभा में विधेयक पेश होने से पहले मंत्रियों की सभी जिज्ञासाओं का समाधान हो जाए और वे सदन में प्रस्तावित कानून के प्रावधानों पर तथ्यात्मक रूप से अपना पक्ष रख सकें।

    कांग्रेस के विरोध की तैयारी
    सूत्रों के अनुसार, विधानसभा के मानसून सत्र में कांग्रेस यूसीसी विधेयक का विरोध कर सकती है। इसे देखते हुए सरकार पहले ही कैबिनेट के समक्ष इसके प्रावधानों की विस्तृत जानकारी साझा करेगी, ताकि चर्चा के दौरान मंत्री प्रभावी ढंग से सरकार का पक्ष रख सकें।

    आदिवासी समुदाय रहेगा दायरे से बाहर
    प्रस्तावित यूसीसी विधेयक में आदिवासी, घुमंतु, अर्द्धघुमंतु और मतांतरित आदिवासी समुदायों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। इसके अलावा लिव-इन रिलेशनशिप के लिए अनिवार्य पंजीयन, उत्तराधिकार से जुड़े प्रावधान और विवाह एवं विवाह विच्छेद (तलाक) के मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान नियम लागू करने का प्रस्ताव शामिल किया गया है।

    साढ़े नौ लाख सुझावों के आधार पर तैयार हुआ मसौदा
    यूसीसी का मसौदा तैयार करने के दौरान समिति को करीब साढ़े नौ लाख सुझाव प्राप्त हुए थे। इन्हीं सुझावों और विभिन्न पक्षों पर विचार-विमर्श के बाद विधेयक को अंतिम रूप दिया गया है।

    मानसून सत्र में आएंगे 14 विधेयक
    20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में सरकार कुल 14 विधेयक प्रस्तुत करने की तैयारी में है। इनमें केंद्र सरकार द्वारा संशोधित श्रम कानूनों को प्रदेश में लागू करने संबंधी विधेयक, कोचिंग संस्थानों के विनियमन का कानून, फायर सेफ्टी, कॉलोनाइजर एक्ट, माल एवं सेवा कर (जीएसटी), पंचायतराज, नागरिक सुरक्षा संहिता तथा प्रथम अनुपूरक बजट से संबंधित विनियोग विधेयक समेत कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव शामिल हैं।

  • शुभेंदु अधिकारी सरकार का बड़ा कदम: मंत्रिमंडल विस्तार से राजनीतिक समीकरणों में बदलाव के संकेत

    शुभेंदु अधिकारी सरकार का बड़ा कदम: मंत्रिमंडल विस्तार से राजनीतिक समीकरणों में बदलाव के संकेत

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल में सोमवार को हुए व्यापक कैबिनेट विस्तार ने राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत दिया है। मुख्यमंत्री Shubhendu Adhikari के नेतृत्व वाली सरकार में कुल 35 नए मंत्रियों को शामिल किया गया है, जिनमें 13 कैबिनेट मंत्री और 22 राज्य मंत्री शामिल हैं। इस बड़े फेरबदल के बाद प्रशासनिक ढांचे को अधिक सक्रिय और प्रभावी बनाने की कोशिश के रूप में इसे देखा जा रहा है। राजभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल द्वारा सभी नए मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई गई, जिसके बाद राज्य में नई राजनीतिक ऊर्जा का माहौल बन गया है।

    मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों में इस राजनीतिक घटनाक्रम की चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि इसे सरकार की रणनीतिक पुनर्संरचना के रूप में देखा जा रहा है। नए मंत्रियों की सूची में Arjun Singh, Tapas Roy, Shankar Ghosh, दीपक बर्मन, तापस रॉय और मनोज कुमार उरांव जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। इन सभी नेताओं को सरकार में अलग-अलग जिम्मेदारियों के लिए चुना गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि आने वाले समय में विभागीय कार्यों का पुनर्गठन किया जाएगा। इस विस्तार के जरिए सरकार ने अनुभव और युवा नेतृत्व के बीच संतुलन साधने की कोशिश की है, जिससे नीति निर्माण और क्रियान्वयन दोनों में तेजी आने की उम्मीद है।

    राज्य मंत्रियों में भी कई नए चेहरों को जगह दी गई है, जिनमें स्वतंत्र प्रभार वाले तीन मंत्रियों को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन मंत्रियों के माध्यम से सरकार प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल और तेज बनाने की योजना पर काम कर रही है। विभागीय स्तर पर निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाने के लिए यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि छोटे और प्रभावी मंत्रिमंडल के साथ-साथ व्यापक सहयोगी टीम से योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर तरीके से किया जा सकेगा। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को गति देने के लिए नए मंत्रियों को उनके-उनके क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाने की अपेक्षा की जा रही है।

    राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इस विस्तार का उद्देश्य केवल संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रशासनिक दक्षता को मजबूत करना भी है। सरकार पर बढ़ते काम के बोझ को देखते हुए विभागों का पुनर्वितरण जरूरी माना जा रहा था। अब नए मंत्रियों के शामिल होने से निर्णय प्रक्रिया में तेजी आने की संभावना है। साथ ही यह भी माना जा रहा है कि क्षेत्रीय संतुलन और सामाजिक प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखते हुए यह मंत्रिमंडल तैयार किया गया है, जिससे विभिन्न वर्गों और क्षेत्रों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। इससे सरकार को जमीनी स्तर पर अपनी नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद मिलेगी।

    राज्य में इस कैबिनेट विस्तार के बाद राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है क्योंकि जल्द ही विभागों का औपचारिक आवंटन किया जाएगा। इसके बाद सरकार की नई टीम अपने-अपने क्षेत्रों में कार्यभार संभालकर विकास योजनाओं को आगे बढ़ाएगी। इस बदलाव को आने वाले समय में सरकार की कार्यशैली और नीति दिशा के लिए अहम माना जा रहा है। प्रशासनिक स्तर पर बेहतर समन्वय और तेज निर्णय प्रक्रिया की उम्मीद के साथ यह विस्तार राज्य की राजनीतिक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।

  • कर्नाटक की नई सरकार में किन चेहरों को मिलेगा मंत्री पद, डीके शिवकुमार कैबिनेट को लेकर बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी

    कर्नाटक की नई सरकार में किन चेहरों को मिलेगा मंत्री पद, डीके शिवकुमार कैबिनेट को लेकर बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी


    नई दिल्ली ।
    कर्नाटक की राजनीति में नेतृत्व परिवर्तन के बाद नई सरकार के गठन को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री पद से Siddaramaiah के इस्तीफे के बाद अब राज्य में नई कैबिनेट को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। सत्ता की बागडोर संभालने की प्रक्रिया के बीच आज शाम चार बजे कांग्रेस विधायक दल की अहम बैठक बुलाई गई है, जिसमें नए नेतृत्व और मंत्रिमंडल के गठन को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाने की संभावना है।

    सूत्रों के अनुसार, इस नई सरकार का नेतृत्व DK Shivakumar के हाथों में होने की चर्चा तेज है। बताया जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व अनुभव, क्षेत्रीय संतुलन और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए नई कैबिनेट का स्वरूप तय करने की तैयारी में है। संभावित मंत्रियों की सूची भी सामने आई है, जिसमें कई वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ कुछ नए चेहरों को भी जगह दिए जाने की संभावना जताई जा रही है।

    नई कैबिनेट में जिन नामों की चर्चा सबसे अधिक है उनमें यतींद्र सिद्धारमैया, दिनेश गुंडू राव, लक्ष्मी हेब्बालकर, रामलिंगा रेड्डी, रिजवान अरशद और यू.टी. खादर जैसे अनुभवी नेताओं के नाम शामिल हैं। इसके अलावा प्रियंक खरगे जैसे युवा चेहरों को भी मंत्री पद की जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना है। पार्टी संगठन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले Priyank Kharge का नाम भी संभावित सूची में चर्चा में बना हुआ है।

    इसके साथ ही G. Parameshwara, एम.बी. पाटिल, कृष्णा बायरेगौड़ा, ईश्वर खंड्रे, के.जे. जॉर्ज, एच.सी. महादेवप्पा और संतोष लाड जैसे वरिष्ठ नेताओं को भी मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की संभावना है। पार्टी का उद्देश्य सभी क्षेत्रों और समुदायों को प्रतिनिधित्व देते हुए एक संतुलित कैबिनेट तैयार करना बताया जा रहा है।

    इधर, कांग्रेस संगठन के शीर्ष नेतृत्व में भी लगातार बैठकों का दौर जारी है। एआईसीसी महासचिव और कर्नाटक प्रभारी Randeep Singh Surjewala की मौजूदगी में होने वाली आज की बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है। बैठक में सभी विधायक, एमएलसी और सांसदों को शामिल होने के निर्देश दिए गए हैं ताकि नए नेतृत्व के चयन और मंत्रिमंडल विस्तार पर अंतिम सहमति बनाई जा सके।

    सूत्रों के मुताबिक, पार्टी नेतृत्व इस बात पर जोर दे रहा है कि नई कैबिनेट में अनुभव और युवा नेतृत्व का संतुलन बनाए रखा जाए। इसके साथ ही प्रशासनिक दक्षता और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को भी प्राथमिकता दी जा रही है। माना जा रहा है कि बैठक के बाद ही नए मंत्रिमंडल की तस्वीर लगभग साफ हो जाएगी और अगले चरण में शपथ ग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

    राजनीतिक हलकों में इस बदलाव को कर्नाटक की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है, जहां सत्ता संतुलन और संगठनात्मक रणनीति दोनों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। अब सबकी नजर आज शाम होने वाली विधायक दल की बैठक पर टिकी हुई है, जो नई सरकार की दिशा तय कर सकती है।

  • मध्यप्रदेश: राज्यमंत्रियों की भूमिका होगी और मजबूत, अहम विभागों की मिल सकती है अतिरिक्त जिम्मेदारी

    मध्यप्रदेश: राज्यमंत्रियों की भूमिका होगी और मजबूत, अहम विभागों की मिल सकती है अतिरिक्त जिम्मेदारी

    मध्यप्रदेश की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था में जल्द ही एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। हाल ही में हुई सत्ता और संगठन की समीक्षा बैठकों के बाद यह संकेत सामने आए हैं कि राज्य के राज्यमंत्रियों की भूमिका को और अधिक प्रभावशाली बनाया जा सकता है। इसके तहत उन्हें केवल सीमित कार्यों तक सीमित रखने के बजाय विभागीय स्तर पर अतिरिक्त अधिकार और जिम्मेदारियां देने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

    सूत्रों के अनुसार, सरकार का उद्देश्य प्रशासनिक कामकाज को अधिक गति देना और विभागों में निर्णय प्रक्रिया को तेज करना है। इसी को ध्यान में रखते हुए उन विभागों में जहां कैबिनेट मंत्रियों के साथ राज्यमंत्री कार्यरत हैं, वहां राज्यमंत्रियों को और अधिक स्वतंत्र जिम्मेदारियां देने की योजना पर चर्चा हुई है। माना जा रहा है कि इससे विभागीय कामकाज में न केवल तेजी आएगी बल्कि फाइलों के निपटारे में भी सुधार देखने को मिलेगा।

    बताया जा रहा है कि जिन राज्यमंत्रियों को अब तक सीमित कार्य या केवल समन्वय की भूमिका दी गई थी, उन्हें अब कुछ अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकार दिए जा सकते हैं। इनमें विभागीय निर्णयों में भागीदारी, योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी और कुछ स्तर तक स्वतंत्र निर्णय लेने की शक्ति शामिल हो सकती है। इससे राज्यमंत्रियों की भूमिका केवल औपचारिक न रहकर अधिक सक्रिय और प्रभावशाली हो जाएगी।

    सूत्र यह भी बताते हैं कि स्वास्थ्य, नगरीय प्रशासन और पंचायत जैसे महत्वपूर्ण विभागों में कार्यरत राज्यमंत्रियों को इस बदलाव का अधिक लाभ मिल सकता है। इन विभागों में काम का दायरा बड़ा होने के कारण प्रशासनिक दबाव भी अधिक रहता है, ऐसे में अतिरिक्त जिम्मेदारियां मिलने से कार्यों के बेहतर संचालन की उम्मीद की जा रही है।

    वर्तमान व्यवस्था में कई राज्यमंत्रियों के पास केवल सीमित कार्यों की जिम्मेदारी है, जबकि कुछ को केवल कर्मचारी स्तर के तबादलों या छोटे प्रशासनिक निर्णयों तक ही सीमित रखा गया है। नए प्रस्ताव के तहत इस संरचना में बदलाव कर उन्हें विभागीय कार्यप्रणाली में अधिक सक्रिय भूमिका देने की तैयारी है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम सरकार की उस रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिसके तहत प्रशासनिक ढांचे को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इससे जहां एक ओर विभागीय कामकाज में तेजी आएगी, वहीं दूसरी ओर मंत्रियों और राज्यमंत्रियों के बीच जिम्मेदारियों का बेहतर संतुलन भी स्थापित हो सकेगा।

    हालांकि अभी इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है, लेकिन चर्चा के स्तर पर इसे काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि इसे लागू किया जाता है तो मध्यप्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में यह एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है, जिससे सरकार की कार्यप्रणाली और अधिक गतिशील और परिणामोन्मुख बन सकती है।