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  • कैबिनेट मंत्रियों का सोशल मीडिया रिपोर्ट कार्ड जारी, डिजिटल एंगेजमेंट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बने नंबर-1

    कैबिनेट मंत्रियों का सोशल मीडिया रिपोर्ट कार्ड जारी, डिजिटल एंगेजमेंट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बने नंबर-1

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने देश के युवाओं और नई पीढ़ी के साथ अपना संपर्क तथा संचार मजबूत करने के लिए डिजिटल माध्यमों पर जोर देना तेज कर दिया है। इसी रणनीति के तहत केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में सभी मंत्रियों का सोशल मीडिया परफॉर्मेंस रिपोर्ट कार्ड प्रस्तुत किया गया। लगभग साढ़े तीन महीने के कामकाज और डिजिटल गतिविधियों के आधार पर तैयार की गई इस रैंकिंग सूची में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले स्थान पर रहे हैं।

    मंत्रियों का यह विशेष रिपोर्ट कार्ड 1 मई से 15 अगस्त 2026 तक की अवधि के दौरान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर किए गए कार्यों के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें मुख्य रूप से इंस्टाग्राम, एक्स, लिंक्डइन और फेसबुक जैसी प्रमुख नेटवर्किंग साइट्स पर मंत्रियों की सक्रियता का गहन विश्लेषण किया गया। रैंकिंग तय करने के लिए दैनिक पोस्ट की संख्या, यूजर्स एंगेजमेंट, लाइक्स और फॉलोअर्स में बढ़ोतरी जैसे महत्वपूर्ण मानकों को आधार बनाया गया।

    रिपोर्ट में केवल सत्ता पक्ष के मंत्रियों का ही नहीं, बल्कि देश के प्रमुख राजनीतिक चेहरों का भी तुलनात्मक अध्ययन किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, नितिन गडकरी और कंगना रनौत जैसे नेताओं ने उच्च रैंकिंग हासिल की। वहीं विपक्षी नेताओं में राहुल गांधी, असदुद्दीन ओवैसी और अरविंद केजरीवाल भी शीर्ष डिजिटल प्रभाव वाले नेताओं में शामिल रहे।

    हाल के समय में राजधानी दिल्ली में हुए छात्र आंदोलनों के बाद सरकार ने अपनी डिजिटल संचार नीति में व्यापक बदलाव किया है। अब पारंपरिक और औपचारिक राजनीतिक बयानों के स्थान पर लघु रील्स, अनौपचारिक संवाद और क्रिएटर फॉर्मेट वाले वीडियो कंटेंट पर अधिक ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य युवाओं की पसंद के अनुसार सरल और प्रभावकारी भाषा में अपनी बात पहुंचाना है।

    इसी कड़ी में विभिन्न मंत्रालयों को नए और लोकप्रिय डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अपनी उपस्थिति बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। डिजिटल आउटरीच कार्यक्रम के तहत विदेश मंत्रालय ने भी हाल ही में स्नैपचैट जैसे प्लेटफॉर्म पर अपना आधिकारिक अकाउंट शुरू किया है। इसके अलावा कैबिनेट में यह निर्णय भी लिया गया है कि केंद्रीय मंत्री सीधे संवाद के लिए देश भर के विभिन्न विश्वविद्यालयों का दौरा करेंगे और शिक्षा एवं परीक्षा प्रणाली पर छात्रों से चर्चा करेंगे।

    मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों के विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों में मंत्रियों के इस प्रत्यक्ष और डिजिटल संवाद कार्यक्रम को लागू करने की योजना है। प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस नई रणनीति से सरकार और युवा वर्ग के बीच सीधे संवाद का एक पारदर्शी माध्यम स्थापित होगा, जिससे सरकारी योजनाओं और नीतियों की जानकारी युवाओं तक तेजी से पहुंचेगी।

  • एमपी में यूसीसी पर कैबिनेट की मुहर के बाद विधानसभा में आएगा विधेयक, मंत्रियों के सामने होगा प्रेजेंटेशन

    एमपी में यूसीसी पर कैबिनेट की मुहर के बाद विधानसभा में आएगा विधेयक, मंत्रियों के सामने होगा प्रेजेंटेशन


    भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक को मानसून सत्र में विधानसभा में पेश करने की तैयारी में है। इससे पहले 19 जुलाई को भोपाल के निकट स्थित जगदीशपुर में आयोजित होने वाली कैबिनेट बैठक में विधेयक के प्रमुख प्रावधानों का प्रस्तुतीकरण किया जाएगा, ताकि सभी मंत्री इसके विभिन्न पहलुओं से पूरी तरह अवगत हो सकें।

    सरकार का उद्देश्य है कि विधानसभा में विधेयक पेश होने से पहले मंत्रियों की सभी जिज्ञासाओं का समाधान हो जाए और वे सदन में प्रस्तावित कानून के प्रावधानों पर तथ्यात्मक रूप से अपना पक्ष रख सकें।

    कांग्रेस के विरोध की तैयारी
    सूत्रों के अनुसार, विधानसभा के मानसून सत्र में कांग्रेस यूसीसी विधेयक का विरोध कर सकती है। इसे देखते हुए सरकार पहले ही कैबिनेट के समक्ष इसके प्रावधानों की विस्तृत जानकारी साझा करेगी, ताकि चर्चा के दौरान मंत्री प्रभावी ढंग से सरकार का पक्ष रख सकें।

    आदिवासी समुदाय रहेगा दायरे से बाहर
    प्रस्तावित यूसीसी विधेयक में आदिवासी, घुमंतु, अर्द्धघुमंतु और मतांतरित आदिवासी समुदायों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। इसके अलावा लिव-इन रिलेशनशिप के लिए अनिवार्य पंजीयन, उत्तराधिकार से जुड़े प्रावधान और विवाह एवं विवाह विच्छेद (तलाक) के मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान नियम लागू करने का प्रस्ताव शामिल किया गया है।

    साढ़े नौ लाख सुझावों के आधार पर तैयार हुआ मसौदा
    यूसीसी का मसौदा तैयार करने के दौरान समिति को करीब साढ़े नौ लाख सुझाव प्राप्त हुए थे। इन्हीं सुझावों और विभिन्न पक्षों पर विचार-विमर्श के बाद विधेयक को अंतिम रूप दिया गया है।

    मानसून सत्र में आएंगे 14 विधेयक
    20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में सरकार कुल 14 विधेयक प्रस्तुत करने की तैयारी में है। इनमें केंद्र सरकार द्वारा संशोधित श्रम कानूनों को प्रदेश में लागू करने संबंधी विधेयक, कोचिंग संस्थानों के विनियमन का कानून, फायर सेफ्टी, कॉलोनाइजर एक्ट, माल एवं सेवा कर (जीएसटी), पंचायतराज, नागरिक सुरक्षा संहिता तथा प्रथम अनुपूरक बजट से संबंधित विनियोग विधेयक समेत कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव शामिल हैं।

  • शुभेंदु अधिकारी सरकार का बड़ा कदम: मंत्रिमंडल विस्तार से राजनीतिक समीकरणों में बदलाव के संकेत

    शुभेंदु अधिकारी सरकार का बड़ा कदम: मंत्रिमंडल विस्तार से राजनीतिक समीकरणों में बदलाव के संकेत

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल में सोमवार को हुए व्यापक कैबिनेट विस्तार ने राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत दिया है। मुख्यमंत्री Shubhendu Adhikari के नेतृत्व वाली सरकार में कुल 35 नए मंत्रियों को शामिल किया गया है, जिनमें 13 कैबिनेट मंत्री और 22 राज्य मंत्री शामिल हैं। इस बड़े फेरबदल के बाद प्रशासनिक ढांचे को अधिक सक्रिय और प्रभावी बनाने की कोशिश के रूप में इसे देखा जा रहा है। राजभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल द्वारा सभी नए मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई गई, जिसके बाद राज्य में नई राजनीतिक ऊर्जा का माहौल बन गया है।

    मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों में इस राजनीतिक घटनाक्रम की चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि इसे सरकार की रणनीतिक पुनर्संरचना के रूप में देखा जा रहा है। नए मंत्रियों की सूची में Arjun Singh, Tapas Roy, Shankar Ghosh, दीपक बर्मन, तापस रॉय और मनोज कुमार उरांव जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। इन सभी नेताओं को सरकार में अलग-अलग जिम्मेदारियों के लिए चुना गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि आने वाले समय में विभागीय कार्यों का पुनर्गठन किया जाएगा। इस विस्तार के जरिए सरकार ने अनुभव और युवा नेतृत्व के बीच संतुलन साधने की कोशिश की है, जिससे नीति निर्माण और क्रियान्वयन दोनों में तेजी आने की उम्मीद है।

    राज्य मंत्रियों में भी कई नए चेहरों को जगह दी गई है, जिनमें स्वतंत्र प्रभार वाले तीन मंत्रियों को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन मंत्रियों के माध्यम से सरकार प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल और तेज बनाने की योजना पर काम कर रही है। विभागीय स्तर पर निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाने के लिए यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि छोटे और प्रभावी मंत्रिमंडल के साथ-साथ व्यापक सहयोगी टीम से योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर तरीके से किया जा सकेगा। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को गति देने के लिए नए मंत्रियों को उनके-उनके क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाने की अपेक्षा की जा रही है।

    राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इस विस्तार का उद्देश्य केवल संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रशासनिक दक्षता को मजबूत करना भी है। सरकार पर बढ़ते काम के बोझ को देखते हुए विभागों का पुनर्वितरण जरूरी माना जा रहा था। अब नए मंत्रियों के शामिल होने से निर्णय प्रक्रिया में तेजी आने की संभावना है। साथ ही यह भी माना जा रहा है कि क्षेत्रीय संतुलन और सामाजिक प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखते हुए यह मंत्रिमंडल तैयार किया गया है, जिससे विभिन्न वर्गों और क्षेत्रों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। इससे सरकार को जमीनी स्तर पर अपनी नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद मिलेगी।

    राज्य में इस कैबिनेट विस्तार के बाद राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है क्योंकि जल्द ही विभागों का औपचारिक आवंटन किया जाएगा। इसके बाद सरकार की नई टीम अपने-अपने क्षेत्रों में कार्यभार संभालकर विकास योजनाओं को आगे बढ़ाएगी। इस बदलाव को आने वाले समय में सरकार की कार्यशैली और नीति दिशा के लिए अहम माना जा रहा है। प्रशासनिक स्तर पर बेहतर समन्वय और तेज निर्णय प्रक्रिया की उम्मीद के साथ यह विस्तार राज्य की राजनीतिक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।

  • कर्नाटक की नई सरकार में किन चेहरों को मिलेगा मंत्री पद, डीके शिवकुमार कैबिनेट को लेकर बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी

    कर्नाटक की नई सरकार में किन चेहरों को मिलेगा मंत्री पद, डीके शिवकुमार कैबिनेट को लेकर बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी


    नई दिल्ली ।
    कर्नाटक की राजनीति में नेतृत्व परिवर्तन के बाद नई सरकार के गठन को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री पद से Siddaramaiah के इस्तीफे के बाद अब राज्य में नई कैबिनेट को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। सत्ता की बागडोर संभालने की प्रक्रिया के बीच आज शाम चार बजे कांग्रेस विधायक दल की अहम बैठक बुलाई गई है, जिसमें नए नेतृत्व और मंत्रिमंडल के गठन को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाने की संभावना है।

    सूत्रों के अनुसार, इस नई सरकार का नेतृत्व DK Shivakumar के हाथों में होने की चर्चा तेज है। बताया जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व अनुभव, क्षेत्रीय संतुलन और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए नई कैबिनेट का स्वरूप तय करने की तैयारी में है। संभावित मंत्रियों की सूची भी सामने आई है, जिसमें कई वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ कुछ नए चेहरों को भी जगह दिए जाने की संभावना जताई जा रही है।

    नई कैबिनेट में जिन नामों की चर्चा सबसे अधिक है उनमें यतींद्र सिद्धारमैया, दिनेश गुंडू राव, लक्ष्मी हेब्बालकर, रामलिंगा रेड्डी, रिजवान अरशद और यू.टी. खादर जैसे अनुभवी नेताओं के नाम शामिल हैं। इसके अलावा प्रियंक खरगे जैसे युवा चेहरों को भी मंत्री पद की जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना है। पार्टी संगठन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले Priyank Kharge का नाम भी संभावित सूची में चर्चा में बना हुआ है।

    इसके साथ ही G. Parameshwara, एम.बी. पाटिल, कृष्णा बायरेगौड़ा, ईश्वर खंड्रे, के.जे. जॉर्ज, एच.सी. महादेवप्पा और संतोष लाड जैसे वरिष्ठ नेताओं को भी मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की संभावना है। पार्टी का उद्देश्य सभी क्षेत्रों और समुदायों को प्रतिनिधित्व देते हुए एक संतुलित कैबिनेट तैयार करना बताया जा रहा है।

    इधर, कांग्रेस संगठन के शीर्ष नेतृत्व में भी लगातार बैठकों का दौर जारी है। एआईसीसी महासचिव और कर्नाटक प्रभारी Randeep Singh Surjewala की मौजूदगी में होने वाली आज की बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है। बैठक में सभी विधायक, एमएलसी और सांसदों को शामिल होने के निर्देश दिए गए हैं ताकि नए नेतृत्व के चयन और मंत्रिमंडल विस्तार पर अंतिम सहमति बनाई जा सके।

    सूत्रों के मुताबिक, पार्टी नेतृत्व इस बात पर जोर दे रहा है कि नई कैबिनेट में अनुभव और युवा नेतृत्व का संतुलन बनाए रखा जाए। इसके साथ ही प्रशासनिक दक्षता और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को भी प्राथमिकता दी जा रही है। माना जा रहा है कि बैठक के बाद ही नए मंत्रिमंडल की तस्वीर लगभग साफ हो जाएगी और अगले चरण में शपथ ग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

    राजनीतिक हलकों में इस बदलाव को कर्नाटक की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है, जहां सत्ता संतुलन और संगठनात्मक रणनीति दोनों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। अब सबकी नजर आज शाम होने वाली विधायक दल की बैठक पर टिकी हुई है, जो नई सरकार की दिशा तय कर सकती है।

  • मध्यप्रदेश: राज्यमंत्रियों की भूमिका होगी और मजबूत, अहम विभागों की मिल सकती है अतिरिक्त जिम्मेदारी

    मध्यप्रदेश: राज्यमंत्रियों की भूमिका होगी और मजबूत, अहम विभागों की मिल सकती है अतिरिक्त जिम्मेदारी

    मध्यप्रदेश की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था में जल्द ही एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। हाल ही में हुई सत्ता और संगठन की समीक्षा बैठकों के बाद यह संकेत सामने आए हैं कि राज्य के राज्यमंत्रियों की भूमिका को और अधिक प्रभावशाली बनाया जा सकता है। इसके तहत उन्हें केवल सीमित कार्यों तक सीमित रखने के बजाय विभागीय स्तर पर अतिरिक्त अधिकार और जिम्मेदारियां देने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

    सूत्रों के अनुसार, सरकार का उद्देश्य प्रशासनिक कामकाज को अधिक गति देना और विभागों में निर्णय प्रक्रिया को तेज करना है। इसी को ध्यान में रखते हुए उन विभागों में जहां कैबिनेट मंत्रियों के साथ राज्यमंत्री कार्यरत हैं, वहां राज्यमंत्रियों को और अधिक स्वतंत्र जिम्मेदारियां देने की योजना पर चर्चा हुई है। माना जा रहा है कि इससे विभागीय कामकाज में न केवल तेजी आएगी बल्कि फाइलों के निपटारे में भी सुधार देखने को मिलेगा।

    बताया जा रहा है कि जिन राज्यमंत्रियों को अब तक सीमित कार्य या केवल समन्वय की भूमिका दी गई थी, उन्हें अब कुछ अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकार दिए जा सकते हैं। इनमें विभागीय निर्णयों में भागीदारी, योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी और कुछ स्तर तक स्वतंत्र निर्णय लेने की शक्ति शामिल हो सकती है। इससे राज्यमंत्रियों की भूमिका केवल औपचारिक न रहकर अधिक सक्रिय और प्रभावशाली हो जाएगी।

    सूत्र यह भी बताते हैं कि स्वास्थ्य, नगरीय प्रशासन और पंचायत जैसे महत्वपूर्ण विभागों में कार्यरत राज्यमंत्रियों को इस बदलाव का अधिक लाभ मिल सकता है। इन विभागों में काम का दायरा बड़ा होने के कारण प्रशासनिक दबाव भी अधिक रहता है, ऐसे में अतिरिक्त जिम्मेदारियां मिलने से कार्यों के बेहतर संचालन की उम्मीद की जा रही है।

    वर्तमान व्यवस्था में कई राज्यमंत्रियों के पास केवल सीमित कार्यों की जिम्मेदारी है, जबकि कुछ को केवल कर्मचारी स्तर के तबादलों या छोटे प्रशासनिक निर्णयों तक ही सीमित रखा गया है। नए प्रस्ताव के तहत इस संरचना में बदलाव कर उन्हें विभागीय कार्यप्रणाली में अधिक सक्रिय भूमिका देने की तैयारी है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम सरकार की उस रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिसके तहत प्रशासनिक ढांचे को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इससे जहां एक ओर विभागीय कामकाज में तेजी आएगी, वहीं दूसरी ओर मंत्रियों और राज्यमंत्रियों के बीच जिम्मेदारियों का बेहतर संतुलन भी स्थापित हो सकेगा।

    हालांकि अभी इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है, लेकिन चर्चा के स्तर पर इसे काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि इसे लागू किया जाता है तो मध्यप्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में यह एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है, जिससे सरकार की कार्यप्रणाली और अधिक गतिशील और परिणामोन्मुख बन सकती है।

  • कैबिनेट में विस्तार की अटकलें तेज… PM मोदी तैयार करा रहे हैं मंत्रियों के कामकाज का ब्योरा!

    कैबिनेट में विस्तार की अटकलें तेज… PM मोदी तैयार करा रहे हैं मंत्रियों के कामकाज का ब्योरा!


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के नेतृत्व वाली सरकार के तीसरे कार्यकाल के दो साल अगले महीने पूरे होने जा रहे हैं। इसके बाद संभावित मंत्रिपरिषद विस्तार (Council of Ministers expansion) को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। इसकी एक वजह भाजपा (BJP) के नए संगठन की टीम का गठन होना भी शामिल है। कुछ नेताओं की संगठन और सरकार में अदला-बदली भी हो सकती है। इस बीच, मंत्रियों के कामकाज को लेकर भी ब्योरा तैयार किया जा रहा है और उनके संसदीय क्षेत्र एवं राज्य से उनके बारे में जानकारी ली जा रही है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में अभी तक कोई विस्तार नहीं हुआ है। पिछले कार्यकाल में भी सरकार बनने के लगभग दो साल बाद ही पहला विस्तार हुआ था। ऐसे में, अब विस्तार को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। सूत्रों के अनुसार, भाजपा संगठन केंद्र सरकार में शामिल अपने मंत्रियों के कामकाज को लेकर विभिन्न स्तरों से फीडबैक ले रहा है। प्रदेश संगठन एवं संसदीय क्षेत्र से भी आंकड़े जुटाए जा रहे हैं।

    मंत्रियों के क्षेत्र में दौरे, केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन, संसदीय क्षेत्र में प्रवास, संगठन की बैठकों में हिस्सेदारी, कार्यकर्ताओं से संपर्क आदि की जानकारी ली जा रही है। सूत्रों का कहना है, इस कवायद के पीछे संभावित विस्तार है। माना जा रहा है कि संभावित विस्तार में कई बड़े बदलाव हो सकते हैं। पार्टी इस समय नया,युवा संगठन को तरजीह दे रही है।


    अनुभवी नेताओं को संगठन में लाने की संभावना

    संगठन की टीम और मंत्रिमंडल विस्तार दोनों के कई पहलू एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। नए व युवा अध्यक्ष के सहयोग के लिए कुछ अनुभवी नेताओं को संगठन में लाए जाने की भी संभावना है। पश्चिम बंगाल में जीत के बाद सरकार में अब इस राज्य का प्रतिनिधित्व भी बढ़ेगा और आने वाले चुनावों के मद्देनजर संबंधित राज्यों को भी जगह मिल सकती है। सबसे ज्यादा संभावना चेहरों को बदलने की है। मोदी सरकार में अभी 72 मंत्री हैं और यह संख्या 81 तक बढ़ाई जा सकती है।

  • पश्चिम बंगाल में नई सरकार का कामकाज शुरू…. CM शुभेंदु ने मंत्रियों को बांटे विभाग

    पश्चिम बंगाल में नई सरकार का कामकाज शुरू…. CM शुभेंदु ने मंत्रियों को बांटे विभाग


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) में प्रचंड जीत के बाद नई बीजेपी सरकार (New BJP government) ने राज्य में प्रशासनिक कामकाज को तेजी से पटरी पर लाने की कोशिश शुरू कर दी है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (Chief Minister Shubhendu Adhikari) ने भी सोमवार को मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा कर दिया. गृह, वित्त और कर्मचारियों ​अधिकारियों की ट्रांसफर पोस्टिंग से जुड़े कार्मिक जैसे महत्वपूर्ण विभाग मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अपने पास रखे हैं।


    दिलीप घोष:

    बीजेपी के वरिष्ठ नेता और खड़गपुर सदर से विधायक दिलीप घोष को ग्रामीण विकास, पंचायती राज और पशु संसाधन विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है. यह विभाग राज्य में ग्रामीण प्रशासन और जमीनी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है।


    अशोक कीर्तनिया:

    बनगांव उत्तर के विधायक अशोक कीर्तनिया को खाद्य विभाग का प्रभार दिया गया है. पश्चिम बंगाल की राजनीति में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का बड़ा महत्व रहा है, ऐसे में यह विभाग भी काफी अहम माना जा रहा है. यह विभाग राज्य भर में पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम के जरिए खाद्य सामग्री के वितरण और कल्याणकारी योजनाओं के कार्यान्वयन की देखरेख करेगा।


    खुदिराम टुडू:

    रानीबांध विधायक खुदिराम टुडू को पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग सौंपा गया है. इसे आदिवासी और पिछड़े वर्गों के बीच बीजेपी की पकड़ मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. यह मंत्रालय पूरे बंगाल में पिछड़े समुदायों के लिए कल्याणकारी योजनाओं, छात्रवृत्तियों और सामाजिक विकास कार्यक्रमों पर ध्यान केंद्रित करता है.


    अग्निमित्रा पॉल:

    आसनसोल उत्तर की विधायक और पार्टी में प्रमुख महिला चेहरा अग्निमित्रा पॉल को महिला एवं बाल विकास विभाग और नगर विकास विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है. वह शुभेंदु कैबिनेट की इकलौती महिला मंत्री हैं. महिलाओं के लिए कल्याणकारी कार्यक्रमों के संचालन और महिला सुरक्षा के पहलों को बढ़ावा देने के अलावा शहरों के इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार के लिहाज से अग्निमित्रा को मिले दोनों विभाग भाजपा सरकार के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं.


    निशीथ प्रमाणिक:

    माथाभांगा विधायक निशीथ प्रमाणिक को खेल और युवा कल्याण के साथ-साथ उत्तर बंगाल के विकास का प्रभार दिया गया है. यह पोर्टफोलियो महत्वपूर्ण है क्योंकि हालिया चुनाव में भी भाजपा ने उत्तरी बंगाल में अपना मजबूत आधार बनाए रखा और उसका लक्ष्य इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति को और मजबूत करना है.


    मंत्रिमंडल के जरिए साधा समीकरण

    नई कैबिनेट में शामिल नेताओं का चयन राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखकर किया गया है. दिलीप घोष लंबे समय तक पश्चिम बंगाल बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रहे और राज्य में पार्टी का संगठन खड़ा करने में उनकी अहम भूमिका रही.

    अग्निमित्रा पॉल को कैबिनेट में जगह देकर बीजेपी महिला वोटरों को साधने की कोशिश कर रही है, जबकि खुदीराम टुडू और अशोक कीर्तनिया के जरिए आदिवासी और मतुआ समुदाय तक पहुंच मजबूत करने की रणनीति दिखाई दे रही है. वहीं निशीथ प्रमाणिक के जरिए बीजेपी ने मंत्रिमंडल में युवा प्रतिनिधित्व को जगह दी है.


    चुनाव में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत

    बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 294 में से 207 सीटें जीतकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की, जबकि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस 80 सीटों पर सिमट गई. इस प्रचंड बहुमत ने नई सरकार को बिना किसी गठबंधन दबाव के अपनी नीतियां लागू करने की ताकत दी है.


    पहली कैबिनेट बैठक में 5 बड़े फैसले

    नई सरकार ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में हुई पहली कैबिनेट बैठक में ही कई केंद्रीय योजनाओं को राज्य में लागू करने का ऐलान किया. इनमें आयुष्मान भारत, पीएम जन आरोग्य योजना, पीएम श्री, विश्वकर्मा योजना, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और उज्ज्वला योजना शामिल हैं.

    शुभेंदु सरकार ने बंगाल में भारतीय न्याय संहिता (BNS) लागू करने, सरकारी नौकरियों की अधिकतम आयु सीमा में 5 साल की बढ़ोतरी और आईएएस अधिकारियों को केंद्र सरकार के ट्रेनिंग प्रोग्राम में शामिल करने जैसे प्रशासनिक सुधारों से जुड़े फैसले लिए हैं.


    सुशासन और पारदर्शिता पर रहेगा जोर

    कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि उनकी सरकार ‘सुशासन और पारदर्शिता’ को प्राथमिकता देगी. उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि पिछली सरकार के दौरान शुरू की गईं कल्याणकारी योजनाएं जारी रहेंगी, लेकिन लाभार्थियों का सत्यापन सख्ती से किया जाएगा ताकि किसी तरह की गड़बड़ी न हो. मुख्यमंत्री ने बांग्लादेश सीमा से लगे जिलों में बीएसएफ को फेंसिंग के लिए लैंड ट्रांसफर की प्रक्रिया को भी 45 दिनों के भीतर पूरा करने का निर्देश अधिकारियों को दिया।

  • केन्द्र ने ईरान संकट से उपजी स्थिति से निपटने के लिए गठित किया मंत्रियों का अनौपचारिक समूह

    केन्द्र ने ईरान संकट से उपजी स्थिति से निपटने के लिए गठित किया मंत्रियों का अनौपचारिक समूह


    नई दिल्ली।
    पश्चिम एशिया संघर्ष (West Asia conflict) के कारण उत्पन्न मुद्दों पर गौर करने के लिए केंद्र सरकार (Central Government) ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Defence Minister Rajnath Singh) के नेतृत्व में मंत्रियों का एक ‘अनौपचारिक समूह’ (IGOM) गठित किया है। सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि केंद्रीय मंत्री अमित शाह, निर्मला सीतारमण और हरदीप सिंह पुरी मंत्रियों के अनौपचारिक समूह के सदस्यों में शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, पश्चिम एशिया संघर्ष के प्रभाव से उत्पन्न होने वाले मुद्दों को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है।

    अमेरिका-इजरायल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर हमले के बाद तेहरान ने खाड़ी क्षेत्र में जवाबी हमले किए। इसके बाद पश्चिम एशिया में संघर्ष तेज हो गया है। इस संघर्ष ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है, जिसमें तेल और गैस की आपूर्ति बाधित हुई हैं और कीमतें बढ़ी हैं। इसका असर देश भर के नागरिकों के जीवन पर पड़ा है।


    पीएम ने मुख्यमंत्रियों संग की बैठक

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने शुक्रवार की शाम चुनावी राज्यों को छोड़कर बाकी सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक कर पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के मद्देनजर तैयारियों और योजनाओं की समीक्षा की। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, डिजिटल माध्यम से आयोजित इस बैठक का उद्देश्य ‘टीम इंडिया’ की भावना के तहत समन्वय सुनिश्चित करना था। प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद पहली बार मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की है।


    देश में तेल और गैस के पर्याप्त भंडार

    23 मार्च को लोकसभा में दिए गए बयान में प्रधानमंत्री ने कहा था कि पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण उत्पन्न वैश्विक हालात लंबे समय तक बने रह सकते हैं और देश को एकजुट व तैयार रहने की जरूरत है, जैसे कोविड-19 महामारी के दौरान रहा था। वहीं, 24 मार्च को मोदी ने संघर्ष के संभावित दीर्घकालिक प्रभावों से निपटने के लिए सात अधिकार प्राप्त समूहों के गठन की घोषणा की और राज्यों से संकट को टालने के लिए एकजुट दृष्टिकोण के तहत केंद्र के साथ काम करने का आग्रह किया। इससे पहले बुधवार को सरकार ने पश्चिम एशिया संकट पर चर्चा करने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई थी और देशवासियों को भरोसा दिया था कि देश में तेल और गैस के पर्याप्त भंडार हैं और घबराने की जरूरत नहीं है।