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  • पोस्ट ऑफिस की इस स्कीम में 9 लाख रुपये लगाने पर हर महीने 5,550 रुपये मिलेंगे, जानिए पूरा हिसाब और नियम

    पोस्ट ऑफिस की इस स्कीम में 9 लाख रुपये लगाने पर हर महीने 5,550 रुपये मिलेंगे, जानिए पूरा हिसाब और नियम

    नई दिल्ली ।बचत की रकम को सुरक्षित जगह निवेश कर नियमित आय हासिल करने की योजना बना रहे लोगों के लिए पोस्ट ऑफिस की मंथली इनकम स्कीम एक विकल्प है। इस योजना में एकमुश्त राशि जमा करने के बाद निवेश पर मिलने वाले ब्याज का भुगतान हर महीने किया जा सकता है। बाजार से जुड़े निवेश विकल्पों की तुलना में यह योजना उन लोगों के लिए उपयोगी मानी जाती है, जो नियमित आय के साथ अपेक्षाकृत स्थिर निवेश व्यवस्था चाहते हैं।

    पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम यानी MIS छोटी बचत योजनाओं के तहत संचालित होती है। इन योजनाओं में निवेश को सरकारी समर्थन प्राप्त होता है। यही वजह है कि जोखिम को लेकर सतर्क रहने वाले निवेशकों, खासकर नियमित आय चाहने वाले लोगों के बीच ऐसी योजनाओं में रुचि बनी रहती है। हालांकि किसी भी निवेश से पहले लागू नियमों और ब्याज दरों की जानकारी देखना जरूरी है।

    इस योजना में फिलहाल 7.4 फीसदी सालाना ब्याज दर का उल्लेख किया गया है। इसमें मिलने वाला ब्याज मासिक आधार पर लिया जा सकता है। निवेशक को शुरुआत में कम से कम 1,000 रुपये से खाता खोलने की सुविधा मिलती है। योजना में व्यक्तिगत खाते के साथ संयुक्त खाता खोलने का विकल्प भी उपलब्ध है।

    मंथली इनकम स्कीम में निवेश की अधिकतम सीमा भी निर्धारित है। व्यक्तिगत यानी सिंगल अकाउंट में निवेशक अधिकतम 9 लाख रुपये तक जमा कर सकता है। वहीं संयुक्त खाते में अधिकतम 15 लाख रुपये तक निवेश किया जा सकता है। निवेश की राशि के आधार पर हर महीने मिलने वाली ब्याज आय अलग-अलग होगी।

    अगर कोई निवेशक सिंगल अकाउंट में अधिकतम 9 लाख रुपये जमा करता है और 7.4 फीसदी की ब्याज दर लागू रहती है, तो सालाना ब्याज के आधार पर उसकी मासिक आय करीब 5,550 रुपये बनती है। इस तरह पांच साल की अवधि के दौरान ब्याज से नियमित मासिक भुगतान प्राप्त किया जा सकता है। वहीं संयुक्त खाते में 15 लाख रुपये निवेश करने पर इसी दर से मासिक ब्याज करीब 9,250 रुपये बैठता है।

    इस गणना में यह समझना जरूरी है कि 5,550 रुपये या 9,250 रुपये की रकम मूल निवेश पर मिलने वाला मासिक ब्याज है। मूलधन और ब्याज की वास्तविक प्राप्ति योजना के नियमों और चुने गए भुगतान विकल्प के अनुसार होगी। निवेशक अपनी जरूरत के मुताबिक ब्याज की राशि प्राप्त करने का तरीका चुन सकता है।

    MIS की परिपक्वता अवधि पांच साल निर्धारित है। इसका मतलब है कि योजना को तय अवधि तक जारी रखने पर निवेशक को निर्धारित नियमों के अनुसार निवेशित राशि से संबंधित लाभ मिलता है। यह व्यवस्था खासतौर पर उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है, जिन्हें एकमुश्त बचत से नियमित नकदी प्रवाह की जरूरत होती है।

    हालांकि, निवेश करने से पहले समय से पहले खाता बंद कराने से जुड़े नियमों को समझना भी जरूरी है। उपलब्ध नियमों के अनुसार, खाता खुलने के एक से तीन साल के भीतर बंद कराने पर मूलधन का 2 फीसदी हिस्सा काटा जा सकता है। वहीं तीन साल पूरे होने के बाद और पांच साल से पहले खाता बंद कराने पर 1 फीसदी की कटौती का प्रावधान बताया गया है।

    योजना में ब्याज से मिलने वाली आय को मासिक, तिमाही, छमाही या सालाना आधार पर लेने का विकल्प भी बताया गया है। ऐसे में निवेशक अपनी वित्तीय जरूरत के अनुसार भुगतान का तरीका चुन सकता है। हालांकि निवेश से पहले मौजूदा ब्याज दर, निवेश सीमा, समयपूर्व निकासी और अन्य नियमों की ताजा जानकारी की पुष्टि करना जरूरी है।