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  • आरक्षण पर वायरल बयान को शिल्पा शेट्टी ने बताया पूरी तरह फर्जी, लोगों से अफवाहों से बचने की अपील

    आरक्षण पर वायरल बयान को शिल्पा शेट्टी ने बताया पूरी तरह फर्जी, लोगों से अफवाहों से बचने की अपील

    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी ने सोशल मीडिया पर उनके नाम से वायरल हो रहे आरक्षण संबंधी कथित बयान का स्पष्ट रूप से खंडन किया है। अभिनेत्री ने कहा कि उनके नाम से प्रसारित किया जा रहा संदेश पूरी तरह मनगढ़ंत और भ्रामक है। उन्होंने लोगों से अपील की कि बिना सत्यापन के ऐसी किसी भी पोस्ट पर विश्वास न करें और अफवाहों को आगे बढ़ाने से बचें।

    हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट तेजी से साझा की जा रही थी, जिसमें दावा किया गया कि शिल्पा शेट्टी ने देश की आरक्षण व्यवस्था को लेकर विवादित टिप्पणी की है। पोस्ट में उनके नाम से ऐसे कथन प्रसारित किए गए, जिनमें जाति आधारित आरक्षण को समाप्त करने का समर्थन करने का दावा किया गया। यह पोस्ट वायरल होने के बाद कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर चर्चा का विषय बन गई।

    मामले ने तूल पकड़ने के बाद शिल्पा शेट्टी ने स्वयं सामने आकर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आरक्षण से जुड़े फर्जी बयानों को उनके नाम से जोड़कर प्रसारित किया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने इस पूरे दावे को पूरी तरह झूठा, मनगढ़ंत और दुर्भावनापूर्ण बताते हुए कहा कि इसका उनकी वास्तविक सोच या किसी भी आधिकारिक बयान से कोई संबंध नहीं है।

    अभिनेत्री ने अपने संदेश में लोगों से विशेष रूप से आग्रह किया कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही अपुष्ट और भ्रामक जानकारियों के झांसे में न आएं। उन्होंने कहा कि किसी भी सार्वजनिक व्यक्ति के नाम से साझा किए जा रहे बयान को सच मानने से पहले उसकी पुष्टि करना जरूरी है। उनका कहना था कि गलत जानकारी न केवल भ्रम पैदा करती है, बल्कि संबंधित व्यक्ति की छवि को भी प्रभावित कर सकती है।

    वायरल पोस्ट में यह दावा किया गया था कि शिल्पा शेट्टी ने आरक्षण व्यवस्था को लेकर अपनी राय व्यक्त करते हुए उसे समाप्त किए जाने का समर्थन किया है। हालांकि अभिनेत्री ने साफ शब्दों में कहा कि उन्होंने ऐसा कोई बयान कभी नहीं दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर प्रसारित किया जा रहा संदेश पूरी तरह फर्जी है और उसे जानबूझकर उनके नाम से जोड़ा गया है।

    सोशल मीडिया पर फर्जी पोस्ट और गलत जानकारी फैलाने की घटनाएं पिछले कुछ समय में लगातार बढ़ी हैं। कई बार सार्वजनिक हस्तियों के नाम और तस्वीरों का इस्तेमाल कर ऐसे संदेश प्रसारित किए जाते हैं, जिनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं होता। ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्ति को सामने आकर सफाई देनी पड़ती है ताकि गलत जानकारी को रोका जा सके और लोगों के बीच सही तथ्य पहुंच सकें।

    शिल्पा शेट्टी के इस स्पष्टीकरण के बाद यह साफ हो गया है कि उनके नाम से प्रसारित किया गया कथित आरक्षण संबंधी बयान वास्तविक नहीं है। उन्होंने लोगों से जिम्मेदारी के साथ सोशल मीडिया का उपयोग करने और किसी भी विवादित दावे को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करने की अपील की है। उनका यह संदेश डिजिटल माध्यमों पर फैलने वाली भ्रामक सूचनाओं के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।

    वर्क फ्रंट की बात करें तो शिल्पा शेट्टी हाल ही में कन्नड़ फिल्म ‘केडी: द डेविल’ में नजर आई थीं। इसके अलावा उन्होंने हाल ही में एक कुकिंग रियलिटी शो की मेजबानी भी की, जिसका प्रसारण समाप्त हो चुका है। अभिनय और टेलीविजन के साथ-साथ वह सोशल मीडिया पर भी सक्रिय रहती हैं और समय-समय पर अपने प्रशंसकों से सीधे संवाद करती हैं।

  • CJP प्रदर्शन से जुड़े मौत के दावों की पड़ताल, वायरल वीडियो को लेकर सामने आई आधिकारिक जानकारी

    CJP प्रदर्शन से जुड़े मौत के दावों की पड़ताल, वायरल वीडियो को लेकर सामने आई आधिकारिक जानकारी

    नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली में CJP के प्रदर्शन के बाद सोशल मीडिया पर कई वीडियो और पोस्ट तेजी से वायरल हुए, जिनमें प्रदर्शन के दौरान लोगों की मौत होने और शवों को छिपाए जाने जैसे गंभीर दावे किए गए। इन दावों के व्यापक प्रसार के बीच प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की फैक्ट चेक इकाई और दिल्ली पुलिस ने आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी करते हुए वायरल दावों को भ्रामक बताया है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अपुष्ट जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सत्यता अवश्य जांचें।

    सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर साझा किए गए पोस्ट में दावा किया गया कि प्रदर्शन के दौरान कई लोगों की जान गई। कुछ पोस्ट में एक युवती की मौके पर मौत होने का भी दावा किया गया, जबकि कुछ वीडियो में घायल लोगों के दृश्य दिखाकर उन्हें मौत की घटना से जोड़कर प्रस्तुत किया गया। इन पोस्टों के वायरल होने के बाद मामले ने व्यापक चर्चा का रूप ले लिया।

    प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो की फैक्ट चेक इकाई ने इन दावों की जांच के बाद स्पष्ट किया कि प्रदर्शन के दौरान किसी भी व्यक्ति की मौत होने संबंधी दावा सही नहीं है। फैक्ट चेक इकाई ने कहा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित की जा रही ऐसी जानकारी तथ्यों पर आधारित नहीं है। इसके साथ ही लोगों से अपील की गई कि वे केवल आधिकारिक और सत्यापित स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर ही भरोसा करें तथा भ्रामक सामग्री को आगे साझा करने से बचें।

    दिल्ली पुलिस ने भी इस संबंध में अपना पक्ष स्पष्ट किया है। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान किसी भी व्यक्ति की मृत्यु की सूचना दर्ज नहीं हुई है। पुलिस ने कहा कि सोशल मीडिया पर मौत और शव छिपाने जैसे दावे तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं। अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर विश्वास न करने और किसी भी सूचना की पुष्टि आधिकारिक माध्यमों से करने की सलाह दी है।

    हालांकि प्रदर्शन में शामिल कुछ लोगों ने आरोप लगाया है कि पुलिस कार्रवाई के दौरान कई प्रदर्शनकारी घायल हुए। उनका कहना है कि कुछ लोगों को सिर में चोट, फ्रैक्चर और अन्य गंभीर चोटें आईं, जिसके बाद उन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। लेकिन इन घटनाओं को लेकर सोशल मीडिया पर कई पोस्ट में घायल होने की घटनाओं को मौत की खबरों के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हुई।

    इस घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। कुछ लोगों ने आधिकारिक स्पष्टीकरण का समर्थन किया, जबकि कुछ ने वायरल वीडियो में दिखाई देने वाले लोगों की वास्तविक स्थिति को लेकर सवाल उठाए। कई उपयोगकर्ताओं ने यह भी मांग की कि वायरल वीडियो और उसमें दिखाई देने वाली घटनाओं के बारे में अधिक स्पष्ट और प्रमाणिक जानकारी सार्वजनिक की जाए ताकि भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके।

    विशेषज्ञों का मानना है कि संवेदनशील घटनाओं के दौरान सोशल मीडिया पर अपुष्ट दावे और पुराने या संदर्भ से हटकर वीडियो तेजी से फैलते हैं, जिससे गलत सूचना का प्रसार होता है। ऐसे मामलों में आधिकारिक पुष्टि का इंतजार करना और तथ्यात्मक जानकारी साझा करना बेहद आवश्यक होता है। इससे न केवल अफवाहों पर रोक लगती है, बल्कि सामाजिक तनाव और भ्रम की स्थिति भी कम होती है।

    इस पूरे मामले में आधिकारिक एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि वायरल दावों की सत्यता स्थापित नहीं हुई है। ऐसे में नागरिकों से अपील की गई है कि वे किसी भी वीडियो, तस्वीर या संदेश को साझा करने से पहले उसकी पुष्टि करें और केवल प्रमाणित जानकारी पर ही भरोसा करें।

  • NEET-UG 2026 की वायरल OMR शीट्स पर NTA का बड़ा खुलासा, डिजिटल छेड़छाड़ वाले दस्तावेज बताए, परिणामों को पूरी तरह सही ठहराया

    NEET-UG 2026 की वायरल OMR शीट्स पर NTA का बड़ा खुलासा, डिजिटल छेड़छाड़ वाले दस्तावेज बताए, परिणामों को पूरी तरह सही ठहराया


    नई दिल्ली ।
    नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने नीट-यूजी 2026 परीक्षा की ओएमआर उत्तर-पत्रिकाओं को लेकर सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि जिन ओएमआर शीट्स को अभ्यर्थियों की वास्तविक उत्तर-पत्रिका बताकर साझा किया जा रहा है, वे एनटीए द्वारा जारी आधिकारिक दस्तावेज नहीं हैं। प्रारंभिक जांच में इन्हें डिजिटल रूप से छेड़छाड़ कर तैयार किए गए फर्जी दस्तावेज पाया गया है और घोषित परीक्षा परिणामों में किसी प्रकार की त्रुटि नहीं मिली है।

    एनटीए के अनुसार हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर कुछ अभ्यर्थियों की कथित ओएमआर उत्तर-पत्रिकाओं की तस्वीरें साझा कर यह दावा किया गया कि उनके परीक्षा परिणाम गलत घोषित किए गए हैं। एजेंसी ने इन सभी मामलों की अलग-अलग जांच की और रिकॉर्ड में सुरक्षित मूल दस्तावेजों का मिलान किया। जांच के बाद यह निष्कर्ष निकला कि आधिकारिक रिकॉर्ड में उपलब्ध वास्तविक ओएमआर उत्तर-पत्रिकाएं घोषित परिणामों का पूरी तरह समर्थन करती हैं और मूल्यांकन प्रक्रिया में किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने नहीं आई।

    एजेंसी ने बताया कि प्रत्येक अभ्यर्थी की वास्तविक ओएमआर उत्तर-पत्रिका उसके सुरक्षित रिकॉर्ड में उपलब्ध है। इन उत्तर-पत्रिकाओं पर सही रोल नंबर, टेस्ट बुकलेट नंबर, बारकोड, क्रम संख्या, टेस्ट बुकलेट कोड, अभ्यर्थी और अभिभावकों का विवरण, अभ्यर्थी के हस्ताक्षर, अंगूठे का निशान तथा परीक्षा कक्ष के निरीक्षकों के हस्ताक्षर दर्ज हैं। यही प्रमाणित ओएमआर उत्तर-पत्रिकाएं रिस्पॉन्स-की चैलेंज अवधि के दौरान संबंधित अभ्यर्थियों के पंजीकृत ई-मेल पते पर भेजी गई थीं और पोर्टल पर भी उपलब्ध कराई गई थीं।

    एनटीए ने कहा कि जांच के दौरान यह भी पाया गया कि सोशल मीडिया पर वायरल दस्तावेजों में कई प्रकार की डिजिटल छेड़छाड़ की गई है। कुछ मामलों में अतिरिक्त उत्तर चिह्न जोड़ दिए गए, कहीं नाम बदल दिए गए, जबकि कुछ दस्तावेजों में निरीक्षकों के प्रमाणित हस्ताक्षरों और अन्य विवरणों में भी फेरबदल किया गया। एजेंसी ने स्पष्ट किया कि ऐसे दस्तावेजों को आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं माना जा सकता और इनका उद्देश्य अभ्यर्थियों तथा अभिभावकों को भ्रमित करना है।

    एजेंसी ने अवनीश श्रीवास्तव से जुड़े वायरल दावों पर भी विस्तार से स्पष्टीकरण दिया। एनटीए के अनुसार उसके रिकॉर्ड में सुरक्षित वास्तविक ओएमआर उत्तर-पत्रिका पर अभ्यर्थी का सही नाम, अभिभावकों का विवरण, हस्ताक्षर और अन्य सभी आवश्यक विवरण दर्ज हैं। जबकि सोशल मीडिया पर प्रसारित दस्तावेज में अलग नाम और अभिभावकों की जानकारी दिखाई गई है, जो नीट-यूजी 2026 के किसी भी पंजीकृत अभ्यर्थी से मेल नहीं खाती। इसी प्रकार प्रतिभा त्रिवेदी, अभय यादव और लक्ष्य सिंह से जुड़े मामलों की भी जांच की गई, जिनमें घोषित परिणाम आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुरूप पाए गए।

    एनटीए ने चेतावनी दी है कि किसी फर्जी, जाली या डिजिटल रूप से परिवर्तित ओएमआर उत्तर-पत्रिका का निर्माण, प्रसार या उपयोग सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत संज्ञेय अपराध है। इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता, 2023 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के प्रावधानों के तहत भी संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

    एजेंसी ने सभी अभ्यर्थियों और अभिभावकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित अप्रमाणित सामग्री पर भरोसा न करें। यदि किसी अभ्यर्थी को अपने परिणाम या ओएमआर उत्तर-पत्रिका को लेकर वास्तविक शिकायत है तो वह निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन करे। एनटीए ने दोहराया कि परीक्षा परिणाम आधिकारिक रिकॉर्ड, उत्तर-कुंजी और मूल्यांकन प्रक्रिया के अनुरूप हैं तथा केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही विश्वास किया जाना चाहिए।

  • ई20 पेट्रोल को लेकर फैली अफवाहों पर केंद्र का बड़ा स्पष्टीकरण, भूटान को निर्यात के दावे खारिज, सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाओं से सतर्क रहने की अपील

    ई20 पेट्रोल को लेकर फैली अफवाहों पर केंद्र का बड़ा स्पष्टीकरण, भूटान को निर्यात के दावे खारिज, सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाओं से सतर्क रहने की अपील


    नई दिल्ली। भारत और भूटान के बीच ई20 पेट्रोल के निर्यात को लेकर सामने आई चर्चाओं पर केंद्र सरकार ने स्पष्ट और आधिकारिक रुख अपनाते हुए उन सभी दावों को खारिज कर दिया है, जिनमें कहा जा रहा था कि भूटान ने भारत से ई20 पेट्रोल आयात करने के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है। सरकार ने साफ किया कि इस तरह का कोई प्रस्ताव भूटान को भेजा ही नहीं गया था, इसलिए उसे ठुकराने का सवाल ही नहीं उठता। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक जानकारियों से सावधान रहने की अपील भी की गई है।

    सरकार के अनुसार, भारतीय ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की ओर से भूटान को ई20 पेट्रोल निर्यात करने का कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं दिया गया है। ऐसे में यह दावा पूरी तरह तथ्यहीन है कि पड़ोसी देश ने भारत के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। केंद्र ने कहा कि इस प्रकार की अपुष्ट खबरें लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा करती हैं और वास्तविक तथ्यों से उनका कोई संबंध नहीं है।

    हाल के दिनों में कई रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया था कि भूटान ने ई20 पेट्रोल को अपनाने से इनकार कर दिया है। इन रिपोर्ट्स में स्टोरेज से जुड़ी तकनीकी चुनौतियों को इसकी वजह बताया गया था। हालांकि केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया कि ऐसा कोई आधिकारिक संवाद या प्रस्ताव ही नहीं हुआ, इसलिए इन दावों को सही नहीं माना जा सकता।

    सरकार ने इस अवसर पर ई20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही अन्य भ्रामक जानकारियों पर भी प्रतिक्रिया दी। मंत्रालय का कहना है कि ई20 ईंधन को लेकर यह प्रचार किया जा रहा है कि इससे वाहन खराब हो सकते हैं, इंजन की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, प्रदूषण बढ़ता है या एथेनॉल उत्पादन में अत्यधिक पानी की खपत होती है। सरकार ने इन सभी दावों को वैज्ञानिक तथ्यों से परे और पूरी तरह निराधार बताया है।

    केंद्र के अनुसार, ई20 ईंधन पर देश के प्रमुख ऑटोमोटिव अनुसंधान संस्थानों द्वारा व्यापक तकनीकी अध्ययन किए जा चुके हैं। इन अध्ययनों में कहीं भी यह निष्कर्ष सामने नहीं आया कि ई20 पेट्रोल वाहनों के लिए हानिकारक है। सरकार का कहना है कि तकनीकी परीक्षणों और विशेषज्ञों की रिपोर्टों के आधार पर ही देश में चरणबद्ध तरीके से एथेनॉल मिश्रित ईंधन को बढ़ावा दिया जा रहा है।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि ई20 पेट्रोल का उद्देश्य केवल पारंपरिक पेट्रोल पर निर्भरता कम करना ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना भी है। एथेनॉल जैविक स्रोतों से तैयार होने वाला ईंधन है, जिसके उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने में मदद मिलती है। इससे वातावरण में शुद्ध कार्बन उत्सर्जन का स्तर घटाने की दिशा में सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

    केंद्र सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि ई20 पेट्रोल या उससे जुड़े किसी भी विषय पर केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। सरकार का कहना है कि सोशल मीडिया पर बिना पुष्टि के प्रसारित होने वाली खबरें भ्रम पैदा कर सकती हैं और सार्वजनिक विश्वास को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए किसी भी जानकारी को सही मानने से पहले उसके आधिकारिक स्रोत की पुष्टि करना आवश्यक है। सरकार ने दोहराया कि ई20 ईंधन को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम का वास्तविक तथ्यों और वैज्ञानिक अध्ययनों से कोई संबंध नहीं है तथा इस संबंध में सभी निर्णय स्थापित तकनीकी मानकों और परीक्षणों के आधार पर ही लिए जा रहे हैं।

  • 'न नाम बदला, न धर्म अपनाया'… Urfi Javed ने वायरल दावों की खोली पोल, फेक खबर फैलाने वालों को सुनाई खरी-खरी

    'न नाम बदला, न धर्म अपनाया'… Urfi Javed ने वायरल दावों की खोली पोल, फेक खबर फैलाने वालों को सुनाई खरी-खरी

    नई दिल्ली । सोशल मीडिया पर अभिनेत्री उर्फी जावेद के नाम और धर्म परिवर्तन को लेकर वायरल हो रहे दावों पर अब खुद अभिनेत्री ने स्पष्ट प्रतिक्रिया दी है। एक महिला द्वारा साझा किए गए वीडियो में दावा किया गया था कि उर्फी जावेद ने अपना नाम बदलकर ‘रीता भारद्वाज’ रख लिया है और उन्होंने हिंदू धर्म अपना लिया है। यह वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर फैलने लगा, जिसके बाद अभिनेत्री ने पूरे मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए इन सभी दावों को पूरी तरह निराधार और भ्रामक बताया।

    उर्फी जावेद ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी के माध्यम से वायरल वीडियो का जवाब देते हुए कहा कि उन्होंने न तो अपना नाम बदला है और न ही किसी धर्म को अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सोशल मीडिया पर उनके बारे में फैलाई जा रही जानकारी पूरी तरह झूठी है और लोगों को बिना तथ्यों की पुष्टि किए ऐसी बातें साझा नहीं करनी चाहिए। अभिनेत्री ने कहा कि उनके बारे में गलत सूचनाएं फैलाकर लोगों को भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है।

    अभिनेत्री ने अपनी प्रतिक्रिया में यह भी दोहराया कि वह पहले भी कई बार सार्वजनिक रूप से कह चुकी हैं कि वह किसी विशेष धर्म में विश्वास नहीं रखती हैं। उनके अनुसार उनकी निजी सोच और जीवनशैली को लेकर पहले भी कई तरह की अटकलें लगाई जाती रही हैं, लेकिन इस बार नाम और धर्म परिवर्तन जैसा दावा पूरी तरह मनगढ़ंत है। उन्होंने कहा कि इस तरह की झूठी खबरें न केवल किसी व्यक्ति की छवि को प्रभावित करती हैं, बल्कि समाज में भ्रम भी पैदा करती हैं।

    उर्फी जावेद ने वीडियो बनाने वाली महिला की पत्रकारिता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की जानकारी सार्वजनिक करने से पहले तथ्यों की जांच करना आवश्यक होता है। बिना पुष्टि के किसी व्यक्ति के बारे में गलत जानकारी प्रसारित करना जिम्मेदार पत्रकारिता नहीं माना जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि आलोचना करना हर किसी का अधिकार है, लेकिन झूठी बातें फैलाना उचित नहीं है।

    अभिनेत्री ने अपने बयान में यह भी कहा कि इंटरनेट पर उनके बारे में पर्याप्त सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध है और कोई भी व्यक्ति आसानी से यह पता लगा सकता है कि उनके नाम या पहचान में किसी प्रकार का बदलाव नहीं हुआ है। उन्होंने लोगों से अपील की कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली हर जानकारी को सच मानने के बजाय उसकी सत्यता की जांच अवश्य करें।

    उर्फी जावेद अपने अलग फैशन सेंस और बेबाक बयानों के कारण अक्सर चर्चा में रहती हैं। यही वजह है कि उनके नाम से जुड़ी छोटी-बड़ी खबरें भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो जाती हैं। हालांकि, इस बार अभिनेत्री ने खुद सामने आकर यह साफ कर दिया कि उनके नाम और धर्म परिवर्तन से जुड़ी सभी बातें पूरी तरह गलत और भ्रामक हैं।

    वर्क फ्रंट की बात करें तो उर्फी जावेद हाल के समय में रियलिटी शो और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लगातार सक्रिय रही हैं। उन्होंने हाल ही में एक लोकप्रिय रियलिटी शो में विशेष भूमिका निभाई थी और कई मनोरंजन कार्यक्रमों में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। सोशल मीडिया पर उनकी मजबूत उपस्थिति के कारण वह अक्सर ट्रेंडिंग विषयों का हिस्सा बनी रहती हैं, लेकिन इस बार उन्होंने साफ कर दिया कि उनकी पहचान और निजी जीवन को लेकर फैलाए जा रहे दावे वास्तविकता से बिल्कुल अलग हैं।

  • NCERT की नई कन्नड़ पाठ्यपुस्तक पर छिड़ा विवाद, ‘कृष्णा’ नाम और खान-पान को लेकर उठे सवालों पर बोर्ड ने दी विस्तृत सफाई

    NCERT की नई कन्नड़ पाठ्यपुस्तक पर छिड़ा विवाद, ‘कृष्णा’ नाम और खान-पान को लेकर उठे सवालों पर बोर्ड ने दी विस्तृत सफाई

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की कक्षा 6 की नई कन्नड़ पाठ्यपुस्तक को लेकर सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर छिड़े विवाद के बीच शिक्षा बोर्ड को आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा है। हाल के दिनों में कुछ पोस्ट और रिपोर्टों में यह दावा किया गया था कि नई पाठ्यपुस्तक में ‘कृष्णा’ नाम से जुड़े संदर्भों में बदलाव किया गया है और भारत की खान-पान संस्कृति का वर्णन करते समय मांसाहारी भोजन को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया है। इन दावों के वायरल होने के बाद NCERT ने पूरे मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है।

    बोर्ड ने कहा है कि नई पुस्तकों को लेकर सोशल मीडिया पर प्रसारित की जा रही कई जानकारियां अधूरी और भ्रामक हैं। परिषद के अनुसार पाठ्यपुस्तकों में किसी प्रकार के तथ्यात्मक बदलाव या सांस्कृतिक पक्षपात के आरोप निराधार हैं। शिक्षा बोर्ड का कहना है कि नई किताबों को निर्धारित शैक्षणिक प्रक्रियाओं, विशेषज्ञों की सलाह और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के दिशा-निर्देशों के आधार पर तैयार किया गया है।

    विवाद का सबसे चर्चित पहलू ‘कृष्णा’ नाम से जुड़ा रहा। सोशल मीडिया पर यह दावा किया गया कि नई कन्नड़ पुस्तक में ‘कृष्णा’ नाम को हटाया गया या उसमें बदलाव किया गया है। इस पर NCERT ने स्पष्ट किया कि जिस संदर्भ की चर्चा की जा रही है, वह भूगोल विषय से संबंधित है और उसमें भारत की प्रमुख नदियों का वर्णन किया गया है। बोर्ड के अनुसार पुस्तक में कृष्णा नदी का नाम यथावत मौजूद है और उसमें किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया गया है। परिषद ने कहा कि भौगोलिक तथ्यों को पूरी प्रामाणिकता के साथ प्रस्तुत किया गया है।

    दूसरा विवाद भोजन संस्कृति से जुड़ा रहा। कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि पुस्तक में भारतीय खान-पान की विविधता को दर्शाते समय मांसाहारी भोजन के उल्लेख को शामिल नहीं किया गया। इस पर NCERT ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक और सामाजिक विविधता को ध्यान में रखते हुए सामग्री तैयार की जाती है। पुस्तकों में विभिन्न क्षेत्रों की जीवनशैली, परंपराओं और खान-पान संबंधी विशेषताओं को संतुलित तरीके से प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। बोर्ड का कहना है कि किसी विशेष भोजन पद्धति को जानबूझकर बाहर रखने का दावा वास्तविक तथ्यों से मेल नहीं खाता।

    NCERT ने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप तैयार की जा रही नई पुस्तकों का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल रटने की शिक्षा देना नहीं, बल्कि व्यावहारिक समझ और अनुभव आधारित सीखने को बढ़ावा देना है। इसी दृष्टिकोण से पाठ्यसामग्री को सरल, स्थानीय और विद्यार्थियों के परिवेश से जोड़ने का प्रयास किया जाता है। कई बार क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद के दौरान उदाहरणों और संदर्भों को स्थानीय संदर्भों के अनुरूप प्रस्तुत किया जाता है, जिससे कुछ लोगों के बीच भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

    बोर्ड ने कहा कि यदि किसी पाठ्यपुस्तक में भाषाई, तकनीकी या अनुवाद संबंधी कोई त्रुटि सामने आती है, तो उसे विशेषज्ञ समितियों की समीक्षा के बाद सुधारा जाता है। ऐसे मामलों को किसी छिपे हुए एजेंडे या बड़े वैचारिक बदलाव के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है। शिक्षा से जुड़े विषयों पर तथ्यात्मक जानकारी के आधार पर ही चर्चा होनी चाहिए।

    NCERT ने अभिभावकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट सूचनाओं पर भरोसा करने से पहले आधिकारिक स्रोतों से जानकारी की पुष्टि करें। परिषद का कहना है कि सभी नई पाठ्यपुस्तकें और उनका डिजिटल संस्करण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं, जहां कोई भी व्यक्ति सामग्री की स्वयं जांच कर सकता है। बोर्ड ने दोहराया कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, तथ्यात्मकता और शैक्षणिक गुणवत्ता बनाए रखना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

  • आईपीएल फाइनल वीडियो विवाद पर नुसरत भरूचा की सफाई, बोलीं- अफवाहों पर नहीं, तथ्यों पर करें भरोसा

    आईपीएल फाइनल वीडियो विवाद पर नुसरत भरूचा की सफाई, बोलीं- अफवाहों पर नहीं, तथ्यों पर करें भरोसा

    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेत्री Nushrratt Bharuccha ने आईपीएल फाइनल से जुड़ी एक वायरल वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही अटकलों और दावों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। हाल के दिनों में एक वीडियो को लेकर विभिन्न तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं, जिसमें सुनाई देने वाली कुछ आवाजों को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह के अनुमान लगाए जा रहे थे। अब अभिनेत्री ने स्वयं सामने आकर पूरे मामले की वास्तविकता स्पष्ट करने की कोशिश की है।

    नुसरत भरूचा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से कई तस्वीरें और स्क्रीनशॉट साझा करते हुए कहा कि एक साधारण घटना को जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया। उन्होंने बताया कि वीडियो में सुनाई देने वाली आवाजों को लेकर कई तरह की भ्रामक कहानियां बनाई गईं, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग थी। अभिनेत्री ने यह भी कहा कि उनके नाम से कुछ ऐसे बयान भी प्रसारित किए गए, जिनका उनसे कोई संबंध नहीं था।

    अपने स्पष्टीकरण में अभिनेत्री ने बताया कि जिस दिन संबंधित वीडियो रिकॉर्ड की गई थी, उस समय वह अपने दोस्तों के घर पर आईपीएल फाइनल मुकाबला देख रही थीं। उसी दौरान घर में मौजूद एक पालतू पपी रोने जैसी आवाजें निकाल रहा था। वीडियो रिकॉर्डिंग के दौरान वही आवाजें भी कैद हो गईं। उनके अनुसार, यह पूरी घटना बेहद सामान्य थी, लेकिन बाद में सोशल मीडिया पर इसे अलग-अलग संदर्भों में प्रस्तुत किया जाने लगा।

    नुसरत ने यह भी बताया कि उनके एक मित्र ने उसी समय दूसरे एंगल से एक और वीडियो रिकॉर्ड किया था, जिसमें वही आवाजें स्पष्ट रूप से सुनी जा सकती हैं। अभिनेत्री का कहना है कि यह अतिरिक्त वीडियो इस बात का प्रमाण है कि रिकॉर्डिंग में सुनाई देने वाली आवाजें वास्तव में पालतू पपी की थीं और उनका किसी अन्य दावे या अटकल से कोई संबंध नहीं था।

    विवाद बढ़ने के बाद अभिनेत्री ने एक और वीडियो साझा किया, जिसमें वह घर के भीतर दिखाई दे रही हैं और साथ ही पालतू पपी भी नजर आ रहा है। उन्होंने बताया कि यह वीडियो उसी रात बाद में रिकॉर्ड किया गया था। नुसरत के अनुसार, उन्हें पहले ही कुछ लोगों ने सलाह दी थी कि वह अपनी मूल वीडियो हटा दें क्योंकि उसके गलत अर्थ निकाले जा सकते हैं। इसी आशंका के चलते उन्होंने वीडियो को हटा भी दिया था, लेकिन बाद में वही स्थिति उत्पन्न हो गई जिसका डर था।

    अभिनेत्री ने कहा कि सोशल मीडिया के दौर में किसी भी सामग्री को संदर्भ से अलग करके प्रस्तुत करना आसान हो गया है, जिससे गलतफहमियां तेजी से फैलती हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी वायरल सामग्री पर प्रतिक्रिया देने से पहले तथ्यों की जांच अवश्य करें और बिना पुष्टि के किसी निष्कर्ष पर न पहुंचें।

    नुसरत भरूचा ने यह भी कहा कि मोबाइल फोन और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि किसी भी व्यक्ति के बारे में अधूरी जानकारी के आधार पर अफवाहें फैलाने या उसे परेशान करने से बचें। अभिनेत्री का मानना है कि डिजिटल माध्यमों पर जागरूकता और जिम्मेदारी आज पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गई है।

    इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर फैलने वाली अपुष्ट जानकारियों और अफवाहों के प्रभाव को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। नुसरत भरूचा की सफाई के बाद अब यह मामला तथ्यों और जिम्मेदार ऑनलाइन व्यवहार के महत्व की ओर भी ध्यान आकर्षित कर रहा है।