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  • मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर: UAE पर ईरान का मिसाइल-ड्रोन हमला, अमेरिका की जवाबी बमबारी से हालात और बिगड़े

    मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर: UAE पर ईरान का मिसाइल-ड्रोन हमला, अमेरिका की जवाबी बमबारी से हालात और बिगड़े


    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है, जहां संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने दावा किया है कि ईरान ने उसके क्षेत्र पर 2 बैलिस्टिक मिसाइल और 3 ड्रोन दागे। UAE रक्षा मंत्रालय के अनुसार, उसकी एयर डिफेंस सिस्टम ने सभी मिसाइल और ड्रोन को हवा में ही इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया, हालांकि इस हमले में 3 लोगों के घायल होने की जानकारी भी सामने आई है। अभी तक ईरान की तरफ से इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

    इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने सीजफायर के बावजूद ईरान पर फिर एयरस्ट्राइक की है। अमेरिका का कहना है कि ईरानी सेना ने उसके जंगी जहाजों पर मिसाइल, ड्रोन और छोटी नावों से हमला किया था, जिसके जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने साफ चेतावनी दी है कि अगर ईरान किसी डील पर नहीं पहुंचता, तो आगे और भी बड़े हमले किए जाएंगे। वहीं ईरान ने पलटवार करते हुए दावा किया है कि अमेरिकी हमले में सैन्य ठिकानों की बजाय नागरिक इलाकों को निशाना बनाया गया है। ईरान ने यह भी कहा है कि उसने जवाबी कार्रवाई में होर्मुज स्ट्रेट और चाबहार पोर्ट के पास मौजूद अमेरिकी सैन्य जहाजों को निशाना बनाया। इसके साथ ही ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिकी हमले ओमान की खाड़ी में उसके तेल टैंकरों पर भी किए गए।

    ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका के दावों को खारिज करते हुए कहा है कि CIA की इंटेलिजेंस गलत है और ईरान की मिसाइल क्षमता खत्म नहीं हुई है। उन्होंने दावा किया कि देश का मिसाइल रिजर्व अभी भी मजबूत स्थिति में है और ईरान किसी भी हालात में अपनी सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा। अराघची ने यह भी कहा कि जब भी कूटनीतिक समाधान की संभावना बनती है, अमेरिका सैन्य रास्ता अपना लेता है, लेकिन ईरान दबाव में झुकने वाला नहीं है।

    इसी बीच होर्मुज स्ट्रेट में हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं, जहां करीब 1500 जहाज फंसे होने की जानकारी सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री एजेंसी के अनुसार, इस संकट का असर तेल, गैस और वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ रहा है, जिससे कई देशों में आर्थिक और खाद्य संकट की आशंका बढ़ गई है।

    मध्य पूर्व में इजराइल-हिजबुल्लाह संघर्ष भी तेज हो गया है, जहां दोनों पक्ष एक-दूसरे पर हमलों का दावा कर रहे हैं। साथ ही अमेरिका ने ईरान से जुड़े नेटवर्क पर नए प्रतिबंध भी लगाए हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव और अधिक बढ़ गया है।

  • होर्मुज में भड़का टकराव! ईरान का अमेरिकी युद्धपोत पर मिसाइल हमले का दावा, सीजफायर टूटने के संकेत

    होर्मुज में भड़का टकराव! ईरान का अमेरिकी युद्धपोत पर मिसाइल हमले का दावा, सीजफायर टूटने के संकेत


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिका के एक युद्धपोत पर होर्मुज जलडमरूमध्य के पास मिसाइल हमला किया है। ईरान की सरकारी एजेंसी फार्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक, जास्क के नजदीक अमेरिकी जहाज पर दो मिसाइलें दागी गईं, क्योंकि उसने रिवोल्यूशनरी गार्ड की चेतावनियों को नजरअंदाज किया था।

    इस घटनाक्रम के बाद यह माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच जारी युद्धविराम अब खत्म हो चुका है और हालात फिर से युद्ध की ओर बढ़ सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही ईरानी युद्धपोतों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के संकेत दे चुके हैं।

    यह कथित हमला ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका ने “प्रोजेक्ट फ्रीडम” मिशन शुरू करने का ऐलान किया है। CENTCOM के मुताबिक इस ऑपरेशन में 15,000 सैनिक, 100 से ज्यादा एयर और सी प्लेटफॉर्म, युद्धपोत और ड्रोन शामिल हैं, जिनका मकसद होर्मुज में फंसे जहाजों को सुरक्षित रास्ता देना है।

    अमेरिका ने समुद्री मार्गों के पास एक “उन्नत सुरक्षा क्षेत्र” भी बनाया है और जहाजों को ओमान के अधिकारियों के साथ समन्वय करने की सलाह दी है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि सामान्य रूट के आसपास से गुजरना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि वहां बारूदी सुरंगों की आशंका है।

    वहीं यूरोप ने इस मिशन से दूरी बना ली है। इमैनुएल मैक्रों ने साफ कहा कि फ्रांस “प्रोजेक्ट फ्रीडम” में शामिल नहीं होगा और वह बातचीत के जरिए समाधान चाहता है। उन्होंने इसे अस्पष्ट योजना बताते हुए यूरोप के अलग सुरक्षा समाधान पर जोर दिया।

    कुल मिलाकर, होर्मुज जैसे रणनीतिक मार्ग पर बढ़ता तनाव वैश्विक स्तर पर ऊर्जा सप्लाई और समुद्री व्यापार के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। अगर हालात नहीं सुधरे, तो यह टकराव बड़े युद्ध का रूप ले सकता है।

  • ईरान के मिसाइल हमले से इजरायल के केमिकल प्लांट में लगी भीषण… जहरीली गैस के रिसाव का खतरा

    ईरान के मिसाइल हमले से इजरायल के केमिकल प्लांट में लगी भीषण… जहरीली गैस के रिसाव का खतरा


    येरुशलम।
    युद्ध को बातचीत के जरिए खत्म करने की कोशिशों के बीच ईरान और इजरायल (Iran and Israel War) ने एक दूसरे पर भीषण हमले जारी रखे हैं। ईरान ने दक्षिणी इजरायल (Southern Israel.) में रविवार को एक केमिकल प्लांट पर मिसाइल से हमला (Missile attack Chemical plant) किया। इस हमले के बाद प्लांट में भीषण आग लग गई है। इससे इलाके में जहरीले रिसाव का खतरा पैदा हो गया है। वहीं, इजरायल ने रविवार तड़के तेहरान पर बमबारी की।


    चीनी कंपनी का हिस्सा है प्लांट

    चीनी स्वामित्व वाले सिनजेंटा ग्रुप का हिस्सा एडीएएमए ने कहा कि संयंत्र को हुए नुकसान की सीमा का अभी पता नहीं चल पाया है। कृषि रसायनों और फसल सुरक्षा सामग्री बनाने वाली कंपनी एडीएएमए ने कहा कि उसके ‘मख्तेशिम प्लांट’ पर हमला किया गया है। फिलहाल जांच कर रहे हैं कि सीधे मिसाइल गिरी है या इंटरसेप्ट की गई मिसाइल का मलबा गिरा है। हालांकि, किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

    इजरायल की ‘अग्नि शमन एवं बचाव सेवा’ ने बताया कि ईरानी मिसाइल हमले के बाद दक्षिणी इजरायल के एक औद्योगिक क्षेत्र में आग लग गई, जहां कई रासायनिक और औद्योगिक संयंत्र स्थित हैं। संभावना जताई जा रही है कि यह आग हवा में मार गिराई गई मिसाइल के मलबे से लगी है।

    लोगों से दूर रहने का आग्रह
    विभाग ने जनता से नियोत होवाव औद्योगिक क्षेत्र से दूर रहने का आग्रह किया है क्योंकि वहां जहरीले रसायन मौजूद हैं। आग पर काबू पाने के लिए दमकल की 34 टीमें काम कर रही हैं। विभाग ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र से 800 मीटर की दूरी के बाहर जनता के लिए कोई खतरा नहीं है। बयान में कहा गया, आस-पास के निवासियों को घरों के अंदर रहने, खिड़कियां और वेंटिलेशन बंद रखने और सुरक्षा बलों के निर्देशों का पालन करने का निर्देश दिया गया है, जब तक कि घटना पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं पा लिया जाता।


    हमले के बाद दिखा आग और काला धुआं

    दमकल सेवा द्वारा जारी वीडियो और तस्वीरों में आग का बड़ा गोला और भारी काला धुआं दिखाई दे रहा है, जबकि अग्निशमन कर्मी आग को फैलने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं। इससे पहले, इजरायली सेना ने कहा था कि उसने ईरान से दागी गई मिसाइलों का पता लगाया है। नियोत होवाव क्षेत्र दक्षिणी इजरायल के सबसे बड़े शहर बीयर शेवा से लगभग 13 किमी दूर स्थित है। इस क्षेत्र में कई इजरायली सैन्य ठिकाने भी मौजूद हैं। पिछले सप्ताहांत, ईरानी मिसाइलों ने अराद और डिमोना के दक्षिणी शहरों पर हमला किया था, जिसमें दर्जनों लोग घायल हुए थे। यह अब तक इजरायली धरती पर अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध के सबसे भीषण हमलों में से एक था।


    कुवैत में सैन्य शिविर पर हमला, 10 सैनिक घायल

    उधर ईरान ने कुवैत में भी सैन्य शिविर पर हमला किया है। जिसमें 10 सैनिक घायल हुए हैं। कुवैत के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि पिछले 24 घंटों में कुवैत के हवाई क्षेत्र में 14 बैलिस्टिक मिसाइलें और 12 ड्रोन दागे गए हैं। हमले में शिविर में काफी नुकसान हुआ है।


    ईरान के इस्फहान के विश्वविद्यालय पर हमला

    इजरायल ने ईरान के बीच शहर इस्फहान में स्थित इस्फहान यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी पर रविवार को हवाई हमले किए। यह दूसरी बार है जब इस विश्वविद्यालय पर हमला हुआ। यूनिवर्सिटी ने फार्स न्यूज एजेंसी को दिए बयान में कहा कि दोपहर करीब 2 बजे(स्थानीय समय) विश्वविद्यालय को दूसरी बार निशाना बनाया गया। यूनिवर्सिटी के एक रिसर्च इंस्टीट्यूट पर हुए इस हमले से कई दूसरी इमारतों को भी नुकसान पहुंचा और यूनिवर्सिटी के चार कर्मचारियों को मामूली चोटें आईं।


    ईरान जवाबी हमले की धमकी दी

    ईरान ने विश्वविद्यालय पर हमले के जवाब में इजरायल और अमेरिका की यूनिवर्सिटी पर हमले की धमकी दी है। रिवोल्यूशनरी गार्ड ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान के विश्वविद्यालय की सुरक्षा की गारंटी नहीं दी गई, तो ईरान इस इलाके में मौजूद इजरायली और अमेरिकी विश्वविद्यालयों को निशाना बनाएगा। अमेरिका के कई कॉलेजों, जिनमें जॉर्जटाउन, न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी और नॉर्थवेस्टर्न के कैंपस कतर और संयुक्त अरब अमीरात में हैं।

    गार्ड ने कहा, अगर अमेरिकी सरकार चाहती है कि इस इलाके में मौजूद उसकी यूनिवर्सिटीज सुरक्षित रहें, तो उसे सोमवार(30 मार्च) को दोपहर 12 बजे तक ईरानी यूनिवर्सिटीज पर हुई बमबारी की निंदा करनी चाहिए। उसने यह भी मांग की कि अमेरिका, इजरायल को ईरानी यूनिवर्सिटीज और रिसर्च सेंटर्स पर हमला करने से रोके। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने शनिवार को बताया था कि दर्जनों यूनिवर्सिटीज और रिसर्च सेंटर्स पर हमले हुए हैं।


    यूएई पर दागी गई 16 बैलिस्टिक मिसाइलें

    संयुक्त अरब अमीरात पर रविवार को ईरान ने 16 बैलिस्टिक मिसाइलें दांगी, जबकि 42 ड्रोन ने भी अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया।हालांकि इन सभी एयर डिफेंस सिस्टम ने रोक दिया। रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार कोई भी नुकसान नहीं हुआ है।


    बंदर ए खमीर बंदरगाह पर हमला, पांच मारे गए

    ईरान के सरकारी मीडिया ने बताया कि दक्षिणी बंदरगाह शहर बंदर-ए-खमीर पर हुए हमले में पांच लोग मारे गए और दो पोत भी नष्ट हो गए। इजरायल ने ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह के खिलाफ अपने अभियान के तहत लेबनान में भी ठिकानों पर हमला किया। रविवार की सुबह सेना ने बताया कि लेबनान में लड़ाई के दौरान उसका एक सैनिक मारा गया।


    ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के एल्युमीनियम संयंत्र पर हमले किए, आठ घायल

    ईरानी सेना ने बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात में दुनिया के दो सबसे बड़े एल्युमीनियम उत्पादकों के संयंत्रों पर मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया। ईरान ने इन उद्योगों को अमेरिकी सेना से जुड़ा हुआ बताया। एमिरेट्स ग्लोबल एल्युमीनियम (ईजीए) ने कहा कि ईरान के हमले में छह लोग घायल हो गए और उसके संयंत्र को काफी नुकसान पहुंचा, जबकि बहरीन के सरकारी मीडिया ने कहा कि दूसरे हमले में एल्युमीनियम बहरीन के दो कर्मचारी घायल हो गए।

  • ईरानी स्कूल पर मिसाइल हमले में 168 बच्चों की मौत, अमेरिकी जांच में चौंकाने वाला खुलासा

    ईरानी स्कूल पर मिसाइल हमले में 168 बच्चों की मौत, अमेरिकी जांच में चौंकाने वाला खुलासा



    वॉशिंगटन। ईरान के मीनाब शहर में एक स्कूल पर हुए भीषण मिसाइल हमले को लेकर अमेरिकी सैन्य जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। प्रारंभिक जांच के मुताबिक इस हमले के लिए खुद अमेरिका जिम्मेदार हो सकता है। इस हमले में करीब 175 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें 168 मासूम बच्चे शामिल थे। यदि यह आधिकारिक रूप से पुष्टि हो जाती है, तो यह पिछले दो दशकों में अमेरिकी सैन्य अभियानों के दौरान नागरिकों की मौत की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक मानी जाएगी।

    पुराने खुफिया डेटा से हुई चूक

    अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार यह हमला Minab शहर के एक प्राथमिक विद्यालय पर हुआ। जांच में सामने आया कि United States Central Command ने लक्ष्य तय करने के लिए Defense Intelligence Agency (DIA) के पुराने खुफिया डेटा का इस्तेमाल किया था।

    असल में टॉमहॉक मिसाइल का निशाना स्कूल नहीं, बल्कि उसके पास स्थित एक ईरानी सैन्य ठिकाना था। यह स्कूल पहले उसी सैन्य परिसर का हिस्सा था, लेकिन बाद में इसे अलग कर दिया गया था।

    बताया जा रहा है कि Shajareh Taybeh Elementary School 2017 तक सैन्य बेस से जुड़ा हुआ था। इसके बाद वहां दीवार बनाकर परिसर अलग कर दिया गया और वॉच टावर भी हटा दिया गया। स्कूल की इमारत को चमकीले रंगों से रंगा गया था और ऑनलाइन मैप्स में भी इसे स्पष्ट रूप से “स्कूल” के रूप में दर्ज किया गया था।

    यह हमला शनिवार सुबह हुआ, जो ईरान में स्कूल सप्ताह का पहला दिन होता है और उस समय स्कूल में बड़ी संख्या में बच्चे मौजूद थे।

    क्या AI सिस्टम से हुई गलती?

    इस त्रासदी के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या यह चूक किसी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम की वजह से हुई। ईरान के साथ चल रहे युद्ध में अमेरिकी सेना तकनीक और एआई आधारित टार्गेटिंग सिस्टम पर काफी निर्भर है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी सेना वॉर-टेक कंपनी Palantir Technologies के “मेवेन स्मार्ट सिस्टम” का इस्तेमाल करती है। इसमें एआई कंपनी Anthropic के मॉडल “Claude” का उपयोग किया जाता है, जो रियल-टाइम लोकेशन और टार्गेटिंग डेटा प्रदान करता है।

    प्रारंभिक आशंका है कि एआई सिस्टम स्कूल की बदली हुई लोकेशन और उपयोग को अपडेट करने में विफल रहा, जिससे यह घातक गलती हुई।

    अमेरिका का आधिकारिक रुख

    अमेरिका ने नागरिक ठिकानों पर हमला न करने की नीति दोहराते हुए कहा है कि मामले की जांच जारी है।

    अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने शुरुआत में दावा किया कि ईरान ने खुद ही स्कूल पर बमबारी की होगी क्योंकि उसके हथियार अक्सर सटीक नहीं होते। हालांकि बाद में उन्होंने कहा कि वह जांच के नतीजों का इंतजार करेंगे और Pentagon की रिपोर्ट को स्वीकार करेंगे।

    इस घटना को लेकर अमेरिकी संसद में भी सवाल उठने लगे हैं।

    45 से अधिक डेमोक्रेटिक सीनेटरों ने रक्षा सचिव Pete Hegseth को पत्र लिखकर जवाब मांगा है। वहीं रिपब्लिकन सीनेटर Kevin Cramer और सीनेटर Tim Kaine ने भी इस घटना की गहन जांच की मांग की है।

    ईरान का तीखा आरोप

    इस हमले के बाद ईरान ने अमेरिका पर युद्ध अपराध का आरोप लगाया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने सोशल मीडिया पर हमले का वीडियो साझा करते हुए इसे “जघन्य युद्ध अपराध” बताया।

    वहीं ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने सामूहिक कब्रों के ड्रोन फुटेज साझा करते हुए कहा कि यह हमला निर्दोष बच्चों की हत्या है और इसे बिना सजा के नहीं छोड़ा जाना चाहिए।

    यह घटना पहले से ही तनावपूर्ण Iran-Israel संघर्ष के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है और युद्ध में एआई तकनीक के इस्तेमाल पर भी नई बहस शुरू हो गई है।

  • ईरान ने अमेरिका को दिया बड़ा झटका, कतर में मिसाइल चेतावनी रडार सिस्टम को पहुंचाया नुकसान

    ईरान ने अमेरिका को दिया बड़ा झटका, कतर में मिसाइल चेतावनी रडार सिस्टम को पहुंचाया नुकसान



    नई दिल्ली। ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद मध्य पूर्व में चल रहा संघर्ष और ज्यादा गंभीर होता जा रहा है। हालात अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गए हैं जहां दोनों पक्षों की ओर से लगातार सैन्य कार्रवाई हो रही है। एक तरफ ईरान खाड़ी क्षेत्र में हमले कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका ने हिंद महासागर में एक ईरानी पोत को डुबो दिया, जिसमें 80 से अधिक लोगों की मौत होने की खबर है। इसी बीच खबर सामने आई है कि ईरान के हमले में कतर में मौजूद अमेरिका की एक अहम मिसाइल चेतावनी प्रणाली को नुकसान पहुंचा है, जिसे इस क्षेत्र में अमेरिकी सुरक्षा तंत्र की “आंख” माना जाता था।

    1.1 अरब डॉलर के रडार सिस्टम को नुकसान

    मिली जानकारी के अनुसार लगभग 1.1 अरब डॉलर की लागत से तैयार यह रडार सिस्टम अमेरिकी सेना के मिसाइल रक्षा नेटवर्क का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा था। इस पर हुए हमले से क्षेत्र में तैनात मिसाइल रक्षा तंत्र को बड़ा झटका लगा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे संभावित मिसाइल हमलों का समय रहते पता लगाने की क्षमता कमजोर हो सकती है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।

    सैटेलाइट तस्वीरों से हुई नुकसान की पुष्टि

    अमेरिकी सैन्य ढांचे को हुए नुकसान की पुष्टि सैटेलाइट तस्वीरों से भी हुई है। प्लैनेट लैब्स द्वारा जारी इमेज में अमेरिकी स्पेस फोर्स के AN/FPS-132 (ब्लॉक 5) बैलिस्टिक मिसाइल अर्ली वार्निंग रडार सिस्टम के आसपास क्षति और आग बुझाने की गतिविधियां दिखाई दे रही हैं। यह रडार सिस्टम मध्य पूर्व में अमेरिकी सेना द्वारा संचालित सबसे बड़े मिसाइल चेतावनी रडारों में से एक माना जाता है।

    ईरान ने कैसे किया हमला

    ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इस हमले को सटीक मिसाइल स्ट्राइक बताया है। हालांकि कुछ सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला कम लागत वाले हमलावर ड्रोन से भी किया गया हो सकता है, जो संभवतः शाहेद श्रेणी का था। रिपोर्ट्स के मुताबिक मिसाइलों और ड्रोन के संयुक्त बड़े हमले के दौरान यह ड्रोन रक्षा तंत्र को भेदने में सफल रहा और रडार सिस्टम को नुकसान पहुंचा गया।

    क्यों महत्वपूर्ण है यह रडार सिस्टम

    इस रडार सिस्टम को अमेरिकी रक्षा कंपनी रेथियॉन ने अपग्रेडेड अर्ली वार्निंग रडार (UEWR) कार्यक्रम के तहत विकसित किया था। यह प्रणाली लगभग 5000 किलोमीटर तक की दूरी पर बैलिस्टिक मिसाइलों और अन्य हवाई खतरों को ट्रैक करने में सक्षम है। साथ ही यह पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में मिसाइल लॉन्च का शुरुआती अलर्ट देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कतर में इसकी लोकेशन रणनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जाती है क्योंकि यहां से यह रडार ईरान, इराक, सीरिया, तुर्किये, मध्य एशिया के कुछ हिस्सों और हिंद महासागर तक की गतिविधियों पर नजर रख सकता है।

    रणनीतिक असर की आशंका

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस हमले का असर केवल एक सैन्य ठिकाने को हुए नुकसान तक सीमित नहीं है। अमेरिका के पूर्व सैन्य अधिकारी और पेंटागन के पूर्व सलाहकार कर्नल डगलस मैकग्रेगर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि इस हमले में अमेरिका की “आंखें” निशाना बनी हैं। वहीं भू-राजनीति विशेषज्ञ ब्रायन एलन के अनुसार इस घटना के दूरगामी रणनीतिक प्रभाव भी हो सकते हैं।

    सिस्टम को बदलना आसान नहीं

    सैन्य विश्लेषकों के अनुसार अमेरिका के पास सैटेलाइट और अन्य रडार सहित वैश्विक सेंसर नेटवर्क मौजूद है, लेकिन AN/FPS-132 जैसे बड़े और स्थायी रडार सिस्टम को नुकसान पहुंचने से क्षेत्रीय निगरानी में अंतर आ सकता है। ऐसे बड़े सिस्टम को जल्दी बदलना या दोबारा स्थापित करना आसान नहीं होता। इसलिए कुछ समय के लिए मिसाइल निगरानी और ट्रैकिंग क्षमता कमजोर पड़ सकती है। यह स्थिति इसलिए भी संवेदनशील मानी जा रही है क्योंकि इस क्षेत्र में अमेरिका के कई अहम सैन्य ठिकाने मौजूद हैं और यहीं से दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े प्रमुख समुद्री मार्ग भी गुजरते हैं।

  • ईरान में तबाही: खामनेई की मौत के बाद अयातुल्ला आराफी बने अंतरिम सुप्रीम लीडर, अमेरिका-इजराइल पर ईरानी पलटवार

    ईरान में तबाही: खामनेई की मौत के बाद अयातुल्ला आराफी बने अंतरिम सुप्रीम लीडर, अमेरिका-इजराइल पर ईरानी पलटवार



    नई दिल्ली। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई की मौत के अगले दिन ही देश के राजनीतिक और धार्मिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव आया। 67 वर्षीय अयातुल्ला अलीरेजा आराफी को अंतरिम सुप्रीम लीडर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आराफी लंबे समय से ईरान की धार्मिक-राजनीतिक व्यवस्था में अहम भूमिका निभा रहे हैं। वे असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के उपाध्यक्ष हैं और गार्जियन काउंसिल के सदस्य रह चुके हैं। वर्तमान में वे ईरान की सेमिनरी प्रणाली का नेतृत्व कर रहे हैं। अब असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स स्थायी सुप्रीम लीडर का चयन करेगी।

    खामनेई की मौत के बाद ईरान में 40 दिन का राजकीय शोक और सात दिन की छुट्टी घोषित की गई। ईरानी इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा कि देश ने एक महान नेता खो दिया है। वहीं, ईरानी सेना ने खतरनाक अभियान की चेतावनी दी और अमेरिकी ठिकानों पर हमले की योजना बनाई।

    अमेरिका-इजराइल ने किया आक्रमण

    इजराइल और अमेरिका ने संयुक्त हमले में ईरान पर 24 घंटे में 1,200 से अधिक बम गिराए। इस हमले में सुप्रीम लीडर खामनेई की मौत हुई। उनके ऑफिस कॉम्प्लेक्स पर 30 मिसाइलों से हमला हुआ। हमले में उनके परिवार के सदस्य और 40 कमांडर्स भी मारे गए। इजराइल के पीएम नेतन्याहू और अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प ने खामनेई की मौत की पुष्टि की।

    इस हमले में 200 से अधिक लोग मारे गए और 740 से ज्यादा घायल हुए। एक स्कूल पर मिसाइल गिरने से 148 छात्राओं की मौत हो गई।

    ईरान का जवाबी हमला

    ईरान ने अमेरिका और इजराइल के हमलों का जवाब देते हुए 9 देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमला किया। इसमें इजराइल पर करीब 400 मिसाइलें दागी गईं। इसके अलावा कतर, कुवैत, जॉर्डन, बहरीन, सऊदी अरब, UAE में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। दुबई में पाम होटल एंड रिसॉर्ट और बुर्ज खलीफा के पास ड्रोन हमला हुआ।

    पृष्ठभूमि और विवाद

    ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच विवाद के मुख्य कारण हैं: न्यूक्लियर प्रोग्राम पर शक, बैलिस्टिक मिसाइलों का विकास, क्षेत्रीय अस्थिरता और मिडिल ईस्ट में राजनीतिक दखल। अमेरिका ने ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं, जिससे अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई। इसके जवाब में ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को तेज करने और कठोर बयान देने जैसे कदम उठाए।

    अयातुल्ला अली खामनेई का जीवन

    खामनेई का जन्म 19 अप्रैल 1939 को मशहद में हुआ। उन्होंने 1963 में शाह के खिलाफ भाषण दिया और गिरफ्तार हुए। 1979 की इस्लामी क्रांति में वे प्रमुख आंदोलनकारी बने। 1981 में उन पर बम हमले हुए, उसी वर्ष वे ईरान के राष्ट्रपति बने। 1989 में खोमैनी की मौत के बाद उन्हें सुप्रीम लीडर बनाया गया। समर्थक उन्हें इस्लामी व्यवस्था का मजबूत रक्षक मानते हैं, जबकि आलोचक कट्टर शासन का आरोप लगाते हैं।