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  • यमन में हूतियों का सैन्य शिविर पर मिसाइल हमला, 53 सैनिकों की मौत और 200 से अधिक घायल

    यमन में हूतियों का सैन्य शिविर पर मिसाइल हमला, 53 सैनिकों की मौत और 200 से अधिक घायल


    नई दिल्ली ।
    यमन में हूती विद्रोहियों और सरकार समर्थक बलों के बीच संघर्ष एक बार फिर तेज हो गया है। सोमवार को दक्षिणी यमन के शबवा प्रांत स्थित अल-अलम सैन्य शिविर पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया गया। इस हमले में कम से कम 53 सैनिकों की मौत हो गई, जबकि 200 से अधिक जवान घायल बताए गए हैं। मृतकों में ज्यादातर नए भर्ती हुए सैनिक शामिल हैं। यह हमला ऐसे समय हुआ है, जब देश में लंबे समय से जारी गृहयुद्ध और क्षेत्रीय तनाव के कारण सुरक्षा स्थिति पहले से ही चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

    यमन की सेना के प्रवक्ता कर्नल माजेद अल-नजिली के अनुसार, ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने पुलिस और सुरक्षा बलों के प्रशिक्षण केंद्र को निशाना बनाते हुए तीन बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। हालांकि, उन्होंने हताहतों की संख्या की पुष्टि नहीं की। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार के दो सैन्य अधिकारियों ने हमले में कम से कम 53 सैनिकों की मौत और 200 से अधिक जवानों के घायल होने की जानकारी दी। हूती विद्रोहियों के नियंत्रण वाली समाचार एजेंसी ने भी हमले में कई लोगों के मारे जाने और घायल होने की बात कही, लेकिन मृतकों और घायलों की संख्या नहीं बताई।

    अल-अलम सैन्य शिविर शबवा प्रांत की राजधानी अटक के उत्तर में जर्दान जिले में स्थित है। पहले इस शिविर का इस्तेमाल संयुक्त अरब अमीरात के समर्थन वाले एक सशस्त्र समूह द्वारा किया जाता था। यह इलाका सरकार के नियंत्रण वाले मारीब प्रांत तक पहुंचने वाले मार्ग पर स्थित है। इस कारण सैन्य और जरूरी आपूर्ति को सरकारी बलों तक पहुंचाने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। एक सैन्य अधिकारी के मुताबिक, हमले में निशाना बनाए गए जवान रैपिड इंटरवेंशन नाम से गठित नई सुरक्षा इकाई का हिस्सा थे। इस इकाई को क्षेत्र की सुरक्षा और रक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

    यमन में संघर्ष बढ़ने के पीछे कई क्षेत्रीय और आंतरिक कारण बताए जा रहे हैं। हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब समर्थित सरकारी बलों के बीच पिछले कई महीनों से टकराव तेज हुआ है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर भी क्षेत्र की परिस्थितियों पर पड़ा है। वर्ष 2022 में हुआ संघर्षविराम यमन के गृहयुद्ध में लड़ाई को काफी हद तक रोकने में सफल रहा था, लेकिन हालिया घटनाओं के बीच उस व्यवस्था की प्रभावशीलता कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है।

    इस बीच उत्तरी यमन के हूती नियंत्रित सादा प्रांत में रविवार को हवाई हमला हुआ। हूती प्रशासन के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, इस हमले में कम से कम नौ लोगों की मौत हुई, जिनमें पांच बच्चे और दो महिलाएं शामिल थीं। हूतियों ने हमले के लिए सऊदी अरब के नेतृत्व वाले बलों को जिम्मेदार ठहराया है। सप्ताहांत के दौरान हुए कई हमलों में 30 से अधिक लोगों के मारे जाने या घायल होने का दावा भी किया गया। हालांकि, सऊदी अरब की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं आई।

    सऊदी अरब और लाल सागर के आसपास भी तनाव बढ़ने की खबरें हैं। हूती विद्रोहियों ने हाल के हफ्तों में सऊदी अरब पर हमले दोबारा शुरू किए हैं। उनका आरोप है कि सऊदी अरब यमन की सरकार का समर्थन कर रहा है। इन हमलों में सऊदी हवाई अड्डों, तेल ठिकानों और सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाए जाने की जानकारी दी गई है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, इन घटनाओं से हजारों उड़ानें प्रभावित हुई हैं और 19 लोगों की मौत हुई है। सऊदी तेल कंपनी अरामको के मुख्यालय पर भी हमला किए जाने की बात सामने आई है।

    लाल सागर के तट और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास हूतियों की गतिविधियां भी क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। यह समुद्री मार्ग अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए अहम है और वैश्विक माल परिवहन में इसकी बड़ी भूमिका है। इस रणनीतिक क्षेत्र पर नियंत्रण को लेकर तनाव के बीच सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने इसी महीने सैन्य अभियान शुरू किया है। इसका उद्देश्य क्षेत्र से हूती विद्रोहियों को पीछे हटाना और वहां दोबारा नियंत्रण स्थापित करना बताया गया है। हालिया मिसाइल हमले ने यमन में संघर्ष के और गंभीर होने की आशंकाओं को बढ़ा दिया है।

  • दक्षिण कोरिया ने 6,174 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक रफ्तार वाले हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन का पहला सफल परीक्षण किया

    दक्षिण कोरिया ने 6,174 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक रफ्तार वाले हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन का पहला सफल परीक्षण किया

    नई दिल्ली ।दक्षिण कोरिया ने अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन (एचजीवी) का पहला सफल परीक्षण किया है। देश में विकसित इस मिसाइल ने परीक्षण के दौरान 6,174 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की गति से उड़ान भरी और रास्ते में अपनी दिशा बदलते हुए समुद्र में निर्धारित लक्ष्य को सटीक निशाना बनाया। इस परीक्षण को दक्षिण कोरिया की तकनीकी प्रगति और स्वदेशी रक्षा तकनीक विकसित करने के प्रयासों में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। हालांकि, इसके साथ ही पूर्वी एशिया में मिसाइल तकनीक को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ने की आशंका भी जताई गई है।

    इस परीक्षण को दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने भी देखा। उन्होंने हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन को कोरियाई प्रायद्वीप में महत्वपूर्ण लक्ष्यों पर अचानक और सटीक हमला करने में सक्षम रणनीतिक संपत्ति बताया। राष्ट्रपति की इस टिप्पणी से इस हथियार की रणनीतिक भूमिका का संकेत मिलता है। दक्षिण कोरिया अब इस तकनीक को और विकसित करने की तैयारी कर रहा है, ताकि अपनी रक्षा क्षमता को मजबूत बनाया जा सके।

    परीक्षण के दौरान हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन ने बूस्टर से अलग होने के बाद निर्धारित उड़ान मार्ग पूरा किया। इसके बाद यह ऊंचाई से नीचे उतरा और उड़ान के दौरान क्षैतिज तथा ऊर्ध्वाधर दिशाओं में बदलाव करते हुए लक्ष्य तक पहुंचा। इस तरह की उड़ान प्रक्रिया में तेज गति के साथ दिशा बदलने की क्षमता का परीक्षण किया जाता है। मिसाइल ने निर्धारित लक्ष्य पर सटीक निशाना लगाकर अपनी उड़ान और नियंत्रण प्रणालियों के प्रदर्शन को प्रदर्शित किया।

    इस परीक्षण का उद्देश्य केवल मिसाइल की गति और लक्ष्य तक पहुंचने की क्षमता जांचना नहीं था। इसके जरिए उच्च तापमान सहन करने वाली सामग्री, मार्गदर्शन प्रणाली और नियंत्रण तकनीक का भी परीक्षण किया गया। हाइपरसोनिक गति पर उड़ने वाले हथियारों के विकास में इन तकनीकों की अहम भूमिका होती है। दक्षिण कोरिया की ओर से स्वदेशी स्तर पर इस प्रणाली को विकसित करना उसकी रक्षा संबंधी तकनीकी क्षमता को आगे बढ़ाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

    हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों से अलग तरीके से उड़ान भरते हैं। ये उड़ान के दौरान अपनी दिशा बदल सकते हैं और अपेक्षाकृत कम ऊंचाई पर तेज गति से आगे बढ़ सकते हैं। इनके मार्ग में बदलाव करने की क्षमता के कारण इन्हें रोकना अधिक कठिन हो सकता है। यही विशेषताएं इन्हें आधुनिक सैन्य रणनीति में महत्वपूर्ण बनाती हैं। हालांकि, किसी हथियार को रोकने की वास्तविक क्षमता उसकी तकनीकी विशेषताओं और संबंधित रक्षा प्रणालियों पर भी निर्भर करती है।

    दक्षिण कोरिया इस मिसाइल परीक्षण को अपनी किल चेन और प्रतिरोधक रणनीति का हिस्सा मान रहा है। किल चेन उसकी ऐसी रणनीतिक व्यवस्था है, जिसका उद्देश्य संभावित खतरे की पहचान कर महत्वपूर्ण लक्ष्यों के खिलाफ कार्रवाई करने की क्षमता विकसित करना है। इस दिशा में हाइपरसोनिक तकनीक का विकास देश की स्वतंत्र रक्षा क्षमता को मजबूत करने के प्रयासों से जुड़ा है।

    यह परीक्षण उत्तर कोरिया की बढ़ती सैन्य क्षमताओं के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। दोनों देशों के बीच हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक को लेकर प्रतिस्पर्धा क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन को प्रभावित कर सकती है। दक्षिण कोरिया का सफल परीक्षण पूर्वी एशिया में हथियारों की प्रतिस्पर्धा को और तेज करने की आशंका पैदा करता है। ऐसे में इस तकनीक का आगे होने वाला विकास और उसका रणनीतिक इस्तेमाल क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेगा।

  • यूक्रेन पर रूस का मिसाइल-ड्रोन अटैक, बिजली और इंटरनेट केंद्रों को बनाया निशाना

    यूक्रेन पर रूस का मिसाइल-ड्रोन अटैक, बिजली और इंटरनेट केंद्रों को बनाया निशाना

    कीव। रूस ने यूक्रेन पर एक बार फिर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। बुधवार को यूक्रेनी अधिकारियों ने बताया कि रातभर चले हमलों में राजधानी कीव और आसपास के इलाकों को निशाना बनाया गया। हमलों में ऊर्जा ढांचे के साथ एक अहम इंटरनेट केंद्र को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है। अधिकारियों के मुताबिक कीव और उसके उत्तरी बाहरी इलाके में दो महिलाओं और 14 वर्षीय बच्चे समेत कई लोगों की मौत हुई है।

    कीव के मेयर विटाली क्लिचको ने बताया कि शहर के एक गोदाम पर हुए हमले में एक व्यक्ति की मौत हुई। वहीं, कीव क्षेत्र के विशहोरोद में एक निजी मकान के मलबे से 14 वर्षीय बच्चे का शव बरामद किया गया। इसी मकान से तीन अन्य लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। क्षेत्रीय सैन्य प्रशासन के प्रमुख तिमुर तकाचेंको के अनुसार, राजधानी और आसपास के इलाकों में कई लोग घायल भी हुए हैं।

    अगस्त के अंत से बढ़े हवाई हमले

    यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, अगस्त के अंत से रूस ने हवाई हमलों की तीव्रता बढ़ाई है। यह हमले ऐसे समय हो रहे हैं जब यूक्रेन सर्दियों की तैयारी कर रहा है। रूस की ओर से लगातार ऊर्जा संयंत्रों, बिजली सबस्टेशनों और उनसे जुड़ी सुविधाओं को निशाना बनाए जाने की बात कही जा रही है।

    यूक्रेन की बिजली कंपनी डीटीईके ने नुकसान का विस्तृत आंकड़ा नहीं दिया, लेकिन बताया कि उसके कर्मचारियों ने हमलों के बाद करीब 8,000 घरों में बिजली की आपूर्ति बहाल कर दी।

    188 ड्रोन और कई मिसाइलें दागने का दावा

    यूक्रेन की वायुसेना के मुताबिक, रूस ने रातभर के हमलों में एंटी-शिप और बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ 188 ड्रोन दागे। यूक्रेन का दावा है कि इनमें से पांच मिसाइलों और 155 ड्रोन को रोक दिया गया। बाकी हथियारों में से कुछ अपने निशाने तक पहुंचे।

    रूस ने भी हमलों की पुष्टि की है। उसके रक्षा मंत्रालय के अनुसार, रूसी सेना ने कीव में सैन्य गतिविधियों से जुड़े एक डेटा सेंटर, कीव क्षेत्र के बिजली संयंत्र, ओडेसा क्षेत्र के एक औद्योगिक परिसर और इजमाइल बंदरगाह की सुविधाओं को निशाना बनाया।

    हालांकि, यूक्रेन ने रूस के इन विशिष्ट दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की है। यूक्रेनी अधिकारियों ने कहा कि कीव के कम से कम चार जिलों में नागरिक इलाके भी हमलों की चपेट में आए।

    जेलेंस्की बोले- ऊर्जा व्यवस्था पर है मुख्य निशाना

    यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि रूस के हमलों का मुख्य निशाना कीव और उसके आसपास की ऊर्जा व्यवस्था है। उन्होंने इसे मुश्किल हमला बताते हुए कहा कि लगातार हो रहे हमलों से यूक्रेन की वायु रक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है।

    जेलेंस्की ने उन देशों का भी आभार जताया, जिन्होंने हाल में यूक्रेन को हवाई रक्षा के लिए सहायता उपलब्ध कराई है।

    युद्ध खत्म कराने की कोशिशों के बीच जारी हैं हमले

    रूस-यूक्रेन युद्ध को शुरू हुए साढ़े चार साल से अधिक समय हो चुका है। यूक्रेनी अधिकारियों का कहना है कि रूस अमेरिकी प्रयासों के तहत युद्ध समाप्त करने की प्रक्रिया में आगे बढ़ने को तैयार नहीं है।

    वहीं, रूस का कहना है कि वह सीमित अवधि के युद्धविराम के बजाय व्यापक और स्थायी समझौता चाहता है। रूस की ओर से यूक्रेन के कुछ क्षेत्रों पर उसके दावे और क्षेत्रीय रियायतों की मांग विवाद का प्रमुख मुद्दा बनी हुई है, जबकि कीव अपनी जमीन छोड़ने को तैयार नहीं है। दोनों पक्षों की अलग-अलग शर्तों के बीच शांति वार्ता में प्रगति नहीं हो सकी है और इसी दौरान हवाई हमले लगातार जारी हैं।

  • मिसाइल टिप्पणी पर ओवैसी और रामेश्वर शर्मा आमने-सामने, काजी कैंप से UCC तक भोपाल में तेज हुई राजनीतिक बयानबाजी

    मिसाइल टिप्पणी पर ओवैसी और रामेश्वर शर्मा आमने-सामने, काजी कैंप से UCC तक भोपाल में तेज हुई राजनीतिक बयानबाजी

    मध्य प्रदेश: की राजधानी भोपाल में भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विवाद की शुरुआत रामेश्वर शर्मा की उस टिप्पणी से हुई, जिसमें उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान करोंद चौराहे से काजी कैंप तक मिसाइल गिराने की बात कही थी। बाद में शर्मा ने सफाई देते हुए कहा कि उनका इशारा भोपाल के काजी कैंप की ओर नहीं, बल्कि इस्लामाबाद के काजी कैंप की ओर था।

    इस बयान के बाद मामला राजनीतिक विवाद में बदल गया। 15 सितंबर को भोपाल में आयोजित सभा में असदुद्दीन ओवैसी ने रामेश्वर शर्मा की टिप्पणी का जिक्र किया। उन्होंने शर्मा को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनमें हिम्मत है तो काजी कैंप में आकर मिसाइल गिराकर दिखाएं। ओवैसी ने यह भी कहा कि वह इस तरह के बयानों से डरने वाले नहीं हैं।

    ओवैसी की टिप्पणी के बाद रामेश्वर शर्मा ने भी पलटवार किया। उन्होंने कहा कि अगर ओवैसी बैरिस्टर हैं तो उन्हें बदतमीजी की भाषा छोड़कर उनका पूरा बयान सुनना चाहिए। शर्मा ने कहा कि यदि उनके बयान को लेकर कोई आपत्ति है तो अदालत का रास्ता अपनाया जा सकता है।

    रामेश्वर शर्मा ने अपने जवाब में ऑपरेशन सिंदूर, भारतीय मिसाइलों और आतंकवाद का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत की सेना ने आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में अपनी ताकत दिखाई है। शर्मा का कहना था कि जहां आतंकवाद के कैंप और भारत विरोधी गतिविधियां होंगी, वहां भारत की मिसाइल तैयार है।

    शर्मा ने यह भी कहा कि वह अपने पहले दिए गए बयान पर कायम हैं। इस दौरान उन्होंने ओवैसी के खिलाफ कई व्यक्तिगत और आपत्तिजनक टिप्पणियां भी कीं, जिससे दोनों नेताओं के बीच बयानबाजी और तीखी हो गई।

    यह राजनीतिक विवाद केवल मिसाइल वाली टिप्पणी तक सीमित नहीं रहा। समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर भी रामेश्वर शर्मा और असदुद्दीन ओवैसी के बीच मतभेद सामने आए। रामेश्वर शर्मा ने UCC का समर्थन करते हुए कहा कि यदि राजनीतिक दल हिंदुओं के वोट चाहते हैं तो हिंदू कानून को लेकर सवाल क्यों उठाए जाते हैं।

    शर्मा ने कहा कि UCC लागू होने से शादी और परिवार से जुड़े नियमों में एक समान व्यवस्था आएगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 2029 तक 21 राज्यों में UCC लागू होने की बात कही है और मध्य प्रदेश में यह लागू हो चुका है।

    वहीं, असदुद्दीन ओवैसी UCC का लगातार विरोध करते रहे हैं। भोपाल में आयोजित सभा के दौरान उन्होंने इस मुद्दे पर अपनी आपत्तियां सामने रखीं। इस तरह दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक मतभेद मिसाइल टिप्पणी से आगे बढ़कर समान नागरिक संहिता जैसे मुद्दे तक पहुंच गए।

    करोंद चौराहे और काजी कैंप के संदर्भ से शुरू हुआ यह विवाद अब आतंकवाद और UCC से जुड़े बयानों तक पहुंच चुका है। दोनों नेताओं की ओर से लगातार सामने आए बयानों और जवाबी टिप्पणियों के कारण भोपाल में इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हुई है। फिलहाल पूरा विवाद दोनों नेताओं के सार्वजनिक बयानों और उनके जवाबी बयानों के इर्द-गिर्द केंद्रित है।

  • यमन और सऊदी अरब में हूती हमलों से बढ़ा तनाव, 58 सैनिकों की मौत के बाद मिडिल ईस्ट में युद्ध का खतरा गहराया

    यमन और सऊदी अरब में हूती हमलों से बढ़ा तनाव, 58 सैनिकों की मौत के बाद मिडिल ईस्ट में युद्ध का खतरा गहराया

    नई दिल्ली । यमन और सऊदी अरब में हुए ताजा हमलों के बाद मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। गुरुवार को यमन में सेना के ठिकानों को मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई। इस हमले में 58 सैनिकों की मौत हो गई और कई अन्य घायल बताए गए हैं। इन हमलों के लिए ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। घटना के बाद यमन में सुरक्षा स्थिति और गंभीर हो गई है।

    यमन के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से हमला किया गया। हमले में बड़ी संख्या में सैनिक हताहत हुए। अधिकारियों ने कहा है कि इस कार्रवाई का जवाब उचित समय पर दिया जाएगा। सैन्य ठिकानों पर हुए हमले ने यमन में लंबे समय से जारी संघर्ष को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।

    इसी बीच सऊदी अरब के नजरान शहर में भी हमला हुआ। यहां 11 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। घायलों में सऊदी अरब के नागरिकों के साथ यमन, मिस्र और पाकिस्तान के नागरिक भी शामिल बताए गए हैं। घायलों में चार साल का एक बच्चा भी बताया गया है। हमले के बाद कुछ स्थानों पर आग लग गई, जिसके बाद बचाव दलों ने मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव अभियान चलाया।

    यमन और सऊदी अरब में लगभग एक ही समय पर सामने आई इन घटनाओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। खासतौर पर मिसाइल और ड्रोन के इस्तेमाल से यह आशंका पैदा हुई है कि संघर्ष का दायरा आगे और बढ़ सकता है। यदि इस तरह के हमले जारी रहते हैं तो इसका असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहने की संभावना है।

    मध्य पूर्व में तनाव ऐसे समय बढ़ रहा है जब महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों को लेकर भी स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब-अल-मंदेब जैसे प्रमुख समुद्री रास्तों से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति जुड़ी हुई है। इन मार्गों पर जहाजों की आवाजाही कम होने की खबरों ने वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ाई है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की चर्चाओं के बीच क्षेत्रीय घटनाक्रम पर भी नजर बनी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ने के संकेत दिए जाने के बावजूद क्षेत्र में सैन्य तनाव कम होता नजर नहीं आ रहा है। समुद्री मार्गों पर किसी नए शुल्क या सुरक्षा संकट की स्थिति में परिवहन लागत बढ़ सकती है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ सकता है।

    इसी दौरान लेबनान में हुए एक धमाके में दो इजराइली सैनिकों की मौत की जानकारी भी सामने आई है। अलग-अलग इलाकों में सामने आ रही ऐसी घटनाएं मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति को और जटिल बना रही हैं। एक मोर्चे पर तनाव कम होने की उम्मीद के बीच दूसरे क्षेत्र में हिंसा बढ़ने से स्थायी शांति की कोशिशों को चुनौती मिल रही है।

    हूती संगठन यमन का एक सशस्त्र विद्रोही संगठन है, जो लंबे समय से यमन की सरकार और सऊदी समर्थित गठबंधन के खिलाफ संघर्ष करता रहा है। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का आरोप है कि ईरान हूतियों को हथियार और सैन्य सहायता उपलब्ध कराता है। इसी वजह से हूती गतिविधियों को ईरान और क्षेत्रीय शक्तियों के बीच व्यापक तनाव से जोड़कर देखा जाता है।

    माना जाता है कि क्षेत्र में किसी एक पक्ष पर सैन्य या राजनीतिक दबाव बढ़ने पर दूसरे मोर्चों पर गतिविधियां तेज हो सकती हैं। ताजा हमलों ने इसी आशंका को फिर मजबूत किया है। यमन और सऊदी अरब में हुए हमलों के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती तनाव को और फैलने से रोकना है। आने वाले दिनों में सैन्य जवाब, समुद्री मार्गों की स्थिति और अमेरिका-ईरान बातचीत का असर पूरे मध्य पूर्व के घटनाक्रम पर पड़ सकता है।

  • ईरान पर हमलों के बीच ट्रंप ने ब्रिटेन के PM पर साधा निशाना, कहा युद्ध जीतने के बाद सहयोग की ज़रूरत नहीं

    ईरान पर हमलों के बीच ट्रंप ने ब्रिटेन के PM पर साधा निशाना, कहा युद्ध जीतने के बाद सहयोग की ज़रूरत नहीं


    नई दिल्ली । अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर अमेरिकी-इजरायली हमलों के बीच ब्रिटेन के समर्थन की कमी को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। शनिवार को ट्रंप ने प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर पर निशाना साधते हुए कहा कि यूरोपीय देश अब पश्चिम एशिया में एयरक्रॉफ्ट कैरियर भेजने पर विचार कर रहे हैं लेकिन अमेरिका को युद्ध जीतने के बाद ऐसे सहयोगियों की ज़रूरत नहीं है।

    ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट में लिखा यूनाइटेड किंगडम जो कभी हमारा महान सहयोगी था अब मिडिल ईस्ट में 2 विमानवाहक पोत भेजने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। ठीक है प्रधानमंत्री स्टार्मर हमें उनकी अब ज़रूरत नहीं है। हमें ऐसे लोग चाहिए ही नहीं जो युद्ध जीतने के बाद इसमें शामिल हों।

    इससे पहले ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने 7 मार्च के ऑपरेशन अपडेट में बताया कि अमेरिका ने ईरान पर रक्षात्मक अभियानों के लिए ब्रिटिश ठिकानों का उपयोग शुरू कर दिया है। इसका मकसद क्षेत्र में मिसाइल दागने से रोकना और ब्रिटिश नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था।

    ट्रंप ने इससे पहले भी ईरान पर ब्रिटेन के रुख को असहयोगी बताया था। उन्होंने कीर स्टार्मर की आलोचना करते हुए कहा कि वे विंस्टन चर्चिल नहीं हैं और दोनों देशों के संबंधों को बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं।

    ब्रिटेन की संसद में बुधवार को प्रधानमंत्री स्टार्मर ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी विमान ब्रिटिश ठिकानों से उड़ान भर रहे हैं और ब्रिटिश जेट संयुक्त ठिकानों से मिडिल ईस्ट में अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा के लिए ड्रोन और मिसाइलों को मार गिरा रहे हैं। उन्होंने कहा यही स्पेशल रिलेशनशिप है – अपने लोगों की सुरक्षा के लिए रोज़ खुफिया जानकारी साझा करना।

    विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप का बयान अमेरिका-यूके के बीच संबंधों में तनाव बढ़ा सकता है जबकि ब्रिटेन अपनी भूमिका को रक्षात्मक और सुरक्षा-केंद्रित बताते हुए स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है। इस बीच क्षेत्र में तनाव और बढ़ता नजर आ रहा है क्योंकि ईरान अमेरिका और इजराइल के बीच सैन्य गतिवधियों की तीव्रता बढ़ रही है।