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  • यूक्रेन में मिसाइलों के साए में पढ़ाई, जमीन के नीचे बने 74 स्कूल, बंकरों में तैयार हो रही नई पीढ़ी

    यूक्रेन में मिसाइलों के साए में पढ़ाई, जमीन के नीचे बने 74 स्कूल, बंकरों में तैयार हो रही नई पीढ़ी


    नई दिल्ली। चार साल से ज्यादा समय से रूस के ड्रोन और मिसाइल हमलों का सामना कर रहे यूक्रेन में बच्चों की पढ़ाई का तरीका भी युद्ध के बीच बदल गया है। देश में अब 74 पूरी तरह भूमिगत स्कूल संचालित हो रहे हैं, जहां जमीन के ऊपर से सिर्फ खेल का मैदान या फुटबॉल टर्फ दिखाई देता है, लेकिन कई मीटर नीचे कंक्रीट की मजबूत दीवारों के बीच बच्चों की कक्षाएं चल रही हैं। सुरंगनुमा गलियारों में बने क्लासरूम, बेंचों पर बैठे बच्चे और ब्लैकबोर्ड पर लिखे नए पाठ इस बात की तस्वीर पेश करते हैं कि युद्ध के बीच भी शिक्षा को जारी रखने की कोशिश कैसे हो रही है।

    दक्षिणी यूक्रेन के औद्योगिक शहर जापोरिजिया में स्कूल खुलने का दृश्य किसी साइंस-फिक्शन फिल्म जैसा नजर आता है। शहर युद्ध के मोर्चे से महज 15 किलोमीटर दूर है और लगातार ड्रोन व मिसाइल हमलों के बावजूद यहां बच्चों की पढ़ाई को जारी रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। माता-पिता के लिए ये भूमिगत स्कूल डर के बीच सुरक्षा और बच्चों की शिक्षा दोनों का भरोसा बन गए हैं।

    ‘पाताल में गए बिना बच्चों को पढ़ाना मुश्किल’

    39 वर्षीय किराना दुकानदार ऑलेक्सांद्र लागिन के दो बेटे भी जमीन के नीचे बने स्कूल में पढ़ते हैं। उनका कहना है कि ड्रोन और मिसाइल हमलों के दौर में बच्चों को सुरक्षित रखते हुए सामान्य तरीके से पढ़ाना बेहद मुश्किल हो गया है। जापोरिजिया ने इस चुनौती से निपटने के लिए भूमिगत स्कूलों का विकल्प अपनाया है।

    दिलचस्प यह है कि युद्ध क्षेत्र के इतने करीब होने के बावजूद जापोरिजिया बच्चों को निर्बाध शिक्षा देने के मामले में राजधानी कीव से बेहतर तैयार नजर आता है।

    कीव में सायरन बजते ही पढ़ाई बंद

    कीव के स्कूलों में हवाई हमले का अलर्ट शिक्षा व्यवस्था को सीधे प्रभावित करता है। यहां एक स्कूल के दिन में औसतन 158 मिनट तक हवाई सायरन बजते रहते हैं। सायरन शुरू होते ही बच्चों को सामान्य बेसमेंट में ले जाया जाता है। वहां जगह सीमित होने के कारण पढ़ाई रुक जाती है और बच्चे अलर्ट खत्म होने का इंतजार करते हैं।

    इसके उलट जापोरिजिया में यूरोपीय फंडिंग की मदद से 10 अत्याधुनिक भूमिगत स्कूल बनाए गए हैं। इन स्कूलों की खास डिजाइन के कारण हवाई हमले के सायरन के दौरान भी कक्षाएं जारी रखी जा सकती हैं।

    बंकर में सुरक्षा के साथ पढ़ाई की पूरी व्यवस्था

    भूमिगत स्कूलों को सिर्फ कंक्रीट की मोटी दीवारों से सुरक्षित नहीं बनाया गया है, बल्कि यहां सामान्य स्कूल जैसी सुविधाओं के साथ सुरक्षा की आधुनिक तकनीक भी इस्तेमाल की गई है।

    इन स्कूलों में ऐसे अत्याधुनिक एयर डक्ट लगाए गए हैं, जो रेडिएशन और जहरीले धुएं को फिल्टर करने में सक्षम हैं। रूसी हमलों के दौरान बिजली का ग्रिड ठप होने की स्थिति में हेवी-ड्यूटी डीजल जनरेटर अपने आप चालू हो जाते हैं। बच्चों के लिए वेंटिलेशन पाइपों की व्यवस्था कंक्रीट की दीवारों के सहारे की गई है, जबकि इन्हीं सुरक्षित गलियारों और जगहों के बीच वे खेलते भी हैं।

    छात्र बोले- सायरन से डर नहीं, खेल छूटने का अफसोस

    8वीं कक्षा के छात्र डामिर का कहना है कि उसे भूमिगत स्कूल में पढ़ना अच्छा लगता है और यहां उसे डर नहीं लगता। हालांकि, फुटबॉल खेलते समय अगर सायरन बज जाए तो उसे खेल बीच में छोड़कर नीचे जाना पड़ता है और यही बात उसे खराब लगती है।

    युद्ध के माहौल में पले-बढ़ रहे बच्चों के लिए अब सायरन, बंकर और हमले रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं।

    सैनिक पिता: अब मोर्चे पर कम चिंता होती है

    8वीं कक्षा में पढ़ने वाले 13 वर्षीय डैनिलो के पिता दिमित्रो सिजीख युद्ध के मोर्चे पर तैनात हैं। बेटे के सुरक्षित भूमिगत स्कूल में पढ़ने से उन्हें भी राहत मिली है। उनका कहना है कि बेटे की सुरक्षा को लेकर भरोसा होने के कारण वे मोर्चे पर अपने कर्तव्य का निर्वहन अधिक निश्चिंत होकर कर पा रहे हैं।

    युद्ध का असर बच्चों की पढ़ाई पर भी

    सुरक्षित स्कूलों के बावजूद युद्ध का मानसिक असर बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा है। कीव की रिसर्च संस्था ‘सीडोस’ की शिक्षा विश्लेषक टेटियाना झेरियोबकिना के मुताबिक युद्ध से पैदा हुआ मानसिक तनाव और लगातार बना डर परीक्षाओं में बच्चों के प्रदर्शन को प्रभावित कर रहा है। तनाव और भय के कारण उनके टेस्ट स्कोर में गिरावट देखने को मिल रही है।

    जापोरिजिया के एक स्कूल की प्रिंसिपल हलीना वोल्कोवा गलियारे से गुजरते एक बच्चे को गले लगाते हुए कहती हैं कि वे मौजूदा हालात को भयावह या कयामत का मंजर कहकर नहीं देखते, क्योंकि यही अब उनकी जिंदगी की वास्तविकता बन चुकी है।

    युद्ध ने यूक्रेन के बच्चों से सामान्य बचपन छीन लिया है, लेकिन इन भूमिगत स्कूलों में किताबें, ब्लैकबोर्ड और खेल के बीच उनकी पढ़ाई जारी है। जमीन के ऊपर युद्ध चल रहा है और जमीन के नीचे एक पूरी पीढ़ी अपने भविष्य की तैयारी कर रही है।

  • डीआरडीओ की विकसित पारंपरिक मिसाइल तकनीक भारतीय उद्योगों को मिलेगी, रक्षा उत्पादन और सेनाओं की युद्धक तैयारी को बढ़ावा

    डीआरडीओ की विकसित पारंपरिक मिसाइल तकनीक भारतीय उद्योगों को मिलेगी, रक्षा उत्पादन और सेनाओं की युद्धक तैयारी को बढ़ावा


    नई दिल्ली ।भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ द्वारा विकसित सभी पारंपरिक मिसाइल प्रणालियों की तकनीक भारतीय उद्योगों को हस्तांतरित करने की मंजूरी दी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की इस मंजूरी के बाद निर्धारित योग्यता और आवश्यक मानकों को पूरा करने वाली भारतीय कंपनियां इन मिसाइल प्रणालियों का देश में उत्पादन कर सकेंगी।

    इस फैसले का सीधा असर भारत की स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता पर पड़ने की उम्मीद है। अब तक मिसाइल प्रणालियों के अनुसंधान, विकास और तकनीकी परीक्षण में डीआरडीओ की प्रमुख भूमिका रही है। नई व्यवस्था के तहत विकसित और निर्धारित मानकों पर खरी उतरने वाली तकनीक को उद्योगों तक पहुंचाया जाएगा, जिससे अनुसंधान से बड़े पैमाने पर उत्पादन तक की प्रक्रिया को तेज किया जा सके।

    रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य केवल देश में हथियारों का इस्तेमाल करने या तकनीक विकसित करने तक सीमित नहीं है। इसके लिए उत्पादन क्षमता, आपूर्ति श्रृंखला, जरूरी कलपुर्जों की उपलब्धता और तकनीकी विशेषज्ञता का घरेलू स्तर पर मजबूत होना भी जरूरी है। मिसाइल तकनीक के हस्तांतरण से इन सभी क्षेत्रों में भारतीय उद्योगों की भागीदारी बढ़ने की संभावना है।

    इस व्यवस्था के तहत योग्य कंपनियां डीआरडीओ की विकसित तकनीक का इस्तेमाल करते हुए मिसाइल प्रणालियों के औद्योगिक उत्पादन में भूमिका निभाएंगी। इससे भारतीय सशस्त्र बलों के लिए आवश्यक प्रणालियों की आपूर्ति को अधिक व्यवस्थित और समयबद्ध बनाने में मदद मिल सकती है। घरेलू उत्पादन बढ़ने से विदेशी स्रोतों पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी प्रगति होने की उम्मीद है।

    इस फैसले का एक महत्वपूर्ण पहलू रक्षा क्षेत्र की आपूर्ति श्रृंखला में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों यानी एमएसएमई के लिए अवसर बढ़ना है। मिसाइल निर्माण केवल मुख्य प्रणाली तैयार करने तक सीमित नहीं होता। इसमें इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, विशेष सामग्री, सेंसर, संचार प्रणालियों, यांत्रिक हिस्सों और अन्य तकनीकी घटकों की जरूरत होती है। ऐसे में बड़ी कंपनियों के साथ छोटे और मध्यम भारतीय उद्यम भी उत्पादन प्रक्रिया से जुड़ सकते हैं।

    सरकार की व्यापक रणनीति देश में ऐसा रक्षा औद्योगिक आधार तैयार करने की है, जिसमें अनुसंधान संस्थानों और निजी उद्योगों के बीच बेहतर तालमेल हो। डीआरडीओ नई और उन्नत सैन्य तकनीकों के अनुसंधान एवं विकास पर अधिक ध्यान दे सकता है, जबकि पहले से विकसित तकनीकों को औद्योगिक उत्पादन में बदलने की जिम्मेदारी प्रमाणित भारतीय कंपनियां संभाल सकती हैं।

    इससे नई सैन्य तकनीक विकसित होने और उसे बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए उपलब्ध कराने के बीच लगने वाले समय को कम करने में भी मदद मिलने की संभावना है। भारतीय उद्योगों को तकनीकी क्षमता विकसित करने और रक्षा उत्पादन में अपनी भूमिका बढ़ाने का अवसर मिलेगा।

    भारत पिछले कुछ वर्षों से स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ाने और सैन्य उपकरणों के घरेलू निर्माण को मजबूत करने पर जोर दे रहा है। मिसाइल तकनीक को भारतीय उद्योगों तक पहुंचाने का यह निर्णय उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे रक्षा क्षेत्र में घरेलू विनिर्माण, तकनीकी क्षमता और आपूर्ति व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    कुल मिलाकर, डीआरडीओ की विकसित मिसाइल तकनीक को भारतीय उद्योगों के लिए उपलब्ध कराने से अनुसंधान और उत्पादन के बीच की दूरी कम करने का प्रयास किया गया है। यह कदम भारतीय कंपनियों और एमएसएमई की भागीदारी बढ़ाने के साथ देश की रक्षा आत्मनिर्भरता को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

  • अमेरिका ईरान तनाव के बीच यूएई में मिसाइल खतरे का अलर्ट, एयर डिफेंस ने कार्रवाई कर स्थिति संभाली

    अमेरिका ईरान तनाव के बीच यूएई में मिसाइल खतरे का अलर्ट, एयर डिफेंस ने कार्रवाई कर स्थिति संभाली


    नई दिल्ली । 
    पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर संयुक्त अरब अमीरात में भी देखने को मिला। यूएई के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, देश की ओर बढ़ रहे मिसाइल खतरे का पता एयर डिफेंस सिस्टम ने लगाया। इसके बाद दुबई में लोगों के मोबाइल फोन पर पहली बार मिसाइल खतरे को लेकर इमरजेंसी अलर्ट भेजा गया। प्रशासन ने लोगों से घबराने के बजाय आधिकारिक सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की।

    मिसाइल अलर्ट जारी होने के दौरान दुबई और आसपास के इलाकों में आसमान से तेज आवाजें सुनाई देने की जानकारी सामने आई। यूएई के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन आवाजों का संबंध एयर डिफेंस सिस्टम की कार्रवाई से था। सुरक्षा प्रणाली ने देश की ओर बढ़ रहे मिसाइल खतरे का मुकाबला करने और मिसाइलों को हवा में रोकने की कोशिश की।

    यूएई सरकार ने कहा कि देश की सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं तैयार हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने स्थिति पर लगातार निगरानी बनाए रखी। कुछ समय बाद एक दूसरा अलर्ट जारी किया गया, जिसमें बताया गया कि मिसाइल का खतरा समाप्त हो गया है और स्थिति सामान्य हो गई है।

    यूएई के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि ईरान की ओर से दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गई थीं। मंत्रालय के अनुसार, इनमें से एक मिसाइल यूएई की समुद्री सीमा से बाहर जाकर गिरी, जबकि दूसरी मिसाइल देश की सीमा के अंदर गिरी। अधिकारियों ने लोगों को भरोसा दिलाया कि स्थिति नियंत्रण में है और सुरक्षा व्यवस्था लगातार सक्रिय है।

    मिसाइल अलर्ट के बाद यूएई में नागरिक सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ गई। मोबाइल फोन पर जारी आपात संदेश का उद्देश्य लोगों को संभावित खतरे के प्रति तत्काल सावधान करना था। प्रशासन की ओर से नागरिकों को अफवाहों से बचने और केवल आधिकारिक निर्देशों पर भरोसा करने की अपील की गई।

    इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं दिखाई दे रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच कोई बातचीत नहीं हो रही है। उन्होंने दोनों देशों के बीच तत्काल बातचीत की किसी योजना से भी इनकार किया।

    ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भी बयान दिया। उन्होंने दावा किया कि समुद्री मार्ग जहाजों के लिए खुला है और पानी में बिछाई गई माइंस को हटा दिया गया है। दूसरी ओर, ईरान की ओर से इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को बंद करने की बात सामने आने के बाद क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है।

    अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का प्रभाव पश्चिम एशिया से बाहर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से ऊर्जा बाजारों में चिंता बढ़ी है। तेल की कीमतों में लंबे समय तक मजबूती बनी रहने पर कई देशों में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है और आर्थिक गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है।

    तनाव बढ़ने का असर शेयर बाजारों पर भी दिखाई देने लगा है। निवेशकों के बीच अनिश्चितता बढ़ने से कई बाजारों में दबाव देखने को मिला है। इसके साथ ही बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में कर्ज की लागत बढ़ने की चिंता भी सामने आई है।

    फिलहाल यूएई में मिसाइल खतरा समाप्त होने की घोषणा के बाद स्थिति सामान्य बताई गई है, लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। आने वाले समय में दोनों देशों के सैन्य कदम, कूटनीतिक संपर्क और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।

  • ट्रंप-जेलेंस्की मुलाकात के बाद रूस ने यूक्रेन पर कर दी मिसाइल और ड्रोन की बारिश

    ट्रंप-जेलेंस्की मुलाकात के बाद रूस ने यूक्रेन पर कर दी मिसाइल और ड्रोन की बारिश


    मॉस्को/कीव।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की वॉशिंगटन में हुई बैठक के कुछ ही समय बाद रूस ने यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, हमलों में देश के कई प्रमुख शहरों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। इन हमलों की टाइमिंग को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।

    रिपोर्टों के अनुसार, रूस ने बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों के साथ बड़ी संख्या में ड्रोन का इस्तेमाल किया। हमलों का असर कीव, ल्विव और नीप्रोपेत्रोव्स्क सहित कई क्षेत्रों में देखा गया। यूक्रेन ने दावा किया कि कई सैन्य और नागरिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया, जबकि रूस का कहना है कि उसके हमले केवल सैन्य लक्ष्यों पर केंद्रित थे।

    पैट्रियट एयर डिफेंस पर चर्चा के बीच हमला

    ट्रंप और जेलेंस्की की बैठक के दौरान यूक्रेन की वायु सुरक्षा क्षमता बढ़ाने और पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम की उपलब्धता पर चर्चा हुई थी। माना जा रहा है कि रूस ने ऐसे समय में हमला कर यूक्रेन की मौजूदा वायु सुरक्षा चुनौतियों का लाभ उठाने की कोशिश की। हालांकि, इस संबंध में रूस की ओर से आधिकारिक तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की गई है।

    पोलैंड सीमा के निकट भी बढ़ी सतर्कता

    हमलों के दौरान एक रूसी मिसाइल के पोलैंड की सीमा के निकट पहुंचने की खबरों के बाद पड़ोसी देश पोलैंड ने अपनी वायु सुरक्षा व्यवस्था को अलर्ट पर रखा। पोलिश अधिकारियों ने स्थिति पर नजर रखने और सुरक्षा उपाय बढ़ाने की पुष्टि की है। हालांकि, घटना के कारणों और परिस्थितियों की जांच जारी है।

    रूस ने सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना

    रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि हमलों का उद्देश्य यूक्रेन के सैन्य एयरबेस, हथियार निर्माण इकाइयों, ड्रोन भंडारण केंद्रों और अन्य सैन्य अवसंरचना को निशाना बनाना था। मंत्रालय ने इसे यूक्रेन की ओर से हाल के दिनों में रूस के भीतर किए गए ड्रोन हमलों के जवाब में की गई कार्रवाई बताया।

    कूटनीतिक प्रयासों पर असर की आशंका

    विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप-जेलेंस्की बैठक के तुरंत बाद हुए इन हमलों से रूस-यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने के कूटनीतिक प्रयासों को झटका लग सकता है। हालांकि, हमलों की टाइमिंग के पीछे रूस का क्या संदेश था, इस बारे में आधिकारिक स्तर पर कोई पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इससे जुड़े विभिन्न दावों को अभी विश्लेषकों के आकलन के रूप में ही देखा जा रहा है।

    रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के बीच ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।

  • ईरान ने खाड़ी देशों और तेल जहाजों को भी निशाना बनाया, आईडीएफ प्रवक्ता ने जताया गंभीर खतरा

    ईरान ने खाड़ी देशों और तेल जहाजों को भी निशाना बनाया, आईडीएफ प्रवक्ता ने जताया गंभीर खतरा


    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका इजरायल के बीच जारी भीषण संघर्ष से पूरे इलाके में तनाव चरम पर है। इस बीच इजरायल डिफेंस फोर्स आईडीएफ के प्रवक्ता बीजी एफी डेफ्रिन ने आईएएनएस को हालात की गंभीरता के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हालिया संघर्ष का मुख्य मकसद ईरान की न्यूक्लियर और मिसाइल क्षमताओं को नियंत्रित करना है।

    आईडीएफ प्रवक्ता ने कहा हमने दो हफ्ते पहले इजरायल पर संभावित खतरे को हटाने के लिए कार्रवाई की। ईरान ने वर्षों से अपनी न्यूक्लियर क्षमता विकसित की है और जून में किए गए हमले के बाद वे इसे फिर से शुरू कर रहे थे। उनका प्रयास यह था कि न्यूक्लियर प्रोजेक्ट को जमीन के नीचे छिपाया जाए ताकि इजरायल और अमेरिका के बमों से बचा जा सके। यह हमारे लिए गंभीर खतरा है।

    एफी डेफ्रिन ने ईरान के मिसाइल प्रोजेक्ट का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार ईरान हजारों बैलिस्टिक मिसाइलें और लॉन्चर बना रहा था जिनकी रेंज 2 000 से 3 000 किलोमीटर तक थी। इन मिसाइलों का उद्देश्य इजरायल पर हमला करना था। वे महीने में सैकड़ों हथियार तैयार करने की योजना बना रहे थे और यह स्तर हमारे लिए बर्दाश्त के बाहर था उन्होंने कहा।

    प्रवक्ता ने कहा कि अब ईरान ने खाड़ी देशों और कमर्शियल तेल जहाजों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है। वे अपने पुराने मित्र देशों ओमान यूएई बहरीन और सऊदी अरब पर हमला कर रहे हैं जिन्होंने ईरान के साथ कभी बुरा नहीं किया। इनके हमले मिलिट्री टारगेट पर नहीं बल्कि सिविलियन टारगेट जैसे अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट और बुर्ज खलीफा पर हो रहे हैं। यह केवल उनकी असली प्रवृत्ति दिखाता है।

    एफी डेफ्रिन ने जोर देकर कहा कि आईडीएफ इस स्थिति को गंभीरता से देख रहा है। पड़ोसी देशों के साथ हमारे अच्छे संबंध हैं और यह इतिहास का एक मौका है। हमारा लक्ष्य पूरे इलाके में स्थायी शांति बनाना है। ईरान केवल इजरायल के लिए खतरा नहीं है बल्कि यह एक क्षेत्रीय समस्या है जिसे सुलझाना जरूरी है।

    आईडीएफ प्रवक्ता की यह प्रतिक्रिया यह स्पष्ट करती है कि इजरायल ईरानी न्यूक्लियर और मिसाइल कार्यक्रमों साथ ही उनके बढ़ते आक्रामक रवैये को लेकर सतर्क है। साथ ही खाड़ी देशों और वैश्विक तेल परिवहन पर ईरानी हमलों को गंभीर खतरे के रूप में देखा जा रहा है।

    इस बयान से यह भी संकेत मिलता है कि पश्चिम एशिया में तनाव और सुरक्षा खतरे केवल द्विपक्षीय नहीं हैं बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए चुनौतीपूर्ण हैं। आईडीएफ के अनुसार इलाके में शांति बनाए रखना और पड़ोसी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अब उनकी प्राथमिकता बन गई है।

  • रूस ने यूक्रेन पर फिर ढाया कहर; पावरग्रिड पर मिसाइलों से हमला

    रूस ने यूक्रेन पर फिर ढाया कहर; पावरग्रिड पर मिसाइलों से हमला

    कीव । रूस ने यूक्रेन पर एक और हमला बोला है। चार दिनों के अंदर यह यूक्रेन पर चौथा बड़ा ड्रोन हमला है। अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि इस बार भी पावर ग्रिड पर निशाना लगाया गया। इन हमलों से अमेरिका द्वारा रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध बंद कराने के प्रयासों को भी ठेस पहुंची है। गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच करीब चार साल से युद्ध जारी है।

    यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि रूस ने करीब 300 ड्रोन, 18 बैलेस्टिक मिसाइल और सात क्रूज मिसाइल से हमला बोला है। रात भर चला यह हमला आठ क्षेत्रों पर हुआ। इसमें उत्तर पूर्व खारकीव में एक मेल डिपो में चार लोगों की मौत हो गई। इसके अलावा कीव क्षेत्र में सैकड़ों घर अंधेरे में डूब गए। यूक्रेन की राजधानी में इन दिनों भीषण ठंड पड़ रही है। यहां पर दिन का तापमान माइनस 12 डिग्री सेल्सियस है।

    गलियां बर्फ से ढंकी हुई हैं और जेनरेटरों के शोर से शहर का बुरा हाल है।

    कई आवासीय भवनों को नुकसान
    स्थानीय अधिकारियों मुताबिक रूसी हमलों में यूक्रेन के खारकीव क्षेत्र में, 10 लोग घायल हुए। वहीं, दक्षिणी शहर ओडेसा में, छह लोग घायल हुए। क्षेत्रीय सैन्य प्रशासन के प्रमुख ओलेह किपर ने कहा कि हमलों ने एनर्जी ग्रिड, एक अस्पताल, एक किंडरगार्टन, एक शैक्षिक संस्थान और कई आवासीय भवनों को नुकसान पहुंचाया। रूसी हमलों ने भीषण ठंड में यूक्रेनी नागरिकों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। रूस द्वारा पावर ग्रिड पर हमले से बिजली और पानी की सप्लाई बाधित हो रही है। रूस चाहता है कि यूक्रेनी नागरिकों की मुश्किलें बढ़ाकर वह युद्ध में बढ़त हासिल कर ले। वहीं यूक्रेनी अधिकारियों ने इस रणनीति को सर्दी को हथियार बनाने की रणनीति बताया है।

    चार दिन पहले भी निशाना
    चार दिन पहले रूस ने यूक्रेन पर सैकड़ों ड्रोन और दर्जनों मिसाइल से बड़ा हमला किया था। इस युद्ध में सिर्फ दूसरी बार ऐसा हुआ जब ताकतवर हाइपरसोनिक मिसाइल का इस्तेमाल किया गया।

    पश्चिमी यू्क्रेन पर हुए इस हमले के जरिए रूस ने यू्क्रेन के नाटो सहयोगियों को यह संदेश देने की कोशिश की कि पीछे हटने वाला नहीं है। सोमवार को ही अमेरिका ने रूस पर आरोप लगाया है कि वह युद्ध को गैरजरूरी ढंग से भड़का रहा है। बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार इस कोशिश में जुटे हैं कि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध बंद हो जाए।