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  • निजी यात्रा पर गए इंफोसिस पब्लिक सर्विसेज के CEO लापता… नेपाल बाढ़ के बाद से नहीं हो रहा संपर्क

    निजी यात्रा पर गए इंफोसिस पब्लिक सर्विसेज के CEO लापता… नेपाल बाढ़ के बाद से नहीं हो रहा संपर्क


    नई दिल्ली।
    इंफोसिस (Infosys) ने शुक्रवार को बताया कि उसकी सहायक कंपनी इंफोसिस पब्लिक सर्विसेज (Infosys Public Services) के प्रमुख लैक्स गोपीसेट्टी (Lax Gopisetty) नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद से संपर्क में नहीं हैं। इंफोसिस पब्लिक सर्विसेज, सूचना प्रौद्योगिकी सेवा कंपनी इंफोसिस की सहायक कंपनी है। यह कंपनी मुख्य रूप से अमेरिका और कनाडा के सरकारी क्षेत्र के लिए काम करती है।

    इंफोसिस ने बताया कि गोपीसेट्टी निजी यात्रा पर इस इलाके में गए थे। कंपनी ने कहा कि इस समय उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता उनकी सुरक्षा और सेहत सुनिश्चित करना है। इंफोसिस ने एक बयान में कहा, हम पुष्टि कर सकते हैं कि हमारे सहयोगी लैक्स गोपिसेट्टी फिलहाल संपर्क में नहीं हैं, जो निजी यात्रा पर इस इलाके में गए थे।

    कंपनी ने आगे कहा कि वह संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर जानकारी जुटा रही है। साथ ही गोपीसेट्टी से संपर्क करने की कोशिश भी की जा रही है। इंफोसिस ने यह भी कहा कि वह गोपीसेट्टी के परिवार के लगातार संपर्क में है। कंपनी इस मुश्किल समय में परिवार को हर जरूरी मदद दे रही है।

    इंफोसिस ने कहा, हम परिवार के लगातार संपर्क में हैं और इस मुश्किल समय में हर जरूरी मदद दे रहे हैं। हमारी संवेदनाएं लैक्स और इस त्रासदी से प्रभावित सभी लोगों के साथ हैं। कंपनी ने कहा कि नेपाल में आई भयानक बाढ़ और इसमें हुई लोगों की मौत से उसे बहुत दुख हुआ है।


    फंसे हुए भारतीयों को लेकर एमईए ने क्या कहा?

    विदेश मंत्रालय (एमईए) ने शुक्रवार को बताया कि नेपाल-तिब्बत सीमा पर अचानक आई बाढ़ के बाद कम से कम 320 भारतीय अब भी लापता हैं। वहीं, 400 अन्य भारतीय चीन की तरफ फंसे हुए हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत काठमांडू को इस स्थिति से निपटने के लिए हरसंभव मदद देने के लिए तैयार है।

    एमईए ने बताया कि चीन की तरफ फंसे 153 भारतीय नागरिक सुरक्षित नेपाल पहुंच गए हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि 21 भारतीय शुक्रवार दोपहर नई दिल्ली पहुंचे। ये लोग एक दिन पहले नेपाल के बाढ़ प्रभावित इलाकों से काठमांडू पहुंचे थे।


    गोपीसेट्टी क्या काम करते हैं?

    इंफोसिस की वेबसाइट पर दी गई उनकी प्रोफाइल के मुताबिक, गोपीसेट्टी सरकारी क्षेत्र के संगठनों को रणनीति, तकनीक, कामकाज और बदलाव से जुड़े मामलों में सलाह देते हैं। इसका मकसद सरकारी एजेंसियों के काम और लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करना है। वह कंपनी की रणनीति और उसे लागू करने के काम की भी देखरेख करते हैं, ताकि तय उद्देश्यों को पूरा किया जा सके।

    इस पद पर आने से पहले गोपीसेट्टी इंफोसिस में ग्लोबल वाइस प्रेसिडेंट थे। वह बिजनेस एप्लीकेशंस और डिजिटल वर्कस्पेस सर्विस के प्रमुख भी थे। इस दौरान उन्होंने अमेरिका, यूरोप और एशिया में इस काम का विस्तार किया।

    इंफोसिस में शामिल होने से पहले गोपिसेट्टी एक्सेंचर में प्रबंध निदेशक थे। वहां उन्होंने उत्तर अमेरिका में कंपनी के हेल्थ एंड पब्लिक सर्विसेज कारोबार के एक हिस्से का नेतृत्व किया। इंफोसिस की वेबसाइट के मुताबिक, गोपीसेट्टी ने बियरिंगपॉइंट, आईबीएम, पीडब्ल्यूसी और एचसीएल में भी तेजी से बढ़ते कारोबार और सेवाओं को खड़ा किया है।

  • ‘सबकी जान खतरे में है…’ नेपाल हादसे के बीच भोपाल के एक परिवार की बढ़ी चिंता, 24 घंटे से चार सदस्य लापता

    ‘सबकी जान खतरे में है…’ नेपाल हादसे के बीच भोपाल के एक परिवार की बढ़ी चिंता, 24 घंटे से चार सदस्य लापता


    भोपाल। नेपाल में आई भीषण बाढ़ और फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। इस आपदा के बीच भोपाल से भी एक चिंताजनक खबर सामने आई है। शहर की रहने वाली देविका अधिकारी के परिवार के चार सदस्य नेपाल हादसे के बाद से संपर्क से बाहर हैं। इनमें उनके बड़े भाई, छोटे भाई और दोनों भाभियां शामिल हैं।

    देविका अधिकारी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि 24 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद चारों से कोई संपर्क नहीं हो सका है। इस दौरान परिवार की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।

    आखिरी बातचीत में कहा- ‘सबकी जान खतरे में है’

    देविका के मुताबिक, परिवार की आखिरी बार बड़े भाई से बातचीत हुई थी। उस समय उन्होंने बताया था कि ‘सबकी जान खतरे में है’ और वे लोग जान बचाने के लिए पहाड़ पर जाकर छिपे हुए हैं।

    परिवार के अनुसार, बातचीत के दौरान उन्होंने बच्चों का ध्यान रखने की बात भी कही थी। इसके बाद से ही चारों का फोन संपर्क नहीं हो पाया है। परिवार अब नेपाल में जारी रेस्क्यू ऑपरेशन और प्रशासन से मिलने वाली जानकारी का इंतजार कर रहा है।

    सरकार ने जारी की हेल्पलाइन

    नेपाल में लगातार बिगड़ते हालात के बीच भोपाल के नेपाली समाज और लापता लोगों के परिवारों की चिंता बढ़ती जा रही है। मध्य प्रदेश सरकार ने नेपाल में फंसे लोगों और उनके परिजनों की मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर 011-26772005 और व्हाट्सऐप नंबर 9818963273 जारी किया है।

    परिजन इन नंबरों पर संपर्क कर नेपाल में फंसे या लापता लोगों से संबंधित जानकारी हासिल कर सकते हैं।

    392 लोगों की मौत, 1500 से ज्यादा लापता

    नेपाल में बाढ़ के बाद आई भीषण तबाही में अब तक 392 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1500 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद 290 भारतीय नागरिकों से भी संपर्क नहीं हो पा रहा है, जिनकी तलाश की जा रही है।

    नेपाल के रसुवा क्षेत्र में भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई है। बाढ़ के कारण सड़क और संपर्क व्यवस्था को भी भारी नुकसान पहुंचा है।

    सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बाढ़ में 35 पुल और 45 सस्पेंशन ब्रिज बह गए हैं। इससे कई इलाकों का एक-दूसरे से संपर्क टूट गया है और राहत एवं बचाव अभियान में भी मुश्किलें सामने आ रही हैं।

    नेपाल की इस आपदा के बीच अब भोपाल समेत मध्य प्रदेश के उन परिवारों की चिंता भी बढ़ गई है, जिनके अपने लोग वहां फंसे हुए हैं या जिनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है।

  • नेपाल में आई तबाही के बाद भोपाल के 29 लोग लापता…. गोसाईकुंडा तीर्थ गए थे घूमने

    नेपाल में आई तबाही के बाद भोपाल के 29 लोग लापता…. गोसाईकुंडा तीर्थ गए थे घूमने


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल (Bhopal) का एक परिवार और उनसे जुड़े कुल 29 लोग नेपाल (Nepal) में अचानक आई भीषण बाढ़ (Devastating floods) के बाद से लापता हैं। परिवार की एक महिला ने उनके बारे में जानकारी देते हुए बताया कि ये सभी लोग जोड़े से नेपाल के रसुवा जिले में स्थित गोसाईकुंडा तीर्थ (Gosaikunda Pilgrimage) में घूमने गए थे। इसी दौरान वहां आई इस बाढ़ में फंस गए।

    महिला ने बताया कि परिवार के एक सदस्य से जो आखिरी बार बात हुई थी, उसमें उन्होंने कहा था कि हम लोग एक मकान की छत पर खड़े हुए हैं, लेकिन हमारा बचना मुश्किल है, आप लोग हमारे बच्चों को देख लेना, आप उनकी देखभाल करना।

    नेपाल में लापता हुए 29 सदस्यों की जानकारी देते हुए परिवार की महिला देवकी अधिकारी ने बताया, ‘मेरे जेठ-जेठानी, देवर-देवरानी, दीदी-जीजाजी को मिलाकर कुल 29 लोग वहां गए हैं। ये सभी लोग जोड़े से वहां एक तीर्थ की यात्रा करने गए हैं, जहां पर पूर्णिमा पर दर्शन करने जाते हैं।’


    खाना अधूरा छोड़कर भागे, सामान भी नहीं उठाया

    महिला ने बताया कि ये लोग बुधवार को जब निकले थे, तो वहां ऐसी कोई आशंका नहीं थी, कि आगे जाकर कोई खतरा हो सकता है। लेकिन आगे जाकर जब वे खाना खाने के लिए रुके थे, वहां उन्हें पता चला कि पीछे से कोई बाढ़ आ रही है, जिसमें जान का खतरा है। जिसके बाद वे जल्दबाजी में अधूरा खाना छोड़कर उठे और अपनी बस व सामान को छोड़कर वहां से भागे, और जैसे-तैसे पास में स्थिति पहाड़ पर चढ़कर वहां बने एक मकान की छत पर जाकर रूके।’


    ‘आधा घर डूब चुका है, अब हम लोग नहीं बचेंगे’

    महिला ने आगे कहा कि ‘वहां पहुंचकर उन्हें लगा था कि शायद वो बच जाएंगे। लेकिन जब ऐसा होना मुश्किल लगा तो उनमें से एक रिश्तेदार में घर पर फोन लगाकर पूरा घटनाक्रम बताया और कहा कि हमारी बस तो चली गई है और हम फिलहाल छत पर आकर रूके हैं, लेकिन अब हमारी जान को भी खतरा है। उन्होंने बताया कि ‘आधा घर डूब चुका है, और अब हम लोग नहीं बच पाएंगे। हमारे बच्चों को देख लेना’, महिला ने कहा, ‘बस उनके मुंह से इतना ही निकला था, कि फिर बगैर फोन कटे ही सामने से आवाज आना बंद हो गई।’


    बुधवार सुबह हुई बात के बाद कोई संपर्क नहीं हो पाया

    महिला ने बताया कि यह बात उनसे कल सुबह करीब साढ़े नौ बजे हुई थी और अब 24 घंटे से ज्यादा वक्त गुजरने के बाद भी वहां गए किसी भी व्यक्ति से कोई संपर्क नहीं हो पाया है। महिला ने कहा, ‘जिस बस से वो लोग गए थे उसका भी कुछ पता नहीं है और उन 29 लोगों का भी फिलहाल कुछ पता नहीं चला है। एक की भी बॉडी अबतक नहीं मिली है।’


    बच्चों का रो रोकर बुरा हाल, सरकार से मांगी मदद

    महिला के अनुसार वहां गए सभी लोग आपस में परिचित थे और सभी कहीं ना कहीं एक-दूसरे के रिश्ते में लगते थे। उधर उनके लापता होने के बाद सभी के बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है, कोई ससुराल में है तो कोई नौकरी करने गया हुआ है और वे सभी अपने माता-पिता के लिए परेशान हो रहे हैं। महिला ने सरकार से उन लोगों का पता लगाने में मदद करने की गुहार लगाई है।

  • ट्रेकिंग पर गए इंदौर निवासी अद्वैत की तलाश में जुटी बेंगलुरु पुलिस, परिजनों ने जताई अनहोनी की आशंका

    ट्रेकिंग पर गए इंदौर निवासी अद्वैत की तलाश में जुटी बेंगलुरु पुलिस, परिजनों ने जताई अनहोनी की आशंका

    नई दिल्ली । कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के बाहरी इलाके में स्थित शिवगंगे पहाड़ियों से मध्य प्रदेश के इंदौर निवासी एक युवक के अचानक लापता होने का मामला सामने आया है। लापता युवक की पहचान 31 वर्षीय अद्वैत उपाध्याय के रूप में हुई है, जो बेंगलुरु के बेगुर क्षेत्र में रहकर एक निजी फाइनेंस कंपनी में कार्यरत है। घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन की टीमों ने घने पहाड़ी इलाकों में बड़े पैमाने पर तलाशी और बचाव अभियान प्रारंभ कर दिया है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, अद्वैत उपाध्याय ने शुक्रवार को सुबह ट्रेकिंग पर जाने से पूर्व अपनी मंगेतर को अपनी इस यात्रा की जानकारी दी थी। इसके बाद उसने आवागमन के लिए एक दुपहिया वाहन किराए पर लिया और शिवगंगे पहाड़ी की तलहटी में पहुंचा। सुबह लगभग साढ़े छह बजे उसने अपना वाहन पार्क किया और पहाड़ी की ओर चढ़ना शुरू किया। तलहटी के समीप स्थापित सीसीटीवी कैमरों में उसे अकेले पहाड़ी की ओर जाते हुए देखा गया है।

    पहाड़ी पर चढ़ने के कुछ समय बाद से ही अद्वैत का कोई संपर्क नहीं हो सका है और उसका मोबाइल फोन भी लगातार बंद आ रहा है। लंबे समय तक सुराग न मिलने पर परिजनों ने किसी अनहोनी या राहजनी की आशंका व्यक्त की है। परिजनों को संदेह है कि सुनसान इलाका होने के कारण किसी आपराधिक तत्व ने उसे निशाना बनाया हो सकता है।

    घटना के संबंध में कडुगोडी पुलिस थाने में औपचारिक गुमशुदगी का मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शिवगंगे की कठिन और दुर्गम पहाड़ियों में पुलिसकर्मियों की विशेष टीमों के साथ डॉग स्क्वायड को भी तैनात किया गया है। पुलिस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए दुर्घटना, राहजनी और अपहरण समेत सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर गहन छानबीन कर रही है।

    मध्य प्रदेश के इंदौर शहर से जुड़े इस मामले के सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस भी कर्नाटक पुलिस के संपर्क में हैं। मध्य प्रदेश में अद्वैत के परिवारजन और रिश्तेदार उसकी सकुशल वापसी की प्रार्थना कर रहे हैं। राज्य के गृह विभाग द्वारा भी इस संबंध में आवश्यक समन्वय स्थापित किया जा रहा है ताकि तलाशी अभियान में तेजी लाई जा सके।

    बेंगलुरु पुलिस ने आसपास के ग्रामीणों और पर्यटकों से भी पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मोबाइल नेटवर्क लोकेशन और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर सुराग जुटाने के प्रयास निरंतर जारी हैं। प्रशासन ने जल्द ही स्थिति स्पष्ट होने और युवक को सुरक्षित ढूंढ निकालने का आश्वासन दिया है।

  • लापता अभिनेता राज किरण का रहस्यमयी अतीत: 23 वर्षों से गायब 80 के दशक के सितारे की अनसुलझी दास्तान

    लापता अभिनेता राज किरण का रहस्यमयी अतीत: 23 वर्षों से गायब 80 के दशक के सितारे की अनसुलझी दास्तान

    नई दिल्ली । 80 के दशक के प्रसिद्ध बॉलीवुड अभिनेता राज किरण के रहस्यमयी तरीके से गायब होने की खबर एक बार फिर चर्चा में है। 23 वर्षों से अधिक समय बीत जाने के बाद भी इस बात का कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिल सका है कि सौ से अधिक फिल्मों में काम कर चुके यह अभिनेता इस समय कहां हैं। वर्ष 1975 में 26 साल की उम्र में कागज की नाव फिल्म से अपने अभिनय करियर की शुरुआत करने वाले इस कलाकार ने कर्ज और अर्थ जैसी यादगार फिल्मों में काम किया था। वर्ष 1980 में उनकी आठ फिल्में प्रदर्शित हुई थीं, जिससे वे उस दौर के प्रमुख अभिनेताओं में शामिल हो गए थे।

    वर्ष 1990 के दशक में काम न मिलने और आर्थिक तंगी के कारण अभिनेता मानसिक तनाव का शिकार हो गए थे। पारिवारिक समस्याओं और वैवाहिक जीवन में तनाव के चलते उनकी स्थिति बिगड़ती चली गई। डिप्रेशन के कारण उन्होंने उस दौर में बन रही कई बड़ी फिल्मों की शूटिंग बीच में ही छोड़ दी थी। इसके बाद वे अमेरिका चले गए, जहां उनके टैक्सी चलाने और बाद में मुंबई के एक मेंटल अस्पताल में भर्ती होने की खबरें सामने आई थीं। हालांकि, अस्पताल से बाहर आने के बाद भी जब उन्हें फिल्मों में काम नहीं मिला, तो वे पुनः विदेश चले गए।

    वर्ष 2011 में जब दिवंगत अभिनेता ऋषि कपूर ने अमेरिका यात्रा के दौरान उनके भाई से संपर्क किया, तब यह बात सामने आई थी कि वे अटलांटा के एक मानसिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती हैं। हालांकि, अभिनेता के परिजनों ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा था कि वे खुद कई सालों से उनकी तलाश कर रहे हैं। वर्तमान में भी निजी जांचकर्ताओं और उद्योग से जुड़े लोगों द्वारा उनकी खोज जारी है, लेकिन अब तक उनका कोई आधिकारिक सुराग नहीं मिल पाया है। 80 के दशक का यह स्थापित कलाकार आज भी भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े अनसुलझे रहस्यों में से एक बना हुआ है।

  • पश्चिम बंगाल से गायब हो गई 15 साल की नेशनल लेवल की शूटर….परिवार ने दर्ज कराया केस

    पश्चिम बंगाल से गायब हो गई 15 साल की नेशनल लेवल की शूटर….परिवार ने दर्ज कराया केस


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां 15 साल की नेशनल शूटर (National Shooter) गायब हो गई। इस शूटर का नाम दमयंती सेन (Damayanti Sen) बताया गया है। वह सेंट्रल हावड़ा के उमाचरण भट्टाचार्य लेन की रहने वाली है। दमयंती स्टेट लेवल पर शूटिंग में पूरी तरह से सक्रिय है। इसके अलावा वह नेशनल लेवल के टीम ट्रायल्स में भी चयनित हो चुकी है और इसके लिए जोर-शोर से तैयारी में जुटी है। दमयंती के गायब होने के बाद उसके परिवार ने पुलिस में केस कर दिया है। पुलिस दमयंती की तलाश की जा रही है। फिलहाल कोई जानकारी नहीं मिली है। परिजनों ने किसी तरह का मनमुटाव होने की बात से भी इनकार किया है।

    घर का सामान खरीदने निकली थी
    जानकारी के मुताबिक दमयंती गुरुवार को घर का सामान खरीदने निकली थी। लेकिन इसके बाद वापस नहीं लौटी। जब काफी देर हो गई तो घरवालों ने उसे ढूंढना शुरू किया। काफी देर तक दमयंती के दोस्तों वगैरह के यहां पूछा गया। इसके अलावा, उसके शूटिंग के दोस्तों और रिश्तेदारों के यहां भी पता किया गया। लेकिन कुछ पता नहीं चला। इसके बाद दमयंती के घरवाले पुलिस के पास पहुंचे। इस बीच एक सीसीटीवी फुटेज सामने आई है। इसमें दमयंती गुरुवार के दिन प्लेटफॉर्म नंबर चार और पांच के बीच घूमती नजर आ रही है। आखिरी बार यहीं पर दयमंत्री को देखा गया था। अधिकारियों ने बताया कि वह लोग पता लगाने में जुटे हैं कि इसके बाद दमयंती कहां गई। जानकारी के मुताबिक जब दमयंती ने घर छोड़ा था तो उसका मोबाइल उसके पास ही था।

    काफी ज्यादा कर रही थी मेहनत
    दमयंती के परिजनों ने बताया कि वह एक फिक्स रूटीन फॉलो करती थी। नेशनल ट्रायल्स में सेलेक्शन के बाद वह इसकी तैयारी में जुटी हुई थी। वह हर रोज सुबह जल्दी उठ जाती थी और पूरी शिद्दत से तैयारी में जुटी रहती थी। दमयंती के घरवालों ने किसी तरह का झगड़ा या मनमुटाव होने की बात से भी इनकार किया है। दमयंती की मां ने एक सोशल मीडिया पोस्ट की है। इसमें उन्होंने लिखा है कि गुरुवार सुबह 10 बजे, मेरी बेटी दमयंती हावड़ा स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर चार और पांच पर देखी गई। इसके बाद से उसका कुछ पता नहीं है। उसने गुलाबी रंग की हाफ टी-शर्ट और हाफ पैंट पहन रखी थी। उन्होंने आगे लिखा है कि अगर किसी दयालु सज्जन को उसके बारे में जानकारी मिलती है तो हमारे दिए गए नंबरों पर संपर्क करें।

    मन में तरह-तरह की आशंकाएं
    शुक्रवार सुबह तक भी दमयंती के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली थी। परिवार के सदस्यों, पड़ोसियों और टीम के साथी शूटर्स के बीच इसको लेकर काफी ज्यादा चिंता थी। हर कोई दमयंती के अचानक गायब होने से हैरान नजर आ रहा है। साथ ही उनके मन में तरह-तरह की आशंकाएं उठ रही हैं। फिलहाल पुलिस में मिसिंग केस दर्ज है और पुलिस का कहना है कि वह इस मामले को पूरी गंभीरता के साथ देख रही है।

  • MP: RGPV में पेपर चोरी…. परीक्षा से पहले गायब हुए प्रश्नपत्रों के 9 बंडल

    MP: RGPV में पेपर चोरी…. परीक्षा से पहले गायब हुए प्रश्नपत्रों के 9 बंडल


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के सबसे बड़े तकनीकी विश्वविद्यालयों में शामिल राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (Rajiv Gandhi Proudyogiki Vishwavidyalaya- RGPV) में एग्जाम से ठीक पहले प्रश्नपत्र चोरी होने का गंभीर मामला सामने आया है. इस मामले में पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    शुक्रवार को स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी (School of Biotechnology) के सेकंड ईयर (चौथे सेमेस्टर) के कंप्यूटर विषय का एग्जाम था, लेकिन सुबह 11 बजे एग्जाम शुरू होने से ठीक पहले छात्रों को बताया गया कि परीक्षा रद्द कर दी गई है. थोड़ी देर बाद जानकारी मिली कि प्रश्नपत्र चोरी हो गया है. इसके बाद यूनिवर्सिटी में हड़कंप मच गया।

    यूनिवर्सिटी ने पेपर चोरी होने की जानकारी देते हुए परीक्षा अगले आदेश तक स्थगित कर दी है. जानकारी के मुताबिक अलग-अलग प्रश्नपत्रों के करीब 9 बंडल गायब मिले हैं।


    गांधीनगर थाने में दर्ज कराई FIR

    यूनिवर्सिटी प्रशासन ने मामले को गंभीर मानते हुए भोपाल के गांधीनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई है. शिकायत के मुताबिक, संबंधित प्रश्नपत्र गुरुवार देर रात चोरी हो गया था. पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि प्रश्नपत्र कैसे गायब हुआ और इसमें किसकी भूमिका हो सकती है।


    सुरक्षा व्यवस्था पर खड़े हुए सवाल

    परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र चोरी की घटना ने विश्वविद्यालय की गोपनीय परीक्षा व्यवस्था और सुरक्षा तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. घटना को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है।

    नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा ‘बीजेपी के राज में चोरी अब व्यवस्था बन चुकी है. पहले वोट चोरी, फिर सीट चोरी, उज्जैन में जमीन चोरी, मंदिरों से चढ़ावा चोरी, और अब प्रश्नपत्र चोरी! भोपाल स्थित RGPV में परीक्षा शुरू होने से पहले गोपनीय प्रश्नपत्रों के 9 सीलबंद लिफाफे चोरी हो गए।

    उमंग सिंघार ने आगे लिखा, मुख्यमंत्री मोहन यादव के राज में अब माफिया और चोर इतने बेखौफ हैं कि छात्रों का भविष्य भी सुरक्षित नहीं है. यह केवल प्रश्नपत्र की चोरी नहीं, युवाओं की मेहनत, विश्वास और भविष्य की चोरी है. बीजेपी राज में आखिर बचा क्या है जो चोरी नहीं हो रहा?

  • जब घर से रूठकर लापता हो गए थे लाडले श्याम सुंदर दास: जानिए कैसे एक लाचार पिता की मार्मिक वेदना ने रचे भारतीय सिनेमा के दो कालजयी गीत

    जब घर से रूठकर लापता हो गए थे लाडले श्याम सुंदर दास: जानिए कैसे एक लाचार पिता की मार्मिक वेदना ने रचे भारतीय सिनेमा के दो कालजयी गीत

    नई दिल्ली । संगीत और मानवीय संवेदनाओं का रिश्ता बेहद गहरा और रूहानी होता है। अक्सर जिन गीतों को सुनकर लोग झूम उठते हैं या जिन्हें विशुद्ध रूप से रोमांटिक विरह गीत मान लिया जाता है, उनके सृजन के पीछे कभी-कभी किसी रचनाकार की जिंदगी का सबसे बड़ा और असहनीय व्यक्तिगत दर्द छिपा होता है। भारतीय सिनेमा के इतिहास में साल 1957 और 1959 के दौर में लिखे गए दो कालजयी गीतों— ‘जरा सामने तो आ ओ छलिए’ और ‘आ लौट के आजा मेरे मीत’ के साथ भी कुछ ऐसा ही जुड़ा हुआ है। इन गीतों को दशकों से लोग प्रेम की वेदना समझकर गाते आ रहे हैं, लेकिन वास्तव में ये बोल एक लाचार पिता के अपने कलेजे के टुकड़े से बिछड़ने की तड़प से पैदा हुए थे।

    इस भावुक कर देने वाली कहानी के केंद्र में महान गीतकार पंडित भरत व्यास और उनका परिवार है। भरत व्यास का बेटा श्याम सुंदर दास स्वभाव से बेहद संवेदनशील और उनका अत्यधिक लाडला था। एक दिन किसी घरेलू बात पर पिता से मामूली नाराजगी के बाद वह गुस्से में बिना बताए घर छोड़कर कहीं चला गया। शुरुआत में लगा कि वह जल्द लौट आएगा, लेकिन जब दिन बीतने लगे तो परिवार की चिंता गहरे डर में बदल गई। बेटे को ढूंढने के लिए भरत व्यास ने हर संभव जतन किए, अखबारों में विज्ञापन दिए, पोस्टर छपवाए और हर धार्मिक स्थल पर मन्नतें मांगीं, लेकिन बेटे का कहीं कोई सुराग नहीं मिला।

    इकलौते बेटे के इस तरह अचानक लापता हो जाने के गम ने पंडित भरत व्यास को भीतर से पूरी तरह तोड़ दिया था। वे गहरे डिप्रेशन और एक आत्म-अपराधबोध के जाल में फंस गए, जिसके कारण उन्होंने बाहरी दुनिया और अपने काम से पूरी तरह दूरी बना ली। वे दिन-रात गुमसुम रहने लगे। इसी मानसिक संकट के बीच एक फिल्म निर्माता उनके पास एक गीत लिखवाने की दरख्वास्त लेकर पहुंचे, जिसे भरत व्यास ने मानसिक स्थिति ठीक न होने के कारण गुस्से में मना कर दिया। बाद में उनकी पत्नी के समझाने और संबल देने पर वे काम करने के लिए राजी हुए और उन्होंने फिल्म ‘जनम जनम के फेरे’ के लिए एक गीत लिखा।

    अपने इसी मानसिक तनाव और बेटे की तलाश में भटकने के दर्द को उन्होंने पन्नों पर उतारा, जो आगे चलकर ‘जरा सामने तो आ ओ छलिए, छुपा-छुपा के नखरे दिखाए’ के रूप में सामने आया। लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी की जादुई आवाजों से सजे इस गीत ने रेडियो पर आते ही लोकप्रियता के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए, लेकिन इस बड़ी कामयाबी के बाद भी भरत व्यास का बेटा वापस नहीं लौटा था। इसके बाद साल 1959 में फिल्म ‘रानी रूपमति’ के लिए गीत लिखते समय भी उनके दिल का वह पुराना जख्म फिर हरा हो गया और उन्होंने बेटे को पुकारते हुए ‘आ लौट के आजा मेरे मीत, तुझे मेरे गीत बुलाते हैं’ जैसा मर्मस्पर्शी गीत लिख डाला।

    सिनेमाई पर्दे पर जब इन गानों को दर्शाया गया, तो दर्शकों ने इसे नायक-नायिका के विरह का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण माना। हालांकि, इन गीतों के बोलों को यदि एक पिता और लापता बेटे के संदर्भ में ध्यान से पढ़ा जाए, तो रचनाकार की आत्मा का रोना साफ महसूस होता है। इस बेहद दर्दनाक कहानी का अंत सुखद रहा क्योंकि ‘आ लौट के आजा मेरे मीत’ गीत की अभूतपूर्व सफलता और देश भर में गूंजने के कुछ समय बाद, उनका बेटा श्याम सुंदर दास आखिरकार सकुशल अपने पिता के पास वापस लौट आया, जिससे भरत व्यास के जीवन का सबसे लंबा और कठिन इंतजार हमेशा के लिए समाप्त हो गया।

  • सऊदी भागा आकिब, एटीएस जांच में बड़ा खुलासा; 2025 से लापता, लुकआउट नोटिस जारी

    सऊदी भागा आकिब, एटीएस जांच में बड़ा खुलासा; 2025 से लापता, लुकआउट नोटिस जारी


    लखनऊ। संदिग्ध आतंकी कनेक्शन की जांच में घिरे आकिब के खिलाफ अब एजेंसियों ने शिकंजा कसना तेज कर दिया है। एटीएस की पड़ताल में सामने आया है कि वह चार बार सऊदी अरब जा चुका है और अगस्त 2025 में चौथी बार विदेश जाने के बाद से अब तक भारत नहीं लौटा है। उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी कर दिया गया है, वहीं पासपोर्ट निरस्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

    जांच में सामने आई ट्रैवल हिस्ट्री के मुताबिक, आकिब का पासपोर्ट 9 अप्रैल 2018 को बना था। वह पहली बार 4 अगस्त 2019 को सऊदी अरब गया और 8 फरवरी 2022 को भारत लौटा। इसके बाद 8 अप्रैल 2022 को दोबारा सऊदी गया और 11 अप्रैल 2023 को वापस आया। तीसरी बार वह 20 जून 2023 को गया और 22 जुलाई 2025 को भारत लौटा। हालांकि, महज 10 दिन बाद ही 1 अगस्त 2025 को वह फिर सऊदी चला गया और तब से वहीं पर है।

    एटीएस ने उसकी पूरी यात्रा का ब्योरा खंगाल लिया है और अब उसे भारत वापस लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि आकिब के हिरासत में आने के बाद आतंकी मॉड्यूल और संभावित साजिश से जुड़े कई अहम खुलासे हो सकते हैं।

    वीडियो जारी कर दी सफाई, कहा—अगर गलत हूं तो गोली मार देना

    इधर, मामले में तीन दिन पहले मॉड्यूल से जुड़े उवैद और जलाल हैदर की गिरफ्तारी के बाद यह प्रकरण और चर्चा में आया। इसी बीच आकिब ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक वीडियो जारी कर अपनी सफाई दी है।

    वीडियो में उसने पुलिस अधिकारियों के प्रति सम्मान जताते हुए कहा कि वह देश की सुरक्षा करने वालों की इज्जत करता है। उसने यह भी दावा किया कि उसने अपने साथी को पुलिस के सामने सरेंडर कर सच्चाई बताने की सलाह दी थी। आकिब ने अपने ऊपर लगे आतंकी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उसने कोई आपराधिक गतिविधि नहीं की, केवल गुस्से में अपशब्द कहे थे।

    वीडियो के अंत में उसने भावुक अपील करते हुए कहा, “मैं अपने ऊपर आतंकवादी का ठप्पा नहीं लगने दूंगा। अगर मैं गलत हूं, तो मेरे माथे पर गोली मार देना।”

    फिलहाल, एजेंसियां उसके ठिकाने और नेटवर्क की गहन जांच में जुटी हैं।