Tag: mission

  • कानपुर देहात की 360 महिलाएं बना रहीं करीब तीन लाख तिरंगे, ‘हर घर तिरंगा’ अभियान से बढ़ा रोजगार और आत्मनिर्भरता

    कानपुर देहात की 360 महिलाएं बना रहीं करीब तीन लाख तिरंगे, ‘हर घर तिरंगा’ अभियान से बढ़ा रोजगार और आत्मनिर्भरता

    नई दिल्ली । कानपुर देहात में इस बार ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को सफल बनाने में ग्रामीण महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका सामने आई है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े 96 स्वयं सहायता समूहों की करीब 360 महिलाएं दिन-रात मेहनत कर लगभग तीन लाख तिरंगे तैयार करने में जुटी हैं। इन महिलाओं के लिए तिरंगा बनाना केवल देशभक्ति से जुड़ा अभियान नहीं है, बल्कि रोजगार, आर्थिक मजबूती और आत्मनिर्भरता का भी माध्यम बन गया है। खास तौर पर गरीब, विधवा, दिव्यांग और कम पढ़ी-लिखी महिलाओं को इससे सम्मान के साथ काम करने का अवसर मिला है।

    कानपुर देहात में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को लेकर तैयारियां तेज हैं। महिला स्वयं सहायता समूहों को जिले में करीब तीन लाख तिरंगे तैयार करने का लक्ष्य दिया गया है। महिलाएं निर्धारित समय के भीतर इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए लगातार काम कर रही हैं। तैयार किए जा रहे प्रत्येक तिरंगे की लंबाई 30 इंच और चौड़ाई 20 इंच रखी गई है। इसकी निर्धारित कीमत 20 रुपये तय की गई है। तैयार होने के बाद इन तिरंगों का इस्तेमाल जिले के स्कूलों, सरकारी कार्यालयों और अन्य सरकारी भवनों पर किया जाएगा।

    महिला स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी ने इस अभियान को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से भी जोड़ दिया है। उमंग स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष प्रतिमा सिंह के अनुसार, ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को रोजगार से जोड़ना और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना इस पहल का महत्वपूर्ण उद्देश्य है। उनका कहना है कि आत्मनिर्भर भारत के साथ आत्मनिर्भर महिलाओं का निर्माण भी जरूरी है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने के बाद ग्रामीण महिलाएं अपने हुनर का इस्तेमाल कर आय अर्जित कर रही हैं और साथ ही परिवार की जिम्मेदारियों में भी योगदान दे रही हैं।

    इस पहल का सबसे बड़ा प्रभाव उन महिलाओं पर दिखाई दे रहा है, जिनके लिए गांव में रोजगार के अवसर सीमित रहे हैं। गरीब, विधवा, दिव्यांग और कम शिक्षित महिलाओं को घर के आसपास काम मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ा है। महिलाओं का कहना है कि उन्हें काम के जरिए सम्मान और अपनी मेहनत की कमाई हासिल करने का अवसर मिल रहा है।

    कानपुर देहात की महिला स्वयं सहायता समूहों ने इससे पहले भी अपनी क्षमता दिखाई थी। पिछले वर्ष समूहों से जुड़ी महिलाओं ने करीब 200 मीटर लंबा तिरंगा तैयार किया था। उस दौरान तैयार किए गए झंडों पर महिलाओं को लागत निकालने के बाद करीब छह रुपये तक का मुनाफा मिला था। इस बार भी तिरंगे तैयार करने में आने वाली लागत स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं वहन करेंगी और बिक्री से होने वाला मुनाफा सीधे समूह की महिलाओं को मिलेगा।

    राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के उपायुक्त अशोक कुमार ने कहा कि ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के माध्यम से कानपुर देहात की महिलाएं सिर्फ राष्ट्रीय ध्वज तैयार नहीं कर रही हैं, बल्कि आत्मनिर्भरता, सम्मान और महिला सशक्तीकरण की नई मिसाल भी पेश कर रही हैं। तीन लाख तिरंगे तैयार करने का यह अभियान ग्रामीण महिलाओं के हुनर को पहचान देने के साथ उनके लिए स्थायी आर्थिक अवसरों की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • SpaceX: लॉन्चिंग से 1 सेकंड पहले थमा मस्क की कंपनी का मिशन… पैड पर रुकी स्टारशिप की उड़ान

    SpaceX: लॉन्चिंग से 1 सेकंड पहले थमा मस्क की कंपनी का मिशन… पैड पर रुकी स्टारशिप की उड़ान


    वाशिंगटन।
    एलन मस्क (Elon Musk) की कंपनी स्पेसएक्स (SpaceX) की मेगा रॉकेट स्टारशिप (Mega Rocket Starship) गुरुवार को अपने 13वें परीक्षण मिशन के लिए उड़ान भरने से महज एक सेकंड पहले ही रुक गई। लॉन्च से ठीक पहले कुछ इंजनों के सही तरीके से चालू न होने के कारण सिस्टम ने स्वतः लॉन्च को निरस्त कर दिया। इसके बाद रॉकेट को लॉन्च पैड पर ही सुरक्षित रखा गया और ईंधन निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।


    आखिर लॉन्च से ठीक पहले क्या गड़बड़ी हुई?

    स्पेसएक्स ने बताया कि अब यह पता लगाया जाएगा कि आखिर तकनीकी खराबी कहां हुई, उसके बाद ही अगली लॉन्च की तारीख तय की जाएगी। 407 फीट (124 मीटर) ऊंची स्टारशिप 33 मुख्य इंजनों से लैस दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे शक्तिशाली रॉकेट है। यह इसका 13वां परीक्षण मिशन था।


    इंजन स्टार्ट होने के बाद अचानक क्यों रुक गया मिशन?

    स्पेसएक्स के लाइव वेबकास्ट में देखा गया कि निर्धारित उड़ान से तीन सेकंड पहले इंजनों के प्रज्वलन (इग्निशन) की प्रक्रिया शुरू हुई। लॉन्च पैड के ऊपर उड़ रहे ड्रोन कैमरे में यह दृश्य साफ दिखाई दिया। हालांकि, जिन इंजनों ने काम करना शुरू किया था, वे अचानक बंद हो गए और रॉकेट लॉन्च पैड से बंधा ही रह गया। इसके तुरंत बाद लॉन्च टीम ने रॉकेट से ईंधन निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी।


    एलन मस्क ने अगली लॉन्च कोशिश को लेकर क्या कहा?

    एलन मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि उम्मीद है कि अगली लॉन्च कोशिश कुछ ही दिनों में की जाएगी।


    मिशन में क्या-क्या भेजा जाना था?

    लॉन्च से पहले तक सब कुछ स्पेसएक्स के पक्ष में दिखाई दे रहा था। मौसम भी पूरी तरह अनुकूल था, लेकिन आंशिक इंजन इग्निशन के बाद मिशन रोकना पड़ा। इस उड़ान के दौरान स्पेसएक्स के 20 नए और सबसे उन्नत स्टारलिंक उपग्रह अंतरिक्ष में छोड़े जाने थे। लगभग एक घंटे की इस उड़ान में इन उपग्रहों को पहले से कक्षा में मौजूद स्टारलिंक उपग्रहों से संपर्क स्थापित करने के साथ-साथ स्टारशिप की हीट शील्ड की तस्वीरें भी लेनी थीं। इस मिशन में न तो पहले चरण के बूस्टर और न ही अंतरिक्ष यान को वापस लाने की योजना थी। दोनों को अंततः समुद्र में गिरना था।


    नासा के लिए स्टारशिप क्यों है बेहद अहम?

    नासा आने वाले वर्षों में अपने अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर उतारने के लिए स्टारशिप पर भरोसा कर रहा है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने स्पेसएक्स और जेफ बेजोस की कंपनी ब्लू ओरिजिन को ऐसे लूनर लैंडर विकसित करने और उड़ाने का जिम्मा दिया है, जिनकी मदद से आधी सदी से अधिक समय बाद इंसानों की चंद्रमा पर वापसी कराई जाएगी।


    आर्टेमिस मिशन की तैयारी पर क्या पड़ेगा असर?

    दोनों कंपनियों को अगले वर्ष तक अपने-अपने लूनर लैंडर, स्टारशिप और ब्लू मून उड़ान के लिए तैयार रखने होंगे, ताकि हाल ही में घोषित आर्टेमिस-III मिशन के अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी की कक्षा में अपने कैप्सूल की इन लैंडरों के साथ डॉकिंग का अभ्यास कर सकें। इसके बाद आर्टेमिस-IV मिशन, जिसकी योजना 2028 से पहले नहीं है, में इन्हीं लैंडरों में से किसी एक की मदद से दो अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में उतारा जाएगा।