Tag: MLA

  • रतिंद्र बोस ने रचा इतिहास…. पहली बार उत्तर बंगाल से कोई MLA बना विधानसभा अध्यक्ष

    रतिंद्र बोस ने रचा इतिहास…. पहली बार उत्तर बंगाल से कोई MLA बना विधानसभा अध्यक्ष


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal.) की नवगठित 18वीं विधानसभा ने शुक्रवार को एक नया इतिहास रच दिया। भारतीय जनता पार्टी के विधायक (Bharatiya Janata Party MLA) रतिंद्र बोस (Ratindra Bose.) को निर्विरोध विधानसभा अध्यक्ष (Speaker Assembly ) चुना गया। आजादी के बाद यह पहली बार है जब उत्तर बंगाल के किसी विधायक को विधानसभा अध्यक्ष जैसे अहम और प्रतिष्ठित पद की जिम्मेदारी मिली है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (Chief Minister Suvendu Adhikari) ने रतिंद्र बोसे के नाम का प्रस्ताव रखा। इसके बाद प्रोटेम स्पीकर तापस रॉय ने ध्वनि मत के माध्यम से प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। सदन में मौजूद सभी 207 भाजपा विधायकों ने एकमत होकर बोस के पक्ष में समर्थन दिया।

    विपक्ष की भूमिका में बैठी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इस पद के लिए अपना कोई उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा था, जिससे बोस के निर्वाचन का मार्ग पूरी तरह साफ हो गया और वे निर्विरोध चुन लिए गए।

    विधानसभा में पत्रकारों से बात करते हुए रतिंद्र बोस ने कहा कि पार्टी ने उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी है, उसे वे पूरी ईमानदारी से निभाएंगे और जरूरत पड़ने पर अनुभवी विधायकों से मार्गदर्शन लेंगे। स्पीकर की कुर्सी संभालने से पहले उन्होंने कहा, “अगर मैं चुना जाता हूं तो मैं ‘सबका साथ, सबका विकास’ की भावना के साथ अपनी जिम्मेदारियों को निभाऊंगा।”

    294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा में हालिया चुनावों में मिली भारी जीत के बाद भाजपा के पास 207 विधायकों का प्रचंड बहुमत है। ऐसे में रतिंद्र बोस का चयन महज एक औपचारिकता माना जा रहा था। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने गुरुवार को ही कूचबिहार दक्षिण से विधायक बोस के नाम की घोषणा पार्टी के उम्मीदवार के रूप में कर दी थी।

    उत्तर बंगाल को बड़ा राजनीतिक संदेश
    रतिंद्र बोस का अध्यक्ष चुना जाना केवल एक प्रशासनिक नियुक्ति नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संकेत माना जा रहा है। वह उत्तर बंगाल के पहले ऐसे विधायक हैं जो विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी संभालेंगे। पिछले एक दशक में उत्तर बंगाल भाजपा के सबसे मजबूत गढ़ के रूप में उभरा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस नियुक्ति के जरिए भाजपा सरकार ने इस क्षेत्र के मतदाताओं और नेतृत्व के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का एक रणनीतिक संदेश दिया है।

  • MP: भैरूंदा में शिवानंद महाराज का बड़ा दावा- बोले- यहां से 'BJP का एक भी विधायक जीता तो मूंछ-मुंडी कटवा दूंगा

    MP: भैरूंदा में शिवानंद महाराज का बड़ा दावा- बोले- यहां से 'BJP का एक भी विधायक जीता तो मूंछ-मुंडी कटवा दूंगा


    सीहोर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के सीहोर जिले (Sehore district) के भैरूंदा में आयोजित सातदेव महायज्ञ (Saatdev Mahayagna) के दौरान शिवानंद महाराज (Shivanand Maharaj) का एक बयान इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वायरल वीडियो में महाराज ने बीजेपी को लेकर विवादित टिप्पणी करते हुए बड़ा दावा किया है.

    वीडियो में शिवानंद महाराज कहते नजर आ रहे हैं कि पूरे जिले में अगर एक भी विधायक जीत गया तो वह अपनी मूंछ कटवा देंगे और यहां तक कि अपनी मुंडी भी कटवा लेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि यहां से न कोई सांसद जीतेगा और न ही कोई विधायक. साथ ही उन्होंने दावा किया कि वह जिसे कहेंगे वही चुनाव जीतेगा और लाख कोशिश के बावजूद दूसरे उम्मीदवार जीत नहीं पाएंगे.

    शिवानंद महाराज का विवादित बयान

    अपने बयान में महाराज ने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी के लोगों ने उनके कार्यक्रम का विरोध किया था. उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन को भी कार्यक्रम में आने से रोक दिया गया था और उन्हें रोककर रखा गया. महाराज ने यह भी कहा कि उन्हें किसी की जरूरत नहीं है और 2028 में जीतकर दिखाने की चुनौती दी।


    बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल

    इस पूरे बयान के दौरान अभद्र भाषा के प्रयोग का भी आरोप लगाया जा रहा है, जिससे विवाद और बढ़ गया है. वीडियो सामने आने के बाद यह तेजी से सोशल मीडिया पर फैल रहा है और लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

  • विधायक बनाम न्यायपालिका: एमपी में 5 मामले जहां सजा और सदस्यता बनी मुद्दा

    विधायक बनाम न्यायपालिका: एमपी में 5 मामले जहां सजा और सदस्यता बनी मुद्दा


    भोपाल । मध्य प्रदेश में विधायकों को आपराधिक मामलों में सजा मिलने और सदस्यता समाप्त होने के पांच प्रमुख मामले हाल ही में सुर्खियों में रहे। इनमें न्यायालय ने कुछ मामलों में सजा सुनाई, विधानसभा सचिवालय ने सीट रिक्त घोषित की, लेकिन उच्च अदालतों ने कुछ विधायकों को राहत दी जिससे उनकी विधायकी बच गई।

    सबसे पहला मामला बिजावर सीट की भाजपा विधायक आशा रानी सिंह का है। वर्ष 2011 में छतरपुर जिले की बिजावर सीट से विधायक आशा रानी सिंह को अपनी नौकरानी तिजिया बाई को आत्महत्या के लिए उकसाने के जुर्म में दस साल की सजा सुनाई गई। उनके पति पर भी इसी मामले में आरोप था। सजा के बाद विधानसभा सचिवालय ने उनकी सदस्यता समाप्त कर दी और सीट को रिक्त घोषित कर चुनाव आयोग को सूचना भेजी। हाई कोर्ट में अपील करने के बावजूद उन्हें राहत नहीं मिली और 31 अक्टूबर 2013 को उनकी विधायकी समाप्त हो गई।

    दूसरा मामला पवई सीट के भाजपा विधायक प्रहलाद लोधी का है। 2014 में अवैध रेत उत्खनन के दौरान तहसीलदार के साथ मारपीट के मामले में 31 अक्टूबर 2019 को भोपाल की विशेष अदालत ने उन्हें दो साल की सजा सुनाई। विधानसभा सचिवालय ने सदस्यता रद्द की अधिसूचना जारी की, लेकिन प्रहलाद लोधी ने हाई कोर्ट में अपील की और सात नवंबर 2019 को कोर्ट ने उनकी सजा पर स्टे दे दी। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के आदेशों के बाद उनकी सदस्यता बहाल हुई और वे विधायक बने रहे।

    तीसरा मामला खरगापुर विधानसभा सीट के राहुल सिंह लोधी का है। 2018 में उनके खिलाफ कांग्रेस प्रत्याशी ने चुनाव याचिका दायर की। हाई कोर्ट ने नामांकन पत्र में महत्वपूर्ण जानकारी छिपाने के आधार पर उनके निर्वाचन को शून्य घोषित कर दिया। विधानसभा सचिवालय ने सदस्यता समाप्त कर दी और सीट रिक्त घोषित की। राहुल सिंह लोधी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की और दिसंबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम स्टे दे कर सदस्यता बहाल की। लेकिन उन्हें वोटिंग और कुछ भत्तों का अधिकार नहीं मिला।

    चौथा मामला विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा का है। उन्हें नामांकन पत्र में आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाने का आरोप लगा और मार्च 2026 में हाई कोर्ट ने उनके चुनाव को शून्य घोषित कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें विधायक के तौर पर काम करने की अनुमति दी लेकिन वे वेतन, भत्तों और वोटिंग में हिस्सा नहीं ले पाएंगे। उनकी सुनवाई 23 जुलाई को होगी।

    पांचवां और वर्तमान में चर्चित मामला दतिया सीट के कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती का है। 2 अप्रैल 2026 को दिल्ली की विशेष अदालत ने उन्हें साल 1998 के बैंक धोखाधड़ी मामले में दोषी पाया और तीन साल की जेल की सजा सुनाई। सदस्यता समाप्त करने और सीट रिक्त घोषित करने की अधिसूचना विधानसभा सचिवालय ने चुनाव आयोग को भेज दी। राजेंद्र भारती ने जमानत तो पा ली है लेकिन सजा पर कनविक्शन स्टे नहीं मिला है। वे सुप्रीम कोर्ट में अपील करने जा रहे हैं।

    राजेन्द्र कुमार सिंह ने इस घटनाक्रम पर कहा कि न्यायालय का काम अलग है, लेकिन रात में विधानसभा खोलकर गजट नोटिफिकेशन जारी करना संसदीय प्रक्रिया में पहले कभी नहीं हुआ। कई मामलों में हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद सदस्यता बहाल की जाती है। इन घटनाओं ने मध्य प्रदेश विधानसभा की राजनीति और न्यायिक प्रक्रिया के बीच संवेदनशील संतुलन को उजागर किया है।

  • मेघालय विधानसभा में अनोखा दृश्य: विधायक पत्नी ने CM पति से ही पूछ लिया हिसाब

    मेघालय विधानसभा में अनोखा दृश्य: विधायक पत्नी ने CM पति से ही पूछ लिया हिसाब


    नई दिल्ली।
    मेघालय विधानसभा में उस समय दिलचस्प स्थिति बन गई, जब सत्तारूढ़ नेशनल पीपल्स पार्टी (NPP) की विधायक मेहताब चांदी ए संगमा ने प्रश्नकाल के दौरान अपने ही पति और मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा से विकास योजनाओं की प्रगति पर सीधे सवाल कर दिए।

    सदन में नीतिगत मुद्दे पर हुई यह औपचारिक बहस चर्चा का विषय बन गई और इसे लोकतांत्रिक जवाबदेही का अनोखा उदाहरण माना जा रहा है।


    पशुपालन और मत्स्य शिक्षा परियोजनाओं पर उठाए सवाल

    गांबेग्रे क्षेत्र की विधायक ने वर्ष 2022 में स्वीकृत पशुपालन और मत्स्य क्षेत्र से जुड़े शैक्षणिक संस्थानों की प्रगति पर जानकारी मांगी।



    उन्होंने पूछा कि प्रस्तावित एक वेटरनरी कॉलेज, दो फिशरीज कॉलेज और एक डेयरी कॉलेज की स्थापना में अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।

    इसके साथ ही उन्होंने राज्य के पशु चिकित्सा प्रशिक्षण केंद्रों में कर्मियों की कमी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इससे पशुधन आधारित आजीविका प्रभावित हो रही है।


    मुख्यमंत्री ने बताई देरी की वजह

    मुख्यमंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि परियोजनाएं राज्य के पशुपालन क्षेत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू की गई हैं, लेकिन भूमि चयन, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) और मानव संसाधन योजना जैसी प्रक्रियाओं के कारण समय लगा।

    उन्होंने बताया कि:

    • वेटरनरी कॉलेज की स्थापना पर लगभग 334 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान है।

    • इसके लिए किर्डेमकुलाई (री-भोई जिला) में करीब 800 एकड़ भूमि चिन्हित की गई है।

    • संस्थान में 19 विभाग प्रस्तावित किए गए हैं।


    सरकार का भरोसा—अब तेज होगी प्रक्रिया

    मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि 2022 में स्वीकृत इन संस्थानों की स्थापना की प्रक्रिया को अब गति दी जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य की बड़ी आबादी पशुपालन और इससे जुड़े व्यवसायों पर निर्भर है, इसलिए इन परियोजनाओं का समय पर पूरा होना अत्यंत आवश्यक है।

    मानव संसाधन की कमी को लेकर भी उन्होंने रिक्त पदों को शीघ्र भरने और प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत करने का भरोसा दिलाया।


    जवाबदेही की मिसाल बना घटनाक्रम

    सदन में यह मामला इसलिए सुर्खियों में रहा क्योंकि एक विधायक ने निजी संबंधों से अलग हटकर सरकार से सार्वजनिक रूप से जवाब मांगा। राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा और संस्थागत जवाबदेही का सकारात्मक संकेत बताया है।

  • दो वर्ष पूरे होने पर रिपोर्ट कार्ड: सांसद-विधायक मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर देंगे अपने क्षेत्र के कार्यों की जानकारी

    दो वर्ष पूरे होने पर रिपोर्ट कार्ड: सांसद-विधायक मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर देंगे अपने क्षेत्र के कार्यों की जानकारी


    भोपाल । मध्य प्रदेश में डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी सरकार ने सफलतापूर्वक दो वर्ष का कार्यकाल पूरा कर लिया है। इस अवसर को चिह्नित करने के लिएसरकार ने अपनी उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं को जनता के बीच ले जाने की एक सुनियोजित रणनीति तैयार की है।

    जनता के बीच सरकार की उपलब्धियां

    राज्य सरकार की दो वर्ष की उपलब्धियों को जनता तक पहुँचाने का जिम्मा प्रभारी मंत्रियों को सौंपा गया है। शनिवार कोसभी प्रभारी मंत्रियों ने अपने-अपने जिलों में पत्रकारवार्ता आयोजित की। इन प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने विस्तार से बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार ने पिछले दो वर्षों में जनता के हित में कौन-कौन से महत्वपूर्ण कार्य किए हैं।
    उपलब्धियों की जानकारी देने के अलावामंत्रियों ने अपने व्यक्तिगत विभागों के कामकाज का ब्योरा भी जनता के समक्ष रखा। यह प्रयास सरकार की पारदर्शिता और जवाबदेही को प्रदर्शित करने पर केंद्रित है।

    सांसद और विधायकों का रिपोर्ट कार्ड

    इस प्रचार अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा राज्य के सांसदों और विधायकों के प्रदर्शन को भी शामिल करता है। यह सुनिश्चित किया गया है कि केवल सरकार की ही नहींबल्कि क्षेत्रवार जनप्रतिनिधियों के कार्यों की जानकारी भी उच्च स्तर पर संकलित की जाए। योजना के अनुसारसभी सांसद और विधायक अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में पिछले दो वर्षों के दौरान किए गए विकास कार्योंयोजनाओं के क्रियान्वयनऔर महत्वपूर्ण पहलों का विवरण तैयार करेंगे। 

    वे यह पूरी जानकारी एक पत्र के माध्यम से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सौंपकर उन्हें अवगत कराएंगे। यह कदम न केवल जनप्रतिनिधियों को अपने कार्यों का लेखा-जोखा तैयार करने के लिए प्रोत्साहित करेगाबल्कि मुख्यमंत्री कार्यालय को भी राज्य के हर क्षेत्र में हो रहे जमीनी स्तर के विकास की एक स्पष्ट तस्वीर प्रदान करेगा। यह पहल पार्टी और सरकार के भीतर एक आंतरिक रिपोर्ट कार्ड और प्रदर्शन मूल्यांकन प्रणाली के रूप में भी कार्य कर सकती है। इस प्रकारमोहन सरकार की दो साल की उपलब्धियों का प्रचार-प्रसार एक बहु-आयामी दृष्टिकोण से किया जा रहा हैजिसमें सरकारी विभागों के कामकाजमंत्रियों की रिपोर्टिंग और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों के प्रदर्शन का समावेश है।

  • इटारसी में किन्नर गुटों का खूनी संघर्ष: थाने में तीन किन्नरों ने पीया फिनाइल, युवक पर कैंची से जानलेवा हमला

    इटारसी में किन्नर गुटों का खूनी संघर्ष: थाने में तीन किन्नरों ने पीया फिनाइल, युवक पर कैंची से जानलेवा हमला


    इटारसी । मध्य प्रदेश के इटारसी शहर में दो किन्नर गुटों के बीच वर्चस्व और इलाके के बंटवारे को लेकर चल रहा आपसी विवाद अब खतरनाक स्तर पर पहुँच गया हैजिसके परिणामस्वरूप एक ही दिन में हिंसा और आत्मघाती प्रयास की दो बड़ी घटनाएँ सामने आईं। यह विवाद पिछले लगभग दो माह से चल रहा है और शनिवार को यह खूनी संघर्ष में तब्दील हो गया।

    युवक पर कैंची से जानलेवा हमला

    विवाद की शुरुआत शनिवार दोपहर को तब हुई जब किन्नरों के एक गुट के कथित गुंडों ने ग्वाल बाबा नाला मोहल्ला निवासी एक युवक पर कैंची से अचानक हमला कर दिया। यह हमला इतना गंभीर था कि युवक लहूलुहान हो गया। इस जानलेवा हमले से शहर में तनाव और भय का माहौल बन गया। यह घटना स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि क्षेत्र के वर्चस्व को लेकर दोनों गुटों के बीच कितनी अधिक शत्रुता बढ़ चुकी है।

    थाना परिसर में तीन किन्नरों ने पीया फिनाइल

    हिंसा की इस घटना के कुछ घंटों बादशाम को विवाद ने एक और चौंकाने वाला मोड़ ले लिया। दूसरे गुट की तीन किन्नर इटारसी थाना परिसर पहुँचीं और वहाँ उन्होंने फिनाइल पी लिया।किन्नरों ने यह कदम पुलिस पर उनकी सुनवाई न करने और मामले को गंभीरता से न लेने का आरोप लगाते हुए उठाया। यह गंभीर आत्मघाती प्रयास पुलिस और प्रशासन पर तुरंत कार्रवाई करने का दबाव बनाता है।घटना के तुरंत बाद पुलिस हरकत में आई और तीनों किन्नरों को इलाज के लिए सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों ने तत्काल उपचार शुरू किया और बताया कि तीनों की हालत अब खतरे से बाहर है।

    विवाद निपटाने की विधायक की पहल

    इस गंभीर विवाद को शांत करने के लिए स्थानीय विधायक डॉ. सीतासरन शर्मा ने भी हस्तक्षेप किया था। किन्नर गुट की सदस्य नीलोफर ने बताया कि शनिवार को विधायक ने उनके विवाद का निपटारा करने के लिए उन्हें अपने कार्यालय में बुलाया था। वहाँ उन्हें यह समझाइश दी गई थी कि विधायक जल्द ही दोनों पक्षों की एक संयुक्त बैठक आयोजित करेंगे और इस मामले को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाएंगे।
    विधायक के हस्तक्षेप के बावजूदगुटों के बीच का तनाव इतना अधिक बढ़ गया कि हिंसा और आत्मघाती कदम जैसी घटनाएँ हुईं।पुलिस अब इन दोनों घटनाओं युवक पर हुए हमले और किन्नरों द्वारा थाने में फिनाइल पीने के संबंध में गहन जाँच कर रही है। पुलिस के सामने यह बड़ी चुनौती है कि वह इलाके के वर्चस्व को लेकर जारी इस संघर्ष को कैसे समाप्त करे और आगे की हिंसा को रोके।

  • कोई राजनीतिक दल नहीं दे रहा हुमायूं कबीर का साथ, TMC ने विधानसभा में भी दूरी बनाने का फैसला लिया"

    कोई राजनीतिक दल नहीं दे रहा हुमायूं कबीर का साथ, TMC ने विधानसभा में भी दूरी बनाने का फैसला लिया"


    कोलकाता । पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद की नींव रखने वाले विधायक हुमायूं कबीर को खास राजनीतिक समर्थन नहीं मिल रहा है। तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें पहले ही निलंबित कर दिया है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस और लेफ्ट ने भी उनसे किनारा किया है। यहां तक कि सांसद असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन ने भी दूरी बनाने का फैसला किया है।

    विधायक बने रहने का फैसला करने के बावजूद, कबीर ने सोमवार को दोहराया कि वह इस महीने के अंत में एक नया राजनीतिक दल बनाने की योजना पर आगे बढ़ेंगे। उन्होंने दावा किया, ‘मैंने अभी तक कांग्रेस से बात नहीं की है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के प्रदेश सचिव मोहम्मद सलीम ने उनके साथ बातचीत की जिम्मेदारी ली है। अगले विधानसभा चुनाव के लिए मुर्शिदाबाद में कांग्रेस और वाम दलों के साथ सीट के बंटवारे की प्रबल संभावना है।’

    भाजपा बोली- जिन्ना की भाषा बोल रहे
    भाजपा विधायक और बंगाल में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को कहा कि कबीर की बयानबाजी को ‘मुहम्मद अली जिन्ना की भाषा’ करार दिया। उन्होंने कहा कि यह ‘बंगाली हिंदुओं के लिए सीधी चुनौती’ है।

    उन्होंने आरोप लगाया, ‘हमने स्पष्ट रूप से कहा है कि आप अपनी जमीन पर, अपने समुदाय के धन से, कानूनी तौर पर मंदिर, मस्जिद, चर्च और गुरुद्वारे बनाएं। लेकिन रेजिनगर में जो हुआ वह धार्मिक आस्था नहीं थी। यह राज्य के संरक्षण में कट्टरपंथियों का शक्ति प्रदर्शन था।’

    शुभेंदु ने कबीर पर सीधा निशाना साधते हुए कहा, ‘हुमायूं कबीर अब जिस भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, वह हुसैन सुहरावर्दी और मुहम्मद अली जिन्ना की भाषा से अलग नहीं है। यह एक चुनौती है, एक युद्धघोष है, यह सह-अस्तित्व की भाषा नहीं है।’

    सीट बदलेगी TMC?
    टीएमसी ने विधानसभा के अंदर भी कबीर से दूरी बनाए रखने का फैसला किया है। टीएमसी नेताओं ने कहा कि सदन में उनके बैठने की व्यवस्था बदली जाएगी। सूत्रों के अनुसार, पार्टी सूत्रों ने बताया कि विधायक बने रहने के उनके फैसले के बाद, तृणमूल कांग्रेस विधायक दल ने सत्तारूढ़ दल के सदस्यों से दूर रखने के लिए कबीर की सीट भाजपा सदस्यों की सीट के पास करने की पहल की है। इससे पहले, कबीर को उनके पूर्व मंत्री पद के कारण सत्ता पक्ष की सीट के पास अगली पंक्ति में सीट दी गई थी।

    तृणमूल कांग्रेस के मुख्य सचेतक निर्मल घोष ने कहा कि पार्टी स्थिति पर कड़ी नजर रख रही है। उन्होंने पीटीआई-भाषा को बताया, ‘निलंबित विधायकों को विधानसभा में बैठने की व्यवस्था पर फैसला अगले कुछ दिन में लिया जाएगा।’ पश्चिम बंगाल विधानसभा के कार्यकाल की समाप्ति से पहले सदन का शीतकालीन सत्र और अंतरिम बजट सत्र की बैठक होने की उम्मीद है।

    AIMIM ने क्या कहा
    हुमायूं कबीर ने खुद को पश्चिम बंगाल का ओवैसी बताया था। साथ ही खबरें थीं कि वह AIMIM के साथ गठबंधन भी करने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया था कि इस संबंध में ओवैसी से बात हुई है। हालांकि, AIMIM ने विधायक कबीर के साथ चुनावी गठजोड़ से सोमवार को इनकार किया और उनके प्रस्तावों को ‘राजनीतिक रूप से संदिग्ध और वैचारिक रूप से असंगत’ बताया।

    पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद असीम वकार ने कहा, ‘सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कबीर को अधिकारी के राजनीतिक तंत्र का हिस्सा माना जाता है। और यह सर्वविदित है कि अधिकारी भाजपा के राष्ट्रीय स्तरीय नेतृत्व के मुख्य रणनीतिक ढांचे के भीतर काम करते हैं।’ उन्होंने कहा, ‘मुस्लिम समुदाय राष्ट्र निर्माण में विश्वास रखता है, उसे तोड़ने में नहीं। वह देश को मजबूत करने वाली ताकतों के साथ खड़ा है और अशांति और विभाजन पैदा करने वालों को नकारता है।’

    कांग्रेस ने निकाली सद्भावना यात्रा
    शनिवार को कांग्रेस ने आरोप लगाया कि टीएमसी और भाजपा, दोनों ही, उस जिले में धार्मिक आशंकाओं का फायदा उठा रहे हैं जहां ऐतिहासिक रूप से साम्प्रदायिक तनाव देखा गया है। कोलकाता में कांग्रेस के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने एक मस्जिद से मंदिर तक ‘सद्भावना रैली’ निकाली और लोगों से अपील की कि वे बाबरी मस्जिद ढहाये जाने के बाद पैदा हुए साम्प्रदायिक भय के माहौल की वापसी को खारिज करें।

    प्रदेश कांग्रेस प्रमुख शुभंकर सरकार ने कहा, ‘मंदिर और मस्जिद लोगों को ना तो रोजगार देंगे और ना ही भोजन। विभाजन की राजनीति बंद होनी चाहिए।’ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सीपीएम ने भी कबीर के फैसले से दूरी बनाई है। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है।