पार्क के डिप्टी डायरेक्टर राहुल मिश्रा ने बताया कि कोर्ट के आदेशों को जमीन पर उतारने के लिए नई गाइडलाइन तैयार की जा रही है. इस नई व्यवस्था के चलते जंगल में एंट्री से पहले ही पर्यटकों को अपने मोबाइल फोन गेट पर जमा करने होंगे. यह नियम सिर्फ सैलानियों पर नहीं, बल्कि रजिस्टर्ड टूर गाइड, जिप्सी ड्राइवर, नेचरलिस्ट और यहां तक कि कोर जोन में मौजूद होटल और लॉज के कर्मचारियों पर भी लागू होगा. यानी कोई भी अपना फोन अपने साथ नहीं ले जा पाएगा. इसके साथ ही नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
इस सख्त फैसले के पीछे वन्यजीवों की सुरक्षा सबसे बड़ी वजह है. वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट और एक्सपीरियंस नेचर राइड्स का कहना है कि मोबाइल फोन जंगल में कई तरह की परेशानियां पैदा कर रहे थे. फोटो और वीडियो लेने की होड़ में लोग जानवरों के बहुत करीब पहुंच जाते थे, जिससे वह घबरा जाते हैं और कई बार आक्रामक भी हो जाते हैं.
इसके अलावा, मोबाइल नेटवर्क के जरिए जानवरों की लोकेशन एक-दूसरे को बताई जाती थी. नतीजा यह होता था कि एक ही जगह पर कई जिप्सियां जमा हो जाती थीं. वहीं, रील और सेल्फी बनाने की सनक में लोग अपनी जान के साथ-साथ वन्यजीवों की सुरक्षा को भी खतरे में डाल रहे थे. यह नया आदेश कॉर्बेट के सभी प्रमुख क्षेत्रों में लागू होगा. इनमें ढिकाला, बिजरानी, झिरना, गर्जिया, सर्पदुली, गैरल, सुल्तान, सोनानदी, पाखरो और सितावनी जैसे डे-सफारी और नाइट-स्टे वाले इलाके शामिल हैं.

