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  • VIP मोबाइल नंबर चाहिए? Jio और Vi पर ऐसे चुनें लकी नंबर, जानें कीमत और बुकिंग का तरीका

    VIP मोबाइल नंबर चाहिए? Jio और Vi पर ऐसे चुनें लकी नंबर, जानें कीमत और बुकिंग का तरीका


    नई दिल्ली । 
    अगर आप अपने मोबाइल नंबर में कोई खास पैटर्न, लकी डिजिट या याद रखने में आसान नंबर चाहते हैं, तो टेलीकॉम कंपनियों के जरिए ऐसा नंबर चुनने का विकल्प उपलब्ध है। Jio और Vi अपने यूजर्स को पसंदीदा या फैंसी मोबाइल नंबर चुनने की सुविधा देते हैं। इसमें 9999, 786 या जन्मतिथि से जुड़े अंकों जैसे खास पैटर्न वाले नंबर तलाशे जा सकते हैं।

    इस सुविधा की मदद से यूजर्स घर बैठे अपनी पसंद का नंबर खोज सकते हैं। इसके लिए Jio ग्राहकों को MyJio ऐप और Vi ग्राहकों को Vi ऐप का इस्तेमाल करना होता है। हालांकि, पसंदीदा नंबर की उपलब्धता और उसकी कीमत उसके पैटर्न तथा संबंधित कैटेगरी पर निर्भर करती है।

    Jio यूजर्स MyJio ऐप खोलकर होम स्क्रीन पर नीचे की ओर स्क्रॉल करने के बाद Quick Links सेक्शन में जा सकते हैं। यहां Matching Number का विकल्प दिखाई देता है। इस पर क्लिक करने के बाद यूजर अपने मौजूदा नंबर से मिलता-जुलता नंबर भी तलाश सकता है।

    अगर किसी ग्राहक को कोई खास VIP या फैंसी नंबर चाहिए, तो Looking for VIP number? विकल्प का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके बाद ग्राहक अपनी पसंद के चार से आठ अंकों का पैटर्न दर्ज करके नंबर की तलाश कर सकता है। उपलब्ध विकल्पों में से पसंदीदा नंबर चुनकर आगे की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।

    Jio पर केवल मिलते-जुलते नंबर ही नहीं, बल्कि विशेष पैटर्न वाले नंबर भी खोजे जा सकते हैं। इससे उन ग्राहकों को सुविधा मिलती है जो अपने मौजूदा नंबर जैसा कोई नंबर रखना चाहते हैं या किसी खास संख्या को नए मोबाइल नंबर में शामिल करना चाहते हैं।

    Vi ग्राहकों के लिए भी प्रक्रिया काफी सरल है। इसके लिए Vi ऐप में जाकर VIP Number विकल्प चुनना होता है। इसके बाद जिस नंबर या अंक पैटर्न को ग्राहक अपने मोबाइल नंबर में चाहता है, उसे संबंधित बॉक्स में दर्ज करना होता है।

    सर्च करने के बाद स्क्रीन पर उपलब्ध VIP नंबरों की सूची दिखाई देती है। इनमें कुछ नंबर मुफ्त हो सकते हैं, जबकि कुछ Premium VIP नंबरों के लिए अतिरिक्त भुगतान करना पड़ता है। ग्राहक अपनी पसंद का नंबर चुनने के बाद पिनकोड और डिलीवरी एड्रेस जैसी जरूरी जानकारी दर्ज करके ऑर्डर की प्रक्रिया पूरी कर सकता है।

    VIP नंबर की कीमत एक जैसी नहीं होती। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मौजूदा नंबर से मिलता-जुलता नंबर चुनने की शुरुआती कीमत करीब 50 रुपये हो सकती है। वहीं Jio की कुछ विशेष गोल्ड कैटेगरी के VIP नंबरों के लिए ऑफलाइन स्टोर से वाउचर लेना पड़ सकता है और इसकी कीमत 12,000 रुपये तक पहुंच सकती है।

    Vi पर भी फैंसी नंबरों की अलग-अलग कैटेगरी उपलब्ध हैं। कुछ नंबर मुफ्त मिल सकते हैं, जबकि प्रीमियम कैटेगरी के नंबरों की कीमत करीब 590 रुपये से 2,000 रुपये तक हो सकती है। अंतिम कीमत चुने गए नंबर और उसकी कैटेगरी पर निर्भर करेगी।

    नंबर चुनने और भुगतान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ग्राहक अपने ऑपरेटर के निर्देश के अनुसार सिम प्राप्त कर सकता है। ऐसे में अगर आप अपना लकी नंबर, जन्मतिथि से जुड़ा पैटर्न या आसानी से याद रहने वाला नंबर चाहते हैं, तो पहले उपलब्ध नंबरों की सूची और उसकी कीमत जरूर जांचना बेहतर रहेगा।

  • मोबाइल स्क्रॉल करते-करते बढ़ रही कब्ज की गंभीर बीमारी, अब युवा और बच्चे भी चपेट में

    मोबाइल स्क्रॉल करते-करते बढ़ रही कब्ज की गंभीर बीमारी, अब युवा और बच्चे भी चपेट में


    भोपाल । स्मार्टफोन आज हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है, लेकिन इसकी एक छोटी-सी आदत स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है। खासकर टॉयलेट में बैठकर लंबे समय तक मोबाइल स्क्रॉल करना अब सिर्फ समय बिताने की आदत नहीं, बल्कि गंभीर बीमारियों की वजह बनता जा रहा है। भोपाल के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. प्रणव रघुवंशी के अनुसार लगातार लंबे समय तक टॉयलेट सीट पर बैठे रहने और बार-बार जोर लगाने से ऑब्स्ट्रक्टेड डिफिकेशन सिंड्रोम (ODS) जैसी गंभीर समस्या विकसित हो सकती है। यही वजह है कि अब कब्ज के साथ-साथ पाइल्स, फिशर और रेक्टल प्रोलैप्स जैसी बीमारियों के मामले भी बढ़ रहे हैं।

    डॉ. रघुवंशी बताते हैं कि हाल ही में उनके पास 70 वर्षीय एक बुजुर्ग मरीज पहुंचे, जो करीब 35 वर्षों से कब्ज की समस्या से परेशान थे। लगभग 20 साल तक उनका इलाज आईबीएस-सी (IBS-C) मानकर किया जाता रहा, लेकिन राहत नहीं मिली। जब विशेष जांच और एनोरेक्टल मैनोमेट्री की गई तो पता चला कि असली समस्या ऑब्स्ट्रक्टेड डिफिकेशन सिंड्रोम थी। बायोफीडबैक थेरेपी के आठ सत्रों के बाद मरीज की हालत में उल्लेखनीय सुधार हुआ। पहले जहां उन्हें शौचालय में लगभग एक घंटा लग जाता था, वहीं अब यह समय घटकर करीब पांच मिनट रह गया और कब्ज की दवाओं की आवश्यकता भी लगभग समाप्त हो गई।

    ऐसा ही एक अन्य मामला 40 वर्षीय महिला का सामने आया, जो दस वर्षों से कब्ज से जूझ रही थीं। लगातार जोर लगाने की आदत के कारण उनके मलाशय का हिस्सा बाहर आने लगा। जांच में पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों की कमजोरी और ODS की पुष्टि हुई। समय पर बायोफीडबैक थेरेपी मिलने से बिना सर्जरी ही उनकी स्थिति में 90 से 95 प्रतिशत तक सुधार दर्ज किया गया।

    विशेषज्ञों का कहना है कि समस्या मोबाइल फोन नहीं, बल्कि मोबाइल देखते हुए लंबे समय तक टॉयलेट सीट पर बैठे रहने की आदत है। पहले लोग शौचालय में अखबार पढ़ते थे, अब उसकी जगह मोबाइल ने ले ली है। जब व्यक्ति स्क्रीन पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित कर लेता है तो मस्तिष्क और आंत के बीच का प्राकृतिक समन्वय प्रभावित होने लगता है। इससे मलत्याग का सामान्य रिफ्लेक्स कमजोर पड़ता है और धीरे-धीरे कब्ज की समस्या बढ़ने लगती है।

    डॉ. रघुवंशी के अनुसार पहले कब्ज को मुख्य रूप से 40 से 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की बीमारी माना जाता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में स्थिति तेजी से बदली है। अब स्कूल जाने वाले बच्चे, किशोर और 20 से 40 वर्ष आयु वर्ग के युवा भी बड़ी संख्या में कब्ज की शिकायत लेकर क्लीनिक पहुंच रहे हैं। उनके क्लीनिकल अनुभव के मुताबिक पिछले दस वर्षों में कब्ज के मरीजों की संख्या में 10 से 15 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। वहीं कब्ज के हर दस मरीजों में से तीन से चार ऐसे मिलते हैं, जो टॉयलेट में मोबाइल इस्तेमाल करने की आदत स्वीकार करते हैं। हालांकि डॉक्टर स्पष्ट करते हैं कि यह उनके चिकित्सकीय अनुभव पर आधारित है और इस विषय पर व्यापक भारतीय वैज्ञानिक अध्ययन अभी उपलब्ध नहीं हैं।

    विशेषज्ञ स्वस्थ पाचन तंत्र के लिए कुछ सरल आदतें अपनाने की सलाह देते हैं। भोजन में पर्याप्त मात्रा में फाइबर, हरी सब्जियां, मौसमी फल और सलाद शामिल करें। दिनभर पर्याप्त पानी पिएं, नियमित व्यायाम करें, 7 से 8 घंटे की नींद लें और रोज सुबह एक निश्चित समय पर शौच जाने की आदत विकसित करें। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि टॉयलेट में अनावश्यक समय बिताने और मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने से बचें। छोटी-सी यह सावधानी भविष्य में कई गंभीर बीमारियों से बचाने में मददगार साबित हो सकती है।