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  • गणपति उत्सव में इस बार प्रसाद में लाएं स्वाद का नया ट्विस्ट, मोदक-मिठाई के साथ ट्राई करें ये 5 खास नमकीन विकल्प

    गणपति उत्सव में इस बार प्रसाद में लाएं स्वाद का नया ट्विस्ट, मोदक-मिठाई के साथ ट्राई करें ये 5 खास नमकीन विकल्प

    नई दिल्ली । गणपति उत्सव में बप्पा के भोग और प्रसाद की अपनी खास परंपरा होती है। मोदक और मिठाइयां आमतौर पर प्रसाद का प्रमुख हिस्सा रहती हैं, लेकिन अगर इस बार कुछ अलग और स्वादिष्ट परोसने की इच्छा है तो नमकीन विकल्प भी आजमाए जा सकते हैं। खास बात यह है कि ऐसे कई व्यंजन कम मात्रा में आसानी से तैयार किए जा सकते हैं और बच्चों से लेकर बड़ों तक इन्हें पसंद किया जा सकता है।

    नारियल और धनिया वाले चने प्रसाद के लिए एक आसान और पौष्टिक विकल्प हो सकते हैं। इसके लिए उबले हुए काले या सफेद चनों में ताजा नारियल और हरा धनिया मिलाया जा सकता है। हल्का जीरा या राई का तड़का इसका स्वाद बढ़ा देता है। इसे कम समय में तैयार करके बड़ी संख्या में लोगों को परोसा जा सकता है।

    अगर प्रसाद में कुछ ऐसा शामिल करना चाहते हैं जिसे आसानी से हाथ में लेकर खाया जा सके, तो मिनी समोसे अच्छा विकल्प हो सकते हैं। छोटे आकार के इन समोसों में आलू और मटर की हल्की मसालेदार फिलिंग रखी जा सकती है। पूजा के बाद इन्हें छोटे पोर्शन में प्रसाद के तौर पर परोसा जा सकता है।

    मीठे प्रसाद से अलग इस बार नींबू चावल भी तैयार किए जा सकते हैं। नींबू के स्वाद के साथ करी पत्ता और मूंगफली का हल्का तड़का इसे खास बनाता है। यह व्यंजन ज्यादा मात्रा में तैयार करना भी आसान है, इसलिए गणपति उत्सव के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के लिए इसे बनाया जा सकता है।

    मिनी ढोकला भी प्रसाद की थाली में स्वाद और हल्केपन का अच्छा मेल दे सकता है। सॉफ्ट ढोकले को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर परोसा जा सकता है। ऊपर से हरा धनिया या नारियल डालने से इसका स्वाद और प्रस्तुति दोनों बेहतर हो सकते हैं। बच्चों के लिए भी यह एक आसान विकल्प हो सकता है।

    अगर कम मेहनत में कुछ अलग तैयार करना चाहते हैं, तो मसाला नमकीन कप भी बनाया जा सकता है। छोटे कप में सेव, भुना चना, मूंगफली और पोहा मिलाकर क्रंची स्नैक तैयार किया जा सकता है। इसे छोटे हिस्सों में परोसना आसान होता है और उत्सव के माहौल में यह अलग तरह का स्नैक विकल्प बन सकता है।

    गणपति उत्सव में प्रसाद का मतलब केवल मिठाई तक सीमित नहीं है। हालांकि प्रसाद तैयार करते समय परिवार की परंपराओं और पूजा से जुड़े नियमों का ध्यान रखना जरूरी है। इनके अनुरूप छोटे पोर्शन में नमकीन और हल्के व्यंजन शामिल किए जा सकते हैं। इससे प्रसाद की थाली में स्वाद के साथ नया बदलाव भी देखने को मिलेगा और बप्पा के भोग के बाद परिवार व मेहमानों को कुछ अलग परोसने का अवसर मिलेगा।

  • गणेश चतुर्थी पर घर में बनाएं चॉकलेट मोदक, डार्क चॉकलेट, नारियल और ड्राई फ्रूट्स से तैयार होगी स्वादिष्ट मिठाई

    गणेश चतुर्थी पर घर में बनाएं चॉकलेट मोदक, डार्क चॉकलेट, नारियल और ड्राई फ्रूट्स से तैयार होगी स्वादिष्ट मिठाई

    नई दिल्ली ।गणेश चतुर्थी पर अगर इस बार भोग के लिए कुछ अलग बनाना चाहते हैं, तो चॉकलेट मोदक एक अच्छा विकल्प हो सकता है। यह पारंपरिक मोदक से अलग स्वाद वाला है और घर पर आसानी से तैयार किया जा सकता है। इसमें डार्क चॉकलेट के साथ नारियल, काजू, बादाम और पिस्ता का इस्तेमाल किया जाता है। चॉकलेट का स्वाद बच्चों को भी पसंद आ सकता है।

    चॉकलेट मोदक तैयार करने के लिए 250 ग्राम डार्क चॉकलेट, 100 ग्राम नारियल का बुरादा, दो चम्मच बारीक कटे काजू, दो चम्मच बारीक कटे बादाम और दो चम्मच बारीक कटा पिस्ता चाहिए। इसके अलावा 50 ग्राम कंडेंस्ड मिल्क और एक चम्मच घी की जरूरत होगी। इन सीमित सामग्रियों से मोदक का मिश्रण तैयार किया जा सकता है।

    सबसे पहले डार्क चॉकलेट को पिघलाना होगा। इसके लिए एक पैन में थोड़ा पानी गर्म करें और उसके ऊपर एक कटोरी रखें। कटोरी में डार्क चॉकलेट डालकर धीमी आंच पर धीरे-धीरे पिघलाएं। चॉकलेट को सीधे तेज आंच पर गर्म करने से बचना चाहिए। डबल बॉयलर तरीके से चॉकलेट को धीरे-धीरे पिघलाया जा सकता है।

    इसके बाद दूसरे पैन में एक चम्मच घी गर्म करें। इसमें कटे हुए काजू, बादाम, पिस्ता और नारियल का बुरादा डालें। सभी चीजों को धीमी आंच पर हल्का सुनहरा होने तक भूनें। इस दौरान ध्यान रखें कि नारियल और ड्राई फ्रूट्स ज्यादा न भुनें।

    जब यह मिश्रण तैयार हो जाए, तब इसमें 50 ग्राम कंडेंस्ड मिल्क डालें। इसे अच्छी तरह मिलाते हुए तब तक चलाएं, जब तक सभी सामग्री आपस में मिलकर थोड़ा गाढ़ा मिश्रण न बना लें। इसके बाद इसमें पहले से पिघलाई गई डार्क चॉकलेट डालकर अच्छी तरह मिक्स करें।

    चॉकलेट और ड्राई फ्रूट्स का मिश्रण तैयार होने के बाद इसे कुछ देर ठंडा होने दें। मिश्रण इतना ठंडा हो जाए कि उसे आसानी से सांचे में भरा जा सके, तब मोदक बनाने की प्रक्रिया शुरू करें।

    मोदक के सांचे पर पहले हल्की-सी घी की परत लगा दें। इससे तैयार मोदक को सांचे से निकालने में आसानी होगी। अब चॉकलेट मिश्रण को सांचे में भरकर हल्के हाथ से दबाएं। इसके बाद सांचे को खोलकर मोदक को सावधानी से बाहर निकाल लें।

    इसी तरह पूरे मिश्रण से मोदक तैयार करें और कुछ देर के लिए इन्हें सेट होने दें। इसके बाद इन्हें ठंडा करके परोसा जा सकता है। गणेश चतुर्थी के भोग के अलावा घर आए मेहमानों और बच्चों को भी ये मोदक खिलाए जा सकते हैं।

    चॉकलेट, नारियल और ड्राई फ्रूट्स का संयोजन इस मिठाई को पारंपरिक मोदक से अलग स्वाद देता है। खासतौर पर जिन बच्चों को सामान्य मोदक पसंद नहीं आते, उनके लिए यह चॉकलेट वाला विकल्प पसंद किया जा सकता है। चॉकलेट पिघलाते समय डबल बॉयलर का इस्तेमाल और सांचे पर हल्की घी की परत लगाना इसकी तैयारी को आसान बनाता है।

  • अमरीश पुरी की यादों के साथ वर्धन पुरी ने मनाई गणेश चतुर्थी, बोले- बप्पा हर साल परिवार को करीब लाते हैं

    अमरीश पुरी की यादों के साथ वर्धन पुरी ने मनाई गणेश चतुर्थी, बोले- बप्पा हर साल परिवार को करीब लाते हैं

    नई दिल्ली ।अभिनेता वर्धन पुरी ने गणेश चतुर्थी के अवसर पर अपने परिवार की पुरानी परंपराओं और इस त्योहार से जुड़ी बचपन की यादों को साझा किया है। वर्धन के लिए गणेश उत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि परिवार के सदस्यों के एक साथ आने और रिश्तों को मजबूत करने का खास अवसर भी है। इस दौरान उन्होंने अपने दिवंगत दादा और दिग्गज अभिनेता अमरीश पुरी के साथ बिताए बचपन के पलों को भी याद किया।

    वर्धन ने बताया कि उनके परिवार में जब पहली बार घर पर बप्पा को लाने की परंपरा शुरू हुई थी, तब पूरा परिवार मिलकर गणपति के पसंदीदा मोदक अपने हाथों से तैयार करता था। इस परंपरा में उनके दादा-दादी, माता-पिता, बहन साची और परिवार के अन्य सदस्य भी शामिल होते थे। परिवार के सभी लोगों का साथ मिलकर त्योहार मनाना उनके बचपन की सबसे खास यादों में शामिल है।

    उन्होंने कहा कि वर्षों बाद भी परिवार की यह परंपरा उसी तरह जारी है। हर साल बप्पा के घर आने के साथ परिवार में खुशी और उत्सव का माहौल बनता है। वर्धन के मुताबिक, इस अवसर पर परिवार के सभी सदस्यों का एक साथ मौजूद होना उनके लिए किसी आशीर्वाद से कम नहीं है।

    वर्धन ने अपने परिवार के गणेश उत्सव मनाने के तरीके के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गणपति उत्सव के दौरान परिवार के लोग दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से एक जगह इकट्ठा होते हैं। वह मंदिर में स्थापित गणपति की उसी मूर्ति को अपने घर के बैठक वाले कमरे में लेकर आते हैं। इसके बाद दो दिनों तक बप्पा का जन्मदिन उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दौरान घर में महाराष्ट्रीयन व्यंजन और अलग-अलग तरह के मोदक तैयार किए जाते हैं।

    दो दिन के उत्सव के बाद परिवार के सभी सदस्यों की मौजूदगी में गणपति की मूर्ति को वापस मंदिर ले जाया जाता है। इसके बाद विसर्जन के लिए नारियल से बनी पर्यावरण के अनुकूल गणपति की मूर्ति लाई जाती है। वर्धन का कहना है कि बप्पा का उत्सव मनाने के साथ धरती और पर्यावरण का ध्यान रखना भी जरूरी है।

    उनके मुताबिक, गणेश चतुर्थी की सबसे खास बात यह है कि हर साल यह त्योहार परिवार के सदस्यों को एक-दूसरे के और करीब लाता है। उनके लिए यह पर्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि साथ समय बिताने, पुरानी परंपराओं को आगे बढ़ाने और पारिवारिक रिश्तों को मजबूत करने का अवसर भी है।

    वर्धन पुरी दिग्गज अभिनेता अमरीश पुरी के पोते हैं। अमरीश पुरी ने हिंदी सिनेमा में अपने दमदार अभिनय से अलग पहचान बनाई थी। उन्होंने अपने करियर में कई यादगार किरदार निभाए। फिल्म ‘मिस्टर इंडिया’ में निभाया उनका ‘मोगैम्बो’ का किरदार आज भी दर्शकों के बीच लोकप्रिय है। 1987 में रिलीज हुई इस फिल्म में उनका किरदार और उससे जुड़ा अंदाज हिंदी सिनेमा के यादगार खलनायकों में गिना जाता है।

    अमरीश पुरी का 12 जनवरी 2005 को 72 वर्ष की उम्र में निधन हुआ था। उनके निधन के वर्षों बाद भी फिल्मों में उनके निभाए किरदार दर्शकों के बीच अपनी पहचान बनाए हुए हैं। वर्धन के लिए गणेश चतुर्थी उनके परिवार की परंपराओं के साथ-साथ दादा अमरीश पुरी से जुड़ी पुरानी यादों को संजोने का भी अवसर है।

  • Ganesh Chaturthi 2026: बप्पा की स्थापना से पहले जुटा लें पूजा सामग्री, चौकी से मोदक और पंचामृत तक पूरी तैयारी रखें

    Ganesh Chaturthi 2026: बप्पा की स्थापना से पहले जुटा लें पूजा सामग्री, चौकी से मोदक और पंचामृत तक पूरी तैयारी रखें

    नई दिल्ली । गणेश चतुर्थी पर घर में भगवान गणेश की स्थापना को लेकर तैयारियां शुरू हो जाती हैं। बप्पा के स्वागत के लिए पूजा स्थल सजाने से लेकर पूजा की सामग्री जुटाने तक कई काम पहले से करने पड़ते हैं। यदि आप भी इस बार घर पर गणपति स्थापना करने की तैयारी कर रहे हैं, तो पूजा में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की पूरी सूची पहले ही तैयार कर लेना बेहतर रहेगा। इससे स्थापना के समय किसी जरूरी सामान की कमी नहीं होगी और पूजा की तैयारी व्यवस्थित तरीके से की जा सकेगी।

    गणपति को विराजमान करने के लिए सबसे पहले एक साफ चौकी की जरूरत होती है। चौकी पर बिछाने के लिए लाल या पूजा के अनुकूल साफ कपड़ा रखा जा सकता है। इसी स्थान पर गणपति की मूर्ति स्थापित की जाती है। मूर्ति के साथ अक्षत, रोली, कुमकुम, सिंदूर, हल्दी की गांठ और सिक्का जैसी पूजा सामग्री भी पहले से तैयार रखी जा सकती है।

    गणेश स्थापना में कलश का भी महत्व बताया गया है। इसके लिए तांबे या पीतल का कलश, गंगाजल, आम या अशोक के पत्ते, नारियल और कलावा जैसी सामग्री जुटाकर रखी जा सकती है। पूजा के समय इन चीजों की जरूरत पड़ती है, इसलिए इन्हें पहले से एक स्थान पर रखना सुविधाजनक रहेगा।

    गणपति पूजा की सामग्री में दूर्वा और सुपारी भी खास तौर पर शामिल की जाती है। बप्पा को अर्पित करने के लिए ताजे फूल भी तैयार रखें। इसके अलावा जनेऊ, पानी वाला नारियल और गुड़-नारियल का गोला भी पूजा की सामग्री में रखा जा सकता है। इनका इस्तेमाल पूजा और भोग की तैयारी में किया जाता है।

    भगवान गणेश को भोग लगाने के लिए मोदक या लड्डू, फल और पंचमेवा तैयार रखना चाहिए। यदि घर पर मोदक बनाने की तैयारी है तो उन्हें पूजा के समय से पहले बनाकर रख लेना बेहतर रहेगा। पंचामृत भी पूजा के लिए तैयार किया जा सकता है। इससे स्थापना और पूजा के दौरान जरूरी सामग्री पहले से उपलब्ध रहेगी।

    पूजा की थाली में घी का दीपक और धूप भी जरूर रखें। आरती और पूजा के दौरान इनकी जरूरत होती है। पूजा की सभी छोटी-बड़ी चीजों को एक साथ व्यवस्थित करके रखने से स्थापना के समय सामान तलाशने में परेशानी नहीं होगी।

    गणेश चतुर्थी की पूजा में कई तरह की सामग्री का इस्तेमाल होता है। इसलिए आखिरी समय की भागदौड़ से बचने के लिए पूजा का सामान एक दिन पहले ही जुटा लेना बेहतर रहेगा। चौकी, कपड़ा, गणपति मूर्ति, अक्षत, रोली, कुमकुम, सिंदूर, हल्दी, सिक्का, कलश, गंगाजल, पत्ते, नारियल, कलावा, सुपारी, दूर्वा, फूल और जनेऊ जैसी सामग्री की तैयारी पहले की जा सकती है।

    इसी तरह भोग के लिए मोदक या लड्डू, फल, पंचमेवा और पंचामृत भी समय से तैयार रखें। दीपक और धूप को भी पूजा की सामग्री के साथ रख दें। इस तरह गणपति स्थापना के समय जरूरी सामान पहले से तैयार रहेगा और पूजा की प्रक्रिया को आसानी से पूरा किया जा सकेगा।

  • Besan Modak Recipe: गणेश चतुर्थी पर घर में बनाएं खस्ता मावा मोदक, बेसन और मेवों से तैयार करें स्वादिष्ट भो

    Besan Modak Recipe: गणेश चतुर्थी पर घर में बनाएं खस्ता मावा मोदक, बेसन और मेवों से तैयार करें स्वादिष्ट भो


    नई दिल्ली ।
    गणेशोत्सव के दौरान भगवान गणेश को मोदक का भोग लगाने की परंपरा है। आमतौर पर मोदक चावल के आटे से तैयार किए जाते हैं, लेकिन इस बार घर में मौजूद बेसन से भी स्वादिष्ट मोदक बनाए जा सकते हैं। बेसन का सोंधापन और मावा-मेवों की भरावन इस मिठाई को अलग स्वाद देती है। गणेश चतुर्थी के मौके पर घर पर तैयार किए गए इन मोदक को बप्पा को भोग के रूप में अर्पित किया जा सकता है।

    बेसन मावा मोदक बनाने के लिए सबसे पहले इसकी बाहरी परत के लिए सामग्री तैयार करनी होगी। इसके लिए डेढ़ कप बेसन, आधा कप देसी घी, दो बड़े चम्मच सूजी, आधा छोटा चम्मच इलायची पाउडर और तीन चौथाई कप पिसी चीनी की जरूरत होगी।

    मोदक के अंदर भरने वाली स्टफिंग के लिए आधा कप मावा या खोया लिया जाता है। इसमें दो बड़े चम्मच कद्दूकस किया हुआ नारियल, दो बड़े चम्मच बारीक कटे काजू-बादाम, एक छोटा चम्मच चिरौंजी, चुटकी भर जायफल और इलायची पाउडर तथा दो बड़े चम्मच पिसी चीनी मिलाई जाती है।

    मोदक की स्टफिंग तैयार करने के लिए सबसे पहले एक पैन में मावा डालकर धीमी आंच पर करीब दो से तीन मिनट तक भूनें। मावा हल्का गुलाबी होने लगे तो इसमें कटे हुए काजू-बादाम, चिरौंजी और कद्दूकस किया हुआ नारियल डालें। इसके बाद जायफल और इलायची पाउडर मिलाकर गैस बंद कर दें।

    मिश्रण को हल्का गुनगुना होने दें। इसके बाद इसमें दो बड़े चम्मच पिसी चीनी डालकर अच्छी तरह मिला लें। तैयार मावा-मेवे की स्टफिंग को एक तरफ रख दें।

    अब मोदक की बाहरी परत तैयार करने की बारी है। इसके लिए भारी तले की कढ़ाई में देसी घी गर्म करें। इसमें दो बड़े चम्मच सूजी और डेढ़ कप बेसन डालें। दोनों को धीमी आंच पर लगातार चलाते हुए भूनें। करीब आठ से दस मिनट तक भूनने के बाद बेसन से सोंधी खुशबू आने लगेगी और उसका रंग हल्का सुनहरा हो जाएगा।

    बेसन अच्छी तरह भुन जाने के बाद गैस बंद कर दें और मिश्रण को थोड़ा ठंडा होने दें। जब यह हाथ लगाने लायक गुनगुना रह जाए, तब इसमें पिसी चीनी और इलायची पाउडर डालकर अच्छी तरह मिला लें।

    अब मोदक का सांचा लें और उसमें हल्का सा घी लगा दें। सांचे में बेसन का मिश्रण दोनों तरफ दबाकर भरें और बीच में थोड़ी जगह बना लें। इसी खाली जगह में तैयार मावा और मेवों की स्टफिंग भरें। इसके बाद ऊपर से थोड़ा बेसन का मिश्रण लगाकर सांचे को नीचे की तरफ से बंद कर दें।

    सांचे को खोलने पर बेसन मावा मोदक तैयार हो जाएगा। इसी प्रक्रिया से बाकी मोदक भी बनाए जा सकते हैं। बेसन से तैयार बाहरी परत का सोंधापन और मावा, नारियल, काजू, बादाम तथा चिरौंजी से बनी स्टफिंग इसके स्वाद को खास बनाती है। गणेशोत्सव के दौरान इन मोदक को बप्पा को भोग के रूप में अर्पित किया जा सकता है।

    इस तरह घर में उपलब्ध बेसन से बिना पारंपरिक चावल के आटे के भी मोदक तैयार किए जा सकते हैं। रेसिपी में बेसन को धीमी आंच पर अच्छी तरह भूनना और स्टफिंग को सही तरीके से तैयार करना इसके स्वाद और बनावट का अहम हिस्सा है। तैयार मोदक देखने में आकर्षक और खाने में खस्ता तथा सोंधे होते हैं।

  • गणेश जी की पूजा के लिए क्या है जरूरी? जानिए पूजा सामग्री और विधि

    गणेश जी की पूजा के लिए क्या है जरूरी? जानिए पूजा सामग्री और विधि


    नई दिल्ली -हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता का स्थान प्राप्त है। मान्यता है कि किसी भी शुभ कार्य, पूजा, यज्ञ, विवाह या नए कार्य की शुरुआत से पहले गणेश जी का स्मरण और पूजन करने से सभी बाधाएं दूर होती हैं और कार्य सफल होता है। इसलिए गणेश जी की पूजा में सही सामग्री और विधि का विशेष महत्व माना गया है।

    गणेश जी की पूजा के लिए सबसे पहले उनकी प्रतिमा या चित्र होना आवश्यक है। पूजा स्थान को स्वच्छ करके लाल या पीला वस्त्र बिछाएं और उस पर गणेश जी की स्थापना करें। इसके बाद गंगाजल या शुद्ध जल से पूजा स्थल को पवित्र करें।

    गणेश पूजा में दूर्वा घास का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश को दूर्वा अत्यंत प्रिय है। पूजा के दौरान 21 दूर्वा अर्पित करने से गणपति प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। इसके साथ ही लाल या पीले फूल भी अर्पित किए जाते हैं।

    भगवान गणेश को मोदक और लड्डू विशेष रूप से प्रिय हैं। इसलिए पूजा में मोदक, बेसन के लड्डू या बूंदी के लड्डू का भोग लगाना शुभ माना जाता है। इसके अलावा फल, नारियल, सुपारी, पान के पत्ते और अक्षत (चावल) भी पूजा सामग्री में शामिल किए जाते हैं।

    पूजा के समय दीपक और धूप अवश्य जलाएं। घी का दीपक जलाकर गणेश जी की आरती करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। रोली, कुमकुम, हल्दी, चंदन और मौली भी पूजा में उपयोग की जाती हैं। चंदन का तिलक लगाने से पूजा का महत्व और बढ़ जाता है।

    गणेश पूजा के दौरान “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप विशेष फलदायी माना गया है। इस मंत्र का 21, 51 या 108 बार जाप करने से बुद्धि, ज्ञान और सफलता की प्राप्ति होती है। गणेश चालीसा, गणेश अथर्वशीर्ष या संकटनाशन स्तोत्र का पाठ भी किया जा सकता है।

    धार्मिक मान्यता है कि गणेश जी की पूजा में श्रद्धा और भक्ति सबसे महत्वपूर्ण होती है। यदि सभी सामग्री उपलब्ध न हो, तब भी सच्चे मन और विश्वास से की गई पूजा भगवान तक पहुंचती है। इसलिए पूजा करते समय मन को शांत रखें और पूर्ण श्रद्धा के साथ गणपति बप्पा का स्मरण करें।

    नियमित रूप से गणेश जी की आराधना करने से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं, कार्यों में सफलता मिलती है और घर-परिवार में सुख, शांति तथा समृद्धि का वास होता है। यही कारण है कि गणेश जी को विघ्नहर्ता और मंगलकारी देवता कहा जाता है।