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  • कृषि उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि और तकनीक आधारित बदलाव पर चर्चा, लखनऊ सम्मेलन में मुख्यमंत्री योगी ने बताया कृषि क्षेत्र का बदलता स्वरूप

    कृषि उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि और तकनीक आधारित बदलाव पर चर्चा, लखनऊ सम्मेलन में मुख्यमंत्री योगी ने बताया कृषि क्षेत्र का बदलता स्वरूप


    नई दिल्ली।लखनऊ में आयोजित क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन (उत्तर क्षेत्र) के उद्घाटन अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की कृषि व्यवस्था में आए महत्वपूर्ण बदलावों और उपलब्धियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राज्य कृषि उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है और यह परिवर्तन वैज्ञानिक तकनीकों, एग्रो क्लाइमेटिक जोन आधारित रणनीति तथा केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि लैब टू लैंड की अवधारणा अब केवल एक नीति नहीं रह गई है, बल्कि यह किसानों के जीवन में प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देने वाला वास्तविक परिवर्तन बन चुकी है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि कृषि विकास दर में लगातार वृद्धि, प्रति हेक्टेयर उत्पादन में रिकॉर्ड सुधार, बहुफसली खेती का विस्तार और वैल्यू एडिशन पर बढ़ता ध्यान इस परिवर्तन के स्पष्ट संकेत हैं। उन्होंने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्रों का सशक्तीकरण, अंतरराष्ट्रीय कृषि संस्थानों की स्थापना और प्रगतिशील किसानों की भागीदारी ने इस बदलाव को मजबूती प्रदान की है। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश आज देश की कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने की क्षमता रखता है और यह केवल योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से संभव हुआ है।

    अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि नीतियों को अलग अलग एग्रो क्लाइमेटिक जोन के अनुसार तैयार करना आवश्यक है क्योंकि हर क्षेत्र की जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियां अलग होती हैं। उन्होंने कहा कि जब इन क्षेत्रों में वैज्ञानिक गोष्ठियां और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं तो किसानों तक तकनीक तेजी से पहुंचती है और उत्पादन में सुधार होता है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्षों में आयोजित कृषि अभियानों के दौरान किसानों और वैज्ञानिकों के बीच बेहतर संवाद स्थापित हुआ है, जिससे नई तकनीकों को अपनाने की प्रक्रिया तेज हुई है।

    मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय कृषि विज्ञान केंद्र सीमित और लगभग निष्क्रिय स्थिति में थे, लेकिन आज सभी केंद्र सक्रिय होकर नवाचार को बढ़ावा दे रहे हैं। केंद्र सरकार के सहयोग से नए केंद्रों की स्थापना और पुराने केंद्रों के सशक्तीकरण के बाद अब वैज्ञानिक सीधे किसानों के खेतों में जाकर तकनीक का प्रदर्शन कर रहे हैं। इससे अनुसंधान और व्यावहारिक खेती के बीच की दूरी काफी कम हो गई है।

    उन्होंने कहा कि इन प्रयासों का परिणाम यह है कि उत्तर प्रदेश की कृषि विकास दर लगभग आठ प्रतिशत से बढ़कर अठारह प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो एक बड़ी उपलब्धि है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि को केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि इसे मूल्य संवर्धन और उद्योग से जोड़ना आवश्यक है ताकि किसानों की आय में स्थायी वृद्धि हो सके।

    मुख्यमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय कृषि संस्थानों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला और कहा कि इनके माध्यम से नई किस्मों का विकास और तकनीकी नवाचार तेजी से हो रहा है। इससे विभिन्न क्षेत्रों में उपयुक्त फसलों का चयन आसान हुआ है और उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि कई क्षेत्रों में धान का उत्पादन पहले की तुलना में लगभग दोगुना हो गया है और कुछ स्थानों पर यह सौ कुंतल प्रति हेक्टेयर तक पहुंच गया है।

    उन्होंने प्राकृतिक खेती, रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग और गुणवत्तापूर्ण बीज की समय पर उपलब्धता पर विशेष जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को जानकारी, संसाधन और बाजार उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने यह भी बताया कि अब किसान तीन फसल तक उत्पादन कर रहे हैं और उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है।

    मुख्यमंत्री ने प्रगतिशील किसानों का उदाहरण देते हुए कहा कि अनुभव और आधुनिक तकनीक के संयोजन से कम लागत में अधिक उत्पादन संभव है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश कृषि क्षेत्र में मजबूत आधार के साथ आगे बढ़ रहा है और आने वाले समय में इसके परिणाम और अधिक प्रभावी रूप में दिखाई देंगे।

  • पारंपरिक खेती से आधुनिक बागवानी तक: भोपाल के किसान रामसिंह कुशवाह कमा रहे लाखों, पॉलीहाउस में फूलों की खेती से बदली किस्मत

    पारंपरिक खेती से आधुनिक बागवानी तक: भोपाल के किसान रामसिंह कुशवाह कमा रहे लाखों, पॉलीहाउस में फूलों की खेती से बदली किस्मत

    भोपाल । भोपाल जिले के फंदा क्षेत्र के ग्राम बरखेड़ा बोंदर के किसान रामसिंह कुशवाह ने आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं की मदद से खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदलकर एक नई मिसाल पेश की है। कभी धान गेहूं और सोयाबीन जैसी पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहने वाले रामसिंह कुशवाह सीमित आय के कारण आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे थे लेकिन अब वे फूलों और फलों की आधुनिक खेती से हर महीने लाखों रुपये की आमदनी प्राप्त कर रहे हैं। उनकी सफलता की कहानी न केवल आर्थिक उन्नति का उदाहरण है बल्कि प्रदेश के किसानों के लिए प्रेरणा भी बन गई है।

    रामसिंह कुशवाह बताते हैं कि उनका परिवार वर्षों से पारंपरिक खेती करता आ रहा था लेकिन बढ़ती लागत और कम लाभ के कारण खेती से पर्याप्त आमदनी नहीं हो पा रही थी। इसी दौरान उन्हें उद्यानिकी विभाग द्वारा संचालित एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना के बारे में जानकारी मिली। इस योजना के तहत उन्होंने राष्ट्रीय विकास परियोजना का लाभ लेते हुए लगभग एक हजार स्क्वायर फीट क्षेत्र में पॉलीहाउस बनाकर गुलाब और जरबेरा जैसे फूलों की खेती शुरू की।

    बाद में राज्य योजना के तहत वर्ष 2023-24 में उन्होंने उद्यानिकी विभाग से सब्सिडी प्राप्त कर एक एकड़ भूमि में पॉलीहाउस स्थापित किया और गुलाब जरबेरा तथा गेंदा के लगभग 30 हजार पौधे लगाए। आज वे प्रतिदिन करीब चार हजार कट फ्लावर बाजार में बेचते हैं और इससे रोजाना चार से छह हजार रुपये तक की आमदनी अर्जित कर रहे हैं।

    फूलों के उत्पादन को बढ़ाने और लागत कम करने के लिए उन्होंने इस वर्ष अपने पॉलीहाउस में सेंसर आधारित ऑटोमेशन सिस्टम भी स्थापित किया है। इस सिस्टम की कुल लागत लगभग चार लाख रुपये है जिसमें से दो लाख रुपये की सब्सिडी सरकार की ओर से प्राप्त हुई है। इस आधुनिक तकनीक की मदद से एक एकड़ की खेती में पानी खाद और दवाइयों की संतुलित मात्रा 24 घंटे स्वतः दी जाती है जिससे समय और लागत दोनों की बचत होती है। इस तकनीक को अपनाकर रामसिंह कुशवाह भोपाल जिले में ऑटोमेटेड बागवानी प्रणाली अपनाने वाले पहले किसान बन गए हैं।

    रामसिंह कुशवाह की खेती में उगाए गए गुलाब और जरबेरा के फूल अब स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं हैं बल्कि उनकी सप्लाई दिल्ली जयपुर और लखनऊ जैसे बड़े शहरों तक की जा रही है। आधुनिक तकनीक वैज्ञानिक पद्धति और ड्रिप व स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली को अपनाने से उन्हें बेहतर उत्पादन मिल रहा है। इन सिंचाई प्रणालियों पर भी उन्हें लगभग 50 प्रतिशत सब्सिडी का लाभ मिला है।

    आज उनकी खेती से प्रतिदिन हजारों फूलों का उत्पादन हो रहा है और इससे उन्हें नियमित आय प्राप्त हो रही है। फूलों और फलों की खेती ने न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है बल्कि गांव के अन्य किसानों को भी नई दिशा दी है।

    रामसिंह कुशवाह कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की योजनाओं के कारण उन्हें आधुनिक खेती अपनाने का अवसर मिला है। उनका मानना है कि सही मार्गदर्शन नई तकनीक और सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर किसान खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदल सकते हैं। उनकी सफलता की यह कहानी प्रदेश के किसानों के लिए प्रेरणा बन गई है।