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  • मोदी कैबिनेट में जल्द होगा बड़ा फेरबदल…! 6 दिग्गज मंत्री OUT और 9 नए चेहरे हो सकते हैं IN

    मोदी कैबिनेट में जल्द होगा बड़ा फेरबदल…! 6 दिग्गज मंत्री OUT और 9 नए चेहरे हो सकते हैं IN


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) जल्द ही अपनी कैबिनेट का विस्तार (Modi Cabinet Reshuffle) करने जा रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में चल रही चर्चाओं के मुताबिक, यह फेरबदल जल्द से जल्द होने की संभावना है। इस बार के कैबिनेट विस्तार में कुछ चौंकाने वाले फैसले देखने को मिल सकते हैं। खराब प्रदर्शन और राजनीतिक समीकरणों के चलते कई दिग्गज मंत्रियों (Veteran Ministers) की विदाई हो सकती है, वहीं कुछ नए और अप्रत्याशित चेहरो को कैबिनेट में जगह मिल सकती है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ अलग-अलग हुई मुलाकातों के बाद इस कवायद को अंतिम रूप दिया जा चुका है।

    सूत्रों की मानें तो इस फेरबदल में कुछ बड़े विभागों के मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है। ऐसे करीब आधा दर्जन मंत्री हैं, जिनके नाम पर कैंची चल सकती है। वहीं, एनडीए के सहयोगी सहित 9 नेताओं को पीएम मोदी की नई टीम में जगह मिल सकती है।


    धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय शिक्षा मंत्री:

    हाल ही में देश भर में हुए NEET पेपर लीक विवाद के बाद से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर भारी राजनीतिक दबाव है। माना जा रहा है कि इस विवाद का असर उनकी कुर्सी पर पड़ सकता है। इससे पहले भी यूजीसी और एनसीईआरटी विवाद को लेकर वह विपक्ष के निशाने पर हैं।


    हरदीप सिंह पुरी, पेट्रोलियम मंत्री:

    इन्हें भी कैबिनेट से हटाकर संगठन या किसी अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारी में भेजा जा सकता है। इसके अलावा, जिन मंत्रियों का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है या जिन राज्यों में आगामी विधानसभा चुनाव होने हैं वहां के समीकरणों को दुरुस्त करने के लिए कुछ राज्यमंत्रियों की भी छुट्टी की जा सकती है।

    इनके अलावा राज्यसभा चुनाव के जरिए ही भाजपा ने इस बात के संकेत दे दिए हैं कि कई मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है। उनमें केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इसके अलावा अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।


    इन नए चेहरों की हो सकती है सरप्राइज एंट्री
    शक्तिकांत दास (पूर्व गवर्नर, RBI):

    रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर और प्रधानमंत्री के पूर्व प्रधान सचिव शक्तिकांत दास का नाम इस रेस में सबसे आगे है। उन्हें सीधे कैबिनेट में लाकर कोई बेहद महत्वपूर्ण पोर्टफोलियो सौंपा जा सकता है।


    श्रीकांत शिंदे (सांसद, शिवसेना):

    महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन को मजबूत करने और शिवसेना के शिंदे गुट को केंद्र में प्रतिनिधित्व देने के लिए सांसद श्रीकांत शिंदे को मंत्री बनाया जा सकता है।


    अरुण गोविल (सांसद, भाजपा):

    रामायण धारावाहिक के जरिए घर-घर में पहचान बनाने वाले मेरठ के नवनिर्वाचित सांसद अरुण गोविल को भी मोदी टीम में जगह मिल सकती है।

    सूत्रों का कहना है कि ऐसे करीब 9 नाम हैं, जिन्हें नई कैबिनेट विस्तार में जगह मिल सकती है।


    शानदार काम करने वालों का होगा प्रमोशन

    भाजपा के वरिष्ठ नेता अनुराग ठाकुर को आगामी फेरबदल में कोई बड़ी और अधिक महत्वपूर्ण भूमिका सौंपी जा सकती है। इसके साथ ही बेहतर काम करने वाले कुछ राज्यमंत्रियों (MoS) को प्रमोट करके स्वतंत्र प्रभार या सीधे कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया जा सकता है।


    मंत्रालयों में बड़ा फेरबदल

    चर्चा है कि इस फेरबदल में मंत्रियों के विभागों में भी बड़ा उलटफेर होगा। दिल्ली के सियासी हलकों में चर्चा है कि यदि शक्तिकांत दास की कैबिनेट में एंट्री होती है तो उन्हें देश का नया वित्त मंत्री बनाया जा सकता है। ऐसी स्थिति में वर्तमान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को धर्मेंद्र प्रधान की जगह शिक्षा मंत्रालय जैसी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।


    चुनाव और क्षेत्रीय समीकरणों पर फोकस

    इस पूरे फेरबदल के पीछे आगामी राज्यों के विधानसभा चुनाव और भविष्य की राजनीतिक बिसात (2029 लोकसभा चुनाव) को मुख्य वजह माना जा रहा है। जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को साधने के लिए इस बार ओडिशा, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों को केंद्रीय मंत्रिमंडल में विशेष तवज्जो मिलने के पूरे आसार हैं।

  • केरल का नया नाम ‘केरलम’! मोदी कैबिनेट ने दिया ऐतिहासिक मंजूरी, राज्य की सांस्कृतिक पहचान को नया सम्मान

    केरल का नया नाम ‘केरलम’! मोदी कैबिनेट ने दिया ऐतिहासिक मंजूरी, राज्य की सांस्कृतिक पहचान को नया सम्मान


    नई दिल्ली। केरल अब आधिकारिक तौर पर ‘केरलम’ के नाम से जाना जाएगा। मोदी कैबिनेट ने मंगलवार, 24 फरवरी 2026 को इस ऐतिहासिक फैसले पर मुहर लगा दी। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि केरल का नाम बदलने की मांग लंबे समय से राज्य और स्थानीय भाषा प्रेमियों के बीच उठती रही है, और अब इस पर केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हरी झंडी दे दी है। इस कदम को राज्य विधानसभा में अंतिम मंजूरी के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद यह संविधान की आठवीं अनुसूची में भी शामिल कर दिया जाएगा।

    केरल विधानसभा ने इस प्रस्ताव को पारित करने का रास्ता पहले ही साफ कर दिया था। 24 जून, 2024 को विधानसभा ने आम सहमति से केंद्र सरकार को राज्य का नाम आधिकारिक रूप से बदलकर ‘केरलम’ करने का प्रस्ताव भेजा था। हालांकि, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने प्रारंभिक प्रस्ताव में कुछ तकनीकी सुधार सुझाए थे। इसके बाद दूसरी बार प्रस्ताव पारित किया गया और अब केंद्र ने इसे मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि कैबिनेट की बैठक में राज्य के हित में यह निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि यह नाम न केवल राज्य की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करेगा, बल्कि मलयालम भाषा के महत्व को भी उजागर करेगा।

    केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने भी राज्य का नाम बदलने का लंबे समय से समर्थन किया था। उनका कहना था कि ‘केरलम’ नाम मलयालम भाषा और स्थानीय संस्कृति की गहनता को दर्शाता है और इससे राज्य की पहचान और गौरव बढ़ेगा। भाजपा के केरल प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने भी इस साल के शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राज्य का आधिकारिक नाम बदलने की सिफारिश की थी। उन्होंने कहा कि ‘केरलम’ नाम स्थानीय संस्कृति और परंपराओं के प्रति सम्मान व्यक्त करता है और राज्य की असली पहचान को दर्शाता है।

    नए प्रधानमंत्री कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ में आयोजित इस बैठक में केरल का नाम बदलने के अलावा भी कई अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए। इस कदम से राज्य में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक और सांस्कृतिक माहौल में भी एक नया उत्साह देखा जा रहा है। नाम परिवर्तन न केवल औपचारिकता है, बल्कि यह राज्यवासियों के लिए सांस्कृतिक गर्व और भाषाई सम्मान का प्रतीक है।

    केरल का यह नाम परिवर्तन देश के अन्य राज्यों में भी भाषाई और सांस्कृतिक पहचान के प्रति जागरूकता बढ़ा सकता है। राज्य में स्थानीय भाषा, परंपराएं और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के लिए यह एक मजबूत संदेश है। अब केरलम के नाम से राज्य की पहचान और भी व्यापक होगी, और यह राज्य के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।

    संक्षेप में कहा जाए तो मोदी कैबिनेट द्वारा केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने की मंजूरी राज्य की भाषाई, सांस्कृतिक और राजनीतिक पहचान को मजबूत करने वाला निर्णय है। अब इसे अंतिम रूप देने के लिए राज्य विधानसभा में विधेयक पेश किया जाएगा, जिसके बाद यह नाम संविधान की आठवीं अनुसूची में भी दर्ज होगा। इस कदम से केरलम की सांस्कृतिक विरासत को एक नई पहचान मिलेगी और राज्यवासियों में गर्व की भावना और बढ़ेगी।