Tag: Mogambo

  • अनुपम खेर ने सुनाया करियर का सबसे बड़ा अफसोस बोले अमरीश पुरी से टैलेंट की वजह से होती थी जलन

    अनुपम खेर ने सुनाया करियर का सबसे बड़ा अफसोस बोले अमरीश पुरी से टैलेंट की वजह से होती थी जलन


    नई दिल्ली । बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता अनुपम खेर ने अपने लंबे फिल्मी करियर में सैकड़ों यादगार भूमिकाएं निभाई हैं लेकिन एक ऐसा किरदार भी था जो उनके हाथ में आने के बाद उनसे छिन गया। यह किरदार था फिल्म मिस्टर इंडिया के मशहूर खलनायक मोगैंबो का जिसे बाद में अमरीश पुरी ने निभाकर भारतीय सिनेमा के सबसे यादगार विलेन में शामिल कर दिया।

    अनुपम खेर ने एक पॉडकास्ट में इस घटना को याद करते हुए बताया कि शुरुआत में मोगैंबो की भूमिका के लिए उनका चयन किया गया था। फिल्म के निर्देशक शेखर कपूर इस किरदार पर काम कर रहे थे और शुरुआती तैयारी भी हो चुकी थी। लेकिन कुछ समय बाद निर्माता बोनी कपूर और अभिनेता अनिल कपूर को लगा कि जिस तरह के दमदार और प्रभावशाली खलनायक की कल्पना की गई थी उसमें अनुपम खेर पूरी तरह फिट नहीं बैठ रहे हैं।

    इसके बाद फिल्म निर्माताओं ने अमरीश पुरी को इस भूमिका के लिए चुना। जब अनुपम खेर को यह पता चला तो उन्हें बेहद दुख हुआ। उन्होंने स्वीकार किया कि इस घटना के बाद उनके मन में अमरीश पुरी के प्रति जलन पैदा हो गई थी। हालांकि उन्होंने साफ कहा कि यह जलन किसी व्यक्तिगत दुश्मनी की नहीं बल्कि अभिनय प्रतिभा की वजह से थी।

    अनुपम खेर के अनुसार उन्हें यह महसूस होता था कि अमरीश पुरी उसी किरदार को उनसे कहीं बेहतर तरीके से निभा रहे थे। यही बात उन्हें सबसे अधिक परेशान करती थी। उन्होंने कहा कि कलाकारों के बीच ऐसी सकारात्मक प्रतिस्पर्धा स्वाभाविक होती है और कई बार यही भावना व्यक्ति को बेहतर काम करने की प्रेरणा भी देती है।

    बाद में अनुपम खेर ने निर्देशक शेखर कपूर के फैसले को पूरी तरह सही माना। उनका कहना था कि वह मोगैंबो के किरदार को एक चतुर धूर्त और राजनीतिक दांवपेंच समझने वाले खलनायक के रूप में निभाना चाहते थे जबकि निर्देशक की कल्पना इससे बिल्कुल अलग थी। शेखर कपूर एक ऐसे भव्य कॉमिक बुक शैली के विलेन की तलाश में थे जिसकी स्क्रीन मौजूदगी बेहद प्रभावशाली हो और जिसे बच्चे भी याद रखें।

    अमरीश पुरी ने मोगैंबो के रूप में जिस अंदाज से अभिनय किया वह भारतीय सिनेमा के इतिहास में अमर हो गया। उनका संवाद मोगैंबो खुश हुआ आज भी लोगों की जुबान पर है और यह किरदार हिंदी फिल्मों के सबसे प्रतिष्ठित खलनायकों में गिना जाता है।

    अनुपम खेर का यह अनुभव इस बात का उदाहरण है कि फिल्मी दुनिया में कई बार बड़े अवसर आखिरी समय पर हाथ से निकल जाते हैं लेकिन एक सच्चा कलाकार अपनी भावनाओं को स्वीकार करते हुए उनसे सीख भी लेता है। यही कारण है कि अनुपम खेर आज भी भारतीय सिनेमा के सबसे सम्मानित अभिनेताओं में गिने जाते हैं।

  • जब अमिताभ के मुहूर्त में देर से पहुंचने की घटना से जन्मा ‘मिस्टर इंडिया’ का आइडिया, जावेद अख्तर ने बना दी कल्ट फिल्म

    जब अमिताभ के मुहूर्त में देर से पहुंचने की घटना से जन्मा ‘मिस्टर इंडिया’ का आइडिया, जावेद अख्तर ने बना दी कल्ट फिल्म


    नई दिल्ली । फिल्मी दुनिया में कई बार छोटी-सी घटना भी बड़ी कहानी का आधार बन जाती है। हिंदी सिनेमा की मशहूर और कल्ट फिल्मों में गिनी जाने वाली मिस्टर इंडिया के पीछे भी एक ऐसा ही दिलचस्प किस्सा छिपा हुआ है। साल 1987 में रिलीज हुई इस फिल्म ने न सिर्फ दर्शकों का दिल जीता बल्कि अपने अनोखे कॉन्सेप्ट और दमदार किरदारों की वजह से आज भी याद की जाती है। दिलचस्प बात यह है कि फिल्म के गायब होने वाले हीरो का आइडिया लेखक जावेद अख्तर के दिमाग में तब आया था जब महानायक अमिताभ बच्चन एक फिल्म के मुहूर्त शॉट के लिए समय पर नहीं पहुंच पाए थे।

    दरअसल एक फिल्म का मुहूर्त समारोह चल रहा था जिसमें अमिताभ बच्चन को फिल्म की लीड एक्ट्रेस के साथ पहला शॉट देना था। लेकिन किसी कारणवश वे तय समय पर सेट पर नहीं पहुंच सके। ऐसे में फिल्म की टीम के सामने यह समस्या आ खड़ी हुई कि मुहूर्त शॉट कैसे लिया जाए। काफी सोच-विचार के बाद टीम ने एक अनोखा तरीका निकाला। उन्होंने हीरो की जगह एक ऑडियो टेप का इस्तेमाल करने का फैसला किया। कैमरे को इस तरह घुमाया गया कि ऐसा लगे जैसे हीरो वहां मौजूद है जबकि वास्तव में केवल उसकी आवाज सुनाई दे रही थी।

    उसी समय सेट पर मौजूद जावेद अख्तर ने इस पूरे दृश्य को ध्यान से देखा। यह अजीब लेकिन दिलचस्प अनुभव उनके दिमाग में एक नए विचार की चिंगारी बन गया। उन्होंने सोचा कि क्यों न ऐसी कहानी लिखी जाए जिसमें फिल्म का हीरो दिखाई ही न दे और सिर्फ उसकी मौजूदगी का एहसास हो। यही सोच आगे चलकर एक ऐसे किरदार में बदल गई जो अदृश्य होकर लोगों की मदद करता है और बुराई से लड़ता है। यही विचार बाद में मिस्टर इंडिया की कहानी की नींव बना।

    निर्देशक शेखर कपूर ने जब इस कहानी को पर्दे पर उतारा तो यह फिल्म हिंदी सिनेमा की सबसे यादगार फिल्मों में शामिल हो गई। फिल्म के मुख्य किरदार के लिए कई अभिनेताओं के नामों पर चर्चा हुई लेकिन आखिरकार यह भूमिका अनिल कपूर को मिली और उन्होंने इसे बेहद लोकप्रिय बना दिया। फिल्म में श्रीदेवी की शानदार अदाकारी और उनका सुपरहिट गीत हवा हवाई आज भी दर्शकों की जुबान पर है। वहीं खलनायक मोगैम्बो के रूप में अमरीश पुरी ने ऐसा प्रभाव छोड़ा कि उनका मशहूर डायलॉग “मोगैम्बो खुश हुआ” आज भी लोगों के बीच उतना ही लोकप्रिय है।

    उस दौर में यह फिल्म अपने बड़े बजट की वजह से भी चर्चा में रही। करीब 3.8 करोड़ रुपये की लागत से बनी यह फिल्म उस समय की सबसे महंगी फिल्मों में से एक मानी जाती थी। हालांकि फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन करते हुए 10 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई की और बड़ी हिट साबित हुई।

    मिस्टर इंडिया केवल बॉक्स ऑफिस सफलता तक ही सीमित नहीं रही बल्कि अपने स्पेशल इफेक्ट्स मनोरंजक कहानी और यादगार गानों के कारण हिंदी सिनेमा के इतिहास में खास जगह बना चुकी है। आज भी जब बॉलीवुड की सबसे आइकॉनिक फिल्मों की बात होती है तो मिस्टर इंडिया का नाम गर्व के साथ लिया जाता है।