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  • भोपाल से इंदौर और जबलपुर तक उद्योगों का नया नेटवर्क, 30 दिन में बनेगी कंपनी, 3 लाख करोड़ के निवेश की तैयारी

    भोपाल से इंदौर और जबलपुर तक उद्योगों का नया नेटवर्क, 30 दिन में बनेगी कंपनी, 3 लाख करोड़ के निवेश की तैयारी


    भोपाल । मध्यप्रदेश में औद्योगिक विकास और निवेश को बढ़ावा देने के लिए जबलपुर-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर परियोजना को आगे बढ़ाने की तैयारी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कॉरिडोर के एकीकृत विकास के लिए नई कंपनी के गठन को मंजूरी दी गई है। जबलपुर-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड राज्य शासन के स्वामित्व में काम करेगी। सरकार कंपनी को शुरुआती अंश पूंजी के रूप में 100 करोड़ रुपए देगी। इसका उद्देश्य उद्योगों के लिए नियोजित औद्योगिक क्षेत्र विकसित करना निवेश आकर्षित करना और रोजगार के नए अवसर तैयार करना है।

    कैबिनेट में प्रस्तुत योजना के मुताबिक जबलपुर भोपाल और इंदौर को जोड़ने वाले इस कॉरिडोर में पहले चरण के दौरान 10 हजार एकड़ क्षेत्र में तीन से पांच प्राथमिक औद्योगिक हब विकसित किए जाएंगे। सरकार ने मार्च 2028 तक एक लाख करोड़ रुपए से अधिक का निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य रखा है। इससे एक लाख प्रत्यक्ष और दो लाख से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना जताई गई है। योजना के अगले तीन वर्षों में तीन लाख करोड़ रुपए से अधिक निवेश आकर्षित करने और छह लाख से ज्यादा रोजगार के अवसर तैयार करने का लक्ष्य भी रखा गया है। ये सभी आंकड़े फिलहाल सरकार की प्रस्तावित योजना और अनुमानित लक्ष्यों का हिस्सा हैं।

    कॉरिडोर में विकसित होने वाले औद्योगिक हब को प्लग एंड प्ले सुविधा के आधार पर तैयार किया जाएगा। इसका मतलब है कि निवेशकों को उद्योग शुरू करने के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने की कोशिश होगी। इनमें जमीन बिजली पानी सड़क सीवरेज और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। इसके अलावा श्रमिकों के लिए आवास अस्पताल स्कूल कौशल विकास केंद्र और हरित क्षेत्र विकसित करने की भी योजना है। इन सुविधाओं के माध्यम से औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर तरीके से व्यवस्थित किया जा सकेगा और उद्योग लगाने वाली कंपनियों को शुरुआती तैयारियों में मदद मिलने की उम्मीद है।

    परियोजना से प्रदेश के सात जिलों में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ाने की योजना है। इनमें जबलपुर नरसिंहपुर रायसेन भोपाल सीहोर देवास और इंदौर शामिल हैं। इन क्षेत्रों में इंजीनियरिंग मैन्युफैक्चरिंग रक्षा और एयरोस्पेस लॉजिस्टिक्स फूड प्रोसेसिंग वेयरहाउसिंग आईटी इलेक्ट्रॉनिक्स और तकनीकी सेवाओं जैसे क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। पर्यटन और सहायक औद्योगिक इकाइयों को भी बढ़ावा देने की योजना का हिस्सा बताया गया है। इससे स्थानीय कारोबार और संबंधित सेवाओं को भी लाभ मिलने की संभावना है।

    सरकार ने परियोजना के लिए समयसीमा भी तय की है। कैबिनेट में दी गई जानकारी के अनुसार अगले 30 दिनों में नई कंपनी का गठन करने का लक्ष्य है। छह महीने के भीतर पूरे कॉरिडोर की जीआईएस मैपिंग और लैंड बैंक तैयार किया जाएगा। इसके बाद एक साल के भीतर प्राथमिक औद्योगिक हब का मास्टर प्लान और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर भूमि आवंटन की प्रक्रिया शुरू करने की योजना है। कंपनी उद्योगों के लिए जमीन और बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था तथा निवेश आकर्षित करने पर ध्यान देगी। सड़क निर्माण की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसियों के पास रहेगी।

    नई कंपनी मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम यानी एमपीआईडीसी से अलग भूमिका निभाएगी। एमपीआईडीसी प्रदेश के अन्य औद्योगिक क्षेत्रों के विकास का काम जारी रखेगा जबकि नई कंपनी सात जिलों में फैली इस विशेष कॉरिडोर परियोजना पर केंद्रित रहेगी। भूमि व्यवस्था के मामले में पहले सरकारी जमीन को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। आवश्यकता पड़ने पर निजी भूमि सहमति से खरीदने या कानून के अनुसार अधिग्रहण की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। प्रभावित परिवारों को नियमानुसार मुआवजा और पुनर्वास देने की बात भी कही गई है। वन भूमि वाले क्षेत्रों में जरूरी सरकारी स्वीकृतियों और वनीकरण की प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही काम आगे बढ़ सकेगा।

  • कवच योजना बनी किसानों की नई उम्मीद, डिफॉल्टर किसानों को फिर मिलेगा खेती का सहारा

    कवच योजना बनी किसानों की नई उम्मीद, डिफॉल्टर किसानों को फिर मिलेगा खेती का सहारा


    भोपाल । मध्य प्रदेश सरकार किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। सहकारी बैंकों और समितियों में हुई वित्तीय अनियमितताओं के कारण डिफॉल्टर घोषित हुए हजारों किसानों को राहत देने के लिए राज्य सरकार कवच योजना लागू करने की तैयारी में है। इस योजना के प्रस्ताव को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट बैठक में मंजूरी मिल सकती है। योजना का उद्देश्य उन किसानों को दोबारा आर्थिक मुख्यधारा से जोड़ना है जिन्होंने अपना कर्ज और खाद-बीज का बकाया समय पर जमा कर दिया था लेकिन बैंक अधिकारियों और समिति कर्मचारियों की गड़बड़ी के कारण उनकी राशि बैंक खातों में दर्ज नहीं हो सकी।

    जानकारी के अनुसार प्रदेश में ऐसे करीब पांच हजार किसान हैं जिन्होंने सहकारी बैंकों और समितियों में अपनी बकाया राशि जमा कर दी थी लेकिन कुछ बैंक प्रबंधकों और कर्मचारियों ने वह राशि बैंक में जमा करने के बजाय उसका गबन कर लिया। किसानों ने भरोसे के आधार पर बिना रसीद के पैसा जमा कराया था क्योंकि उन्हें आश्वासन दिया गया था कि बाद में आधिकारिक रसीद उपलब्ध करा दी जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और बैंक रिकॉर्ड में राशि जमा नहीं होने के कारण किसान डिफॉल्टर घोषित हो गए।

    डिफॉल्टर घोषित होने का सबसे बड़ा नुकसान किसानों को यह हुआ कि वे दोबारा सहकारी बैंकों से कृषि ऋण लेने के पात्र नहीं रहे। इसके साथ ही उन्हें खाद बीज और अन्य कृषि सुविधाओं से भी वंचित होना पड़ा। इससे उनकी खेती प्रभावित हुई और आर्थिक स्थिति भी कमजोर होती चली गई। कई किसानों ने लगातार इस समस्या को सरकार के सामने उठाया जिसके बाद सहकारिता विभाग ने समाधान के लिए कवच योजना तैयार की।

    योजना के तहत ऐसे किसानों पर दर्ज बकाया राशि का भार राज्य सरकार और अपेक्स बैंक मिलकर वहन करेंगे ताकि किसानों के नाम से डिफॉल्टर का रिकॉर्ड हटाया जा सके। इसके बाद प्रभावित किसान फिर से सहकारी बैंकों से ऋण ले सकेंगे और खाद बीज सहित अन्य कृषि सुविधाओं का लाभ भी उठा पाएंगे। सरकार का मानना है कि किसानों की गलती न होने के बावजूद उन्हें सजा नहीं मिलनी चाहिए इसलिए यह योजना उनके हितों की रक्षा के लिए लाई जा रही है।

    सहकारिता विभाग के अनुसार जिन बैंक प्रबंधकों और समिति कर्मचारियों पर गबन के आरोप सिद्ध हुए हैं उनके खिलाफ कार्रवाई भी की गई है। कई मामलों में राशि की वसूली की प्रक्रिया जारी है। हालांकि जब तक पूरा पैसा वापस नहीं आता तब तक किसानों को राहत देने के लिए सरकार ने यह अंतरिम व्यवस्था तैयार की है ताकि उनकी खेती और आजीविका प्रभावित न हो।

    आज होने वाली कैबिनेट बैठक में इस योजना के अलावा विभिन्न विभागों की कई योजनाओं को वर्ष 2031 तक जारी रखने के प्रस्तावों पर भी विचार किया जाएगा। साथ ही मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान की तैयारियों की भी समीक्षा होगी। यह अभियान 7 अगस्त से शुरू किया जाएगा जिसमें मंत्रियों को अपने प्रभार वाले जिलों में जाकर योजनाओं की निगरानी और जनता से सीधा संवाद करने के निर्देश दिए जाएंगे।

    कवच योजना को किसानों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है क्योंकि इससे उन लोगों को नई उम्मीद मिलेगी जो वर्षों से बिना किसी गलती के बैंकिंग व्यवस्था की लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे थे। सरकार का यह कदम न केवल किसानों का भरोसा बहाल करेगा बल्कि सहकारी बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।