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  • खर्च पर लगाम! अब दिल्ली जाने से पहले लेनी होगी परमिशन, MP सरकार का बड़ा फैसला

    खर्च पर लगाम! अब दिल्ली जाने से पहले लेनी होगी परमिशन, MP सरकार का बड़ा फैसला


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी खर्चों पर नियंत्रण लगाने और संसाधनों के अधिक प्रभावी उपयोग को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा जारी आदेशों के अनुसार अब प्रदेश के आईएएस, आईपीएस और सचिव स्तर के अधिकारियों को सरकारी खर्च पर दिल्ली, गुजरात, अन्य राज्यों या विदेश यात्रा करने से पहले मुख्य सचिव की अनुमति लेना अनिवार्य होगा। वहीं अन्य अधिकारियों को राज्य से बाहर की शासकीय यात्रा के लिए अपने विभागीय सचिव से मंजूरी लेनी होगी।

    सरकार का मानना है कि अनावश्यक यात्राओं और प्रशासनिक खर्चों में कटौती कर राज्य के वित्तीय संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकता है। इसी उद्देश्य से सभी विभागों, संभागायुक्तों, कलेक्टरों और विभागाध्यक्षों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

    ऑनलाइन बैठकों को मिलेगा बढ़ावा
    सरकार ने स्पष्ट किया है कि विभागीय बैठकों, कार्यशालाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और सेमिनारों को अधिकतम डिजिटल माध्यमों के जरिए आयोजित किया जाए। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं ताकि अधिकारियों की अनावश्यक यात्रा कम हो और समय व धन दोनों की बचत हो सके। इसके अलावा अधिकारियों और कर्मचारियों को कार्यालय आने-जाने के लिए सार्वजनिक परिवहन, बस सेवा और इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे ईंधन की बचत के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

    ऊर्जा बचत पर सरकार का विशेष फोकस
    राज्य सरकार ने सभी सरकारी कार्यालयों में ऊर्जा संरक्षण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। कार्यालयों में ऊर्जा ऑडिट कराने, बिजली खपत की निगरानी करने तथा शाम 7 बजे के बाद अनावश्यक रूप से चल रहे पंखे, लाइट, कंप्यूटर, प्रिंटर और अन्य उपकरण बंद रखने को कहा गया है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत रूफटॉप सोलर सिस्टम को बढ़ावा देने और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में काम करने पर जोर दिया गया है।

    प्राकृतिक खेती और हरित विकास को प्रोत्साहन
    कृषि विभाग को प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं निर्माण एजेंसियों को फ्लाई ऐश, प्लास्टिक वेस्ट बिटुमिन और अन्य पर्यावरण अनुकूल सामग्री का अधिक उपयोग करने के लिए कहा गया है। सरकार का लक्ष्य विकास कार्यों को पर्यावरण संरक्षण के साथ जोड़ना है।

    PNG और LPG कनेक्शनों की होगी जांच
    सरकार ने पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) नेटवर्क के विस्तार में सहयोग बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही उज्ज्वला योजना और सामान्य एलपीजी कनेक्शनों में डुप्लीकेट तथा अपात्र लाभार्थियों की पहचान कर कार्रवाई करने का अभियान भी चलाया जाएगा।

    फूड ऑयल के कम उपयोग पर चलेगा अभियान
    लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग को खाद्य तेल के अत्यधिक उपयोग से होने वाले स्वास्थ्य नुकसान के प्रति लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए व्यवहार परिवर्तन आधारित अभियान चलाए जाएंगे, जिससे लोगों में स्वस्थ खानपान की आदत विकसित हो सके।

    90 दिन का जन-जागरूकता अभियान
    जनसंपर्क विभाग को ऊर्जा संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को लेकर 90 दिनों का व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं पर्यटन विभाग को “देखो अपना देश” और “सबसे पहले मध्यप्रदेश” जैसे अभियानों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए हैं।

    सरकार ने सभी विभागों को इन निर्देशों के पालन की मासिक रिपोर्ट सामान्य प्रशासन विभाग को भेजने के लिए भी कहा है। सरकार का दावा है कि इन कदमों से न केवल सरकारी खर्च में कमी आएगी बल्कि ऊर्जा संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिलेगी।

  • MP में तबादलों की बाढ़: 16 दिन में 17 हजार से ज्यादा ट्रांसफर, एक दिन की छूट में ही ढाई हजार आदेश जारी

    MP में तबादलों की बाढ़: 16 दिन में 17 हजार से ज्यादा ट्रांसफर, एक दिन की छूट में ही ढाई हजार आदेश जारी


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में तबादलों का सीजन इस बार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सरकार द्वारा तबादलों पर लगी रोक में दी गई छूट के बाद प्रदेशभर में बड़े पैमाने पर प्रशासनिक फेरबदल हुआ है। महज 16 दिनों की अवधि में 17 हजार से अधिक अधिकारी और कर्मचारियों के तबादले किए गए हैं। खास बात यह है कि 15 जून को तबादला अवधि समाप्त होने के बाद मंत्रियों की मांग पर सरकार ने एक दिन की अतिरिक्त छूट दी और इसी एक दिन में करीब ढाई हजार तबादला आदेश जारी कर दिए गए।

    सरकारी सूत्रों के अनुसार, 16 जून की रात 12 बजे तक मिली विशेष अनुमति के दौरान विभागों ने तेजी से लंबित प्रस्तावों को मंजूरी देते हुए स्थानांतरण आदेश जारी किए। इन तबादलों में राज्य स्तर और जिला स्तर दोनों श्रेणियों के अधिकारी-कर्मचारी शामिल हैं। अभी स्कूल शिक्षा विभाग के तबादले पूरी तरह नहीं हुए हैं क्योंकि वहां ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया जारी है। ऐसे में कुल तबादलों की संख्या और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

    तबादलों की इस व्यापक प्रक्रिया में कई महत्वपूर्ण विभाग शामिल रहे। आबकारी, जेल, वन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, वाणिज्यिक कर, पंजीयन एवं मुद्रांक, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, नगरीय विकास एवं आवास, जल संसाधन, लोक निर्माण, पर्यावरण, राजस्व, जनजातीय कार्य, महिला एवं बाल विकास, आयुष, कृषि, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास और सहकारिता विभागों में बड़ी संख्या में अधिकारियों और कर्मचारियों का स्थानांतरण किया गया।

    विभागवार आंकड़ों पर नजर डालें तो पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में सबसे ज्यादा लगभग 1100 तबादले हुए हैं। इसके अलावा लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में 1700, जनजातीय कार्य विभाग में 1200, नगरीय विकास एवं आवास विभाग में 900, राजस्व विभाग में 400, लोक निर्माण विभाग में 500 तथा वन विभाग में करीब 200 स्थानांतरण किए गए हैं। वहीं सामान्य प्रशासन विभाग, परिवहन, आबकारी, वाणिज्यिक कर और जल संसाधन विभागों में भी बड़ी संख्या में तबादले हुए हैं।

    हालांकि सामान्य प्रशासन विभाग तबादला नीति जारी करता है, लेकिन विभागवार कुल तबादलों का केंद्रीकृत रिकॉर्ड नहीं रखा जाता। इसलिए विभिन्न विभागों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर ही तबादलों की संख्या का अनुमान लगाया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि जिला स्तर पर हुए हजारों तबादलों को जोड़ने पर यह आंकड़ा और भी बड़ा हो सकता है।

    तबादलों की इस बड़ी कवायद को सरकार प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में उठा गया कदम बता रही है। वहीं विपक्ष और कर्मचारी संगठनों की ओर से इसे राजनीतिक और प्रशासनिक संतुलन साधने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि इतने बड़े स्तर पर हुए फेरबदल का सरकारी कामकाज और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन पर क्या प्रभाव पड़ता है।

    स्कूल शिक्षा विभाग सहित कुछ विभागों में अभी स्थानांतरण प्रक्रिया जारी है, इसलिए आने वाले दिनों में तबादलों की संख्या में और वृद्धि होने की संभावना बनी हुई है।

  • MP में कॉन्ट्रैक्ट कर्मियों की बल्ले-बल्ले….. मोहन यादव सरकार ने बढ़ाया वेतन

    MP में कॉन्ट्रैक्ट कर्मियों की बल्ले-बल्ले….. मोहन यादव सरकार ने बढ़ाया वेतन


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश सरकार (Madhya Pradesh Government) ने कॉन्ट्रैक्ट (Contract.) पर काम करने वाले लगभग 1.25 लाख कर्मचारियों अधिकारियों को सौगात दी है। मोहन यादव सरकार (Mohan Yadav Govt) ने इन कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों अधिकारियों के सालाना वेतन में 4.46 फीसदी की बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों अधिकारियों (Contract Employees and Officers) की सेलरी में यह बढ़ोतरी 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी। फैसला राज्य की 2023 की कॉन्ट्रैक्ट एम्प्लॉयमेंट पॉलिसी के तहत कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स के आधार पर लिया गया है।


    1.25 लाख कर्मचारियों को फायदा

    मध्य प्रदेश के वित्त विभाग के अनुसार, मोहन यादव सरकार ने सोमवार को कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों के वेतन में 4.46 फीसदी की सालाना बढ़ोतरी को मंजूरी दी। यह बढ़ोतरी इसी साल 1 अप्रैल से लागू कर दी जाएगी। इससे लगभग 1.25 लाख कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों अधिकारियों को फायदा होगा। यह बढ़ोतरी राज्य की कॉन्ट्रैक्ट एम्प्लॉयमेंट पॉलिसी के तहत की गई है। इस नीति को 22 जुलाई 2023 को अमल में लाया गया था।


    कितनी होगी बढ़ोतरी?

    बता दें कि कॉन्ट्रैक्ट एम्प्लॉयमेंट पॉलिसी में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स के आधार पर सालाना वेतनमान में बदलाव का प्रावधान किया गया है। मध्य प्रदेश सरकार के इस फैसले पर एमपी कॉन्ट्रैक्टुअल ऑफिसर्स एंड एम्प्लॉइज एसोसिएशन के अध्यक्ष रमेश राठौर ने सराहनीय बताया। उन्होंने कहा कि इस बदलाव से कर्मचारियों के वेतन में पे स्केल के आधार पर लगभग 1,000 रुपये से 2,500 रुपये प्रति माह की बढ़ोतरी हो जाएगी।


    एक जैसे कॉन्ट्रैक्ट पदों के लिए समान वेतन

    मध्य प्रदेश के वित्त विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार, इस बार कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की सेलरी में पिछली बार से अधिक बढ़ोतरी की गई है। इस साल 1 अप्रैल से सालाना बढ़ोतरी की दर 4.46 प्रतिशत तय की गई है जबकि पिछले साल यह 2.94 फीसदी थी। बता दें कि 2023 की पॉलिसी से पहले अलग-अलग विभागों में एक जैसे कॉन्ट्रैक्ट पदों के लिए अलग-अलग वेतन मिलता था। इस पॉलिसी से अलग-अलग विभागों में एक जैसे कॉन्ट्रैक्ट पदों के लिए समान वेतन तय है।


    कर्मचारी संघ ने की है यह मांग

    बता दें कि नई नीति के तहत कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों का वेतन चपरासी पद के लिए 21,800 रुपये से लेकर असिस्टेंट इंजीनियर और असिस्टेंट मैनेजर के लिए 70,000 रुपये प्रति माह तक रखा गया है। कर्मचारी संघ की मांग है कि जिन विभागों में 2023 की पॉलिसी लागू नहीं हुई है वे भी कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों को बढ़ी हुई सेलरी जारी करें।

  • मध्यप्रदेश में दिव्यांगजनों के लिए ऐतिहासिक कदम: पहली बार बनेगी राज्य स्तरीय समग्र नीति

    मध्यप्रदेश में दिव्यांगजनों के लिए ऐतिहासिक कदम: पहली बार बनेगी राज्य स्तरीय समग्र नीति


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य के लगभग 10 लाख दिव्यांगजनों के लिए पहली बार एक व्यापक और समग्र नीति बनाने का निर्णय लिया है। इस नीति का उद्देश्य सभी विभागों जैसे सामाजिक न्याय, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा और अन्य के काम को एक ही ढांचे में लाना है, ताकि लाभार्थियों को योजनाओं का समान और प्रभावी लाभ मिल सके। इस नीति के लागू होने के बाद दिव्यांगजनों के लिए अलग-अलग विभागों की योजनाओं में एकरूपता आएगी और सभी सेवाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगी।

     180 दिन में तैयार होगा ड्राफ्ट

    सरकार ने इस नीति का प्रारंभिक मसौदा 180 दिनों के भीतर तैयार करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए जिम्मेदारी दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के आयुक्त को सौंपी गई है।

    आयुक्त डॉ. अजय खेमरिया के अनुसार, यह प्रदेश में पहली बार होगा जब दिव्यांगजनों के लिए कोई समग्र नीति तैयार की जाएगी। अभी तक विभिन्न विभाग अलग-अलग योजनाएं चला रहे थे, जिससे लाभ में असमानता की स्थिति बनी हुई थी।

    सभी हितधारकों से होगा संवाद

    नीति को प्रभावी और वास्तविक जरूरतों के अनुरूप बनाने के लिए सरकार व्यापक स्तर पर संवाद करेगी। इसमें विशेषज्ञों, सामाजिक संगठनों, विश्वविद्यालयों के शोधकर्ताओं और दिव्यांगजनों से सीधे सुझाव लिए जाएंगे। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों, शहरी इलाकों और आदिवासी अंचलों विशेषकर अलीराजपुर, झाबुआ और बड़वानी जैसे जिलों में जाकर जमीनी स्थिति का अध्ययन किया जाएगा।

     विभागों के बीच समन्वय होगा मजबूत

    अभी तक दिव्यांगजनों के लिए सामाजिक न्याय, शिक्षा, एमएसएमई और एनआरएलएम जैसे विभाग अलग-अलग योजनाएं चला रहे हैं। नई नीति के बाद इन सभी विभागों का काम एकीकृत ढांचे में होगा, जिससे योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन संभव होगा।

     नई पहल: अध्ययन और वैश्विक मॉडल का उपयोग

    नीति निर्माण के दौरान तेलंगाना और त्रिपुरा जैसे राज्यों की व्यवस्थाओं का अध्ययन किया जाएगा। साथ ही अंतरराष्ट्रीय मॉडल और विशेषज्ञों की राय को भी शामिल किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य है कि यह नीति सिर्फ कागजी न होकर जमीनी स्तर पर बदलाव लाने वाली साबित हो।

    आवास और पुनर्वास पर विशेष फोकस

    प्रस्तावित नीति में 18 वर्ष से अधिक आयु के मानसिक रूप से दिव्यांग व्यक्तियों के लिए संभाग स्तर पर 100 बिस्तरों वाले विशेष आश्रय गृह बनाने का सुझाव भी शामिल है। इससे पुनर्वास और देखभाल की व्यवस्था मजबूत होगी।

     डेटा और भविष्य की जरूरतें

    प्रदेश में 2011 की जनगणना और UDID के अनुसार करीब 10 लाख दिव्यांगजन दर्ज हैं। आगामी जनगणना में यह संख्या बढ़ सकती है क्योंकि अब 21 प्रकार की दिव्यांगताओं को शामिल किया जाएगा, जिससे योजनाओं की जरूरत और अधिक व्यापक हो जाएगी।

    समान अवसरों की ओर बड़ा कदम

    यह नीति मध्यप्रदेश में दिव्यांगजनों के जीवन में समान अवसर, बेहतर सुविधाएं और समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यदि यह सही ढंग से लागू होती है, तो यह देश के लिए एक मॉडल पॉलिसी भी बन सकती है।

  • एमपी सरकार का बड़ा ऐलान गेहूं बिक्री के लिए अब ज्यादा समय और ज्यादा सुविधा

    एमपी सरकार का बड़ा ऐलान गेहूं बिक्री के लिए अब ज्यादा समय और ज्यादा सुविधा


    भोपाल । मध्यप्रदेश के किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण राहत भरा फैसला सामने आया है जहां राज्य सरकार ने गेहूं उपार्जन को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि को बढ़ा दिया है अब किसान 30 अप्रैल 2026 तक गेहूं विक्रय के लिए स्लॉट बुक कर सकेंगे यह निर्णय किसानों को अधिक समय और सुविधा देने के उद्देश्य से लिया गया है जिससे वे बिना किसी जल्दबाजी के अपनी उपज को समर्थन मूल्य पर बेच सकें

    डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार ने स्लॉट बुकिंग की अवधि में 6 दिन की वृद्धि की है इसके साथ ही एक और अहम बदलाव करते हुए स्लॉट बुकिंग की क्षमता को भी बढ़ा दिया गया है पहले जहां एक स्लॉट में 1000 क्विंटल गेहूं की सीमा तय थी वहीं अब इसे बढ़ाकर 1500 क्विंटल कर दिया गया है इस फैसले से बड़े और मध्यम किसानों को विशेष राहत मिलने की उम्मीद है

    अब तक की स्थिति पर नजर डालें तो प्रदेश में गेहूं खरीदी का काम तेजी से चल रहा है आंकड़ों के मुताबिक अब तक 1 लाख 30 हजार 655 किसानों से 57 लाख 13 हजार 640 क्विंटल गेहूं की खरीदी की जा चुकी है इसके एवज में किसानों के खातों में 355 करोड़ 3 लाख रुपए का भुगतान भी किया जा चुका है यह भुगतान सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया है जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके

    वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज बेचने के लिए आगे आ रहे हैं अब तक 4 लाख 22 हजार 848 किसानों ने 1 करोड़ 82 लाख 96 हजार 810 क्विंटल गेहूं के विक्रय के लिए स्लॉट बुक कराए हैं इससे साफ है कि इस बार गेहूं उपार्जन को लेकर किसानों में उत्साह देखने को मिल रहा है

    राज्य सरकार ने खरीदी प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए प्रदेशभर में 3171 उपार्जन केंद्र स्थापित किए हैं इन केंद्रों पर किसानों की सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं जैसे छायादार बैठने की व्यवस्था स्वच्छ पेयजल बारदाने तौल कांटे सिलाई मशीन कंप्यूटर इंटरनेट और गुणवत्ता परीक्षण उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं इसके अलावा उपज की सफाई के लिए पंखे और छनने की व्यवस्था भी की गई है ताकि किसानों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े

    वर्ष 2026 27 के लिए सरकार ने गेहूं की खरीदी 2625 रुपए प्रति क्विंटल की दर से करने का निर्णय लिया है इसमें केंद्र सरकार द्वारा तय 2585 रुपए प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य के साथ राज्य सरकार की ओर से 40 रुपए प्रति क्विंटल का बोनस भी शामिल है इस मूल्य से किसानों को उनकी उपज का बेहतर लाभ मिलने की उम्मीद है

    इस वर्ष गेहूं उपार्जन के लिए 19 लाख 4 हजार से अधिक किसानों ने पंजीयन कराया है जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 3 लाख 60 हजार अधिक है यह आंकड़ा दर्शाता है कि सरकार की योजनाओं पर किसानों का भरोसा बढ़ा है पिछले साल जहां लगभग 77 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया था वहीं इस साल 78 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य रखा गया है

    कुल मिलाकर सरकार का यह निर्णय किसानों के लिए राहत और सुविधा दोनों लेकर आया है जिससे उन्हें अपनी मेहनत की उपज का उचित मूल्य पाने में मदद मिलेगी और खरीदी प्रक्रिया भी अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बन सकेगी

  • मध्यप्रदेश कैबिनेट के बड़े फैसले: 46 लाख लोगों की संपत्ति रजिस्ट्री का खर्च उठाएगी सरकार, 4865 युवाओं को गांवों में मिलेगी जिम्मेदारी

    मध्यप्रदेश कैबिनेट के बड़े फैसले: 46 लाख लोगों की संपत्ति रजिस्ट्री का खर्च उठाएगी सरकार, 4865 युवाओं को गांवों में मिलेगी जिम्मेदारी


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री Mohan Yadav की अध्यक्षता में मंत्रालय में हुई कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। बैठक के बाद सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री Chaitanya Kashyap ने बताया कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि स्वामित्व को मजबूत करने और योजनाओं की निगरानी बढ़ाने के लिए बड़े कदम उठा रही है।

    46 लाख लोगों की संपत्ति रजिस्ट्री का खर्च सरकार देगी
    कैबिनेट ने फैसला लिया है कि SVAMITVA Yojana के तहत प्रदेश के करीब 46 लाख ग्रामीण नागरिकों की संपत्ति रजिस्ट्री का स्टांप शुल्क राज्य सरकार खुद वहन करेगी। इस निर्णय से सरकार पर करीब 3000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा।

    इस योजना की शुरुआत Ministry of Panchayati Raj ने वर्ष 2020 में की थी। इसके तहत ड्रोन तकनीक से गांवों की आबादी वाली जमीन का सीमांकन कर प्रॉपर्टी कार्ड दिए जाते हैं। इससे ग्रामीणों को कानूनी स्वामित्व मिलता है, भूमि विवाद कम होते हैं और बैंक से लोन लेने में भी आसानी होती है।

    योजनाओं का फीडबैक लेने नया कार्यक्रम
    कैबिनेट ने योजनाओं की जमीनी स्थिति जानने के लिए “सीएम यंग इंटर्न्स फॉर गुड गवर्नेंस प्रोग्राम” शुरू करने का भी निर्णय लिया है। यह कार्यक्रम तीन साल तक चलेगा।

    इसके तहत प्रदेश के हर विकासखंड से 15 युवाओं का चयन किया जाएगा और कुल 4865 युवाओं को गांवों में तैनात किया जाएगा। चयन प्रक्रिया Atal Bihari Vajpayee School of Good Governance and Policy Analysis के माध्यम से होगी।

    युवाओं को मिलेगा मानदेय
    चयनित युवाओं को 10 हजार रुपये मासिक मानदेय दिया जाएगा और उन्हें एक साल के अनुबंध पर रखा जाएगा। इस पूरी योजना पर तीन साल में लगभग 170 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

    इन युवाओं की जिम्मेदारी अपने-अपने विकासखंड में चल रही सरकारी योजनाओं की जमीनी स्थिति का अध्ययन और फीडबैक रिपोर्ट तैयार करना होगी। यह रिपोर्ट सीधे सुशासन स्कूल के जरिए मुख्यमंत्री और संबंधित विभागों तक पहुंचेगी। इसके लिए विशेष डैशबोर्ड और डिजिटल पोर्टल भी बनाया जाएगा।

    2031 तक जारी रहेंगी कई योजनाएं
    कैबिनेट ने ऊर्जा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, योजना-आर्थिक एवं सांख्यिकी, जनजातीय कार्य और महिला-बाल विकास सहित सात विभागों की योजनाओं को 2031 तक जारी रखने के लिए 33,240 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है।

    इनमें महिला आयोग और बाल संरक्षण आयोग की योजनाएं, छात्रवृत्ति कार्यक्रम, आरडीएसएस योजना, दिव्यांगजनों के लिए प्रोफेशनल टैक्स में छूट और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए 600 करोड़ रुपये का प्रावधान शामिल है।

    स्वास्थ्य केंद्रों में होगी भर्ती
    कैबिनेट ने मैहर, निमरानी और कैमोर में पीएफआईसी के तहत अस्पतालों के लिए स्टाफ भर्ती को मंजूरी दी है। श्रम विभाग के माध्यम से डॉक्टर और अन्य कर्मचारियों सहित 51 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। साथ ही चितरंगी में व्यवहार न्यायाधीश के पद को भी मंजूरी दी गई है।

    ‘एक जिला-एक उत्पाद’ को बढ़ावा
    राज्य सरकार ने One District One Product योजना के तहत स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग के लिए 37.50 करोड़ रुपये की डीपीआर तैयार की है। इस योजना में एमएसएमई, उद्योग और कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग मिलकर काम करेंगे।

    कैबिनेट बैठक में इन मुद्दों पर भी चर्चा
    बैठक से पहले कई अन्य महत्वपूर्ण घोषणाएं भी की गईं। सरकार ने गेहूं की खरीदी के लिए MSP 2585 रुपये प्रति क्विंटल पर 40 रुपये बोनस जोड़कर 2625 रुपये प्रति क्विंटल पर खरीद का फैसला किया। वहीं उड़द पर 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने का निर्णय भी लिया गया।

    इसके अलावा मध्यप्रदेश के पर्यटन स्थल Pachmarhi को जर्मनी द्वारा “ग्रीन डेस्टिनेशन” प्रमाणन मिलने को प्रदेश के पर्यटन के लिए बड़ी उपलब्धि बताया गया।

  • वंदे मातरम् के स्वर से गूंजा सदन, MP विधानसभा बजट सत्र 2026 की औपचारिक शुरुआत

    वंदे मातरम् के स्वर से गूंजा सदन, MP विधानसभा बजट सत्र 2026 की औपचारिक शुरुआत


    भोपाल । राजधानी भोपाल में सोमवार 16 फरवरी 2026 से मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र औपचारिक रूप से शुरू हो गया। सत्र की शुरुआत राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के सामूहिक गायन से हुई, जिससे सदन में देशभक्ति और गरिमा का वातावरण बना। यह बजट सत्र 6 मार्च 2026 तक चलेगा और इस दौरान कुल 12 बैठकें प्रस्तावित हैं।

    सत्र के पहले दिन मंगू भाई पटेल ने सदन को संबोधित किया। अपने अभिभाषण में उन्होंने मोहन यादव सरकार की उपलब्धियों, विकास योजनाओं और राज्य की प्रगति का विस्तृत उल्लेख किया। राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश निरंतर विकास की दिशा में अग्रसर है और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से समाज के हर वर्ग तक लाभ पहुंचाया जा रहा है। अभिभाषण के बाद कृतज्ञता प्रस्ताव पेश किया गया, जिस पर आगामी दिनों में चर्चा होगी।

    इस बजट सत्र को कई मायनों में अहम माना जा रहा है। विधानसभा सचिवालय के अनुसार, विधायकों की ओर से कुल 3478 प्रश्न प्राप्त हुए हैं। इसके अलावा 236 ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, 10 स्थगन प्रस्ताव और 41 अशासकीय संकल्प सदन में प्रस्तुत किए जाने की संभावना है। इन आंकड़ों से साफ है कि सत्र के दौरान सरकार को विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से जवाब देना होगा।

    सत्र का सबसे महत्वपूर्ण दिन 18 फरवरी होगा, जब उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा वर्ष 2026-27 का बजट पेश करेंगे। अनुमान है कि इस बार का बजट 4.63 से 4.70 लाख करोड़ रुपये के बीच हो सकता है। खास बात यह है कि बजट पूरी तरह पेपरलेस डिजिटल प्रारूप में प्रस्तुत किया जाएगा, जो पारदर्शिता और तकनीकी दक्षता की दिशा में एक और कदम माना जा रहा है।

    राजनीतिक दृष्टि से भी यह सत्र काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है। विपक्ष, विशेष रूप से कांग्रेस, बेरोजगारी, महंगाई, अवैध खनन, बढ़ते कर्ज और हालिया विवादित मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। वहीं सत्तापक्ष रोजगार सृजन, नारी सशक्तीकरण, किसान कल्याण, बुनियादी ढांचे के विकास और निवेश आकर्षित करने जैसे मुद्दों को प्रमुखता से रखने की रणनीति पर काम कर रहा है।

    वंदे मातरम् के साथ कार्यवाही की शुरुआत को राज्य और केंद्र स्तर पर राष्ट्रगीत को बढ़ावा देने की पहल से जोड़कर देखा जा रहा है। इससे सदन में एक ऊर्जावान और सकारात्मक माहौल देखने को मिला। हालांकि राजनीतिक गर्माहट के संकेत भी साफ हैं, जिससे आगामी दिनों में तीखी बहस और हंगामे की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। कुल मिलाकर, बजट सत्र 2026 प्रदेश की आर्थिक दिशा, विकास प्राथमिकताओं और राजनीतिक रणनीतियों को तय करने वाला महत्वपूर्ण मंच साबित होगा, जहां सत्ता और विपक्ष के बीच व्यापक चर्चा और टकराव दोनों देखने को मिल सकते हैं।

  • MP में ड्रग माफियाओं पर कसेगा शिंकजा, मोहन सरकार ने 3 साल का बड़ा एक्शन प्लान किया तैयार

    MP में ड्रग माफियाओं पर कसेगा शिंकजा, मोहन सरकार ने 3 साल का बड़ा एक्शन प्लान किया तैयार


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में ड्रग माफियाओं के खिलाफ मोहन यादव सरकार ने तीन साल का विस्तृत एक्शन प्लान तैयार किया है। इस योजना के तहत राज्य के प्रमुख शहरों में ड्रग सप्लाई नेटवर्क को जड़ से खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है। पुलिस महानिदेशक डीजीपी कैलाश मकवाना की अध्यक्षता में गुरुवार को पुलिस मुख्यालय में उच्च स्तरीय बैठक हुई। उन्होंने बताया कि पिछले साल शुरू किया गया राज्य पुलिस का ड्रग्स आर ए डिस्टेंस अभियान काफी सफल रहा। डीजीपी ने कहा जिस तरह राज्य नक्सलवाद से मुक्त हुआ वैसे ही ड्रग्स के खिलाफ भी निर्णायक कार्रवाई करनी होगी।

    डिमांड और सप्लाई चेन पर फोकस

    डीजीपी ने बताया कि अगले तीन साल में मंदसौर, नीमच, रतलाम, भोपाल, इंदौर और अन्य प्रभावित इलाकों में ड्रग तस्करी की डिमांड और सप्लाई चेन तोड़ी जाएगी। शैक्षणिक संस्थानों के पास नशीले पदार्थों की बिक्री पर कड़ा प्रतिबंध लगाने के लिए खेल एवं युवा कल्याण विभाग और सामाजिक संगठनों के सहयोग से रोडमैप तैयार किया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों में इस्तेमाल होने वाले कैमिकल्स का गलत इस्तेमाल रोकने के लिए भी सिस्टम तैयार किया जा रहा है। इस तीन वर्षीय योजना में ड्रग सप्लाई चेन को तोड़ना, ड्रग डिमांड को कम करना और अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करना प्रमुख लक्ष्य हैं।

    तस्करों की संपत्ति जब्त

    डीजीपी के अनुसार 2025 में राज्य में 1,44,025 किलोग्राम ड्रग्स कुल कीमत 347 करोड़ रुपए जब्त कर नष्ट किया गया। इसके अलावा ड्रग तस्करों के खिलाफ SAFEMA एक्ट के तहत 301.41 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई। मंदसौर और नीमच जिले इस कार्रवाई से सबसे ज्यादा प्रभावित रहे।