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  • कोटा एक्सप्रेसवे हादसे में 8 श्रद्धालुओं की मौत, CM मोहन यादव ने मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख देने का ऐलान किया

    कोटा एक्सप्रेसवे हादसे में 8 श्रद्धालुओं की मौत, CM मोहन यादव ने मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख देने का ऐलान किया


    नई दिल्ली ।राजस्थान के कोटा में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर हुए सड़क हादसे में आठ लोगों की मौत हो गई। इस दुर्घटना पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दुख जताया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने भोपाल और बैतूल जिले के निवासी मृतकों के परिवारों को राज्य सरकार की ओर से चार-चार लाख रुपये की सहायता राशि देने और उन्हें हर संभव सहयोग उपलब्ध कराने को कहा है।

    यह हादसा 17 अक्टूबर की सुबह कोटा क्षेत्र में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर हुआ। श्रद्धालुओं से भरी एक मिनी बस अचानक चालक के नियंत्रण से बाहर हो गई। इसके बाद बस सड़क से फिसलकर खाई में जा गिरी। दुर्घटना में आठ लोगों की जान चली गई। हादसे के बाद मौके पर राहत और बचाव की कार्रवाई की गई तथा घायलों को उपचार के लिए पहुंचाया गया।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बस में सवार लोग मध्य प्रदेश से राजस्थान के खाटूश्यामजी मंदिर में दर्शन करने जा रहे थे। बस में भोपाल के 21 लोगों के सवार होने की जानकारी सामने आई थी। इन यात्रियों में बुजुर्ग और बच्चे भी शामिल बताए गए। दुर्घटना के बाद यात्रियों और उनके परिजनों के बीच चिंता का माहौल बन गया। हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान और प्रभावित परिवारों से संबंधित जानकारी जुटाने की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण हो गई।

    कोटा के जिला कलेक्टर पीयूष सामरिया ने हादसे में आठ लोगों की मौत की पुष्टि की थी। दुर्घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने घटनास्थल पर आवश्यक कार्रवाई की। बस के खाई में गिरने के कारण यात्रियों को नुकसान पहुंचा। हादसे के कारणों और परिस्थितियों से संबंधित विस्तृत जानकारी सामने आने के साथ ही प्रभावित लोगों को सहायता उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया गया।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस घटना को अत्यंत दुखद और पीड़ादायक बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा संदेश में दिवंगत लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार मृतकों के परिजनों को सहायता देने के साथ हर संभव सहयोग उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को भोपाल और बैतूल जिले के मृतकों के परिवारों को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने के निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री ने दिवंगतों की आत्मा की शांति के लिए बाबा महाकाल से प्रार्थना भी की। उन्होंने शोकाकुल परिवारों को इस कठिन समय में दुख सहने की शक्ति देने की कामना की। इसके साथ ही दुर्घटना में घायल हुए लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की।

    इस हादसे ने धार्मिक यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं के परिवारों को गहरे दुख में डाल दिया है। खाटूश्यामजी के दर्शन के लिए जा रहे यात्रियों की बस दुर्घटनाग्रस्त होने से कई परिवार प्रभावित हुए हैं। मध्य प्रदेश सरकार की ओर से घोषित आर्थिक सहायता का उद्देश्य मृतकों के परिजनों को इस कठिन समय में राहत देना है। अधिकारियों को सहायता राशि उपलब्ध कराने और प्रभावित परिवारों को जरूरी सहयोग देने के निर्देश दिए गए हैं।

    दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर हुई इस दुर्घटना के बाद यात्रियों की सुरक्षा और सड़क हादसों को रोकने के उपायों पर भी ध्यान देना जरूरी है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में चालक का बस से नियंत्रण खोना दुर्घटना का तत्काल कारण बताया गया है, लेकिन हादसे से जुड़े अन्य कारणों के बारे में कोई विस्तृत निष्कर्ष सामने नहीं आया है। फिलहाल, आठ लोगों की मौत के बाद प्रभावित परिवारों को सहायता पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता है।

  • मध्य प्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण पर कानूनी रणनीति बनाने दिल्ली पहुंचे मुख्यमंत्री मोहन यादव, उमंग सिंघार ने विशेष सत्र बुलाने की मांग की

    मध्य प्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण पर कानूनी रणनीति बनाने दिल्ली पहुंचे मुख्यमंत्री मोहन यादव, उमंग सिंघार ने विशेष सत्र बुलाने की मांग की

    मध्य प्रदेश। में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के मामले में राज्य सरकार हाईकोर्ट के फैसले के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रही है। इसी सिलसिले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को नई दिल्ली में भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से मुलाकात की। इस बैठक में प्रदेश के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह भी मौजूद रहे। चर्चा का मुख्य विषय ओबीसी आरक्षण से जुड़े हाईकोर्ट के निर्णय के कानूनी पहलू और आगे की कार्रवाई की रणनीति रहा।

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बैठक के बाद बताया कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और प्रदेश के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह के साथ ओबीसी आरक्षण के मामले पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। उन्होंने कहा कि चर्चा में उच्च न्यायालय के फैसले से संबंधित कानूनी पहलुओं के साथ आगामी कानूनी कार्रवाई की रणनीति पर भी बात हुई। सरकार इस मामले में आगे क्या कदम उठाएगी, इसे लेकर अब कानूनी प्रक्रिया पर नजर बनी हुई है।

    इस बीच, मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सॉलिसिटर जनरल से बातचीत कर हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगवाना चाहते हैं, लेकिन इस उद्देश्य से दिल्ली जाने की जरूरत पर उन्होंने सवाल किया। सिंघार के मुताबिक, राज्य सरकार के पास विधानसभा के माध्यम से भी इस विषय पर कदम उठाने का विकल्प है। उन्होंने मुख्यमंत्री से पूछा कि जब विधानसभा मौजूद है, तो ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर विशेष सत्र क्यों नहीं बुलाया जा रहा है।

    उमंग सिंघार ने कहा कि कांग्रेस विधानसभा का विशेष सत्र बुलाए जाने के पक्ष में है और इसके लिए तैयार है। उन्होंने राज्य सरकार से ओबीसी आरक्षण के संबंध में अध्यादेश जारी करने तथा कानून पारित कराने की मांग की। सिंघार ने सवाल उठाया कि सरकार ऐसा करने से क्यों बच रही है और बार-बार मामले को अदालत के निर्णय पर क्यों छोड़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ओबीसी वर्ग को फिर से झूठे सपने दिखा रहे हैं।

    नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यदि सरकार की नीयत स्पष्ट है, तो उसे तत्काल विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर ओबीसी आरक्षण की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उनके बयान के अनुसार, विधानसभा में इस विषय पर चर्चा और जरूरी कदम उठाने से सरकार की स्थिति सामने आ सकती है। हालांकि, विशेष सत्र बुलाने या अध्यादेश जारी करने को लेकर सरकार की ओर से किसी नए फैसले की जानकारी खबर में नहीं दी गई है।

    हाईकोर्ट के फैसले के बाद सरकार की अगली कानूनी कार्रवाई को लेकर भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है। मुख्यमंत्री की सॉलिसिटर जनरल से मुलाकात के दौरान कानूनी पहलुओं और आगे की रणनीति पर चर्चा हुई, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने की तारीख या इस संबंध में किसी औपचारिक निर्णय की घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में यह स्पष्ट होना बाकी है कि राज्य सरकार इस मामले को आगे किस कानूनी प्रक्रिया के तहत ले जाएगी।

    ओबीसी आरक्षण को 27 प्रतिशत किए जाने का मामला अब राज्य सरकार की अगली कार्रवाई और विपक्ष की मांगों के बीच केंद्र में है। यदि सरकार इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले जाती है, तो उसे आरक्षण बढ़ाने के समर्थन में अपना कानूनी आधार प्रस्तुत करना होगा। फिलहाल, मुख्यमंत्री की कानूनी सलाह-मशविरा संबंधी पहल और उमंग सिंघार की विशेष सत्र बुलाने की मांग इस मुद्दे पर सामने आए प्रमुख घटनाक्रम हैं।

  • मुख्यमंत्री मोहन यादव आज इंदौर और रतलाम के दौरे पर रहेंगे, स्थानीय कार्यक्रमों में शामिल होकर शाम को खंडवा समारोह से जुड़ेंगे

    मुख्यमंत्री मोहन यादव आज इंदौर और रतलाम के दौरे पर रहेंगे, स्थानीय कार्यक्रमों में शामिल होकर शाम को खंडवा समारोह से जुड़ेंगे

    मध्य प्रदेश। के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंगलवार, 13 अक्टूबर को इंदौर और रतलाम के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे दोनों शहरों में आयोजित स्थानीय कार्यक्रमों में शामिल होंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री भोपाल लौटेंगे, जहां उनके निवास पर मुलाकातों और विभिन्न विषयों पर चर्चा का कार्यक्रम निर्धारित है। शाम को वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से खंडवा में आयोजित राष्ट्रीय किशोर कुमार सम्मान अलंकरण समारोह और संगीत संध्या में शामिल होंगे।

    निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मुख्यमंत्री सुबह नई दिल्ली से इंदौर पहुंचेंगे। वे सुबह 8:50 बजे इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचेंगे। इसके बाद विमान से इंदौर के लिए रवाना होंगे और सुबह 10:20 बजे इंदौर हवाई अड्डे पर पहुंचने का कार्यक्रम है। इंदौर पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री होटल विवांता अमलतास जाएंगे, जहां वे स्थानीय कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। होटल में उनका कार्यक्रम सुबह करीब 10:30 बजे से 10:40 बजे तक निर्धारित है।

    इंदौर में निर्धारित कार्यक्रम पूरा करने के बाद मुख्यमंत्री हवाई अड्डे के लिए रवाना होंगे। सुबह 11:10 से 11:20 बजे के बीच उनके इंदौर हवाई अड्डे पहुंचने का कार्यक्रम है। इसके बाद वे हेलीकॉप्टर से रतलाम के लिए रवाना होंगे। तय समय के अनुसार, मुख्यमंत्री सुबह 11:55 बजे के आसपास रतलाम पहुंचेंगे। वहां वे स्थानीय आयोजनों में शामिल होंगे। दोनों शहरों का दौरा मुख्यमंत्री के दिनभर के निर्धारित कार्यक्रम का हिस्सा है।

    रतलाम में कार्यक्रम पूरे करने के बाद मुख्यमंत्री दोपहर 12:30 बजे भोपाल के स्टेट हैंगर के लिए रवाना होंगे। उनके दोपहर करीब 1:30 बजे भोपाल पहुंचने का कार्यक्रम तय है। इसके बाद वे दोपहर 1:45 बजे मुख्यमंत्री निवास पहुंचेंगे। भोपाल लौटने के बाद दिन के शेष समय में मुख्यमंत्री निवास समत्व में मुलाकातों और बैठकों का सिलसिला चलेगा।

    मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के अनुसार, दोपहर बाद 3:30 से 4:30 बजे तक निवास पर मुलाकातें निर्धारित हैं। इसके बाद शाम 4:30 से 5:45 बजे तक विभिन्न विषयों पर चर्चा होगी। शाम 5:45 से 7 बजे तक जनसंपर्क से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श का कार्यक्रम रखा गया है। सुबह की शुरुआत में निवास पर एडीजी इंटेलिजेंस और आयुक्त जनसंपर्क से ब्रीफिंग का कार्यक्रम भी निर्धारित है।

    दिन के अंतिम कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शाम 7 बजे मुख्यमंत्री निवास समत्व से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए खंडवा में आयोजित राष्ट्रीय किशोर कुमार सम्मान अलंकरण समारोह और संगीत संध्या से जुड़ेंगे। इस कार्यक्रम में उनकी सहभागिता ऑनलाइन माध्यम से होगी। इस तरह मुख्यमंत्री का दिन नई दिल्ली से इंदौर आगमन, रतलाम में स्थानीय आयोजनों में भागीदारी, भोपाल वापसी और शाम को खंडवा के समारोह में ऑनलाइन सहभागिता के बीच निर्धारित है।

  • बुधनी में आदिवासियों के घरों पर बुलडोजर कार्रवाई से भड़के शिवराज सिंह चौहान, अफसरों पर बरसे और मुख्यमंत्री मोहन यादव से की बात

    बुधनी में आदिवासियों के घरों पर बुलडोजर कार्रवाई से भड़के शिवराज सिंह चौहान, अफसरों पर बरसे और मुख्यमंत्री मोहन यादव से की बात

    मध्य प्रदेश। के बुधनी क्षेत्र के कुसमी गांव में आदिवासी परिवारों के घरों पर वन विभाग की बुलडोजर कार्रवाई के बाद पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कड़ी नाराजगी जताई है। गांव पहुंचकर उन्होंने प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और उनकी परेशानियां सुनीं। वहां घरों के टूटने और फसलों को नुकसान पहुंचने की स्थिति देखकर शिवराज अधिकारियों पर भड़क गए। उन्होंने कार्रवाई करने वाले अधिकारियों के रवैये पर सवाल उठाते हुए उनके खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की। इस घटना के बाद प्रदेश में प्रशासनिक कार्रवाई और राजनीतिक नेतृत्व की भूमिका को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

    शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों की कार्यशैली पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि उनके क्षेत्र में अन्याय और जुल्म की हद पार कर दी गई है। उन्होंने गांव की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि जिन घरों में सुबह तक परिवार रह रहे थे और बच्चों की आवाजें सुनाई दे रही थीं, वहां अब बच्चों की चीखें गूंज रही हैं। उनके मुताबिक, घरों को गिरा दिया गया और फसलें भी दब गईं। उन्होंने प्रभावित महिलाओं के रोने और परिवारों की पीड़ा का उल्लेख करते हुए कार्रवाई करने वाले अधिकारियों को संवेदनहीन बताया।

    गुस्से में शिवराज ने संबंधित अधिकारियों के लिए बेहद कठोर शब्दों का इस्तेमाल किया और उन्हें ‘नरपिशाच’ तक कह दिया। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की जानकारी वह मुख्यमंत्री मोहन यादव के सामने रखेंगे। शिवराज की मांग है कि जिन अधिकारियों ने यह कार्रवाई की, उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो। उन्होंने इस मामले को केवल प्रशासनिक कार्रवाई का विषय नहीं, बल्कि प्रभावित परिवारों के साथ हुए व्यवहार से जुड़ा गंभीर मामला बताया।

    घटना के बाद शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री मोहन यादव और भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से फोन पर बात की। उन्होंने दोनों नेताओं को घटनाक्रम की जानकारी दी। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इस बातचीत के बाद सरकार या प्रशासन की ओर से लिए गए किसी अंतिम निर्णय का उल्लेख नहीं है। फिलहाल शिवराज की नाराजगी और अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग इस मामले के प्रमुख पहलू बने हुए हैं।

    इस घटनाक्रम ने शिवराज सिंह चौहान की वर्तमान राजनीतिक भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। वर्ष 2023 से पहले तक वह मध्य प्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री के रूप में सक्रिय थे। उनके सार्वजनिक व्यक्तित्व की पहचान आम लोगों से जुड़ाव, ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंच और महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता दिखाने वाले नेता के रूप में रही। कभी उन्हें ‘पांव-पांव वाले भैया’ के नाम से जाना गया, तो कभी लाड़ली बहनों के भाई के रूप में उनकी छवि सामने आई। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने आम लोगों के बीच अपनी सहज उपस्थिति बनाए रखने की कोशिश की थी।

    अब बुधनी और विदिशा से जुड़े सांसद के रूप में उनकी भूमिका के बीच कुसमी की घटना पर उनकी तीखी प्रतिक्रिया चर्चा का विषय बनी है। सवाल यह उठ रहा है कि उनकी नाराजगी केवल अधिकारियों की कार्यशैली तक सीमित है या इसके राजनीतिक मायने भी हैं। कांग्रेस इस घटनाक्रम को शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री मोहन यादव के बीच संभावित मतभेदों से जोड़कर देख रही है। हालांकि, दोनों नेताओं के बीच किसी टकराव की पुष्टि करने वाली जानकारी सामने नहीं आई है।

    बुधनी शिवराज सिंह चौहान का लंबे समय तक राजनीतिक आधार रहा है, जहां से वह लगातार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। ऐसे में इसी क्षेत्र में आदिवासी परिवारों के घरों पर हुई कार्रवाई के बाद उनका खुद गांव पहुंचना और अधिकारियों के खिलाफ खुलकर बोलना राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। अब इस मामले में आगे की प्रशासनिक कार्रवाई और प्रभावित परिवारों को लेकर उठाए जाने वाले कदमों पर नजर रहेगी।

  • MP News: देवास के हाटपिपलिया में 31.34 किलोमीटर सड़क निर्माण का वर्चुअल भूमिपूजन, 97.62 करोड़ रुपये की परियोजना शुरू

    MP News: देवास के हाटपिपलिया में 31.34 किलोमीटर सड़क निर्माण का वर्चुअल भूमिपूजन, 97.62 करोड़ रुपये की परियोजना शुरू

    मध्यप्रदेश: के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को मंत्रालय, भोपाल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से देवास जिले के हाटपिपलिया क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सड़क परियोजना का वर्चुअल भूमिपूजन किया। राजोदा-कैलोद-डबलचौकी सड़क का निर्माण 31.34 किलोमीटर लंबाई में किया जाएगा। परियोजना की अनुमानित लागत 9,762.78 लाख रुपये है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क परियोजना के पूरा होने के बाद क्षेत्र में आवागमन अधिक सुगम होगा। उन्होंने कहा कि बेहतर सड़क संपर्क से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होगी, जिससे क्षेत्रीय विकास को गति मिलने की संभावना है।

    राजोदा-कैलोद-डबलचौकी मार्ग हाटपिपलिया क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण सड़क संपर्क परियोजना के तौर पर सामने आया है। सड़क निर्माण से इस मार्ग से जुड़े क्षेत्रों में आने-जाने वाले लोगों को बेहतर परिवहन सुविधा मिलने की उम्मीद है। परियोजना का उद्देश्य क्षेत्र में सड़क बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है।

    वर्चुअल भूमिपूजन के दौरान मुख्यमंत्री ने सड़क निर्माण को क्षेत्रीय संपर्क और विकास से जोड़ते हुए इसके महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मजबूत सड़क नेटवर्क से ग्रामीण क्षेत्रों की शहरी क्षेत्रों तक पहुंच बेहतर होती है और आवागमन की सुविधा बढ़ने से विकास गतिविधियों को भी समर्थन मिलता है।

    31.34 किलोमीटर लंबी इस सड़क परियोजना पर 9,762.78 लाख रुपये खर्च किए जाने हैं। यानी परियोजना की लागत करीब 97.63 करोड़ रुपये है। इस राशि के साथ सड़क निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया जाएगा, जिससे संबंधित क्षेत्र में परिवहन सुविधाओं के विस्तार की दिशा में काम होगा।

    देवास जिले के हाटपिपलिया क्षेत्र में सड़क संपर्क स्थानीय स्तर पर लोगों की आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण है। ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर सड़क नेटवर्क से जोड़ने से दैनिक आवागमन के साथ आर्थिक गतिविधियों के लिए भी परिवहन सुविधा उपलब्ध होती है। परियोजना पूरी होने के बाद राजोदा, कैलोद और डबलचौकी के बीच सड़क संपर्क को बेहतर बनाने का लक्ष्य है।

    मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में क्षेत्रीय विकास के लिए बेहतर कनेक्टिविटी की आवश्यकता को रेखांकित किया। उनका कहना था कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच मजबूत संपर्क स्थापित होने से विकास की प्रक्रिया को नई गति मिल सकती है।

    मध्यप्रदेश सरकार के आधिकारिक पोर्टल पर भी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में दर्ज किया गया है।

    राजोदा-कैलोद-डबलचौकी सड़क परियोजना के वर्चुअल भूमिपूजन के साथ अब इसके निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू होगी। सड़क बनने के बाद इस क्षेत्र में आवागमन की सुविधा और संपर्क व्यवस्था में सुधार होने की उम्मीद है।

    यह परियोजना देवास जिले के हाटपिपलिया क्षेत्र में सड़क बुनियादी ढांचे को मजबूत करने से जुड़ी है। 31.34 किलोमीटर लंबा मार्ग पूरा होने के बाद आसपास के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच संपर्क को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। सरकार ने परियोजना को क्षेत्रीय विकास और सुगम आवागमन से जोड़कर देखा है।

  • MP में युवाओं के रोजगार पर सरकार का बड़ा फोकस, IT पार्क और इंजीनियरिंग कैंपस से बढ़ेंगे शिक्षा और कौशल के अवसर

    MP में युवाओं के रोजगार पर सरकार का बड़ा फोकस, IT पार्क और इंजीनियरिंग कैंपस से बढ़ेंगे शिक्षा और कौशल के अवसर

    मध्यप्रदेश: में युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास के अवसर बढ़ाने को लेकर सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाने की बात कही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में युवाओं को बेहतर रोजगार उपलब्ध कराने के लिए सरकार लगातार ऐसे प्रयास कर रही है, जिनसे शिक्षा, तकनीक, कौशल और रोजगार के बीच बेहतर तालमेल स्थापित हो सके।

    मुख्यमंत्री के मुताबिक IT पार्क और इंजीनियरिंग कैंपस के माध्यम से युवाओं को केवल शिक्षा प्राप्त करने तक सीमित अवसर नहीं मिलेंगे, बल्कि उन्हें रोजगार और कौशल विकास से जुड़े नए विकल्प भी उपलब्ध होंगे। तकनीकी क्षेत्र के विस्तार के साथ युवाओं को बदलती जरूरतों के अनुरूप तैयार करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश में तकनीक, नवाचार और उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक आधार तैयार किया जा रहा है। IT क्षेत्र से जुड़े विकास कार्यों का उद्देश्य रोजगारपरक प्रतिभाओं को आगे बढ़ाना और युवाओं को आधुनिक तकनीकी अवसरों से जोड़ना है। इससे शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों और रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं को नए क्षेत्रों में आगे बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं।

    मुख्यमंत्री ने इंदौर और भोपाल के विकास को लेकर भी सरकार की योजना का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों शहरों को मेट्रोपॉलिटन सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस दिशा में सुनियोजित शहरी विकास, बेहतर सुविधाओं और आर्थिक गतिविधियों को विस्तार देने पर ध्यान दिया जा रहा है।

    इंदौर और भोपाल को बड़े शहरी और आर्थिक केंद्रों के रूप में विकसित करने का असर रोजगार के अवसरों पर भी पड़ सकता है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इन शहरों में नई तकनीक, नवाचार और उद्योगों को बढ़ावा मिलने से युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। इसके साथ ही प्रदेश के समग्र विकास को भी गति मिलेगी।

    प्रदेश में तकनीकी और औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के साथ IT क्षेत्र को भी महत्व दिया जा रहा है। तकनीकी बुनियादी ढांचे और रोजगारपरक कौशल को बढ़ाने से युवाओं के लिए नए अवसर तैयार करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। इससे कौशल प्रशिक्षण और रोजगार से जुड़े अवसरों के विस्तार की संभावना बढ़ेगी।

    सरकार का जोर विकास को केवल बड़े शहरों तक सीमित रखने के बजाय प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति को गति देने पर भी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र में विकास और प्रगति के लिए सरकार प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। इसी क्रम में उद्योग, तकनीक, शिक्षा और कौशल विकास को रोजगार से जोड़ने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश के विकास कार्यों को आगे बढ़ाने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश के हर क्षेत्र में प्रगति के लिए काम कर रही है। साथ ही आगामी सिंहस्थ की तैयारियों को भी गति दी जा रही है और उससे जुड़े आवश्यक विकास कार्यों को तेजी से किए जाने पर ध्यान दिया जा रहा है।

    इन पहलों के जरिए सरकार का लक्ष्य युवाओं को शिक्षा के साथ व्यावहारिक कौशल और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। IT पार्क, इंजीनियरिंग कैंपस, औद्योगिक गतिविधियों और मेट्रोपॉलिटन शहरों के विकास को रोजगार और आर्थिक विकास से जोड़कर आगे बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

  • मध्य प्रदेश में बारिश के बीच मुख्यमंत्री ने लिया आपदा प्रबंधन का जायजा, एसडीआरएफ एनडीआरएफ की मुस्तैदी पर जताया संतोष

    मध्य प्रदेश में बारिश के बीच मुख्यमंत्री ने लिया आपदा प्रबंधन का जायजा, एसडीआरएफ एनडीआरएफ की मुस्तैदी पर जताया संतोष

    मध्य प्रदेश: में लगातार हो रही बारिश और कई क्षेत्रों में अतिवृष्टि की स्थिति के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को भोपाल स्थित होमगार्ड कार्यालय के एसडीआरएफ स्टेट कमांड सेंटर का दौरा किया। मुख्यमंत्री ने यहां प्रदेश में बारिश से उत्पन्न परिस्थितियों, संभावित बाढ़ और राहत एवं बचाव अभियानों की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन और बचाव दलों की ओर से किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री ने कमांड सेंटर से प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में आपदा प्रबंधन की स्थिति का अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों और संबंधित टीमों से प्रभावित इलाकों की जानकारी ली तथा राहत कार्यों की लगातार निगरानी सुनिश्चित करने पर जोर दिया। इस दौरान उन्होंने बचाव एवं राहत अभियान में जुटे personnel से संवाद भी किया और उनके कार्यों की जानकारी प्राप्त की।

    डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में फिलहाल बारिश का दौर जारी है। पश्चिमी मध्य प्रदेश को छोड़कर राज्य के अधिकांश हिस्सों में बारिश की आवश्यकता पूरी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि लगातार वर्षा के कारण निचले इलाकों में पानी भरने जैसी परिस्थितियां सामने आती हैं, जिससे नागरिकों के साथ-साथ पशुधन के लिए भी चुनौती उत्पन्न हो सकती है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले एक महीने के दौरान एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमों ने मिलकर 2783 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया है। अचानक आई बाढ़ और जलभराव जैसी परिस्थितियों में इन टीमों की तत्परता से कई लोगों और मवेशियों को बचाने में मदद मिली है।

    उन्होंने कहा कि पिछले दो से चार दिनों में प्रदेश में ऐसी कोई गंभीर आपात स्थिति सामने नहीं आई है, लेकिन बचाव दलों को लगातार सतर्क रखा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा की स्थिति में कुछ ही समय के भीतर पानी का स्तर बढ़ने से निचले इलाकों में परेशानी पैदा हो सकती है। ऐसे में प्रशासन, पुलिस और बचाव दलों की त्वरित कार्रवाई महत्वपूर्ण हो जाती है।

    डॉ. यादव ने आपदा प्रबंधन में पुलिस और बचाव दलों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि जवानों ने अचानक आई बाढ़ जैसी परिस्थितियों का प्रभावी ढंग से सामना करते हुए नागरिकों और पशुधन की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राज्य सरकार का प्रयास है कि संकट की स्थिति में प्रभावित लोगों तक समय पर सहायता पहुंचाई जाए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बारिश का मौसम अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और आने वाले कुछ दिनों में भी वर्षा की संभावना बनी हुई है। ऐसे में लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। उन्होंने प्रशासन को संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष नजर रखने और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू करने के निर्देश दिए।

    इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के लोगों से सीधा संवाद भी किया और वहां की परिस्थितियों की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि स्थानीय स्तर पर सामने आने वाली समस्याओं पर तत्काल प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जाए। सरकार और प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित नागरिकों की सुरक्षा तथा किसी भी संभावित आपदा में जान-माल के नुकसान को न्यूनतम रखना है।

  • शिक्षक दिवस पर सीएम मोहन यादव की बड़ी घोषणा, मध्यप्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा अब ऑफलाइन मोड में आयोजित होगी

    शिक्षक दिवस पर सीएम मोहन यादव की बड़ी घोषणा, मध्यप्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा अब ऑफलाइन मोड में आयोजित होगी

    मध्यप्रदेश: शिक्षक दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश के शिक्षकों को बड़ी राहत देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी को ऑफलाइन मोड में आयोजित करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षकों के हित में जरूरी निर्णय लेने के लिए प्रतिबद्ध है और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर लगातार काम किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने यह घोषणा भोपाल स्थित आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में आयोजित राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में की। समारोह का शुभारंभ राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम से पहले एनसीसी कैडेट्स ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया।

    समारोह में प्रदेश के 33 उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षक केवल कक्षाओं में विद्यार्थियों को पढ़ाने का काम नहीं करते, बल्कि वे आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को आकार देते हैं। उनके अनुसार देश का नक्शा कागज पर तैयार होता है, लेकिन देश की किस्मत कक्षाओं में बनती है।

    डॉ. यादव ने कहा कि भारत की गुरु-शिष्य परंपरा प्राचीन और गौरवशाली रही है। तक्षशिला, नालंदा और विक्रमशिला जैसे शिक्षा केंद्रों ने दुनिया के विद्यार्थियों को ज्ञान दिया। उन्होंने मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक और शैक्षणिक परंपरा का उल्लेख करते हुए उज्जैन के सांदीपनि आश्रम का भी जिक्र किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षकों की मेहनत और योगदान का सम्मान करती है। उन्होंने दावा किया कि बोर्ड परीक्षाओं के परिणामों में मेरिट सूची में बड़ी संख्या सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों की होती है। इसके पीछे शिक्षकों का मार्गदर्शन, परिश्रम और विद्यार्थियों के प्रति उनकी जिम्मेदारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

    उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि मध्यप्रदेश के शासकीय स्कूल गुणवत्ता के मामले में निजी स्कूलों से बेहतर बनें। शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए आवश्यक सुधारों पर काम किया जा रहा है। इसी क्रम में शिक्षक पात्रता परीक्षा को ऑफलाइन कराने का निर्णय शिक्षकों और अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने शिक्षक सम्मान समारोह में प्रदेश के सभी शिक्षकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि शिक्षक ज्ञान के साथ संस्कार देकर बच्चों को जिम्मेदार नागरिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिक्षा को बदलती वैश्विक जरूरतों और रोजगार के अवसरों के अनुरूप लगातार विकसित करने की आवश्यकता है।

    राज्यपाल ने शिक्षकों से विद्यार्थियों की प्रतिभा पहचानने और उनकी रुचि के अनुसार आगे बढ़ने में सहयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने बच्चों में सहनशीलता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने पर भी जोर दिया। उनके मुताबिक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

    स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि प्रदेश का प्रत्येक शिक्षक शिक्षा व्यवस्था की अहम कड़ी है। उन्होंने शिक्षकों के समर्पण और ग्रामीण तथा चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में उनके योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षकों से जुड़ी कानूनी और प्रशासनिक बाधाओं को दूर करने के लिए प्रयास कर रही है।

    समारोह में सम्मानित शिक्षकों में शिवलाल दांगी, धन्नालाल बिसेन, रितेश कुमार पथाड़े, सुखनंदन साहू, नरेंद्र कुमार भारद्वाज, शिखा शर्मा, ज्योति पाठक, सीमा परमार, पूनम मिश्रा, मनीष तिवारी, अजय कुमार मिश्रा, पूजा पांडे और अन्य चयनित शिक्षक शामिल रहे। शिक्षक दिवस पर टीईटी को ऑफलाइन कराने की घोषणा और उत्कृष्ट शिक्षकों का सम्मान प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार के रुख को सामने लाता है।

  • भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने फहराया तिरंगा, परेड की सलामी के साथ दोहराया विकास का संकल्प

    भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने फहराया तिरंगा, परेड की सलामी के साथ दोहराया विकास का संकल्प


    मध्य प्रदेश
    : में स्वतंत्रता दिवस का राज्य स्तरीय मुख्य समारोह भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में आयोजित किया गया। समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तिरंगा फहराया और इसके बाद परेड की सलामी ली। इस दौरान बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे और पूरे आयोजन के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ध्वजारोहण के बाद देश की आजादी के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले अमर शहीदों को नमन किया। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उन्होंने विकसित और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के निर्माण का संकल्प दोहराया।

    लाल परेड ग्राउंड में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में स्वतंत्रता दिवस से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम हुए। मुख्यमंत्री की मौजूदगी में ध्वजारोहण और परेड की सलामी समारोह के प्रमुख कार्यक्रम रहे। आयोजन स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए विशेष इंतजाम किए गए थे।

    मुख्यमंत्री ने परेड की सलामी लेकर समारोह में शामिल दलों का अभिवादन स्वीकार किया। स्वतंत्रता दिवस के राज्य स्तरीय आयोजन में परेड को विशेष महत्व दिया गया। अनुशासन और राष्ट्रीय भावना से जुड़े इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।

    भोपाल में आयोजित इस समारोह के दौरान नागरिकों की मौजूदगी भी देखने को मिली। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राज्य के मुख्य समारोह में शामिल होने के लिए लोग लाल परेड ग्राउंड पहुंचे। कार्यक्रम को व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखी गई।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर शहीदों के योगदान को याद किया और उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया। देश की स्वतंत्रता के लिए बलिदान देने वाले वीरों को नमन करते हुए उन्होंने प्रदेश के विकास की दिशा में आगे बढ़ने का संकल्प दोहराया।

    विकसित और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के निर्माण का संकल्प मुख्यमंत्री के संबोधन और कार्यक्रम का प्रमुख हिस्सा रहा। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राज्य के विकास को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई।

    लाल परेड ग्राउंड में आयोजित समारोह में तिरंगा फहराए जाने के बाद परेड की सलामी का कार्यक्रम हुआ। राज्य स्तरीय मुख्य समारोह होने के कारण यहां सुरक्षा और व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया।

    स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भोपाल में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान और देश के लिए बलिदान देने वाले शहीदों को याद किया गया। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों के साथ स्वतंत्रता दिवस का यह महत्वपूर्ण अवसर साझा किया।

    समारोह में बड़ी संख्या में नागरिकों की मौजूदगी रही। आयोजन स्थल और आसपास सुरक्षा के इंतजाम किए गए थे। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने तिरंगा फहराने के बाद परेड की सलामी ली और अमर शहीदों को नमन करते हुए विकसित एवं आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के निर्माण का संकल्प दोहराया।