Tag: money laundering case

  • आजम खां के बाद अब परिवार पर ईडी का शिकंजा, पत्नी तजीन फातिमा और दोनों बेटों समेत बहन की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

    आजम खां के बाद अब परिवार पर ईडी का शिकंजा, पत्नी तजीन फातिमा और दोनों बेटों समेत बहन की बढ़ सकती हैं मुश्किलें


    नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां की मुश्किलें लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की कार्रवाई अब उनके परिवार तक पहुंच सकती है। उनकी पत्नी तजीन फातिमा और दोनों बेटों के साथ बहन निकहत अफलाक की भूमिका भी जांच के दायरे में आने की आशंका जताई जा रही है। इसकी वजह मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट है जिसके माध्यम से विश्वविद्यालय का निर्माण कराया गया था। इस ट्रस्ट में आजम खां के परिवार के कई सदस्य अलग-अलग पदों पर रहे हैं। ईडी ने इस मामले में आजम खां को रामपुर जेल से बाहर आते ही गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद उन्हें गाजियाबाद में पेश करने के बाद डासना जेल भेज दिया गया। अब जांच का दायरा बढ़ने के साथ परिवार के अन्य सदस्यों की मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं।

    ईडी की ओर से 13 अक्टूबर को रामपुर के अजीम नगर थाने में दर्ज कराई गई प्राथमिकी में जौहर ट्रस्ट को भी आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण में 426 करोड़ रुपये से अधिक की ब्लैक मनी का इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा 80 करोड़ रुपये से ज्यादा सरकारी धन के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप भी लगाए गए हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक विश्वविद्यालय के निर्माण में सरकारी धन के इस्तेमाल और कथित तौर पर फर्जी फर्मों के माध्यम से चंदा जुटाने जैसे मामलों की जांच की जा रही है। इन सभी वित्तीय गतिविधियों में जौहर ट्रस्ट की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसी वजह से ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों और सदस्यों की भूमिका की भी पड़ताल की जा सकती है।

    दरअसल आजम खां ने वर्ष 1990 में मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट का गठन किया था। वह खुद इसके संस्थापक अध्यक्ष बने थे। उनकी पत्नी तजीन फातिमा को सचिव और बहन निकहत अफलाक को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई थी। वहीं उनके दोनों बेटे अदीब और अब्दुल्ला भी ट्रस्ट के सदस्य बनाए गए थे। इनके अलावा मुश्ताक अहमद सिद्दीकी को उपाध्यक्ष और चमरौवा से सपा विधायक नसीर अहमद खां को संयुक्त सचिव बनाया गया था। इस तरह ट्रस्ट की शुरुआती कार्यकारिणी में आजम खां के परिवार की अहम भागीदारी रही थी।

    हालांकि दो जन्म प्रमाणपत्र के मामले में सजा सुनाए जाने के बाद आजम खां ने ट्रस्ट से अपना नाम हटवा लिया था। उनकी पत्नी और छोटे बेटे का नाम भी ट्रस्ट से हटाया गया। इसके बाद नई कार्यकारिणी में उनकी बहन निकहत अफलाक को अध्यक्ष और बड़े बेटे अदीब को सचिव बनाया गया। नई टीम में मुश्ताक अहमद सिद्दीकी और नसीर अहमद खां के अलावा जावेद उर रहमान खान मुमताज बी और शहरेयार सलीम को भी शामिल किया गया। अब ईडी की प्राथमिकी में ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय लेन-देन और विश्वविद्यालय निर्माण में कथित गड़बड़ियों का जिक्र होने के बाद पुराने और नए पदाधिकारियों की भूमिका भी जांच का विषय बन सकती है।

    ईडी की जांच में विश्वविद्यालय निर्माण के लिए खर्च की गई रकम सरकारी धन के इस्तेमाल और कथित कमीशनखोरी से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है। आरोप है कि निर्माण कार्य में बिना उचित हिसाब के बड़ी रकम खर्च की गई। ऐसे में ट्रस्ट के पदों पर रहे लोगों से पूछताछ और दस्तावेजों के आधार पर उनकी जिम्मेदारी तय करने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि पत्नी बेटों और बहन के खिलाफ कार्रवाई को लेकर अभी अंतिम निर्णय या किसी की दोषसिद्धि सामने नहीं आई है।

    इस बीच आजम खां से जुड़े दो मामलों में 2 नवंबर को रामपुर की अदालत में सुनवाई होनी है। इनमें भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में कस्टडी रिमांड की मांग महत्वपूर्ण है। विवेचक सीओ टांडा पंकज पंत ने 29 अक्टूबर को अदालत में आजम खां के खिलाफ रिमांड वारंट जारी करने का अनुरोध किया था। अब अदालत के फैसले पर आगे की कानूनी कार्रवाई निर्भर करेगी। जौहर विश्वविद्यालय प्रकरण में ईडी की जांच और अदालत की सुनवाई के चलते आजम खां के साथ उनके परिवार और ट्रस्ट से जुड़े लोगों की भूमिका भी चर्चा में आ गई है।

  • दिल्ली–गोवा में ED का बड़ा एक्शन, AAP नेता दीपक सिंगला और फाइनेंस ग्रुप के ठिकानों पर छापेमारी

    दिल्ली–गोवा में ED का बड़ा एक्शन, AAP नेता दीपक सिंगला और फाइनेंस ग्रुप के ठिकानों पर छापेमारी


    नई दिल्ली ।  दिल्ली और गोवा में प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आम आदमी पार्टी के नेता दीपक सिंगला और बाबाजी फाइनेंस ग्रुप से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई बैंक फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोपों की जांच के तहत की गई है। ईडी की टीम ने दोनों राज्यों में एक साथ कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया, जिससे राजनीतिक और कारोबारी हलकों में हलचल मच गई है।

    जानकारी के अनुसार, ईडी की जांच का मुख्य फोकस संदिग्ध वित्तीय लेनदेन और बैंकिंग गड़बड़ियों पर है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वित्तीय लेनदेन के दौरान नियमों का किस तरह उल्लंघन किया गया और कथित तौर पर जुटाई गई रकम का इस्तेमाल किन उद्देश्यों के लिए किया गया। छापेमारी के दौरान कई अहम दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी जब्त किए गए हैं, जिनकी जांच की जा रही है।

    दूसरी ओर, बाबाजी फाइनेंस ग्रुप से जुड़े मामलों में भी गंभीर आरोप सामने आए हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस ग्रुप पर लोगों से भारी मात्रा में धन एकत्र करने और बाद में उसे विभिन्न जगहों पर ट्रांसफर करने का संदेह है। अनुमान है कि यह राशि करीब 180 करोड़ रुपये तक हो सकती है। ईडी अब इस पूरे नेटवर्क और पैसों के प्रवाह की गहन जांच कर रही है।

    इस कार्रवाई ने राजनीतिक स्तर पर भी चर्चा तेज कर दी है, क्योंकि इससे पहले भी इसी तरह के मामलों में कुछ अन्य नेताओं और पूर्व सांसदों पर ईडी की जांच हो चुकी है। इसी क्रम में पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल से जुड़े मामलों में भी पहले छापेमारी की गई थी, जिसमें फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट के कथित उल्लंघन और फंड मैनेजमेंट में गड़बड़ी की जांच शामिल थी।

    ईडी की इस ताजा कार्रवाई ने एक बार फिर राजनीतिक और आर्थिक जांच एजेंसियों की भूमिका को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। फिलहाल जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और भी खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

  • बड़ा कानूनी कदम: रॉबर्ट वाड्रा ने HC का दरवाजा खटखटाया, समन पर उठाए सवाल

    बड़ा कानूनी कदम: रॉबर्ट वाड्रा ने HC का दरवाजा खटखटाया, समन पर उठाए सवाल


    नई दिल्ली। नई दिल्ली में एक बार फिर चर्चित जमीन सौदे से जुड़ा मामला सुर्खियों में है। इस बार मामला Robert Vadra की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल की गई याचिका को लेकर है। वाड्रा ने निचली अदालत द्वारा जारी समन को चुनौती देते हुए अदालत से राहत की मांग की है।

    यह पूरा मामला हरियाणा के गुरुग्राम जिले के शिकोहपुर (अब सेक्टर 83) में हुए एक जमीन सौदे से जुड़ा है, जिसे मनी लॉन्ड्रिंग जांच के दायरे में रखा गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप है कि इस सौदे में स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी ने कम कीमत पर जमीन खरीदकर बाद में भारी मुनाफे में उसे बेचा।

    जानकारी के अनुसार, यह सौदा 2008 में हुआ था, जब कंपनी ने ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज से लगभग 3.5 एकड़ जमीन करीब 7.5 करोड़ रुपये में खरीदी थी। उस समय Robert Vadra इस कंपनी के डायरेक्टर थे।

    इसके बाद 2012 में वही जमीन रियल एस्टेट कंपनी DLF को लगभग 58 करोड़ रुपये में बेच दी गई। इस लेनदेन को लेकर बाद में गंभीर सवाल उठे और मामला जांच एजेंसियों तक पहुंच गया।

    इस केस में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब 2012 में आईएएस अधिकारी अशोक खेमका ने इस जमीन के म्यूटेशन को रद्द कर दिया था। उन्होंने इसे भूमि चकबंदी नियमों और प्रक्रियात्मक उल्लंघन से जुड़ा मामला बताते हुए कार्रवाई की थी। इसके बाद यह सौदा विवादों के घेरे में आ गया।

    प्रवर्तन निदेशालय ने बाद में इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगाते हुए आरोपपत्र दाखिल किया। ईडी का कहना है कि इस सौदे से जुड़े दस्तावेजों और शुरुआती जांच में पर्याप्त सबूत मिले हैं, जिसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई जरूरी है।

    इसी आरोपपत्र के आधार पर ट्रायल कोर्ट ने 15 अप्रैल को समन जारी किया था और वाड्रा सहित अन्य आरोपियों को 16 मई को अदालत में पेश होने का आदेश दिया था। इसी आदेश को अब Robert Vadra ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है।

    दिल्ली हाईकोर्ट में यह याचिका जस्टिस मनोज जैन की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध की गई है, जिस पर जल्द सुनवाई होने की संभावना है। वाड्रा की तरफ से दलील दी गई है कि निचली अदालत का समन कानूनी प्रक्रिया और तथ्यों के आधार पर सही नहीं है, इसलिए इसे रद्द किया जाए। वहीं दूसरी ओर जांच एजेंसियों का दावा है कि यह मामला गंभीर वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है और इसकी गहन जांच जरूरी है।

    फिलहाल अदालत का अगला फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि हाईकोर्ट इस समन को बरकरार रखता है या इसे रोकने का आदेश देता है।

  • AAP मंत्री संजीव अरोड़ा मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार, ED की बड़ी कार्रवाई से पंजाब की राजनीति में हलचल

    AAP मंत्री संजीव अरोड़ा मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार, ED की बड़ी कार्रवाई से पंजाब की राजनीति में हलचल



    नई दिल्ली। पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार में मंत्री संजीव अरोड़ा को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार कर लिया है। शनिवार सुबह ED की टीम ने चंडीगढ़ सेक्टर-2 स्थित उनके सरकारी आवास पर छापेमारी की, जिसके बाद लगभग 10 घंटे लंबी पूछताछ की गई और शाम करीब 5 बजे उन्हें दिल्ली ले जाया गया।

    ED के अनुसार यह मामला करीब 157.12 करोड़ रुपये के कथित फर्जी मोबाइल एक्सपोर्ट, शेल कंपनियों और GST इनपुट क्रेडिट धोखाधड़ी से जुड़ा है। जांच एजेंसी का आरोप है कि अरोड़ा से जुड़ी कंपनियों ने फर्जी खरीद-बिक्री और निर्यात दिखाकर अवैध तरीके से धन की हेराफेरी की और विदेशी कंपनियों के जरिए पैसे की राउंड ट्रिपिंग की गई।

    ED ने हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड और उनसे जुड़ी संस्थाओं के बैंक खाते, डीमैट होल्डिंग्स और कई अचल संपत्तियों को भी अस्थायी रूप से जब्त किया है। यह कार्रवाई 17 अप्रैल को की गई छापेमारी और दस्तावेजों की जांच के बाद सामने आए तथ्यों के आधार पर की गई है।

    एजेंसी का दावा है कि 157 करोड़ रुपये के घोषित एक्सपोर्ट में से बड़ी राशि UAE की दो कंपनियों के जरिए घूमाकर वापस भारत लाई गई, जिससे FEMA और GST नियमों के उल्लंघन का संदेह गहराया है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और ED ने आगे की पूछताछ दिल्ली में करने की बात कही है।

    इधर गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया और कहा कि ED का इस्तेमाल पार्टी को तोड़ने के लिए किया जा रहा है। वहीं पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि यह कार्रवाई राजनीतिक दबाव बनाने के लिए की गई है।

    आप सांसद राघव चड्ढा ने भी इस मामले को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला और इसे राजनीतिक साजिश करार दिया। वहीं भाजपा की ओर से कहा गया है कि जांच एजेंसी अपना काम कर रही है और कानून से कोई ऊपर नहीं है।

    फिलहाल संजीव अरोड़ा ED की हिरासत में हैं और मामले की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। यह मामला पंजाब की राजनीति में बड़ा विवाद बन गया है और आने वाले दिनों में इसके और राजनीतिक असर देखने को मिल सकते हैं।

  • सुकेश चंद्रशेख का जैकलीन को भावुक पत्र,कहा-प्यार और जंग में सब जायज है.कानूनी प्रक्रिया के बीच बढ़ी हलचल

    सुकेश चंद्रशेख का जैकलीन को भावुक पत्र,कहा-प्यार और जंग में सब जायज है.कानूनी प्रक्रिया के बीच बढ़ी हलचल


    नई दिल्ली । 200 करोड़ रुपये से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक बार फिर नया घटनाक्रम सामने आया है, जहां जेल में बंद सुकेश चंद्रशेखर ने अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस को एक और पत्र लिखा है। यह पत्र ऐसे समय में सामने आया है जब मामला अदालत में विचाराधीन है और विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है। इस नए पत्र ने एक बार फिर इस हाई-प्रोफाइल केस को चर्चा में ला दिया है और कानूनी प्रक्रिया के साथ-साथ सार्वजनिक स्तर पर भी इस पर ध्यान बढ़ गया है।

    अपने पत्र में सुकेश चंद्रशेखर ने भावनात्मक और व्यक्तिगत अंदाज में जैकलीन फर्नांडिस को संबोधित किया है। उसने पत्र की शुरुआत एक खास संबोधन से की और जैकलीन को मेरीबताते हुए अपने भावनात्मक जुड़ाव का उल्लेख किया। पत्र में उसने लिखा कि वह उनसे बेहद प्यार करता है और हमेशा उनके साथ खड़ा रहेगा। उसने एक बार फिर अपने शब्दों में यह दोहराया कि उसके अनुसार प्यार और जंग में सब जायज हैऔर अपने रिश्ते को लेकर कई भावनात्मक दावे किए। पत्र में उसने यह भी कहा कि वह लगातार जैकलीन को याद कर रहा है और उनके बीच का संबंध उसके लिए सबसे महत्वपूर्ण है।

    सुकेश ने अपने पत्र में खुद को भावनात्मक रूप से व्यक्त करते हुए कई निजी दावे किए और यह दिखाने की कोशिश की कि वह अब भी इस रिश्ते को लेकर गंभीर भावनाएं रखता है। उसने पत्र के अंत में खुद को एक विशेष नाम से संबोधित किया और यह भी लिखा कि वह हमेशा उनके साथ रहेगा। यह पहली बार नहीं है जब उसने इस तरह का पत्र लिखा हो, इससे पहले भी वह कई बार इसी तरह के भावनात्मक पत्र भेज चुका है, जिनमें उसने अपने दावों और भावनाओं को दोहराया है।

    इस पूरे मामले के बीच अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस की ओर से अदालत में एक महत्वपूर्ण याचिका दायर की गई है, जिसमें उन्होंने सरकारी गवाह बनने की अनुमति मांगी है। इस याचिका के दाखिल होने के बाद मामले की कानूनी प्रक्रिया और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है और अदालत में इस पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। सुनवाई के दौरान संबंधित पक्षों ने अपना पक्ष रखने के लिए समय की मांग की है, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया है।

    सुनवाई के दौरान यह भी कहा गया कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और प्रत्येक पक्ष को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा। इस याचिका पर अगली सुनवाई की तारीख भी तय की गई है, जिसके बाद आगे की दिशा स्पष्ट होने की संभावना है।

    यह मामला लंबे समय से चर्चा में बना हुआ है और समय-समय पर इससे जुड़े नए घटनाक्रम सामने आते रहे हैं। सुकेश चंद्रशेखर द्वारा लिखे गए पत्र पहले भी सुर्खियों में रहे हैं, जिनमें उसने बार-बार व्यक्तिगत भावनाओं और दावों को दोहराया है। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले का निर्णय केवल अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों और जांच के आधार पर ही तय किया जाएगा। इस नए पत्र ने एक बार फिर पूरे मामले को चर्चा के केंद्र में ला दिया है, जहां एक ओर अदालत में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर ऐसे पत्रों के कारण मामला लगातार सार्वजनिक बहस का विषय बना हुआ है।

  • टीना अंबानी ने 40 हजार करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग केस ED के सामने पेश होने से किया इन्कार

    टीना अंबानी ने 40 हजार करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग केस ED के सामने पेश होने से किया इन्कार


    मुम्बई।
    बिजनेसमैन अनिल अंबानी (Businessman Anil Ambani) की पत्नी टीना अंबानी (Tina Ambani) ने आज प्रवर्तन निदेशालय (ED) के सामने पेश होने से इनकार कर दिया है। ईडी लगभग 40,000 करोड़ रुपये के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामलों (Money laundering cases) की जांच कर रही है। सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय जांच एजेंसी इस मामले में टीना अंबानी को नया समन जारी करेगी। प्रवर्तन निदेशालय ने अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (ADAG) और उससे जुड़ी संस्थाओं से जुड़े 40,000 करोड़ रुपये के कथित बैंकिंग और कॉर्पोरेट घोटाले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है।

    एक खबर में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि SIT का नेतृत्व संघीय जांच एजेंसी की मुख्यालय जांच इकाई (HIU) में अतिरिक्त निदेशक स्तर के अधिकारी कर रहे हैं और इसमें आधा दर्जन अन्य जांचकर्ता शामिल हैं। यह कदम सुप्रीम कोर्ट द्वारा ADAG के खिलाफ मामलों की समीक्षा करने के बाद उठाया गया है। पिछले सप्ताह, सर्वोच्च न्यायालय ने ईडी को एक SIT गठित करने का निर्देश दिया था जो मामले में निष्पक्ष, स्वतंत्र, त्वरित और निष्पक्ष जांच करेगी। अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को कथित सांठगांठ, मिलीभगत और साजिश की जांच करने और अपनी जांच को तार्किक निष्कर्ष तक ले जाने के लिए कहा था।

    ईडी पिछले साल से अनिल अंबानी और उनकी रिलायंस समूह की कंपनियों की जांच कर रहा है। अब तक एजेंसी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत तीन प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ECIRs) दर्ज की हैं। इसके अलावा, 12,000 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क भी की गई है। अनिल अंबानी से पिछले साल उनकी समूह की कंपनियों के कथित बैंक ऋण अनियमितताओं के लिए ईडी द्वारा पूछताछ की गई थी। कंपनी के एक पूर्व शीर्ष कार्यकारी और RCOM के पूर्व अध्यक्ष, पुनीत गर्ग को हाल ही में एजेंसी द्वारा गिरफ्तार किया गया है। अनिल अंबानी समूह की कंपनियों ने अतीत में किसी भी गलत काम से इनकार किया है।

  • ED की पंजाब में बड़ी कार्रवाई… मनी लॉन्ड्रिंग केस में 3500 करोड़ की 160 संपत्तियां जब्त

    ED की पंजाब में बड़ी कार्रवाई… मनी लॉन्ड्रिंग केस में 3500 करोड़ की 160 संपत्तियां जब्त


    नई दिल्ली।
    प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate- ED) ने पंजाब (Punjab) में PACL से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई की है। केंद्रीय एजेंसी ने गुरुवार को PACL और अन्य के मामले में चल रही जांच के सिलसिले में पंजाब के लुधियाना (Ludhiana, Punjab) में स्थित 3436.56 करोड़ रुपये की 169 अचल संपत्तियां जब्त की हैं। ईडी ने कहा कि उसकी जांच में पता चला है कि “लाखों निवेशकों से जुटाए गए फंड का एक हिस्सा PACL के नाम पर इन 169 अचल संपत्तियों को खरीदने में इस्तेमाल किया गया था, जिनकी मौजूदा कीमत 3436.56 करोड़ रुपये है।”

    प्रवर्तन निदेशालय के दिल्ली जोनल ऑफिस ने इन संपत्तियों को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत जब्त किया है। यह कार्रवाई सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) द्वारा PACL लिमिटेड, PGF लिमिटेड, दिवंगत निर्मल सिंह भंगू और अन्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC), 1860 की धारा 120-B और 420 के तहत दर्ज की गई FIR के आधार पर की गई जांच के बाद की गई है।


    क्या है पूरा मामला?

    बता दें कि यह मामला PACL द्वारा बड़े पैमाने पर चलाई गई धोखाधड़ी वाली पोंजी स्कीम और सामूहिक निवेश योजनाओं से संबंधित है। इन योजनाओं के जरिए PACL और उसकी सहयोगी कंपनियों ने धोखे से भोले-भाले निवेशकों से लगभग 48,000 करोड़ रुपये जुटाए और उसका गबन कर लिया। ईडी ने इस मामले में अब तक 5,602 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को जब्त किया है, जिसमें देश बार में स्थित पर्ल ग्रुप की घरेलू संपत्तियां और विदेशी संपत्तियां दोनों शामिल हैं। इसके अलावा, इस मामले में अब तक एक अभियोजन शिकायत और दो पूरक अभियोजन शिकायतें दायर की जा चुकी हैं।