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  • 10 साल तक मैच्योर FD का पैसा नहीं निकाला, तो क्या होगा? जानें RBI के नियम

    10 साल तक मैच्योर FD का पैसा नहीं निकाला, तो क्या होगा? जानें RBI के नियम


    नई दिल्ली। फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) नौकरीपेशा लोगों और आम निवेशकों के बीच निवेश का लोकप्रिय विकल्प है। इसमें तय अवधि के लिए पैसा जमा करने पर निर्धारित शर्तों के अनुसार ब्याज मिलता है। लेकिन कई बार बैंक का नोटिफिकेशन छूट जाने या जानकारी के अभाव में लोग FD की मैच्योरिटी के बाद भी रकम नहीं निकालते। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या 10 साल तक पैसा नहीं निकालने पर रकम डूब जाती है या उस पर ब्याज मिलता रहता है?

    भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के मुताबिक, FD की मैच्योरिटी के बाद रकम का भुगतान, रिन्यूअल और ब्याज बैंक में दर्ज निर्देशों और लागू शर्तों पर निर्भर करता है। अगर रकम 10 साल तक अनक्लेम्ड रहती है, तो उसे डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस (DEA) फंड में ट्रांसफर किया जा सकता है। हालांकि, इससे जमाकर्ता का पैसा वापस पाने का अधिकार खत्म नहीं होता।

    FD मैच्योर होने के बाद क्या होता है?

    FD की अवधि पूरी होने पर बैंक जमाकर्ता को रकम का भुगतान करता है या पहले से दिए गए निर्देशों के अनुसार डिपॉजिट को रिन्यू कर सकता है। आम तौर पर तीन स्थितियां बनती हैं।

    1. ऑटो-रिन्यूअल: अगर FD खोलते समय ऑटो-रिन्यूअल का विकल्प चुना गया है, तो बैंक तय निर्देशों और शर्तों के अनुसार FD को आगे बढ़ा सकता है।

    2. बैंक खाते में रकम ट्रांसफर: अगर मैच्योरिटी पर भुगतान का निर्देश दिया गया है, तो बैंक अपनी प्रक्रिया के अनुसार रकम जमाकर्ता के रजिस्टर्ड बैंक खाते में भेज सकता है।

    3. मैच्योरिटी के बाद ब्याज: अगर मैच्योरिटी की रकम का भुगतान नहीं हुआ है, तो उस पर लागू नियमों के अनुसार ब्याज मिल सकता है। कई मामलों में यह ब्याज बचत खाते की दर या मैच्योर हो चुकी FD की अनुबंधित दर में से जो कम हो, उसके आधार पर तय होता है। इसलिए मैच्योरिटी के बाद पुरानी FD की पूरी ब्याज दर मिलते रहने की गारंटी नहीं है।

    10 साल तक पैसा नहीं निकाला, तो DEA फंड में होगा ट्रांसफर?

    अगर FD की मैच्योरिटी के बाद रकम 10 साल तक अनक्लेम्ड रहती है, तो वह RBI के नियमों के तहत अनक्लेम्ड डिपॉजिट की श्रेणी में आ सकती है। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार बैंक ऐसी रकम को डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस (DEA) फंड में ट्रांसफर करता है।

    यह फंड RBI के अंतर्गत संचालित होता है और इसका उद्देश्य जमाकर्ताओं में जागरूकता बढ़ाने के साथ अनक्लेम्ड डिपॉजिट से संबंधित व्यवस्था को संभालना है।

    ध्यान रखें, DEA फंड में रकम ट्रांसफर होने का मतलब यह नहीं है कि आपका पैसा डूब गया। जमाकर्ता या उसके कानूनी उत्तराधिकारी का रकम पर दावा करने का अधिकार बना रहता है। इसके लिए संबंधित बैंक से संपर्क कर निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी होती है।

    जमाकर्ता की मृत्यु होने पर कौन कर सकता है क्लेम?

    अगर FD के जमाकर्ता की मृत्यु हो चुकी है और उसकी रकम अनक्लेम्ड है, तो नॉमिनी या कानूनी उत्तराधिकारी बैंक में दावा कर सकता है। बैंक की आवश्यकताओं के अनुसार मृत्यु प्रमाण पत्र, पहचान संबंधी दस्तावेज और अन्य जरूरी कागजात जमा करने पड़ सकते हैं।

    बैंक दस्तावेजों और दावे का सत्यापन करने के बाद लागू नियमों के अनुसार रकम का भुगतान करता है। इसलिए परिवार के सदस्यों को अपनी FD, बैंक खातों और नॉमिनी से संबंधित जानकारी व्यवस्थित रखनी चाहिए।

    FD रिन्यू कराने से पहले इन 4 बातों का रखें ध्यान

    1. ब्याज दर की तुलना करें: नई FD कराने से पहले बैंक की मौजूदा ब्याज दरों की तुलना पुरानी FD की दर से करें। नई FD पर मिलने वाला ब्याज अलग हो सकता है।

    2. अवधि का चुनाव करें: अपनी भविष्य की जरूरतों और खर्चों को ध्यान में रखकर FD की अवधि तय करें। लंबी अवधि के लिए पैसा जमा करने से पहले यह आकलन कर लें कि रकम की जरूरत कब पड़ सकती है।

    3. समय से पहले FD तोड़ने की शर्तें समझें: मैच्योरिटी से पहले FD बंद कराने पर लागू पेनाल्टी या ब्याज में कटौती की जानकारी जरूर लें।

    4. जरूरत के लिए पैसा उपलब्ध रखें: अगर निकट भविष्य में रकम की जरूरत हो सकती है, तो पूरा पैसा लंबी अवधि की FD में रखने के बजाय बचत खाते या अलग-अलग मैच्योरिटी वाली FD में बांटने पर विचार कर सकते हैं।

    FD की मैच्योरिटी तारीख और बैंक में दर्ज निर्देशों की समय-समय पर जांच करते रहें। इससे रकम के भुगतान या रिन्यूअल में होने वाली परेशानी से बचा जा सकता है।

    डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। FD के भुगतान, ब्याज और क्लेम से जुड़े नियम बैंक तथा संबंधित योजना की शर्तों के अनुसार अलग हो सकते हैं। कोई कदम उठाने से पहले अपने बैंक से लागू नियमों की पुष्टि करें।

  • वास्तु शास्त्र में नमक रखने की सही दिशा मानी जाती है महत्वपूर्ण, जानिए किचन में नमक रखने से जुड़े खास नियम

    वास्तु शास्त्र में नमक रखने की सही दिशा मानी जाती है महत्वपूर्ण, जानिए किचन में नमक रखने से जुड़े खास नियम

    नई दिल्ली । वास्तु शास्त्र में घर की अलग-अलग दिशाओं और उनमें रखी जाने वाली वस्तुओं को विशेष महत्व दिया जाता है। मान्यता है कि वस्तुओं को सही दिशा में रखने से घर के वातावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसी तरह नमक को लेकर भी वास्तु में कुछ नियम बताए गए हैं। नमक सामान्य तौर पर हर रसोई का जरूरी हिस्सा होता है, लेकिन वास्तु मान्यताओं के अनुसार इसे रखने की दिशा भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

    कई बार परिवार में कमाई अच्छी होने के बावजूद बचत नहीं हो पाती। पैसा आता है, लेकिन किसी न किसी वजह से खर्च हो जाता है। ऐसी स्थिति को लेकर वास्तु शास्त्र में घर की ऊर्जा और वस्तुओं की स्थिति पर ध्यान देने की सलाह दी जाती है। नमक को भी इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण माना गया है।

    वास्तु मान्यताओं के अनुसार नमक को किचन में उचित स्थान पर रखना चाहिए। रसोई घर का ऐसा हिस्सा है जहां भोजन तैयार होता है और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण वस्तुएं रखी जाती हैं। इसलिए नमक रखने के स्थान को लेकर भी वास्तु के नियमों का पालन करने की बात कही जाती है।

    नमक को सकारात्मक ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है। वास्तु संबंधी मान्यताओं में इसे नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने वाला माना जाता है। इसी वजह से घर में नमक के इस्तेमाल और उसके रखरखाव को लेकर कई तरह के उपाय बताए जाते हैं।

    वास्तु के अनुसार किचन में नमक को ऐसी जगह रखना चाहिए जहां वह साफ-सुथरा और व्यवस्थित रहे। नमक का डिब्बा खुला छोड़ने के बजाय उसे अच्छी तरह बंद करके रखने की सलाह दी जाती है। इससे नमक नमी से भी बचा रहता है और रसोई में साफ-सफाई बनी रहती है।

    घर में नमक रखने को लेकर दिशाओं का भी उल्लेख किया जाता है। वास्तु मान्यताओं में कुछ दिशाओं को नमक रखने के लिए अनुकूल माना जाता है, जबकि कुछ स्थानों पर इसे रखने से बचने की सलाह दी जाती है। इन नियमों का उद्देश्य घर में सकारात्मक वातावरण बनाए रखना बताया जाता है।

    नमक को लेकर यह भी मान्यता है कि इसे बिखरा हुआ नहीं रखना चाहिए। यदि नमक गिर जाए तो उसे तुरंत साफ कर देना चाहिए। वास्तु में नमक के बिखरने को अच्छा संकेत नहीं माना जाता। हालांकि, ये बातें धार्मिक और वास्तु मान्यताओं पर आधारित हैं और इनका वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

    इसी तरह नमक का इस्तेमाल करते समय भी सावधानी रखने की सलाह दी जाती है। रसोई में जरूरी सामान को व्यवस्थित तरीके से रखने से रोजमर्रा के काम आसान होते हैं। नमक जैसी नियमित उपयोग की वस्तु को निर्धारित स्थान पर रखने से किचन भी व्यवस्थित रहता है।

    पैसे के टिकने और आर्थिक स्थिति को लेकर वास्तु में बताए गए इन उपायों को मान्यता के रूप में ही देखा जाना चाहिए। केवल नमक को किसी विशेष दिशा में रखने से धन दोगुना होने की कोई वैज्ञानिक गारंटी नहीं है। आर्थिक स्थिति पर आय, खर्च, बचत और वित्तीय प्रबंधन जैसे वास्तविक कारकों का प्रभाव पड़ता है।

    इसलिए यदि कोई व्यक्ति वास्तु मान्यताओं का पालन करता है तो नमक रखने से जुड़े इन नियमों को अपनी आस्था के अनुसार अपना सकता है। साथ ही आर्थिक स्थिरता के लिए आय और खर्च का संतुलन बनाए रखना तथा नियमित बचत पर ध्यान देना भी जरूरी है।

  • बिना SIP और शेयर बाजार के पति-पत्नी बना सकते हैं एक लाख से ज्यादा, 10 रुपये से शुरू करें आसान गुल्लक चैलेंज

    बिना SIP और शेयर बाजार के पति-पत्नी बना सकते हैं एक लाख से ज्यादा, 10 रुपये से शुरू करें आसान गुल्लक चैलेंज

    नई दिल्ली । बड़ा फंड तैयार करने के लिए लोग अक्सर शेयर बाजार, फिक्स्ड डिपॉजिट या SIP जैसे विकल्पों पर विचार करते हैं। हालांकि, जो लोग बाजार से जुड़े जोखिम से बचना चाहते हैं और बिना किसी निवेश साधन के नियमित बचत करना चाहते हैं, उनके लिए गुल्लक में रोज थोड़ी रकम जमा करने का तरीका अपनाया जा सकता है। तारीख के हिसाब से बचत करने वाला यह फॉर्मूला बेहद आसान है और पति-पत्नी मिलकर इसे अपनाएं तो एक साल में एक लाख रुपये से ज्यादा की रकम जमा की जा सकती है।

    इस बचत चुनौती का नियम सीधा है। महीने की जिस तारीख को जितना अंक हो, उतने ही दस रुपये गुल्लक में जमा करने होते हैं। यानी हर दिन जमा होने वाली राशि तारीख के साथ बढ़ती जाती है। इससे शुरुआत में बचत की रकम छोटी रहती है और महीने के आखिर में धीरे-धीरे बढ़कर ज्यादा हो जाती है।

    उदाहरण के तौर पर महीने की 1 तारीख को 10 रुपये जमा करने होंगे। 5 तारीख को 50 रुपये, 10 तारीख को 100 रुपये, 15 तारीख को 150 रुपये, 20 तारीख को 200 रुपये और 25 तारीख को 250 रुपये गुल्लक में डालने होंगे। इसी क्रम को महीने की 30 तारीख तक जारी रखा जा सकता है, जब उस दिन 300 रुपये जमा होंगे।

    अगर महीने की 1 से 31 तारीख तक इसी नियम के अनुसार रोज बचत की जाए, तो एक व्यक्ति एक महीने में कुल 4,960 रुपये जमा कर सकता है। इस तरह लगातार 12 महीने तक यही तरीका अपनाने पर एक व्यक्ति के पास करीब 59,520 रुपये का फंड तैयार हो जाएगा।

    इस चुनौती की खास बात यह है कि इसे पति-पत्नी मिलकर भी पूरा कर सकते हैं। दोनों लोग अपने-अपने स्तर पर तारीख के हिसाब से समान रकम गुल्लक में जमा करें तो एक साल में दोनों की संयुक्त बचत करीब 1,19,040 रुपये तक पहुंच सकती है। इस तरह एक लाख रुपये का लक्ष्य पार किया जा सकता है।

    इस तरीके में किसी निवेश योजना में पैसा लगाने की जरूरत नहीं होती। बचत की रकम सीधे गुल्लक में जमा की जाती है, इसलिए इसका उद्देश्य नियमित तौर पर पैसे अलग रखना और बचत की आदत विकसित करना है। रोजाना छोटी रकम जमा करने से एक साथ बड़ी राशि बचाने का दबाव भी कम किया जा सकता है।

    हालांकि, इस तरीके को बाजार निवेश का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या अन्य निवेश साधनों में पैसे लगाने पर रिटर्न बाजार के प्रदर्शन से जुड़ा होता है और उसमें जोखिम भी रहता है। वहीं, गुल्लक में रखी रकम से निवेश रिटर्न नहीं मिलता। यह मूल रूप से बचत का तरीका है।

    इस चुनौती को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए जरूरी है कि तय तारीख पर निर्धारित रकम अलग रखी जाए। महीने की शुरुआत में छोटी रकम से शुरू होने वाली बचत महीने के अंत तक बढ़ती जाती है। पति-पत्नी दोनों नियमितता बनाए रखें तो 12 महीने में संयुक्त रूप से करीब 1.19 लाख रुपये जमा किए जा सकते हैं।

  • घर में पैसा और सुख-शांति बनाए रखने के लिए फेंगशुई के 3 आसान उपाय, जानें सकारात्मक माहौल से जुड़े जरूरी नियम

    घर में पैसा और सुख-शांति बनाए रखने के लिए फेंगशुई के 3 आसान उपाय, जानें सकारात्मक माहौल से जुड़े जरूरी नियम


    नई दिल्ली ।
    फेंगशुई एक प्राचीन चीनी पद्धति है, जिसमें घर और उसके आसपास मौजूद ऊर्जा के संतुलन पर जोर दिया जाता है। मान्यता के अनुसार घर को साफ, हवादार और व्यवस्थित रखने से सकारात्मक माहौल बनाने में मदद मिल सकती है। घर में तनाव, चिड़चिड़ापन या छोटी-छोटी बातों पर होने वाली बहस के बीच कुछ लोग फेंगशुई में बताए गए आसान उपायों को अपनाते हैं।

    घर में शांति और सकारात्मकता बनाए रखने के लिए रोजाना की दिनचर्या में छोटे बदलाव किए जा सकते हैं। फेंगशुई की मान्यताओं के अनुसार विशेष रूप से शाम होने से पहले किए जाने वाले कुछ उपाय शुभ माने जाते हैं। इनका संबंध घर में हवा, रोशनी, सफाई और व्यवस्था बनाए रखने से है।

    फेंगशुई के अनुसार सुबह कुछ देर के लिए घर की खिड़कियां और दरवाजे खोलना अच्छा माना जाता है। करीब 9 से 15 मिनट तक इन्हें खोलकर घर में हवा का प्रवाह बनाए रखा जा सकता है। इससे बंद या बासी हवा बाहर निकलती है और कमरे में ताजगी महसूस होती है। हालांकि, बाहर प्रदूषण बहुत अधिक हो या मौसम खराब हो तो खिड़कियां खोलने से बचना बेहतर माना गया है। इस उपाय को सूर्यास्त से पहले कर लेने की मान्यता है।

    घर का मुख्य द्वार भी फेंगशुई में महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता के अनुसार इसी रास्ते से घर में ऊर्जा का प्रवेश होता है। इसलिए मुख्य दरवाजे और उसके आसपास धूल, गंदगी या अनावश्यक सामान जमा नहीं होने देना चाहिए। दरवाजे के पास जूते-चप्पलों का ढेर लगाने से बचने और वहां डस्टबिन नहीं रखने की सलाह दी जाती है।

    मुख्य द्वार और आसपास की जगह को नियमित रूप से साफ रखना चाहिए। शाम के समय प्रवेश द्वार के आसपास पर्याप्त रोशनी रखना भी फेंगशुई में अच्छा माना जाता है। साफ और व्यवस्थित प्रवेश द्वार घर को व्यावहारिक रूप से भी अधिक आकर्षक और आरामदायक बना सकता है।

    फेंगशुई और कई पारंपरिक मान्यताओं में नमक को नकारात्मक ऊर्जा कम करने वाला माना जाता है। इसी आधार पर घर की सफाई करते समय पानी में थोड़ा सेंधा नमक या समुद्री नमक मिलाकर पोछा लगाने की सलाह दी जाती है। एक अन्य मान्यता के अनुसार कांच की कटोरी में सेंधा नमक रखकर उसे घर के उस हिस्से में रखा जा सकता है, जहां परिवार के सदस्य अधिक समय बिताते हैं। इसे करीब एक सप्ताह बाद बदलने की बात कही जाती है।

    घर का वातावरण बेहतर बनाए रखने के लिए अनावश्यक सामान जमा न करने, टूटे या लंबे समय से इस्तेमाल में नहीं आ रहे सामान को हटाने और कमरों में पर्याप्त रोशनी तथा हवा का ध्यान रखने की सलाह भी दी जाती है। पौधे रखे जाते हैं तो उनकी नियमित देखभाल करना और घर में ऐसी चीजें रखना उपयोगी माना जाता है, जिनसे सकारात्मकता और सुकून का एहसास हो।

    हालांकि, इन उपायों को धार्मिक या पारंपरिक मान्यता के रूप में ही देखा जाना चाहिए। इनके जरिए धन, स्वास्थ्य या पारिवारिक समस्याओं के निश्चित समाधान का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। वास्तविक आर्थिक, स्वास्थ्य या पारिवारिक समस्याओं के लिए जरूरी व्यावहारिक कदम उठाना आवश्यक है।

  • पैसा मंदिर का और 50 में 42 मुस्लिम छात्र! मंजूरी रद्द होने के बाद MBBS कर रहे छात्रों का क्या होगा? समझिए विवाद

    पैसा मंदिर का और 50 में 42 मुस्लिम छात्र! मंजूरी रद्द होने के बाद MBBS कर रहे छात्रों का क्या होगा? समझिए विवाद

    नई दिल्ली। नेशनल मेडिकल कमीशन ने जम्मू-कश्मीर के कटरा में स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस को MBBS कोर्स चलाने की अनुमति को रद्द कर देन का फैसला लिया है.

    यह फैसला 2 जनवरी 2026 को हुए अचानक निरीक्षण के बाद लिया गया है. जांच में कॉलेज के शिक्षा देने की व्यवस्था, बुनियादी ढांचा, मरीजों की संख्या और क्लिनिकल सुविधाओं में कई गंभीर कमियां पाई गई हैं. मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड ने इसे न्यूनतम मानकों पर खरा नहीं पाया है. जिसके कारण से NMC अध्यक्ष की मंजूरी लेकर उस कॉलेज की अनुमति रद्द कर दी गई है.

    50 छात्रों में से 42 छात्र मुस्लिम
    ये विवाद तब उभरा जब कॉलेज में 50 छात्रों में से 42 कश्मीरी मुस्लिम छात्रों का प्रवेश हुआ था. भाजपा और कुछ हिंदू संगठन इसे लेकर नाराज हुए और सवाल उठाया कि मंदिर ट्रस्ट के फंड से चलने वाले इस कॉलेज में मुस्लिम छात्रों को प्राथमिकता क्यों मिली है. मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने कहा कि दाखिले पूरी तरह NEET और मेरिट के आधार पर हुए और धर्म के आधार पर किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया गया है. उन्होंने यह भी साफ किया कि यदि कोई संस्था अल्पसंख्यक दर्जा लेना चाहती थी तो उसी समय आवेदन करना चाहिए था.

    MARB ने शिकायतों को जांचने के लिए 2 जनवरी 2026 को अचानक निरीक्षण किया. निरीक्षण में पता चला कि शिक्षण फैकल्टी में 39 फीसदी की कमी थी, ट्यूटर, डेमॉन्स्ट्रेटर और सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की संख्या 65 फीसदी कम थी. मरीजों की संख्या और क्लिनिकल सेवाएं भी तय मानकों से बहुत कम थीं. OPD में 400 मरीजों की जगह केवल 182 मरीज आए, बेड ऑक्यूपेंसी 80 फीसदी की जगह 45 फीसदी रही और ICU में केवल आधे बेड भरे थे. प्रसव की संख्या हर महीने 25 थी, जबकि यह MARB के अनुसार गंभीर रूप से अपर्याप्त थी.

    हिंदू मुस्लिम नहीं, कॉलेज में थी कमी
    मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने कहा कि छात्रों का भविष्य सुरक्षित रहना चाहिए और उन्हें अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों में समायोजित किया जाएगा. उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि शिक्षा और प्रवेश प्रक्रिया में सांप्रदायिक राजनीति की कोशिशें हुई हैं, लेकिन NMC और MARB ने साफ किया कि फैसले का आधार केवल कॉलेज की कमियां और नियमों का उल्लंघन था. छात्रों के अच्छाई के लिए उन्हें दूसरे कॉलेजों में बचे हुए सीटों पर भेजा जाएगा.

    इस पूरे विवाद से साफ संदेश गया कि मेडिकल कॉलेजों की स्थापना और संचालन में नियमों का पालन अनिवार्य है. छात्रों का भविष्य किसी भी राजनीतिक या सामाजिक दबाव, या धर्म के आधार पर प्रभावित नहीं होना चाहिए. NMC और MARB का यह कदम स्वास्थ्य शिक्षा में गुणवत्ता, समानता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में जरूरी माना जा रहा है.