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  • ईडी के 715 करोड़ रुपये मामले में रिलायंस पावर को नोटिस, नकारात्मक खबर के बीच शेयर पांच फीसदी से ज्यादा चढ़े

    ईडी के 715 करोड़ रुपये मामले में रिलायंस पावर को नोटिस, नकारात्मक खबर के बीच शेयर पांच फीसदी से ज्यादा चढ़े

    नई दिल्ली । अनिल अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस पावर के शेयरों में शुक्रवार को तेज उछाल देखने को मिला। कंपनी को करीब 715 करोड़ रुपये के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में नोटिस मिलने की जानकारी सामने आने के बावजूद कारोबार के दौरान शेयर 5.55 प्रतिशत से अधिक चढ़कर 23.38 रुपये तक पहुंच गया। इस तेजी ने बाजार में निवेशकों के रुख को लेकर भी चर्चा बढ़ा दी है।

    रिलायंस पावर और उसकी सहायक कंपनी रिलायंस क्लीनजेन लिमिटेड को नई दिल्ली स्थित विशेष सीबीआई अदालत के न्यायाधीश की ओर से प्री-कॉग्निजेंस नोटिस मिला है। यह नोटिस प्रवर्तन निदेशालय की शिकायत के आधार पर जारी किया गया है। मामला रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड और उससे जुड़े अन्य पक्षों से संबंधित बताया गया है।

    प्रवर्तन निदेशालय ने करीब 715 करोड़ रुपये की कथित रकम से जुड़े मामले में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत शिकायत दर्ज की है। इसमें अधिनियम की धारा 3 और 4 का उल्लेख किया गया है। शिकायत में रिलायंस पावर और उसकी सहायक कंपनी का नाम संभावित आरोपियों के रूप में शामिल किए जाने की जानकारी कंपनी की ओर से दी गई है।

    नोटिस की खबर सामान्य तौर पर कंपनी के लिए नकारात्मक मानी जा सकती है, लेकिन शुक्रवार को शेयर बाजार में इसका तत्काल असर अलग दिखाई दिया। रिलायंस पावर के शेयरों में खरीदारी बढ़ी और कीमत 23.38 रुपये तक पहुंच गई। हालांकि शेयर की मौजूदा स्थिति को केवल एक कारोबारी सत्र की तेजी से नहीं देखा जा सकता, क्योंकि पिछले कुछ समय में स्टॉक में काफी उतार-चढ़ाव रहा है।

    कंपनी के शेयरों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो छह महीने की अवधि में इसमें करीब 9.73 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है। एक साल के दौरान शेयर करीब 53 प्रतिशत टूट चुका है। हालांकि पांच साल की अवधि में स्टॉक ने लगभग 131.49 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। इससे कंपनी के शेयर में लंबी अवधि और छोटी अवधि के प्रदर्शन के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है।

    शुक्रवार को कारोबार के दौरान रिलायंस पावर का बाजार पूंजीकरण करीब 9,574 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। कंपनी के शेयर का 52 सप्ताह का उच्च स्तर 50.90 रुपये और निचला स्तर 20.23 रुपये बताया गया है। मौजूदा भाव इन दोनों स्तरों के बीच कारोबार कर रहा है।

    रिलायंस पावर मुख्य रूप से बिजली उत्पादन से जुड़ी कंपनी है। इसे भारत और विदेशों में बिजली परियोजनाओं के विकास, निर्माण और संचालन के लिए स्थापित किया गया था। कंपनी के पास बिजली उत्पादन से संबंधित परियोजनाओं का पोर्टफोलियो है, जिसमें चालू और निर्माणाधीन परियोजनाएं शामिल हैं। इन परियोजनाओं का संचालन कंपनी सीधे या अपनी सहायक कंपनियों के माध्यम से करती है।

    715 करोड़ रुपये के मामले में जारी नोटिस अब कंपनी के लिए कानूनी और कारोबारी दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है। हालांकि नोटिस मिलना अपने आप में आरोपों का अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जाता। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया के दौरान संबंधित पक्षों का पक्ष और उपलब्ध तथ्यों का परीक्षण किया जाएगा।

    इस बीच शेयरों में आई तेजी यह दिखाती है कि बाजार में किसी खबर पर तत्काल प्रतिक्रिया हमेशा उसी दिशा में नहीं होती, जिस दिशा में खबर को सामान्य तौर पर देखा जाता है। रिलायंस पावर के मामले में भी कानूनी खबर के बीच शेयरों में खरीदारी देखने को मिली है, जबकि निवेशकों के लिए कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन और आगे की कानूनी प्रक्रिया दोनों पर नजर रखना महत्वपूर्ण रहेगा।

  • नोरंजन जगत का काला सच: 'समझौते' से इनकार पर संदीपा विर्क को फिल्म से निकाला, आधी रात को कमरे में घुसा था डायरेक्टर

    नोरंजन जगत का काला सच: 'समझौते' से इनकार पर संदीपा विर्क को फिल्म से निकाला, आधी रात को कमरे में घुसा था डायरेक्टर

    नई दिल्ली । मनोरंजन जगत की चकाचौंध के पीछे छिपा एक बेहद कड़वा और स्याह सच एक बार फिर सामने आया है। मशहूर अभिनेत्री और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर संदीपा विर्क ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में फिल्म उद्योग के भीतर व्याप्त कास्टिंग काउच और यौन उत्पीड़न की गंभीर समस्याओं पर खुलकर बात की है। अभिनेत्री ने अपने करियर के दौरान झेले गए अपमानजनक अनुभवों का खुलासा करते हुए बताया कि किस तरह काम के बदले उनसे अनुचित मांगें की गईं और इनकार करने पर उन्हें फिल्मों से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

    संदीपा विर्क पिछले कुछ समय से एक कथित वित्तीय विवाद के चलते कानूनी मुश्किलों का सामना कर रही थीं। छह करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उन्हें देश की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली तिहाड़ जेल में साढ़े चार महीने का समय बिताना पड़ा था। वर्तमान में अदालत से जमानत मिलने के बाद वे सलाखों से बाहर हैं। जेल से रिहा होने के बाद ‘द शेरोज टीवी’ (TheSheroesTV) पॉडकास्ट के साथ विशेष बातचीत में अभिनेत्री का दर्द छलक पड़ा, जहां उन्होंने जेल के भीतर कटे अपने भयावह दिनों और फिल्म उद्योग की विसंगतियों को बेबाकी से उजागर किया।

    जेल के दिनों को याद करते हुए संदीपा ने भावुक होकर बताया कि तिहाड़ जेल के भीतर गुजारा गया हर एक दिन और हर एक सेकंड उनके लिए अत्यधिक मानसिक और शारीरिक स्ट्रगल से भरा था। उन्होंने कहा कि वहां की परिस्थितियां इतनी कठिन थीं कि वे हर दिन ईश्वर से केवल मौत की दुआ मांगती थीं। हालांकि, अब वह समय बीत चुका है, लेकिन उस दौर ने उनकी मानसिक स्थिति पर गहरा असर डाला है। जेल की इन यादों के अलावा उन्होंने अपने फिल्मी करियर के दौरान झेले गए शोषण पर भी विस्तार से बात की।

    फिल्म इंडस्ट्री में काम के बदले होने वाले शारीरिक और मानसिक शोषण यानी कास्टिंग काउच पर बात करते हुए संदीपा ने कहा कि इस उद्योग में सीधा अपराध या जबरदस्ती भले ही न दिखती हो, लेकिन परोक्ष रूप से दबाव बनाने की प्रथा बेहद आम है। उनके अनुसार, अलग-अलग फिल्म उद्योगों में अभिनेत्रियों को अप्रोच करने और उनसे अनुचित मांगें रखने का तरीका अलग होता है। जहां बॉलीवुड में ‘डिनर’ या ‘कॉफी’ के बहाने अनौपचारिक तौर पर बात शुरू की जाती है, जो देखने में सामान्य लगती है, वहीं क्षेत्रीय सिनेमा में यह दबाव अधिक सीधा और आक्रामक होता है।

    अपने साथ घटी एक अत्यंत विचलित करने वाली घटना का जिक्र करते हुए अभिनेत्री ने बताया कि एक पंजाबी फिल्म की सात दिनों की शूटिंग पूरी होने के बाद, फिल्म के निर्देशक आधी रात को जबरन उनके होटल के कमरे के भीतर दाखिल हो गए। निर्देशक ने उनके सामने सीधे तौर पर शारीरिक समझौता (कॉम्प्रोमाइज) करने की शर्त रख दी और कहा कि वे आगे की शूटिंग तभी करेंगे जब संदीपा उनकी मांग मान लेंगी। जब संदीपा ने पूरी दृढ़ता के साथ इस अनैतिक मांग को ठुकरा दिया, तो उन्हें तुरंत उस फिल्म से निष्कासित कर दिया गया।

    इस घटना के बाद भी संदीपा की मुश्किलें कम नहीं हुईं। उन्होंने बताया कि एक अन्य पंजाबी फिल्म की शूटिंग के दौरान फिल्म के मुख्य अभिनेता (हीरो) ने उनके साथ बेहद अभद्र व्यवहार किया। उस अभिनेता की यह अनुचित मांग थी कि संदीपा होटल में उसके बगल वाले कमरे में ही ठहरें, अन्यथा वह शूटिंग शुरू नहीं करेगा। इन लगातार हो रहे खराब अनुभवों और गरिमा से समझौता न करने की अपनी जिद के कारण संदीपा ने दोनों ही फिल्में बीच में ही छोड़ दी थीं।

    अपने इस पूरे अनुभव को साझा करते हुए संदीपा विर्क ने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह की विसंगतियां केवल फिल्म उद्योग तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि लगभग हर कार्यक्षेत्र और प्रोफेशन में महिलाओं को इस तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कास्टिंग काउच एक कड़वी हकीकत है, लेकिन अंततः यह हर महिला का अपना व्यक्तिगत फैसला होता है कि वह इसके आगे झुकती है या नहीं। उन्होंने इस व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाते हुए कहा कि योग्यता और काम को ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए, न कि काम के बदले किसी से अनुचित मांगें की जानी चाहिए।

  • TMC के पार्टी फंड में 440 करोड़ पर ED की बड़ी कार्रवाई! हेलीकॉप्टर और चार्टर विमान खरीद में गड़बड़ी का दावा

    TMC के पार्टी फंड में 440 करोड़ पर ED की बड़ी कार्रवाई! हेलीकॉप्टर और चार्टर विमान खरीद में गड़बड़ी का दावा


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की सियासत में एक बार फिर प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई ने हलचल मचा दी है। प्रवर्तन निदेशालय ने तृणमूल कांग्रेस के पार्टी फंड से जुड़े कथित वित्तीय लेनदेन में बड़ी अनियमितताओं का दावा करते हुए पार्टी के तीन बैंक खातों में जमा 440.42 करोड़ रुपए को फ्रीज करने का आदेश दिया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि पार्टी के आधिकारिक खाते से करोड़ों रुपए एक चार्टर विमान कंपनी को ट्रांसफर किए गए जिनका इस्तेमाल हेलीकॉप्टर और लग्जरी विमान खरीदने में किया गया। इसके बाद उन्हीं विमानों और हेलीकॉप्टरों को पार्टी की ओर से किराए पर लिया गया और इसके लिए अलग से भुगतान भी किया गया। ईडी को आशंका है कि इस पूरी प्रक्रिया के जरिए पार्टी फंड के दुरुपयोग और मनी लॉन्ड्रिंग को अंजाम दिया गया।

    मामले की जांच के दौरान ईडी ने कोलकाता और आसपास के पांच अलग अलग ठिकानों पर छापेमारी की। इनमें चार्टर विमान कंपनी के कार्यालय उसके मालिक का आवास न्यू टाउन स्थित एक परिसर एक ट्रस्ट का दफ्तर और एक चार्टर्ड अकाउंटेंट का कार्यालय शामिल है। कार्रवाई के दौरान एजेंसी ने कई अहम दस्तावेज डिजिटल रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं जिनकी जांच की जा रही है।

    जांच एजेंसी के अनुसार वर्ष 2023 से 2026 के बीच तृणमूल कांग्रेस के बैंक खातों से केयरवेल एविएशन नामक चार्टर विमान कंपनी के खाते में करीब 160 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए। इसके बाद इस कंपनी ने करीब 82.96 करोड़ रुपए एक अन्य नई कंपनी को भेजे। ईडी का दावा है कि करीब 112 करोड़ रुपए की राशि का उपयोग एक एम्ब्रेयर लेगेसी जेट 600 विमान और एक अगस्ता वेस्टलैंड 109 एसपी हेलीकॉप्टर खरीदने में किया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि हेलीकॉप्टर की खरीद के लिए वर्ष 2023 में केमैन आइलैंड्स की एक विदेशी कंपनी से कर्ज भी लिया गया था।

    सूत्रों के मुताबिक यह चार्टर कंपनी तृणमूल कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं की हवाई यात्रा की व्यवस्था करती थी। जांच एजेंसी फिलहाल यह पता लगाने में जुटी है कि विमान और हेलीकॉप्टर खरीद में इस्तेमाल हुई राशि का वास्तविक स्रोत क्या था और इन संसाधनों का उपयोग किन परिस्थितियों में किया गया। इसी वजह से पूरे लेनदेन की फॉरेंसिक जांच भी कराई जा रही है।

    इस मामले की शुरुआत भी बेहद दिलचस्प तरीके से हुई। जून महीने में पार्टी के एक विधायक ने साइबर धोखाधड़ी से जुड़े संदिग्ध बैंक खातों की शिकायत दर्ज कराई थी। बाद में पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष ने भी आंतरिक विवाद का हवाला देते हुए पार्टी के बैंक खातों को फ्रीज करने की मांग की। स्थानीय पुलिस की प्रारंभिक जांच में करोड़ों रुपए के संदिग्ध ट्रांजैक्शन सामने आने के बाद मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका के आधार पर मामला ईडी के पास पहुंचा।

    दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस ने ईडी की पूरी कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताते हुए सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। पार्टी का कहना है कि जांच एजेंसी विपक्षी दलों को निशाना बनाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है। फिलहाल ईडी 150 करोड़ रुपए से अधिक के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन और उससे जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच कर रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में कई और अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

  • नीरव मोदी की आखिरी कानूनी उम्मीद भी खत्म, यूरोपीय अदालत से झटका, भारत प्रत्यर्पण का रास्ता लगभग साफ

    नीरव मोदी की आखिरी कानूनी उम्मीद भी खत्म, यूरोपीय अदालत से झटका, भारत प्रत्यर्पण का रास्ता लगभग साफ


    नई दिल्ली।
    पंजाब नेशनल बैंक से जुड़े बहुचर्चित बैंक धोखाधड़ी मामले के मुख्य आरोपी और भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी के भारत प्रत्यर्पण का रास्ता अब लगभग साफ माना जा रहा है। यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स से भी राहत नहीं मिलने के बाद उसके पास उपलब्ध सभी प्रमुख कानूनी विकल्प समाप्त हो चुके हैं। अब मामला मुख्य रूप से ब्रिटेन की प्रशासनिक प्रक्रिया पर निर्भर है, जिसके पूरा होने के बाद उसे भारत लाए जाने की दिशा में अगला कदम उठाया जा सकता है।

    जानकारी के अनुसार नीरव मोदी ने ब्रिटेन की अदालतों से राहत नहीं मिलने के बाद अप्रैल 2026 में यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स का दरवाजा खटखटाया था। उसने अपने प्रत्यर्पण को रोकने की मांग करते हुए याचिका दायर की थी। हालांकि अदालत ने उसे कोई राहत नहीं दी, जिससे उसके प्रत्यर्पण की राह में मौजूद अंतिम कानूनी बाधा भी समाप्त हो गई है। अब ब्रिटेन की संबंधित एजेंसियां प्रत्यर्पण की औपचारिक प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकती हैं।

    इससे पहले ब्रिटेन की हाई कोर्ट ने भी नीरव मोदी की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उसने प्रत्यर्पण आदेश को चुनौती देने की अनुमति मांगी थी। अदालत ने माना था कि भारत की ओर से जेल की सुरक्षा, कैद की परिस्थितियों और कानूनी अधिकारों को लेकर दिए गए आश्वासन पर्याप्त हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि इस मामले में ऐसे असाधारण हालात नहीं हैं, जिनके आधार पर प्रत्यर्पण रोका जाए।

    नीरव मोदी ने अपनी याचिकाओं में यह तर्क दिया था कि भारत लौटने पर उसे प्रताड़ना और अनुचित व्यवहार का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि जांच एजेंसियों और भारतीय पक्ष ने इन दावों का विरोध करते हुए अदालत में विस्तृत तथ्य और सुरक्षा संबंधी आश्वासन प्रस्तुत किए। इन्हीं आधारों पर ब्रिटेन की अदालतों ने उसके तर्कों को स्वीकार नहीं किया और प्रत्यर्पण प्रक्रिया को वैध माना।

    यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स में दायर याचिका की सुनवाई गोपनीय रही। अदालत ने प्रक्रिया के दौरान मामले की जानकारी सार्वजनिक नहीं की थी। अब वहां से भी राहत नहीं मिलने के बाद राजनयिक स्तर पर यह माना जा रहा है कि कानूनी दृष्टि से प्रत्यर्पण के खिलाफ कोई बड़ा अवरोध शेष नहीं बचा है। इसके बाद संबंधित प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी होने पर नीरव मोदी को भारत भेजने की प्रक्रिया तेज हो सकती है।

    नीरव मोदी मार्च 2019 से लंदन की वैंड्सवर्थ जेल में बंद है। उसके खिलाफ पंजाब नेशनल बैंक से जुड़े हजारों करोड़ रुपये के कथित बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में जांच चल रही है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो और प्रवर्तन निदेशालय लंबे समय से उसके प्रत्यर्पण की कोशिश कर रहे हैं ताकि भारत में उसके खिलाफ लंबित मामलों की सुनवाई आगे बढ़ाई जा सके।

    ब्रिटेन की अदालतों में नीरव मोदी ने अपने पक्ष में कई कानूनी दलीलें दी थीं। इनमें भारत की जेलों की स्थिति, मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दे और पूर्व के कुछ मामलों का हवाला भी शामिल था। लेकिन अदालत ने प्रत्येक स्तर पर उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद उसके तर्कों को पर्याप्त आधार नहीं माना। अब माना जा रहा है कि यदि प्रशासनिक प्रक्रिया तय समय पर पूरी होती है तो नीरव मोदी का भारत प्रत्यर्पण जल्द संभव हो सकता है, जिससे देश के सबसे चर्चित आर्थिक अपराध मामलों में कानूनी कार्रवाई को नई गति मिल सकती है।

  • कथित बैंक लोन धोखाधड़ी मामले में ईडी का शिकंजा, एडीएजी के पूर्व शीर्ष अधिकारियों पर कार्रवाई

    कथित बैंक लोन धोखाधड़ी मामले में ईडी का शिकंजा, एडीएजी के पूर्व शीर्ष अधिकारियों पर कार्रवाई

    नई दिल्ली । प्रवर्तन निदेशालय द्वारा कथित बैंक ऋण धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में रिलायंस अनिल अंबानी समूह के दो पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों की गिरफ्तारी के बाद कारोबारी और वित्तीय क्षेत्र में हलचल बढ़ गई है। जांच एजेंसी ने मामले में आगे की कार्रवाई करते हुए दोनों पूर्व अधिकारियों को हिरासत में लिया है और उनकी भूमिका की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।

    जांच के दायरे में आए दोनों अधिकारी समूह की विभिन्न कंपनियों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई एक कथित ऋण धोखाधड़ी मामले से जुड़ी जांच के आधार पर की गई है, जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र के एक प्रमुख बैंक को वित्तीय नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए गए हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि ऋण वितरण और उसके उपयोग की प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता हुई थी या नहीं।

    मामले से जुड़े सूत्रों का कहना है कि संबंधित कंपनियों को बैंकिंग कंसोर्टियम की ओर से बड़ी वित्तीय सहायता प्रदान की गई थी। बाद में ऋण वापसी और धन के उपयोग को लेकर सवाल खड़े हुए, जिसके बाद जांच एजेंसियों ने मामला दर्ज कर विस्तृत पड़ताल शुरू की। इसी जांच के क्रम में संबंधित पूर्व अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा की जा रही है।

    गिरफ्तारी के बाद रिलायंस समूह की ओर से जारी प्रतिक्रिया में कहा गया कि दोनों व्यक्ति अब कंपनी या समूह की किसी भी इकाई से जुड़े नहीं हैं। कंपनी के अनुसार, एक अधिकारी ने वर्ष 2025 में समूह छोड़ा था, जबकि दूसरे अधिकारी कई वर्ष पहले ही अपने पदों से अलग हो चुके थे। समूह ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान प्रबंधन का इन व्यक्तियों की व्यक्तिगत कानूनी स्थिति से कोई संबंध नहीं है।

    इस मामले से पहले भी समूह की कुछ पूर्व इकाइयों से जुड़े वित्तीय मामलों की जांच विभिन्न एजेंसियों द्वारा की जा चुकी है। हाल के महीनों में बैंक ऋणों और वित्तीय लेन-देन से संबंधित कई मामलों में जांच तेज हुई है, जिससे कॉर्पोरेट क्षेत्र में जवाबदेही और अनुपालन को लेकर चर्चा बढ़ी है।

    इसी बीच एक अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम में राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण ने उद्योगपति अनिल अंबानी के खिलाफ व्यक्तिगत दिवाला समाधान प्रक्रिया शुरू करने की अनुमति दी है। यह मामला कुछ कंपनियों को दिए गए ऋणों के लिए प्रदान की गई व्यक्तिगत गारंटी से जुड़ा बताया जा रहा है। इस फैसले के बाद कानूनी और वित्तीय हलकों में इसकी व्यापक चर्चा हो रही है।

    अनिल अंबानी की ओर से जारी प्रतिक्रिया में कहा गया है कि आदेश की विस्तृत प्रति मिलने के बाद कानूनी विशेषज्ञों से सलाह लेकर आगे की रणनीति तय की जाएगी। साथ ही संबंधित मंचों पर उपलब्ध कानूनी विकल्पों का उपयोग करते हुए फैसले को चुनौती देने की संभावना भी जताई गई है।

    वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल एक कंपनी या व्यक्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता, कॉर्पोरेट गवर्नेंस और ऋण प्रबंधन से जुड़े व्यापक मुद्दों को भी सामने लाता है। आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों और न्यायिक संस्थाओं की कार्रवाई पर बाजार और निवेशकों की नजर बनी रहेगी।

  • दिल्ली, यूपी और पंजाब में ईडी की ताबड़तोड़ कार्रवाई, संजीव अरोड़ा से जुड़े परिसरों की तलाशी से बढ़ी सियासी हलचल

    दिल्ली, यूपी और पंजाब में ईडी की ताबड़तोड़ कार्रवाई, संजीव अरोड़ा से जुड़े परिसरों की तलाशी से बढ़ी सियासी हलचल

    नई दिल्ली । कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत प्रवर्तन निदेशालय ने आम आदमी पार्टी के नेता संजीव अरोड़ा से जुड़े विभिन्न ठिकानों पर व्यापक तलाशी अभियान चलाया है। मंगलवार सुबह शुरू हुई इस कार्रवाई के दौरान पंजाब, उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में स्थित कुल छह परिसरों को जांच के दायरे में लिया गया। एजेंसी की यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत जारी जांच का हिस्सा बताई जा रही है।

    सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी की टीमों ने पंजाब के लुधियाना और जालंधर, उत्तर प्रदेश के बरेली तथा दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के कई स्थानों पर एक साथ सर्च ऑपरेशन शुरू किया। जिन परिसरों की तलाशी ली जा रही है उनमें आवासीय संपत्तियों के साथ-साथ व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी शामिल हैं। अधिकारियों ने दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा की जांच की प्रक्रिया शुरू की है ताकि मामले से जुड़े तथ्यों की पुष्टि की जा सके।

    जांच का केंद्र कथित तौर पर हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड से जुड़े वित्तीय लेन-देन बताए जा रहे हैं। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि विभिन्न कारोबारी गतिविधियों और वित्तीय लेन-देन में किसी प्रकार की अनियमितता या अवैध धन के उपयोग के संकेत मौजूद हैं या नहीं। इसी उद्देश्य से इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, बैंकिंग दस्तावेजों और अन्य कारोबारी अभिलेखों की भी पड़ताल की जा रही है।

    दिल्ली और नोएडा क्षेत्र में भी जांच एजेंसी की टीमें सक्रिय रहीं। यहां कई स्थानों पर दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की गई। हालांकि समाचार लिखे जाने तक प्रवर्तन निदेशालय की ओर से छापेमारी को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था। ऐसे में जांच के दायरे, बरामद सामग्री अथवा आगे की कार्रवाई को लेकर एजेंसी की ओर से औपचारिक जानकारी का इंतजार किया जा रहा है।

    इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि पंजाब में व्यापारियों को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने व्यापारिक समुदाय से घबराने की आवश्यकता न होने की बात कही और भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार उनके साथ खड़ी है। इस बयान के बाद मामले को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है।

    संजीव अरोड़ा पहले भी केंद्रीय एजेंसियों की जांच के दायरे में आ चुके हैं। पिछले महीने उनके चंडीगढ़ स्थित आधिकारिक आवास पर लंबी तलाशी कार्रवाई के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। उस समय वह पंजाब सरकार में विद्युत, उद्योग और वाणिज्य विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

    अरोड़ा की गिरफ्तारी के बाद राज्य सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए उनके विभागों का पुनर्वितरण कर अन्य मंत्रियों को जिम्मेदारी सौंप दी थी। अब ताजा छापेमारी ने एक बार फिर इस मामले को राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चाओं के केंद्र में ला दिया है।

    फिलहाल जांच एजेंसी विभिन्न दस्तावेजों और रिकॉर्ड का विश्लेषण कर रही है। आने वाले दिनों में जांच से जुड़े नए तथ्य सामने आने की संभावना है। मामले में आगे की कार्रवाई और एजेंसी की आधिकारिक रिपोर्ट पर राजनीतिक दलों, कारोबारी जगत और आम जनता की नजर बनी हुई है।

  • मनी लॉन्ड्रिंग मामला सामने आया पूर्व अधिकारी जगदीश सरवटे कोर्ट में पेश जांच जारी

    मनी लॉन्ड्रिंग मामला सामने आया पूर्व अधिकारी जगदीश सरवटे कोर्ट में पेश जांच जारी


    जबलपुर। जबलपुर में आदिम जाति कल्याण विभाग के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर जगदीश प्रसाद सरवटे अब कानूनी विवाद में घिर गए हैं। पीएमएलए विशेष न्यायालय में उनके खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की चार्जशीट दाखिल की है। ईडी भोपाल जोनल ऑफिस ने अदालत में अभियोजन की शिकायत पेश की और अदालत के आदेश पर आरोपी खुद अदालत में पेश हुए।

    सरवटे पर आरोप है कि उन्होंने अपनी आय से अधिक संपत्ति अर्जित की और अवैध कमाई को सफेद करने का प्रयास किया। जांच में प्रदेश के भोपाल मंडला उमरिया और सिवनी जिलों में कुल 11.81 करोड़ की संपत्ति चिन्हित की गई। फरवरी 2026 में अदालत के आदेश पर इन संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया गया। मामला अभी जांचाधीन है और कानूनी प्रक्रिया जारी है।

    मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में आरोपी द्वारा अवैध और वैध स्रोतों से संपत्ति अर्जित करना और उसे सफेद करना गंभीर अपराध माना जाता है। ईडी की यह कार्रवाई स्पष्ट संदेश देती है कि सरकारी अधिकारियों के वित्तीय लेनदेन की निगरानी और जवाबदेही बेहद आवश्यक है।

    पूर्व अधिकारी के खिलाफ यह मामला प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही की अहमियत को उजागर करता है। अधिकारियों की संपत्ति की जांच और कुर्की यह संकेत देती है कि कानून के पालन में किसी को भी छूट नहीं दी जाएगी। अदालत में मामले की सुनवाई लगातार जारी है और मीडिया और आम जनता की नजरें इस पर टिकी हैं।

    जगदीश सरवटे ने चार्जशीट दाखिल होने के बाद अदालत में पेश होकर कानूनी प्रक्रिया का पालन किया। अब पीएमएलए कोर्ट में सुनवाई जारी है और अदालत से निर्णय आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आरोप सही पाए जाते हैं या नहीं। फिलहाल संपत्ति अस्थायी रूप से कुर्क है और जांच पूरी होने तक आगे की कार्रवाई जारी रहेगी।

    मनी लॉन्ड्रिंग के इस मामले से यह साफ हो गया है कि वित्तीय पारदर्शिता और कानून का पालन हर सरकारी अधिकारी के लिए अनिवार्य है। ईडी की कार्रवाई यह संदेश देती है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे और कोई भी अधिकारी कानून के दायरे से बाहर नहीं है।

  • ग्लैमर से सलाखों तक: रान्या राव के खिलाफ ED की 100 पन्नों की चार्जशीट, क्या तरुण और साहिल के साथ मिलकर रची थी तस्करी की साजिश?

    ग्लैमर से सलाखों तक: रान्या राव के खिलाफ ED की 100 पन्नों की चार्जशीट, क्या तरुण और साहिल के साथ मिलकर रची थी तस्करी की साजिश?


    नई दिल्ली। मनोरंजन जगत की चकाचौंध से निकलकर अपराध की अंधेरी गलियों तक का सफर पूर्व एक्ट्रेस और मॉडल हर्षवर्दिनी रान्या उर्फ रान्या राव के लिए अब कानूनी मुसीबत बन गया है। प्रवर्तन निदेशालय ED ने 102.55 करोड़ रुपये के हाई-प्रोफाइल सोना तस्करी मामले में रान्या राव और उनके सहयोगियों के खिलाफ औपचारिक रूप से चार्जशीट दाखिल कर दी है। बेंगलुरु की विशेष पीएमएलए PMLA अदालत में दायर इस शिकायत ने उस बड़े मनी लॉन्ड्रिंग सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है, जिसने मार्च 2024 से मार्च 2025 के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था को बड़े पैमाने पर चूना लगाया। जांच में रान्या के साथ तरुण कोंडुरु और साहिल सकारिया जैन जैसे नामों का भी उल्लेख है, जो इस अवैध सोने के व्यापार और धन शोधन Money Laundering रैकेट की मुख्य कड़ियाँ बताए जा रहे हैं।

    इस पूरे मामले की जड़ें 3 मार्च, 2025 को केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुई एक बड़ी कार्रवाई से जुड़ी हैं। उस दिन डीआरआई DRI ने रान्या राव के पास से विदेशी मूल का लगभग 14.213 किलोग्राम सोना जब्त किया था, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 12.56 करोड़ रुपये आंकी गई थी। लेकिन यह तो महज एक शुरुआत थी। इसके बाद जब जांच का दायरा बढ़ा और संबंधित ठिकानों पर छापेमारी की गई, तो जांच एजेंसियां भी दंग रह गईं। तलाशी के दौरान 2.06 करोड़ रुपये के सोने के जेवर और 2.67 करोड़ रुपये की बेहिसाब भारतीय नकदी बरामद हुई। इस जब्ती ने स्पष्ट कर दिया कि यह मामला केवल एक बार की तस्करी का नहीं, बल्कि एक सुनियोजित संगठित अपराध का हिस्सा है।

    ED की विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि इस सिंडिकेट ने महज एक साल के भीतर मार्च 2024 से मार्च 2025 तक लगभग 127.287 किलोग्राम सोने की भारत में तस्करी की। इस तस्करी किए गए सोने की कुल वैल्यू 102.55 करोड़ रुपये से अधिक है। सीबीआई CBI द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज एफआईआर को आधार बनाकर ED ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट की धारा 3 और 4 के तहत अपनी कार्यवाही तेज की है। डीआरआई पहले ही सीमा शुल्क अधिनियम Customs Act की धारा 135 के तहत शिकायत दर्ज कर चुका है। अब चार्जशीट दाखिल होने के बाद रान्या राव और उनके साथियों की मुश्किलें बढ़ना तय है, क्योंकि एजेंसियां अब उस ‘ब्लैक मनी’ के रूट को ट्रैक कर रही हैं जो इस सोने की तस्करी से पैदा हुआ था।

  • इंदौर में ED की बड़ी कार्रवाई नगर निगम के ARO राजेश परमार की 1.06 करोड़ की संपत्तियां कुर्क आय से 175 प्रतिशत अधिक संपत्ति का खुलासा

    इंदौर में ED की बड़ी कार्रवाई नगर निगम के ARO राजेश परमार की 1.06 करोड़ की संपत्तियां कुर्क आय से 175 प्रतिशत अधिक संपत्ति का खुलासा


    मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई की है। इंदौर नगर निगम के सहायक राजस्व अधिकारी राजेश परमार अब केंद्रीय जांच एजेंसी के शिकंजे में हैं। ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए परमार और उनके परिवार के नाम दर्ज 1.06 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच कर दिया है। जांच में सामने आया है कि उनके पास मौजूद संपत्ति उनकी ज्ञात वैध आय से 175 प्रतिशत अधिक है।

    यह मामला मूल रूप से आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ भोपाल द्वारा दर्ज एफआईआर पर आधारित है। ईओडब्ल्यू ने राजेश परमार के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज किया था। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू की। जांच के दौरान साल 2007 से 2022 तक की आय और संपत्ति का विस्तृत आकलन किया गया।

    ईडी की जांच में सामने आया कि इस 15 वर्ष की अवधि में राजेश परमार ने करीब 1.66 करोड़ रुपये की संपत्तियां अर्जित कीं। जब इन संपत्तियों की तुलना उनकी आधिकारिक सैलरी और अन्य वैध आय स्रोतों से की गई तो यह अंतर चौंकाने वाला निकला। एजेंसी के अनुसार यह संपत्ति उनकी ज्ञात आय से लगभग 175 प्रतिशत अधिक पाई गई। जांच एजेंसी ने अनुमान लगाया है कि अपराध से अर्जित संदिग्ध आय लगभग 1.21 करोड़ रुपये हो सकती है।

    अटैच की गई संपत्तियों में मकान प्लॉट और जमीन शामिल हैं जो राजेश परमार और उनके परिजनों के नाम दर्ज हैं। इन संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया गया है ताकि जांच के दौरान इनका हस्तांतरण या विक्रय न किया जा सके। ईडी का कहना है कि आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत इन संपत्तियों को स्थायी रूप से जब्त करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।

    जांच में यह भी सामने आया कि कथित रूप से अवैध तरीके से अर्जित नकदी को सीधे निवेश करने के बजाय पहले बैंक खातों के माध्यम से घुमाया गया। ईडी के अनुसार बड़ी मात्रा में नकद राशि को स्वयं और परिवार के सदस्यों के खातों में जमा कराया गया। इसके बाद बैंक ट्रांसफर के जरिए इन्हीं पैसों से अचल संपत्तियां खरीदी गईं। एजेंसी का दावा है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य धन के वास्तविक स्रोत को छिपाना और उसे वैध कमाई के रूप में दिखाना था।

    प्रवर्तन निदेशालय की इस कार्रवाई को इंदौर में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी पहल माना जा रहा है। फिलहाल मामले में आगे की जांच जारी है और संबंधित दस्तावेजों तथा वित्तीय लेनदेन की पड़ताल की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद एजेंसी द्वारा अभियोजन की कार्रवाई भी की जा सकती है।