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  • काले बादलों और बारिश से सागर में बढ़ी ठंडक सीजन में अब तक 36.7 इंच बारिश सामान्य कोटे से 12 इंच दूर

    काले बादलों और बारिश से सागर में बढ़ी ठंडक सीजन में अब तक 36.7 इंच बारिश सामान्य कोटे से 12 इंच दूर


    सागर। सागर जिले में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। पिछले 24 घंटे से जिले के कई इलाकों में रिमझिम बारिश का दौर जारी है। शनिवार सुबह से आसमान में काले और घने बादल छाए रहे और रुक रुककर बारिश होती रही। लगातार हो रही बारिश के कारण वातावरण में ठंडक बढ़ गई है। दिन और रात दोनों के तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। अधिकतम तापमान करीब 5 डिग्री तक नीचे आया है जबकि न्यूनतम तापमान में भी करीब 3 डिग्री की गिरावट दर्ज हुई है।

    फिलहाल जिले में अधिकतम तापमान करीब 25 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच गया है। बारिश के चलते मौसम सुहावना बना हुआ है। सुबह से बादल छाए रहने के कारण धूप का असर भी कम रहा। कई इलाकों में रुक रुककर बारिश होती रही जिससे सड़कों और खुले इलाकों में भी नमी बनी रही।

    मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण छत्तीसगढ़ में बना डिप्रेशन सागर जिले से दक्षिण पूर्व दिशा में सक्रिय है और उत्तर उत्तर पश्चिम की ओर आगे बढ़ रहा है। इसके अगले करीब 12 घंटे में कमजोर होकर निम्न दबाव क्षेत्र में बदलने की संभावना जताई गई है। हालांकि सिस्टम कमजोर होने के बाद भी इसकी नमी का असर मध्यप्रदेश में बना रह सकता है। यही वजह है कि शनिवार को भी जिले में बादल छाए रहने और दोपहर के बाद कुछ स्थानों पर गरज चमक के साथ बारिश होने की संभावना है।

    मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक 27 सितंबर से सिस्टम के कमजोर होने के बाद मौसम में धीरे धीरे सुधार आ सकता है। इसके साथ ही बारिश का दौर भी कम होने के आसार हैं। हालांकि स्थानीय स्तर पर नमी बनी रहने के कारण कुछ इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है।

    पिछले 24 घंटे के दौरान सागर जिले में औसतन 9.8 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई है। सागर शहर में 8.8 मिलीमीटर बारिश हुई। जैसीनगर और राहतगढ़ में 13 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। खुरई में 11 मिलीमीटर और मालथौन में 8 मिलीमीटर बारिश हुई। बंडा में 9 मिलीमीटर जबकि शाहगढ़ में सबसे अधिक 14 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। गढ़ाकोटा और केसली में भी 11 11 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई।

    बारिश के बावजूद जिले में इस मानसून सीजन की कुल औसत बारिश सामान्य आंकड़े से अभी पीछे है। अब तक सागर जिले में 36.7 इंच औसत बारिश दर्ज की जा चुकी है जबकि जिले की सामान्य बारिश 48.4 इंच मानी जाती है। सामान्य बारिश का आंकड़ा पूरा करने के लिए अभी करीब 12 इंच औसत बारिश की जरूरत है।

    पिछले साल 26 सितंबर तक जिले में 44.3 इंच औसत बारिश दर्ज हो चुकी थी। इस लिहाज से इस वर्ष अब तक बारिश का आंकड़ा पिछले साल की तुलना में करीब 17.09 प्रतिशत कम है। आने वाले दिनों में मौसम का रुख और बारिश की स्थिति यह तय करेगी कि जिले का बारिश का आंकड़ा सामान्य कोटे के कितने करीब पहुंचता है।

  • यूपी में बारिश से खराब सड़कों पर सीएम योगी सख्त, बोले- तत्काल मोटरेबल बनाएं, बरसात बाद कराएं नवीनीकरण

    यूपी में बारिश से खराब सड़कों पर सीएम योगी सख्त, बोले- तत्काल मोटरेबल बनाएं, बरसात बाद कराएं नवीनीकरण

    लखनऊ। बारिश और बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़कों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि बरसात अभी जारी है, इसलिए खराब सड़कों की फिलहाल मरम्मत कर उन्हें आवागमन के योग्य बनाया जाए। बारिश का मौसम खत्म होने के बाद जरूरत के अनुसार इनका स्थायी नवीनीकरण कराया जाए।

    शुक्रवार को लोक निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी पर्व-त्योहारों के दौरान बड़ी संख्या में लोगों का आवागमन होगा। ऐसे में प्रमुख मार्गों पर लोगों को परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने बारिश से नए क्षतिग्रस्त मार्गों का लगातार सर्वे कराने और पर्वों से पहले जरूरी मरम्मत व नवीनीकरण पूरा करने के निर्देश दिए।

    681 प्रमुख मार्गों पर विशेष फोकस
    आगामी पर्वों को देखते हुए प्रदेश में 681 महत्वपूर्ण मार्ग चिन्हित किए गए हैं। इनमें गणेश चतुर्थी, विश्वकर्मा पूजा, नवरात्रि, दीपावली, छठ पूजा और कार्तिक पूर्णिमा के दौरान अधिक आवागमन वाले मार्ग शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने इन सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर गड्ढामुक्त और बेहतर स्थिति में रखने के निर्देश दिए।

    उन्होंने कहा कि गड्ढामुक्ति अभियान केवल पैचवर्क तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जहां तत्काल मरम्मत की जरूरत है, वहां पहले सड़क को आवागमन योग्य बनाया जाए और बरसात खत्म होने के बाद उसकी स्थिति के अनुसार स्थायी मरम्मत या नवीनीकरण कराया जाए।

    4.36 लाख किमी सड़कों की समीक्षा
    बैठक में बताया गया कि प्रदेश में नौ विभागों के अधीन करीब 4.36 लाख किलोमीटर मार्ग हैं। मौजूदा गड्ढामुक्ति अभियान के तहत करीब 50 हजार किलोमीटर सड़कों को बेहतर करने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें से अब तक करीब 5,751 किलोमीटर मार्गों पर काम पूरा हो चुका है।

    क्षतिग्रस्त सड़कों के सर्वे के बाद विभागवार लक्ष्य अंतिम रूप से तय किए जाएंगे। अधिकारियों ने बताया कि अतिवृष्टि के अलावा एक्सप्रेसवे, राष्ट्रीय राजमार्ग और रेलवे की निर्माणाधीन परियोजनाओं के चलते भारी वाहनों की आवाजाही से भी कई सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। इनका विभागवार सर्वे कराया जा रहा है।

    स्कूल-अस्पताल और बाजारों की सड़कें पहले सुधरें
    मुख्यमंत्री ने शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों, मुख्य बाजारों, सरकारी कार्यालयों और अधिक जन आवागमन वाले अन्य स्थानों की सड़कों को प्राथमिकता पर सुधारने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन स्थानों पर मरम्मत कार्य तत्काल शुरू कराया जाए और सड़क को बिना देरी आवागमन योग्य बनाया जाए। साथ ही काम में तेजी के साथ गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।

    30 हजार किमी सड़कों के नवीनीकरण का लक्ष्य
    नवीनीकरण और विशेष मरम्मत के कार्यों की भी समीक्षा की गई। विभाग के अनुसार करीब 30 हजार किलोमीटर सड़कों के नवीनीकरण और करीब 5 हजार किलोमीटर सड़कों की विशेष मरम्मत का लक्ष्य रखा गया है। अब तक नवीनीकरण के तहत करीब 14 हजार किलोमीटर और विशेष मरम्मत में करीब 700 किलोमीटर की प्रगति बताई गई है।

    कई विभागों की कार्ययोजना की समीक्षा
    मुख्यमंत्री ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अधिकारियों से भी कार्ययोजना की जानकारी ली। इसके अलावा मंडी परिषद, पंचायती राज, सिंचाई, ग्राम्य विकास, नगर विकास, आवास एवं शहरी नियोजन तथा अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग की कार्ययोजनाओं की समीक्षा की गई। उन्होंने सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए।

    बैठक में जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’, पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर, राज्य मंत्री लोक निर्माण विभाग ब्रजेश सिंह, राज्य मंत्री औद्योगिक विकास जसवंत सिंह सैनी, राज्य मंत्री जल शक्ति रामकेश निषाद और राज्य मंत्री ग्राम्य विकास विजय लक्ष्मी गौतम मौजूद रहे।

  • यूपी में सामान्य से ज्यादा बारिश, अगस्त ने पलटा मानसून का रुख, चित्रकूट में सबसे ज्‍यादा बरसा पानी

    यूपी में सामान्य से ज्यादा बारिश, अगस्त ने पलटा मानसून का रुख, चित्रकूट में सबसे ज्‍यादा बरसा पानी


    लखनऊ। मानसून की शुरुआत में बारिश की कमी से चिंतित उत्तर प्रदेश में अब तस्वीर बदल गई है। अलनीनो के प्रभाव के चलते कमजोर मानसून की आशंका जताई गई थी, लेकिन अगस्त में सक्रिय रहे कई मौसमी सिस्टम ने बारिश की कमी पूरी कर दी। प्रदेश में अब मानसूनी बारिश सामान्य औसत से ऊपर पहुंच गई है।

    एक जून से 8 सितंबर तक 100.3% बारिश
    उत्तर प्रदेश में एक जून से 8 सितंबर तक 649.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश का आंकड़ा 647.3 मिलीमीटर है। इस तरह प्रदेश में अब तक सामान्य की 100.3 प्रतिशत बारिश हो चुकी है। खास बात यह है कि सितंबर का आधे से ज्यादा महीना अभी बाकी है।

    कमजोर मानसून का अनुमान, अगस्त में बदली तस्वीर
    मौसम विभाग ने अलनीनो की सक्रियता को देखते हुए मानसून के कमजोर रहने का अनुमान जताया था। जून से सितंबर के दौरान देश में दीर्घकालिक औसत की करीब 90 प्रतिशत बारिश होने का पूर्वानुमान था। मानसून की शुरुआत में जून-जुलाई में बारिश अपेक्षाकृत कम भी रही, लेकिन अगस्त में लगातार सक्रिय हुए कम दबाव के क्षेत्रों और अन्य मानसूनी सिस्टम ने पूरी स्थिति बदल दी। प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश के दौर आए और बारिश की कमी तेजी से पूरी हुई।

    अगस्त में सामान्य से 24% ज्यादा बारिश
    जून-जुलाई की कम बारिश के बाद अगस्त में प्रदेश में 291.3 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश 235.5 मिलीमीटर होती है। यानी अगस्त में सामान्य से 24 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई। यह अगस्त 2018 के बाद सबसे अधिक बारिश वाले अगस्त में दूसरे स्थान पर रहा। अगस्त 2018 में प्रदेश में 293.1 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई थी।

    प्रदेश का औसत सामान्य, लेकिन जिलों में तस्वीर अलग
    प्रदेश का औसत बारिश का आंकड़ा भले ही सामान्य से ऊपर पहुंच गया हो, लेकिन जिलों में बारिश का वितरण एक जैसा नहीं रहा। कहीं बारिश ने सामान्य आंकड़े को काफी पीछे छोड़ दिया तो कुछ जिले अब भी कमी से जूझ रहे हैं।

    चित्रकूट सबसे आगे, कुशीनगर में सबसे ज्यादा कमी
    चित्रकूट में अब तक 1201.1 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो प्रदेश में सर्वाधिक है। इसके विपरीत कुशीनगर में सिर्फ 204.6 मिलीमीटर बारिश हुई है। यहां सामान्य के मुकाबले करीब 67 प्रतिशत बारिश की कमी बनी हुई है। मऊ में भी सामान्य से करीब 53 प्रतिशत कम बारिश हुई है।

    इस तरह प्रदेश में मानसून का औसत आंकड़ा सामान्य से ऊपर पहुंचने के बावजूद जिलों में बारिश की तस्वीर पूरी तरह एक जैसी नहीं है। यही वजह है कि एक ही प्रदेश में कहीं मानसून ने जमकर पानी बरसाया तो कहीं अब भी बारिश का इंतजार बना हुआ है।

  • यूपी में मानसून बना मुसीबत कहीं सड़क पर नाव तो कहीं छत पर अंतिम संस्कार, 25 अगस्त तक बारिश का अनुमान

    यूपी में मानसून बना मुसीबत कहीं सड़क पर नाव तो कहीं छत पर अंतिम संस्कार, 25 अगस्त तक बारिश का अनुमान

    उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही मानसूनी बारिश ने कई जिलों में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। गंगा और घाघरा समेत कई प्रमुख नदियां खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं और प्रदेश के 13 जिलों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं और कई गांवों का संपर्क आसपास के इलाकों से टूटने लगा है। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का पानी बाजार तक पहुंच गया है जिससे सड़कें जलमग्न हो गई हैं और लोगों को आवागमन के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। बाढ़ की स्थिति को देखते हुए गुप्त गोदावरी की दोनों गुफाओं को पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है।

    बहराइच में भी कई गांवों में पानी भर गया है। हालात का जायजा लेने पहुंचे मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने ट्रैक्टर के जरिए बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और ग्रामीणों से मुलाकात कर उन्हें प्रशासन की ओर से हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया। दूसरी ओर प्रयागराज में गंगा और यमुना का जलस्तर लगातार चिंता बढ़ा रहा है। नदी का पानी रिवर फ्रंट रोड तक पहुंच गया है और कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। गंगा का पानी लेटे हुए हनुमान मंदिर कॉरिडोर के आसपास भी पहुंच गया है।

    वाराणसी में भी गंगा का बढ़ता जलस्तर जनजीवन और धार्मिक गतिविधियों पर असर डाल रहा है। विश्वनाथ मंदिर का गंगा द्वार बंद करना पड़ा है। मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट के नियमित शवदाह स्थल पानी में डूब गए हैं। इसके चलते अंतिम संस्कार के लिए वैकल्पिक स्थानों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। हरिश्चंद्र घाट पर गलियों और सीढ़ियों के आसपास अंतिम संस्कार किया गया जबकि मणिकर्णिका घाट पर छत के हिस्से में यह प्रक्रिया करनी पड़ी। दशाश्वमेध घाट की प्रसिद्ध गंगा आरती भी छत से कराई गई। नमो घाट का बड़ा हिस्सा भी जलमग्न हो चुका है।

    प्रयागराज में पिछले कई दिनों से रुक-रुककर बारिश हो रही है। दारागंज करेली और सलोरी जैसे इलाकों में कई घरों में कई फीट तक पानी भरने की सूचना है। जलभराव और बिगड़ते हालात के कारण बड़ी संख्या में छात्रों को हॉस्टल खाली करना पड़ा है। कौशांबी और आसपास के जिलों में भी बारिश का असर देखने को मिला है। फर्रुखाबाद में करीब 30 गांव बाढ़ की चपेट में बताए जा रहे हैं और कई संपर्क मार्गों पर पानी बह रहा है। कुछ गांवों के टापू में बदल जाने के कारण प्रशासन ने राहत और बचाव के लिए नावों तथा मोटर बोट की व्यवस्था की है।

    राज्य के अलग-अलग हिस्सों में नदियों का जलस्तर लगातार निगरानी में है। घाघरा सरयू गंगा शारदा टोंस सोन और मंदाकिनी जैसी नदियां कई स्थानों पर खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं। पिछले 72 घंटों में बारिश से जुड़े हादसों में मकान गिरने के कारण छह लोगों की मौत की भी सूचना है। इनमें मिर्जापुर जौनपुर और अमेठी के मामले शामिल हैं।

    मौसम विभाग ने प्रदेश के बड़े हिस्से में बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है। हालांकि लखनऊ कानपुर और वाराणसी जैसे कई शहरों में फिलहाल मौसम अपेक्षाकृत साफ है लेकिन बादलों की आवाजाही बनी हुई है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम हवाओं के प्रभाव से उत्तर प्रदेश में बारिश का दौर जारी है और 25 अगस्त तक कई इलाकों में रुक-रुककर बारिश होने की संभावना बनी हुई है। ऐसे में नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए आने वाले दिन भी चुनौतीपूर्ण रह सकते हैं और प्रशासन को राहत एवं बचाव कार्यों को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है।

  • गंगा का रौद्र रूप और बारिश का कहर यूपी में बिगड़े हालात सड़कें जलमग्न घाट डूबे कई गांवों पर बाढ़ का खतरा

    गंगा का रौद्र रूप और बारिश का कहर यूपी में बिगड़े हालात सड़कें जलमग्न घाट डूबे कई गांवों पर बाढ़ का खतरा


    उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश में मानसून की सक्रियता ने कई जिलों में हालात बिगाड़ दिए हैं। लगातार हो रही बारिश के चलते नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है और कई इलाकों में सड़कें तथा घर पानी में डूब गए हैं। बिजनौर में गंगा का पानी स्टेट हाईवे तक पहुंच गया है। सड़क पर करीब दो फीट तक पानी बहने के कारण वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई है। हालात ऐसे बने कि लोगों को अपनी कार और बाइक ट्रैक्टर ट्रॉली की मदद से पानी पार करानी पड़ी। वहीं प्रयागराज में पिछले तीन दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश ने कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए हैं।

    प्रयागराज के करेली इलाके में बारिश का पानी लोगों के घरों के भीतर तक पहुंच गया है। कई मकानों में करीब दो फीट तक पानी भर गया है। पानी बढ़ने के कारण घरों में रखा बेड सोफा और दूसरे जरूरी सामान भी प्रभावित हुए हैं। कुछ परिवारों को मजबूरी में घर की पहली मंजिल या छत पर शरण लेनी पड़ी है। लगातार बारिश के कारण इलाके के लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है। वहीं रामबाग रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर भी बारिश का पानी जमा हो गया जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

    वाराणसी में भी गंगा का जलस्तर बढ़ने से घाटों पर हालात चुनौतीपूर्ण हो गए हैं। घाटों के किनारे बने कई मंदिरों में गंगा का पानी प्रवेश कर गया है। मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट के शवदाह स्थल भी जलमग्न हो गए हैं। ऐसे में अंतिम संस्कार के लिए घाट के ऊपरी हिस्से का इस्तेमाल किया जा रहा है। नमो घाट की सीढ़ियां भी पानी में डूब गई हैं। गंगा का पानी लगातार बढ़ने के कारण प्रशासन ने लोगों को नदी के किनारे जाने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की है। दशाश्वमेध घाट पर होने वाली प्रसिद्ध गंगा आरती भी अब घाट के ऊपरी हिस्से और छत पर कराई जा रही है।

    गोंडा में घाघरा नदी के उफान ने ग्रामीण इलाकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जिले के पांच गांव बाढ़ की चपेट में बताए जा रहे हैं और नदी खतरे के निशान के ऊपर बह रही है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में मवेशियों के लिए पहुंचाए गए सूखे भूसे को लेकर भी अफरा तफरी का माहौल देखने को मिला। भूसा लेने के लिए ग्रामीणों की भीड़ जुट गई और स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को मौके पर बुलाना पड़ा। बाद में पुलिस की मौजूदगी में भूसे का वितरण कराया गया ताकि सभी जरूरतमंद लोगों तक चारा पहुंच सके।

    लखनऊ में भी पिछले चार दिनों से बारिश का सिलसिला जारी है। बुधवार सुबह राजधानी के कुछ इलाकों में हल्की बारिश हुई। इसके अलावा बाराबंकी समेत कई जिलों में बूंदाबांदी दर्ज की गई। आगरा वाराणसी कानपुर समेत प्रदेश के 40 से अधिक शहरों में सुबह बादल छाए रहे हालांकि बाद में कुछ इलाकों में धूप निकल आई। इसके बावजूद मौसम विभाग ने प्रदेश में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना जताई है।

    मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। प्रयागराज गोंडा कौशांबी गाजीपुर और भदोही में 12वीं कक्षा तक के स्कूलों में छुट्टी घोषित की गई है। वहीं जौनपुर सोनभद्र और मिर्जापुर में आठवीं कक्षा तक के स्कूल बंद रखने का फैसला लिया गया है। प्रशासन लगातार जलभराव और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों पर नजर बनाए हुए है।

    लखनऊ के मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के मुताबिक हवा में कम दबाव का क्षेत्र बनने मानसून ट्रफ के उत्तर की ओर खिसकने और बंगाल की खाड़ी से बड़ी मात्रा में नमी आने के कारण मानसून सक्रिय हुआ है। उनके अनुसार 23 अगस्त तक मानसूनी गतिविधियों में तेजी बनी रह सकती है। बंगाल की खाड़ी में बन रहे कम दबाव वाले सिस्टम के प्रभाव से बारिश का सिलसिला आगे भी जारी रहने की संभावना है। 20 और 21 अगस्त को प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है।

    ऐसे में अगले कुछ दिन उत्तर प्रदेश के लिए बेहद अहम रहने वाले हैं। नदियों का बढ़ता जलस्तर बारिश और जलभराव पहले ही कई जिलों में लोगों की मुश्किलें बढ़ा चुका है। प्रशासन की ओर से लोगों को जलभराव वाले क्षेत्रों और नदियों के किनारे जाने से बचने की सलाह दी जा रही है। मौसम विभाग के अलर्ट के बीच लोगों की नजर अब आने वाले दिनों की बारिश पर टिकी है क्योंकि लगातार बारिश से हालात और गंभीर होने की आशंका बनी हुई है।

  • यूपी में बारिश का कहर! लखनऊ समेत 30 शहरों में झमाझम बारिश, 10 जिलों में स्कूल बंद; काशी के घाट-मंदिर डूबे

    यूपी में बारिश का कहर! लखनऊ समेत 30 शहरों में झमाझम बारिश, 10 जिलों में स्कूल बंद; काशी के घाट-मंदिर डूबे


    उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश में मानसून एक बार फिर पूरी तरह सक्रिय हो गया है। मंगलवार तड़के करीब 3 बजे से लखनऊ समेत प्रदेश के 30 से ज्यादा शहरों में रुक-रुककर बारिश का सिलसिला जारी है। कई इलाकों में सुबह से ही आसमान घने काले बादलों से ढका रहा और दिन निकलने के बावजूद अंधेरा छाया रहा। लगातार बारिश के कारण शहरों और कस्बों में जलभराव की स्थिति गंभीर होती जा रही है। कहीं सड़कें तालाब बन गई हैं तो कहीं पुलिस थाने और सरकारी अस्पताल तक पानी में घिर गए हैं। हालात को देखते हुए प्रदेश के करीब 10 जिलों में स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई है।

    संभल में तेज बारिश के बाद रोडवेज बस अड्डा पूरी तरह जलमग्न हो गया। सरकारी अस्पताल में भी बारिश का पानी घुस गया। प्रतापगढ़ के लालगंज इलाके में स्थिति और ज्यादा खराब नजर आई। यहां तहसील परिसर के साथ कोतवाली पुलिस स्टेशन प्राइमरी स्कूल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में करीब दो फीट तक पानी भर गया। पुलिस की गाड़ियों के पहिए तक पानी में डूब गए। निचले इलाकों में कई घरों के भीतर भी बारिश का पानी पहुंच गया है।

    भदोही और कौशांबी में भी भारी जलभराव देखने को मिला। कई प्रमुख सड़कों पर करीब एक फीट तक पानी जमा होने से लोगों को आवागमन में परेशानी हुई। प्रतापगढ़ में रातभर हुई बारिश के कारण मंदिरों और रिहायशी इलाकों में घुटनों तक पानी भरने की तस्वीरें सामने आई हैं। जलभराव के कारण कई स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित हुई और बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए छुट्टी कर दी गई।

    भारी बारिश की चेतावनी को देखते हुए प्रयागराज प्रतापगढ़ मिर्जापुर कौशांबी भदोही हरदोई अमेठी और जौनपुर समेत करीब 10 जिलों में स्कूल बंद रखने का फैसला किया गया है। मौसम विभाग ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में बारिश की संभावना जताई है। प्रशासन की ओर से लोगों को जलभराव वाले क्षेत्रों और नदियों के किनारे जाने से बचने की सलाह दी जा रही है।

    काशी में गंगा का बढ़ा जलस्तर

    बारिश के साथ गंगा और यमुना समेत उत्तर प्रदेश की कई नदियों का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है। वाराणसी में गंगा का पानी घाटों की सीढ़ियों से ऊपर पहुंच गया है। घाट किनारे बने 100 से ज्यादा छोटे मंदिर पानी से घिर गए हैं। मणिकर्णिका घाट पर स्थित रत्नेश्वर महादेव मंदिर और दशाश्वमेध घाट का ब्रह्मेश्वर महादेव मंदिर काफी हिस्से तक पानी में डूब गया है। कई जगह मंदिरों का केवल ऊपरी हिस्सा ही दिखाई दे रहा है।

    नमो घाट की सीढ़ियों तक भी गंगा का पानी पहुंच गया है। सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने बैरिकेडिंग कर दी है और लोगों से घाटों के किनारे नहीं जाने की अपील की गई है। दशाश्वमेध घाट पर होने वाली गंगा आरती अब छत के ऊपर कराई जा रही है।

    मणिकर्णिका घाट पर बदली अंतिम संस्कार की जगह

    गंगा का जलस्तर बढ़ने से मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट के शवदाह स्थलों तक भी पानी पहुंच गया है। इसके बाद अंतिम संस्कार के लिए ऊपरी सीढ़ियों वाले हिस्से का इस्तेमाल किया जा रहा है। घाटों पर मौजूद लोगों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है।

    कानपुर और उन्नाव में भी गंगा के किनारे बसे इलाकों में पानी भरने की स्थिति बनी हुई है। कई सौ घरों में पानी पहुंचने के कारण प्रभावित परिवारों को छतों पर रहने के लिए मजबूर होना पड़ा है। चित्रकूट में मंदाकिनी और बरदहा नदी का जलस्तर बढ़ने से रामघाट की कई सीढ़ियां पानी में डूब गई हैं।

    23 अगस्त तक सक्रिय रह सकता है मानसून

    लखनऊ के मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के मुताबिक हवा में कम दबाव का क्षेत्र बनने मानसून ट्रफ के उत्तर दिशा में खिसकने और बंगाल की खाड़ी से लगातार नमी आने के कारण मानसून सक्रिय हुआ है। 19 से 23 अगस्त के बीच प्रदेश में मानसूनी गतिविधियां और तेज होने की संभावना है। बंगाल की खाड़ी में बन रहे कम दबाव के सिस्टम का असर भी उत्तर प्रदेश के मौसम पर दिखाई दे सकता है। खास तौर पर 20 और 21 अगस्त को कई इलाकों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

    ऐसे में आने वाले दिनों में नदियों के जलस्तर में और बढ़ोतरी हो सकती है। प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। लोगों से अपील की गई है कि वे जलभराव वाले रास्तों से गुजरने से बचें और नदी तथा घाटों के आसपास जाने में विशेष सावधानी बरतें।